September 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रायपुर / शौर्यपथ / खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के दौरान समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का बेचने वाले नये किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक किया जाएगा। राज्य शासन के निर्देशानुसार धान और मक्का बेचने के लिए पुराने पंजीकृत किसानो को फिर से पंजीयन कराने समिति में आने की आवश्यकता नहीं है। धान और मक्का बेचने के इच्छुक नए किसान 31 अक्टूबर तक पंजीयन के लिए आवेदन कर सकते हैं। धान-मक्का बेचने वाले नए किसान पंजीयन के लिए संबंधित दस्तावेजों के साथ तहसील कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
    राज्य के जिन किसानों ने खरीफ वर्ष 2019-20 में धान और मक्का बेचने का पंजीयन करा लिया था, उन्हें नए पंजीयन की जरूरत नहीं है। पिछले सीजन में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि, धान और मक्के के रकबे और खसरे को राजस्व विभाग द्वारा अद्यतन किया किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2020-21 में किसान पंजीयन के लिए पिछले वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसानों का डाटा कैरी-फॉरवर्ड किया गया है। पुराने पंजीकृत किसान अपने पंजीयन में संशोधन कराना चाहते हैं तो समिति मॉड्युल के माध्यम से संशोधन करने की सुविधा दी जा रही है।

    नई दिल्ली/ शौर्यपथ /गिरते जीडीपी ग्रोथ और कोरोनावायरस के मामलों में कोई राहत मिलने की स्थिति को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हर रोज आंकड़ों के हवाले से…
    नई दिल्ली / शौर्यपथ / फरीदाबाद में जीजा की पीट पीटकर बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी साले इमरान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. साले ने जीजा के…
    नई दिल्ली / शौर्यपथ / राष्ट्रीय महिला आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री इमरती देवी के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की ओर से कथित तौर पर ‘आइटम‘ वाली टिप्प्णी…
    नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र सरकार एयर इंडिया के विनिवेश के लिए समयसीमा बढ़ाकर 15 दिसंबर तक कर सकती है. सूत्रों ने कहा कि एयर इंडिया के परिसंपत्ति मूल्यांकन…
    नई दिल्ली/ शौर्यपथ / व्हाट्सएप पर महिला को अश्लील संदेश भेजकर उत्पीड़न करने के 28 वर्षीय आरोपी को पुलिस ने गुजरात के तापी से गिरफ्तार किया है. पुलिस ने सोमवार…
    मुंंबई / शौर्यपथ / मुंबई के श्‍वांस चिकित्सा विशेषज्ञ हैरान हैं. यहां ट्यूबरकुलोसिस (TB) के हॉटस्पॉट वार्ड में 8000 टीबी मरीज़ों में सिर्फ़ 8 को कोविड हुआ है. बृहनमुंबई म्‍युनिसिपल…
    नई दिल्ली / शौर्यपथ /सिलीगुड़ी/ भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा सोमवार को एक दिन के दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचे. उन्होंने ममता सरकार पर फूट डालो-राज करो की नीति पर…

    रायपुर/ शौर्यपथ / जिस रमन राज में अधिकारियों, राजनेताओं से लेकर पत्रकारों तक सब दहशत में थे, जिस रमन राज में हर भाजपाई गुंडागर्दी पर उतर आया था, जिस रमन राज में लोगों की प्रताडऩा और अत्याचार आम बात हो गई थी, उसी रमन राज के मुखिया डॉ. रमन सिंह अब भूपेश बघेल की सरकार में गुंडागर्दी ख़त्म करने के नारे लगा रहे हैं। कांग्रेस ने कहा है कि रमन सिंह अपने कार्यकाल के आंकड़े लेकर थोड़ा चिंतन कर लें तो उनका मानसिक तनाव कम हो जाएगा।
    प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि इतिहास गवाह है कि छत्तीसगढ़ को 15 वर्षों की रमन सरकार का हासिल सिर्फ हत्याएं फर्जी मुठभेड़, घोटाले, बलात्कार, दह्शत और साजिशें रहीं हैं। पूर्व मंत्रियों से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री का परिवार तक तमाम अपराधिक घटनाओं में संलिप्त रहा है। यह कांग्रेस नहीं कहती है अदालतें कहती हैं, दस्तावेज कहते हैं। अफसोस इस बात का है कि जब प्रदेश की जनता सत्तापोषित गुंडागर्दी और वसूलीबाजी से निजात पाकर राहत की सांस ले रही है तो पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह नारा लगा रहे हैं कि भूपेश तेरी गुंडागर्दी नहीं चलेगी। ऐसा कहकर डॉ. रमन सिंह ने न केवल प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अपमान किया है बल्कि उन लाखों किसानों, युवाओं का भी अपमान कर रहे हैं, जिन्होंने भाजपा के जंगलराज से मुक्ति पाने के लिए कांग्रेस को भारी मतों से विजयी बनाया था। विधानसभा चुनाव में पराजय से मिली चोट गहरी है यह तो हमें पता है। लेकिन अब इस चोट का संक्रमण डॉ. रमन सिंह के मस्तिष्क तक पहुँच गया है इसका अंदाजा हमें नहीं था। नहीं भुला जाना चाहिए कि वह डॉ. रमन सिंह की भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में नंदकुमार साय को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर भाजपाइयों की गुंडई का शिकार खुद कई वरिष्ठ भाजपा नेता हुए थे।
    स्वर्गीय लखीराम और गौरीशंकर जी की गाडिय़ां फूंक दी गई थी और महेश तिवारी समेत दर्जनों भाजपा नेताओं की जमकर पिटाई की गई थी बताएं रमन सिंह की भाजपा में बैठे गुंडों ने उस वक्त पर्यवेक्षक के तौर पर आये मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ क्या किया था? बताएं डॉ. रमन सिंह कि पूर्व विधायक राजू क्षत्री और उनके बेटे ने टीआई के घर तोडफ़ोड़ कर उसको जान से मारने की धमकी दी थी वो गुंडई थी कि नहीं थी? बताएं रमन सिंह कि भाजपा सांसद कमलभान के बेटे देवेंद्रभान ने पत्रकार की पिटाई की थी वो गुंडई थी कि नहीं थी? बताएं रमन सिंह कि पूर्व मंत्री पुन्नुलाल मोहले के भतीजों ने पुलिस पर जानलेवा हमला किया था वो गुंडई थी कि नहीं थी?
    रमन सिंह जी आपकी सरकार में तो गुंडागर्दी का शिकार भोले भाले आदिवासी, पत्रकार और किसान सभी हुए मगर आप खामोश थे। आपके विधानसभा क्षेत्र राजनांदगांव में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मंडल अध्यक्ष ने अपने साथियों के साथ मिलकर अनाज व्यापारी को जमकर पीटा था आज भी उसके घाव भरे नहीं हैं। हम नही भूल सकते कि भारी हार के बाद भाजपा कार्यालय में किस तरह से पत्रकार सुमन पाण्डेय की आपके जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल और पार्टी के लोगों ने पिटाई की थी। वह आपकी सरकार थी जब पार्टी कार्यकर्ताओं की गुंडई सफल नहीं हो पाती थी आप पुलिस का इस्तेमाल करने लगते थे। तमाम फर्जी मुक़दमे गुंडई नहीं थी तो क्या थी? बिलासपुर में कांग्रेस दफ्तर में घुसकर निहत्थे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पिटाई की गई वो गुंडई नहीं तो क्या थी? डाक्टर साहब आपको आराम की सख्त जरुरत है।
    हमें अच्छी तरह से पता है कि आपकी स्थिति पार्टी में ठीक नहीं है जिस गुंडागर्दी को आपने पार्टी में बढ़ावा दिया वही अब आपके खिलाफ खड़ी है? हमे डर है कि वो आपके खिलाफ भी इस्तेमाल की जा सकती है। आपको सख्त आराम की जरुरत है।

    रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान पखवाड़े में कोरोना काल में भी 1,271 महादानियों ने रक्तदान किया है । पखवाड़े के दौरान प्रदेश के 22 जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया | इस दौरान वैश्विक स्वास्थ्य संकट कोरोना को ध्यान में रखते हुए सभी दिशानिर्देशों का पालन किया गया।
    एक अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक शिविर में एकत्रित रक्त को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में संचित किया गया है । ब्लड बैंक से रक्त को जरुरतमंद लोगों की मदद के लिए उपयोग किया जाएगा । राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर में 20, बिलासपुर में 148, महासमुंद में 157, कोंडागांव में 102, दंतेवाड़ा में 33, जगदलपुर में 5, राजनांदगांव में 90, अंबिकापुर में 4, बालोद में 30, कांकेर में 30, कोरिया में 144, बलौदाबाजार में 77, मुंगेली में 34, कर्वधा में 138, कोरबा में 150, बेमेतरा में 3, जशपुर में 1, रायगढ़ में 20, सुकमा में 21 , जांजगीर चांपा में 1, गरियाबंद में 17 और बलरामपुर में 42 लोगों द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान किया गया ।
    एड्स कंट्रोल सोसायटी के अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ एसके बिंझवार ने बताया कोरोना संकट के बावजूद रक्तदाताओं ने रक्तदान पखवाड़े में रक्तदान किया। डॉ. बिंझवार ने कहा रक्तदान को समस्त विश्व में सबसे बड़ा दान माना गया है क्योंकि रक्तदान ही है, जो न केवल किसी जरूरतमंद का जीवन बचाता है बल्कि उसकी जिंदगी बचाकर उस परिवार के जीवन में खुशियों के ढ़ेरों रंग भी भरता है। कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति रक्त के अभाव में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है और आप एकाएक उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं और आपके द्वारा किए गए रक्तदान से उसकी जिंदगी बच जाती है तो आपको कितनी खुशी होगी।
    रक्तदान से आपात कालीन समय में रक्त के अभाव में असमय होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम किया जा सकता है। डॉ. बिंझवार ने बताया, हर साल अक्टूबर महीने में दो सप्ताह तक सभी ब्लड बैंकों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते है। वर्ष 2019 में स्वैच्छिक रक्तदान पखवाड़े के दौरान 2,400 यूनिट रक्त संग्रहित किए गए थे। इस वर्ष कोराना वायरस के बावजूद भी 1,271 यूनिट यानी लगभग 50 फीसदी से ज्यादा रक्त संग्रह हुआ है। जबकि वर्ष 2019 में अक्टूबर महीने में 8,555 यूनिट रक्त संग्रह किए गए थे। उन्होंने कहा दरअसल रक्तदान के महत्व को लेकर किए जा रहे प्रचार-प्रसार के बावजूद आज भी बहुत से लोगों में कुछ गलत धारणाएं विद्यमान हैं, जैसे रक्तदान करने से संक्रमण का खतरा रहता है, शरीर में कमजोरी आती है, बीमारियां शरीर को जकड़ सकती हैं ।
    जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और जनपद पंचायत सदस्य उमेश प्रधान अब तक 33 वें बार रक्तदान किए हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान करने के बाद उमेश ने कहा थोड़े से प्रयास से अगर किसी की जान बचती है। तो इससे अच्छा सहयोग और क्या होगा जिससे किसी जरुरतमंद परिवार की मुसिबत के घड़ी में चेहरे पर मुस्कान लौट जाए। उन्होंने कहा किसी की जीवन बचाने के लिए मानवता के खातिर रक्तदान करने के दौरान कोरोना संकट का डर नहीं लगता।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिवर्ष एक करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है। छत्तीसगढ राज्य की कुल जनसंख्या 2.55 करोड़ के आधार पर 1 प्रतिशत रक्त की आवश्यकता होती है अर्थात 2.55 लाख यूनिट रक्त की प्रतिवर्ष जरूरत पड़ती है। रक्त की आवश्यकता की पूर्ति राज्य के कुल 94 ब्लड बैंकों (31 शासकीय और 63 गैर शासकीय ब्लड बैंक) के माध्यम से किया जाता है | वर्ष 2019-20 में ब्लड बैंकों द्वारा 90 प्रतिशत रक्त यानि कुल 2,31,054 यूनिट रक्त संग्रहण किया गया। वहीं वर्ष 2020-21 (अप्रैल से अगस्त) तक ब्लड बैंकों द्वारा 30 प्रतिशत यानि कुल 67543 यूनिट रक्त संग्रहण किया गया है ।

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