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March 07, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

-‘धमधा के किसान श्री विश्राम सिंह पटेल की कहानी’, जिन्हें दूध से ज्यादा आय गोबर बेचकर हुई
- दो किस्तों को मिलाकर अब तक करीब 16 हजार रुपए कमाए, वहीं इस दौरान दूध बेचकर हुई करीब 11 हजार 300 रुपए की आमदनी
-सोच रहे थे अपने मवेशी बेच दें मगर ‘गोधन न्याय योजना’ ने बदल दिया इरादा
-गौपालन को मिला सहारा और जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों और किसानों के लिए फायदे की योजना है गोधन न्याय योजना

दुर्ग / शौर्यपथ / जनहित में लिया गया एक सही निर्णय किस तरह कारगर साबित होता है इसका साक्षात उदाहरण है धमधा के किसान श्री विश्राम सिंह पटेल। वे बताते हैं कि कुछ महीनों पहले रखरखाव में हो रहे खर्च के कारण उन्होंने इरादा कर लिया था कि वह अपने सारे मवेशी बेच बेच देंगे लेकिन उनका इरादा बदल दिया राज्य शासन की गोधन न्याय योजना ने। जब उनको पता चला कि सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने से गोबर खरीदने की योजना शुरू की है तो उन्होंने भी सोचा क्यों न वो भी इस योजना का फायदा उठाएं।
40 मवेशियों से मिलता है करीब ढाई से तीन क्विंटल गोबर, दो किस्तों को मिलाकर अब तक करीब 16 हजार रुपए कमाए, वहीं इस दौरान दूध बेचकर हुई करीब 11 हजार 300 रुपए की आमदनी - श्री विश्राम सिंह पटेल बताते हैं शुरुआत में तो केवल आजमाने के लिए उन्होंने गोबर इकट्ठा किया तो देखा 40 मवेशियों से करीब ढाई से 3 क्विंटल गोबर इकट्ठा हो जाता है। उनके पास 10 गायें गिर नस्ल की, 15 देसी नस्ल की हैं और 15 बछड़े और बछिया है। उन्होंने बताया कि एक गाय साल भर दूध नहीं देती जब उसके बछड़े होते तभी दूध देती है। इस लिहाज से एक समय मे 25 में 8 से 10 गायें ही दूध देती हैं । उनके यहाँ देसी गाय एक दिन में डेढ़ से दो लीटर दूध देती है और गिर गाय 7 से 8 लीटर। वर्तमान में 4 देसी और 3 गिर गायें दूध दे रही हैं। जिनसे प्राकृतिक रूप से एक दिन में करीब 15 से 20 लीटर दूध मिलता है। वहीं 40 मवेशियों से करीब ढाई से तीन क्विंटल गोबर मिला जिसे बेचकर पहली किस्त में 6470 और दूसरी किस्त 9450 दोनों को मिलाकर करीब 16 हजार रुपए मिले। वहीं दूध बेचकर इसी अवधि में उनको 11 हजार 300 रुपए की आमदनी हुई। श्री विश्राम सिंह पटेल बताते हैं कि एक दिन उन्होंने करीब 700 रुपए का गोबर बेचा और उसी दिन 500 रुपए का दूध। ये देखकर उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गोबर से भी उनको इतनी आय हो सकती।
गौपालन को मिला सहारा और जैविक खेती को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों के लिए फायदे की योजना है गोधन न्याय योजना - श्री पटेल ने बताया कि 40 मवेशियों के पालन पोषण रख-रखाव बहुत महंगा पड़ रहा था। हरा चारा तो अपने खेतों से मिल जाता था मगर बाजार से चारा, मवेशियों के टीकाकरण, श्रमिकों की मजदूरी मिलाकर काफी खर्च हो जाता था। एक समय ऐसा आया कि उन्होंने तो गौपालन बंद करने का सोच लिया था लेकिन, ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत हो रही गोबर खरीदी से उनके गौपालन को सहारा मिला और उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। अतिरिक्त आमदनी होने से उनको मवेशियों के रख-रखाव में मदद मिलेगी।

रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चिकित्सको द्वारा समय पर अनेक परामर्श जारी किए जा रहे हैं। जिनमें से एक है कि यदि एंटीजेन टेस्ट निगेटिव आया और फिर भी सर्दी,खांसी,बुखार आदि लक्षण नजर आ रहे हैं तो आरटीपीसीआर टेस्ट अवश्य कराएं।
राज्य में 5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक संचालित सघन सामुदायिक सर्वेक्षण में 42हजार 889 ऐसे व्यक्तियों का आर टी पी सी आर /टुªनाट टेस्ट कराया गया, जिनका एंटीजेन निगेटिव आया था लेकिन जिनमें सर्दी,खांसी,बुखार आदि लक्षण थे। इनमें से 1277 व्यक्तियों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि इस मामले में लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतते हुए आरटी पीसी आर या टुनाट टेस्ट जरूर कराएं और कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में सहायक बनें।

 

मुख्यमंत्री ने जेईई मेन्स में छू लो आसमान के सफल 17 विद्यार्थियों को दी उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं
बीजापुर और सुकमा के आदिवासी बच्चों के लिए अगले सत्र से 40 सीटें बढ़ाने और चयनित विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा
आने वाले वर्षो में विकासखण्ड स्तर पर खोले जाएंगे इंग्लिस मीडियम स्कूल

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज दंतेवाड़ा जिले के ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम के तहत अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में (जेईई) मेन्स में सफल 17 छात्र-छात्राओं से बातचीत की और उन्हें सफलता के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। इन छात्र-छात्राओं ने एनआईटी में प्रवेश के लिए मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त किया है। वर्ष 2011 में जिला प्रशासन दंतेवाड़ा और एनएमडीसी के सहयोग से प्रारंभ किए गए इस कार्यक्रम की मदद से अब तक 845 छात्र-छात्राओं का चयन विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के जरिए विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे जीवन के हर क्षेत्र में नई ऊंचाईयां हासिल की जा रही है। आप लोग दूरस्थ अंचलों से हैं और विपरित परिस्थितियों में अपने दृढ़ संकल्प से ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम के माध्यम से यह सफलता प्राप्त की है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम में बीजापुर और सुकमा के आदिवासी बच्चों के लिए अगले सत्र से 40 सीटें बढ़ाने, चयनित विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और एक छात्र हेमंत कुमार आर्य की ऑखों का पूरा इलाज कराने की घोषणा की। श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना के अंतर्गत जिलों में 53 स्कूल प्रारंभ किए गए हैं। आने वाले वर्षो में विकासखण्ड स्तर पर इंग्लिस मीडियम स्कूल प्रारंभ किए जाएंगे।
इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, विधायक अनूप नाग, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, एनएमडीसी के सलाहकार दिनेश श्रीवास्तव उपस्थित थे। वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के माध्यम से कलेक्टर दंतेवाड़ा दीपक सोनी और एनएमडीसी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सुमित देव शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ’छू लो आसमान’ कार्यक्रम से जुड़ें बच्चों की सफलता ने यह साबित कर दिखाया है कि हमारे बस्तर इलाके में प्रतिभा की कमी नही है। यदि अवसर मिले तो हमारे बच्चे महानगरों के बच्चों को भी मात दे सकते हैं। अभी तक बस्तर की पहचान उसकी प्राकृतिक छटा, वहां की अनोखी जीवन शैली और खनिजों से भरपूर खदानों से होती थी। अब शिक्षा के नाम से भी बस्तर को जाना जाएगा। श्री बघेल ने इस अवसर पर सफल विद्यार्थियों दंतेवाड़ा चेरपाल के संतकुमार कंुजाम, सुकमा की उपासना नेगी और कल्याणी नेताम और दंतेवाड़ा टेकनार के मनोज कुमार तथा छू लो आसमान की शिक्षिका सुकृति शर्मा से बात कर उनके अनुभव जाने। बच्चों ने गुरूजनांे, मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन, दंतेवाड़ा और अपने माता-पिता को अपनी सफलता का श्रेय दिया।
’छू लो आसमान’ कार्यक्रम में इस वर्ष कुल 17 छात्र-छात्राएं (15 छात्र, 2 छात्राएं) जेईई मेन्स की प्रवेश परीक्षा (एन.आई.टी. हेतु ) में मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त किया है, जिसमें दंतेवाड़ा के 11, बीजापुर के 2, सुकमा के 3 एवं बस्तर जिले से 1 छात्र, छात्राएं शामिल हैं, जिनमें 16 विद्यार्थी आदिवासी एवं 1 अन्य पिछड़ा वर्ग से है। पिछले वर्ष भी 21 छात्र-छात्राओं ने आईआईटी, एनआईटी में प्रवेश पाया था।
दंतेवाड़ा क्षेत्र के आदिवासी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं में तैयार करने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में ’छू लो आसमान’ की स्थापना की गई। इस संस्था में मूल रूप से दंतेवाड़ा एवं आसपास के छात्र-छात्राओं को कक्षा 9वीं से हॉस्टल में रखकर पीईटी एवं पीएमटी की तैयारी करायी जाती है, साथ ही उनकी पढ़ाई को जारी रखने हेतु दंतेवाड़ा के विभिन्न स्कूलों में प्रवेश भी दिलाया जाता है। संस्था मंे प्रत्येक वर्ष 80 छात्र एवं छात्राओं को प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। कुल सीटों में 76 प्रतिशत आदिवासी, 4 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 14 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग तथा 6 प्रतिशत सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं हेतु सुरक्षित रहती है। एक समय में कक्षा में कुल 600 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत रहते है।
’’छू लो आसमान’’ की स्थापना से ही एनएमडीसी इस संस्था में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का व्यय जैसे कि शिक्षकों का वेतनमान, छात्र-छात्राओं की कापी, किताब, शिक्षण सामग्री, गणवेश, भोजन, दैनिक उपयोग की समस्त वस्तुओं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं का व्यय एनएमडीसी सीएसआर अंतर्गत व्यय किया जाता है। ’’छू लो आसमान’’ के छात्र-छात्रओं की इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एनएमडीसी द्वारा तीन करोड़ रूपए प्रतिवर्ष व्यय किए जाते हैं। संस्था की मॉनिटरिंग जिला प्रशासन एवं एनएमडीसी द्वारा की जाती है।

राजशेखर नायर

ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर हाथों की धुलाई और रंगोली बनाकर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से ज़िले में दिया गया स्वच्छ जीवनशैली का संदेश । कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और अन्य संक्रमण से बचने के लिये नियमित रुप से व्यक्ति को स्वास्थ्य की छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखने के उद्देश्य से हाथों की धुलाई के वीडियो किल्प बनाकर हितग्राहियों और नौनिहालो को स्वच्छ जीवनशैली और संक्रमक बीमारियों से बचाने के बारे में बताया गया है।
पर्यवेक्षक रीता चौधरी ने बताया हितग्राहियों और नौनिहालो को स्वच्छ जीवनशैली के प्रति हाथों की साफ-सफाई और पोषण पर जागरूक करना आवश्यक है। हाथों को धोने से कई तरह के संक्रामक बीमारियों से बच सकते हैं। बच्चों को हैंड वॉशिंग की आदत कम उम्र से शुरू कर देना चाहिए, ताकि वह संक्रमण से बचे रहें। हाथों की साफ-सफाई की शुरुआत घर से ही करनी चाहिए। जब घर के बड़े लोग स्वच्छता की आदतों की शुरुआत करते हैं, तो बच्चे भी इसका अनुसरण करते हैं।
भारतीय संस्कृति में विशेष रूप से हाथ से ही खाना खाने की संस्कृति है इसलियें खाना खाने से पहले ओर शौच के बाद उचित ढंग से हाथ की सफाई अति आवश्यक है । कोविड-19 के सक्रमंण काल में डिजिटल माध्यमों का उपयोग ज़्यादा किया जा रहा है ।
सेक्टर गुढ़ियारी के अंतर्गत समस्त केंद्रों में विश्व हाथ धुलाई दिवस मनाया गया जिसमें 20 सेकेंड तक हाथ धोकर समस्त हितग्राही तक जानकारी वीडियो किल्प से पहुंचाया गया । किशोरी बालिका मितानिन कार्यकर्ता एवं सहायिका कार्यक्रम में सम्मिलित हुई । विश्व हाथ धुलाई दिवस के संदेश को डिजिटल माध्यम से व्हाट्सएप द्वारा कार्यकर्ताओं ने हितग्राहियों तक मैसेज कर के दिया । वैश्विक कोरोना संक्रमण काल में शारीरिक दूरी रखते हुए कार्यक्रम को संपादित किया है साथ ही हाथ धुलाई में भी इसका विशेष ध्यान दिया गया ।आंगनबाड़ी केंद्र ज्योतिबा नगरगुढ़ियारी सेक्टर की समस्त कार्यकर्ताओं ने बहुत ही उत्साह से हैंडवाशिंग डे मनाया ज्योतिबा नगर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी तिवारी जी ने किशोरी बालिकाओं से बहुत सुंदर रंगोली बनाकर स्वच्छ जीवनशैली का संदेश भी दिया गया है ।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार पांडेय ने बतायावैश्विक महामारीकोविड-19 से बचाव में साफ सफाईमहत्वपूर्णहिस्सा है, इसलिए जिले की समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ग्लोबल हैंडवाशिंग दिवस मनाया गया ।आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ग्लोबल हैंड वाशिंग डे पर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए विडियो क्लिप के माध्यम से हाथ धुलाई के साथ साथ स्वच्छता कासंदेश भी दिया ।
हाथ न धोने से होने वाली बीमारियाँ
दस्त, श्वसन संक्रमण, टाइफाइड, निमोनिया, पेट संबंधी रोग, पीलिया, आँख की बीमारी,हैजा,त्वचा संबंधी रोग हो सकते है ।
हाथ धोना कब-कब जरूरी
शौच के बाद,खाना बनाने और खाने से पहले, साफ-सफाई करने के बाद, पालतू जानवरों और खेलने के बाद, किसी बीमार व्यक्ति से मिलकर आने के बाद।छींक,खांसी, बागवानी के बाद हाथ जरुर धोना चाहिये।

Rajshekhar Nair

प्रदेश में 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक रक्तदान पखवाड़ा मनाया गया। इसके अंतर्गत रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

यहाँ ओम साईं रक्तदाता सेवार्थ समिति की ओर से रवि साहू की स्मृति में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में महिलाओं द्वारा भी बढ चढकर रक्तदान किया गया। समिति के अध्यक्ष किरण साहू ने कहा रक्तदान का उद्देश्य जरुरतमंद मरीजों की सहायता करना एवं रक्तदान करने के प्रति लोगों को जागरूक करना है। रक्तदान करना महान कार्य है, इसे नियमित अंतराल पर करना चाहिए क्योंकि ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और नही इसका कोई विकल्प है।

सिविल सर्जन डॉ.आर.के.तिवारी, ने बताया की ज़िले में चल रहे रक्तदान पखवाडे में दानदाताओं को रक्तदान उपरांत रक्तदाता को सर्टिफिकेट, उपहार स्वरुप मास्क एवं ग्लब्स प्रदान किये गए । रक्तदान पखवाड़ा में दो गज दूरी, मास्क एवं सैनीटाइज़ेशन पर विशेष व्यवस्था बनाए रखते हुए रक्तदान का कार्य किया गया । इस दौरान शिविर में 17 लोगों ने रक्तदान किया ।
रक्तदान करने पंहुची दीक्षा चौबे ने बताया वह पहले भी रक्तदान कर चुकी है । रक्तदान कर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। ``रक्तदान में आप सभी भाग लेकर रक्तदान कर सकते है। रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को भी युवा साथियों के बीच दूर करना और रक्तदान के प्रति अधिक से अधिक लोगों को जागरुक करने आगे आना चाहिए । एक स्वस्थ व्यक्ति 18 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक रक्तदान कर सकता है तो फिर हम युवा क्यों पीछे रहें । एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान कई जरूरतमंद लोगों को मदद करता है,’’ दीक्षा ने बताया ।
रक्तदान के है कई फायदे
रक्तदान से हार्ट अटैक की संभावनाएं कम होती हैं। आयरन की मात्रा को बैलेंस करने से लिवर हेल्दी बनता है और कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है। रक्तदान का एक फायदा यह भी है कि रक्तदान करते समय 7 तरह के टेस्ट किए जाते हैं।अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है तो उसका भी पता चल जाता है।

कौन कर सकता है रक्तदान
रक्तदान करने के लिए रक्तदाता की उम्र 18 से 66 साल के बीच होनी चाहिए जिसका वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो। शारीरिक रूप से सेहतमंद होना भी जरूरी है। खून में हीमोग्लोबिन का स्तर 12.5 जी/डीएल या इससे ऊपर होनी चाहिए। रक्तदान करने के 24 घंटे पहले शराब, धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन नही किया गया हो। रक्तदान करने वाले व्यक्ति को ब्लड प्रेशर, कैंसर, एड्स जैसी बीमारी नही होनी चाहिए। एक सेहतमंद व्यक्ति हर 3 महीने में रक्तदान कर सकता है।

रक्तदान शिविर में जिला अस्पताल रायपुर के डॉ आर.के सक्सेना,डॉ पी. के गुप्ता(आर.एम.ओ),डॉ एस. के भंडारी, डॉ अनुरीता सिंह, डॉ पी.महिश्वर पैथोलॉजिस्ट ,डॉ.एम.वानखेड़े, डॉ.एस.साहू, डॉ.एन.के.ओझा कंसलटेंट, स्टाफ नर्स श्रीमति पार्वती साहू, प्रार्थना छत्रे, दीप्ती ठाकुर, लैब टेक्नोलॉजिस्ट रिंकू सिंह,श्रीकांत सोनी उपस्थित रहे शिविर का आयोजन एम.वासुदेव राव, सुनील भारद्वाज,एम आशीष कुमार, के सौजन्य से हुआ जिसमें कार्यकारिणी सदस्य छाया सिंह का रक्तदान शिविर को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा ।
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