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लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अच्छी त्वचा के लिए एक्सफोलिएटिंग, क्लेंजिंग, टोनिंग और मोइश्चराइजिंग करना जरूरी है. ये चार चीजें स्वस्थ और ग्लोइंग स्किन के स्तंभ हैं. हम सब ये जानते हैं कि क्लेंजिंग क्या होती है. हालांकि, बहुत से लोग ये नहीं जानते हैं कि क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों साथ-साथ चलते हैं. एक ओर जां क्लेंजिग आपके चेहरे को साफ करता है तो वहीं टोनर बची हुई धूल-मिट्टी को हटाने का काम करता है.
हालांकि, यदि आपकी ऑयली स्किन है तो आपके लिए क्लेंजिंग और टोनिंग दोनों ही बहुत अधिक जरूरी है. टोनिंग की मदद से आपके पोर्स छोटे हो जाते हैं और स्किन का पीएच स्केल बना रहता है. इसके साथ ये आपके चेहरे पर प्रोटेक्शन लेयर बनाते हैं और मोइश्चराइजर लगाने से पहले एक बेस तैयार कर देते हैं. साथ ही यहां दिए गए टोनर्स को आप आसानी से घर पर बना सकते हैं.
1. सेब का सिरका
- एक चम्मच सेब का सिरका और एक कप पानी को मिक्स कर लें.
- अब कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और चेहरे को साफ कर लें.
2. पुदीने की पत्तियां
- 6 कप पानी उबालें.
- अब इसमें कुछ पुदीने की पत्तियों को डालें.
- इस मिक्स्चर को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगो लें और अपने चेहरे को साफ कर लें.
3. नींबू का रस और पेपरमिंट टी
- एक चम्मच नींबू का रस और पेपरमिंट टी बैग लें और इसमें 1 कप गर्म पानी मिला लें.
- टी बैग को पानी में बैठ जाने दें और कुछ मिनट के लिए इस पानी को ऐसे ही छोड़ दें.
- अब पानी में से टी बैग निकाल लें और पानी को ठंडा होने दें.
- कॉटन पैड को इसमें भिगोएं और अपने चेहरे को साफ कर लें.
4. एलोवेरा जेल
- एलोवेरा की एक पत्ती को काटे और उसमें से जेल निकाल लें.
- एक कप पानी में 2 चम्मच जेल को अच्छे से मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को अपने चेहरे पर कॉटन पैड से लगाएं.
- ये सॉल्यूशन आपके सनबर्न और रैश को भी ठीक करता है.
5. खीरा
- आधा ताजा खीरा लें और इसके छोटे छोटे टुकड़े कर लें.
- अब एक बर्तन में एक कप पानी डालें और कटा हुआ खीरा डालें.
- पानी में खीरे को ब्लेंड कर लें.
- इसे ठंडा होने दें और फिर छनी से पानी को छान लें.
- कॉटन पैड की मदद से इसे अपने चेहरे पर लगाएं.
6. बर्फ का पानी
- बर्फ के पानी में कॉटन पैड को डालें और इसे अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे बर्फ को भी अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.
7. कच्ची अंबी का बीज
- कुछ कच्ची अंबी के बीज लें.
- इन बीज को पानी के बर्तन में रखें और उसे 30 मिनट के लिए उबाल लें.
- पानी को ठंडा होने दें
- हर बार मुंह धोने के बाद इस टोनर का अपने चेहरे पर इस्तेमाल करें.
8. कैमोमाइल
- 5 मिनट के पानी में कैमोमाइल चाय की पत्ति के बैग को उबालें.
- अब इसे ठंडा होने दें और फिर एक बोतल में ये पानी डाल लें.
- हर बार मुंह धोने के बाद अपने चेहरे पर कॉटन पैड की मदद से इसे लगाएं.
9. नींबू का रस
- 1 कप पानी में 1 चम्मच नींबू का रस मिला लें.
- इस सॉल्यूशन को कॉटन पैड की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं.
- आप चाहें तो सीधे नींबू के छिलके को अपने चेहरे पर रगड़ सकती हैं.
- इससे आपके चेहरे से टैन हटेगा और ऑयल भी कंट्रोल होगा.
10. ग्रीन टी
- ग्रीन टी बैग को उबालें और इसे ठंडा होने दें.
- इस चाय को हर बार मुंह धोने के बाद टोनर के रूप में लगाएं.
बता दें कि ऑयली त्वचा के लिए टोनर बेहद आवश्यक हैं और ये आपकी त्वचा को फ्रेश और ग्रीस फ्री रखते हैं. इसके अलावा ये मुंहासों को होने से रोकते हैं.
नजरिया / शौर्यपथ / आज हिरोशिमा दिवस है। साल 1945 में 6 अगस्त के दिन ही दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने इस जापानी शहर पर ‘लिटिल ब्यॉय’ नामक परमाणु बम गिराए थे। और इसके तीन दिनों बाद 9 अगस्त को जापान के ही नागासाकी में ‘फैट मैन’ नामक एक अन्य परमाणु बम गिराया गया था। इन बमों की तबाही ऐसी मची कि दोनों शहरों में लगभग साढ़े तीन लाख लोग झटके में मारे गए, जबकि विकिरण का प्रभाव ऐसा फैला कि बाद की कई पीढ़ियां विकलांग पैदा होती रहीं। आज विश्व में परमाणु हथियारों की संख्या लगभग 13,450 हो गई है, जिनकी मारक क्षमता इन दोनों बमों से कई गुना ज्यादा है। ये हथियार अपने अल्पकालीन और दीर्घकालीन प्रभाव से मानव सहित पृथ्वी के अधिकांश जीवन को समाप्त करने की विध्वंसक क्षमता रखते हैं। बेशक शीत युद्ध के चरम के समय की तुलना में आज परमाणु हथियारों के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है, फिर भी तमाम विशेषज्ञ यही मानते हैं कि परमाणु हथियारों से जुड़ा खतरा कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ गया है।
इसके अनेक कारण दिखाई देते हैं। पहली वजह तो यह है कि उस समय अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों के नियंत्रण की जो संधियां या समझौते थे, उनका असर तेजी से कम होता जा रहा है। इनमें से एक संधि ‘द इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस’ (आईएनएफ) 2019 में टूट चुकी है, जबकि दूसरी बड़ी संधि ‘न्यू स्टार्ट’ के अगले साल फरवरी में नवीनीकरण की संभावना बहुत कम है, क्योंकि इसकी तैयारी बहुत धीमी नजर आ रही है। दूसरा कारण यह है कि परमाणु शस्त्र कम करने के समझौते समय के साथ-साथ कई कमियों के शिकार हो गए। वर्ष 1987, 1991 और 1993 में अमेरिका और सोवियत संघ (या रूस) के बीच तीन महत्वपूर्ण समझौते हुए थे, जिनका व्यापक स्तर पर स्वागत किया गया था और यह माना गया था कि अब इन दोनों देशों में बडे़ पैमाने पर परमाणु शस्त्र नष्ट किए जाएंगे, पर वास्तविक स्थिति मानव विकास रिपोर्ट 1994 बताती है, जिसके मुताबिक, ‘इन संधियों से तनाव कम तो हुआ, लेकिन इनकी अपनी सीमाएं हैं। इनमें यह निर्देश नहीं दिया गया है कि ‘वारहेड’ को ही नष्ट कर दिया जाए।’
एक समय था, जब परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा मुख्य रूप से दो बड़ी ताकतों अमेरिका और रूस की ओर से था, पर अब परमाणु हथियार नौ देशों के पास हैं। इतना ही नहीं, आतंकवादियों के पास भी छोटे परमाणु हथियार पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। फिर, चार-पांच ऐसे देश भी हैं, जो निकट भविष्य में परमाणु हथियार प्राप्त कर सकते हैं। एक अनुमान यह भी जताया गया है कि अमेरिका से संबंध अधिक तनावपूर्ण होने के बाद चीन तेजी से अपने परमाणु शस्त्र बढ़ा सकता है। हाल ही में स्टॉकहोम पीस रिसर्च संस्थान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं, वे सभी इनके आधुनिकीकरण की दौड़ में हैं। इसके अलावा, युद्ध में परमाणु हथियारों के ‘टैक्टिकल’ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका भी जताई जा रही है। इसका अर्थ है कि किसी देश की बढ़ती सेना को रोकने के लिए रणभूमि में इसका इस्तेमाल हो सकता है।
इन्हीं तमाम कयासों को ध्यान में रखते हुए कई विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त, जिस तरह से अंतरिक्ष क्षेत्र का सैन्यीकरण तेजी से बढ़ रहा है, वह भी चिंता का विषय है। दुनिया में अमन-शांति बहाल करने की दिशा में काम करने वाले कई संस्थानों का मानना है कि किसी भी हालत में अंतरिक्ष क्षेत्र में किसी परमाणु हथियार का प्रवेश नहीं होना चाहिए। ऐसे में, मौजूदा वक्त की मांग यही है कि परमाणु हथियारों की विध्वंसकता के अभिशाप से धरती को मुक्त किया जाए। इसके लिए विश्व स्तर पर सभी अमनपसंद नागरिकों और संस्थाओं को एक बड़ा वैश्विक अभियान चलाना चाहिए।
इसमें कोई दोराय नहीं कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देश भी परमाणु हथियारों से मुक्त धरती के पैरोकार हैं। हम भी परमाणु हथियार विहीन धरती के उद्देश्य का समर्थन करते हैं, जबकि हम एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र हैं। हम इसलिए इसमें मुखर हैं, क्योंकि परमाणु शक्ति होने के बावजूद एक जिम्मेदार राष्ट्र का अपना दायित्व बखूबी समझते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) भारत डोगरा, सामाजिक कार्यकर्ता
सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ /करोड़ों भारतीयों की आस्था के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मस्थल पर भव्य मंदिर का सपना सदियों पुराना था, और अब जब वह साकार रूप लेने लगा है, तो स्वाभाविक ही तमाम आस्थावान लोगों के लिए यह खुशी का एक अवसर है। अयोध्या में मंदिर-निर्माण का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल एक सूत्र वाक्य दोहराया कि ‘राम सबके हैं और सब राम के हैं।’ इस वाक्य के गहरे निहितार्थ हैं। यह एक समरस समाज का आधार वाक्य है। निर्माण की प्रस्तावना है। यह प्रस्तावना धर्म के दायरे से आगे जाकर राष्ट्र-निर्माण से जुड़ती है। जाहिर है, राष्ट्र का निर्माण कभी थमता नहीं, वह हर पल आकार लेता रहता है। अपने नागरिकों में, अपनी संस्थाओं के जरिए। और किसी भी समाज में संस्थाओं का निर्माण होता है, उनमें जनता के अटूट विश्वास से। इसलिए मंदिर-निर्माण का यह अवसर याद दिला रहा है कि हमें अपनी राष्ट्रीय संस्थाओं की मर्यादा को भी कमतर नहीं करना चाहिए।
एक ऐसे दौर में, जब हम कुदरती व मानवीय विध्वंसों से लोहा ले रहे हैं, निर्माण का महत्व कहीं अधिक शिद्दत से महसूस होना चाहिए। हमें कितना कुछ गढ़ना अभी शेष है, यह महामारी हमें बता रही है और देश की सरहदें भी इसके संकेत कर रही हैं। गौर कीजिए, देश में कोविड-19 से मरने वालों की तादाद 40 हजार तक पहुंच गई है और उनमें से कई सारे लोगों की जान हम इसलिए नहीं बचा सके, क्योंकि हमारे पास उनके इलाज की माकूल व्यवस्था नहीं थी। लाखों भारतीय हर साल बाढ़ की चपेट में आकर महीनों खानाबदोश जिंदगी जीते हैं। ऐसे में, एक सशक्त भारत रचने के लिए न सिर्फ हमें अभी बहुत सारे अस्पतालों व स्कूलों की दरकार है, बल्कि अनगिनत पुलों, पनाहगाहों, ताल-तलैयों और सीमाओं पर सड़कों-बंकरों के जाल की भी आवश्यकता है। जाहिर है, इनके लिए बहुत सारे संसाधनों की जरूरत है। और यह कोई बाहर वाला हमें नहीं देगा। इस देश के नागरिकों को अपने कर्म से अर्जित करने पड़ेंगे। राष्ट्र-निर्माण के लिए उनमें भाईचारे की कमी नहीं पड़नी चाहिए।
अयोध्या में कारसेवकों की कमी न पहले थी और न भविष्य में पडे़गी। कभी किसी धर्म के आयोजन में लोग अपनी श्रद्धा से न धन की कमी पड़ने देते हैं और न श्रम-बल की। आज भारत-निर्माण को भी उसी भाव की जरूरत है। खासकर कोरोना काल में देश को अपने नागरिकों की श्रद्धा युक्त समझदारी की बहुत जरूरत है। धीरोदात्त राम ने अपने जीवन में धीरज के साथ विकट संकटों का सामना किया, तभी वह जीत का पथ निर्माण कर सके थे। अयोध्या में प्रधानमंत्री का संयम के साथ कोरोना के मुकाबले का आह्वान राम के इसी रूप से प्रेरित था। धैर्य के साथ सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करके ही हम इस महामारी से अपने देश को मुक्ति दिला सकते हैं। एक लंबे विवाद और ध्वंस के पटाक्षेप के बाद अयोध्या की फिजाओं ने खुशियों की खुनक महसूस की है। और इस दिन की पटकथा लिखने में पूरे भारत के नागरिक समाज ने अपने धैर्य, उत्साह, संतोष और समझदारी की रोशनाई मिलाई है। भारत-निर्माण के लिए इसी भाव को स्थाई रूप देने की जरूरत है। बहुलतावादी भारत में बन रहा भव्य राम मंदिर हमारे सामाजिक-सामुदायिक भाईचारे और शांति का संदेश पूरी दुनिया को दे सके, यह पूरा देश चाहेगा। आखिरकार राम सबके हैं और सब राम के हैं।
ओपिनियन / शौर्यपथ / खुशी, खूबसूरती और खैर-खैरियत के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है। यह सिर्फ मेरे भारत के लोगों के संस्कार, संस्कृति और संकल्प की शक्ति का ही करिश्मा है। मुझे याद है, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले मेरे सरकारी निवास पर 5 नवंबर, 2019 को धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय 100 से ज्यादा प्रबुद्ध लोगों की बैठक हुई थी। गौर करने की बात है कि उस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में सभी ने एकमत से यह तय किया था कि सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या मुद्दे पर जो भी फैसला आएगा, उसका दोनों पक्ष पूरा सम्मान भी करेंगे और स्वीकार भी करेंगे। जब फैसला आया, तब सभी पक्षों ने वैसा ही किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी ने भी अपनी जीत या हार के रूप में नहीं लिया और सभी ने शांति-सद्भाव के साथ फैसले को स्वीकार किया।
अब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हो गया है, उधर सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन भी दे दी गई है। बोर्ड ने निर्माण के लिए समिति का भी गठन कर दिया है।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन सद्भाव और समरसता के साथ संपन्न होना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की ताकत और ‘अनेकता में एकता’ की शक्ति के साथ पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान की धाक मजबूत करता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम किसी सीमित दायरे में नहीं बांधे जा सकते। वह न केवल हिन्दुस्तान, बल्कि पूरी मानवता के लिए आदर्श हैं।
कवि अल्लामा इकबाल ने अपनी मृत्यु (1938) से पूर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के लिए जो कहा था, वह एक बार फिर हमें गर्व का एहसास कराता है।
लबरेज है शराब-ए-हकीकत से जाम-ए-हिंद।
सब फलसफी हैं खित्ता-ए-मगरिब के राम-ए-हिंद।।
यह हिंदियों के फिक्र-ए-फलक रस का है असर।
रिफअत में आसमां से भी ऊंचा है बाम-ए-हिंद।।
इस देस में हुए हैं हजारों मलक सरिश्त।
मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद।।
है राम के वुजूद पे हिन्दोस्तां को नाज।
अहले-नजर समझते हैं उनको इमाम-ए-हिन्द।।
दशकों से जिस मुद्दे ने भारत के लोगों को बेचैन कर रखा था, जिसके समाधान के लिए महंत रामदास जी परमहंस और हाशिम अंसारी एक ही रिक्शे से मुकदमे की पैरवी के लिए अदालत जाया करते थे। हाशिम अंसारी के मन में भी भगवान राम के प्रति भरपूर श्रद्धा थी, तभी तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्होंने कहा था, ‘अब यह विवाद यहीं खत्म होना चाहिए, श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो, अयोध्या का विकास हो, अब यही मेरी तमन्ना है’। तब से अब तक सरयू में खूब पानी बह चुका है, अब न महंत रामदास जी परमहंस इस दुनिया में हैं, और न हाशिम अंसारी। खुशी की बात यह है कि हाशिम अंसारी के बेटे कल के भव्य ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने हैं। भारत का इतिहास इस बात का गवाह रहेगा कि कितना लंबा खिंचा है अयोध्या का यह मामला। आज सम्मान, सहमति और सद्भाव के सुंदर माहौल में यह विवाद खत्म ही नहीं हुआ, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का सपना भी साकार होने जा रहा है।
सबसे खूबसूरत बात यह है कि देश के न किसी मोहल्ले में तनाव है, न किसी शहर में अशांति, और न किसी गांव में हंगामा, सभी ने इस ऐतिहासिक अवसर का स्वागत किया है। सब इस गौरवपूर्ण क्षण के गवाह बनकर आनंदित हैं। यही नहीं, आज के कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने भगवान श्रीराम को संपूर्ण मानवता, इंसानियत और इंसाफ का प्रतीक बताया है।
हमारे देश के मुस्लिम समाज को किसी विदेशी आक्रमणकारी की करतूतों-गुनाहों का गुनहगार नहीं समझा जा सकता। इस ऐतिहासिक क्षण का उसने भी सकारात्मक सोच के साथ स्वागत किया है। एक मुल्क के तौर पर हमारी प्राथमिकताएं सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति है। यह बदलते हुए भारत की नई पीढ़ी समझ चुकी है, इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद समाज का हर हिस्सा प्रगति में बराबर का हिस्सेदार और भागीदार बन रहा है। उदाहरण के लिए, अभी-अभी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम आए हैं, जिसमें अल्पसंख्यक समाज के 187 नौजवान चुने गए हैं। इन नौजवानों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के होनहार भी शामिल हैं। मोदी सरकार के ‘बिना भेदभाव सबके सशक्तीकरण, काबिलियत की कद्र’ का नतीजा है कि आज समाज के सभी वर्ग तरक्की की दिशा में हमसफर बन रहे हैं। इसी तरह, साल 2017-2018 के भी प्रशासनिक सेवाओं के परिणाम काफी उत्साहवद्र्धक रहे हैं। आजादी के बाद सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक समाज के लोग प्रशासनिक सेवाओं में अब चुने जा रहे हैं। जो लोग आज तक मुस्लिम समाज को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर वास्तविक सवालों से भरमाने का चक्रव्यूह रचते रहे, उनको भी अब यह अच्छी तरह समझ में आ रहा है कि मोदी सरकार का ‘विकास का मसौदा’, ‘वोट के सौदे’ से कोसों दूर है।
हमने सदियों पुराने सद्भाव के जिस रास्ते को चुना है, वही ‘नए भारत, मजबूत भारत, समावेशी भारत’ की नई इबारत लिखेगा। भारत की संस्कृति समावेशी सोच से भरपूर रही है। हिन्दुस्तान अकेला देश है, जहां दुनिया के सभी धर्मों के मानने वाले रहते हैं, जहां समाज के सभी वर्गों के धार्मिक, सामाजिक अधिकार सुरक्षित हैं। भारत अकेला देश है, जहां मंदिरों के घंटे, मस्जिदों की अजान, गुरुद्वारों की गुरुवाणी, चर्च की प्रार्थनाओं की गूंज हमेशा बनी रहती है। विभिन्न धर्मों की मिली-जुली यह गूंज दुनिया को हिन्दुस्तान के समावेशी समाज का खूब एहसास कराती है।
बुधवार को भव्य राम मंदिर के निर्माण के शुभारंभ का संदेश पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है कि भारत में किसी ने इसे अपनी विजय नहीं कहा। सभी ने मानवता और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। सभी ने सद्भाव से भरपूर समावेशी समाज के संकल्प को दोहराया। यह हमारे लिए सबक भी है और संदेश भी। हमें इसी सबक या संदेश को आने वाले दिनों में भी सार्थक करते चलना है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री
अम्बिकापुर / शौर्यपथ / कलेक्टर संजीव कुमार झा की अध्यक्षता में मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस की तैयारी हेतु सर्किट हाउस के सभाकक्ष में सभी विभाग एवं कार्यालय प्रमुखों की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में कोविड 19 के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के तहत मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही स्कूली बच्चो द्वारा संस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभागीय झांकी का आयोजन नही करने का निर्णय लिया गया। कलेक्टर ने समारोह के सफल एवं गरिमापूर्ण आयोजन हेतु विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दायित्व सौपते हुए समय-सीमा में दायित्वों का निर्वहन हेतु निर्देशित किया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ कुलदीप शर्मा, वनमंडलाधिकारी पंकज कमल, अपर कलेक्टर एएल ध्रुव, नगर निगम आयुक्त हरेश मण्डावी, एसडीएम अजय त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के जिला स्तरीय कार्यक्रम पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित करने हेतु परेड ग्राउण्ड की तैयारी, मंच व्यवस्था, माईक, पोडिएम, कबूतर, पुष्पगुच्छ एवं गुब्बारे की व्यवस्था, मंच संचालन, झण्डे की व्यवस्था, पेयजल, स्वल्पाहार, चिकित्सा सुविधा, फायर ब्रिगेड, आमंत्रण कार्ड, मुख्य अतिथियों का स्वागत, पण्डाल एवं कुर्सी की व्यवस्था, पार्किंग व्यवस्था, पुरस्कार व्यवस्था, फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी, मिष्ठान्न वितरण, स्वागत द्वार सहित अन्य कार्यो के लिए अधिकारियों को कर्तव्यस्थ किया । उन्होंने कोविड 19 के संक्रमण से बचाव हेतु समारोह स्थल पी.जी.कॉलेज मैदान के सभी प्रवेश द्वारों में थर्मल स्कैनर एवं सैनिटाइजर की व्यवस्था सुनिश्चित कराने निर्देशित किया।
कलेक्टर ने सभी विभाग एवं कार्यालय प्रमुखों को अपने-अपने कार्यालय में सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए ध्वजारोहण का कार्यक्रम प्रातः 7.00 बजे आयोजित करने कहा। उन्होंने सभी जिला अधिकारियों को अपने कार्यालयों में ध्वजारोहण कर प्रातः 7.30 बजे तक कलेक्टोरेट परिसर स्थित ध्वजारोहण स्थल पर उपस्थित होने के निर्देष दिए।
स्वतंत्रता दिवस की जिला स्तरीय आयोजन हेतु पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में मैदान की साफ-सफाई, टेन्ट एंव पण्डाल, साउण्ड व म्यूजिक सिस्टम की व्यवस्था के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को दायित्व सौंपा गया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने हेतु सभी विभाग प्रमुखों को उत्कृष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्य का विवरण प्रस्तुत करते हुए 10 अगस्त तक सूची प्रस्तुत करने निर्देषित किया गया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन पूर्व 13 अगस्त को कार्यक्रमों का निर्धारित ड्रेस के साथ पी.जी. कॉलेज ग्राउण्ड में प्रातः 9 बजे से रिहर्सल किया जाएगा। इस अवसर पर सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उपस्थित होने निर्देशित किया गया ।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पावन धरा पौराणिक काल से दुनिया को अपनी ओर खींचती रही है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम का ननिहाल चंदखुरी छत्तीसगढ़ में है। राम छत्तीसगढ़ियों की जीवन-शैली और दिनचर्या का अंग हैं। प्रातः छत्तीसगढ़ के लोग उठकर एक-दूसरे से राम-राम कह कर अभिवादन करते हैं। छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति में हर मामा अपने भान्जे को राम मानता है, आस्था से उसके पैर पड़ता है। पुरातन काल से छत्तीसगढ़ में राम लोगों के मानसपटल पर भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। वहीं पर भगवान राम ने 14 वर्ष वनवास के दौरान लम्बा समय छत्तीसगढ़ की धरा पर गुजारा था। वनवास के दौरान श्रीराम छत्तीसगढ़ के जिन स्थानों से गुजरे थे उसे राम वन गमन पथ के रूप में विकसित करने कार्य योजना बनाई गई, जिसकी शुरूआत चंदखुरी से हो चुकी हैं।
राम वन गमन पर्यटन परपिथ के अंतर्गत जांजगीर चांपा जिले में शिवरीनारायण, बलौदा बाजार में तुरतुरिया, रायपुर में चंदखुरी और गरियाबंद के राजिम में परिपथ के विकास कार्यों की शुरूआत हो चुकी है। इसी तरह से राम वन गमन पर्यटन परिपथ में कोरिया जिले में सीतामढी हर-चौका, सरगुजा में रामगढ़, धमतरी में सप्तऋषि आश्रम, बस्तर में जगदलपुर, सुकमा में रामाराम सहित करीब 75 स्थलों को चिन्हांकित कर लिया गया है। अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना राम वन गमन परिपथ को विकसित करने का कार्य प्रारंभ हो गया है। इस योजना से लोगों की आस्था के अनुरूप राम की यादों को पौराणिक धार्मिक कथाओं से सुनते आ रहे लोग इन पौराणिक महत्व के स्थल को देख सकेगें। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर्यटन तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होने के साथ यहां रोजगार के साधनों का विकास होगा। अंदरूनी दुर्गम वन क्षेत्रों में सड़क परिवहन भी विकसित होगा जिससे कई आर्थिक गतिविधियों का स्वयं संचालन होने लगेगा। देश और दुनिया के आस्थावान लोग रामायण सर्किट की धार्मिक तीर्थ यात्रा पर निकलेंगे तो भगवान राम के ननिहाल के दर्शन करेंगे। ( साभार -एम.एल. चौधरी ,सहायक संचालक)
// शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम पर तेंदूपत्ता संग्राहक , सामाजिक सुरक्षा योजना का शुभारंभ
// प्रदेश के 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिलेगा लाभ
// गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को मिला पहला भुगतान, मुख्यमंत्री श्री बघेल ने अंतरित किए 1.65 करोड़ रूपए
// 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं को मिला लाभ
// शहीद महेन्द्र कर्मा को उनकी जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि
// मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोबर विक्रेताओं से की चर्चा
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया की एक अनूठी योजना है। इस योजना पर सभी लोगों की निगाह है। उन्होंने कहा कि येाजना के शुरूआत के एक पखवाड़े के भीतर इसके उत्साह जनक परिणाम देखने और सुनने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों के जीवन में बदलाव लाने वाली तथा लोगों को बारहों महीने रोजगार देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री बघेल आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत गोबर खरीदी के पहले भुगतान का शुभारंभ करते हुए उक्त बातें कही। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं के खाते में एक करोड़ 65 लाख रूपए की राशि आनलाइन अंतरित की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम की शुरूआत में शहीद महेन्द्र कर्मा की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके नाम पर प्रदेश में ‘तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना‘ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री और लोकप्रिय नेता शहीद श्री महेंद्र कर्मा की जयंती पर उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण उन्हेें विनम्र श्रद्धंाजलि दी। इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सभी सदस्यगणों ने भी शहीद श्री कर्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि श्री महेन्द्र कर्मा बस्तर टाइगर के नाम से जाने जाते थे, वे आदिवासियांे के हक की हर लड़ाई में दमदारी से खड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया में अपने तरह की पहली अनूठी योजना है, जिसमें पशुपालकों, किसानों से 2 रूपए प्रति किलो की दर पर गौठानों में खरीदी की जा रही है। इस योजना के माध्यम से एक ओर जहां पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा, दूसरी ओर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से लोगों को कई फायदे मिलेंगे। इससे गांवों में बारह महीने लोगों को रोजगार सुलभ होगा। गोबर विक्रय करने से ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को नियमित आमदनी होगी। इसके अलावा गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होगा। खुले में चराई पर रोक लगेगी और किसान एक से अधिक फसलों का उत्पादन कर सकेंगे। इससे पशुओं के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के हर गौठानों में रोजगार ठौर स्थापित किए जाएंगे। गौठानों में इसके लिए एक-एक एकड़ जमीन को आय मूलक व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इनमें समूहों के सदस्य गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के अलावा गौमूत्र से फिनाईल तथा औषधि का निर्माण, साबुन, अगरबत्ती का निर्माण, धान कुट्टी मशीन के माध्यम से चावल निकालने और सिलाई मशीन के माध्यम से सिलाई-बुनाई आदि जैसी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण एवं संचालन सुगमता से कर सकेंगे और इससे उन्हें गांव में ही रोजगार और जीवन यापन का जरिया मिलेगा।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने जशपुर, जांजगीर-चांपा, सुकमा, बलौदाबाजार जिले कीे विभिन्न गौठान समितियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं, पशुपालक एवं गोबर विक्रेताओं से गोधन न्याय योजना के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गोबर विक्रय करने वाले लोगों से भुगतान की राशि प्राप्त होेने, महिला स्व-सहायता समूहों से उनके द्वारा संचालित गतिविधियों विशेषकर वर्मी कम्पोस्ट खाद के निर्माण एवं विक्रय की स्थिति, गौठानों में आने वाले पशुओं की संख्या एवं उनके चारे-पानी के प्रबंध के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौठान समितियों से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट टांका पर्याप्त संख्या में तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन गौठानों में सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 31 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। लघु वनोपज के वेल्यू एडिशन के कार्य गौठानों में करके अतिरिक्त लाभ अर्जित किए जाने की दिशा में हम सब को मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से समाज के सभी वर्ग के लोगों को न्याय योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य में इस योजना की लोकप्रियता और इसकी सफलता को देखते हुए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ ही मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम के शुभारंभ में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने गोधन न्याय योजना की अब तक की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की परिकल्पना आज मूर्तरूप ले चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायतों के बाद गांव तक विस्तारित होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को 15 दिन के भीतर उनके बैंक खाते में राशि के भुगतान का जो वादा किया था, वह आज पूरा हो रहा है। इस योजना के तहत हर 15वें दिन गोबर विक्रेताओं को भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राज्य में कुल 4140 गौठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 82 हजार 711 क्विंटल गोबर का विक्रय किया गया, जिसकी कुल राशि 2 रूपए प्रति किलो की दर से 1 करोड़ 65 लाख रूपए पशुपालकों के बैंक खातों में जमा की गई है। इस योजना से 38 प्रतिशत महिला हितग्राही, 48 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। गोबर खरीदी का आगामी भुगतान 20 अगस्त को किया जाएगा। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी और बालोद जिलों में सबसे अधिक गोबर विक्रय किया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में रायपुर एवं दुर्ग के पशुपालकों ने सबसे ज्यादा गोबर विक्रय किया गया है।
प्रदेश में शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
प्रदेश में आज से शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में तेंदूपत्ता संगहण कार्य में लगे पंजीकृत संग्राहक परिवार के मुखिया (50 वर्ष से अधिक आयु न हो) की सामान्य मृत्यु पर नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को 2 लाख रूपए की अनुदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। दुर्घटना से मृत्यु होने पर दो लाख रूपए अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 2 लाख रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में एक लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि दी जाएगी।
वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप तेन्दूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशुद्ध रूप से वन विभाग द्वारा संचालित होने वाली शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बीमित किए जाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा संचालित बीमा योजना के बंद होने के कारण प्रदेश सरकार द्वारा यह सामाजिक सुरक्षा योजना तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत बीमा दावा के प्रकरणों का तत्परता से निराकरण एवं पीड़ित परिवार को एक माह के भीतर दावा राशि का भुगतान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि संग्राहक परिवार के मुखिया की 50 से 59 आयु वर्ष के बीच सामान्य मृत्यु होती है, तो 30 हजार रूपए, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 75 हजार रूपए, दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति पर 75 हजार रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 37 हजार 500 रूपए की सहायता अनुदान राशि परिवार के नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
इस अवसर पर मंत्री सर्वश्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर, ताम्रध्वज साहू, टी. एस. सिंहदेव, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिव कुमार डहरिया, कवासी लखमा, गुरू रूद्र कुमार, अमरजीत भगत, श्रीमती अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी एवं चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, श्री रूचिर गर्ग, श्री विनोद वर्मा, मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू एवं अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप वर्षों से काबिज वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से वनवासियों को खुशी है, वहीं अब वे काबिज वन भूमि पर बेदखली के भय से मुक्त होकर कृषि कार्य कर रहे हैं।
कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोलर के कालीराम को वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से उनके जीवन में खुशियों की बहार आ गई है। राज्य शासन द्वारा वन अधिकार पट्टा वितरण करने की योजना की सराहना करते हुए श्री कालीराम कहते हैं कि वर्षों से काबिज 2 एकड़ वन भूमि का वन अधिकार पट्टा मिलने से मेरी चिंता दूर हो गई है और बेदखली का भय भी समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा मनरेगा के तहत मेरी उबड़-खाबड़ जमीन पर समतलीकरण का कार्य होने से जहां मेरी भूमि कृषि योग्य हो गई है। वहीं मेरे द्वारा 2 एकड़ में धान की फसल लगाई गई है। कालीराम अपने खेत में लहलहाती फसलों को देखकर भविष्य में होने वाली आमदनी के बारे में सोच कर काफी खुश हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा वनवासियों और किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
पथ पर पग-पग पर होंगे श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के दर्शन
प्रवेश द्वार से लेकर लैंपपोस्ट तक सब कुछ होगा राम मय
मुख्यमंत्री के समक्ष हुआ कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण
रायपुर / शौर्यपथ / कोरिया से सुकमा तक निर्मित होने वाला राम वन गमन पथ कदम-कदम पर राम-मय होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने जो कार्ययोजना तैयार की है, उसमें तीर्थ एवं पर्यटनों स्थलों के द्वार से लेकर लैंप-पोस्ट और बैंच तक के सौंदर्यीकरण का विशेष ध्यान रखा गया है। श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को राम वन गमन पथ की यात्रा के दौरान पग-पग पर भगवान श्रीराम के दर्शन होंगे। राम वन गमन पथ के मुख्य मार्ग सहित उप मार्गों की कुल लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है। इस मार्ग के किनारे जगह-जगह संकेतक तीर्थ स्थलों एवं पर्यटनों की जानकारी सहित भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी कथाएं देखने और सुनने को मिलेंगी। वन गमन पथ के दोनों ओर विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण भी किया जा रहा है, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के दिलों दिमाग में प्रभु श्रीराम के वनवास का अहसास बना रहे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की प्राथमिकता वाली राम वन गमन परियोजना का कान्सेप्ट प्लान तैयार हो चुका है।
मुख्यमंत्री बघेल की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पर्यटन सचिव पी.अनबलगन ने इस संबंध में योजना की विस्तृत जानकारी पावरप्वांईट प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी। 137 करोड़ 75 लाख रुपये की कुल लागत वाली इस परियोजना पर इसी अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह से काम शुरु हो जाएगा। इसकी शुरुआत रायपुर के निकट स्थित चंदखुरी से होगी। चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल है। यहां माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर है, जो सातवीं शताब्दी का है। माता कौशल्या मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण तथा विकास के लिए 15 करोड़ 45 लाख रुपये की योजना तैयार की गई है।

अंबलगन ने बताया कि इस परियजोना के तहत लगभग 2260 किलोमीटर सड़कों का विकास किया जाएगा। लगभग 1400 किलोमीटर सड़कों के दोनों ओर वृक्षारोपण कार्य किया जाएगा। राम वन गमन पथ पर पहले चरण में जिन 9 स्थानों का चयन किया गया हैं, उन सभी में आकर्षक लैंडस्केप तैयार किया जाएगा। इन सभी स्थानों पर पर्यटकों के लिए नागरिक सुविधाओं का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। विश्वस्तरीय अधोसंरचनाओं के निर्माण के दौरान उच्च कोटि का प्री-कास्ट और फेब्रीकेशन वर्क सुनिश्चित किया जाएगा। सभी स्थानों पर भव्य द्वार बनाए जाएंगे, जिनके शीर्ष पर भगवान राम का धनुष और उसकी प्रत्यंचा पर रखा हुआ तीर होगा। द्वार पर जय श्रीराम के घोष के साथ राम-पताका लहरा रही होगी। तीर्थ-पर्यटनों पर स्थापित किये जाने वाले लैंपोस्ट भी प्राचीन काल की याद दिलाएंगे। इनके शीर्ष पर भी भगवान श्रीराम की आकृति होगी। एक अन्य डिजाइन में लैंपपोस्ट के शीर्ष पर भी तीर-धनुष स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राम वन गमन परिपथ में कोरिया से लेकर सुकमा तक सूचनात्मक स्वागत द्वार स्थापित किये जाएंगे। यात्रियों को इससे पता चल सकेगा कि वे परिपथ पर सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। किसी पडाव में पहुंचने पर एक खास डिजाइन का साइन बोर्ड उनका स्वागत करेगा। परिपथ में सड़क के किनारे विभिन्न स्थानों की दूरी और दिशा बताने वाले डायरेक्शन-पोस्ट भी स्थापित किए जाएंगे।
इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि पर्यटन-तीर्थों में धार्मिक-स्थलों के आसपास सजने वाले पूजन-सामग्रियों के परंपरागत बाजार को भी व्यवस्थित कर नये तरह से डिजाइन किया जाए। इन बाजारों में आधुनिक तरीके से निर्मित, किंतु प्राचीनता की याद दिलाते स्टाल स्थापित किये जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग स्थलों को भी अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित किया जाएगा।
सभी पर्यटन-तीर्थों में विशेष साज सज्जा वाले पर्यटक सूचना केंद्र स्थापित किये जाएंगे। राम वन गमन पथ का रूट मैप तैयार कर संबंधित विभागों को भेज दिया गया है। चंदखुरी, शिवरीनारायण, तुरतुरिया और राजिम के लिए परियोजना-रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। शिविरीनरायण ब्रिज के ऊपर लेजर लाइट शो का इंतजाम भी होगा। धमतरी जिले में सप्तऋषि आश्रम का सौंदर्यीकरण तथा विकास किया जाना है। नगरी को पर्यटन हब के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। विभिन्न स्थानों पर बायोडायवर्सिटी पार्क का भी निर्माण किया जाएगा।
पर्यटन विभाग द्वारा इतिहासकारों से चर्चा कर विभिन्न शोध पत्रों और प्राचीन मान्यताओं के आधार पर छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ के 75 स्थलों को चिन्हित किया गया है। प्रथम चरण में जिन 9 स्थलों का विकास किया जा रहा है, उनमें सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। फिलहाल प्रथम चरण में 5 स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार कर निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है। एक वर्ष की अवधि में निर्माण एजेंसियों द्वारा कार्ययोजना के अनुसार कार्यों को पूरा कराया जाएगा।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने राम वन गमन पथ के प्रमुख स्थलों के बारे में जनसामान्य को जानकारी देने के लिए सड़क के किनारे उपयुक्त स्थलों पर साइनबोर्ड लगाए जाने का सुझाव दिया। चंदखुरी स्थिति माता कौशल्या मंदिर परिसर सहित अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में मंत्री मोहम्मद अकबर, टी.एस. सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, डॉ. शिव कुमार डहरिया, अमरजीत भगत ने कई उपयोगी सुझाव भी दिए। इस दौरान मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, गुरु रुद्रकुमार, मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, प्रदीप शर्मा, रूचिर गर्ग, मुख्य सचिव आर.पी. मंडल, अपर मुख्यसचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ , कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ.एम.गीता, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / रायपुर में आयुर्वेदिक डॉक्टर की पत्नी के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। मामला खम्हारडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत अवंति विहार का है जहां आयुर्वेदिक डॉक्टर अपने परिवार सहित 8 साल पूर्व उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में निवास करने पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश छोडऩे की वजह पति के बिजनेस पार्टनर द्वारा छेड़छाड़ किया जाना था।
घटना की जानकारी देते हुए थाना प्रभारी ममता शर्मा अली ने बताया कि आरोपी बलबीर सिंह व बबलू सैफी अली द्वारा वर्ष 2019 में थाना क्षेत्र अंतर्गत पीडि़ता का बलात्कार किया गया व उसकी अश्लील फोटो खींच ली गई ,आरोपियों द्वारा लगातार अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी जाती रही। पीडि़ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसके पति व बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दिया करते थे जिसके कारण वह डर के चलते घटना का जि़क्र किसी को नहीं किया। अब लगातार मानसिक प्रताडि़त होने के बाद पीडि़ता ने घटना की जानकारी अपने पति को दी जिसके बाद पीडि़ता ने अपने परिजनों के साथ पहुंच थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाया।
थाना प्रभारी शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ ढ्ढक्कष्ट की धारा 376,506,34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। आरोपी उत्तरप्रदेश के निवासी है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
