October 23, 2026
Hindi Hindi▼

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    Naresh Dewangan

    Naresh Dewangan

    कुम्हड़ाकोट से ससम्मान वापस लाया गया आठ चक्कों वाला विशाल विजय रथ, नवाखानी की रस्म के साथ संपन्न हुई बाहर रैनी

    जगदलपुर, शौर्यपथ। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरे में सदियों पुरानी परंपराओं, जनजातीय आस्था और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम एक बार फिर देखने को मिला। भीतर रैनी के बाद निभाई जाने वाली बाहर रैनी की रस्म गुरुवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर कुम्हड़ाकोट में छिपाए गए आठ चक्कों वाले विशाल विजय रथ को मान-मनौव्वल और पारंपरिक रस्मों के बाद ससम्मान वापस लाया गया।

    रूठे ग्रामीणों को मनाने पहुंचे राजपरिवार के सदस्य

    बस्तर दशहरे की विशिष्ट परंपरा के अनुसार, भीतर रैनी की रस्म पूरी होने के बाद बुधवार को माड़िया जनजाति के लोगों ने विशाल विजय रथ को खींचकर लालबाग स्थित कुम्हड़ाकोट के जंगलों में पहुंचा दिया था। रथ को प्रतीकात्मक रूप से छिपाने की यह परंपरा बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है, जिसमें राजा और प्रजा के बीच आत्मीय संबंध, संवाद और मान-मनौव्वल का भाव समाहित है।

    गुरुवार को बाहर रैनी की रस्म के दौरान बस्तर राजपरिवार के सदस्य रथ को वापस लाने के लिए कुम्हड़ाकोट पहुंचे। यहां उन्होंने माड़िया समाज के लोगों और ग्रामीणों के साथ बैठकर पारंपरिक रीति से संवाद किया। ग्रामीणों की मान-मनौव्वल की गई और आपसी सौहार्द के बीच रथ को वापस लाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

    नवाखानी में दिखी परंपरा और सामाजिक समरसता की झलक

    इस अवसर पर कुम्हड़ाकोट में पारंपरिक नवाखानी का आयोजन भी किया गया। नई फसल के आगमन की खुशी में नए चावल से तैयार खीर का नैवेद्य अर्पित किया गया। इसके बाद राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव, सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, महापौर संजय पाण्डे तथा ग्रामीणों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस सामूहिक आयोजन ने बस्तर की लोकपरंपराओं और सामाजिक एकजुटता की विशिष्ट तस्वीर प्रस्तुत की।

    गाजे-बाजे और जयकारों के साथ लौटा विजय रथ

    मान-मनौव्वल और नवाखानी की रस्म पूरी होने के बाद माड़िया समुदाय के लोगों तथा राजपरिवार के सदस्यों ने मिलकर विशाल विजय रथ को वापस लाने की परंपरा निभाई। पारंपरिक गाजे-बाजे और जयकारों के बीच रथ को खींचकर राजमहल के सिंहद्वार तक लाया गया। इसी के साथ बाहर रैनी की महत्वपूर्ण रस्म संपन्न हुई।

    बस्तर दशहरे की यह परंपरा केवल रथ की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय जनजातीय समाज की भागीदारी, पारस्परिक सम्मान और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत की झलक मिलती है। यही विशिष्ट परंपराएं बस्तर दशहरे को देश-दुनिया के अन्य उत्सवों से अलग पहचान प्रदान करती हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुरिया दरबार में होंगी शामिल, बस्तर दशहरा प्रदर्शनी का करेंगी अवलोकन; जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ करेंगी दोपहर का भोजन

    जगदलपुर, शौर्यपथ। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बस्तर प्रवास पर रहेंगी। उनके छत्तीसगढ़ प्रवास का दूसरा दिन बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, आस्था और ऐतिहासिक विरासत के नाम रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति सुबह 10:30 बजे भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचेंगी।

    जगदलपुर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति शक्तिपीठ मां दंतेश्वरी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देश और बस्तर अंचल की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। बस्तर की आराध्य देवी के दर्शन के पश्चात वे सिरहासार भवन पहुंचेंगी, जहां बस्तर की पारंपरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनजातीय परंपराओं के प्रतीक मुरिया दरबार में शामिल होंगी।

    इसके बाद राष्ट्रपति लालबाग मैदान पहुंचकर बस्तर दशहरा प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी। इस दौरान वे बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक रीति-रिवाजों और स्थानीय विरासत से रूबरू होंगी। इसके पश्चात आयोजित आमसभा को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगी।

    राष्ट्रपति के इस प्रवास का एक विशेष आकर्षण जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ उनका आत्मीय संवाद होगा। जनसभा के बाद वे बस्तर के पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधियों मांझी और चालकी के साथ दोपहर का भोजन करेंगी। इस मुलाकात को बस्तर की जनजातीय परंपराओं और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बीच संवाद के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ भोजन के बाद राष्ट्रपति लालबाग मैदान से जगदलपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगी। वहां से विशेष विमान द्वारा रायपुर होते हुए नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

    राष्ट्रपति का यह दौरा बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक परंपराओं और जनजातीय जीवनशैली को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

    कोंडागांव, शौर्यपथ। कल पूरे देश में शिक्षक दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया और बनाया भी जाना चाहिए क्योंकि शिक्षा ही इस देश का मूल आधार है शिक्षा के बिना जग अंधेरा है पर क्या आप किसी ने सोचा की हमारी शिक्षा व्यवस्था में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिनको उस कुर्सी में बैठने के लिए और बच्चों की जीवन को बचाने व सुरक्षित करने के लिए सरकार उनके ऊपर 100000 ₹150000 का खर्चा कर रही है पर वो सोचते हैं पर जब बच्चों की को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें न्याय दिलाने की बात आती है तब ये अपना दरवाज़ा बंद कर लेते है। कभी बहाना करते हैं कि सीट फुल हो गया, तो कभी बहाना करते हैं कि आपका यह कागज नहीं है। वो ऐसा ही मामला ग्राम कोरोबेड़ा का है। यहां के बच्चो के सिर्फ माँ बाप नहीं होने का सजा इन्हें मिल रहा है और ये सजा, ये अपनी किस्मत से नहीं भोग रहे है हमारे शिक्षकों की वजह से भोग रहे हैं, कभी उन बच्चों को आधार कार्ड के कारण स्कूल से निकाल दिया गया जब आधार कार्ड बन गया तो जिला कलेक्टर के आदेश को नजरअंदाज करते हुए उन बच्चों को फिर से गाँव भेज दिया गया। गाँव के हॉस्टल में जब जाकर वह बोले कि इन्हें यहां रख के ही पढ़ाना है तो वहां के टीचर बोले कि हमारे पास सीट फूल हो गया है। आप अपने घर से पैदल आ जाओ, जो कि उनका घर 4 km दूर है टीचर को यह शब्द बोलने से पहले ये सोचना चाहिए कि यह सिर्फ दूर नहीं बीच में जंगल है, नदी है, नाले हैं। और बच्चों की उम्र मात्र 5 -6 साल है, यह घटना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर आवाज़ उठाती है। ये घटना यह भी बताती है कि बिना माँ बाप के बच्चों का जीना इस समाज में इस देश में कितना मुश्किल है जहां इन्हें हर कदम पर यह एहसास दिलाया जाता है कि तुम्हारे लिए कोई नहीं है तुम अकेले हो यही दुनिया का सबसे बड़ा हकीकत है कि जहां पूरे समाज को पूरे प्रशासन को इनका परिवार बनके इनके लिए काम करना था वह इन्हें गली गली भटकने पर मजबूर कर दिया गया।

    जिला कलक्टर ने कोशिश भी किया। आदेश भी किया पर जो जवाबदार अधिकारी है, उन्हें कोई मतलब नहीं सिर्फ उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ लें, डॉ इंजीनियर कमिश्नर बन जाए।हमें गरीबों के बच्चों से क्या लेना है?इन्हें मानसिकता के साथ आज पुरा सिस्टम कार्य कर रहा है, यह मात्र सिर्फ दो बच्चों की कहानी नहीं है।यह उन तमाम जरूरतमंद, यह तमाम अनाथ तमाम गरीब और गरीबी से जूझ रहे उन बच्चों की कहानी है जो पढ़ना तो चाहते हैं, पर उन्हें मजबूर किया जाता है कि तुम्हारे लिए शिक्षा नहीं बनी है।और यही बच्चे जब शिक्षा से वंचित रह जाते हैं कोई गलत काम करते हैं नशा करते हैं या किसी और घटना को अंजाम दे देते हैं। तो यही प्रशासन अपने लाखों और करोड़ों की बिल्डिंग में बैठकर तक चर्चा करते हैं। ये हमारे क्षेत्र का हमारे जिले का लॉयन ऑर्डर कैसे बिगड़ रहा है कौन है यह है ये गुंडा कौन है यह नशेड़ी है, और उठाकर उसे जेल भेज दिया जाता है पर क्या उसकी आपबीती जानने का या उसे पहचानने का या किस कारण से आज उसका यह हालत हुई है इसके ऊपर कभी किसी ने सोचा है किसी ने चर्चा किया है इसका कारण भी यही समाज है यही प्रशासन है जब वो न समझ था तो स्कूल स्कूल घूम रहा था कि मुझे कोई पढ़ा लो उस समय कोई पढ़ाने वाला नही था और ना ही कोई सहारा देने वाला था हमें उन चीजों में भी विचार करना और सोचने की उतनी ही जरूरी है की हम प्रशासन के सबसे बड़े पद और प्रतिष्ठा में बैठकर। हमने उन नौजवान, वो अनाथ, उन गरीब जरूरतमंद बच्चों के लिए क्या किया है। कि आज वो बर्बादी के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंच गये। वो नहीं पहुंचे, उन्हें हमारे सिस्टम ने हमारे समाज भी उतना ही जिम्मेदार है जितना उस बच्चे की मजबूरी जिम्मेदार थी ये हम सभी के लिए प्रश्नवाचक चिन्ह है।क्या हमने अपने समाज के लिए अपने बच्चों के लिए क्या किया है?

    सुकमा, शौर्यपथ। जिले के कोंटा ब्लॉक में जगदलपुर की टीम एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, कोंटा विकासखंड शिक्षा कार्यालय में पदस्थ खंड शिक्षा अधिकारी चंद्र कुमार यारदा पर एक महिला कर्मचारी से एरियर्स की राशि निकलवाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। महिला कर्मचारी ने इसकी शिकायत जगदलपुर की टीम एंटी करप्शन ब्यूरो से की थी।

    शिकायत के सत्यापन के बाद जगदलपुर की ACB की टीम ने योजना के तहत कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि जैसे ही महिला कर्मचारी ने अधिकारी को 10 हजार रुपये की रिश्वत दी, मौके पर पहुंची ACB की टीम ने चंद्र कुमार यारदा को रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

    ACB की टीम द्वारा आरोपी अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

    By - नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?

    वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।

     

    सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?

    सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।

    प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”

     

    इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।

    " लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "

    जगदलपुर में एक सप्ताह के भीतर खाद विभाग की दूसरी बड़ी कार्रवाई, अवैध चावल कारोबारियों में मचा हड़कंप

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब एवं पात्र राशन कार्डधारकों को निःशुल्क वितरित किए जाने वाले चावल की अवैध खरीदी-बिक्री के खिलाफ खाद विभाग ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के भवानी चाट भंडार के पीछे स्थित दीप्ती बाड़ा के एक गोदाम से लगभग 378 बोरा (करीब 186 क्विंटल) पीडीएस चावल, लगभग 3 क्विंटल चना, 100 पीडीएस बारदाना तथा लोडिंग में लगे 12 चक्का ट्रक (CG 04 LC 9409) को जब्त किया है। बताया जा रहा है कि ट्रक रायपुर का है और कार्रवाई के समय उसमें चावल लोड किया जा रहा था।

    जानकारी के अनुसार खाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि गोदाम से बड़ी मात्रा में पीडीएस चावल बाहर भेजने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी और कार्रवाई को अंजाम दिया। जब्त चावल को सुरक्षित रखने के लिए निकटस्थ शासकीय उचित मूल्य दुकान में रखवाया गया, जबकि ट्रक को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए कोतवाली थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। पूरे मामले की रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजी गई है।

    विभाग के अनुसार, इस मामले का संबंध मोहम्मद जिलानी नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    खाद विभाग की एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। लगातार हो रही छापेमार कार्रवाई से शहर में पीडीएस चावल की अवैध खरीदी-बिक्री से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। विभाग के सख्त रुख से ऐसे कारोबार में संलिप्त लोगों के बीच भय का माहौल देखा जा रहा है।

    सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य द्वारा शासकीय उचित मूल्य (राशन) दुकान का संचालन किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि कहीं कथित अवैध चावल खरीदी-बिक्री के साथ-साथ पात्र हितग्राहियों के लिए आवंटित पीडीएस राशन के वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता या हेराफेरी तो नहीं हुई। इस संबंध में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    पीडीएस का चावल शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे चावल का अवैध भंडारण, परिवहन अथवा व्यापार न केवल शासन की जनकल्याणकारी योजना को प्रभावित करता है, बल्कि पात्र हितग्राहियों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालता है। अब इस मामले में जांच पूरी होने और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। बोधघाट थाना क्षेत्र से हाटकचोरा एवं करकापाल जाने वाले मार्ग के दोनों ओर संबंधित विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर "कचरा फेंकना मना है" संबंधी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जाता है।

    हालांकि, मार्ग से गुजरने वाले कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं, उनमें से कई स्थानों के आसपास कचरा दिखाई देता है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि केवल सूचना बोर्ड लगाने से अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।

    स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूकता के साथ-साथ नियमित निगरानी, कचरा संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था तथा नियमों के प्रभावी पालन की भी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि प्रतिबंध संबंधी सूचनाओं के साथ व्यवहारिक प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो, तो सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या में कमी लाई जा सकती है।

    क्षेत्र के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सूचना बोर्ड लगाने पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया है, इसलिए समय-समय पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अभियान अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है या नहीं।

    स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले जानकारों का मानना है कि किसी भी जागरूकता अभियान की सफलता केवल संदेश प्रसारित करने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से तय होती है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने के लिए खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। संचालक खनिज एवं बस्तर कलेक्टर के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर अवैध कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 36 वाहनों को जब्त किया है।

    खनिज विभाग की इस सक्रियता को जिले में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय टीम ने उपनपाल, देवड़ा, कोडेनार, बड़ेआमाबाल, कोरपाल, बेलगांव, धरमपुरा, जगदलपुर, कुम्हरावंड, पिपलावंड, बजावंड, बडांजी, तारापुर और बनियागांव सहित कई क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण किया। जांच के दौरान अवैध रूप से रेत एवं चुना पत्थर का उत्खनन, परिवहन और भंडारण करते पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।

    कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी वाहनों को पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया है, वहीं चार भंडारणकर्ताओं के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनिज गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 एवं खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1967 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

    खनिज विभाग की इस मुहिम से अवैध खनिज कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं आम लोगों में प्रशासन की सक्रियता को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। विभागीय अधिकारियों की सतर्कता और मैदान स्तर पर लगातार निगरानी से यह साफ संकेत मिला है कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    इस अभियान में खनि अधिकारी शिखर चेरपा, सहायक खनि अधिकारी जागृत गायकवाड, खनि निरीक्षक अंकित पुरी, अनि सिपाही डिकेश्वर खरे, नगर सैनिक विजय कश्यप, कृष्णा बघेल एवं सहदेव बघेल सहित जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कोंडागांव, शौर्यपथ।  छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कोंडागांव जिला 2012 से जिला घोषित हो गया था जिसके बाद से अब तक जिले में सभी जिलेवासियों को शासन की सभी योजनाओं को पूरा किया जा रहा है । मगर एक तरफ ध्यान दिया जाए तो एक बड़ी बात सामने आती है देश एक कठनाई से गुजर रहा है जहाँ पेट्रोल व डीजल की किल्लत देखा जा रहा है।

    वही अगर बात करे कोंडागांव की तो  

    न्यायालय कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर जेल भेजती है जो कोंडागांव मुख्यालय से 60 से 50 किलोमीटर दूर पड़ता है जहाँ रोजना कैदियों को लाने में मशक्कत की जाती है अगर कोंडागांव जिला मुख्यालय में भी एक जेल या उप जेल बन जाए तो पुलिस को राहत मिलेगी।

    समस्या क्या है?

    कोंडागांव को 2012 में जिला घोषित किया गया था

    इसके बावजूद यहां अभी तक जिला जेल/उप-जेल नहीं है

    कोर्ट (न्यायालय) से कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर भेजा जाता है

    यह दूरी लगभग 50–60 किलोमीटर है

    इससे क्या दिक्कतें हो रही हैं?

    पुलिस को रोज कैदियों को ले जाने में अधिक मेहनत और संसाधन खर्च

    पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक बोझ

    सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है (लंबी दूरी पर ट्रांजिट)

    कैदियों और उनके परिजनों को असुविधा

    अब देखने वाली बात होगी कि शौर्यपथ की इस खबर से जिला प्रशासन व शासन क्या कदम उठाएगी।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। डिमरापाल आयुष औषधालय में नियमित उपस्थिति को लेकर शिकायत के बाद अब मामले में एक नया पहलू सामने आया है। विभागीय सूत्रों एवं संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायत के बाद जिला आयुष अधिकारी द्वारा संबंधित चिकित्सा अधिकारी से चर्चा की गई, जिसमें कथित रूप से नियमित उपस्थिति प्रभावित होने के पीछे “अत्यधिक गर्मी” एवं व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, संबंधित चिकित्सा अधिकारी ने चर्चा के दौरान कहा कि अत्यधिक तापमान के कारण लंबे समय तक अस्पताल में बैठने में कठिनाई होती है। इस पर जिला आयुष अधिकारी ने कथित तौर पर नाराजगी व्यक्त करते हुए यह कहा कि शासकीय सेवा में निर्धारित समय तक उपस्थित रहकर मरीजों को सेवाएं देना आवश्यक दायित्व है और अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी समान परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि इसके बाद संबंधित चिकित्सा अधिकारी द्वारा पारिवारिक परिस्थितियों, विशेषकर अपनी स्कूली बेटी की देखभाल का उल्लेख करते हुए नियमित उपस्थिति में कठिनाई होने की बात कही गई। साथ ही यह भी चर्चा में आया कि उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों की जानकारी विभागीय स्तर पर होने के कारण उन्हें ऐसे स्थान पर पदस्थ किया गया, जहां आवागमन अपेक्षाकृत सुगम हो। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी अस्पताल “व्यक्तिगत सुविधा केंद्र” बनते जा रहे हैं? यदि व्यक्तिगत कारणों और मौसम को आधार बनाकर नियमित ड्यूटी प्रभावित होगी, तो दूरदराज के मरीज आखिर किस भरोसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की ओर देखें?

    सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अनुपस्थित रहने के बावजूद हाजिरी में अनुपस्थिति दर्ज नहीं होती। हालांकि, इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही संभव होगी।

    अब मुख्य प्रश्न यह है कि यदि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण मरीजों पर पड़ता है। ऐसे में आमजन की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस मामले में तथ्यात्मक जांच कर क्या निष्कर्ष निकालता है और नियमानुसार क्या कदम उठाए जाते हैं।

    Page 1 of 26

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision