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April 21, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

नारायणपुर / शौर्यपथ /  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज नारायणपुर के गरांजी स्थित केंद्रीय विद्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने इस अवसर पर विद्यालय परिसर में बस्तर सांसद और मंत्रीगणों के साथ वृक्षारोपण भी किया। मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय विद्यालय में संचालित गतिविधियों की सराहना करते हुए वहां की विजिटर्स बुक में विद्यालय के शिक्षकों तथा छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने वाली पक्तियां भी लिखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का स्वागत विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत से किया गया। कार्यक्रम के दौरान बस्तर सांसद दीपक बैज, राज्य के वाणिज्य कर एवं आबकारी मंत्री  कवासी लखमा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चन्दन कश्यप, अंतागढ़ विधायक  अनूप नाग, सहित डीआईजी  आनंद छाबड़ा, कलेक्टर  धर्मेश कुमार साहू, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री राहुल देव, पुलिस अधीक्षक  मोहित गर्ग, केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य आर.पी.सिंह सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मिडियम स्कूल का लोकार्पण सहित महादेव तालाब, लोहा डोंगरी पार्क एवं गौठान का करेंगे अवलोकन

बीजापुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 10 जनवरी को बीजापुर प्रवास के दौरान जिलेवासियों को 328 करोड़ रूपये लागत के विकास कार्यों की सौगात देंगे। जिसमें 241 करोड़ 75 लाख रूपये लागत के 72 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 86 करोड़ 74 लाख रूपये लागत के 54 विकास कार्यों का लोकार्पण सम्मिलित है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल बीजापुर में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल का लोकार्पण करेंगे, वे वहीं महादेव तालाब सहित लोहा डोंगरी पार्क एवं शहरी गौठान बीजापुर का अवलोकन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों तथा युवाओं से भेंट कर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री द्वारा दूरस्थ अबुझमाड़ ईलाके के गांवों को जोड़ने के लिए 37 करोड़ 92 लाख रूपए बेदरे-लंका मार्ग पर इन्द्रावती नदी में उच्च स्तरीय पुल निर्माण सहित पिनकोण्डा तालनार मार्ग में मरी नदी पर 11 करोड़ रूपए की लागत से पुल निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया जाएगा। इसके साथ ही कोएनार-एरमनार से तोयनार सड़क निर्माण, 5 करोड़ 96 लाख की लागत से टिकलेर से रेड्डी सीमंेंट कांक्रीट सड़क निर्माण, 34 करोड़ 13 लाख रूपए की लागत से 15 ग्रामीण सड़कों का निर्माण, 37 करोड़ 9 लाख रूपये की लागत से भोपालपटनम-तारलागुड़ा डामरीकृत सड़क निर्माण कार्य, 1 करोड़ 75 लाख रूपये की लागत से गुड़साकाल स्टापडेम निर्माण, 1 करोड़ 64 लाख रूपये की लागत से मोदकपाल एनीकट निर्माण 2 करोड़ 51 लाख रूपये की लागत से मूसालूर में 3.15 एमव्हीए 33/11 केव्ही विद्युत उपकेन्द्र निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन करेंगे।
मुख्यमंत्री बघेल द्वारा लोकार्पण किये जाने वाले प्रमुख विकास कार्यों में मुख्यमंत्री मंजरा-टोला विद्युतीकरण योजनातंर्गत 15 करोड़ 96 लाख रूपए की लागत से 72 ग्रामों के 160 बसाहटों में विद्युतीकरण कर 3859 परिवारों को निःशुल्क बिजली कनेक्शन प्रदाय, 1 करोड़ 6 लाख रूपए की लागत से बीजापुर के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल उन्नयन सहित बीजापुर, भैरमगढ़ एवं भोपालपटनम ब्लाक में 15 करोड़ 64 लाख रूपये की लागत से अधिकारी-कर्मचारी आवास निर्माण, 2 करोड़ 59 लाख रूपये की लागत से 36 पुलिया निर्माण, 2 करोड़ 47 लाख रूपये की लागत से धान खरीदी केन्द्रों में चबूतरा निर्माण, 1 करोड़ 35 लाख रूपये की लागत से मद्देड़ में तेन्दूपत्ता गोदाम निर्माण, 2 करोड़ 8 लाख रूपये की लागत से भोपालपटनम में आईटीआई भवन निर्माण, 14 करोड़ 71 लाख रूपये की लागत से कुटरू-बेदरे डामरीकृत सड़क, एक करोड़ 68 लाख रूपये की लागत से चेरपल्ली-यापला सड़क निर्माण इत्यादि कार्य शामिल हैं।

सफलता की कहानी /शौर्यपथ /

पशुधन विकास विभाग द्वारा हितग्राही मूलक योजनाओं का क्रियान्वयन सुकमा जिले में सफलता पूर्वक हो रहा है। जिले में विभागीय योजनाओं जैसे बैकयार्ड कुक्कट पालन, शबरी लेयर फार्मिंग, शूकर पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन आदि योजनाओं के तहत हितग्राहियों को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक मजबूती, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
गरीबी उन्मूलन योजना के अन्तर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्येश्य से पशुधन विकास विभाग जिला सुकमा द्वारा नवम्बर माह में ग्राम पंचायत केरलापाल के ग्यारह स्व-सहायता समूहों को एक-एक माह के 50-50 नग कड़कनाथ चूजे एवं दाना प्रदान किया गया था। जिससे उन्हें अपनी आय में वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक स्थिति सदृढ़ करने में सहायता मिल सके।
चूज़ों की देख-रेख में देती हैं पर्याप्त समय
पटेलपारा केरलापाल में सत्यम स्व सहायता समूह, जय मां काली स्व सहायता समूह एवं शिवम् स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि कड़कनाथ के चूजे मिलने से उन्हें आत्मनिर्भरता की राह नजर आई। महिलाओं ने बताया कि विभाग द्वारा प्रदाय किए गए चूजे उत्तम नस्ल के है जिनसे वे निश्चित ही आर्थिक लाभ कमा सकेंगी। जय मां काली समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुकड़ी मरकाम ने बताया कि इन चूजों को रोजाना तीन समय खुराक दी जाती है जो इनकी वृद्धि होने में सहायक है। विभाग द्वारा चूजों के लिए 50 किलो दाना भी प्रदान किया गया है।
वहीं ग्राम केरलापाल सड़कपारा के शेरावाली स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती गन्धेश्वरी मंडल ने बताया कि समूह की महिलाएं चूजो की देख रेख के लिए पर्याप्त समय देती है। समूह के सदस्य कड़कनाथ चूजों के पालन को लेेकर खासी उत्साही हैं। चूजों को खुराक में वे दाने के साथ चावल, धान, कोंढा आदि मिलाकर देती है जिससे उनमें जल्दी वृद्धि हो। इसके साथ ही ठंड से बचाने के लिए बाड़े को चारों तरफ से कपड़े और बोरे से ढंक रखा है ताकि चूजे मौसमी सर्दी से बचे रहे। सुबह और रात को बाड़े को गरम रखने के लिए बल्ब और अलाव जलाकर व्यवस्था करती है, जिससे बाड़े में संतुलित तापमान बना रहता है।
कड़कनाथ का व्यवसाय कर कमाएंगी हजारों रुपए
चर्चा के दौरान हितग्राही महिलाओं ने बताया कि कड़कनाथ नस्ल के मुर्गियों की बाजार में अच्छी खासी कीमत है। अपने पौष्टिक गुणों के कारण साधारण प्रजाति की मुर्गियों की तुलना में इसकी कीमत लगभग दो से तीन गुना है। मंहगी होने के बावजूद भी लोग इसे खरीदने से कतराते नहीं। स्थानीय बाजार में कड़कनाथ बड़ी आसानी से लगभग 800 रुपए प्रति किलो की दर से बिक जाते है। जय मां काली स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती देवे मिश्रा ने बताया कि उनके आस पास पड़ोस के लोगों ने अभी से मुर्गियों के लिए नाम लिखवा रखे हैं। चूज़े अभी लगभग 700 ग्राम वजनी हैं, पर्याप्त वजन होने के बाद वे अपने ग्राहकों को कड़कनाथ विक्रय कर देंगी।
शासन द्वारा प्रदाय किए गए कड़कनाथ का व्यवसाय कर स्व-सहायता समूह की महिलाएं अधिक आय अर्जित कर सकती हैं। व्यवसाय से उन्हें कड़कनाथ विक्रय करने से तो फायदा होगा ही साथ ही अंडों से निकलने वाले चूजों से वे अगली खेप खुद ही तैयार कर सकती है। अपने विशिष्ट स्वाद और पौष्टिक तत्वों के कारण कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गे-मुर्गियां कई प्रकार के रोग के निवारण में फायदेमंद होने के कारण इसकी अच्छी मांग रहती है। जिसको ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा गरीब तबके की महिलाओं को स्वावलंबी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चूजे प्रदान किए गए हैं। स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निष्ठा और लगन इस बात को दर्शाता है कि शासन की योजनाएं ग्रामीण अंचल के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। जिसमें ग्रामीणों को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की राह सुदृढ नजर आती है।

खेल /शौर्यपथ / पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एलेन बाॅर्डर ने शनिवार को तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन भारतीय बल्लेबाजी रणनीति की आलोचना की और कहा कि चेतेश्वर पुजारा शॉट खेलने में डरे हुए थे और ऐसा लग रहा था कि वह रन बनाने के बजाए क्रीज पर टिके रहने के लिए खेल रहे थे। वहीं रिकी पोंटिंग ने भी पुजारा की बैटिंग की आलोचना की है।
बाॅर्डर ने 'फाक्सस्पोर्ट्स डॉट कॉम डॉट एयू' से कहा, 'वह (पुजारा) शॉट खेलने के लिये बिलकुल डरा हुआ लग रहा है, क्या ऐसा नहीं है? वह रन जुटाने के बजाय अपना विकेट बचाए रखने के लिये खेल रहा है।' उन्होंने कहा, 'इस सीरीज में उसका ज्यादा प्रभाव नहीं रहा है, उसने अपने रन जुटाने में इतना लंबा समय लिया, ऐसा लग रहा है कि वह क्रीज पर स्थिर हो गया है और इसका भारतीय बल्लेबाजी पर असर पड़ा। वे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी पर हावी होते नहीं दिखे।'
बाॅर्डर ने कहा, ''श्रेय गेंदबाजी को दिया जाना चाहिए जो काफी अच्छी रही और ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें कभी भी दबाव से बाहर नहीं निकलने दिया। आधी जंग तो यही है, गेंदबाजों को विकेट लेने में काफी मुश्किल हो रही थी लेकिन अगर स्कोरबोर्ड ही नहीं बढ़ रहा तो अंत में यह आपका इनाम ही है।' पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी पुजारा की बल्लेबाजी की आलोचना की और कहा कि 'उन्हें अपनी स्कोरिंग गति में थोड़ा तेज होना चाहिए था क्योंकि मुझे लगता है कि इससे उनके बल्लेबाजी जोड़ीदारों पर ज्यादा ही दबाव पड़ रहा था।'
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई आल राउंडर टॉम मूडी का हालांकि मानना है कि पुजारा अपना नैसर्गिक खेल खेल रहे थे और स्कोरबोर्ड को चलायमान रखने की जिम्मेदारी कप्तान अजिंक्य रहाणे और हनुमा विहारी की थी। मूडी ने 'ईएसपीएनक्रिकइंफो से कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इसमें पुजारा की कोई गलती है, अपने करियर में उसने आमतौर पर इसी तरह का क्रिकेट खेला है और टीम का उनसे अपनी नैसर्गिक शैली के उलट खेल की मांग करना अनुचित होगा।'
उन्होंने कहा, 'मैं इसे रहाणे और विहारी पर डालूंगा। विहारी आये और 38 गेंदों में चार रन बनाए। मेरे हिसाब से इन दोनों खिलाड़ियों को स्कोर को बढ़ाते रहने की जरूरत थी, उन्हें पुजारा की इस श्रृंखला में ही नहीं बल्कि अन्य सीरीज में भी भूमिका को समझना चाहिए कि उन्होंने भारत के लिये टेस्ट क्रिकेट खेला है।'

मनोरंजन /शौर्यपथ /डिजीटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ज़ी-5 पर आज फिल्म 'कागज' रिलीज हुई है। सतीश कौशिक द्वारा निर्देशित इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी लीड रोल में हैं। इसके अलावा खुद सतीश कौशिक, एम मोनल गज्जर, मीता वशिष्ठ, अमर उपाध्याय, नेहा चौहान, संदीपा धर, ब्रिजेंद्र काला जैसे कलाकारों ने भी फिल्म में अहम भूमिका निभाई है। फिल्म का ट्रेलर कई दिनों पहले ही रिलीज हो गया था। उसके बाद से ही वाले पंकज त्रिपाठी के फैन्स फिल्म के रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
फिल्म की कहानी काफी रोमांचक और अचंभित कर देने वाली है। उस पर पंकज त्रिपाठी की एक्टिंग सोन पर सुहागा का काम करती है। दरअसल फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के जीवन पर आधारित है, जो असल में तो जिंदा होता है लेकिन कागजी दस्तावेजों में उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद पूरी फिल्म इसी कहानी के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है।
इस दौरान फिल्म में देश के सरकारी तंत्र की खस्ता हालत दिखाने की कोशिश की जाती है कि कैसे देश का सिस्टम पूरी तरह से किसी भीं इंसान की आसान और नॉर्मल जिंदगी को बर्बाद कर सकता है। कैसे महीनों अदालत और कोर्ट-कचहरी करने के बाद भी आसानी से न्याय नहीं मिलता है। पूरी फिल्म एक ऐसे ही इंसान की कहानी है जो खुद को जिंदा साबित करने के लिए पूरे सरकारी सिस्टम के खिलाफ संघर्ष करता है। इस संघर्ष में वह अपने जैसे और भी तमाम लोगों को भी इस लड़ाई में शामिल करता है।
फिल्म की कहानी की बात करें तो यह शुरू में तो थोड़ी हल्की लगती है लेकिन बाद में फिल्म सीरियस होती चली जाती है। एक दर्शक के तौर पर आप भी फिल्म में रमते चले जाते हैं। हालांकि कहीं-कहीं पर फिल्म की कहानी थोड़ी स्लो भी होती है लेकिन पंकज त्रिपाठी की बेहतरीन कलाकारी की वजह से यह बात आपको कम ही महसूस होगी।
पंकज त्रिपाठी ने किरदार में डूबकर की है एक्टिंग: फिल्म के लीड रोल में भरत लाल का किरदार निभाते हुए पंकज त्रिपाठी उस किरदार में इतना घुस जाते हैं कि आप कुछ भूल जाते हैं कि यह कोई फिल्म चल रही है और कोई अभिनेता एक्टिंग कर रहा है। शायद यही एक कलाकार के तौर पर पंकज त्रिपाठी की खूबी भी है। इसके अलावा भरत लाल की पत्नी रुक्मणि के किरदार में एम मोनल गज्जर और वकील साधुराम के किरदार में सतीश कौशिक ने भी अच्छा काम किया हैं। साथ ही फिल्म में मीता वशिष्ठ, नेहा चौहान, अमर उपाध्याय और ब्रिजेंद्र काला जैसे कालाकार भी अलग-अलग भूमिका में नजर आए हैं।
लाल बिहारी की कहानी पर आधारित है फिल्म: दरअसल सतीश कौशिक की यह फिल्म मुख्य तौर पर लाल बिहारी मृतक नाम के एक व्यक्ति के जीवन पर आधारित है जिन्होंने 18 साल के लंबे संघर्ष के बाद खुद को जीवित साबित किया था। ऐसा भी कह सकते हैं कि यह फिल्म किसी सरकारी कागज की अहमियत बताने वाली सच्ची घटनाओं पर आधारित है।

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