January 27, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

   दुर्ग / शौर्यपथ / भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) दुर्ग विधानसभा में संगठनात्मक शिथिलता और लगातार मिल रही अनुशासनहीनता की शिकायतों के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए संपूर्ण पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वरुण केवळतानी द्वारा जारी आदेश ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस संगठन अब ढिलाई, निष्क्रियता और निर्देशों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

गंभीर कार्यक्रमों में अनुपस्थिति बनी कार्रवाई का मुख्य आधार

आदेश में उल्लेखित है कि जिला कांग्रेस के महत्वपूर्ण एवं गरिमामय कार्यक्रमों में वरिष्ठ नेतृत्व स्वयं उपस्थित था, किंतु NSUI दुर्ग विधानसभा के पदाधिकारियों की अनुपस्थिति लगातार देखी गई। कई बार सूचित किए जाने के बावजूद समिति के एक भी पदाधिकारी की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।
संगठन ने इसे “कर्तव्य के प्रति उदासीनता और अनुशासनहीनता” बताते हुए कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।

नोटिस का जवाब न देना बना निर्णायक कारण

दिनांक 06 दिसंबर 2025 को स्पष्टीकरण हेतु नोटिस जारी किया गया था, परंतु किसी भी पदाधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। NSUI जैसे अनुशासन-आधारित संगठन में इसे गंभीर त्रुटि माना गया। यही कारण रहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सामूहिक रूप से सभी पदाधिकारियों के पद समाप्त करने का फैसला सुना दिया।

राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत—युवा संगठन में साफ-सफाई की शुरुआत?

यह फैसला न केवल संगठनात्मक अनुशासन का संदेश देता है, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस द्वारा अपने युवा मोर्चे को नए सिरे से सक्रिय, जिम्मेदार और जमीनी रूप से मजबूत करने की स्पष्ट राजनीतिक रणनीति भी दिखाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र कांग्रेस संगठन युवा नेतृत्व में ऊर्जा और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन मजबूती से खड़ा हो सके।

किसे भेजा गया संदेश?

सामूहिक पदमुक्ति का यह फैसला साफ संकेत देता है कि संगठन में केवल पद धारण करने से नहीं, सक्रियता और समर्पण से पहचान बनेगी। कार्यकर्ताओं को वरिष्ठ नेतृत्व के निर्देशों और कार्यक्रमों को प्राथमिकता देनी होगी। कांग्रेस अब निष्क्रिय इकाइयों और गैर-जिम्मेदार पदाधिकारियों पर निगरानी और कार्रवाई दोनों करेगी।
आगे क्या?
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि NSUI दुर्ग विधानसभा की नई संरचना जल्द घोषित की जाएगी।नई टीम में सक्रिय, जमीनी, प्रतिबद्ध और संगठनात्मक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी करने वाले युवाओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
NSUI दुर्ग विधानसभा में की गई यह कड़ी कार्रवाई केवल आंतरिक अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की नई नीति का संकेत भी है—“अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस, और सक्रियता ही संगठन में सम्मान का आधार।”

रायपुर (शौर्यपथ)
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सक्ती जिले के हसौद ग्राम में आयोजित 251 कुण्डीय विशाल गायत्री महायज्ञ के भव्य अनुष्ठानों में शामिल हुए। उन्होंने इस आयोजन को “आध्यात्मिक एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत प्रतीक” बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महामाया की पावन भूमि में 251 कुंडों के माध्यम से एक साथ प्रज्वलित हो रहे यज्ञ-अग्नि के तीर्थ से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।

“छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल, इसलिए हमारी संस्कृति विशिष्ट”—मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने कहा— “500 वर्षों के बाद अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प हुआ। छत्तीसगढ़ स्वयं भगवान श्रीराम का ननिहाल है—माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का गौरव हमें प्राप्त है।”
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम जाकर दर्शन-लाभ ले चुके हैं।
गायत्री मंत्र के 24 अक्षर देते हैं 24 शक्तियाँ—मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गायत्री मंत्र केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कारित, ऊर्जावान और सदाचारमय बनाने वाली दिव्य शक्ति है। उन्होंने कहा—“गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 सिद्धियों और शक्तियों के प्रतीक हैं, जो मनुष्य को अध्यात्म, ऊर्जा, विवेक और चरित्र निर्माण की दिशा प्रदान करते हैं।”इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज हरिद्वार के कुलपति डॉ. चिन्मय पण्डया ने मुख्यमंत्री का शॉल एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मान किया।
कार्यक्रम में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि तथा देशभर से जुटे अखिल विश्व गायत्री परिवार के पदाधिकारी उपस्थित रहे। विशाल संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियाँ अर्पित कीं।
140 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद
महायज्ञ के दौरान आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने 140 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने मंच से ही सभी लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने और बेटियों के सम्मान के लिए हर संभव सहायता दे रही है।
जैतखाम में पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना
हसौद प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जैतखाम पहुँचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
उन्होंने प्रदेशवासियों की शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा, समानता और मनखे-मनखे एक समान के संदेश समाज में सद्भाव एवं एकता का पथ प्रशस्त करते हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इन आदर्शों को अपनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक का किया विधिवत शुभारंभ
बस्तर संभाग के सातों जिलों और नुवाबाट के खिलाड़ियों ने आकर्षक मार्चपास्ट प्रस्तुत कर दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
बस्तर अब शांति, समरसता और समृद्धि की ओर अग्रसर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर / शौर्यपथ / आपका मुख्यमंत्री आपके समाज के बीच का है, आपका भाई है....आप आगे बढ़ें, सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बस्तर ओलिंपिक 2025 के तहत संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने आज जगदलपुर के स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में संभाग स्तरीय बस्तर ओलिंपिक का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने समूचे बस्तर संभाग के खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों के खिलाड़ियों ने आकर्षक मार्चपास्ट प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बस्तर के गांव-गांव तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप बस्तर अब शांति, समरसता और समृद्धि की ओर निरंतर अग्रसर हो रहा है और प्रदेश तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर के युवाओं ने बड़ी संख्या में इस महती आयोजन में भाग लेकर इसे सफल और ऐतिहासिक बनाया है। सबसे अधिक हर्ष की बात यह है कि बस्तर ओलम्पिक में नुवाबाट के प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक शामिल होकर इसे एक विशेष आयाम प्रदान किया है। बड़ी संख्या में बेटियों और बहनों की सहभागिता यह प्रमाणित करती है कि बस्तर में महिला सशक्तिकरण नई दिशा ले रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार बस्तर के युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें विकास में सहभागी बनाने के लिए कटिबद्ध है। यही कारण है कि बस्तर के युवा लोकतंत्र में आस्था एवं विश्वास के साथ आगे आ रहे हैं और विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक खेल प्रतियोगिता के विजेता आने वाले समय में खिलाड़ियों के लिए रोल मॉडल बनेंगे। सरकार बस्तर के युवाओं को बेहतर अवसर एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ओलम्पिक स्पर्धाओं में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर आने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः तीन-तीन करोड़, दो करोड़ तथा एक करोड़ रुपए की सम्मान निधि प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक न केवल युवाओं को खेल के माध्यम से आगे बढ़ाने की पहल है, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि बस्तर में खेल अधोसंरचना को और मजबूत किया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों को उचित मंच मिल सके। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल जितना सिखाता है, उतना ही हार से सीखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि बस्तर ओलम्पिक युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का सकारात्मक प्रयास है। उन्होंने कहा कि सरकार बस्तर के अंदरूनी इलाकों के युवाओं को अधिक अवसर देकर उन्हें प्रोत्साहित कर रही है और भविष्य में यह पहल और अधिक सशक्त रूप में जारी रहेगी।
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप और ओलम्पिक में ब्रॉन्ज मेडल सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक विजेता खिलाड़ी पद्मश्री एम.सी. मेरीकॉम ने भी उपस्थित होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और शुभकामनाएँ दीं।
संचालक, खेल एवं युवा कल्याण, सुश्री तनुजा सलाम ने स्वागत उद्बोधन में अवगत कराया कि बस्तर ओलम्पिक की संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बस्तर जिले के साथ ही नुवा बाट के करीब तीन हजार पाँच सौ खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह बस्तर के लिए गौरव का क्षण है और बस्तर के उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्य सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय अत्यंत सराहनीय है। बस्तर ओलम्पिक में तीन स्तर की प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि गत वर्ष के 1,65,000 प्रतिभागियों की तुलना में इस वर्ष 3,92,000 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 2,27,000 से अधिक महिला प्रतिभागी शामिल हैं - यह बस्तर में परिवर्तन की नई बयार है।
कार्यक्रम की शुरुआत खिलाड़ियों द्वारा मशाल प्रज्ज्वलन और आतिशबाजी के साथ हुई। इसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत माता रूकमणी कन्या आश्रम तथा अन्य विद्यालयों की छात्राओं द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इस अवसर पर विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, राष्ट्रीय खिलाड़ी किरण पिस्दा एवं खुशबू नाग, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जिलों के नोडल अधिकारी, खेल अधिकारी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पूवर्ती के खिलाड़ी विजय डोडी और ओरछा सलोनी बनीं मशालवाहक

बस्तर ओलम्पिक 2025 की संभाग स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ आज अत्यंत गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, मंत्रीगण तथा बॉक्सर पद्मश्री मेरी कॉम द्वारा किया गया। हजारों दर्शकों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बस्तर ओलम्पिक की मशाल प्रज्ज्वलित की।
इसके बाद यह गौरवशाली मशाल सुकमा जिले के सुदूर अंचल पूवर्ती के प्रतिभावान खिलाड़ी विजय डोडी और नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक की निवासी सलोनी कवाची को सौंपा गया। कबड्डी खिलाड़ी विजय डोडी और खो-खो खिलाड़ी सलोनी कवाची ने पूरे उत्साह, ऊर्जा और गौरव के साथ ग्राउंड की परिक्रमा करते हुए मशाल को मुख्य प्रज्वलन स्थल तक पहुंचाया। यह क्षण सुकमा और नारायणपुर जिलों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और भावनात्मक था - जब माओवाद-प्रभावित एवं दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ हजारों दर्शकों के सामने दौड़ रहे थे। दर्शकों का उत्साह भी इस दौरान चरम पर पहुंच गया।
संभागभर से पहुंचे हजारों खिलाड़ियों और दर्शकों ने इस ऐतिहासिक क्षण का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। बस्तर ओलम्पिक के इस भव्य उद्घाटन ने एक बार फिर सिद्ध किया कि बस्तर की माटी में असीम खेल प्रतिभाएं जन्म ले रही हैं और राज्य सरकार तथा प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से इन प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

  रायपुर (शौर्यपथ) देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना को और मजबूत करते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने रायगढ़ स्थित एनटीपीसी तलाईपल्ली कोयला खदान की सुरक्षा का औपचारिक रूप से जिम्मा संभाल लिया है। यह CISF की 362वीं इकाई है, जिसमें प्रथम चरण में 265 स्वीकृत पदों में से 101 प्रशिक्षित जवानों की तैनाती की गई है। आगे की तैनाती परियोजना विस्तार के साथ चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

परियोजना स्थल पर आयोजित समारोह में एनटीपीसी तलाईपल्ली के परियोजना प्रमुख अखिलेश सिंह ने ‘सिक्योरिटी की’ CISF केंद्रीय सेक्टर मुख्यालय भिलाई की आईजी नीलिमा रानी सिंह को सौंपकर सुरक्षा जिम्मेदारी हस्तांतरित की। इस अवसर पर भिलाई के डीआईजी दया शंकर और डीआईजी पियाली शर्मा भी उपस्थित रहीं।
तलाईपल्ली खदान लारा सुपर थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयले का प्रमुख स्रोत है, जो कई राज्यों की बिजली जरूरतों को पूरा करता है। इसलिए खदान का निरंतर और सुरक्षित संचालन राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और आत्मनिर्भर ऊर्जा लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत और दुनियाभर के उन समुदायों के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है, जो दीपावली की शाश्वत भावना को जीवित रखते हैं : केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

   नई दिल्ली(शौर्यपथ) भारत में व्यापक रूप से मनाई जाने वाली जीवंत परंपराओं में से एक दीपावली को आज नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया गया है।
इस शिलालेख को केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल, संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों, अंतरराष्‍ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के वैश्विक नेटवर्क के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अपनाया गया।
श्री शेखावत ने अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत और विश्वभर के उन समुदायों के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है जो दीपावली की शाश्वत भावना को जीवित रखते हैं। उन्‍होंने कहा कि यह त्योहार ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के सार्वभौमिक संदेश का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की भावना को दर्शाता है और आशा, नवजीवन तथा सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है।
केंद्रीय मंत्री ने त्योहार की जीवंतता और जन-केंद्रित प्रकृति का उल्‍लेख करते हुए इस बात पर बल दिया कि दीपावली उत्‍सव के पीछे लाखों लोगों का योगदान होता है, जिनमें दीये बनाने वाले कुम्हार, उत्सव की सजावट करने वाले कारीगर, किसान, मिठाई बनाने वाले, पुजारी और सदियों पुरानी परंपराओं को निभाने वाले परिवार शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि यह मान्यता उस सामूहिक श्रम को श्रद्धांजलि है जो इस परंपरा को कायम रखता है। केंद्रीय मंत्री ने प्रवासी भारतीयों की जीवंत भूमिका को भी स्वीकार किया, जिनके दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, खाड़ी देशों, यूरोप और कैरेबियन में मनाए जाने वाले दीपावली समारोहों ने दीपावली के संदेश को महाद्वीपों में फैलाया है और सांस्कृतिक सेतुओं को मजबूत किया है।
इस शिलालेख के साथ ही इस विरासत की रक्षा करने और इसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की नई जिम्मेदारी भी आती है। केंद्रीय मंत्री ने नागरिकों से दीपावली की एकता की भावना को अपनाने और भारत की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक परंपराओं का समर्थन जारी रखने का आग्रह किया। दीपावली को इसकी गहरी सांस्कृतिक महत्ता और विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों तथा वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय में मनाए जाने वाले जन त्योहार के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह एकता, नवीनीकरण और सामाजिक सामंजस्य के सिद्धांतों का प्रतीक है। दीये जलाना, रंगोली बनाना, पारंपरिक शिल्पकला, अनुष्ठान, सामुदायिक समारोह और पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान का हस्तांतरण जैसी इसकी विविध प्रथाएं त्योहार की शाश्वत जीवंतता और भौगोलिकता की सीमाओं के भीतर अनुकूलन करने की क्षमता को दर्शाती हैं।
संगीत नाटक अकादमी के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस नामांकन में भारतभर के कलाकारों, शिल्पकारों, कृषि समुदायों, प्रवासी समूहों, विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर समुदायों, सांस्कृतिक संगठनों और परंपरा के वाहकों के साथ व्यापक राष्ट्रव्यापी परामर्श किया गया। उनके सामूहिक अनुभवों ने दीपावली के समावेशी स्वरूप, समुदाय-आधारित निरंतरता और कुम्हारों और रंगोली कलाकारों से लेकर मिठाई बनाने वालों, फूल विक्रेताओं और शिल्पकारों तक आजीविका के व्यापक इकोसिस्‍टम को उजागर किया।
यूनेस्को के शिलालेख में दीपावली को एक जीवंत विरासत के रूप में मान्यता दी गई है जो सामाजिक आपसदारी को मजबूत करती है। यह त्‍योहार पारंपरिक शिल्प कौशल का समर्थन करता है, उदारता और कल्याण के मूल्यों को सुदृढ़ करता है तथा आजीविका संवर्धन, लैंगिक समानता, सांस्कृतिक शिक्षा और सामुदायिक कल्याण सहित कई सतत विकास लक्ष्यों में सार्थक योगदान देता है। संस्कृति मंत्रालय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के बारे में वैश्विक जागरूकता को बढ़ावा देगा तथा भावी पीढ़ियों के लिए समुदाय-आधारित परंपराओं की रक्षा के प्रयासों को सुदृढ़ करेगा।

  नई दिल्ली / रायपुर (शौर्यपथ) रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोक सभा में बताया कि छत्तीसगढ़ में रेल अवसंरचना को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने अभूतपूर्व वित्तीय आवंटन किया है। 2009-2014 के दौरान ₹311 करोड़ वार्षिक परिव्यय से बढ़कर 2025-26 के लिए यह राशि ₹6,925 करोड़ हो गई है, जो 22 गुना से अधिक वृद्धि दर्शाती है।
इस निवेश के तहत कई अहम परियोजनाएं तेजी से प्रगति पर हैं। इनमें खरसिया-नया रायपुर-परमालकसा नई लाइन (278 कि.मी., ₹7,854 करोड़), बस्तर क्षेत्र में रावघाट-जगदलपुर नई लाइन (140 कि.मी., ₹3,513 करोड़), और कोयला व खनिज परिवहन के लिए गेवरा रोड-पेंड्रा रोड नई लाइन (157 कि.मी., ₹3,923 करोड़) शामिल हैं। इसके साथ ही खरसिया-परमालकसा के 5वीं एवं 6वीं लाइन, बोरीडांड-अम्बिकापुर दोहरीकरण (80 कि.मी.) और बिलासपुर-झारसुगुड़ा चौथी लाइन (206 कि.मी.) परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं।
रेल मंत्री की जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के लिए दीर्घकालिक रोडमैप के तहत 2022-25 और वर्तमान वित्त वर्ष में 61 सर्वेक्षण कार्य शुरू किए गए हैं, जिनमें 26 नई लाइनें और 35 दोहरीकरण शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 5,755 कि.मी. है। ये कार्य रेल नेटवर्क के सघन विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी की योजना को दर्शाते हैं।
सभी परियोजनाओं के चयन में यातायात अनुमान, लाभप्रदता, सामाजिक-आर्थिक महत्व, तथा प्रथम और अंतिम छोर संपर्कता जैसे कारकों का व्यावहारिक विश्लेषण शामिल है। केंद्र सरकार इन परियोजनाओं को छत्तीसगढ़ के त्वरित विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है।
इस व्यापक रेल नेटवर्क विस्तार से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को बेहतर यात्री और माल ढुलाई सुविधाएं मिलेंगी, जिससे छत्तीसगढ़ का कनेक्टिविटी और आर्थिक परिदृश्य मजबूत होगा।

- 04 करोड़ 65 लाख रूपए लागत के महाविद्यालय भवन निर्माण कार्य का किया भूमिपूजन
- विज्ञान प्रायोगिक सामग्री खरीदी के लिए 5 लाख रूपए की घोषणा

दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के धमधा तहसील अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय पेंड्रावान (धमधा) के नवीन भवन के लिए भूमिपूजन आज प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। 4 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत के इस महाविद्यालय भवन के बन जाने से क्षेत्र के बारहवी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहूलियत होगी। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक ईश्वर साहू, राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, पूर्व विधायक लाभचंद बाफना, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे एवं सुरेंद्र कौशिक उपस्थित थे।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने कहा कि जीवन की सफलता केवल शिक्षा की डिग्री पाने से नही है अपितु संस्कृति और संस्कार को आत्मसात कर जीवन जीना है। उन्होंने महाविद्यालयीन विद्यार्थियों द्वारा छत्तीसगढ़ी संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति का सराहना करते हुए सांस्कृतिक दल के लिए 5100 रूपए प्रोत्साहन राशि अपने तरफ से प्रदान करने की घोषणा की। मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन मंे प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को क्रमशः पूरी कर रही है। प्रदेश में सरकार शांति और विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने बस्तर में नक्सली उन्मूलन में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी की विजन के साथ 2047 तक प्रदेश को विकसित राज्य बनायंेगे। उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने पेंड्रावान और बोरी महाविद्यालय में अहाता निर्माण का भरोसा दिलाया, वहीं उन्होंने महाविद्यालय के विज्ञान प्रायोगिक सामग्री खरीदी के लिए 5 लाख रूपए की घोषणा की।
क्षेत्रीय विधायक ईश्वर साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज गांव वालों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी की गारंटी को प्रदेश सरकार द्वारा समय से पहले पूरी करने की पहल से अवगत कराते हुए प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को रेखांकित किया। महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषाकिरण अग्रवाल ने महाविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधियों एवं मागों से मंत्री जी को अवगत कराया। सरपंच श्रीमती प्रतिमा सिन्हा ने स्वागत उद्बोधन में ग्राम एवं क्षेत्र की जनता की विभिन्न मांगों की ओर मुख्य अतिथि मंत्री वर्मा का ध्यान आकृष्ट किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं पंचायत प्रतिनिधि, महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

   रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में किसानों, दलितों, आदिवासियों की जमीनों के लूटने का षड्यंत्र चल रहा। सरकार जमीनों के इस लूट की सहभागी है। कल खैरागढ़ छुईखदान गया था, वहां पर सिमेंट प्लांट लगाने के नाम पर किसानों की जमीन जबरिया अधिग्रहित की गयी, जनसुनवाई का विरोध कर रहे ग्रामाणों पर लाठियां चलवाई गयी। पूरे प्रदेश में उद्योगों कोयला खदानों आदि के नाम पर किसानों की जमीन जबरिया अधिग्रहित की जा रही, किसान विरोध कर रहे तो उन पर लाठियां चलाई जा रही। हसदेव, अमोरा, तमनार, खैरागढ़, मैनपाट, बीजापुर, बैलाडीला कांकेर में यही हुआ, सरकार ने लोगों की सहमति के बिना उनकी जमीनों को उद्योगपतियों को दे दिया। खैरागढ़, अमोरा, तमनार, मैनपाट में ग्रामीणों पर लाठियां चलवाई गई। यह सरकार उद्योगपतियों की दलाल बन गई है।

दुर्दांत नक्सलियों के प्रकरण वापस लेंगे, निर्दोष आदिवासियों के बारे में कब फैसला होगा?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मंत्रिमंडल के द्वारा समर्पित नक्सलियों के आपराधिक प्रकरण वापस फैसले लेने की और उसकी समीक्षा की फैसला का निर्णय बेहद ही दुर्भाग्यजनक है। सरकार बताये जो झीरम कांड में शामिल थे, जो ताड़मेटला, रानीबोदली, एडसमेटा जैसे नरसंहार में शामिल थे, जो सैकड़ों हजारों नरसंहार में शामिल थे, क्या उनका भी अपराधिक प्रकरण सरकार वापस लेगी? सरकार की अपनी नक्सल नीति है, मुख्यधारा में लाने के लिए, सरकार उनके पुनर्वास के बारे में फैसला करे लेकिन गंभीर आपराधिक घटना में शामिल नक्सली और सामान्य घटना में बंद जिसके खिलाफ चार्जशीट तक नहीं दाखिल कर पाये उनके बारे में सरकार अपना मत स्पष्ट करे। नक्सली के नाम पर जिन आदिवासियों को सरकार ने नक्सली बताकर जबरिया बंद कर रखा है, जिनके बारे में अदालत में चालान तक नहीं पेश किया गया है। सरकार बताये उनको छोड़ने के लिये क्या किया जा रहा है? जो निर्दोष है किसी घटना और हत्या में शामिल नहीं थे, उनके बारे में पहले फैसला लिया जाना चाहिये। पुलिस के द्वारा सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिये सैकड़ों आदिवासियों को जेल में बंद किया था। जो निर्दाष है उनके बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है, पहले तो उनके लिये फैसला होना चाहिये।

एसआईआर की समय सीमा तीन माह और बढ़ाया जाए

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आज एसआईआर की अंतिम दिन है। अभी तक सभी नागरिकों का एसआईआर नहीं हो पाया है। प्रदेश के बहुत से नागरिक रोजी-रोटी के लिए बाहर गए हैं, उनका एसआईआर नहीं हुआ है। आज भी लाखों लोगों का फॉर्म बीएलओ तक नहीं पहुंचा है। हमारी मांग है एसआईआर की अवधि 3 माह और बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में आ सके।

आरक्षक भर्ती परीक्षा में घोटाला हुआ है

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में घोटाला हुआ है इस बात को कांग्रेस पार्टी और अभ्यर्थी लगातार उठाते रहे हैं। अभी जब परिणाम घोषित हुए हैं उसके बाद घोटाले की पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं। एक ही क्रमांक के 33 अभ्यर्थियों के आवेदन सामने आए हैं, वे सभी चयनित किये गये है। एक अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा में 39 नंबर मिला है उसका उसका चयन हो गया है। शारीरिक परीक्षा का पूर्णांक 100 नंबर का है यदि उसे शारीरिक परीक्षा में 100 में 100 मिला होगा तो भी उसका कुल अंक 139 ही होगा, जबकि 143 नंबर वाले का चयन नहीं हुआ। लिखित परीक्षा का नंबर सार्वजनिक हो सकता है तो शारीरिक परीक्षा का नंबर क्यों नहीं जारी हुआ? दोनों मिलाकर प्राप्तांक क्यों नहीं जारी किया गया? सरकार भर्ती परीक्षा में घोटाले कर युवाओं के सपने बेच रही है। पुलिस आरक्षक ही नहीं फॉरेस्ट आरक्षक, आरआई परीक्षा सहित अनेकों परीक्षाओं में भाजपा सरकार ने घपले करवाया है।

सोसायटियों का लिमिट फिक्स खरीदी बाधित हो रही

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार ने सभी सोसायटियों के लिए एक दिन की अधिकतम खरीद सीमा तय कर दी है। एनआईसी ऐसा सिस्टम तय किया है लिमिट के बाद कंप्यूटर लॉक हो जाता है। जिसके कारण सोसायटियां चाह कर भी लिमिट से अधिक धान नहीं खरीद सकती। इस लिमिट के कारण दोपहर के बाद सोसायटी में सन्नाटा पसर जाता है। इस लॉक के कारण नियत समय में सभी किसानों का धान कैसे बिक पाएगा? सरकार जानबूझकर यह लिमिट सिस्टम बनाई है ताकि समर्थन मूल्य में कम खरीदी करनी पड़े।

जिले के 02 लाख 47 हजार 143 महिलाओं के खाते में अब तक कुल 22 करोड़ 80 लाख 65 हजार 200 रूपये की राशि अंतरित की गई
बालोद / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाकर उन्हें सुरक्षा एवं सम्मान दिलाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई राज्य शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ राज्य सहित बालोद जिले के महिलाओं के लिए भी अनेक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी एवं कारगर साबित हो रहा है। इस योजना के माध्यम से लाभार्थी महिलाओं के खाते में प्रतिमाह 01-01 हजार रूपये की राशि अंतरित होने से महिलाओं में आत्मविश्वास एवं सुखद भविष्य की नई आश जगी है।
उल्लेखनीय है कि बालोद जिले के कुल 02 लाख 47 हजार 143 लाभार्थी महिलाओं के खाते में अब तक कुल 22 करोड़ 80 लाख 65 हजार 200 रूपये की राशि जारी अंतरित की जा चूकी है। प्रतिमाह महीने के अंतिम तारीख को लाभार्थी महिलाओं के खाते में महतारी वंदन योजना की राशि अंतरित हो जाने से आज यह योजना राज्य के लाखों मातृ शक्तियों के लिए आर्थिक संबलता का आधार बन गया है। राज्य शासन की इस कल्याणकारी योजना के फलस्वरूप महिलाओं के खाते में प्रतिमाह समय पर 01-01 हजार रूपये की राशि अंतरित हो जाने से राज्य की महिलाओं में सर्वस्व हर्ष व्याप्त है।
ज्ञातव्य हो कि हमारा समाज पुरूष प्रधान होने के कारण आज भी मेहनतकश महिलाओं को आवश्यक कार्यों तथा अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए पैसे की प्रबंध करने के लिए अपने घर एवं परिवार के पुरूषों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इस समस्या एवं पीड़ा का सर्वाधिक सामना समाज के खेतिहर मजदूर तथा मेहनत, मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले महिलाओं को सर्वाधिक करना पड़ता है। लेकिन आज राज्य सरकार के संवेदनशील सोच के फलस्वरूप राज्य में लागू की गई महतारी वंदन योजना के फलस्वरूप राज्य में इस मिथक को तोड़ने में कामयाबी मिली है।
इस योजना के राज्य में सफल क्रियान्वयन के फलस्वरूप अब महिलाओं को अपने जरूरी कार्यों एवं आर्थिक जरूरतों के लिए पुरूषों का मुँह नही ताकना पड़ता। प्रतिमाह महीने के अंत में महतारी वंदन योजना की राशि प्राप्त हो जाने से राज्य की महिलाएं अब अपने इलाज एवं दवाइयों आदि की व्यवस्था के अलावा अन्य सभी छोटी-मोटी जरूरतों की पूर्ति स्वयं कर पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में महतारी वंदन योजना मार्च 2024 से प्रारंभ की गई है। इस योजना से जिले के लाभान्वित हितग्राहियों के खाते में अब तक कुल 21वें किश्त की राशि अंतरित की जा चूकी है। इस योजना के अंतर्गत 21 वर्ष से अधिक की आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को इस योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। इस योजना से लाभान्वित महिला हितग्राहियों के खाते में प्रतिमाह डीबीआई के माध्यम से राशि अंतरित की जाती है। इस तरह से यह योजना संपूर्ण परिवार के भरण-पोषण एवं उनके देखभाल की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने वाली महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाकर उनके सम्मान एवं गौरव को प्रतिस्थापित करने वाली अत्यंत लोकहितैषी, दूरगामी तथा बहुपयोगी योजना साबित हो रहा है।

दाम बढ़ने छूट खत्म करने तथा स्मार्ट मीटर के कारण विद्युत के बिल तीन गुना बढ़ गये- शुक्ला

     रायपुर/ शौर्यपथ / भाजपा सरकार बिजली बिल के नाम पर जनता को लूट रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने बिजली के दाम चार बार बढ़ा दिया। 400 यूनिट हाफ योजना को बंद कर दिया। स्मार्ट मीटर लगा दिया इन सबसे बिजली के दाम बेतहाशा बढ़ गए, जनता परेशान है। सरकार, जनता को राहत देने के बजाय अब बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एफपीपीएस) के रूप में अतिरिक्त चार्ज इस महीने से लगाने जा रही, इससे बिजली के दाम एक बार फिर से बढ़ेंगे। कांग्रेस, सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। सरकार, कोयले का सेस कम होने के कारण बिजली का दाम कम तो नहीं कर रही, ऊपर से एक नया टैक्स लगा रही।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 400 यूनिट तक छूट को आधी करके 200 यूनिट किया, उसमें भी यह शर्त लगा दिया गया कि खपत 400 यूनिट से अधिक होते ही सारी छूट, राहत, रियायत पूरी तरह खत्म। ऊपर से सभी घरों में स्मार्ट मीटर लगाकर अधिक वसूली कर रहे है। अधिक मुनाफाखोरी के लालच में यह सरकार अनाप-शनाप बिजली बिल वसूलने के लिए नए नए पैंतरे अपना रही है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि हर जगह बिजली उपभोक्ताओं की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उनकी खपत वास्तविक खपत से अधिक बताई जा रही है, स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर की तुलना में बहुत तेजी से चल रहा है। बिजली उपभोक्ताओं का यह अधिकार है कि अपनी वास्तविक खपत को जान सके। चेक मीटर का प्रावधान पहले से ही था, लेकिन यह सरकार अपनी लूट पर परदेदारी करने के लिए चेक मीटर लगाने और मीटर चेक करवाने उपभोक्ताओं से 1000 और 1500 रुपए शुल्क लेने का प्रावधान कर दिया गया है, यदि मीटर में गड़बड़ी का आरोप उपभोक्ता लगा रहे हैं, तो उसे मुफ्त में चेक किया जाए, किसी भी तरह से अतिरिक्त शुल्क अनुचित है। यह प्रावधान सरकार ने गड़बड़ी छुपाने के लिये किया है। मीटर चेक शुल्क का प्रावधान तत्काल वापस ले सरकार।

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