January 26, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर गांव में जश्न, नेशनल प्रतियोगिता चयन से बढ़ाया मान

डुन्डेरा (दुर्ग)।
ग्राम डुन्डेरा की होनहार बेटी खुशी ने क्षेत्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर न केवल अपने गांव बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चंद्राकर के विधायक प्रतिनिधि श्री गोविंद साहू के नेतृत्व में ग्रामवासियों द्वारा भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया।

बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में दिखाया दम

इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि गोविंद साहू ने कहा कि ग्राम डुन्डेरा की बेटी ने क्रिकेट के क्षेत्र में अपनी माना-बढ़त प्रतिभा का लोहा मनवाया है। खुशी ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में अपनी अलग पहचान बनाई है, जो समस्त ग्रामवासियों के लिए गर्व की बात है।

संघर्ष, मेहनत और सपनों की जीत

खुशी एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। उनके पिता ठेका श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद खुशी ने कठोर परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। वर्तमान में वे ग्राम डुन्डेरा में कक्षा 12वीं की छात्रा हैं।
गौरव का विषय यह है कि खुशी का चयन नेशनल खेल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। उनका सपना भविष्य में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से देश का प्रतिनिधित्व करना है।

खुली जीप में गांव भ्रमण, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत

खुशी की सफलता पर ग्राम डुन्डेरा में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने खुशी को खुली जीप में गांव भ्रमण कराया। जगह-जगह पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और तालियों की गूंज के साथ बेटी का अभिनंदन किया गया।

सैकड़ों ग्रामवासी बने गवाह

इस भव्य स्वागत कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि गोविंद साहू, दुर्गेश साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी, युवा खिलाड़ी, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने खुशी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए शुभकामनाएं दीं।

पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम में होगा भव्य आयोजन, झांकी-परेड और सम्मान समारोह होंगे आकर्षण

दुर्ग, ।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस का जिला स्तरीय मुख्य समारोह पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम, दुर्ग में गरिमामय एवं हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में आयोजित किया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम प्रातः 09.00 बजे से प्रारंभ होगा।

समारोह के सफल आयोजन हेतु कलेक्टर अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों को विभागवार दायित्व सौंपे गए। संपूर्ण कार्यक्रम के प्रभारी के रूप में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी अभिषेक अग्रवाल को नियुक्त किया गया है।

झांकी, परेड और गार्ड ऑफ ऑनर होंगे मुख्य आकर्षण

समारोह में विभिन्न विभागों द्वारा आकर्षक विभागीय झांकियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसका समन्वय मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बजरंग कुमार दुबे करेंगे।
परेड एवं गार्ड ऑफ ऑनर का आयोजन सुरक्षा एवं अनुशासन का प्रतीक होगा, जिसकी जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग, कमांडेंट होमगार्ड एवं कमांडेंट सीआईएसएफ भिलाई को सौंपी गई है।

मैदान, मंच और दर्शक व्यवस्थाएं सुनिश्चित

मैदान की तैयारी, अतिथियों एवं आमजन के लिए पृथक सेक्टर, बेरिकेटिंग, चबूतरा निर्माण एवं ध्वजदंड की व्यवस्था नगर निगम दुर्ग एवं लोक निर्माण विभाग द्वारा की जाएगी।
साफ-सफाई, पेयजल, मोबाइल टॉयलेट, वॉटरप्रूफ शामियाना, कुर्सियां एवं लाउडस्पीकर की व्यवस्था भी इन्हीं विभागों द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
बेरिकेटिंग हेतु बांस-बल्लियों की व्यवस्था वनमंडलाधिकारी करेंगे।

रोशनी, सजावट और विद्युत व्यवस्था

मंच की साज-सज्जा फूलों एवं गमलों से उद्यानिकी विभाग द्वारा की जाएगी।
निर्बाध विद्युत आपूर्ति एवं जनरेटर की व्यवस्था विद्युत विभाग एवं छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी द्वारा की जाएगी।
शासकीय भवनों, राष्ट्रीय स्मारकों और प्रमुख स्थलों को रोशनी से सजाया जाएगा

प्रशासनिक, सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल व्यवस्था

समारोह स्थल एवं प्रवेश द्वारों पर कार्यपालिक दंडाधिकारियों की तैनाती एडीएम दुर्ग द्वारा तथा सुरक्षा व्यवस्था हेतु पुलिस अधिकारियों की तैनाती पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाएगी।
अतिथियों के प्रवेश एवं बैठक व्यवस्था का दायित्व एसडीएम दुर्ग को दिया गया है।

सम्मान, उद्घोषणा और मीडिया प्रबंधन

समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसकी व्यवस्था सहायक आयुक्त आदिवासी विकास करेंगे तथा वितरण का दायित्व डिप्टी कलेक्टर हितेश पिस्दा को सौंपा गया है।
कार्यक्रम के संचालन के लिए शिक्षा, पर्यावरण एवं आदिवासी विकास विभाग से उद्घोषकों की नियुक्ति की गई है।
मुख्यमंत्री के संदेश वाचन की पुस्तिका, मीडिया प्रचार-प्रसार एवं वीडियोग्राफी की जिम्मेदारी जनसंपर्क विभाग एवं खनिज विभाग को दी गई है।

अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं

  • गुब्बारे छोड़ने की व्यवस्था : जिला उद्योग केंद्र

  • शील्ड व्यवस्था (झांकी व परेड विजेता) : आदिवासी विकास एवं शिक्षा विभाग

  • पार्किंग व्यवस्था : अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात

  • एंबुलेंस एवं प्राथमिक उपचार : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

  • अग्निशमन व्यवस्था : कमांडेंट होमगार्ड

  • देशभक्ति गीतों का प्रसारण एवं स्मारक सफाई : नगर निगम

  • पंचायत स्तरीय जय स्तंभों की सफाई : जनपद पंचायत सीईओ

हॉकी मैच भी होगा आयोजित

26 जनवरी को पुलिस ग्राउंड में कलेक्टर एकादश एवं नागरिक एकादश के बीच हॉकी मैच आयोजित किया जाएगा, जिसकी व्यवस्था नगर निगम दुर्ग द्वारा की जाएगी।

24 जनवरी को अंतिम रिहर्सल

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि 21 जनवरी तक सभी तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं तथा 24 जनवरी 2026 को प्रातः 09.00 बजे मुख्य समारोह की अंतिम रिहर्सल अनिवार्य रूप से कराई जाए।

बैठक में एडीएम, जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, नगर निगम आयुक्तगण, सभी एसडीएम एवं समस्त विभागों के जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।

यादव छात्रावास पचरीपारा में होगा सामाजिक समरसता और गीता जयंती का आयोजन

दुर्ग।
दुर्ग नगर यादव महासभा द्वारा 11 जनवरी 2026, रविवार को दोपहर 1.00 बजे से यादव छात्रावास, पचरीपारा, वार्ड क्रमांक-28, दुर्ग में यादव मिलन समारोह, युवक-युवती परिचय सम्मेलन एवं गीता जयंती का भव्य आयोजन किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में ये रहेंगे प्रमुख अतिथि

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय बघेल (सांसद, दुर्ग लोकसभा) करेंगे।
विशेष अतिथियों में ललित चंद्राकर (विधायक, दुर्ग ग्रामीण), अल्का बाघमार (महापौर, दुर्ग), दीपक ताराचंद साहू, शिवराज राउत, राजेश ताम्रकार, अजय यादव (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ कोसरिया यादव समाज), ममता ओमप्रकाश (पार्षद) एवं बबीता यादव (पार्षद) शामिल रहेंगे।

समापन समारोह सायं 4 बजे

कार्यक्रम का समापन समारोह सायं 4.00 बजे आयोजित होगा, जिसके मुख्य अतिथि देवेंद्र यादव (विधायक, भिलाई नगर) होंगे।
समारोह की अध्यक्षता बोधन यादव (अध्यक्ष, जिला कोसरिया समाज) करेंगे।
विशेष अतिथियों में अरुण बोरा (पूर्व विधायक, दुर्ग), राजेंद्र साहू, धीरज बाकलीवाल, मेघनाथ यादव (प्रांताध्यक्ष, छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन), मन्ना यादव एवं दुलौरिन बाई यादव उपस्थित रहेंगे।

तैयारियों को लेकर बैठक, जिम्मेदारियां सौंपी गईं

कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु समाज प्रमुखों की बैठक आयोजित कर आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई तथा सभी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। बैठक में अमर सिंह यादव (अध्यक्ष), छोटेलाल यादव (संरक्षक), रणछोर यादव (उपाध्यक्ष), दिनेश यादव (सचिव), द्वारिका प्रसाद यादव (कोषाध्यक्ष), मेघनाथ यादव, भानु प्रताप यादव (जिलाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ – दुर्ग) सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
महिला प्रकोष्ठ से गीता यादव (महिला अध्यक्ष) सहित अन्य सदस्य भी बैठक में शामिल हुए।

समाजजनों से सहभागिता की अपील

दुर्ग नगर यादव महासभा ने समाज के सभी सदस्यों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।

उक्त जानकारी भानु प्रताप यादव, प्रांताध्यक्ष छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन (अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ) एवं मीडिया प्रभारी द्वारा दी गई।

  शौर्यपथ व्यंगात्मक लेख / दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था। माहौल गंभीर होना चाहिए था—आंकड़े, योजनाएँ, भविष्य की दिशा। लेकिन 6 जनवरी 2026 को अचानक इतिहास ने ऐसा पलटा खाया कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भी शायद सेलुलर जेल से झांककर पूछ बैठे हों—“भाई, ये नया सिलेबस कब आया?”
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूरे आत्मविश्वास के साथ विधानसभा में ऐलान किया कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने “बहरी कांग्रेस की सरकार” को जगाने के लिए असेंबली में बम फेंका था।
इतिहास की किताबें हड़बड़ा गईं, अध्यापक चुपचाप पानी पीने लगे और गूगल सर्च ने एक साथ लाखों बार “Central Legislative Assembly 1929” सर्च होते देखा।
असल इतिहास थोड़ा जिद्दी किस्म का है। वह बताता है कि 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बम फेंका था—कांग्रेस सरकार तब न सत्ता में थी, न अस्तित्व में। लेकिन राजनीति में जब आत्मविश्वास ऊँचा हो, तो तथ्य अक्सर बौने लगने लगते हैं।
बयान आते ही सोशल मीडिया ने बिना बजट सत्र बुलाए ही आपात बैठक कर ली।
X (पूर्व ट्विटर) पर इतिहास “रीमिक्स मोड” में चला गया।
AAP नेताओं ने तंज कसते हुए कहा—“इतिहास अब OTT पर आ गया है, हर एपिसोड में नया प्लॉट।”
किसी ने मुख्यमंत्री को “दिल्ली की पप्पू CM” बताया, तो किसी ने पूछा—“मैडम, अगली बार 1857 की क्रांति भी Wi-Fi से लड़ी जाएगी क्या?”
ट्रोलर्स को याद आ गया कि यह वही मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने कभी AQI को तापमान समझ लिया था और दिल्ली की लंबाई 1483 किलोमीटर घोषित कर दी थी। जनता ने राहत की सांस ली—कम से कम दिल्ली अब तक अमेरिका से लंबी घोषित नहीं हुई।
मीम्स की ऐसी बाढ़ आई कि भगत सिंह की टोपी में Wi-Fi सिग्नल लग गए, असेंबली में डीजे बजने लगे और कैप्शन लिखा गया—
“बहरी सरकार थी, इसलिए बम फेंका गया।”

विपक्ष ने भी मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।
AAP ने इसे “इतिहास का अपमान” बताया, कांग्रेस ने कहा—“अब भगत सिंह भी कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे हैं।”
इतिहासकारों ने चुपचाप सिर पकड़ लिया—क्योंकि वे जानते थे, अब कोई भी किताब खोलने वाला नहीं।
बाद में मुख्यमंत्री ने वर्षांत संदेश में कहा कि कुछ लोग “AQI और AIQ” जैसे मुद्दों पर बहस करके सरकार का ध्यान भटका रहे हैं, जबकि वह गवर्नेंस पर फोकस कर रही हैं।
यह बयान सुनकर जनता ने तय कर लिया कि आने वाले समय में शायद इतिहास भी “वर्क फ्रॉम होम” करेगा।
कुल मिलाकर, दिल्ली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहाँ सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, बयान भी हाई लेवल के होते हैं।
और इतिहास?
वह अब किताबों में नहीं, सोशल मीडिया के मीम टेम्पलेट में सुरक्षित है।

   रायपुर/नई दिल्ली। वेदांता समूह के चेयरमैन एवं प्रख्यात उद्योगपति श्री अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनका निधन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ। इस दुखद घटना से न केवल अग्रवाल परिवार बल्कि उद्योग जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है।

परिजनों के अनुसार अग्निवेश पूरी तरह स्वस्थ थे और जीवन को लेकर उत्साह एवं सपनों से भरे हुए थे। उनके अचानक चले जाने से परिवार गहरे सदमे में है। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका प्रिय पुत्र उन्हें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया।

अग्निवेश अग्रवाल को एक सौम्य, संवेदनशील और सरल व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था। वे सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के प्रति भी सजग थे। उनके असामयिक निधन को एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

इस दुखद समाचार के बाद देश-विदेश से उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों द्वारा शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

शौर्यपथ लेख /

  डिजिटल मीडिया के दौर में पॉडकास्ट संवाद का एक सशक्त मंच बन चुके हैं, जहां जटिल सामाजिक विषयों पर खुलकर चर्चा होती है। लेकिन हाल ही में शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में शामिल हुईं लेखिका और मिथकशास्त्री सीमा आनंद के कुछ बयानों ने एक तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। यह विवाद केवल किसी एक वक्तव्य तक सीमित नहीं, बल्कि सहमति, नैतिकता, नाबालिगों की सुरक्षा और यौन शिक्षा की जिम्मेदारी जैसे गहरे सवालों को सामने लाता है।

विवाद की जड़: एक अनुभव, अनेक व्याख्याएं

पॉडकास्ट के दौरान सीमा आनंद ने एक घटना साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एक 15 वर्षीय लड़के ने उन्हें “अप्रोच” किया था। उन्होंने इस प्रसंग को सामान्य अनुभव के तौर पर रखा, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। कई लोगों ने इस बयान को ग्रूमिंग और नाबालिगों के प्रति असंवेदनशीलता से जोड़ते हुए सवाल उठाए कि क्या इस तरह की बातों को सार्वजनिक मंच पर कहना उचित है।

सहमति बनाम कानून: नैतिकता की कसौटी

इसी बातचीत में सीमा आनंद ने “ग्रुप सेक्स” जैसे विषयों पर भी अपनी राय रखी और कहा कि किसी भी क्रिया को तब तक “अच्छा” या “बुरा” नहीं कहा जाना चाहिए, जब तक वह आपसी सहमति (Mutual Consent) से हो रही हो। यहीं से विवाद ने कानूनी और नैतिक मोड़ ले लिया। आलोचकों का कहना है कि 15 वर्ष का नाबालिग कानूनन सहमति देने में सक्षम नहीं होता, ऐसे में सहमति का तर्क इस संदर्भ में न केवल अवैध है, बल्कि सामाजिक रूप से भी अस्वीकार्य है। इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि सहमति की अवधारणा उम्र, संदर्भ और शक्ति-संतुलन से अलग नहीं की जा सकती।

सीमा आनंद: लेखन, विचार और पहचान

सीमा आनंद लंदन स्थित एक जानी-मानी मिथकशास्त्री और कथावाचक हैं। वे स्वयं को “आनंद की संरक्षक” (Patron Saint of Pleasure) कहती हैं। उनकी चर्चित पुस्तकों में The Arts of Seduction और हालिया रिलीज Speak Easy: A Field Guide to Love, Longing and Intimacy शामिल हैं। वे अपने लेखन और वक्तव्यों में प्राचीन भारतीय ग्रंथों—विशेषकर कामसूत्र और अन्य कामुक साहित्य (Erotology)—का संदर्भ देती रही हैं।

प्राचीन ग्रंथों का संदर्भ और आधुनिक समाज

सीमा आनंद का तर्क है कि प्राचीन भारत में यौन शिक्षा और आनंद को जीवन का स्वाभाविक और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था, जिसे आधुनिक समाज ने नैतिकता के नाम पर कलंक बना दिया है। उनके अनुसार, खुली बातचीत और शिक्षा से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऐतिहासिक संदर्भों की व्याख्या करते समय आधुनिक कानून और सामाजिक जिम्मेदारियों की अनदेखी नहीं की जा सकती

ट्रोलिंग, अभिव्यक्ति और डिजिटल जिम्मेदारी

सीमा आनंद पहले भी यह बता चुकी हैं कि उन्हें अपने काम के कारण सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है, यहां तक कि उनके पति को लेकर भी टिप्पणियां की जाती हैं। लेकिन इस बार का विवाद अलग है। इसने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यौन शिक्षा पर बातचीत की सीमाएं क्या हों, और सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय वक्ताओं की जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए।

बहस का निष्कर्ष नहीं, एक चेतावनी

यह विवाद किसी एक व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने से अधिक, एक व्यापक चेतावनी है। यह याद दिलाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है—खासतौर पर तब, जब बात नाबालिगों, सहमति और संवेदनशील विषयों की हो।
डिजिटल युग में संवाद आवश्यक है, लेकिन उतना ही आवश्यक है संदर्भ, संवेदनशीलता और कानून की समझ। सीमा आनंद के बयानों ने भले ही तीखी बहस छेड़ दी हो, पर इस बहस का सबसे अहम परिणाम यही है कि समाज को अब यह तय करना होगा कि खुली चर्चा और जिम्मेदार अभिव्यक्ति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन सुशासन, दक्षता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के संकल्प को निरंतर मजबूती दे रहा है। पारदर्शिता, कार्यकुशलता और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नवंबर 2025 माह के लिए मंत्रालय महानदी भवन के अधिकारियों के ई-ऑफिस प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
डिजिटल गवर्नेंस को नई दिशा देने वाली इस पहल के अंतर्गत मुख्य सचिव श्री विकास शील ने ई-ऑफिस में श्रेष्ठ कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित करते हुए उन्हें शासन-प्रशासन में गति, पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह पहल शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सेवा-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंत्रालय स्थित महानदी भवन, नवा रायपुर के अधिकारियों के लिए ई-ऑफिस प्रदर्शन मूल्यांकन पूर्णतः आधिकारिक डिजिटल डेटा के आधार पर किया गया। इस मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य अधिकारियों को स्व-मूल्यांकन का अवसर देना, रचनात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार करना, कार्य-प्रबंधन में सुधार लाना तथा फाइलों के समयबद्ध निस्तारण को प्रोत्साहित करना है।
मूल्यांकन विभिन्न संवर्गों—संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव एवं अनुभाग अधिकारी—के लिए पृथक-पृथक किया गया। अधिकारियों द्वारा माह के दौरान किए गए कार्यभार, फाइल निस्तारण की गति और दक्षता को प्रमुख मानदंड बनाया गया।
6 जनवरी 2026 को मंत्रालय, महानदी भवन के पंचम तल सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य सचिव श्री विकास शील ने नवंबर 2025 के लिए चयनित श्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ताओं को प्रशंसा पत्र प्रदान किए। सम्मानित अधिकारियों में श्रीमती जयश्री जैन, श्री गजपाल सिंह सिकरवार, श्री भुपेन्द्र सिंह राजपूत, श्री विजय कुमार चौधरी, श्री राहुल कुमार, डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, श्री रनबहादुर ज्ञवाली, श्री अरुण कुमार मिश्रा, श्री पूरन लाल साहू, श्री मनीराम रात्रे, श्री महेश कुमार एवं श्री नागराजन शामिल हैं।
मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि यह मूल्यांकन तंत्र अधिकारियों के बीच सकारात्मक प्रेरणा, कार्य संतुष्टि, जवाबदेही और अनुशासन को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया को नियमित रूप से जारी रखा जाएगा और प्रत्येक माह ई-ऑफिस प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि समयपालन और कार्यालय उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए उपस्थिति आधारित पुरस्कार प्रणाली प्रारंभ करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही उत्कृष्ट अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए “वॉल ऑफ फेम” को सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट और मंत्रालय परिसर की डिजिटल स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से प्रशासन को तेज़, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए सतत प्रयास कर रहा है। ई-ऑफिस जैसी पहलें राज्य में सुशासन की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

   रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आज आस्था, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम साकार हुआ, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गरियाबंद जिले के सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित भव्य श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना कर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मांगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सिरकट्टी धाम को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक समरसता का केंद्र बताते हुए आश्रम परिसर में समरसता भवन के निर्माण हेतु 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद देशभर में जो आध्यात्मिक ऊर्जा प्रवाहित हुई है, उसी की अखंड धारा आज सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के माध्यम से अनुभव की जा रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों, साधु-संतों और सनातन परंपराओं की भूमि है। धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय इसी भूमि पर व्यतीत किया। दंडकारण्य और अबूझमाड़ की पावन भूमि, जो कभी नक्सलवाद की पीड़ा से जूझती थी, आज शांति और विकास के पथ पर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आस्था और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निशुल्क तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है, जबकि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के अंतर्गत 5 हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। इसके साथ ही प्रदेश के पांच शक्तिपीठों का विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास हेतु स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं रतनपुर के विकास के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी और अधिक भव्य स्वरूप में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने श्रीरामजानकी मंदिर को जनसहभागिता की अनुपम मिसाल बताया। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर बीते 10 वर्षों की साधना और समर्पण का साकार रूप है। राजस्थान के कुशल शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट और लोहे की छड़ के निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। मुख्यमंत्री ने मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले सभी श्रद्धालुओं और दानदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आस्था, एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।
उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। केबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे अलौकिक अनुभव बताते हुए कहा कि सिरकट्टी धाम आज आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है।
सिरकट्टी आश्रम के महामंडलेश्वर महंत संत गोवर्धन शरण व्यास ने स्वागत उद्बोधन में आश्रम की स्थापना, परंपरा और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायकगण श्री रोहित साहू एवं श्री दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गौरीशंकर कश्यप, अनेक जनप्रतिनिधि, देशभर से आए संत-महात्मा और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सिरकट्टी धाम में लहराई धर्मध्वजा के साथ यह संदेश स्पष्ट रूप से गूंज उठा कि छत्तीसगढ़ अब केवल विकास ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव की नई ऊँचाइयों की ओर भी अग्रसर है।

       रायपुर / शौर्यपथ / धुन के पक्के लोग जब ठान लेते हैं, तो परिस्थितियां भी रास्ता दे देती हैं। राजनांदगांव के वैशाली नगर निवासी श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से यह साबित कर दिया है कि सही योजना और निरंतर मेहनत से आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा सकती है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) उनके लिए न केवल आर्थिक संबल बनी, बल्कि एक नई पहचान और स्थायी आजीविका का माध्यम भी बनी।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाना, उन्हें औपचारिक स्वरूप देना और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस योजना के अंतर्गत नए एवं मौजूदा उद्यमों को 35 प्रतिशत तक ऋण आधारित सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये), ब्रांडिंग, मार्केटिंग सहायता, प्रशिक्षण एवं बुनियादी ढांचे का सहयोग प्रदान किया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
इसी योजना के अंतर्गत श्री प्रदीप देशपांडे ने स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपना लघुवनोपज आधारित प्रोसेसिंग उद्योग प्रारंभ किया। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा जैसे लघुवनोपज की संभावनाओं को पहचानते हुए इन पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की। इस उद्योग के लिए मशीन एवं शेड निर्माण हेतु कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से 2 लाख 13 हजार 500 रुपये का अनुदान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत प्राप्त हुआ।
उद्योग की स्थापना के साथ ही श्री देशपांडे ने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को स्थायी आय का साधन मिला और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुईं, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा।
योजना से प्राप्त सहायता राशि से उन्होंने आईटीआई मुंबई निर्मित चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस आधुनिक मशीन के माध्यम से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है, जबकि छिलकों से चारकोल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा की गिरी से तेल निष्कर्षण तथा हर्रा-बहेरा डिकॉल्डीकेटर मशीन द्वारा छाल पृथक्करण का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे मूल्य संवर्धन और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ग्रामीण और वनीय क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की चुनौतियों को देखते हुए श्री देशपांडे ने अपनी प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर ऊर्जा से संचालित किया है। सोलर प्लांट के उपयोग से उनका बिजली खर्च शून्य हो गया है और उत्पादन कार्य बिना रुकावट जारी है, जिससे लागत में भी भारी कमी आई है।
चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग के चलते उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ तक सीमित न रहकर महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक विस्तारित हो चुका है। इस उद्योग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है, जिससे उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।
यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बनी है, बल्कि वनों के संरक्षण, लघुवनोपज के सतत संग्रहण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी सहायक सिद्ध हो रही है। स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली अत्यंत प्रभावी योजना बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है और आत्मनिर्भर बनने का रास्ता प्रशस्त किया है।

 रायपुर / शौर्यपथ / सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित यातायात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तथा मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा द्वारा प्रदेशभर में प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में लीड एजेंसी द्वारा सड़क सुरक्षा से संबंधित पोस्टर एवं फ्लैक्स जारी किए गए हैं। वहीं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने प्रदेश के समस्त सरपंचों एवं पंचगणों से पंचायत स्तर पर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सक्रिय पहल करने की अपील की है।

सड़क सुरक्षा माह का शुभारंभ 01 जनवरी 2026 को बेमेतरा में माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे द्वारा हेलमेट रैली को हरी झंडी दिखाकर किया गया। इसके पश्चात 03 जनवरी को दुर्ग में संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, सात जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित परिवहन, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, शिक्षा, आबकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

इसी क्रम में 05 जनवरी 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की उपस्थिति में संबंधित विभागीय सचिवों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए समन्वित कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से सर्वाधिक दुर्घटनाओं वाले जिलों रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग के लिए वर्ष 2026 में दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु विशेष रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान गत वर्ष की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध लगभग 45 प्रतिशत अधिक कार्रवाई करते हुए करीब 9 लाख प्रकरण दर्ज किए गए तथा लगभग 39 करोड़ रुपये का परिशमन शुल्क संकलित किया गया। जन-जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप लगभग 3 प्रतिशत मृत्यु दर में कमी परिलक्षित हुई है। प्रदेश के 20 जिलों में मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि रायपुर सहित 13 अन्य जिलों में इसे कम करने के लिए सतत प्रयास जारी हैं।

सड़क सुरक्षा माह 2026 के दौरान यातायात पुलिस द्वारा प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, मोबाइल पर बात करते हुए, नशे की हालत में अथवा तेज गति से वाहन चलाने वालों को समझाइश दी जा रही है। साथ ही यातायात नियमों का पालन करने वाले नागरिकों को सम्मानित कर सकारात्मक संदेश भी दिया जा रहा है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी लाने, दुर्घटनाजन्य सड़कों में त्वरित सुधार तथा आपातकालीन उपचार के लिए त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को सुदृढ़ करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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