July 27, 2026
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    साइकोलॉजिकल फोरम छत्तीसगढ़ एवं शासकीय कमलादेवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का शुभारंभ

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    राजनांदगांव।शौर्यपथ / साइकोलॉजिकल फोरम छत्तीसगढ़ एवं शासकीय कमलादेवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार के पहले दिन कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का संचालन फोरम के सचिव डॉ. जय सिंह एवं अध्यक्षीय उद्बोधन अध्यक्ष डॉ. बसंत सोनबेर ने प्रस्तुत किया, जिसमें फोरम द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख भी किया गया। शासकीय कमला देवी राठी महिला महाविद्यालय राजनांदगांव की प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल ने स्वागत उद्बोधन कर सभी सम्माननीय अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. बंश गोपाल सिंह, कुलपतिए पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ी ने बताया कि तनाव के बिना कोई भी व्यक्ति रह नहीं सकता, क्योंकि यही वह प्रतिक्रिया होती है, जो हमें काम करने के लिए प्रेरित करती है, लेकिन इसे सही या गलत, किस तरह से उपयोग करना है यह हम पर निर्भर है। दुनिया में तनाव तो रहेगा ही, लेकिन उस तनाव के साथ आप कैसे जीते हैं या उसके अनुरुप अपने व्यवहार को कैसे समायोजित कर लेते हैं यही हमें सीखना है। उन्होंने यह भी बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के चुनौतियां का स्वरुप बदल गया है। अत्याधुनिक जीवन शैली हमें बहुत ज्यादा तनाव ग्रस्त करती है, जिसकी वजह से हमारा मानसिक स्वास्थ्य खराब होता है, हालांकि अलग-अलग आर्थिक वर्ग की अलग-अलग समस्याएं है जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। प्रोफेसर सिंह ने फोरम के सदस्यों के कार्यों की सराहना करते हुए बधाई दी कि वे मनोविज्ञान विषय की उपयोगिता को जन सामान्य तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। डी.डी.यू. गोरखपुर यूनिवर्सिटी, गोरखपुरए उत्तर प्रदेश की विभाग अध्यक्ष एवं कार्यक्रम की की-नोट स्पीकर प्रो. अनुभूति दुबे ने बताया कि हर प्रकार के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का अर्थ पागलपन ही है, इस मिथक को बदलने के लिए मानसिक स्वास्थ्य की चर्चा जन सामान्य तक पहुंचाना जरूरी है, जिसके लिए ऐसे जागरुकता के कार्यक्रम लगातार होने चाहिए। उन्होंने बताया कि जैसे स्वच्छ भारत अभियान प्रारंभ होने पर हर घर में साफ सफाई, सुरक्षा की बातें होने लगी, उसी तरह ऐसे बहुत से आयोजन और अभियान के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर लोगों का ध्यान जाने लगेगा और वह मनोचिकित्सक एवं परामर्शदाता तक बिना किसी संकोच के पहुंच पाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के लिए हर संस्थानों में, चाहे वह सरकारी अथवा गैर सरकारी हो, एक मनोचिकित्सक एवं परामर्शदाता की आवश्यकता पर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया। दुर्ग विश्व विद्यालय की कुलपति प्रो. अरुणा पलटा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के बिना शारीरिक स्वास्थ्य का कोई महत्व नहीं हैं। मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य मिलकर ही सामाजिक स्वास्थ्य का आनंद लेने देते हैं, इसलिए शारीरिक की तरह मानसिक स्वास्थ्य पर भी उतना ही अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। बनारस हिंदू विश्व विद्यालय के भूतपूर्व प्रो. आरएन सिंह ने बताया कि लिटरेसी का मेंटल हेल्थ में बहुत अधिक महत्व है, जिस जगह शिक्षा कम है, वहां मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं भी बहुत अधिक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जैसे सर दर्द हो तो हम चिकित्सक के पास जाते हैं, ठीक वैसे ही तनाव और चिंता होने पर हमें परामर्शदाता एवं मनोचिकित्सक के पास जाने में झिझकना नहीं चाहिए। कोविड-19 के दौरान जो बात आपको खुशी दे, वहीं करना चाहिए क्योंकि उसी से आपका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है, के बारे में भी बताया। देवेंद्र नगर महिला महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं परामर्शदाता डॉ. जेसी अजवानी ने बताया कि कोरोना काल में 300 प्रतिशत ज्यादा घरेलू हिंसा बढ़ी है, लेकिन यह केवल उन्हीं परिवारों में हैं जहां आपसी प्रेम और तारतम्यता की कमी थी। ऐसे बहुत से परिवार है जिन्होंने इस समय का सदुपयोग किया और अपने आपसी संबंधों को बहुत मधुर बनाया। शिकागो यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे समय बीतता है, वैसे-वैसे हमारे व्यवहार में किसी नई समस्या, बीमारी या परिस्थिति के लिए एक्सपटेंस आना शुरू हो जाती है। कोविड-19 के लगभग डेढ़ साल होने में हम इसी स्थिति में पहुंच रहे हैं, लेकिन इसके साथ में रिस्क टेकिंग बिहेवियर भी आता है तो हमें इस बीमारी से सतर्कता के साथ निपटना है ना कि लापरवाही के साथ खुद को और दूसरों को परेशान करना है। दुधाधारी बजरंग शासकीय कन्या महाविद्यालय रायपुर के मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. उषा किरण अग्रवाल ने बताया कि अगर हम अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखेंगे तो आगामी वर्षों में हम पोस्ट कोविड इफेक्ट डिसऑर्डर नाम की बीमारी के बारे में भी बहुत आसानी से सुन पाएंगे। हमारे अंदर धीरे-धीरे भाव शून्यता आ रही हैं इससे बचने के लिए हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना बहुत आवश्यक है। साथ ही छोटे बच्चे जिनके माता पिता की इस महामारी के दौरान मृत्यु हुई है, वो बच्चे जिनकी स्कूल जाने की आयु बढ़ रही है, इन सभी के मानसिक स्वास्थ्य जैसे बहुत से संवेदनशील मुद्दों पर उन्होंने सबका ध्यान आकर्षित किया। देर शाम तक देश के विभिन्न कौन से आए स्कॉलर अपने शोध पत्र के माध्यम से विचार व्यक्त करते रहे। ----------------

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