August 09, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    विशेष लेख
    नंदनवन जंगल सफारी नवाँ रायपुर में पर्यटकों के लिए कई प्रकार की रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं, जिनमें शाकाहारी सफारी, टाइगर सफारी, भालू सफारी और लायन सफारी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहाँ एक छोटा चिड़ियाघर (नंदनवन जू) भी है।
    छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है।
    मिनी जू से जंगल सफारी तक का सफर
    नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में ‘नंदनवन मिनी जू’ के रूप में हुई थी। यह वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक रूप से ‘मिनी जू’ की मान्यता दी।
    इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।
    वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा पर विशेष जोर
    नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रजनन और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
    पांच प्रमुख सफारी जोन हैं आकर्षण का केंद्र
    नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।


    शाकाहारी सफारी
    30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जोन में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण जैसे वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं।
    भालू सफारी
    20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित भालू सफारी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भालुओं को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है।
    बाघ सफारी
    20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बाघ सफारी में पर्यटक देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।
    सिंह सफारी
    20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।

    जू जोन
    50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं।
    दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों का भी संरक्षण
    नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ जैसे वन्यजीव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।

    देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक
    वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 में ही देश-विदेश से 1 लाख 74 हजार 611, वर्ष 2019-20 में 1 लाख 60 हजार 767 ,वर्ष 2020-21 में 1 लाख 60 हजार 32, वर्ष 2021-22 में 1 लाख 73 हजार 72, वर्ष 2022-23 में 2 लाख 77 हजार 881, वर्ष 2023-24 में 2 लाख 62 हजार 486, वर्ष 2024-25 में 2 लाख 70 हजार 942, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785, से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
    जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता का केंद्र
    नंदनवन जंगल सफारी में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
    रायपुर से आसान पहुंच
    नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।
    वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र
    नंदनवन जंगल सफारी आज छत्तीसगढ़ में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र बन चुका है, जहां प्रकृति के करीब पहुंचकर वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश भी मिलता है .
    साभार
    धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक, जनसंपर्क )
    अशोक कुमार चंद्रवंशी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

       रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधानों पर राज्यपाल से विचार-विमर्श किया। श्री डेका ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के सबंद्ध में अपने विचार साझा किए।
    इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति गजराज पगारिया, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई दुर्ग के कुलाधिपति आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलाधिपति सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, गरियाबंद और रायपुर के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय रायपुर के सीईओ चिन्मय दावड़ा, कोलंबिया विश्वविद्यालय रायपुर के प्रो. कुलाधिपति हरजीत सिंह हूरा उपस्थित थे।

    दुर्ग । शौर्यपथ । 

    जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री राहुल शर्मा ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने वादों से मुंह मोड़कर शिक्षकों, छात्रों और पूरे शिक्षा तंत्र के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियां लगातार यह साबित कर रही हैं कि सरकार शिक्षा और शिक्षक—दोनों के प्रति संवेदनहीन है।

    राहुल शर्मा ने कहा कि नियमितीकरण एवं अन्य जायज मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संघ पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहा था, लेकिन छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान देना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर अतिथि शिक्षकों की मांगों का समाधान करने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही वह अपना वादा भूल गई। यह भाजपा की पुरानी कार्यशैली बन चुकी है कि चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और सरकार बनने के बाद उन्हें भुला दिया जाता है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि मांगों के समाधान के बजाय सरकार ने आंदोलनरत शिक्षकों के साथ दमनकारी रवैया अपनाया। पुलिस प्रशासन द्वारा धरनास्थल से टेंट हटाए गए और शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को दमन की जगह संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण, सम्मानजनक मानदेय तथा स्थायी नीति पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।

    राहुल शर्मा ने कहा कि "शिक्षा के मंदिर को बचाने वाले गुरुजनों पर तानाशाही और अत्याचार की जितनी भी निंदा की जाए, कम है।" उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का भविष्य गढ़ते हैं और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी संवेदनशील सरकार को शोभा नहीं देता।

    कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। उनके अनुसार इस मामले में लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं की मेहनत प्रभावित हुई, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से छात्रों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर कथित लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए और एक छात्र की मृत्यु होने का भी दावा किया गया।

    उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करती तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।

    राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य—दोनों स्तरों पर भाजपा सरकारों की नीतियां शिक्षा, शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित नहीं होगी, तब तक देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था को न्याय नहीं मिल सकेगा।

    22 लाख छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाने का दावा, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और संसद में जल्द नया विधेयक लाने का भरोसा नई दिल्ली। देशभर में पेपर लीक के मुद्दे…

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों का आंदोलन नए मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने सोनम वांगचुक ने 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन प्रदर्शन अब भी जारी है। दूसरी ओर, आंदोलन की प्रमुख मांगों को लेकर सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच आज संविधान क्लब में उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो गई है।

    सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में दोपहर 12:30 बजे दूसरे दौर की औपचारिक बैठक शुरू हुई। इस बैठक में छात्रों की मांगों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने तथा अन्य प्रमुख मांगों पर विचार करने का लिखित आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल में अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया।

    हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अडिग हैं। जंतर-मंतर पर धरना जारी है और देशभर में समर्थन प्रदर्शन आयोजित करने का भी ऐलान किया गया है।

    उधर, राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। जंतर-मंतर, संविधान क्लब और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई प्रमुख मार्गों और मेट्रो स्टेशनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

    अब देशभर की निगाहें सरकार और CJP के बीच चल रही वार्ता पर टिकी हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आंदोलन के समाधान की संभावना बन सकती है, लेकिन फिलहाल "अनशन खत्म, प्रदर्शन जारी" की स्थिति बनी हुई है।

    *तालाबों की धरती पर खुलेगी समृद्धि की नई राह, किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का बन सकता है बड़ा माध्यम*

    रायपुर / छत्तीसगढ़ को वर्षों से "धान का कटोरा" कहा जाता है, लेकिन अब यह राज्य मखाना उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बनाने की क्षमता रखता है। प्रदेश में हजारों तालाब, सिंचाई जलाशय, अनुकूल जलवायु और मेहनतकश मछुआरा समुदाय मखाना खेती के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मखाना उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।

    मखाना आज केवल एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि देश-विदेश में लोकप्रिय "सुपरफूड" बन चुका है। उच्च पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और बढ़ती बाजार मांग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 में मखाना विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना शुरू की है, जिसमें छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया है।

    *छत्तीसगढ़ के लिए क्यों है सुनहरा अवसर?*

    प्रदेश के अधिकांश जिलों में बड़े और छोटे तालाबों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। इनमें से अनेक जलाशयों का अभी भी पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए, तो एक ही जलाशय से दोहरी आय प्राप्त की जा सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की कन्हार मिट्टी, पर्याप्त जल उपलब्धता और जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाकर यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव है।

    मखाना मिशन से बदल सकती है तस्वीर

    केंद्र सरकार की मखाना विकास योजना के प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, मखाना क्षेत्र का विस्तार, किसानों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, वैज्ञानिक खेती तकनीकों का प्रसार, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा, निर्यात को प्रोत्साहन तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना है।

    यदि इन उद्देश्यों के अनुरूप प्रदेश में कार्य किया जाए, तो मखाना खेती किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और मछुआरा सहकारी समितियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खोल सकती है।

    *नवाचार से मिली नई दिशा*

    छत्तीसगढ़ में मखाना खेती को बढ़ावा देने में कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रदेश की परिस्थितियां मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। उनके तकनीकी मार्गदर्शन में बालोद जिले में सफल मखाना खेती का प्रयोग किया गया है।

    केवल खेती ही नहीं, बल्कि लगभग 1.35 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला मखाना प्रोसेसिंग सेंटर भी स्थापित किया गया, जिससे उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं। "दाऊजी मखाना" ब्रांड ने भी बाजार में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है।

    *मछली और मखाना: दोहरी कमाई का मॉडल*

    फिश-कम-मखाना फार्मिंग मॉडल छत्तीसगढ़ के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन करने से एक ही जलाशय से दोहरी आय, मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव, महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योग विकसित हो सकेंगे। 

    *महिला समूहों के लिए रोजगार के अवसर*

    मखाना खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके साथ जुड़े कई कार्य रोजगार सृजन के बड़े माध्यम बन सकते हैं, जैसे बीज प्रसंस्करण, मखाना भूनना और फोड़ना, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग

    *मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण*

    मखाना आधारित लघु उद्योग स्थापित कर स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में एक समर्पित "छत्तीसगढ़ मखाना मिशन" शुरू किया जाना चाहिए। इसके तहत कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सिंचाई और पंचायत विभागों को मिलकर कार्य करना होगा। साथ ही किसानों, युवाओं, महिला समूहों और मछुआरा समितियों को प्राथमिकता देकर उन्हें प्रशिक्षण, अनुदान और बाजार से जोड़ना होगा।

    छत्तीसगढ़ के पास वह सब कुछ है, जो मखाना उत्पादन के लिए आवश्यक है जल, भूमि, श्रमशक्ति और संभावनाएं। यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम करें, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल "धान का कटोरा" ही नहीं, बल्कि "देश का उभरता हुआ मखाना राज्य" भी कहलाएगा।

    मखाना खेती किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण, मछुआरा समुदाय के आर्थिक उत्थान और ग्रामीण उद्योगों के विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। अब आवश्यकता है दूरदर्शी सोच और ठोस पहल की।

    एसपी भावना पांडेय के निर्देश पर आपातकालीन सेवा का आकस्मिक परीक्षण, काल्पनिक सड़क दुर्घटना की सूचना पर तुरंत सक्रिय हुई पुलिस टीम

    धमतरी। आमजन को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में धमतरी पुलिस लगातार सक्रिय है। इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय के निर्देश पर डायल-112 सेवा की कार्यक्षमता और रिस्पांस टाइम का आकस्मिक परीक्षण किया गया, जिसमें पुलिस टीम ने मात्र 5 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी तत्परता और दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

    एएसपी ने खुद परखी डायल-112 की तैयारियां

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शैलेन्द्र कुमार पांडेय ने डायल-112 सेवा की सरप्राइज चेकिंग करते हुए सड़क दुर्घटना की एक काल्पनिक सूचना कंट्रोल रूम को भेजी। सूचना मिलते ही डायल-112 टीम तत्काल सक्रिय हुई और महज पांच मिनट के भीतर निर्धारित स्थान पर पहुंच गई।

    रिस्पांस टाइम और कार्यप्रणाली का किया निरीक्षण

    घटनास्थल पर पहुंचे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पांडेय ने स्वयं डायल-112 की रिस्पांस टाइम, टीम के समन्वय, कार्यप्रणाली और तत्परता का निरीक्षण किया। उन्होंने त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की तथा भविष्य में भी इसी संवेदनशीलता और मुस्तैदी के साथ आमजन को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    आपात स्थिति में तुरंत करें डायल-112 पर कॉल

    धमतरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सड़क दुर्घटना, अपराध, विवाद, चिकित्सा सहायता अथवा किसी भी अन्य आपातकालीन स्थिति में बिना देर किए डायल-112 पर संपर्क करें। पुलिस की यह सेवा 24×7 आमजन की सुरक्षा और सहायता के लिए निरंतर उपलब्ध है।

    शौर्यपथ विशेष

    धमतरी पुलिस द्वारा किया गया यह सरप्राइज रिस्पांस टेस्ट दर्शाता है कि आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस महकमा नियमित रूप से अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है। ऐसी पहलें न केवल पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ाती हैं, बल्कि आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत करती हैं।

    गुंडरदेही 

     

     भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल गुण्डरदेही द्वारा आज धमतरी चौक में प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के विरुद्ध कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई कथित अभद्र, अपमानजनक एवं आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में राहुल गांधी का पुतला दहन कर जोरदार प्रदर्शन किया गया।

    इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने कहा कि "विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना, संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करना और राजनीतिक नौटंकी करना कांग्रेस की पुरानी प्रवृत्ति रही है। भारतीय जनता पार्टी सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक परंपराओं एवं राष्ट्रहित की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ी रहेगी। प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध की गई अभद्र टिप्पणियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।"

    कार्यक्रम के दौरान भाजपा एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कांग्रेस के विरोध में नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

    इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन जिला महामंत्री अनूप देशमुख, भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीतीश राजा सोनकर, सुभाष चंद्राकर, सौरभ चोपड़ा, गोकुल निषाद, संतोष नेताम , लालवीर सिंह, नमन जैन, सूरज यादव, मोपेंद्र साहू, कुणाल कुर्रे,पोषण सहित भाजपा एवं भाजयुमो के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    धमतरी। कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में धमतरी जिले ने प्रदेश में नई मिसाल कायम की है। धमतरी छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। गुरुवार को ग्राम लोहरसी स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने जिले की 10 समितियों में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं ड्रोन उड़ाकर इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में चयनित सभी समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने ड्रोन स्प्रेयर का प्रदर्शन किया। ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव, कम समय में अधिक क्षेत्र का उपचार, श्रम और लागत में कमी तथा सुरक्षित कृषि प्रबंधन की विशेषताओं से किसानों को अवगत कराया गया। किसानों ने भी इस नई तकनीक को खेती के लिए उपयोगी और समय की आवश्यकता बताया।

    मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए लगातार तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक ड्रोन तकनीक पहुंचाने की यह पहल कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे किसानों का समय बचेगा, श्रमिकों पर निर्भरता कम होगी, कम लागत में अधिक प्रभावी छिड़काव संभव होगा और उत्पादन क्षमता के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

    उन्होंने कहा कि धमतरी को कृषि नवाचारों का मॉडल जिला बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में इस सुविधा का विस्तार अन्य सहकारी समितियों तक भी किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने समिति परिसर में कृषि एवं कीटनाशक विक्रय केंद्र का शुभारंभ किया। उन्होंने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधरोपण किया तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति पत्र भी वितरित किए।

    कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि जिले की बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंडेल, गाड़ाडीह, जुगदेही और करेली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है। इन समितियों के माध्यम से किसान नाममात्र के सेवा शुल्क पर ड्रोन से उर्वरक एवं कीटनाशकों का छिड़काव करा सकेंगे। इससे कृषि यंत्रीकरण को गति मिलेगी और आधुनिक तकनीक गांव-गांव तक पहुंचेगी।

    उन्होंने बताया कि CSC e-Governance Services India Limited के सहयोग से इन समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों को ड्रोन सेवाओं के साथ विभिन्न डिजिटल और शासकीय सेवाएं भी एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। इससे सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगी।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक से रसायनों का संतुलित एवं लक्षित छिड़काव होगा, पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा, फसलों की गुणवत्ता में सुधार आएगा तथा खेतों में सीधे प्रवेश की आवश्यकता कम होने से फसलों को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। वहीं प्रशिक्षित युवाओं के लिए ड्रोन संचालन के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा, औषधि बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा, डीएफओ कृष्ण जाधव, सहकारिता एवं कृषि विभाग के अधिकारी, CSC प्रतिनिधि, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।

    रायपुर । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली से मानवाधिकार शिक्षा एवं लैंगिक समानता के विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने बुधवार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर का दौरा किया। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनोज दयाल से भेंट कर मानवाधिकार संरक्षण, पत्रकारों के हितों, उनके उत्थान एवं कल्याण तथा मानवाधिकार शिक्षा को सुदृढ़ करने अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

    प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ है। इसलिए पत्रकारिता का मानवाधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

    कांफ्रेंस रुम में प्राध्यापक, अधिकारी एवं कर्मचारियों से बैठक में मानवाधिकार, लैंगिक समानता और पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर प्रो. त्रिपाठी ने विस्तार से बात की। उन्होंने विश्वविद्यालय में पत्रकारिता और मानवाधिकार विषय पर नवीन पाठ्यक्रम, मानवाधिकार प्रकोष्ठ के गठन, विद्यार्थियों के लिए ह्यूमन राइट्स क्लब की स्थापना और जनसंचार एवं मानवाधिकार विषयक द्विभाषी शोध पत्रिका के प्रकाशन का प्रस्ताव दिया तथा केटीयू को मानवाधिकार जागरूकता, शोध एवं प्रशिक्षण गतिविधियों का केंद्र बनाने सुझाव दिए। 

    विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने अध्ययन संकाय, प्रशासनिक प्रभाग सहित परिसर का निरीक्षण किया। प्रो. त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि पुस्तकालय के आधुनिकीकरण हो एवं ऑनलाइन डिजिटल लाइब्रेरी विकसित हो। टेलीविजन स्टूडियो और सामुदायिक रेडियो स्टेशन- रेडियों संवाद 90.8 एफएम में प्रो. त्रिपाठी ने विशेष भेंटवार्ता प्रोग्राम रिकार्डिंग की।

    लैंगिक समानता एवं संवेदनशीलता के लिए नियमित प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद तथा निःशुल्क चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए विशेषज्ञ पैनल के गठन की अनुशंसा की गई। कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने उनके सुझावों पर शासन से समन्वय कर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

     

    (सुनील कुमार शर्मा)

    कुलसचिव

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