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नई दिल्ली /शौर्यापथ/
काशी के कार्यक्रम पर भारीभरकम खर्च यूपी के आगामी चुनाव के प्रचार का हिस्सा है और बीजेपी यह मानती है कि इससे वोटों को अपने पाले में खींचने में कामयाब रहेगी, जैसा कि पहले भी उसने किया है.
अगर किसी को इस बात का सबूत चाहिए कि बीजेपी ने किस तरह भारतीय राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है तो उसे सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा बनारस दौरे का सजीव टीवी प्रसारण देखना चाहिए. हर-हर महादेव के गूंजते नारों के बीच उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया, गंगा में डुबकी लगाई और काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की. उन्होंने प्रेम और आशीर्वाद के लिए गंगा को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया. जब तक मोदी का आगमन नहीं हुआ था, तब तक ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रधानमंत्री ने किसी पूजा अर्चना के कार्य के लिए भारी सैटेलाइट टीवी को जुटाया गया, ताकि जनता को भव्यता का पूरा दर्शन कराया जा सके. यहां तक कि बीजेपी-हिन्दुत्व की पार्टी- भी मोदी युग के पहले राजनीति में धर्म के मिश्रण को लेकर इतनी जोशोखरोश में नहीं थी.
आप यह तर्क दे सकते हैं कि पीएम मोदी की यह इच्छा रही है कि उनके आसपास वो धार्मिक आभामंडल बना रहे. लेकिन जिस बात से आप इनकार नहीं कर सकते हैं, वो उनका कामकाज है. काशी के कार्यक्रम पर भारीभरकम खर्च यूपी के आगामी चुनाव के प्रचार का हिस्सा है और बीजेपी यह मानती है कि इससे वोटों को अपने पाले में खींचने में कामयाब रहेगी, जैसा कि पहले भी उसने किया है.
इस कामयाबी का एक नतीजा ये निकलता है कि दूसरे दल भी यही खेल खेलने को मजबूर हुए हैं. अखिलेश यादव ने कहा है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor) का श्रेय उन्हें ही जाता है और यह प्रोजेक्ट उनकी सरकार ने स्वीकृत किया था. इससे थोड़े वक्त पहले ही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली-अयोध्या की बुजुर्गों के लिए मुफ्त यात्रा का प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इसमें पूरी तरह से धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया, यहां तक कि एक चित्र में एक ऐसे संत की तस्वीर थी, जो नरेंद्र मोदी की तरह ही दिखता था.
प्रधानमंत्री के काशी के कायाकल्प से जुड़े भव्य आयोजन के पहले राहुल गांधी ने राजस्थान की एक रैली में बताया था कि कैसे हिन्दू एक महान धर्म है. वहीं ममता बनर्जी भी हालिया बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार में हिन्दू प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए खुश दिखाई पड़ीं. मोदी ने नियमों को इस कदर बदल दिया है कि ये दल, जो अभी तक हिन्दू पहचान वाली राजनीति को लेकर बीजेपी पर हमला करते रहते थे, अब वो खुद हिन्दू धर्म के बारे में जोशोखरोश से अपनी बात रख रहे हैं.
इसकी एक वजह है कि उन्हें भय है कि कहीं उन्हें हिन्दू विरोधी के रूप में पेश न किया जाए.
कांग्रेस का आंतरिक सर्वे बताता है कि बहुत से मतदाता उसे मुस्लिम समर्थक पार्टी मानते हैं, जो हिन्दुओं की परवाह नहीं करती. कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने खुले तौर पर इस नजरिये को सुधारने की जरूरत पर बल दिया था, जिसमें कांग्रेस को हिन्दू विरोधी माना जाता है. हिन्दुओं के प्रति कोई पूर्वाग्रह न होने की छवि बनाने के लिए कांग्रेस ने जो भी प्रयास किए हैं, उसके पीछे उसकी ये सोच है कि बीजेपी ने उसकी इमेज खराब की है. उसने बेहद कामयाबी से सेकुलर राजनीति को मुस्लिम समर्थक की तरह पेश कर मतदाताओं के बीच गलत धारणा बनाई गई. दिल्ली में पिछले चुनाव में आप ने ज्यादातर मुस्लिम वोट हासिल कर चुनाव जीता था, लेकिन उसका यकीन है कि उसे अब हिन्दुओं के बीच पैठ बढ़ाने की जरूरत है.
दूसरी वजह है कि बहुत से विपक्षी नेता जो खुद हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं, वो वोट पाने के लिए हिन्दू धर्म को हाईजैक करने के प्रयास से इत्तफाक नहीं रखते. वो मानते हैं कि धर्म निजी मसला है और बीजेपी की वोटों को पाले में लाने के नजरिये से बेहद व्यथित हैं. हालांकि निजी तौर पर वो साफ तौर पर राजनीतिक हिन्दूवाद और धार्मिक हिन्दूवाद में अंतर करते हैं. देरी से, राहुल गांधी ने जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर गए हैं और वो हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व के बीच फर्क बताने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने पार्टी के मंच से ये बात कही. राजस्थान की रैली में उन्होंने कहा, गांधीजी हिन्दू थे, लेकिन जिस व्यक्ति ने उनकी हत्या की, वो हिन्दुत्ववादी था.
यह अंतर सही है, लेकिन इस रणनीति पर दांव लगाना कई सारी चुनौतियां पैदा करता है. पहला तो ये कि क्या जब एक राजनीतिक रैली में ये बातें बोलते हैं तो क्या जनता इसका अंतर वास्तव में समझ पाती है क्या? राहुल के भाषण के बाद सोशल मीडिया में कांग्रेस समर्थकों की यह चिंता दिखाई दी कि हिन्दुत्ववादी बहुत जटिल शब्द है, जो एक रैली में जनता के बीच कहा जाता है. क्या वो सिर्फ सिंघी नहीं कह सकते थे?
दूसरी समस्या है कि जब आप हिन्दुत्व पर हमला करते हैं तो आपको हिन्दू होने का अहसास कराने के लिए ज्यादा शिद्दत दिखनी पड़ती है, ताकि आपको हिन्दू विरोधी के तौर पर चित्रित न किया जाए. इस कवायद में जोखिम रहता है कि आप खुद को हिन्दू राष्ट्रवादी के तौर पर न पेश कर दें. लेकिन विपक्ष मूलतः यह मानता है कि उसे हिन्दूवाद को बीजेपी से वापस लेना है. उसका तर्क है कि जब तक अन्य राजनीतिक दल धर्म को परे रखकर प्रचार करते रहेंगे, तब तक बीजेपी का हिन्दू को लेकर पकड़ कायम रहेगी. और अगर सभी हिन्दू धर्म और हिन्दू परंपराओं को सार्वजनिक तौर पर मानने लगेंगे तो बीजेपी के लिए इस तर्क को भुनाना मुश्किल हो जाएगा कि वो ही सिर्फ ऐसी पार्टी है, जो हिन्दुओं का ख्याल रखती है.
इन सभी तर्कों में कुछ न कुछ दम है. लेकिन खतरा भी है. हिन्दुत्व सिर्फ मंदिरों में पूजा अर्चना नहीं है. मौजूदा राजनीतिक अवधारणा के केंद्र में मुस्लिमों के प्रति घृणा की मजबूत लकीर है. प्रधानमंत्री के स्तर पर, यह पूरी तरह उनके भाषणों से गायब रहता है, लेकिन इसके लिए आपको योगी आदित्यनाथ और अन्य बीजेपी नेताओं को सुनना होगा कि कैसे मुस्लिमों के प्रति घृणा से प्रेरित बयान इस हिन्दुत्ववादी प्रोजेक्ट का अभिन्न हिस्सा हैं.
प्राचीन वैदिक परंपरा के नाम पर वोटों को खींचने की क्षमता सीमित है. लेकिन दुखद है, ऐसा प्रतीत होता है कि जब आप सांप्रदायिक माहौल को गरमा कर मुस्लिमों को ऐसे खतरनाक कट्टरपंथियों के तौर पर पेश करते हैं-जो हिन्दुओं और हिन्दू हितों के खिलाफ काम करता है- तो वोटों को पाले में खींचने की कोई सीमा नहीं रह जाती. यही विपक्षी दलों की सबसे बड़ी दुविधा है, जब वो हिन्दू धर्म की प्रशंसा की रणनीति पर आगे बढ़ते हैं. ऐसे वक्त जब भारत की सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी खतरे में है तो क्या मुस्लिमों के बीच सेकुलर देश में उनकी अहमियत को लेकर भरोसा देने की जरूरत नहीं है? या आप सारी ऊर्जा हिन्दुओं के बीच यह सुनिश्चित करने में लगा देते हैं कि आप उनके साथ हैं.
यही नहीं, बीजेपी प्रायः तब ज्यादा वोट पाती है, जब हिन्दू और मुस्लिमों के बीच रिश्तों में तनाव होता है. लेकिन ऐसे वक्त आप क्या करेंगे, जब सांप्रदायिक तनाव चरम पर हो. ऐसे मौके पर सभी नरम हिन्दूवादी राजनीतिक बातें नाकाम हो जाती हैं. आपको एक भी हिन्दू वोट नहीं मिलेगा, जब हिन्दू धर्म की सहिष्णुता की परंपरा की बातें करते हैं, तो क्या आप इस रुख से हटकर क्या धर्मनिरपेक्षता औऱ अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के हक में दोबारा खड़े होंगे.
क्योंकि बीजेपी चुनाव जीतने की ओर देख रही है, उसने यह समझ लिया है कि वो सिर्फ केंद्र सरकार के रिकॉर्ड के आधार पर प्रचार नहीं कर सकती. इसका रिकॉर्ड ज्यादा अच्छा नहीं है और चुनाव में भारी जीत के लिए दमदार हथियार नहीं है. लगातार जीतने के लिए उसे हिन्दुत्व के कोर मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है, उसे ऐसी विचारधारा के तौर पर जो मुस्लिमों और आक्रमणकारियों के खिलाफ हिन्दुओं की रक्षा करती है.
विपक्ष भी मजबूर है. वो हिन्दू धर्म की प्रशंसा कर सकता है, लेकिन उस हद तक नहीं जा सकता, जितनी कि बीजेपी. दूसरी ओर, हिन्दू बहुल देश में वो आसानी से चुनाव नहीं जीत सकते, अगर उन्हें हिन्दू विरोधी समझा जाए. यह एक रास्ता है, जिसमें मोदी ने नियमों को बदल दिया है. यही एक रास्ता है, जहां बीजेपी भारतीय राजनीति में बदलाव से फायदा उठा रही है.
रायपुर /शौर्यपथ/
‘रन फॉर सीजी प्राइड’ के दौरान हॉली एंजल इग्लिस मीडियम स्कूल के विद्यार्थी दुलेश साहू, रवि ठाकुर, विरेन्द्र नायक, मनप्रीत कौर, लवप्रीत कौर संधु और चंचल जेठवानी, ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास जाकर उनसे बातचीत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों उनके स्कूल और पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। उत्साहित स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी भी ली।
रायपुर /शौर्यपथ/
‘रन फॉर सीजी प्राइड’ से लौटते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दौड़ में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों और गणमान्य लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
रायपुर /शौर्यपथ/
‘रन फॉर सीजी प्राइड’ के दौरान राजभवन के पास संचालित गुमटी ठेले पर रूककर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मुंगौड़ी का नाश्ता किया और चाय की चुस्कियों का आनंद लिया।
जिला स्तरीय युवा महोत्सव का आगाज,
जिले के 1400 प्रतिभागी विभिन्न 36 विधाओं में प्रतिभा करेंगे का प्रदर्शन
जांजगीर-चांपा /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत डॉ. रामसुंदर दास के मुख्य आतिथ्य में आज जिला स्तरीय युवा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। जिला मुख्यालय के हाईस्कूल मैदान में आयोजित शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति को पुनः स्थापित करने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। इस कड़ी में स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए युवा महोत्सव का आयोजन ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर आयोजित हो रहा है। डॉ महन्त ने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोकगीत को पुनः स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है।
डॉ. महंत ने प्रतिभागी युवाओं के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि युवा प्रतिभागी अपनी प्रतिभा प्रदर्शन के दौरान खेल भावना का भी उदाहरण प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम के शुभारंभ में लोक कलाकार सूरज श्रीवास और लक्ष्मी करियारे के द्वारा राज गीत का गायन किया गया। कार्यक्रम के दौरान इन लोक कलाकारों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष यनीता चंद्रा ने युवाओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। जिला पंचायत अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, नगर पालिका चांपा के अध्यक्ष जय थवाइत ने प्रतिभागी युवाओं को खेल भावना से अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया और उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह ठाकुर ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले के 1400 प्रतिभागी जिला स्तरीय युवा महोत्सव में भाग ले रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर आयोजित युवा महोत्सव में चयनित प्रतिभागियों को जिला स्तरीय पर प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर दिया गया है। प्रतिभागियों के आवास की समुचित व्यवस्था की गई है। आभार प्रदर्शन जिला खेल अधिकारी प्रमोद सिंह बैस और कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता दीपक यादव ने किया।
महोत्सव का शुभारंभ सक्ती ब्लाक के युवा कलाकारों द्वारा गेड़ी नृत्य से हुआ। युवा कलाकारों ने आदिवासी परिधान, लोकगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद जैजैपुर के कलाकारों ने सुआ-डंडा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सदस्य सभापति राजकुमार साहू, नवागढ़ जनपद सदस्य कमलेश सिंह, देवेश सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुशांत सिंह, प्रमोद सिंह, निर्मल दास वैष्णव, अर्जुनसिंह, त्रिस्तरीय पंचायत के जनप्रतिनिधि, प्रतिभागी खिलाड़ी-कलाकार उपस्थित थे।
अम्बिकापुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना अंतर्गत अम्बिकापुर निगम क्षेत्र में शनिवार को मोबाइल मेडिकल यूनिट 2 में ईरानी बस्ती निवासी सोनम अपने 10 माह की बेटी का स्वास्थ्य जांच कराने पहुंची। उन्होंने अपने बेटी के सर्दी और खांसी की समस्या डॉक्टर को बताई। डॉक्टर ने बच्चे का नियमित स्वास्थ्य जांच कर वजन कराया। डॉक्टर ने बच्ची को सर्दी-खांसी की सिरप दी। इस तरह से सोनम को अपने मोहल्ले में ही निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल गई। सोनम ने कहा कि एमएमयू बस के चलने से हमे बहुत राहत मिली है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर हम डॉक्टर को दिखाने आते हैं। बस में सारी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हम मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं।
अम्बिकापुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री प्रभाकर पांडेय ने बताया कि मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत अम्बिकापुर नगर निगम में कुल 4 मोबाइल मेडिकल यूनिट के द्वारा प्रतिदिन अलग-अलग क्षेत्र में भ्रमण कर निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा प्रदान किया जा रहा है। निगम क्षेत्र में आज तक कुल 1182 कैम्प लगाकर 87 हजार 157 लोगों का ईलाज किया गया है। इनमें से 20 हजार 337 लोगों का निःशुल्क लैब टेस्ट किया गया है तथा 7 हजार 959 लोगों का श्रम कार्ड कैम्प में पंजीयन के माध्यम से बनाया गया है। एमएमयू का संचालन चिन्हांकित स्लम एरिया में प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक किया जाता है। इसमे कुल 41 प्रकार के स्वास्थ्य जांच के लिए लैब की सुविधा उपलब्ध है जहाँ पर निःशुल्क लैब टेस्ट कर रिपोर्ट प्रदान किया जाता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ को किया पुरस्कृत
रायपुर /शौर्यपथ/
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ को किया पुरस्कृत
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से सर्वाधिक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत देश में 16 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे 2021 के दौरान छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 53 हजार 067 डिजिटल हेल्थ आईडी बनाए गए। देशभर में इस दौरान बनाए गए कुल एक लाख 52 हजार 942 आईडी में अकेले छत्तीसगढ़ की भागीदारी 35 प्रतिशत है। ये सभी आईडी राज्य के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में बनाए गए हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम को बधाई दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने आज नई दिल्ली में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को पुरस्कृत किया। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने भी स्वास्थ्य कर्मियों की पीठ थपथपाते हुए इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि 16 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान राज्य के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सामान्य स्क्रीनिंग के साथ-साथ कैंसर जैसी बीमारियों की भी स्क्रीनिंग की गई। उन्होंने बताया कि इस दौरान वहां विशेष अभियान के तहत डिजिटल हेल्थ आईडी भी बनाए गए। इस आईडी में मरीज की बीमारी और इलाज से संबंधित सभी तरह की जानकारियां दर्ज रहेंगी। इससे मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का तुरंत पता लगाया जा सकता है।
16 नवंबर से 12 दिसंबर की अवधि में राज्य के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग की गई जिसमें 5 लाख 2 हजार 535 लोगों की हाइपरटेंशन, 4 लाख 87 हजार 640 लोगों की डाइबिटीज़, 3 लाख 65 हजार 991 लोगों की मुख कैंसर,1 लाख 62 हजार 992 लोगों का स्तन कैंसर एवं 1 लाख 15 हजार 476 लोगों में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग की गई।
छत्तीसगढ़ के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में 53 हजार 67 डिजिटल आई.डी.कार्ड बनाए गये हैं। वहीं मध्यप्रदेश में 43 हजार 953 और ओडिशा में 17 हजार 342 डिजिटल हेल्थ आई.डी. बनाए गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रभारी राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री आनंद साहू ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की ओर से पुरस्कार ग्रहण किया।
इस तरह बनवाएं डिजिटल हेल्थ आईडी
मोबाइल नंबर या आधार कार्ड के ज़रिए हेल्थ आईडी जनरेट किया जा सकता है । आधिकारिक वेबसाइट https://healthid.ndhm.gov.in/register से हेल्थ आईडी कार्ड बनाने के लिए पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। मोबाइल या आधार के ज़रिए हेल्थ आईडी बनाने के लिए अपना नाम, जन्म का वर्ष, लिंग, पता और मोबाइल नंबर/आधार नंबर की जानकारी देनी होगी।
प्रधानमंत्री के हाथों 13 दिसंबर को इसके लोकार्पण का कार्यक्रम तय हो चुका है. इसके मुआयने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार आ चुके हैं. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण पर पूरे जिले में आम लोगों की मदद से उत्सव का माहौल बनाया जाएगा.
नई दिल्ली /शौर्यपथ/
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे. वह वाराणसी पहुंच गए हैं, और उन्होंने प्राचीन कालभैरव मंदिर में पूजा-अर्चना की. इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं फेसबुक पर काशी विश्वनाथ धाम की तस्वीरें साझा कीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई हस्तियां भी वाराणसी पहुंच चुकी हैं. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण को लेकर पूरे जिले में उत्सव का माहौल है. कॉरिडोर के उद्घाटन के साथ पीएम मोदी कई अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. उनका बीजेपी के पदाधिकारियों से भी मिलने का कार्यक्रम है.
इसमें 13 और 14 दिसंबर को गंगा घाटों के साथ शहर की प्रमुख इमारतों की विशेष रूप से सजावट होगी और रोशनियां की जाएंगी. यही नहीं लोग अपने घरों में दीपक जलाएंगे और काशी के तमाम परिवारों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा.विश्वनाथ कॉरिडोर पहुंचाने पर आपका स्वागत सबसे पहले एक बड़ा दरवाजा करेगा. यह दरवाजा उस विश्वनाथ कॉरिडोर का द्वार खोलता है जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. इस दरवाजे के आर पार लगभग 50000 वर्ग मीटर में इस इस भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया गया. जिसका काम अब अंतिम चरण में है और इसके लोकार्पण की तैयारी जोरों पर है.
वाराणसी के कमिश्नर दीपक अग्रवाल बताते हैं कि "माननीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा के अनुसार काशी विश्वनाथ धाम का भव्य उद्घाटन 13 तारीख को प्रस्तावित है. चूंकि यह पूरा का पूरा इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ने जा रहा है और करीब ढाई सौ साल के पश्चात काशी विश्वनाथ का पूरा जीर्णोद्धार प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार किया गया है. जन सहभागिता के साथ कार्य कराया जाएगा, साथ ही काशी में हमारे जितने सार्वजनिक स्थान है, साज सज्जा लाइटिंग जन सहभागिता से 12, 13, 14 को दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम किया जाएगा जिससे कि पूरे काशी में एक उत्सव सा माहौल हो."
विश्वनाथ कॉरिडोर को दो भागों में बांटा गया है. मंदिर के मुख्य परिसर को लाल बलुआ पत्थर के द्वारा निर्मित किया गया है. इसमें 4 बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं. इसके चारों तरफ एक प्रदक्षिणा पथ बनाया गया है. उस प्रदक्षिणा पथ पर 22 संगमरमर के शिलालेख लगाए गए हैं जिनमें काशी की महिमा का वर्णन होगा. काशी विद्वत परिषद् के महामंत्री मुख्य मंदिर परिसर के इस भाग के बारे में तफ्सील से बताते हैं कि "इसमें 22 शिलालेख ऐसे लगाए जा रहे हैं जिसमें भगवान विश्वनाथ से संबंधित स्तुतियां हैं और आद्य शंकराचार्य ने जिन स्तुतियों का गान किया है वो हैं. अन्नपूर्णा स्त्रोत है और जिन स्तुतियों को भगवान शंकर ने गान किया है, उन स्त्रोतों को लगाया जा रहा है. बाकी भगवान शिव ने यहां पर 56 विनायक भेजा, द्वादश आदित्य भेजा. उनके संदर्भ में कैसे है काशी में पंचनद है, काशी में पंचतीर्थ है, काशी में भगवान शिव की बारात कैसे निकलती है, भगवान विश्वनाथ काशी में पहली बार कब आए, भगवान शिव पार्वती का विवाह का उल्लेख है, ऐसे 24 पैनल बन रहे हैं.
कॉरिडोर का दूसरा भाग
मंदिर के द्वार की दूसरी तरफ 24 भवनों का एक बड़ा कैम्पस बन रहा है जिसका मुख्य दरवाजा गंगा की तरफ ललिता घाट से आयेगा. इस परिसर में वाराणसी गैलरी काफी महत्वपूर्ण है. विश्वनाथ धाम के विस्तारीकरण और विकास के दौरान कुछ घरों से निकली मूर्तियां, पुराने घरों से निकले नक़्क़ाशीदार दरवाजे, खिड़कियों को भी धरोहर के रूप में वाराणसी गैलरी में प्रदर्शित करने की योजना है. काशी की आध्यात्मिक परंपरा को भी गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा.
इसके अलावा यात्रियों के सुविधा के भवन होंगे काशी विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक सुनील वर्मा के मुताबिक़, "काशी विश्वनाथ धाम का काम लगभग पूर्णता की ओर है. पूरे धाम में लगभग 50000 वर्ग मीटर में 24 भवन बनाए जा रहे हैं जिसमें मुख्य मंदिर परिसर, मंदिर चौक, मुमुक्षु भवन, सिटी गैलरी, जलपान के मल्टीपरपज हॉल, यात्री सुविधा केंद्र, इत्यादि भवन जो यहां के बड़े खूबसूरती साथ ही साथ गंगा स्थित गंगा व्यू कैफे, गंगा व्यू गैलरी बनाई जा रही है जिससे मां गंगा की सुंदर छटा दिखाई देगी. इस प्रोजेक्ट को बनाने का पूरा उद्देश्य एकमात्र यह था कि काशी के अध्यात्म, काशी की वास्तु कला को उठाते हुए पूरे प्रोजेक्ट में एक दिव्य अनुभूति कराते हुए श्रद्धालुओं को धार्मिक भाव जगाने का काम.''
कॉरिडोर की बुनियाद में
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जिस बुनियाद पर साकार हो रहा है उसमें तकरीबन 400 मकान और सैकड़ों मंदिर और लगभग 1400 लोगों को पुनर्वासित करना पड़ा है. इसके बारे में काशी विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक सुनील वर्मा खुद कहते है कि, "जब परियोजना शुरू की गई थी तो काफी चुनौतियां थी. यह जो मंदिर है वह काफी घनी आबादी में बसा हुआ था.
हम लोगों ने लगभग 400 परिसंपत्ति क्रय की, लगभग 1400 लोगों का पुनर्वास किया जिसमें विभिन्न प्रकार के दुकानदार, मकान मालिक शामिल रहे. साथ ही साथ इस प्रोजेक्ट को बनाने में यह भी चुनौती थी कि जितने संभावित रास्ते हैं उनको यथावत रखते हुए जो परिसंपत्ति मंदिर प्राप्त हुए उनको यथावत रखते हुए इस प्रोजेक्ट को बनाया जाए.
हम लोग तय समय में इसे बनाने में कामयाब रहे. प्राचीन मंदिरों का भी हम लोग जीर्णोद्धार करा रहे हैं. यहां यह भी है कि काशी खंड उतने ही वर्णित मंदिर से नहीं मिल रहे थे, उनको भी हम लोग स्थापित करा रहे हैं. कुछ भी घरों से प्राप्त हुए थे उनको भी हम लोग स्थापित करा रहे हैं. ऐसे 27 मंदिरों की स्थापना करा रहे हैं. इस पूरे का उद्देश्य है कि बाबा अपने पूरे देवकुल के साथ पूरे धाम में विराजमान जो भी श्रद्धालु और भक्त आ रहे हैं वह अपने पूरे धार्मिक क्रियाकलाप कर सकें.''
पीएम मोदी 13 दिसंबर को करेंगे काशी विश्वनाथ कोरिडोर का लोकार्पण, जानें क्या-क्या हुई तैयारियां
कॉरिडोर का दूसरा चरण
कॉरिडोर निर्माण में जिन 400 मकानों को अधिग्रहित किया था उसमें प्रशासन के मुताबिक़ काशी खण्डोक्त 27 मंदिर मिले थे जबकि लगभग 127 अन्य मंदिर प्राप्त हुए थे जो प्रसिद्ध मंदिर थे. उन मंदिरों का भी संरक्षण किया जा रहा है जो काशी खंडोकता मंदिर हैं. उनको उसी तरह से जीर्णोद्धार करके संरक्षित करने का मंदिर प्रशासन पूरा प्रयास कर रहा है. इसके लिये पूर्व के सरस्वती द्वार के पास एक 27 मंदिरों की मणिमाला बनाई जाएगी जिसमें उन प्राप्त मंदिरों को स्थापित करने की योजना है. इस पर काम चल रहा है और ये दूसरे चरण में होगा
कोरिया /शौर्यपथ/
18 दिसम्बर बाबा गुरू घासी दास जयन्ती पर लोगों को मद्यपान एवं नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मद्य निषेध दिवस के रूप में मनाया जाएगा। कलेक्टर श्याम धावड़े के मार्गदर्शन में जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इस अवसर पर ऐसे जनप्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूह एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रयास से व्यापक सीमा में जन सामान्य द्वारा स्वेच्छा से मद्यपान छोड़ा गया है तो संबंधित जन प्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूह स्वयं सेवी संस्था को समारोह आयोजित कर 10 हजार रुपये एवं प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मानित किये जाने हेतु शासन द्वारा निर्णय लिया गया है।
इस अवसर पर जन सामान्य को मद्यपान के विरूद्ध व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिए सम्मान समारोह के साथ समुदाय एवं भारत माता वाहिनी के सहयोग से नशामुक्ति रैली, नशामुक्ति प्रदर्शनी एवं साहित्यों का वितरण, विषय विशेषज्ञों का व्याख्यान, गोष्ठिया, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला प्रतियोगिताएं, मद्य निषेध हेतु संकल्प, नशामुक्त हुए व्यक्तियों का सम्मान, नशामुक्ति के लिए योग की भूमिका पर योग विशेषज्ञों का व्याख्यान जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रमों का आयोजन भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन, स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम हेतु जारी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए किया जाएगा।
मानव श्रृंखला बनाकर शत प्रतिशत एवं निष्पक्ष मतदान कर लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाने का दिया संदेश
कोरिया /शौर्यपथ/
आगामी 20 दिसंबर 2021 को होने वाले निकाय निकाय निर्वाचन में मतदान के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्याम धावड़े तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर में जाबो कार्यक्रम ( जागव बोटर ) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानव श्रृंखला बनाकर शत प्रतिशत एवं निष्पक्ष मतदान में भाग लेने संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में महिलाओं की कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता आयोजित कर कलेक्टर द्वारा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर धावड़े द्वारा शत प्रतिशत एवं निष्पक्ष मतदान के अपील संदेश की प्रतियां वितरित की गई एवं उक्त अपील के माध्यम से अपने परिवार एवं आस पड़ोस के मतदाताओं को भी सूचित करने अनुरोध किया गया। जाबो कार्यक्रम के नोडल अधिकारी ए.के. पुसाम ने नगर पालिका परिषद एवं जिला प्रशासन की ओर से आम मतदाताओं से अपील की कि आगामी 20 दिसंबर 2021 को होने वाले निकाय निकाय निर्वाचन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर लोकतंत्र को मजबूत बनावे तथा एक जिम्मेदार एवं जागरूक मतदाता का परिचय देते हुए शत प्रतिशत मतदान करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
