September 09, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    *चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि*

    रायपुर ।  छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।

    योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

    योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।

    योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।

    प्रविष्टियां भेजने का पता -

    संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,

    द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) - 492018

     प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।

    मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।

    *संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘विभागीय आयोजन 2026’ की श्रृंखला में चार दिवस होगा विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, मुक्ताकाशी मंच पर सजेगी कला और संगीत की सुरमयी शाम*

    रायपुर, 18 अगस्त 2026। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कला, संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘विभागीय आयोजन 2026’ की श्रृंखला के अंतर्गत विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘पावस प्रसंग’ का आयोजन किया जा रहा है। वर्षा ऋतु की सौंदर्यपूर्ण अनुभूतियों और भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा को केंद्र में रखकर आयोजित यह कार्यक्रम 21, 22, 24 एवं 25 अगस्त को रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा।

    ‘पावस प्रसंग’ में वर्षा ऋतु की प्राकृतिक सुंदरता, उमंग, उल्लास और संवेदनाओं को शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाएगा। भारतीय कला परंपरा में वर्षा ऋतु का विशेष महत्व रहा है। बादलों की गड़गड़ाहट, वर्षा की रिमझिम, प्रकृति में नवजीवन का संचार और मन में जागृत होने वाले विविध भावों को कलाकार अपनी नृत्य मुद्राओं, भावाभिव्यक्ति और सुरों के माध्यम से जीवंत करते हैं। इसी समृद्ध सांस्कृतिक भावभूमि को ‘पावस प्रसंग’ के माध्यम से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

    संस्कृति विभाग की इस पहल का उद्देश्य शास्त्रीय कला विधाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही आमजन को उच्चस्तरीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जोड़ना है। मुक्ताकाशी मंच का वातावरण इन प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा, जहां दर्शक भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों का आनंद ले सकेंगे।

    ‘पावस प्रसंग’ वर्षा ऋतु की सांस्कृतिक और कलात्मक अनुभूति को केंद्र में रखकर आयोजित होने वाला विशेष आयोजन है। इसमें प्रकृति और मानवीय भावनाओं के बीच के गहरे संबंध को कला के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण मुद्राओं और संगीत की मधुर स्वर-लहरियों के माध्यम से वर्षा के विभिन्न रंगों और संवेदनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।

    संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित की जा रही विभागीय आयोजनों की श्रृंखला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ सहित देश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मंच प्रदान करना तथा कलाकारों और दर्शकों के बीच जीवंत सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है। इसी कड़ी में ‘पावस प्रसंग’ शास्त्रीय कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

    *संस्कृति और कला प्रेमियों से सहभागिता का आह्वान*

    संस्कृति विभाग ने कला एवं संस्कृति प्रेमियों से ‘पावस प्रसंग’ में सहभागी बनने का आह्वान किया है। चार दिनों तक आयोजित होने वाला यह सांस्कृतिक आयोजन रायपुर में वर्षा ऋतु की प्राकृतिक अनुभूति को भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए कला प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव प्रस्तुत करेगा।

    रायपुर /छत्तीसगढ़ में पर्यावरण, प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 14 से 16 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय 'हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026' का भव्य आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक धरोहर व परिंदों की दुनिया को सहेजना, पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देना और इको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना हैl वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मार्गदर्शन तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में यह आयोजन पूरे प्रदेश में व्यापक जनभागीदारी के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

    *प्रकृति, संस्कृति और नागरिक विज्ञान का अनोखा संगम*

           हरेली बर्ड फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य केवल पक्षियों की गणना करना ही नहीं, बल्कि नागरिक विज्ञान (Citizen Science) के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पक्षी विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करना था। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व हरेली के अवसर पर आयोजित इस अभियान ने स्थानीय लोगों, छात्रों और प्रकृति प्रेमियों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एकजुट किया।

    *33 जिलों में 45 बर्ड वॉक और 1,000 से अधिक प्रतिभागी*

           इस तीन दिवसीय अभियान के दौरान राज्य के सभी 33 जिलों में पक्षी अवलोकन गतिविधियों का आयोजन किया गया।

     *व्यापक सहभागिता*

            अभियान में 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और प्रदेश भर में कुल 45 'बर्ड वॉक' आयोजित किए गए।

     *विविध स्थल* 

           कोपरा जलाशय (रामसर साइट), चिच्छा वेटलैंड, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, अचानकमार टाइगर रिजर्व और नंदनवन जंगल सफारी सहित कई महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) और वन क्षेत्रों में सर्वे किया गयाl नंदनवन जंगल सफारी (नवा रायपुर) में दिव्यांगजनों के लिए विशेष 'बर्ड वॉक' का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    *954 चेकलिस्ट और 211 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड*

             नागरिक विज्ञान मंच eBird के माध्यम से राज्य भर से एकत्र किए गए आंकड़ों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध पक्षी विविधता सामने आई है। 3 दिनों में कुल 954 eBird Checklists के जरिए 211 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया।

     *प्रमुख पक्षी प्रजातियां* 

            सर्वे के दौरान पेंटेड स्टॉर्क (Painted Stork), रेड-नेप्ड आइबिस (Red-naped Ibis), कॉटन पिग्मी-गूज (Cotton Pygmy-Goose), इंडियन पैराडाइज-फ्लाईकैचर (Indian Paradise- Flycatcher) और ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो (Greater Racket-tailed Drongo) जैसी कई दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण प्रजातियां देखी गईं।

    *महिला समूहों और आजीविका से जुड़ाव*

             यह अभियान केवल पक्षी अवलोकन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे स्थानीय समुदायों और आजीविका से भी जोड़ा गया। रायपुर जिले की ग्राम पंचायत मांढर के अड़बंधा तालाब में आयोजित कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। यहाँ कलश स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित 'फूड कार्ट' स्थानीय समुदाय की पहल और आजीविका- संरक्षण के सुंदर समन्वय का उदाहरण बना।

    *भविष्य के संरक्षण प्रयासों को मिलेगी मजबूती*

              इस सफल आयोजन के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य में राज्य की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की नियमित निगरानी, 'पक्षी मित्र' नेटवर्क को मजबूत करने तथा स्कूलों एवं समुदायों के स्तर पर पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा।

    मृत्युंजय प्रसाद पटेल के सामने चुनौती—क्या दुर्ग RTO में वर्षों से जमे अधिकारी-कर्मचारियों पर लागू होगा शासन का डेस्क रोटेशन और तबादला नियम?

    दुर्ग। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए लंबे समय से एक ही स्थान, पद या पटल पर जमे अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यभार में बदलाव और आवश्यकतानुसार तबादले की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में अब सवाल दुर्ग RTO की कार्यप्रणाली को लेकर भी उठने लगे हैं।

    दुर्ग RTO में कथित तौर पर कई अधिकारी-कर्मचारी ऐसे हैं, जो तीन वर्ष ही नहीं बल्कि छह, दस और बारह वर्ष से भी अधिक समय से एक ही विभाग में कार्यरत बताए जा रहे हैं। यदि यह स्थिति दस्तावेजी जांच में सही पाई जाती है तो यह शासन की रोटेशन नीति और प्रशासनिक पारदर्शिता के उद्देश्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

    क्या दुर्ग RTO में लागू होगा ‘3 साल’ का सिद्धांत?

    शासन की ओर से लंबे समय तक एक ही पटल अथवा कार्यस्थल पर पदस्थ रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के संबंध में डेस्क रोटेशन एवं स्थानांतरण की नीति का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना और किसी एक व्यक्ति के लंबे समय तक एक ही संवेदनशील कार्य से जुड़े रहने की संभावित विसंगतियों को रोकना है।

    लेकिन जमीनी स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या यह व्यवस्था सभी विभागों और कार्यालयों में समान रूप से लागू हो रही है?

    दुर्ग RTO को लेकर चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि विभाग में लंबे समय से पदस्थ बताए जा रहे कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा अब आवश्यक नजर आती है। आखिर कौन कर्मचारी कितने वर्षों से दुर्ग RTO में पदस्थ है, किस पटल पर कार्यरत है और क्या वह शासन द्वारा निर्धारित रोटेशन व्यवस्था के दायरे में आता है—इन तमाम बिंदुओं की विभागीय जांच ही स्थिति को स्पष्ट कर सकती है।

    मृत्युंजय प्रसाद पटेल के सामने बड़ी जिम्मेदारी

    वर्तमान में दुर्ग RTO की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल के सामने अब बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। यदि विभाग में ऐसे अधिकारी-कर्मचारी वास्तव में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, तो उनकी सेवा अवधि, पदस्थापना, कार्य-पटल और रोटेशन की स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

    यह केवल तबादले का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन के निर्देशों के पालन से जुड़ा विषय है।

    सवाल यह भी है कि क्या दुर्ग RTO अपने स्तर पर ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर उच्च विभाग को भेजेगा, जिन्होंने निर्धारित अवधि से अधिक समय एक ही स्थान अथवा पटल पर पूरा कर लिया है?

    ‘सुशासन’ की कसौटी पर होगी व्यवस्था की परीक्षा

    प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की बात कर रही है। ऐसे में शासन के निर्देशों का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका पालन सरकारी कार्यालयों के जमीनी स्तर पर भी नजर आए।

    यदि किसी कर्मचारी की लंबे समय तक एक ही कार्यालय अथवा संवेदनशील पटल पर पदस्थापना नियमों के अनुरूप है, तो विभाग को उसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि रोटेशन या स्थानांतरण अपेक्षित है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    दुर्ग RTO में अब सूची और कार्रवाई का इंतजार

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुर्ग RTO अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल क्या वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कराएंगे?

    क्या विभाग यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करेगा कि दुर्ग RTO में कौन-कौन से अधिकारी-कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय से पदस्थ हैं और किन कर्मचारियों का डेस्क रोटेशन या स्थानांतरण किया जाना प्रस्तावित है?

    या फिर शासन का यह निर्देश भी सरकारी फाइलों तक सीमित रह जाएगा?

    दुर्ग RTO की कार्यप्रणाली पर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब शासन की रोटेशन नीति अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक परीक्षा बन गई है। आने वाला समय बताएगा कि विभाग शासन के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करता है और वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारियों के मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।

    फिलहाल निगाहें दुर्ग RTO कार्यालय और उच्च परिवहन विभाग पर हैं—क्या ‘3 साल’ की नीति वास्तव में जमीन पर उतरेगी, या लंबे समय से जमे अधिकारी-कर्मचारियों की स्थिति जस की तस बनी रहेगी?

    संपादकीय सावधानी: लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों की अवधि और शासन के आदेश की लागू शर्तों की आधिकारिक सूची/आदेश से पुष्टि किया जाना आवश्यक है। संबंधित अधिकारी या विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।

    बाढ़ और रासायनिक दुर्घटना की आपात स्थिति से निपटने 20 अगस्त को होगा मॉक अभ्यास

     

    दुर्ग, 18 अगस्त 2026 / जिले में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने और नागरिकों को आपदा की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 20 अगस्त 2026 गुरुवार को बाढ़ के कारण उत्पन्न रासायनिक दुर्घटना की स्थिति पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई है। यह मॉक ड्रिल सुबह 10 बजे भिलाई इस्पात संयंत्र, भिलाई में आयोजित होगी।

    राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभ्यास के माध्यम से बाढ़ एवं उससे उत्पन्न रासायनिक दुर्घटना जैसी आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारियों, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मॉक ड्रिल के दौरान शांति बनाए रखें और किसी भी प्रकार की घबराहट न करें। यह केवल आपदा प्रबंधन की तैयारियों का परीक्षण करने के लिए आयोजित प्रशिक्षण अभ्यास है। नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें तथा किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करें।

    प्रशासन ने नागरिकों से मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने की अपील की है। नागरिकों का सहयोग इस अभ्यास को सफल बनाने के साथ-साथ वास्तविक आपदा की स्थिति में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

     

    ःः000ःः

    दुर्ग  / मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। एनआईसी दुर्ग से कलेक्‍टर श्री अभिजीत सिंह, वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री ए.के. भट्टाचार्य सहित अन्‍य जिला प्रमुख अधिकारी बैठक में जुड़े थे। 

    *बैठक के मुख्य बिंदु एवं निर्देश*

           दुर्घटना में घायलों का इलाज प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 108 एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता की सख्त मॉनिटरिंग और ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिकों (गुड सेमेरिटन) को यथाशीघ्र प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

    *दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने निर्देश*

           अधिक दुर्घटना वाले 8 जिलों पर विशेष फोकस किया गया, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा और जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

    *दुर्घटनाओं में कमी लाने सड़क निर्माण के पूर्व ही डिजाइन सही बनाएं*

            ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं विश्लेषण के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट्स में समय-सीमा के भीतर सुधार करने और सुधार के बाद दुर्घटनाओं में आई कमी का विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने जोर दिया कि बाद में सुधार करने से बेहतर है कि सड़कों की शुरुआती डिजाइन ही सही हो। सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

    *युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को यातायात जागरूकता से जोड़े*

            सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों में रोड क्लब गठित करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सुगम यातायात प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बनी रहे। सभी जिलों के कलेक्टरों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। बैठक की शुरुआत में परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। 

     

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    दुर्ग। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दुर्ग नगर पालिक निगम को नया आयुक्त मिल गया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी प्रशासनिक फेरबदल के आदेश में IAS अधिकारी लीना कोसम (IAS-2020) को अस्थायी रूप से आयुक्त, नगर पालिक निगम दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है। लीना कोसम वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थीं।

    दुर्ग नगर निगम के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि निगम के इतिहास में पहली बार किसी IAS अधिकारी को आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में नई आयुक्त के सामने निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने के साथ-साथ शहर के विकास कार्यों, कर्मचारियों से जुड़े मामलों और जनसुविधाओं को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

    एक महीने से प्रभारी आयुक्त के भरोसे था निगम

    गौरतलब है कि पिछले करीब एक महीने से दुर्ग नगर निगम में आयुक्त का नियमित पद खाली था और उप आयुक्त मोहन साहू प्रभारी आयुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नियमित आयुक्त की अनुपस्थिति के चलते निगम के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों और निर्णयों को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

    इसी दौरान निगम कर्मचारियों को भी वेतन सहित विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। पिछले दिनों महापौर स्तर से किए गए प्रयासों के बाद कर्मचारियों को वेतन मिल पाया था। ऐसे माहौल में अब नियमित आयुक्त की नियुक्ति से निगम के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    IAS अधिकारी की नियुक्ति से बढ़ी जवाबदेही की उम्मीद

    दुर्ग नगर निगम क्षेत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का निवास एवं विधानसभा क्षेत्र आता है। वहीं भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय का निवास भी निगम क्षेत्र में है। इसके अलावा दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर तथा अहिवारा क्षेत्र के विधायक एवं दर्जा प्राप्त मंत्री डोमनलाल कोरसेवाड़ा का भी दुर्ग निगम क्षेत्र से जुड़ाव है।

    ऐसे महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र में पहली बार IAS अधिकारी की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इससे नगर निगम में निर्णय प्रक्रिया, जवाबदेही, विकास कार्यों की निगरानी और जनसमस्याओं के निराकरण को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।

    कर्मचारियों में भी खुशी, अब कामकाज पटरी पर लौटने की उम्मीद

    नए आयुक्त की नियुक्ति की खबर सामने आने के बाद नगर निगम के कर्मचारियों में भी उत्साह देखने को मिला। पिछले एक महीने से नियमित आयुक्त नहीं होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में आ रही दिक्कतों के बीच अब कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई व्यवस्था के साथ लंबित कार्यों को गति मिलेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।

    नगर निगम के सामने शहर की सफाई व्यवस्था, सड़क एवं नाली निर्माण, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, राजस्व वसूली, कर्मचारियों से जुड़े मामले और विभिन्न विकास कार्यों को गति देने जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में IAS अधिकारी की नियुक्ति से निगम प्रशासन में नई कार्यशैली और बेहतर समन्वय की उम्मीद की जा रही है।

    दुर्ग निगम के लिए नए अध्याय की शुरुआत

    लीना कोसम की नियुक्ति को महज प्रशासनिक तबादला नहीं, बल्कि दुर्ग नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि नई आयुक्त निगम की कार्यप्रणाली को किस तरह गति देती हैं और शहर की लंबित समस्याओं तथा विकास कार्यों पर कितनी तेजी से निर्णय लिए जाते हैं।

    लंबे इंतजार के बाद निगम को नियमित आयुक्त मिला है। पहली बार IAS अधिकारी को यह जिम्मेदारी मिलने से दुर्ग शहरवासियों और निगम कर्मचारियों की उम्मीदें अब नई आयुक्त लीना कोसम से जुड़ गई हैं।

    रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए 22 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी आदेश में मंत्रालय से लेकर जिलों तक कई महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही एक भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी की सेवाएं उनके पैतृक वन विभाग को तत्काल प्रभाव से वापस लौटा दी गई हैं।

    इस प्रशासनिक फेरबदल में कई जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं। वहीं नगरीय प्रशासन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जल जीवन मिशन, समाज कल्याण, पर्यटन, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा अन्य महत्वपूर्ण विभागों में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    प्रमुख सचिव स्तर पर बदलाव

    आदेश के अनुसार सोनमणि बोरा (IAS-1999) को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव पद पर अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है। उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

    आर. शंगीता (IAS-2005) को सचिव, मंत्रालय के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं भुवनेश यादव (IAS-2006) को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    नगरीय प्रशासन और जल जीवन मिशन में अहम बदलाव

    नीलेशकुमार महादेव क्षीरसागर (IAS-2011), जो अब तक कांकेर कलेक्टर थे, उन्हें संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास की जिम्मेदारी दी गई है।

    वहीं रिमिजियुस एक्का (IAS-2011) को संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास के पद से हटाकर विशेष सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पद पर पदस्थ किया गया है। उन्हें मिशन संचालक, जल जीवन मिशन का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उनके जल जीवन मिशन का कार्यभार संभालने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मो. कैसर अब्दुलहक इस अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे।

    नागरिक आपूर्ति निगम की जिम्मेदारी भी बदली

    भोसकर विलास संदिपान (IAS-2011), अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ प्रबंध संचालक, नागरिक आपूर्ति निगम का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। भारत निर्वाचन आयोग की सहमति के बाद यह जिम्मेदारी दी गई है।

    उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद इफ्फत आरा नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगी।

    जिलों में बड़े पैमाने पर कलेक्टर बदले

    प्रशासनिक फेरबदल में कई जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं—

    रणबीर शर्मा (IAS-2012) — कलेक्टर, गरियाबंद

    कुंदन कुमार (IAS-2014) — कलेक्टर, कांकेर

    अमृत विकास तोपनो (IAS-2014) — कलेक्टर, मुंगेली

    जयश्री जैन (IAS-2016) — कलेक्टर, सक्ती

    तुलिका प्रजापति (IAS-2016) — कलेक्टर, कबीरधाम

    तनुजा सलाम (IAS-2019) — कलेक्टर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी

    वहीं भगवान सिंह उईके (IAS-2016) को गरियाबंद कलेक्टर पद से हटाकर संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

    गोपाल वर्मा (IAS-2016) को कबीरधाम कलेक्टर के पद से हटाकर संयुक्त सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बनाया गया है।

    दुर्ग नगर निगम को मिली नई आयुक्त

    प्रशासनिक फेरबदल में दुर्ग नगर निगम को भी नया आयुक्त मिला है। आदेश के अनुसार लीना कोसम (IAS-2020), जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर हैं, उन्हें अस्थायी रूप से आयुक्त, नगर पालिक निगम, दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है।

    यह बदलाव दुर्ग नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

    जगदीश सोनकर (IAS-2013) को विशेष सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

    हिना अनिमेष नेताम (IAS-2016) को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ प्रबंध संचालक, अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

    गजेन्द्र सिंह ठाकुर (IAS-2019) को वर्तमान दायित्वों के साथ संचालक, समाज कल्याण का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    रोमा श्रीवास्तव (IAS-2020) को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सरगुजा बनाया गया है।

    आकांक्षा शिक्षा खलखो (IAS-2020) को उप सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग तथा सार्वजनिक उपक्रम विभाग में पदस्थ करते हुए संचालक, खेल एवं युवा कल्याण का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

    सौमिल रंजन चौबे (IAS-2021) को प्रबंध संचालक, पर्यटन मंडल की जिम्मेदारी दी गई है। शासन ने पर्यटन मंडल के इस असंवर्गीय पद को प्रतिष्ठा एवं जिम्मेदारी की दृष्टि से IAS के वरिष्ठ वेतनमान के संवर्गीय पद के समकक्ष घोषित किया है।

    बीरेन्द्र बहादुर पंचभाई (IAS-2021) को अपर कलेक्टर, बिलासपुर के पद पर पदस्थ किया गया है।

    अंत्यावसायी निगम और अन्य विभागों में भी बदलाव

    हिना अनिमेष नेताम को अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि भुवनेश यादव को आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है।

    गजेन्द्र सिंह ठाकुर को समाज कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस प्रकार समाज कल्याण और आदिवासी कल्याण से जुड़े विभागों में भी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया गया है।

    IFS अधिकारी विवेक आचार्य की सेवाएं वन विभाग को वापस

    आदेश के अंतिम बिंदु में विवेक आचार्य (IFS-2006), प्रबंध संचालक, पर्यटन मंडल की सेवाएं उनके पैतृक विभाग वन विभाग को तत्काल प्रभाव से वापस लौटाने का आदेश दिया गया है।

    एक नजर में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

    छत्तीसगढ़ शासन के इस आदेश में प्रमुख सचिव से लेकर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत CEO और विभिन्न विभागों के संचालक स्तर तक व्यापक बदलाव किए गए हैं। खास तौर पर नगरीय प्रशासन, जल जीवन मिशन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, समाज कल्याण, पर्यटन और जिला प्रशासन में हुए फेरबदल से प्रशासनिक कामकाज की नई जिम्मेदारी तय हुई है।

    सामान्य प्रशासन विभाग का यह आदेश 18 अगस्त 2026 को जारी किया गया है और अधिकांश पदस्थापनाएं “आगामी आदेश पर्यन्त” अस्थायी रूप से प्रभावी रहेंगी।

    - कृषकों की तरफ से मांग आने पर जलाशयों से सिंचाई पानी छोड़ा जाए
    - संभाग आयुक्त ने ली संभाग स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक

    दुर्ग / शौर्यपथ / संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर ने कहा कि संभाग अंतर्गत जिलों के सभी ड्राई नलकूप में वॉटर लेवल बढ़ाने हेतु रिचार्ज सोकपीट बनायी जाए। इस हेतु ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा के द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव के आधार पर पीएचई विभाग द्वारा जिलों के ड्राई नलकूप की संख्यात्मक जानकारी के साथ आवश्यक पहल की जाए। इसी प्रकार वर्षा जल को संरक्षित करने सभी आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने अधीक्षक अभियंता लोक निर्माण विभाग को संभाग अंतर्गत सभी जिलों में पूर्व निर्मित एवं निर्माणाधीन शासकीय भवनों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्यतः लगवाने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित करने कहा।
    संभाग आयुक्त राठौर ने आज संभाग कार्यालय के सभाकक्ष में संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठक में विभागीय काम-काज की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशानुरूप संभाग के सभी जिलों के विकासखण्ड, तहसील एवं जिला स्तरीय कार्यालयों में कार्यालयीन कार्य, फाईल मूवमेंट, ई-ऑफिस प्रक्रिया के तहत ही हो, यह सुनिश्चित किया जाए। इस पारदर्शी व्यवस्था से कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। संभाग आयुक्त ने कहा कि अधीनस्थ कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति पर विशेष ध्यान दें। प्रति सप्ताह उपस्थिति पत्रक की जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने सीएम हेल्पलाईन में विभागों को प्राप्त शिकायतों की जानकारी लेते हुए निर्धारित समयावधि के भीतर विभागीय शिकायतें निराकृत करने के निर्देश दिये। संभागायुक्त ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से नशा-मुक्ति अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु नुक्कड़ नाटक, रैली आदि कार्यक्रम निरंतर जारी रखने उन्होंने संयुक्त संचालक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी को संबंधित विभागों के समन्वय से नशा-मुक्ति अभियान क्रम जारी रखने के निर्देश दिये।
    संभाग आयुक्त राठौर ने सी.जी.एम.एस.सी. के माध्यम से चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी ली तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बातें कही। उन्होंने निर्माण कार्य एजेंसी विभाग के अधिकारियों को विभागीय निर्माण कार्यों की औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिये। संभाग आयुक्त श्री राठौर ने संभाग अंतर्गत जलाशयों में जल भराव की जानकारी ली। साथ ही अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग से कहा कि किसानों की तरफ से मांग आने पर सिंचाई हेतु जलाशयों से पानी छोड़ा जाए। खरीफ फसल बोनी की समीक्षा के दौरान संयुक्त संचालक कृषि ने बताया कि संभाग के जिलों में खरीफ धान, मक्का, कोदो, कुक्की, रॉगी, ज्वार एवं अन्य फसलों की 100 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इसी प्रकार अरहर, मुंग, उड़द, कुल्थी एवं अन्य दहलन फसलों की 93 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। नियमित बारिश की वजह से संभाग अंतर्गत 16.45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में बियासी कार्य किसानों द्वारा पूर्ण कर लिया गया है। बैठक में उपायुक्त पदुम लाल यादव और संतोष ठाकुर सहित सभी विभाग के संभाग स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

    चिखली में रात 10 बजे सनसनीखेज वारदात से मचा हड़कंप, दो आरोपी अभिरक्षा में, दो फरार; व्यस्त इलाके में घर के भीतर हत्या से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    मृणेन्द्र चौबे
    राजनांदगांव/शौर्यपथ। शहर के चिखली इलाके में रविवार 16 अगस्त की रात एक सनसनीखेज हत्या की वारदात ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। देशमुख चौक के पास स्थित अपने घर में सत्यजीत देशमुख की हत्या कर दी गई। मृतक पूर्व महापौर श्रीमती हेमा देशमुख के देवर बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी में हत्या के पीछे कुछ दिन पहले हुआ विवाद और पुरानी रंजिश सामने आ रही है। रात करीब 10 से 10.30 बजे के बीच हुई इस वारदात के बाद इलाके में दहशत फैल गई और देर रात तक घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जुटी रही।

    कुछ दिन पहले हुआ विवाद बना हत्या की वजह!

    स्थानीय लोगों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले सत्यजीत देशमुख का कुछ युवकों के साथ विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद तनाव बढ़ता गया और रविवार रात आरोपियों ने कथित तौर पर उनके घर पहुंचकर हमला कर दिया। हमले में सत्यजीत देशमुख की मौत हो गई।

    स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, वारदात में करीब चार युवकों के शामिल होने की बात कही जा रही है। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को अभिरक्षा में लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों के फरार होने की जानकारी सामने आई है।

    धारा 103(1), 332(a), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज

    पुलिस के अनुसार, 16 अगस्त की रात्रि चिखली चौकी अंतर्गत देशमुख चौक के पास पुराने विवाद को लेकर सत्यजीत देशमुख की उनके घर में हत्या के मामले में धारा 103(1), 332(a), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बबलू साहू उर्फ बल्ला एवं एक विधि संघर्षरत बालक को अभिरक्षा में लिया है। दोनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    वहीं वारदात में शामिल बताए जा रहे दो अन्य आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश और पतासाजी कर रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई जारी है।

    व्यस्त चौक के पास घर में हत्या, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

    इस सनसनीखेज वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या ऐसी जगह हुई, जो देशमुख चौक जैसे व्यस्त इलाके के समीप है। घटना का समय भी रात करीब 10 बजे का बताया जा रहा है, जब क्षेत्र में आमतौर पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। खास बात यह है कि इसी क्षेत्र में पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग प्वाइंट भी लगाया जाता है।

    इसके बावजूद घर में घुसकर हत्या जैसी गंभीर वारदात का सामने आना पुलिस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर व्यस्त इलाके में संदिग्धों की गतिविधियों की भनक क्यों नहीं लगी और आरोपी किस तरह घर तक पहुंचे—यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

    घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। देर रात तक घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जमा रही। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और अब वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।

    पुरानी रंजिश, विवाद की वजह और हत्या की पूरी कड़ी खंगाल रही पुलिस

    पुलिस हत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। प्रारंभिक तौर पर पुराना विवाद और आपसी रंजिश घटना से जुड़ी होने की आशंका है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मृतक और आरोपियों के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ था, विवाद के बाद घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा और हत्या की वारदात को किसने तथा किस भूमिका में अंजाम दिया।

    फिलहाल एक आरोपी और एक विधि संघर्षरत बालक पुलिस की अभिरक्षा में हैं, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस जांच के आगे बढ़ने के बाद ही हत्या की असली वजह, वारदात की पूरी कड़ी और सभी आरोपियों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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