August 26, 2026
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    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने मातृ मृत्यु अंकेक्षण की समीक्षा की

    • doing of business

    ० गर्भवती महिलाओं की मृत्यु रोकने के लिये सभी अस्पतालों के लेबर रूम में हरसंभव आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश
    ० मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत मातृ मृत्यु अंकेक्षण की विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग डॉ. प्रियंका शुक्ला ने मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत मातृ मृत्यु अंकेक्षण (मैटरनल डेथ रिव्यु) की विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा कर प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की मृत्यु रोकने के लिये सभी अस्पतालों के लेबर रूम में हरसंभव आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने प्रसव कराने वाले अधिक से अधिक स्टॉफ नर्स एवं एएनएम को एसबीए प्रशिक्षण कराने के निर्देश दिए। साथ ही गर्भवती महिलाओं का पंजीयन कर प्रसव पूर्व अनिवार्यतः उनका चार बार स्वास्थ्य परीक्षण (एएनसी) किया जाना सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। जिससे प्रत्येक हाई रिस्क वाले गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनके स्वास्थ्य की समुचित देखभाल कर स्वस्थ संस्थागत प्रसव कराया जा सके। अनेक गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान विभिन्न कारणों से हाई रिस्क की स्थिति में आ जाती हैं और जिनका विशेष ध्यान नहीं रखा जाये तो प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा के जान का खतरा बढ़ सकता है।
    ऐसी गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में शामिल किया जाता है। जिनका वजन और ऊंचाई बहुत कम हो, जिनका हीमोग्लोबिन का स्तर 11 से कम हो और एनेमिक हो, जिनका रक्तचाप और शुगर का स्तर उच्च हो तथा जिनके पहले के बच्चे सिजेरियन ऑपरेशन से जन्में हो ऐसी महिलाओं में खतरे का स्तर बढ़ जाता है। ऐसी गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। जिससे प्रसव के लिये पूर्व से आवश्यक तैयारी कर सुरक्षित प्रसव कराया जा सके। सुरक्षित प्रसव हेतु प्रत्येक गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व न्यूनतम चार स्वास्थ्य जांच, आवश्यकतानुसार निर्धारित आयरन फोलिक, कैल्शियम एवं अल्बेंडाजोल गोली का सेवन, बीपी शुगर की नियमित जांच और सोनोग्राफी कराना चाहिये।
    ऐसे सभी गर्भवती महिलाओं को अपने विकासखंड के बीएमओ अथवा चिकित्सक से सतत संपर्क में रहकर प्रसव हेतु अस्पताल का चिन्हांकन और एम्बुलेंस आदि के संबंध में पूर्व से आवश्यक तैयारी कर सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराना चाहिये। सभी हाई रिस्क वाले गर्भवती महिलायें जो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के पहंुचविहीन स्थानों में रहती हैं उन्हें प्रसव तिथि के एक सप्ताह पूर्व से ही सावधानी बरतते हुये प्रसव हेतु वेंटिग कक्ष या अस्पताल मे भर्ती हो जाना चाहिये। जिससे सुरक्षित संस्थागत प्रसव हेतु गर्भवती महिलाओं को कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। सामान्यतः हाई रिस्क वाले गर्भवती महिलाओं का प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, सेप्सीस, हाईपरटेंशन आदि के कारण मृत्यु हो जाती है। इससे बचाव हेतु प्रत्येक मातृ मृत्यु का आडिट किया जाता है कि किन परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं का प्रसव के दौरान मृत्यु हो रही है। जिससे भविष्य में वैसी ही परिस्थिति में आवश्यक सावधानी बरत जच्चा बच्चा की जान बचाई जा सके।
    डॉ. प्रियंका शुक्ला ने प्रत्येक मातृ मृत्यु का गंभीरता से मातृ मृत्यु अंकेक्षण किये जाने के निर्देश दिये। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने जिला राजनांदगांव में मातृ एवं शिशु मृत्यु रोकने के लिये किये जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर उप संचालक स्वास्थ्य विभाग डॉ. अल्का गुप्ता, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक गिरीश कुर्रे, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. स्नेहा जैन, जिला डाटा अधिकारी अखिलेश चोपड़ा उपस्थित थे।

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