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अन्य खबर /शौर्यपथ /
रंग का एक अर्थ रौनक़ भी है और दूजा है आनंद। तीजा मतलब है उत्सव। जीवन में जितने रंग उतनी तरंग और उमंग और जीवन उतना ही रंगारंग...! होली का एक दिन इसी जीवन का दर्पण है।
हमारे दैनंदिन में रंग कम हुए तो होली के रंग में भंग पड़ गया। अब न ढोलक की थाप, न महीना पहले से अंगड़ाई लेने वाला फाग। न नगाड़े की वैसी गूंज, न दिल खोलकर मज़ाक़, बस एक औपचारिक-सा रिवाज।
एकरंग या कहें कि बेरंग ज़िंदगी का अक्स बन गई है होली। अबके अवसर है कि हम होली के बहाने जीवन में फिर से बेफ़िक्री, दोस्ती, मस्ती, संगीत, रिश्तों और सामूहिकता के रंग बिखेरें और हर दिन कर लें त्योहार-सा गुलज़ार!
दिन के पांच बज रहे हैं। हवा मौसम बदल जाने की सूचना दे रही है। लेकिन मेरी आंखों के सामने अजीब-सा मंज़र है। देख रहा हूं कि जैसे धूल खाए पौधे हवा में धीरे-धीरे हिलते हैं, वैसे ही कुछ धूल खाए चेहरे मुम्बई की इस सड़क पर हिल रहे हैं। विषाद से भरे, एकदम रंगहीन! मास्क में ढके सैकड़ों चेहरे निहायत ही बोझिल चाल से चले आ रहे हैं, जैसे किसी ने सबका उत्साह निचोड़ लिया हो। कोई बीच-बीच में मास्क सरका देता है। कोई थोड़ा मुस्करा देता है। कुछ जम्हाई लेते हैं। कुछ भागे जा रहे हैं। मैं खड़ा हूं। अंधेरी की इस दसवीं मंजि़ल की खिड़की से जहां तक देखता हूं एक ग़ुुबार-सा दिखता है। सहसा ज़ेहन में वो गीत कौंध आता है, ‘ये क्या जगह दोस्तो... ये कौन सा दयार है!’ लेकिन वक़्त गीत का नहीं है। अचानक ही याद आता है, चाय तो बनी नहीं। सूरज तो डूब जाएगा, सांझ भी होगी, लेकिन बिना चाय के एक लेखक की सांझ कैसे हो सकती है? उठता हूं। चाय बनाकर फिर खिड़की पर बैठ जाता हूं। नज़र फिर सड़क पर जम जाती है। देख रहा हूं कि मेरा ही पड़ोसी, जिससे आज तक कभी बात न हुई वो लैपटॉप पीठ पर लादकर भारी मन से लौट रहा है। उसकी हालत देखकर मुझे सुबह उसके ऑफ़िस जाने का वाक़या याद आता है। याद आता है कि ठीक सुबह वो लिफ़्ट से जाते हुए हौले-से मुस्काया था। संवाद की इस सबसे आसान और मधुर भाषा में यूं तो मुझे कोई मौलिकता नज़र नहीं आई थी, लेकिन एक महानगर में कोई अनजान शख़्स आपकी तरफ़ देखकर मुस्करा रहा था ये भी क्या कम ख़ुश होने वाली बात नहीं थी! जवाब में मैं भी मुस्काया था। और दोनों लिफ़्ट में लगे फ्लोर डिस्प्ले के कम होते नम्बर गिनने लगे थे। ग्राउंड फ्लोर पर आते-आते अचानक उसका फ़ोन बज उठा था। फोन उठाते ही उसका चेहरा एकदम रंगहीन हो गया था। मैंने देखा, फोन उठाकर वो कहने लगा, ‘सॉरी यार, पीपीटी नहीं बन पाया है, क्या करूं? इतना प्रेशर है कि रात को ठीक से सो भी नहीं पाया। आज ऑफ़िस आने का मन नहीं था क्या करूं! अच्छा... ऐसा कह रहे थे सर... हां तो आता हूं न, जस्ट वेट यार।’ उसकी बात सुनकर मैं सोचने लगा था- आज क्या होगा इस आदमी का? तभी मेरा मोबाइल बज उठा। स्क्रीन पर मैंने देखा, एक पुराने मित्र बनारस से फोन कर रहे थे। उन्होंने जानना चाहा कि होली में गाने के लिए मैं ढोलक कहां से ख़रीद सकता हूं। मैंने मित्र की बात ध्यान से सुनी थी। उनकी दिली तमन्ना थी कि मैं उनको ढोलक के बारे में तफ़सील से जानकारी दूं। मुझे ये जिज्ञासा सुंदर लगी थी। मैंने बनारस की कुछ दुकानों का पता बताया था। दुकानों के नाम सुनकर उनकी आवाज़ में उत्साह बढ़ गया था। पूछने लगे थे, ‘तुम न आअोगे? कहो तो एक हारमोनियम भी ले लूं... आ जाते तो यार रंग जम जाता...’ मैंने कहा, ‘देखो, आने का सोचा तो है, पर क्या करूं समझ नहीं आ रहा।’ कभी-कभी लगता है मेरी भी हालत मेरे पड़ोसी जैसी हो गई है। रोज़ लगता है कि पीपीटी नहीं बन पाई है। मित्र का फोन कट गया था। और फिर मेरा पड़ोसी और मैं दोनों दिनभर अपने-अपने काम में डूब गए थे। लेकिन अभी सामने दिख रहा सूरज अब अलविदा की अंतिम हंसी हंस रहा है। उसको देखकर मुझे ढोलक वाला दोस्त याद आता है। सोचता हूं मेरा दोस्त भी कोई खलिहर आदमी नहीं है। एक अदद नौकरी, कुछ ज़िम्मेदारियां उसके भी पास हैं। लेकिन बावजूद उसके इस आदमी ने होली के लिए ढोलक ख़रीदने का बीड़ा उठा लिया है। ये भी ग़ज़ब है। सोचता हूं एक बार कॉल करके पूछ लूं कि भाई शाम हो गई... तुमने ढोलक ख़रीदी है कि नहीं? लेकिन मेरी नज़र सामने से आ रहे मेरे पड़ोसी पर टिक जाती है। मैं सुबह की स्मृति को आंख से हटाकर फिर उसे देख रहा हूं, उसके चेहरे पर विषाद की एक विशाल रेखा खिंच गई। उस रेखा से असंतोष झांक रहा है। ऐसा लग रहा है ये आदमी स्वयं ढोलक बन गया है। एक फटी हुई ढोलक। पीपीटी न बना पाने के कारण आज इसने सुन ली है और अपना सारा फ्रस्ट्रेशन अपने चेहरे पर जमा कर लिया है। मुझे दया आती है। फिर से मुझे लिफ़्ट में जाने का मन होता है। सोचता हूं, जाऊं और पूछ दूं कि कहो भाई साहब, कैसे हैं आप? कैसा रहा आज का दिन? पर डर लगता है। कहीं मेरा पड़ोसी रोने लगे तो? कई बार देखा है बस स्टैंड पर, लोकल में; जुहू, वर्सोवा के पत्थरों के बीच में लुढ़कते चंद बेबस आंसुओं को फटी हुई ढोलक बन जाते हुए। डरता हूं... नहीं-नहीं इस हालत में शायद मुस्काना भी सही नहीं होगा। कुछ कहना भी ठीक नहीं होगा। मन उदास हो चला है। इस भरे बसंत में ज़िंदगी को यूं रंगीनियत से दूर होकर एक मशीन बनते देखना कितना दुःखद है, बताया नहीं जा सकता है। अब चाय पीकर बाहर निकलने का मन होता है। देख रहा हूं कि चौराहे पर चाय-कॉफ़ी, पकौड़े के साथ उठते सिगरेट के धुएं में ऑफ़िस के बोझ को कम किया जा रहा है। कहीं गप्पें, कहीं हुल्लड़ और टांगखिंचाई के साथ दिनभर का सारा फ्रस्ट्रेशन भूलने का प्रयास किया जा रहा है। कई जगह वडा पाव को हाथ में लेकर सोशल नेटवर्किंग साइट पर स्टोरी अपडेट करते युवा बता रहे हैं कि उनके पास वाक़ई समय नहीं है। तभी मित्र ने फिर कॉल किया। ‘आ जाअो, ढोलक ले ली है... अबकी रंग जमेगा।’ मित्र के मुंह से फिर रंग, ढोलक और जमेगा जैसे तीन शब्दों ने मेरी प्राण ऊर्जा को स्पंदित कर दिया है। मैं भी न जाने किस भाव में आकर कह देता हूं, ज़रूर आऊंगा मेरे भाई... पक्का आऊंगा… और पक्का रंग जमेगा... और सिर्फ़ मैं ही नहीं आऊंगा, बाक़ी अपने आस-पास के लोगों से कहूंगा कि ज़िम्मेदारियां ज़िंदगी को बोझिल बना चुकी हैं, दौड़ अंतहीन लग रही है तो रुककर कुछ देर सुस्ताने में कोई कठिनाई नहीं है। त्योहार जीवन की फटी हुई ढोलक में नई थाप देकर हमें नवीन ऊर्जा से भरने के लिए आते हैं। लाख व्यस्तता हो... ज़िंदगी की पीपीटी में त्योहार के रंगों को भरे रखना ज़रूरी है। नहीं तो जीवन मेरी खिड़की से दिख रही सांझ की तरह कब बोझिल हो जाएगा हमें पता भी न चलेगा। पता कहां चल रहा है!
इंस्पायरिंग/शौर्यपथ/
मुझे अच्छे-से याद है। जब मैंने बोलना शुरू किया था, तो पेरेंट्स से मेरा पहला वाक्य यह था- ‘मैं एक्टर बनना चाहता हूं। जब 14 या 15 साल का हुआ तो क्लासिक फिल्में देखता था। महीनों तक उन्हें देखा करता था। लगभग सभी ग्रेट क्लासिक्स मैंने देखी होंगी। मैं अपने आप से कहता था कि एक दिन मैं भी ऐसा ही कुछ कर दिखाउंगा। मुझे लगता है मेरी यह प्यास, यह ड्राइव ही मुझे मेरी मंजिल की तरफ धकेलती रही। इसी उम्र में मुझे रॉबर्ट डी नीरो के साथ एक फिल्म करने का मौका मिला। मुझे तभी यह अहसास हो गया था कि यह ऐसा गिफ्ट है, जो मेरे साथ जीवन भर रहने वाला है।
मुझे ताकत मिली मेरे इर्द-गिर्द रहने वाले दोस्तों और मेरे परिवार वालों से। वो मेरे साथ इतने ईमानदार रहे कि मेरे पैरों ने कभी जमीन छोड़ी ही नहीं। वो मुझे जिंदगी में आने वाली हर कठिनाई के लिए तैयार करते रहे। मैं साधारण परिवार से हूं। मैंने पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की लेकिन खूब प्यार करने वाले पैरेंट्स मिले। मेरे दोनों ही पैरेंट्स अद्भुत हैं, लेकिन पिता खास रहे। मैंने अपने जीवन में उनसे समझदार इंसान नहीं देखा। उन्होंने मेरी जिंदगी को हर सकारात्मकता की ओर मोड़ा। आज अगर मैं पर्यावरण कार्यकर्ता, एक्टर या इंसान... जो भी हूं उन्हीं के कारण हूं, उन्हीं से प्रभावित हूं।
मैंने ऑडिशन दिए तो रिजेक्शन भी मिले। 12 साल तक केवल रिजेक्शन ही मिले। पिता मुझे ऑडिशन के लिए ले जाते थे। वो अपने शहर से लॉस एंजिलिस शिफ्ट हो गए। जब मैंने ऑडिशन के प्रति अपना नजरिया बदला तब मुझे काम मिला। मैंने यह सोचना शुरू किया कि मैं इस काम पर निर्भर नहीं हूं, इसी से मेरा भविष्य तय नहीं होना है। मैं खुद को समझाता रहा कि यही अंतिम सत्य नहीं है।
कभी इस बात पर खुद को नहीं आंका कि मुझे काम मिला या नहीं। मैंने पाया कि लोग आपसे बेकार उम्मीदें नहीं करते हैं वो केवल ‘अलग’ एटिट्यूड की तलाश में होते हैं। अपने को अलग दिखाने के लिए आप क्या करते हैं, यह मायने रखता है। यह आप तभी कर पाएंगे जब रिजेक्शन का डर आपसे जुदा होगा।
वो बनने की कोशिश मत कीजिए, जो आप हैं नहीं। अपने सच के साथ जीना सीखिए। जब आप खुद में बदलाव शुरू करेंगे तो वो अंदर से होगा। खुद पर और अपनी क्षमताओं पर यकीन करें। असफलता और रिजेक्शन का मतलब यह नहीं है कि आप लायक नहीं हैं। कई बार इसका मतलब केवल मामूली-सा बदलाव लाना होता है। असफलता को स्वीकारिए, और उससे सीखिए।’(विभिन्न सोशल मीडिया इंटरव्यू से)
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके विधानसभा परिसर स्थित कार्यालय में राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाली के फैसले के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री बघेल ने राज्य के वर्ष 2022-23 के बजट में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है।
इस अवसर पर संघ के प्रांताध्यक्ष अश्वनी कुमार वर्मा, नीरज सिंह, निर्मल साहू, मनोज बाँधेकर, दिनेश यादव एवँ संघ के सदस्यगण भी उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
स्कूल शिक्षा विभाग का अंगना म शिक्षा कार्यक्रम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इस कार्यक्रम को गत वर्ष पूरे राज्य की सभी महिला शिक्षकों द्वारा बढ़-चढ़कर इस में सहभागिता की गई एवं मेले का आयोजन कर छोटे बच्चों की माताओं को गतिविधियां कराते हुए घर के संसाधनों से ही सिखाने की शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम को न केवल राज्य स्तर पर, अपितु राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। नवीन सत्र प्रारंभ होने से पहले पुनः अंगना में शिक्षा 2.0 की शुरुआत की गई है। रायपुर जिले के धरसीवा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला जरवाय से इसकी शुरुआत की गई है जिसमें जरवाय गांव की 50 माताएं मेले के माध्यम से अपने बच्चों का परीक्षण कर पाई एवं सपोर्ट कार्ड के माध्यम से उनकी गति को अंकित कर पाई। इस वर्ष अंगना में शिक्षा 2.0 के अंतर्गत स्मार्ट माता का चयन प्रत्येक गांव से किया जाएगा, जिसके अंतर्गत जरवाय गांव की सबसे एक्टिव महिला इंदिरा सूर्यवंशी को स्मार्ट माता के रूप में चुना गया। उन्हें राज्य परियोजना कार्यालय के अतिरिक्त मिशन संचालक के.सी काबरा द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सभी संभाग से दो-दो महिला शिक्षिकाएं नेतृत्व करते हुए उपस्थित थी।
स्मार्ट माता के चयन का आधार समुदाय में उनकी पहुंच, प्रभाव, महिलाओं के मध्य उनकी साख, उनका नेतृत्व कौशल एवं उनके पास या परिवार में स्मार्ट फोन का होना है। स्मार्ट माताओं की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने समुदाय से अन्य माताओं को संगठित रखेंगी और उन्हें नियमित रूप से बच्चों को घर पर सिखाने हेतु प्रेरित करने के साथ-साथ संबंधित शाला के शिक्षिकाओं को चल रही स्थितियों के नियमित रूप से अवगत करवाने एवं फीडबैक देने का कार्य कर सकेंगी। स्मार्ट माताओं एवं अन्य सभी माताओं जिनके पास स्मार्ट फोन हैं उन्हें राज्य द्वारा संचालित अंगना म शिक्षा टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया। स्मार्ट माता के रूप में चयनित श्रीमती इंदिरा सूर्यवंशी द्वारा इस अवसर पर चयनित होनेपर असीम खुशी महसूस की और कार्यक्रम में जुड़कर बच्चों को लगातार सीखने हेतु सभी माताओं को जोड़कर सक्रिय रखने का प्रण लिया गया। जरवाय गाँव से बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामवासी एवं शाला प्रबन्धन समिति के सदस्यों ने राज्य के पहले मेले के आयोजन का अवसर उनके गाँव को मिलने पर अपने आपको बहुत गौरवान्वित महसूस किया।
अंगना म शिक्षा 2.0 की दूसरी पारी की शुरुआत राज्य स्तर पर दिनांक 14-15 मार्च को समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय के तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर राज्य कोर ग्रुप में सभी पाँचों संभाग से दस शिक्षकाओं ने सहभागिता देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं मेले का आयोजन कर इसकी शुरुआत की। राज्य में इस दूसरी पारी का पहला मेला रायपुर के जरवाय प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक श्री त्रिपाठी एवं उनके शिक्षकों, शाला प्रबन्धन समिति के सहयोग से शुरू हुआ। इस मेले में जरवाय गाँव में संचालित आंगनबाडी शिक्षिकाएं एवं 50 माताओं ने अपने 50 बच्चों के साथ प्रत्येक काउंटर की गतिविधियों को सीखा और अलग से प्रत्येक गतिविधि के घर पर आयोजन हेतु प्रशिक्षण भी लिया।
राज्य में कक्षा दूसरी तक पढ़ने वाले अर्थात सात आयु वर्ग तक के बच्चों को घर पर सीखने में सहयोग देने हेतु महिला शिक्षिकाओं की पहल पर अंगना म शिक्षा कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। इसमें सभी शालाओं से जुड़े स्थानीय बसाहटों में ऐसे बच्चों की माताओं को एक मेले का आयोजन कर आमंत्रित किया जाता है। मेले में माताएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर आती हैं। आसपास की शालाओं की महिला शिक्षिकाएं अपने साथ कुछ महिला स्वयंसेवकों को लेकर मेले में नौ अलग अलग काउंटर तैयार कर बच्चों को उनकी माताओं के साथ उनके दक्षता परीक्षण एवं अभ्यास हेतु अवसर प्रदान करती हैं। इन काउंटर में विभिन्न गतिविधियाँ जैसे अनुमान लगाना, कागज़ के खिलौने बनाना, चित्रों पर चर्चा, कूदना, पढ़ना, अंक पहचान, गिनती, जोड़-घटाना, वर्गीकरण जैसे विभिन्न दक्षताओं की पहचान कर उन्हें सपोर्ट कार्ड में अपने बच्चे की विभिन्न दक्षताओं में सही सही स्थिति को अंकित कर स्वयं हस्ताक्षर करने का अवसर प्रदान किया जाता है। आगामी सत्र में माताएं इन सपोर्ट कार्ड पर बच्चे की स्थिति का अंकन कर अपने बच्चे के स्कूल में उसके शिक्षक को देते हुए यह प्रमाणित करेंगी कि उन्होंने घर पर अपने बच्चे को इतना कुछ सिखा दिया है।
कार्यक्रम में राज्य परियोजना कार्यालय के सहायक संचालक डॉ. एम. सुधीश भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में जरबाय शाला के प्रधान पाठक कांति त्रिपाठी, संकुल समन्वयक फिरोज खान एवं शाला विकास समिति के अध्यक्ष एवं सभी सदस्य उपस्थित थे।
धमतरी /शौर्यपथ/
जिले के सात हितग्राहियों को समाज कल्याण विभाग द्वारा श्रवण यंत्र प्रदाय किया गया। उप संचालक, समाज कल्याण विभाग श्री एम.एल.पॉल ने बताया कि 40 प्रतिशत श्रवण बाधित इन हितग्राहियों ने 15 मार्च को श्रवण यंत्र के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। विभाग द्वारा तुरंत उक्त आवेदन को स्वीकार कर श्रवण यंत्र प्रदाय किया गया। इनमें कुरूद तहसील के ग्राम गुदगुदा की 65 वर्षीय सामवती साहू, भीखु राम साहू, ग्राम चटौद के 70 वर्षीय श्री नेमु राम साहू, ग्राम खैरा के 77 वर्षीय बद्री राम साहू और नगर पंचायत कुरूद के 80 वर्षीय फूल सिंह साहू शामिल हैं। इसी तरह मगरलोड तहसील के ग्राम कुंडेल निवासी 65 वर्षीय अनुसूइया बाई साहू और नगरी तहसील के ग्राम बिलभदर निवासी 70 वर्षीय दुख राम को भी विभाग द्वारा श्रवण यंत्र दिया गया है।
जांजगीर चांपा /शौर्यपथ/
गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप स्वयं की भूमि पर वृ़क्षों की कटाई के नियम सरल कर दिए गए हैं। इससे भू-स्वामियों को वृक्षों की कटाई के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। शासन द्वारा वृक्षों के कटाई से संबंधित आवेदनों पर कटाई की अनुमति देने के लिए समय-सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। सरलीकृत नियम के अनुसार स्वयं की भूमि पर रोपित किए गए वृक्षों की कटाई के लिए भू-स्वामी को एसडीएम को केवल सूचना देनी होगी। इसी प्रकार वृक्ष प्राकृतिक रूप से उगे होने की स्थिति में, ऐसे वृक्षों की कटाई के लिए भू-स्वामी कों एसडीएम से लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बघेल ने गणतंत्र दिवस के मौके पर वृक्षों की कटाई से संबंधित नियमों को सरल बनाने की घोषणा की थी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा पर राजस्व विभाग द्वारा त्वरित अमल करते हुए वृक्षों की कटाई के नियमों को सरल बनाया गया है। सरलीकृत नियमों को वृक्ष कटाई नियम -2022 के नाम से राजपत्र में प्रकाशन भी करा दिया गया है। इस नियम के तहत भू-स्वामी अपने खाते में प्राकृतिक रूप से उगे वृक्ष की कटाई हेतु निर्धारित प्रारूप में एसडीएम को आवेदन देंगे। इसके पश्चात एसडीएम के निर्देश पर राजस्व तथा वन विभाग के अमले को संयुक्त रूप से निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण प्रतिवेदन 30 कार्य दिवस के भीतर एसडीएम को प्रस्तुत किया जाएगा। निर्धारित अवधि में निरीक्षक प्रतिवेदन प्राप्त न होने पर भी एसडीएम अग्रिम कार्यवाही कर सकेंगे।
एसडीएम प्राकृतिक रूप से वृक्ष कटाई के लिए आवेदन प्राप्ति के 45 दिन के भीतर अपनी अनुशंसा आवेदक तथा वन मंडलाधिकारी को भेजेंगे। यदि आवेदक को 45 कार्य दिवस के भीतर एसडीएम का लिखित निर्णय प्राप्त नहीं होता है तो वह स्मरण कराने हेतु पुनः आवेदन कर सकेगा। यदि अगले 30 कार्य दिवस के भीतर पुनः लिखित निर्णय प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि आवेदन पर अनुशंसा प्रदान कर दी गई है। ऐसी स्थिति में आवेदक अपनी जमीन पर उपजे वृक्षों की कटाई के लिए स्वतंत्र होगा। एक कैलेण्डर वर्ष में एक खाते में प्राकृतिक रूप से उगे चार वृक्ष प्रति एकड़ के मान से अधिकतम 10 वृक्षों की कटाई के लिए एसडीएम अनुशंसा कर सकेंगे।
भू-स्वामी द्वारा अपने खाते में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों की कटाई के लिए एसडीएम और वन परिक्षेत्र अधिकारी को कटाई से एक माह पूर्व निर्धारित प्रारूप में सूचना देनी होगी। सूचना के साथ पंजीयन संबंधी राजस्व अभिलेख एवं स्व-घोषणा पत्र निर्धारित प्रारूप में देना होगा। भू-स्वामी द्वारा प्रस्तुत सूचना और स्व-घोषणा पत्र का दस्तावेजी एवं भौतिक सत्यापन पटवारी एवं वनपाल के माध्यम से कराया जाएगा। भू-स्वामी द्वारा लिखित में इच्छा व्यक्त करने पर रोपित वृक्षों की कटाई वन विभाग द्वारा की जा सकेगी।
वन मंडलाधिकारी द्वारा प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई के संबंध में सक्षम अनुशंसा और भू-स्वामियों द्वारा स्वयं के खाते में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों की कटाई के लिए लिखित रूप में इच्छा व्यक्त किए जाने पर आवेदन प्राप्ति के 30 कार्य दिवस के भीतर निर्धारित दर पर लकड़ी के मूल्य की गणना कर मूल्य का 90 प्रतिशत भू-स्वामी के बैंक खाते में और 10 प्रतिशत वन विभाग के खाते में जमा करेंगे। वन विभाग में जमा की जाने वाली राशि से प्रत्येक काटे जाने वाले वृक्ष के 10 गुना संख्या में वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण एवं उनका रख-रखाव किया जाएगा तथा इसकी जानकारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के माध्यम से कलेक्टर को दी जाएगी।
कलेक्टर जितेन्द्र कुमार शुक्ला ने शासन के उक्त निर्देशों का पालन करते हुए वृक्ष कटाई के प्राप्त आवेदनों पर निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई के निर्देश सभी एस डी एम और संबंधित अधिकारियों को दिए हैं
जगदलपुर /शौर्यपथ/
राजस्व संबंधी विषयों के क्रियान्वयन और राजस्व न्यायालय में दर्ज प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण के लिए बस्तर संभागायुक्त श्याम धावड़े की अध्यक्षता में 24 मार्च को बस्तर संभाग के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी, तहसीलदार, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और प्रभारी-नोडल अधिकारी एफआरए वन विभाग से परिचर्चा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया है। परिचर्चा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के कलेक्टोरेट के प्रेरणा हाल में आयोजित किया गया है। इस परिचर्चा और प्रशिक्षण कार्यक्रम में वनाधिकार मान्यता अधिनियम 2006 का क्रियान्वयन, सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र निराकृत-लंबित प्रकरणों पर चर्चा, गांव में स्थापित देवगुड़ियों के संधारण-संवर्धन तथा राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्रकरण, राजस्व प्रकरणों की नामांतरण, बटवारा, सीमांकन व न्यायालयीन प्रकरणों पर संभागायुक्त द्वारा चर्चा की जाएगी।
महासमुन्द /शौर्यपथ/
कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर ने होली त्यौहार (जिस दिन रंग खेला जाएगा) के अवसर पर शुक्रवार 18 मार्च 2022 को शुष्क दिवस घोषित किया गया है। जिसके फलस्वरूप उक्त दिवस में जिले की समस्त देशी-विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानो, एफ.एल. 3 सपना बार एण्ड रेस्टारेंट तथा मद्य भंडागार पूर्णतः बंद रहेगी।
उत्तर बस्तर कांकेर /शौर्यपथ/
जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कम उपजाऊ उच्चहन एवं कंकरीली जमीन पर किसानों द्वारा कोदो-कुटकी, रागी की फसल ली जाती है, ऐसे जमीन में अन्य फसलों का उत्पादन अच्छे से नहीं हो पाता है। कोदो-कुटकी, रागी में पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं। इन्हीं गुणों को ध्यान में रखते हुए इन फसलों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर में लघु धान्य (कोदो-कुटकी, रागी) प्रसंस्करण इकाई की स्थापना किया गया है, जिसका लोकार्पण प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा 27 जनवरी 2021 को किया गया। स्थापना के बाद से ही इस प्रसंस्करण इकाई में लगातार कोदो-कुटकी एवं रागी प्रसंस्करण किया जा रहा है, प्रसंस्करण इकाई की स्थापना से लेकर अब तक यहॉ 401 क्विंटल रागी तथा 440 क्विंटल कोदो का प्रोसेसिंग किया गया है। इसी प्रकार दुर्गूकोंदल विकासखण्ड के ग्राम गोटुलमुण्डा में स्थापित कोदो-कुटकी प्रसंस्करण केन्द्र में 64 क्विंटल रागी और 68 क्विंटल कोदो का प्रसंस्करण किया गया है। जिससे कांकेर के महिला स्व सहायता समूह को लगभग 03 लाख 50 हजार रूपये और गोटुलमुण्डा की स्व सहायता समूह को लगभग 01 लाख 50 हजार रूपये की आमदनी प्राप्त हुई है। कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिरबल साहू ने बताया कि प्रसंस्कृत कोदो-कुटकी एवं रागी मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ियों को प्रदाय किया जा चुका है, जिससे इस कार्य में जुड़े हुए स्व सहायता समूह को रोजगार प्राप्त हो रहा है, साथ ही कुपोषित बच्चे सुपोषित हो रहे है।
प्रसंस्करण इकाई के संचालन के लिए लघु धान्य फसलों का उत्पादन करने वाले 300 किसानों एवं महिलाओं का समूह बनाया गया है तथा समूह के माध्यम से कृषकों के उत्पाद को संग्रहण कर प्रसंस्करण इकाई में महिला समूह के माध्यम से प्रसंस्करण कर पैकेजिंग किया जा रहा है। इस उत्पाद को जिले के आंगनबाड़ियोें के माध्यम से कुपोषित, रक्त अल्पतता से ग्रसित व गर्भवती महिलाओं तथा कुपोषित बच्चों को कोदो चांवल खिचड़ी के रूप में तथा रागी को हलवा के रूप में प्रदाय किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से महिलाओं एवं बच्चों को जहां पौष्टिक एवं गरम भोजन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर संग्रहण एवं प्रसंस्करण कार्य में संलग्न महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।
सूरजपुर /शौर्यपथ/
कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह, पुलिस जिला पंचायत सीईओ राहुल देव की उपस्थिति में आज जिला कलेक्टोरेट में स्थित जनदर्शन सह जन संवाद कक्ष में विभिन्न मांगो एवं समस्याओं को लेकर जनसंवाद कक्ष में पहुंचे ग्रामीणों जनो की आवेदनों राजस्व के अंतर्गत जमीन विवाद, मजदूरी भुगतान, राशन कार्ड, पानी समस्या, फर्जी पट्टा वितरण, अतिक्रमण हटाने के आवेदन का अवलोकन किया। उन्होंने राजस्व के अंतर्गत आने वाले जमीन विवाद एवं अन्य प्रकरणों का नियमानुसार कार्रवाई कर निराकरण करने के निर्देश दिए।
जनसंवाद कक्ष में पेंटिंग कार्य ठेकेदार को ना देकर छत्तीसगढ़ पेंटर चित्रकार समूह को देने के आवेदन प्राप्त हुए। अवलोकन कर आवश्यक कार्यवाही हेतु विभाग को निर्देशित किया गया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
