January 27, 2026
Hindi Hindi
शौर्यपथ

शौर्यपथ

   बालोद / शौर्यपथ / राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने आज विशेष गहन पुनरीक्षण, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कार्य, जिला स्तरीय युवा उत्सव, सांसद खेल महोत्सव, बालोद टेक्नोफेस्ट, ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य फसल अंतर्गत फसल चक्र, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, जिला पंचायत कार्यालय बालोद का डिजिटलाईजेशन, आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति, मिशन गोद विषय पर आज संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में मासिक प्रेस वार्ता लेकर बालोद जिले में उक्त सभी योजनाओं की अद्यतन स्थिति तथा कार्यों एवं योजनाओं के प्रगति के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, जनसंपर्क अधिकारी श्री चंद्रेश ठाकुर सहित मीडिया प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

मोहला / शौर्यपथ /  कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 31 दिसंबर 2025 तक जिले में सघन कुष्ठ खोज अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत मितानीनों और ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों द्वारा घर-घर सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
      सीएमएचओ डॉ. विजय खोब्रागढ़े के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकास खंडों में अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के सम्बन्ध में जिले के कुष्ठ नोडल अधिकारी डॉ. एसआर कोवाची ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मितानीनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा संभावित रोगियों की पहचान कर उनकी जाँच और आवश्यक उपचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुष्ठ के प्रसार को रोकने के लिए रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और समय पर उपचार बेहद आवश्यक है।
      अभियान के सफल संचालन और सतत निगरानी के लिए जिला एवं विकासखण्ड स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। कुष्ठ की पहचान मुख्य रूप से त्वचा की संवेदनशीलता, दाग-धब्बे, सुन्नपन, गठाने, मोटापन और आंख-पलकों की स्थिति जैसी लक्षणों के आधार पर की जाएगी। डॉ. कोवाची ने बताया कि इन लक्षणों में से कोई भी दिखाई देने पर तुरंत स्थानीय कार्यकर्ता या मितानिन से संपर्क कर जांच कराना आवश्यक है। सीएमएचओ ने जनसामान्य से अपील की है कि किसी भी प्रकार की कुष्ठ की शंका होने पर स्वास्थ्य टीम से जांच कराएं और अभियान में सहयोग प्रदान करें, ताकि जिले को कुष्ठ मुक्त बनाया जा सके।

- अवैध बिक्री पर सख्ती, 1 हजार 718 क्विंटल धान जप्त
- जिले के 2 हजार 353 किसानों से 754.94 हेक्टेयर रकबा कराया गया समर्पित

    मोहला / शौर्यपथ / जिले में खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी कार्य सुचारू रूप से संचालित करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियाँ की गई हैं। किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी 27 उपार्जन केन्द्रों में कैप लगाकर कृषकों के एग्रीस्टेक में छूटे हुए खसरे जोड़े जा रहे हैं, जिससे वे अपने वास्तविक रकबे के अनुसार धान विक्रय कर सकें। यदि किसानों के रकबे या फसल प्रविष्टि में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो शासन द्वारा खाद्य विभाग के भौतिक सत्यापन ऐप के माध्यम से विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा उसका सत्यापन कर आवश्यक संशोधन किया जा रहा है।
जिले के सभी 27 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी लगातार जारी है। अब तक 8 हजार 469 किसानों द्वारा कुल 4 लाख 06 हजार 697 क्विंटल धान विक्रय किया जा चुका है। किसानों को लंबी कतारों से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से प्रशासन ने तुहर टोकन ऐप के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन टोकन जारी करने की सुविधा उपलब्ध कराई है, वहीं जो किसान ऑनलाइन टोकन प्राप्त नहीं कर पा रहे, उन्हें उपार्जन केन्द्रों से सीधे टोकन उपलब्ध कराया जा रहा है।
अवैध धान बिक्री पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने उड़नदस्ता दल और निगरानी दल का गठन कर सख्त कार्रवाई की जा रही है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 28 मामलों में 1 हजार 718 क्विंटल से अधिक धान जप्त किया गया है। इसी के साथ बिचौलियों द्वारा अनियमित बिक्री रोकने के उद्देश्य से किसानों द्वारा धान विक्रय के बाद बचे हुए रकबे को शून्य करने की प्रक्रिया भी जारी है, जिसके तहत अब तक 2 हजार 353 किसानों से 754.94 हेक्टेयर रकबा समर्पित क राया गया है।- अवैध बिक्री पर सख्ती, 1 हजार 718 क्विंटल धान जप्त

 

दुर्ग (शौर्यपथ)। जनवरी–फरवरी के निगम चुनावों में सुशासन का वादा कर जीत का दावा करने वाली ट्रिपल-इंजन सरकार का दुर्ग नगर निगम पर दिखता चेहरा अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों, पार्षदों और विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों का आरोप है कि निगम प्रशासन में भेदभाव और निष्क्रियता ऐसी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है कि शहर की रोज़मर्रा की समस्याएँ — अतिक्रमण, खुले नाले-पानी और अधूरे काम — सामान्य हो गए हैं।

नागरिकों का कहना है कि नगर आयुक्त सुमित अग्रवाल केवल कपड़ा लाइन पर बार-बार कार्रवाई कर के अपनी रिपोर्ट-कार्ड चमकाने में लगे हैं, जबकि गणेश मंदिर के सामने सड़क पर खुलेआम कब्जा और चर्च रोड पर बिना अनुमति लगा अवैध बाजार, समृद्धि बाजार में अवैध अतिक्रमण जैसे मामलों पर पर निगम आयुक्त का मौन रहना चिंता बढ़ाने वाला है। विभागीय सूत्रों की माने तो निगम के पास पिछले वर्ष से राजस्व वसूली में भारी वृद्धि हुई — लगभग ढाई गुना — और तमाम सरकारी राशि उपलब्ध होने के बाबजूद शहर के विकास कार्य रुकावटों का शिकार हैं।

ठेकेदारों व कर्मियों का आरोप है कि भुगतान महीनों तक रुके रहने से परियोजनाओं की रफ्तार ठप पड़ जाती है; इसके परिणामस्वरूप आम जनता को जहरीले पानी, अधूरी सड़कें , सड़कों पर आवारा पशुओं की फौज और अतिक्रमण वाली समस्याओं का दंश सहना पड़ रहा है। कई कर्मचारी व अधिकारी भी प्रशासनिक दमन व असमंजस की शिकायत करते हैं — “कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं, अधिकारी और कर्मचारी दहशत में हैं।”

एक ओर जहाँ स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि ठेके व अनुबंधों में अनियमितताएँ हैं — खासकर ‘लॉलीपॉप’ अनुबंध से जुड़े मामलों में जिसमेंखुलेआम राजस्व की हानि हुई बावजूदइसकेजिम्मेदार अधिकारी पर निगम प्रशासन द्वारा कार्यवाही न होने से “नैतिकता और जवाबदेही की कमी” के सन्देश जनता तक जा रहे हैं। निगम कार्यालय में कंप्यूटरों की अदला-बदली और अन्य व्यवस्थागत गड़बड़ियों के कारण विभागीय जवाबदेही भी प्रश्नचिह्न के नीचे आ चुकी है — नागरिकों का मत है कि जहरीले पानी मामले में प्लेसमेंट-कर्मचारी पर कार्रवाई कर के कागजी कार्यवाही दिखाई जा रही है, असल जिम्मेदारी अनछुई रह जाती है।

इन सभी आरोपों व शिकायतों के बीच सबसे अहम सवाल यह उठता है कि जब नगरीय निकाय विभाग उपमुख्यमंत्री अरुण साव के पास है तो क्या मंत्रालय स्तर पर किसी सख्त हस्तक्षेप की जरूरत नहीं दिखती? चुनावी मंचों पर सुशासन की बातें करने वाले उपमुख्यमंत्री के पास विभाग होने के बावजूद दुर्ग में प्रशासनिक बदहाली जारी रहना सीधे तौर पर उनकी नीतिगत जवाबदेही पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

नगर पालिक निगम के मौजूदा आयुक्त को स्थानीय गतिविधियों व शिकायतों से अवगत कराया जा चुका है — लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार न होना जनता के मन में यह आशंका पैदा कर रहा है कि क्या प्रशासन कुछ खास लोगों के प्रति नरम रवैया अपनाकर समग्र जनता की समस्याओं को अनदेखा कर रहा है। पार्षदों और नागरिक समूहों की मांग है कि या तो तुरंत सघन निरीक्षण कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए या फिर स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि शहर के विकास और सुशासन की बातें सिर्फ चुनावी बयानों तक सीमित न रहें।

  दुर्ग। शौर्यपथ। दुर्ग के प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं मेघ गंगा ग्रुप के संस्थापक मनीष पारख को "प्राइड ऑफ इंडिया 2025-26" के सम्मानों से नवाजा गया। यह सम्मान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान (पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश) द्वारा प्रदान किया गया।यह विशेष मान्यता स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक उत्थान, एवं व्यापारिक दूरदर्शिता के क्षेत्र में मनीष पारख और उनके समूह के अतुलनीय योगदान को सम्मानित करती है।

   मेघ गंगा ग्रुप, जो दुर्ग शहर का प्रमुख व्यवसायिक संगठन है, नवाचार, उत्कृष्टता और सामुदायिक विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण निष्ठा से निभा रहा है।मेघ गंगा ग्रुप के अंतर्गत विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थान कार्यरत हैं, जैसे—

अविश एडुकॉम

लाइफकेयर डायग्नोसिस (NABL, NABH मान्यता प्राप्त)

महावीर ज्वैलर्स

जयदीप गैस एजेंसी

डिजाइनो डिज़ाइन एनीथिंग

TISD (द इंटरनेशनल स्कूल ऑफ डिज़ाइन)

फाडे

  इस समूह के ये स्तंभ न केवल व्यावसायिक सफलता बल्कि सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में भी अग्रणी हैं।

  मनीष पारख ने इस सम्मान को अपने समर्पित टीम और मेघ गंगा ग्रुप के परिवार को समर्पित करते हुए कहा, "यह उपलब्धि हमारी सामूहिक मेहनत, विश्वास और अटूट समर्थन का परिणाम है। यह मील का पत्थर हमें भविष्य में और भी व्यापक तथा प्रभावशाली कार्य के लिए उत्साहित करता है।

"पिछले दो वर्षों में मनीष पारख के नेतृत्व में हुए उल्लेखनीय कार्यों में शामिल हैं—

मोर शहर मोर जिम्मेदारी पहल के तहत दुर्ग के गांधी चौक, शहीद चौक, राजेंद्र प्रसाद चौक और Y शेप ब्रिज स्थित चौक का पुनर्निर्माण कार्य।

स्वच्छता के उच्चतम मानकों के लिए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा सम्मान प्राप्त।

स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए धन्वंतरि अवार्ड द्वारा सम्मानित।

मेघ गंगा ग्रुप के विस्तार में TISD, FADE, VANNAKHAM एवं चॉकलेट स्टोरी जैसे नए उपक्रमों का विस्तार।

लाइफकेयर डायग्नोसिस में अत्याधुनिक तकनीक एवं महत्वपूर्ण मशीनों का समुचित इंस्टालेशन।

यह सम्मान न केवल मनीष पारख के अथक परिश्रम का परिणाम है, बल्कि दुर्ग शहर के लिए गर्व का विषय भी है कि यहां के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय समर्पण और उत्कृष्टता के प्रतीक के रूप में सम्मानित किया गया।

दुर्ग । शौर्यपथ  । नगर निगम में विपक्ष की भूमिका सुचारू रखने और जनता की आवाज़ बनने के दायित्व पर खरा उतरने को लेकर कांग्रेस के भीतर सांबा-सा तनाव स्पष्ट दिखने लगा है। पिछले छह महीनों के आंदोलन और नेता प्रतिपक्ष पद की प्रतीक्षा के बाद जब संजय कोहले को वह आरामदेह ऑफिस-व्यवस्था मिल गई, तो उनसे जुड़ी असंतुष्टि धीरे-धीरे मुखर होती जा रही है। अब कांग्रेस के नव-निर्वाचित जिला अध्यक्ष व पूर्व महापौर धीरज बांकलीवाल के ऊपर यह दायित्व सुलझाने की बड़ी जिम्मेदारी आ खड़ी हुई है — कि वे क्या निगम में सचमुच मजबूत विपक्ष तैयार कर पाएंगे या मामला फिर भी धूल में दफन हो जाएगा।

वृहत आरोप और नगर की बदहाल हालत

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और शहरवासियों के कहे अनुसार पिछले 20 सालों में जिस तरह निगम की हालत वर्तमान में बदहाली के शिखर पर नजर आ रही है, वह पहली बार भयावह रूप में नजर आ रहा है। जल आपूर्ति में अनियमितता, टूटे-फूटे और गड्ढों से भरी सड़कें, अतिक्रमण, रात में अंधेरे वाले रास्ते, बदबूदार वातावरण, कार्यालयों में अधिकारियों का अनुपस्थित होना, सफाई व्यवस्था की विफलता और धनवानों द्वारा अवैध पक्का निर्माण — ये वे मुद्दे हैं जो नागरिकों की रोज की परेशानियों का कारण बने हुए हैं।

इन तमाम समस्याओं के बीच कांग्रेस के दर्जनभर पार्षदों की उम्मीद थी कि उन्हें मिले नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले निगम में विपक्षी तीखापन बनाए रखकर जनता की आवाज़ बुलंद करेंगे। पर स्थानीय लोगों और कई पार्षदों का आरोप है कि कोहले पिछले छह महीने में सिर्फ़ एसी-कमरा और कैमरा मिलने के लिए आंदोलन करते रहे; और जैसे ही सुविधाएँ मिलीं, उन्होंने महापौर की प्रशंसा करने वाले व्यवहार में आ धीरे-धीरे विपक्षी भूमिका से दूरी बना ली।

कांग्रेस बनाम भाजपा: संगठनात्मक अनुशासन और जनता की धारणा

असंतुष्टि केवल कांग्रेस पार्षदों तक सीमित नहीं रही — दबी जुबां में भाजपा के कुछ पार्षद भी कहते सुने गए हैं कि जब नेता प्रतिपक्ष ही मौन हो जाए तो उनको किसके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषण यह बताता है कि विपक्ष की सक्रियता ही लोकतंत्र में सत्ता को जवाबदेह बनाती है; और यदि विपक्ष का नेतृत्व स्वयं साइलेंट मोड में चला जाए तो नगर शासन की जवाबदेही कमजोर पड़ती है और प्रशासनिक अनियमितताएँ बढ़ती हैं।

पार्टी कार्यकारिणी के अंदर यह मत बनता जा रहा है कि संगठन द्वारा दी गई ज़िम्मेदारी का यदि निर्वाह ईमानदारी से नहीं हो रहा तो बदलाव अपरिहार्य है। कई कांग्रेस पार्षद अब धीरज बांकलीवाल से यही अपेक्षा रखते हैं कि वे युवा जोश और सशक्त नेतृत्व के साथ नगर निगम में विपक्षी चेहरा बदलकर नए सिरे से सक्रियता दिखाएँ — वरना आरोपों को लेकर अंदरूनी असंतोष और सार्वजनिक धारणा दोनों ही पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती हैं।

धीरज बांकलीवाल पर क्या दबाव है?

धीरज बांकलीवाल, जिनके पास निगम की राजनीति की जानकारी और पूर्व महापौर के नाते अनुभव भी है, के ऊपर अब दो तरह का दबाव है — एक, निगम में अनियमितताओं और जनक्रोध के मुद्दों को उजागर कर एक जिम्मेदार और संघर्षशील विपक्षी नेतृत्व स्थापित करना; और दूसरा, संगठनात्मक संतुलन बनाए रखते हुए ऐसे कदम उठाना कि पार्टी की छवि सुधारे और स्थानीय लोकप्रियता बनी रहे। यदि बांकलीवाल पहले ही कार्यालय आवंटन आदि जैसी सुविधाएँ मिलने के बाद मौन रहने वालों की राह अपनाते हैं, तो कांग्रेस के लिए दीर्घकालिक राजनैतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सम्भावित परिणाम और राजनीतिक रणनीति

यदि जिला अध्यक्ष शीघ्र ही कदम नहीं उठाते — जैसे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका पर पुनर्विचार, नया चेहरा उतारना, या पारदर्शी सामूहिक रणनीति अपनाना — तो निगम में कांग्रेस का संघर्ष कमजोर दिखेगा और स्थानीय मतदाता वर्ग में निराशा बढ़ेगी। दूसरी तरफ़, सक्रिय विपक्ष और नियमित धरनों, प्रश्न-काल, जन सुनवाइयों और मीडिया-प्रेसर के जरिये मुद्दों को उठाने से निगम प्रशासन पर असर पड़ सकता है और नगर की समस्याओं का समाधान भी तेज़ हो सकता है — यही कांग्रेस पार्षदों की अपेक्षा है।

निष्कर्ष — यह मरीज कौन ठीक करेगा?

कुर्सी का मोह — यह केवल एक व्यक्तिगत दोष का टैग नहीं रह जाता बल्कि जब वह मोह लोकतंत्र के आवश्यक प्रतिस्पर्धी तंत्र को प्रभावित करने लगे, तब मामला गंभीर हो जाता है। आज की सवा-सवाल भरी राजनीति में धीरज बांकलीवाल के सामने यह चुनौती है कि वे क्या संजय कोहले को नए सिरे से सक्रिय कर पाएँगे, या आवश्यकता हुई तो विपक्ष का चेहरा बदलकर निगम में जनता की आवाज़ को फिर से बुलंद कर पाएँगे।

कांग्रेस की अगले कुछ कार्यवाहियों और निगम में उठने वाले सार्वजनिक मुद्दों पर उनके कदम यह तय करेंगे कि क्या दुर्ग नगर निगम में विपक्ष फिर से एक दबंग और जवाबदेह शक्ति बनकर उभरेगा — या कुर्सी का मोह लोकतंत्र की ज़रूरतों पर भारी पड़ जाएगा।

भारतीय लोक जीवन में श्री राम कृष्ण व्याप्त है
यही है सनातन संस्कृति - संत निरंजन

दुर्ग ग्रामीण / शौर्यपथ / पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू धर्मपत्नी श्रीमती स्व.कमला देवी साहू जी की पुण्य स्मृति में आयोजित ग्राम पाऊवारा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म का भव्य आयोजन किया गया।
कथा के पांचवे दिन कथा वाचक संत श्री निरंजन महाराज जी ने भगवान श्री कृष्ण अवतार की कथा का विस्तृत वर्णन करते हुये श्रोताओं को आनंदित किये।
ईश्वर के संकल्प सृष्टि का सृजन पालन संहार होता है। भगवान के नेत्र खोलने पर मुस्कुराने पर प्रलय और आंख टेढ़ी कर देने पर संहार हो जाता है।मानव मात्र को कर्तव्य कर्म मे प्रेरित करने अकर्ता ईश्वर हमें कार्य करते हुए दिखाई देते हैं। आत्मा राम अनुभूति का विषय है निर्गुण ब्रह्म सगुन रूप में लीला करते है आत्म तत्व के लिए स्वयं पर स्वयं की कृपा होना आवश्यक है।
सच्चिदानंद भगवान को जानने के लिए गुरुओं सन्तो के सरणों में लोट कर पद-रज से स्वयं को आनन्दित करें। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलायें और श्री कृष्ण के रूप में सर्वत्र प्रेम बाँटे। जंगलो में घुमते हुए बनवासी राम भोले -भाले आदिवासीयो को, पिछड़ो को गले लगाकर समाज के मूल धारा से जोड़े। वही योगीराज भगवान कृष्ण गोरक्षा प्रकृति संवर्धन, संगठन,स्वास्थ्य, सात्विक भोजन, निर्भीकता, सहजता धैर्य, साहस, स्नेह जैसी मानवीय मूल्यों को स्थापित कर संसार को पीड़ा देने वाले दैत्यों' का संहार किये।
द्वारीकाधीश के रूप में भगवान श्री कृष्ण कला संस्कृति का पोषण करते हुए कुशल प्रज्ञा पालन किये।कर्तव्य पथ में असहाय बने अर्जुन को युध्द कि किए प्रेरित कर कुशल युध्द संचालक बनकर गीला-ज्ञान भक्ति और वैराग्य को संदेशवाहक बने।भगवान के इन दिब्य लीलाओ का स्मरण करते हुए दुःख दर्द भरे इस दुनिया में जीवन का बाग सजाना है। पल भर सत्‌संग कथा हरि का सबसे अनमोल खजाना है।
जीवन को उत्सव बनाकर सम्पूर्ण जीवन को प्रेम और आनंद पूर्वक व्यतित करते, नित्य हम भगवान श्री कृष्ण के संदेश को आत्मसात कर धन्य बनें।

जैसे ही कथा में वासुदेव जी नवजात श्रीकृष्ण जी को लेकर कथा स्थल पर पहुंचे तो श्रद्धालु झूम उठे। श्रद्धालुओं नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से पांडाल गूंज उठा। इस मौके पर श्रीकृष्ण जन्म की खुशी में बधाई गाई गई और प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष डॉ निरेन्द्र साहू,पूर्व विधायक बालोद प्रीतम साहू,पूर्व विधायक साजा लाभचंद बाफना,पूर्व अध्यक्ष हस्त शिल्प बोर्ड दीपक साहू जिला अध्यक्ष साहू समाज नंद लाल साहू, कृष्णा साहू, मंजु साहू,रमेश साहू,अध्यक्ष सेवादल धमतरी होरिलाल साहू,तुलसी साहू,राष्ट्रीय महासचिव लक्ष्मी गुप्ता, हलधर साहू,कलाम, प्रभात धुर्वे,सरस्वती चंद्रकार,युगल पांडे, अखिलेश तिवारी,महेश दुबे, नवीन ताम्रकार,ईश्वर सोनी, राजेन्द्र ठाकुर, दीपिका चन्द्रकार, भीषम हिरवानी, रत्ना नारम देव,झमित गायकवाड़,सनीर साहू, रिवेन्द्र यादव, तारकेश्वर चन्द्रकार, घसिया देशमुख, बाबू लाल देशमुख, भुनेश्वरी ठाकुर,रुपेश देशमुख, मुकेश साहू, देवा साहू,गोपाल साहू, डालेश साहू नोहर साहू, सहित हजारों की संख्या में श्रोता समाज एवं समस्त आयोजन कर्ता व समस्त ग्रामवासी पाऊवारा बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

शौर्यपथ सम्पादकीय लेख 

दुर्ग शहर की राजनीति में चार दशक तक एक अदृश्य किंतु प्रभावशाली सत्ता रही—बंगले की राजनीति। कांग्रेस पार्टी भले सत्ता में आती-जाती रही, पर संगठन का वास्तविक संचालन लंबे समय तक एक ही पते के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। संगठन का दायरा कागज़ी रूप से विस्तृत था, किंतु व्यवहारिक संचालन सीमित दायरे में सिमट चुका था। शहर कांग्रेस कार्यालय का महीनों तक बंद रहना, चुनावी मौसम में भी वहां सन्नाटा पसरा होना और दूसरी ओर उसी समय बंगले में गतिविधियों की चहल-पहल—यह सब यह संकेत देता था कि दुर्ग में संगठन का अस्तित्व धीरे-धीरे धुंधला पड़ रहा है।

लेकिन इस बार समीकरण बदले हैं।
चार दशक बाद पहली बार दुर्ग कांग्रेस संगठन ने बंगले की छाया से बाहर निकलकर स्वतंत्र पहचान की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है। यह बदलाव केवल एक कार्यालय परिवर्तन भर नहीं है, बल्कि पूरी संगठनात्मक संस्कृति में हो रहे परिवर्तन का संकेतक है।


नए अध्यक्षों के आगमन ने बदली परिभाषा

दुर्ग ग्रामीण, भिलाई शहर और दुर्ग शहर—तीनों क्षेत्रों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति ने कार्यकर्ताओं के मन में उत्साह का संचार किया। उम्मीदें तब और मजबूत हुईं जब तीनों अध्यक्षों ने कांग्रेस कार्यालय में भव्य समारोह के साथ पदभार ग्रहण किया और यहीं से अपना दैनिक कार्य प्रारंभ किया।

सालों बाद पहली बार यह कार्यालय वास्तव में ‘आबाद’ दिखाई दिया।
यह दृश्य कार्यकर्ताओं के लिए महज़ औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि अब संगठन की पहचान किसी व्यक्तिगत निवास पर नहीं, बल्कि अपने आधिकारिक भवन की छत के नीचे बनेगी।


‘छत’ का बदलता अर्थ : अब सभी को साथ लेकर चलने की तैयारी

राजनीतिक विज्ञान में संगठनात्मक ढांचे की मजबूती को किसी भी पार्टी की रीढ़ माना गया है।
जहाँ छत सबको एक साथ जोड़ती है, वहीं उसका अभाव सभी को बिखेर भी सकता है।

दुर्ग में भी यही स्थिति थी—
कागज़ों में सैकड़ों पदाधिकारी, लेकिन जमीनी स्तर पर गिनती के सक्रिय कार्यकर्ता।
गुटबाजी का बोलबाला, किन्तु समाधान का कोई साझा मंच नहीं।

लेकिन अब जब संगठन एक स्वतंत्र छत के नीचे सक्रिय दिख रहा है, तो यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं बल्कि सत्ता केंद्रण से सामूहिक निर्णयवाद की ओर बढ़ते कदमों का सूचक है। पर्दे के पीछे चल रही मनमानी और मतभेद अब खुले में विमर्श के माध्यम से सुलझाए जाएंगे। यह बदलाव केवल संरचनात्मक नहीं, बल्कि मानसिकता का परिवर्तन भी है।


बंगले की राजनीति से संगठनात्मक राजनीति तक – एक बड़ा मोड़

वर्षों तक संगठन का दायरा इतना सीमित था कि आम जनता और कार्यकर्ताओं के लिए कांग्रेस मतलब बंगला हो गया था। यही राजनीतिक असंतुलन संगठन की जड़ें कमजोर कर रहा था।
आज जब कार्यकर्ता अपने कार्यालय में सक्रियता देख रहे हैं, तो उनमें अपनत्व की भावना जागृत हो रही है। संगठन और कार्यकर्ता के बीच की दूरी अब कम होती दिखाई दे रही है।

यह परिवर्तन कुछ लोगों को जरूर असहज कर रहा है—क्योंकि व्यक्तिगत सत्ता का परिदृश्य सिमट रहा है—लेकिन बहुसंख्य कार्यकर्ताओं के लिए यह लंबे समय से प्रतीक्षित सकारात्मक बदलाव है।


गुटबाजी सभी दलों में, लेकिन समाधान संगठन के तहत

यह सही है कि केवल कांग्रेस ही नहीं, हर राजनीतिक दल में गुटबाजी का अस्तित्व रहता है।
परंतु महत्वपूर्ण यह है कि
संगठन वह मंच होता है जहाँ अलग-अलग विचारधाराएँ, अलग-अलग व्यक्तित्व और अलग-अलग मत एक ही छत के नीचे खड़े होकर पार्टी की दिशा तय करते हैं।

दुर्ग कांग्रेस में यह मंच वर्षों तक निष्क्रिय रहा।
अब जबकि कार्यालय केंद्रित संरचना विकसित हो रही है, उम्मीद की जा रही है कि नेतृत्व सामूहिक रणनीति, सामूहिक निर्णय और सामूहिक मेहनत की दिशा में कार्य करेगा।


अध्यक्षों पर अब बड़ी जिम्मेदारी

तीनों अध्यक्षों पर अब एक बड़ी जिम्मेदारी है—
संगठन को बंगले की राजनीति से दूर रखते हुए, कार्यकर्ताओं में विश्वास, पारदर्शिता और समन्वय स्थापित करना।

यह बदलाव स्थायी बनेगा या फिर समय के साथ वापस पुराने ढर्रे पर लौटेगा—यह आने वाले दिनों में तय होगा। किंतु वर्तमान परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि दुर्ग कांग्रेस अब परिवर्तन की राह पर अग्रसर है। संगठन सक्रिय है, कार्यकर्ता आशान्वित हैं और लंबे समय से स्थिर पड़ी राजनीतिक ऊर्जा अब गति पकड़ती दिख रही है।


आगे की राह—संगठन की मजबूती से विपक्ष का सशक्त निर्माण

दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस वर्तमान में विपक्ष की भूमिका में है।
ऐसे में संगठन की सक्रियता केवल आंतरिक मजबूती ही नहीं, बल्कि मजबूत विपक्ष के रूप में जनता के मुद्दों को उठाने की क्षमता भी प्रदान करेगी।
नई नेतृत्व टीम यदि इसी सामूहिक सोच के साथ आगे बढ़ी, तो संगठन न केवल अपने अंदरूनी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में भी प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।


निष्कर्ष

चार दशक बाद दुर्ग कांग्रेस में आया यह परिवर्तन केवल कार्यालय परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
मनमानी की राजनीति के बजाय सामूहिक नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम—यह वही बदलाव है जिसकी कार्यकर्ताओं को वर्षों से प्रतीक्षा थी।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह नया ढांचा भविष्य में संगठन को किस दिशा में ले जाएगा।
लेकिन एक बात तय है—
दुर्ग कांग्रेस की यह नई शुरुआत न केवल उत्साहजनक है, बल्कि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज होने योग्य भी है।

   भिलाई निगम / शौर्यपथ / कैलाश नगर, मानसरोवर मंदिर के समीप स्थित खसरा नंबर 1591, 1592 एवं 1593, जो लंबे समय से शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, को बचाने के लिए स्थानीय नागरिकों ने बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। वर्ष 2023 में पार्षद नेहा साहू की पहल पर इस भूमि पर सामुदायिक भवन निर्माण हेतु नगर निगम भिलाई द्वारा निविदा जारी की गई थी, परंतु शासन परिवर्तन के बाद निविदा निरस्त हो गई।

भूमि पर कब्जे के लगातार प्रयास

भूमि लंबे समय से खाली होने के कारण भू-माफियाओं की नजर बनी हुई थी। इसी क्रम में आशा वैष्णव द्वारा अपने निजी खसरों (1588 और 1590/1) का सीमांकन शासकीय भूमि पर करवाने का प्रयास किया गया। मोहल्लेवासियों एवं पार्षद नेहा साहू ने स्थल पंचनामा में इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, क्योंकि बिना मूल दस्तावेज और रजिस्ट्री के शासकीय भूमि पर सीमांकन किया जा रहा था।
लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम आयुक्त एवं अतिरिक्त तहसीलदार को भूमि संरक्षण हेतु आवेदन किया गया, जिसके आधार पर राजस्व प्रकरण दर्ज कर टीम गठित की गई। सीमांकन प्रक्रिया कई बार भू-माफियाओं के हस्तक्षेप के कारण बाधित होती रही और महीनों तक प्रकरण लंबित रहा।

शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा

18 नवंबर 2025 को सुनील कश्यप एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा संपूर्ण भूमि पर पोल, प्री-कास्ट दीवार और कैमरा लगाकर कब्जा कर लिया गया। जब मोहल्लेवासियों ने इसका विरोध किया तो सुनील कश्यप ने दावा किया कि उसने यह जमीन आशा वैष्णव से खरीदी है। इसकी शिकायत पार्षद नेहा साहू ने नगर निगम, तहसीलदार, एसडीएम दुर्ग और कलेक्टर को दी, परन्तु तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच भू-माफियाओं द्वारा अवैध प्लॉटिंग भी शुरू कर दी गई।

01 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना

प्रकरण में विलंब व लगातार कब्जों के विरोध में पार्षद नेहा साहू तथा मोहल्लेवासी 01 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। इसी दिन तहसीलदार भिलाई ने आशा वैष्णव को काम रोकने और शासकीय भूमि सीमांकन का आदेश जारी किया।

सीमांकन में 80% भूमि शासकीय पाई गई

दो दिन चली सीमांकन प्रक्रिया में कब्जाई गई भूमि का करीब 80% हिस्सा शासकीय पाया गया।
जांच टीम ने बताया कि निजी खसरा 1590/1 का चिन्हांकन भी आवश्यक है। सीमांकन के बाद लगभग 28–30 घर शासकीय भूमि पर निर्मित पाए गए, जिनमें से आधे से अधिक घरों को आशा वैष्णव या उनके पिता द्वारा बेचा गया था। शेष घर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमोदित पाए गए।

छह दिन बाद प्रशासन से वार्ता

लगातार छह दिनों के धरने के बाद 06 दिसंबर 2025 की शाम को तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, जामुल थाना प्रभारी व टीम धरनास्थल पहुंचे। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि शासकीय भूमि को सुरक्षित किया जाएगा। निजी खसरों की स्थिति स्पष्ट होने तक क्षेत्र की वर्तमान स्थिति यथावत रखी जाएगी।

धरना समाप्त

संतोषजनक चर्चा के बाद पार्षद नेहा साहू एवं मोहल्लेवासियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की और जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा मीडिया का आभार व्यक्त किया।

bhilai / shouryapath / 06 दिसंबर 2025 को सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कोक ओवन एवं कोल केमिकल विभाग के सभागार में मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन) तुलाराम बेहरा के मुख्य आतिथ्य में राजभाषा के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने तथा भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित नीतियों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि तुलाराम बेहरा ने उद्बोधन में कहा कि कार्यक्षेत्र में वार्तालाप हिंदी में करने से संवाद सरल बनता है। कंप्यूटर, दस्तावेजों एवं रजिस्टरों में हिंदी में लेखन आज की आवश्यकता है। राजभाषा नीति के अनुसार पत्राचार एवं कार्यालयीन कार्य हिंदी में किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें शत-प्रतिशत कार्य हिंदी में करने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए। हिंदी हमारे समग्र निष्पादन को भी बेहतर बनाती है।

महाप्रबंधक एवं विभागीय हिंदी समन्वय अधिकारी एम.एस. नायडू ने विभाग द्वारा हिंदी के क्षेत्र में की जा रही पहलों, विशेष कार्यों तथा संयंत्र स्तरीय प्रतियोगिताओं के विजेताओं की जानकारी दी। विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विभाग में राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों का पालन किया जाता है तथा अधिकारियों के सभी नामपट्ट और रबर स्टाम्प द्विभाषी हैं।

कार्यक्रम में राजभाषा विभाग द्वारा सामान्य ज्ञान आधारित एक रोचक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें एम.एस. नायडू, विजेन्द्र कुमार वर्मा और हेमराज क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार विजेता रहे। प्रोत्साहन पुरस्कार मधुसूदन नायक (महाप्रबंधक–प्रभारी सीआरजी), देवेन्द्र कुमार सोनी (इंजीनियरिंग एसोसिएट) और डी. विक्टर (चार्जमेन) को प्रदान किए गए।

कार्यशाला में महाप्रबंधक (प्रभारी प्रचालन) झगर सिंह, महाप्रबंधक (यांत्रिकी) मधुसूदन नायक, टी.ए. गगन किशोर, इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा, रमेश दौने, राजेन्द्र कुमार गजेन्द्र, लोकचंद यादव, लेखराम घरेन्द्र, भोपाल सिंह ब्राहेन, उदय राज रामटेके, केदार वर्मा, अनिश कुमार राम, जूनियर इंजीनियरिंग एसोसिएट नरेन्द्र कुमार जोशी तथा टेक्नीशियन वी. दिवाकर राव, डेविड कुमार और दीनबंधु दुर्गा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

उप प्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन–राजभाषा) जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों की जानकारी दी तथा ऑनलाइन वॉइस टाइपिंग एवं ‘सैप’ प्रणाली में हिंदी में नोटशीट तैयार करने का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का संचालन इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन इंजीनियरिंग एसोसिएट विजेन्द्र कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)