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May 25, 2026
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10 साल ,सहायक ग्रेट 3 की नौकरी ,करोड़ की संपत्ति ,दुर्ग निगम में चर्चा का बाज़ार गर्म Featured

  • rounak group

दुर्ग। शौर्यपथ । आज के इस कंपटीशन के दुनिया में अगर पैसा कमाना हो तो व्यापार ही एक ऐसा जरिया है जहां रातों-रात लखपति से करोड़पति बन जा सकता है परंतु अगर सरकारी कर्मचारियों के साथ ऐसा हो तो चर्चा होना लाजमी है कुछ ऐसा ही हाल वर्तमान समय में दुर्ग नगर पालिका निगम परिसर में बड़ी तेजी से चल रहा है दुर्ग नगर पालिका के एक कर्मचारी जो 10 साल पहले नौकरी पर लगे कि उनकी नौकरी से सहायक ग्रेड 3 की तक का सफर तय करने वाले कर्मचारी के पास लाखों रुपए की गाड़ी और लाखों रुपए के सुसज्जित मकान का होना नगर निगम में चर्चा का विषय है . 5-6 साल तक कि उनकी नौकरी करने के बाद प्रमोशन हुए दो-तीन साल ही हुए हैं ऐसे में 25 से ?30000 की वेतन पाने वाले कर्मचारी के पास अगर लाखों रुपए के कीमत के वाहन के साथ-साथ लाखों रुपए के सुसज्जित मकान एवं लाखों रुपया विवाह में खर्च करना कहीं ना कहीं चर्चा का विषय बनना लाजमी भी है.
  निगम के कई कर्मचारियों का कहना है कि हमें सालों हो गए नौकरी करते हुए और वेतन 40 से 50000 होने के बाद भी पैतृक आवास को सुसज्जित करने में एवं महीने का खर्च चलाने में कई तरह के परेशानियों का सामना करना पड़ता है ऐसे में यह कैसा कार्य जो लाखों रुपया का ऐसो आराम का साधन खरीदने का रास्ता दिखा रहा है .निगम की नौकरी में इस तरह से देखते ही देखते करोड़ की संपत्ति कैसे बन गई इस बात पर भी चर्चा उक्त कर्मचारी के वह पड़ोसी पड़ोसी कर रहे हैं जो सालों से उनके निवास के आसपास रहते हैं कई कर्मचारियों को अपने नाम ना बताने के शर्त पर कहा कि चाहे गैस की टंकी हो , राशन हो या फिर चाहे फर्नीचर का सामान हर सामान की होम डिलीवरी होती है वहीं जानकारों का कहना है कि उक्त कर्मचारी की पैतृक संपत्ति भी उतनी नहीं की लाखों रुपए के वाहन और भव्य आलीशान मकान बनाने में अभिभावक लाखों की मदद करें वहीं कई कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जिला प्रशासन इस बात की तरफ ध्यान नहीं देता कि अचानक एक कर्मचारी के पास लाखों करोड़ों रुपया कहां से आ गए ?
  बड़ा सवाल यह है कि चर्चा में आए हुए कर्मचारी में शैक्षणिक योग्यता तो कूट-कूट कर भरी है परंतु शासकीय नौकरी में तरक्की तय समय अनुसार ही होती है और वेतनमान भी तय समयानुसार  ही बढ़ता है ऐसे में कई महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी निभाने का परितोष तो नहीं मिल रहा अगर ऐसा है तो इस बात की जांच प्रशासन के जिम्मेदार विभाग को करनी चाहिए । हाल ही में प्रदेश के विष्णु देव साय सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में कई कदम उठाए हैं ऐसे में हाल ही में हुए इस घटनाक्रम ने कई तरह के संदेशों को तो जन्म दिया है और यह सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि क्या साय सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग की पहल दुर्ग नगर निगम के ऐसे कर्मचारियों अधिकारियों पर भी होगी जो पद और योग्यता से कई गुना ज्यादा संपत्ति अर्जित कर चुके हैं चर्चाओं का बाजार गर्म है सरकार कब  संज्ञान लेती है यह तो समय ही बताया परंतु वर्तमान में दुर्ग नगर निगम में अभी यही चर्चा जोरों पर है कि लाखों करोड़ों रुपए की संपत्ति कम समय के नौकरी में कैसे अर्जित की गई ?

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