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April 20, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

बेमेतरा / शौर्यपथ / बेमेतरा जिले के विकासखण्ड बेरला के ग्राम अतरगढी के एक परिवार मे 16 वर्षीय नाबालिग बालिका का विवाह ग्राम बावनलाख के 19 वर्षीय युवक के साथ किये जाने की सूचना पर जिला महिला एवं बाल विकास के परियोजना अधिकारी सह बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी विद्यानंद बोरकर के निर्देश व जिला बाल संरक्षण अधिकारी व्योम श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में विभाग की टीम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्थानीय ग्राम संरपंच व कोटावार तथा प्रबुद्ध नागरीको की सहायता से उन बालक व बालिका के निवास स्थान पर पहुॅचे, वर-वधु पक्ष को समझाईस दी गई जिस पर उनके द्वारा सहर्ष ही बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत ही विवाह किये जाने हेतु अपनी सहमति प्रदान की तथा बारात वापस ले जाने की बात कही गई, बालिका के परिजनों ने कहा कि हमें यह ज्ञात नहीं था कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका एवं 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह गैर कानूनी है।
अधिकारियों द्वारा समझाईस दिये जाने पर उन्होने उक्त बालिका का विवाह 18 वर्ष के उपरांत किये जाने की शपथपूर्वक कथन किया तथा उन्हे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 में उल्लेखित प्रावधानों के बारे में बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका व 21 वर्ष से कम आयु का बालक का विवाह करना या करवाना अपराध है, जो भी व्यक्ति ऐसा करता या कराता है या विवाह में सहयोग प्रदान करता है,तो उसे भी 02 वर्ष तक कठोर कारावास अथवा जुर्माना जो कि 1 लाख रू. तक हो सकता है अथवा दोनो से दण्डित किया जा सकता है।

वाटर टूरिज्म को बढ़ावा देने झुमका बांध में हो रही बोटिंग, दूर-दूर से पहुंच रहे पर्यटक
जल्द ही अन्य वाटर एक्टीविटी भी होगी शुरू, पार्क, चैपाटी, योगा क्लास आदि की भी तैयारी

कोरिया / शौर्यपथ / ऊपर नीला आसमान और नीचे नीला-नीला पानी, झुमका बांध की खूबसूरती देखते ही बनती है। ठंडी हवाएं और रेतीली जमीन बिल्कुल समुंदर के पास होने का अहसास कराती हैं। झुमका की खूबसूरती का बढ़ाने और इसे पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने कलेक्टर श्री एसएन राठौर के मार्गदर्शन में यहां सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है। जिसका जायजा लेने आज कलेक्टर श्री राठौर झुमका बांध पहुंचे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र काम पूरा करने के निर्देश दिये जिससे बोटिंग के अतिरिक्त पर्यटन व मनोरंजन की गतिविधियों को शुरू किया जा सके।
प्रदेश का पहला मछलीनुमा फिश एक्वेरियम कोरिया में
झुमका बांध में सौंदर्यीकरण के साथ ही यहां मत्स्य विभाग के द्वारा फिश एक्वेरियम भी बनाया गया है, जो अपने आप में अद्भुत है। यह मछली का आकार का एक्वेरियम तैयार किया गया है, मछलीनुमा प्रदेश का पहला फिश एक्वेरियम है। जल्द ही इसके लोकार्पण के बाद यहां लोग अनोखी मछलियों के संसार को देख सकेंगे।
वाटर टूरिज्म को बढ़ावा देने हो रही बोटिंग, दूर-दूर से पहुंच रहे पर्यटक
झुमका के नाम से प्रसिद्ध रामानुज प्रताप सागर के किनारे हो रहे सौंदर्यीकरण के कार्य के अंतर्गत यहां पार्क तैयार किया जा रहा है। जिससे आम जन आकर सुंदर नजारों के बीच परिजनों, मित्रों के साथ समय बिता सकें। यहां बच्चों के मनोरंजन एवं खेल के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही यहां चैपाटी भी बनाई जा रही है, जहां छत्तीसगढ़ी व्यंजन का भी स्वाद ले सकेंगे।
यहीं नहीं झुमका बांध में वाटर टूरिज्म को बढ़ावा देने बोटिंग शुरू की गई है। जहां स्थानीय लोगों के अलावा अम्बिकापुर और अनूपपुर आदि जिलों से भी लोग आकर बांध की सुंदरता और बोटिंग का लुत्फ उठा रहे हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने यहां फ्लोटिंग रेस्टोरेंट एवं स्टे की सुविधा की भी योजना बनाई जा रही है। झुमका किनारे योग करने को प्रोत्साहित करने खुला योग रूम भी बनाया गया है, जो स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने जिला प्रशासन का अभिनव प्रयास है। युवाओं में ओपन माइक के बढ़ते चलन को देखते हुए इसकी भी व्यवस्था करने की योजना भी बनाई गई है। जल्द ही झुमका बांध सौंदर्यीकरण का काम पूरा हो जायोगा, जिससे यहां पर्यटन गतिविधियों में तेजी आयेगी।

रायपुर / शौर्यपथ / लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेयजल योजनाओं में ढिलाई कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्य में लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री गुरू रूद्रकुमार आज अपने निवास कार्यालय में विभागीय कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।
मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने समीक्षा के दौरान तीनों परिक्षेत्र रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर के मुख्य अभियंता सहित सभी अधीक्षण अभियंताओं से विभागीय कामकाज की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वर्तमान परिस्थिति में राज्य के किसी भी क्षेत्र में पेयजल योजनाओं में होने वाली ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने अधिकारियों से कहा कि राज्य पोषित मद से स्वीकृत ग्रामीण नल जल योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर पूर्ण करें। ग्रामीणों को घरेलू नल कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने प्रमुख अभियंता को पेयजल योजनाओं में लगने वाली सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को सिविल खण्ड के द्वारा निविदा बुलवाकर बसाहटों, आंगनबाड़ी, स्कूल एवं गौठानों में नलकूप खनन कराने के भी निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने नगरीय जल प्रदाय योजनाओं की योजनावार समीक्षा की। उन्होंने बस्तर अंचल के विशेषकर किरंदुल, बारसूर, चारामा, बीजापुर, भैरमगढ़ और छिंदनार पेयजल योजनाओं को यथाशीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के नगरीय योजनाओं में जो अपूर्ण अवयव हैं उनके लिए शीघ्र ही निविदा आमंत्रण की कार्रवाई तत्काल पूर्ण कर एजेंसी तय करने के निर्देश दिए। मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने निर्माणाधीन और प्रगतिरत योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्माण कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेयजल योजनाओं को निर्धारित तय समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने इस अवसर पर विभाग के प्रमुख अभियंता एम. एल. अग्रवाल रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस पर आयोजित गोष्ठी का किया वर्चुअल शुभारंभ
राजभाषा छत्तीसगढ़ी के सवंर्धन, संरक्षण में योगदान देने वाली 09 विभूतियों को सम्मानित किया

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय से 8वें छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय के सभागार में आयोजित गोष्ठी का वर्चुअल शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्य सृजन और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदेश की 09 विभूतियों को सम्मानित किया । संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया, वनमंत्री मोहम्मद अकबर, लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री रुद्र गुरू, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल शोरी, संस्कृति विभाग के सचिव श्री अंबलगन पी., संचालक श्री अमृत विकास तोपनो इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ी में सम्बोधित करते हुए कहा कि नई सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ी राजभाषा, छत्तीसगढ़ी तीज-त्यौहारों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। राज्य सरकार ने हरेली, तीजा-पोरा, करमा जयंती, विश्व आदिवासी दिवस की छुट्टी घोषित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय सभागार में राजभााषा दिवस पर आयोजित गोष्ठी में बहिनीमन छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में आई हैं। पहले छत्तीसगढ़ी में बोलने में संकोच करते थे, अब जब छत्तीसगढ़ी लोग मिलते हैं, तो अपनी भाषा छत्तीसगढ़ी में गर्व से बात करते हैं। उन्होंने कहा की छत्तीसगढ़ी, हिंदी, अवधी और बृज भाषाएं समकालीन हैं, लेकिन अन्य भाषाओं में छत्तीसगढ़ी भाषा की तुलना में ज्यादा साहित्य सर्जन का काम हुआ है। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और छत्तीसगढ़ी भाषा में साहित्य सृजन की काफी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गोंडी, हल्बी, कुड़ुख, सरगुजिया जैसी भाषाओं में भी बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस की बधाई दी।
मुख्यमंत्री इस अवसर पर जिन छत्तीसगढ़ी राजभाषा सेवियों को सम्मानित किया, उनमें नंदकिशोर शुक्ला बिलासपुर, वैभव पाण्डेय बेमेतरिहा, रायपुर, डॉ. चितरंजन कर रायपुर, डॉ. परदेशीराम वर्मा भिलाई, रामेश्वर वैष्णव रायपुर, संजीव तिवारी दुर्ग अधिवक्ता, डॉ. राजन यादव खैरागढ़, देवेश तिवारी रायपुर और सुश्री सुधा वर्मा रायपुर शामिल हैं।

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में मंत्री परिषद की बैठक आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्तुत समस्त प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री सहित मंत्रीपरिषद के सभी सदस्यों ने छत्तीसगढ़ी में अपनी बात रखी। चर्चा की शुरूआत मुख्यसचिव ने छत्तीसगढ़ी में की। बैठक में निम्नानुसार महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

1- आई.टी.आई के अंतिम परीक्षा में सम्मिलित होने वाले प्रशिक्षणार्थियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण पूर्ण कराने हेतु औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं को खोले जाने का निर्णय लिया गया ताकि आई.टी.आई. के अंतिम वर्ष के प्रशिक्षणार्थी अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा ( एन.सी.व्ही.टी.) में शामिल हो सकें।

2- कृषि विभाग के द्वारा गोधन न्याय योजना के तहत संचालित राज्य शासन के विभागों के शासकीय संस्थानों ध्गौठानों के द्वारा उत्पादित जैविक खाद का शासन के अन्य विभागों द्वारा सीधे क्रय किया जा सकेगा। जैविक खाद की दर का निर्धारण कृषि विभाग समय-समय पर करेगा। जैविक खाद क्रय हेतु किसी भी विभाग को पृथक से निविदा बुलाया जाना आवश्यक नहीं होगा। उक्त आशय का संशोधन छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम 2020 में करने का अनुमोदन किया गया।

3- छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं प्रबंधन नियम 2015 में निरस्त भूखंड पुर्नस्थापना एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों में संशोधन का अनुमोदन किया गया।

4- छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपजो के प्रसंस्करण हेतु दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम जामगांव (एम) में लघुवनोपज की केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई की स्थापना का अनुमोदन किया गया। राज्य लघुवनोपज द्वारा प्रस्तावित इस केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई में लघुवनोपज के अंतर्गत आयुर्वेदिक दवाएं, जड़ी बूटी, शहद, लाख, चिरौंजी, महुआ, बेल, इमली, बांस इत्यादि का प्रसंस्करण होगा।

5- छत्तीसगढ़ राज्य में लाख पालन को कृषि का दर्जा देने तथा लाख उत्पादन को कृषि फसलों के अनुरूप अल्प कालीन कृषि ऋण एवं ब्याज अनुदान दिए जाने का निर्णय लिया गया।

6- छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

7-खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का के उपार्जन तथा कस्टम मिलिंग की नीति का अनुमोदन किया गया। धान की खरीदी नगद एवं लिंकिंग में 01 दिसंबर से 31 जनवरी 2021 तक तथा मक्का की खरीदी 01 दिसंबर से 31 मई 2021 तक की जाएगी।

8- छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम 1991 के नियम 7 के प्रावधानों के अनुसार वाहनों के निष्प्रयोज्य में रखे जाने के एवज में अग्रिम में देय मासिक कर जमा किए जाने की छूट अवधि को 31 मार्च 2021 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

9- छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग के अंतर्गत स्थानीय निधि संपरीक्षा के स्थान पर अब राज्य संपरीक्षा किए जाने के सबंध में संशोधन करने की अनुसंशा की गई।

10- नगर पालिका निगम रायपुर को गोल बाजार स्थित पूर्व से पट्टे पर आबंटित भूमि को आबंटित किया जावे। दर का निर्धारण मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की जाएगी।

11- श्रम विभाग द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ राज्य प्रवासी श्रमिक नीति का अनुमोदन किया गया।

12- छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 एवं छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 में संशोधन प्रारूप का अनुमोदन किया।

13- नवा रायपुर अटल नगर में रोजगार निवेश, तथा बसाहट को प्रोत्साहन देने हेतु औद्योगिक क्षेत्र के भूखंडों की वर्तमान प्रीमियम दर को 50 प्रतिशत कम किए जाने का निर्णय लिया गया।

14- कोविड-19 के संक्रमण की स्थिति में प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भौतिक रूप से शिक्षण प्रारंभ किए जाने के संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी मार्गदर्शिका तथा छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा द्वारा स्नातकोत्तर कक्षाएं 10 दिसंबर तथा स्नातक कक्षाएं 15 दिसंबर 2020 से एवं समस्त कक्षाएं एक जनवरी 2021 से प्रारंभ किए जाने के सुझाव पर चर्चा की गई।

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्री परिषद की बैठक में 30 नवम्बर को सेवानिवृत्त हो रहे राज्य के मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल को बिदाई दी गई। मुख्यमंत्री बघेल सहित मंत्री परिषद के सदस्यों ने आर.पी. मण्डल को उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और खुशहाल जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर कहा कि श्री मण्डल के मार्गदर्शन में राज्य ने विकास के अनेक महत्वपूर्ण सोपान तय किए। कोरोना संक्रमण से बचाव और रोकथाम के चुनौती भरे कार्य मे उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसके कारण छत्तीसगढ़ में संक्रमण की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में नियंत्रण में रही।

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