August 04, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल द्वारा नक्सल समस्या पर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने कहा कि जिनके राज में नक्सल समस्या को खाद, पानी मिली वही ज्ञान दे रहे है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाने के पहले भारतीय जनता पार्टी और बृजमोहन अग्रवाल को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। प्रदेश आज नक्सलवाद के दंश को झेल रहा है तो उसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रमन सरकार जबाबदेह है । जिसके राज में नक्सलवाद बस्तर के तीन ब्लाकों से निकल कर प्रदेश के 14 जिलो तक पहुंच गया।
    उस रमन सरकार में बृजमोहन अग्रवाल गृहमंत्री सहित अनेक प्रमुख विभागो के मंत्री पूरे पन्द्रह साल तक रह चुके है । जब तक सत्ता में थे तब तक न भाजपा को और बृजमोहन को नक्सल समस्या की कोई चिंता थी। पन्द्रह सालो में नक्सल समस्या से निपटने के लिए भाजपा सरकार ने किसी भी प्रकार की ठोस राजनैतिक, सामाजिक आर्थिक और सामरिक नीति नही बनाई । हर बड़े नक्सल वारदात के बाद उसे नक्सलियों की कायराना हरकत बता कर भाजपा के हुक्मरान अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते थे।
    कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के राज में बस्तर का आम आदमी नक्सलवाद और सुरक्षा बलों के दो पाटों में पीस रहा था । राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्प्ष्ट कहा कि उनकी सरकार बस्तर में रहने वाले नागरिकों, व्यापारियों, पत्रकारों, सुरक्षा बलों के जवानों जन प्रतिनधियों की मंशा के अनुरूप काम करेगी ।सरकार बस्तर वासियों की मंशा के अनुरूप वहां काम कर रही है । बस्तर के आम नागरिकों की सुरक्षा सरकार का प्रमुख ध्येय है। सुरक्षा बल के जवान उसी दिशा में काम कर रहे हैं।
    कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बस्तर में भाजपा सरकार ने वहाँ के नागरिकों की संविधान प्रदत्त अधिकारों को लंबित कर दिया था। नागरिकों को छोटी-छोटी धाराओं में वर्षो तक बन्द रखा था। आदिवासियों को नक्सली बता कर जेलों में डाल दिया था लेकिन भाजपा सरकार उनके विरुद्ध आरोप साबित नही कर पाती थी ।बस्तर में भाजपा की रमन सरकार ने आदिवासियों के खिलाफ विद्वेषवश झूठे मुक़दमें बनवाये थे कुछ लोगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज गिरफ्तारियां कर ली गयी उनके खिलाफ वर्षो तक चालान नही प्रस्तुत किया ।न्यायालय में सुनवाई नही शुरू हुई । जिन धाराओं के तहत उनकी गिरफ्तारियां की गई थी उन धाराओं में दोष सिद्ध हो जाने पर उतनी सजा नही थी जितने दिनों से वे आदिवासी न्याय की आस में जेलों में निरुद्ध रखे गए है।
    कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्षो में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई का निर्णय लिया ।इसके लिए जस्टिस पटनायक की अध्यक्षता में कमेटी भी बनाई गई है जो बैठक कर मामलों की समीक्षा कर रही है । कुछ आदिवासियों की रिहाई के कानूनी अड़चने दूर भी की जा रही है। भाजपा को इस प्रकार निर्दोषों को जेलों में बंद करने के लिए बस्तर की जनता से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिये। प्रदेश में नक्सल के विस्तार को नही रोक पाने की नैतिक जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिये।

    कचांदूर स्थित कोविड केयर सेंटर में अब तक 2117 मरीज स्वस्थ होकर लौटे घर


    दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना महामारी की लड़ाई में कई ऐसे अनगिनत योद्धा हैं। जो अपना तो फर्ज निभा ही रहे हैं, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर बड़ा काम भी कर रहे हैं। वे अपनी जान की परवाह किए बगैर कोविड केयर सेंटर में भर्ती बुजुर्ग एवं दिव्यांग मरीजों का परिवार के सदस्य की तरह देखभाल कर रहे है। इनकी सेवा भावना से ही कोविड केयर सेंटर कचांदुर में भर्ती संक्रमित मरीज रोग से लड़ने के लिए अपना हौसला बड़ा रहे हैं। चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज कचांदुर में संचालित कोविड केयर सेंटर में सामान्य मरीजों के साथ बुजुर्ग एवं दिव्यांग मरीज भर्ती हैं। जिनका इलाज मेडिकल स्टॉफ कर रहे हैं। इनकी देखभाल मेडिकल ऑफिसर के सुपरविजन में चिकित्सीय स्टाफ में सम्मिलित वार्ड ब्वाय, सफाई कर्मी और नर्स कर रहे हैं। वे अपने हाथों से दृष्टिहीन दिव्यांग मरीजों का सुबह- शाम चाय नाश्ता देते हैं, खाना खिलाते हैं। समय पर उन्हें दवाइयां देते हैं।
    ये कोरोना योद्धा दिव्यांग मरीजों की एक आवाज में पीपीई किट पहनकर सरपट वार्ड पहुंच जाते हैं। उनको टायलेट, बाथरूम तक हाथ पकड़कर लेकर जाने और वापस बेड तक छोड़ने का पूरा ख्याल रख रहे हैं ऐसी ही एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला भर्ती है जिसकी दृष्टि कमजोर है इनकी संपूर्ण देखरेख की जा रही है। कोविड केयर सेंटर में ऐसे दिव्यांग मरीजों की संख्या 3 है। जिनमें 1 महिला और 2 पुरुष मरीज हैं। शिफ्ट के अनुसार वार्ड ब्वाय और नर्स देखभाल कर कोरोना को हराने और मरीज को जल्द स्वास्थ्य लाभ दिलाने में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। 4 शिफ्ट में मेडिकल स्टाफ एवं उनकी टीम मरीजों की देखभाल कर रही है! मरीजों को उनके बेड तक नाश्ता से लेकर भोजन मुहैया कराया जा रहा है!
    2117 मरीज स्वस्थ होकर लौट चुके हैं घर बिना लक्षण वाले मरीजों को रखकर उनका उपचार कर कोविड के दायरे से बाहर लाने में कोविड केयर सेंटर कचांदूर स्थित केंद्र ने लगभग 2117 मरीजों को स्वस्थ कर दिया है! सबसे सुंदर सेंटर से विदाई का क्षण होता है, स्टाफ विदा करता है और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देता है, ऐसे ही पत्रकारिता जगत से जुड़े हुए उमेश पांडे कचांदूर स्थित कोविड सेंटर से स्वस्थ होकर घर लौट गए है उन्होंने बताया कि समय पर भोजन मिला, भोजन की गुणवत्ता अच्छी है, स्वास्थ्य देखभाल अच्छी हुई मैं व्यवस्था से संतुष्ट हूं! 5 अगस्त से यहां कोविड केयर सेंटर आरंभ किया गया था! इसके बाद से यहां पर 2291 मरीजों को भर्ती किया जा चुका है! कोविड केयर सेंटर के प्रभारी डॉ अनिल शुक्ला ने बताया कि अभी 103 मरीज भर्ती है! प्रत्येक 6 घंटे में टीम बदली जाती है, कोविड वारियर की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है! इन सभी के रहने के लिए सुविधा उपलब्ध कराई गई है! आइसोलेशन की सुविधा के लिए रिटायरिंग रूम भी उपलब्ध है!
    निगमायुक्त ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया है कि ऑक्सीजन लेवल की नियमित मॉनिटरिंग करते रहे! ऐसे 69 मरीज जिन्हें ऐसी समस्या आई उन्हें तुरंत हायर सेंटर रेफर किया गया! नोडल अधिकारी रघुवंशी समय-समय पर स्वयं भोजन की गुणवत्ता जांच परख रहे हैं! खाना रिच प्रोटीन डाइट का उपलब्ध कराया जा रहा है! अस्पताल की व्यवस्था बेहतर रहे, इसके लिए सेंट्रल मॉनिटरिंग कमांड सेंटर बनाया गया है! मरीजों की भर्ती से लेकर डिस्चार्ज तक के सारे कार्य इसी के माध्यम से किए जाते हैं, मरीजों तक सूचना पहुंचाने का यह एक बेहतर माध्यम है! सीसीटीवी कैमरे से मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इस पर नजर रखी जा रही है!
    ऑक्सीजन की कमी दूर करने के लिए 44 बेड की व्यवस्था कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं निगम आयुक्त रघुवंशी के निर्देश पर ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था कोविड केयर सेंटर में की गई है! कमांडिंग सेंटर का कार्य देख रहे आशीष चंद्राकर ने बताया कि कोविड केयर सेंटर में मरीजों का ऑक्सीजन लेवल निरंतर चेक किया जा रहा है, ऑक्सीजन लेवल कम होने पर मरीजों को प्राथमिक तौर पर ऑक्सीजन बेड में रखा जाता है, स्थिति सुधार नहीं होने पर तत्कालिक रूप से हायर सेंटर में रेफर किया जाता है! महापौर व भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव के प्रयास से शुरू किए गए इस कोविड सेंटर की मॉनिटरिंग लगातार उच्च अधिकारी कर रहे है! कोविड सेंटर के सभी वार्ड में स्वच्छ पानी के लिए आरओ वाटर, हास्पिटल की साफ-सफाई, सेनिटाइजिंग और सुबह शाम चाय-नाश्ता, काढ़ा, गरम पानी और खाने की व्यवस्था का प्रबंध किया है। यहां पर भर्ती मरीजों को जल्द स्वास्थ्य लाभ दिलाने हर संभव प्रयास किया जा रहा है!

    सेंटर से 100 लोग डिस्चार्ज हुए
    कोरोना पीडि़त मरीजों को मिली नि:शुल्क सुविधाएं
    स्वस्थ होकर नागरिकों ने आभार व्यक्त किया

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कोविड-19 संक्रमण की विभीषिका का सामना करने में जिले की उदयाचल एवं श्री शांति विजय सेवा समिति ने आगे बढ़कर लोगों की मदद की है। उदयाचल कोविड-19 केयर सेंटर से अभी 100 लोग डिस्चार्ज हुए हैं। उदयाचल समिति के भावेश बैद ने कहा कि कोविड-19 केयर सेंटर की संचालन के दरम्यान यह बात महसूस हुई कि मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। लोगों की दुआ एवं स्नेह से हमें ऐसी गंभीर स्थिति में सेवाभावी कार्य के लिए प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने कहा कि उदयाचल कोविड-19 केयर सेंटर के प्रेरणा स्रोत कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा है। उन्होंने हमें आगे बढ़कर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ तकलीफे और समस्याएं भी सामने आई। जिनका हम समय पर समाधान खोज पाए और सभी के लिए सुचारू व्यवस्था कर पाएं। उनकी प्रेरणा से ही यह सेंटर इतने सफलता पूर्वक कार्य कर रहा है।
    केशर नगर के मेहुल मारू ने बताया कि कोविड-19 पॉजिटिव आने के बाद इस केयर सेंटर में भर्ती हुए। उन्होंने कहा कि आपदा के इस दौर में उदयाचल सेवा समिति द्वारा किए जा रहे सेवाभावी कार्य के लिए धन्यवाद देने के लिए शब्द नहीं हैं। सेंटर में केटली, थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर, बीपी मशीन एवं अन्य व्यवस्था की गई है। वे प्रतिदिन के पौष्टिक आहार की प्रशंसा करते हुए बताते हैं कि उपमा, पोहा एवं अन्य नाश्ते के साथ पनीर एवं विविध प्रकार की सब्जी खिचड़ी, हल्दी मिला दूध, नारियल पानी, फल आदि सभी सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही है। उन्होंने लोगों से कहा है कि कोरोना के जरा भी लक्षण दिखे तो सबसे पहले टेस्ट कराएं और बिल्कुल न डरे। सिर्फ सकारात्मक सोच रखे तभी कोरोना से लड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि पहले हार्ट की भी तकलीफ थी लेकिन अब वे पूर्णत: स्वस्थ है और अपने घर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर के परामर्श से कोविड-19 केयर सेंटर में आ सकते है।
    उदयाचल कोविड-19 केयर सेंटर से ठीक होकर जाने के बाद महेश शर्मा ने समिति के भावेश से अपने परिजनों से बात करवाकर धन्यवाद दिया और कृतज्ञता ज्ञापित की। सहदेव नगर की प्रियल पाल ने बताया कि सेंटर में सभी सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हंै।

    रमन सिंह को मिला कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार के हिस्सा पहुंचाने का पुरस्कार
    छत्तीसगढ़ से महिला एवं आदिवासी वर्ग को भाजपा केंद्रीय संगठन में दायित्व नहीं मिलना छत्तीसगढ़ अपमान

     रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी से सरोज पांडे को महासचिव पद से हटाये जाने पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरोज पांडे जी को महासचिव पद से हटाकर महिला शक्ति का अपमान किया गया है। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के छत्तीसगढ़ दौरा में आने के बाद ही तय हो गया था कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं एवं आदिवासी वर्ग को भाजपा के केंद्रीय संगठन में स्थान नहीं मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी में गुटबाजी चरण सीमा पर है, गुटबाजी के चलते रमन सिंह स्थापित रहे लेकिन जो मातृ-शक्ति है भारतीय जनता पार्टी में उसको उपेक्षित किया गया है। सरोज पांडे भारतीय जनता महिला मोर्चा का नेता रही है, महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती थी भाजपा में उसको हटाकर एक बार फिर से महिला विरोधी चरित्र का उजागर किये है। बहुत ही दुख का विषय है कि भाजपा में महिलाओं का सम्मान नहीं है। भाजपा में चाटुकारिता प्रभावी है भाजपा में गुटबाजी चरम सीमा पर है।
    कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सत्ता में रहते कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार का हिस्सा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया उसका पुरस्कार उनको मिला है। भाजपा के केंद्रीय संगठन में प्रदेश के एकमात्र महिला नेत्री को बाहर करना एवं आदिवासी वर्ग को दायित्व नहीं मिलना भाजपा के महिला एवं आदिवासी वर्ग विरोधी को उजागर करता है।

    इंदौर । शौर्यपथ । इंदौर के विजय नगर थाना पुलिस ने अवैध रूप से विदेशी लड़कियों से देहव्यापार कराने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इनके कब्जे से 13 लड़कियों, जिसमें कुछ नाबालिग हैं उन्हें मुक्त कराया है. पुलिस ने इस गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें तीन महिलाएं शामिल हैं. पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है. 21 सितंबर को मुंबई की दो मॉडल्स ने पुलिस से शिकायत की थी कि उन्हें काम के बहाने मुंबई से इंदौर बुलाया गया था. जहां उन्हें बाणगंगा इलाके के एक फ्लैट में बंधक बनाकर रखा गया फिर कुछ युवकों ने उनके साथ रेप किया था और उनका वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उनसे डेढ़ लाख रुपये ले लिए थे. इंदौर पुलिस ने मॉडल्स की शिकायत को गंभीरता से लिया और आरोपियों को पकड़ने के लिए एक टीम बनाई गई. पुलिस ने नवीन ,कुलदीप, राजेन्द्र और एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि ये गैंग बाहर से युवतियों को बुलाकर देह व्यापार कराता है. इसके अलावा पुलिस को पता चला कि गिरोह की महिलाएं अपने एजेंट के माध्यम से बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र से गरीब लड़कियों को काम दिलाने का झांसा देकर यहां लाती थीं. फिर उन्हें बंधक बनाकर देह व्यापार में धकेल दिया जाता था. वीजा और पासपोर्ट न होने की वजह से विदेशी लड़कियां अपने कमरे से बाहर नहीं निकल पाती थीं. पुलिस ने 9 बांग्लादेशी युवतियों को मुक्त कराया. इनमें कुछ नाबालिग लड़कियां भी शामिल हैं. पुलिस ने कुल 13 लड़कियों को बदमाशों के चुंगल से मुक्त कराया. इस गैंग से जुड़ी तीन महिला समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से 25 मोबाइल फोन एक लैपटॉप व एक लाख रुपये कैश बरामद किए.

    रायपुर । शौर्यपथ ।वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश बिस्सा ने स्पीक अप फॉर किसान के लिए बोलते हुए आरोप लगाया की लोकसभा में मिले बहुमत के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी की सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट कर भारत में लूट का तंत्र विकसित कर देश को मल्टिनेशनल कंपनियों का गुलाम बना देना चाहती है। कांग्रेस ने जिस जमींदार प्रथा को खत्म किया था उसे भाजपा वापस लाना चाहती है। बिस्सा ने कहा की मोदी सरकार ने वर्तमान में संपन्न हुए लोकसभा व राज्यसभा के सत्र में कुल 08 दिनों में 20 से अधिक विधेयक सत्ता की दादागिरी के बल पर पारित कर लिए हैं। आज हम के लिए आप के मध्य उपस्थित हुए आपको मैं बताना चाहूंगा जो विभिन्न विधेयक केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में सत्ता की ताकत के आधार पर पारित किए हैं उनमें से तीन बिल ऐसे हैं जो संपूर्ण भारत वर्ष को प्रभावित करेंगे। ये बिल हैं - 1. किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 2. किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा विधेयक 2020 3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 बिस्सा ने आरोप लगाया की नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने इन बिलों के माध्यम से अपने पूंजीपति मित्रों के लिए 130 करोड़ भारतवासियों को लूटने एवं देश के खजाने को लुटाने हेतु मार्ग बना कर देने का काम किया है। आज अगर हमने इसका विरोध नहीं किया तो राष्ट्र के खजाने के साथ साथ आने वाली कई पीढ़ियां शोषण का शिकार रहेंगी। इन कानूनों की आड़ में एक खतरनाक कानूनी तंत्र विकसित कर लिया है मोदी सरकार ने, जिसको हमें बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। बिस्सा ने कहा की कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 के अनुसार कृषि उपज मंडी समितियों जैसी सरकारी मंडियों के दायरे के बाहर व्यापारिक मंडिया बनाई जाएंगी। जहां किसान अपनी उपज बेच सकेंगे और तो और राज्य सरकारें इन इलाकों पर कोई टैक्स नहीं लगा सकेंगी। लेकिन इस कानून में इस बात को शामिल नहीं किया गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज को खरीदने को व्यापारी बाध्य रहेंगे। इसके दुष्परिणाम यह निकलेंगे कि पहले तो व्यापारी किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त मूल देगा और जब अर्थाभाव के कारण धीरे-धीरे सरकारी मंडियां अस्तित्वहीन हो जाएंगी उस दिन से किसान समर्थन मूल्य पाने के लिए भी तरस जाएगा। भाजपा सरकार इस बात को अच्छी तरीके से जानती है और उसके मन में खोट है इसलिए वह न्यूनतम समर्थन मूल्य की बात को विधेयक में जोड़ना नहीं चाहती उसका तो एकमात्र उद्देश्य है अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाना। इसी तरह किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा विधेयक 2020 में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) की व्यवस्था की गई है।सरकार का कहना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी। जबकि वास्तविकता तो यह है कि सरकार किसान और बिचौलियों के बीच से हट जाएगी और सीधे तौर पर लूटने का अधिकार बिचौलियों को दे देगी।इस बिल के माध्यम से कांग्रेस सरकार ने जिस तरह जमींदार प्रथा को खत्म किया था वापस वह उस जमींदार प्रथा को स्थापित करने का प्रयास है केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 में संशोधन कर अनाज, दलहन, आलू ,प्याज खाद्य पदार्थों को आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर किया गया है। इसका प्रभाव ये होगा कि इन वस्तुओं के उत्पादन, वितरण और भंडार पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा। जमाखोरों की चांदी हो जायेगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दिये जाने वाले राशन को जमाखोरों से खरीदने के लिये मजबूर हो जायेंगी सरकारें। एक ओर तो प्रति वर्ष राष्ट्र का लाखों करोड़ रुपया मुनाफाखोरों की जेब में जायेगा दूसरी ओर आम जनता भी महंगाई का सामना करने को बेबस नजर आयेगी। बिस्सा ने कहा की इन तीनों कानूनों को पारित करने के पीछे मोदी सरकार का एक ही लक्ष्य है कि देश भले ही आजाद कहलाए, भले ही यहां की चुनाव प्रक्रिया लोकतांत्रिक कहलाए, लेकिन देश की आत्मा किसान व अर्थव्यवस्था को चंद पूंजीपतियों का गुलाम बना दिया जाए। बिस्सा ने अपील है कि देशवासियों को मोदी सरकार के षड्यंत्र भरे निर्णयों पर पूरी ताकत के साथ खड़ा होना चाहिए वरना सिर्फ पछताना पड़ेगा।

    दुर्ग । शौर्यपथ । कृषि बिल को लेकर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राजेंद्रसाहू ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला । राजेन्द्र साहू ने कहा कि केंद्र सरकार की कृषि बिल नीति से किसानों को नही उद्योगपतियों को फायदा होगा । केंद्र सरकार अगर किसानों के हितों की सोंचती तो स्वामीनाथन की रिपोर्ट को आधार बना कर अनाज के न्यूनतम समर्थन मूल्य का डेढ़ गुना निर्धारित करती किन्तु वर्तमान में जो बिल पास हुआ उससे किसानों को कोई फायदा नही होगा उससे ज्यादा फायदा बड़े बड़े उद्योगपतियों को होगा । केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा लागू कृषि विधेयक किसानों के साथ धोखा है बिलकुल नोटबंदी जी एस टी एवं बीस लाख करोड़ रुपये के पैकेज जैसा है जिससे आमजनता मज़दूर व किसानों सहित छोटे व्यवसायियों को किसी तरह का राहत या लाभ नही मिलता।इसलिए केन्द्र सरकार द्वारा लागू कृषि विधेयक किसानों के हित में तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाये। राजेन्द्र साहू ने अपनी बात speeakupfarmer के तहत फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी । देखिये राजेन्द्र साहू ने क्या कहा ...

    राजनांदगांव/शौर्यपथ / संचालक लोक शिक्षण संचालनालय इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र लिखकर सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को…

    दुर्ग / शौर्यपथ / 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आयी भाजपा के कार्यकाल के भ्रष्टाचार की बात करते करते और सुशासन देने का वादा करते हुए कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरी थी . प्रदेश की जनता ने कांग्रेस की चुनावी वादों का सम्मान करते हुए सत्ता की चाबी सौपी किन्तु कांग्रेस के कुछ नेता ऐसे है जो प्रदेश सरकार की छवि खराब करने की अपने तरफ से पुरजोर कोशिश कर रहे है इन्ही कोशिशो में दुर्ग जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव के पति और मंत्री के करीबी रिवेंद्र यादव द्वारा शासन के पैसे गबन करने का आरोप लग रहा है कहते हैं जब सैयां भये कोटवार तो डर काहे का ये वाकया चरितार्थ हो रहा है दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत बोरई में जहां रिवेंद्र यादव, जो वर्तमान जिला-पंचायत दुर्ग अध्यक्ष शालिनी यादव के पति हैं। साथ ही पंचायती राज के उच्च पद पर आसीन है वही रिवेंद्र यादव प्रदेश के कद्दावर मंत्री के करीबी भी है . राजनितिक हल्को में ये चर्चा है कि शालिनी यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में इन्ही मंत्री की महत्तवपूर्ण भूमिका रही थी . ग्राम पंचायत बोरई के सरपंच रहते हुए उन्होंने अपने साथी वेंडर सिन्हा ट्रेडर्स नगपुरा के संचालक ताम्रध्वज सिन्हा से मिलकर 21 लाख 70 हजार रुपए डकार दिए, निर्वाचन के 6 महीने बाद भी कई नोटिस दिए गए पर पैसा पंचायत को वापिस नही लौटाया गया। अब चूंकि जनपद व जिला-पंचायत उनके अधीनस्थ व नतमस्तक हैं , जिला प्रशासन की क्या मजाल की शासन के पैसों की वसूली कर पाए ।
    आपको बता दे की ग्राम पंचायत बोरई के पूर्व सरपंच रिवेन्द्र यादव के द्वारा मनरेगा के तहत ग्राम बोरई में निजी शौचालय निर्माण करवाया गया व उसकी राशि का भुगतान 13 वे वित्त व 14वें वित्त आयोग के तहत किया गया। मनरेगा के तहत बनवाए गए शौचालयों का कुल लागत 21लाख 70 हजार रूपए एफ.टी.ओ. के माध्यम से तत्कालीन सरपंच रिवेन्द्र यादव (जो उस समय सरपंच संघ का अध्यक्ष भी था) के द्वारा जनपद पंचायत दुर्ग से सिन्हा ट्रेडर्स संचालक ताम्रधव्ज सिन्हा जो उसका करीबी आदमी व कार्यकर्ता है के खाते में जमा करवाया गया। लेकिन 3 वर्षा के बाद भी बोरई के पूर्व सरपंच रिवेन्द्र यादव ने सिन्हा ट्रेडस के मालिक ताम्रधव्ज सिन्हा से 21 लाख 70,000 रूपए की राशी को ग्राम पंचायत के खाते में वापस नहीं लिया।
    भाजपा नेता अभिषेक जैसवाल की शिकायत के बाद मामला आया सामने
    जिला भाजयूमों के नेता अभिषेक जैसवाल के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री औऱ जिलाधिश के नाम ज्ञापन सौंप कर मामले में तुरंत कार्यवाही करने को कहा है, उनका कहना है की यदि 7 दिवसों के भीतर उक्त राशी का समयोजन नहीं किया गया और उक्त आरोपीयों के उपर एफ.आई.आर नहीं की तो भाजयुमों के कार्यकर्ता बड़ा उग्र धरना प्रदर्शन व क्षेत्रीय विधायक का पुतला दहन करेंगे।
    पंचायत सचिव व जनपद के कर्मचारियों की भी कार्य प्रणाली संदिग्ध :- उक्त मामला 3 साल पुराना है ,लेकिन वसूली के लिए जनपद ने एक भी नोटिस नहीं दिया जिससे यह कहना उचित है कि , कद्दू कट गया सब में बट गया। एक ओर जिस शौचालय निर्माण का जिस पार्टी के लोग छाती पिट पिट कर विरोध करते नजऱ आते थे वहीं मौका मिलते ही उसका पैसा दबाने में पीछे भी नहीं हटे है।

    क्या है मामला
    दरअसल ग्राम पंचायत बोरई में मनरेगा के अंतर्गत निजी शौचालय निर्माण किया गया था। जिसमें ग्राम पंचायत द्वारा हितग्राहियों के द्वारा कार्य प्रारंभ करने हेतु ग्राम पंचायत मद के 13वें व 14वें वित्तीय से प्रति 217 हितग्राहियों का प्रति शौचालय 10 हजार के दर से 21 लाख 70 हजार का भुगतान जनपद पंचायत दुर्ग के द्वारा एफ.टि.ओ के माध्यम से सिन्हा ट्रेडर्स के खाते में जमा करवाया जा चुका है, लेकिन सिन्हा ट्रेडर्स के द्वारा 3 साल बीत जाने के बावजूद यह राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं करवाया गया।
    इस राशि का न तो मनरेगा के तहत राशि मिलने से समायोजन किया गया और न ही शौचालयों का निर्माण पूरा किया गया। शौचालय निर्माण के बाद सम्पूर्ण राशि प्राप्त होने के बाद उस राशि से चौदहवें वित्त आयोग से उपयोग की जाने वाली राशि को उसमें समायोजन करना था जो कि नही हुआ।
    बड़े नेताओं के साथ सांठ-गांठ के कारण नहीं हो रही कार्यवाही
    रिवेंद्र यादव सत्ता पक्ष का नेता है व वर्तमान में उक्त व्यक्ती की पत्नी शालिनी यादव दुर्ग जिला पंचायत की अध्यक्ष है। पूर्व में रिवेन्द्र यादव सरपंच का अध्यक्ष भी रह चुका हैं और साथ ही रिवेन्द्र यादव दुर्ग के बड़े नेता और मंत्री का करीबी भी हैं। इस कारण जिला व जनपद पंचायत के अधिकारी इस मामले को दबाने की भरसक प्रयास कर रहें हैं। जनता के 21 लाख 70 हजार की राशि का गबन
    रिवेन्द्र यादव व ताम्रधव्ज सिन्हा(सिन्हा ट्रेडर्स नगपूरा) के द्वारा सरेआम आमजनता का 21लाख 70 हजार रूपए चुना लगाया गया है, जिसका 3 साल का ब्याज ही 1 लाख से ज्यादा होता है। अत: आपके पार्टी के नेता और मंत्री के करीबी व्यक्तियों के द्वारा केंद्र सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का पैसा खाकर जनहित का दंभ भरना कदाचित छत्तीसगढ़ की आम जनता के साथ बेईमानी हैं।

    मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में इन मुद्दों को भाजयुमो ने प्रमुखता से उठाया
    1. क्यो की रकम स्थांतरण तत्कालिन सरपंच रिवेन्द्र यादव कि सहमती से दिया गया था एवं अपने कार्यकाल पूर्ण होने तक उसके द्वारा एक बार भी रकम वापस नहीं मांगा गया, इससे यह बात स्पष्ट होता है की सिन्हा ट्रेडर्स औऱ सरपंच दोनों बराबरी के जिम्मेदार हैं।
    2. शौचालय निर्माण राशी का भुगतान पंचायत के पैसों से किया गया, जो कि दूसरे मद का था, यह भी जांच का विषय हैं।
    3. तीन साल से 21 लाख 70 हजार की अनियमितता के बाद भी जनपद पंचायत द्वारा साल दर साल कैसे ऑडिट किया जा रहा है, यह भी जांच का विषय है।
    अत: उक्त राशि का ब्याज सहीत वसूला जांए, साथ ही अगर राशि जमा नहीं कि गई तो उक्त आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जांए।

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