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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

मुंबई / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्‍टर कंगना रनौत की मुंबई को लेकर किए गए कमेंट का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. कंगना के इस कमेंट पर शिवसेना हमलावर बनी हुई है, राज्‍य के गृह मंत्री अनिल देशमुख की ओर से तीखी प्रतिक्रिेया सामने आ चुकी है. देशमुख ने कहा था कि शुक्रवार को कहा कि यदि कंगना यहां असुरक्षित महसूस करती हैं तो उन्‍हें यहां पर रुकने का कोई अधिकार नहीं है. देशमुख के इस बयान के बाद शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाइक ने भी सोमवार इस मसले पर टिप्‍पणी करते हुए कंगना पर कार्रवाई की मांग की.
प्रताप सरनाइक ने कंगना के कमेंट पर रिएक्‍शन देते हुए कहा, 'आज मैंने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि मुम्बई और महाराष्ट्र की तुलना पा‍क अधिकृत कश्‍मीर से करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए. अगले 24 घंटों में इस पर इन्क्वायरी पूरी की जाएगी. उन्‍होंने कहा,'केंद्र सरकार का महाराष्ट्र पर कितना प्यार है..महिला आयोग को भी उत्तर प्रदेश, बिहार में होने वाले बलात्कार को नहीं दिखते हैं.. आज सुनने आया है कि कंगना को Y सिक्‍युरिटी दी गई है.. आज भी शायद इन्हें मुम्बई पुलिस पर भरोसा नहीं है.. हमारी पुलिस लगातार काम कर रहे हैं, कई कोरोना के वजह से मर गए हैं.. फिर भी इन्हें उनपर भरोसा नहीं है. अगर कल महाराष्ट्र सरकार दाऊद के खिलाफ बोलेगी तो केंद्र सरकार शायद दाऊद को भी सुरक्षा देगी, इन्हें महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ रहना है.'
गौरतलब है कि कंगना अपने मुंबई वाले ट्वीट को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं. एक्ट्रेस ने शिवसेना नेता संजय राउत के बयान पर जवाब देते हुए ट्वीट किया था. दरअसल, शिवसेना नेता संजय राउत ने कंगना पर मुंबई पुलिस का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उन्हें मुंबई वापस न लौटने की सलाह दी थी. इस पर कंगना रनौत ने कहा था कि मुंबई पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जैसा क्यों महसूस हो रही है. इस कमेंट को लेकर कंगना की कई बॉलीवुड सितारों ने भी आलोचना की है.

नई दिल्ली /शौर्यपथ / भारतीय सेना और लेह में तिब्बती समुदाय के लोगों ने सोमवार को तिब्बती जवान नीमा तेन्जिन को अंतिम विदाई दी. तेन्जिन कभी गुप्त समूह रहे स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के कमांडो थे. यह फोर्स भारतीय सेना के अंडर में ऑपरेट में काम करती है. अगस्त के आखिरी महीने में नीमा तेन्जिन दक्षिणी पैंगॉन्ग में एक पुराने लैंडमाइन की चपेट में आ गए थे, जिससे हुए धमाके में उनकी जान चली गई थी.
उनके अंतिम संस्कार में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के महासचिव राम माधव शामिल हुए. उन्होंने इस दौरान की तस्वीरें शेयर कर एक ट्वीट भी किया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया. हालांकि, पिछले हफ्ते ही चीन और भारत के बीच हुई एक और झड़प के बाद बीजेपी नेता का तिब्बती जवान की अंतिम विदाई में शामिल होने को चीन को कड़े जवाब के रूप में देखा जा रहा है.
बता दें कि स्पेशल फ्रंटियर फोर्स दलाई लामा, तिब्बती और भारतीय झंडे से अपनी प्रतिबद्धता रखता है. यह फोर्स पहाड़ी युद्धों की विशेषज्ञ है और तिब्बत में दुश्मनों के बीच में ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित है.
तिब्बती सैनिक नीमा तेन्जिंग के जान गंवाने के बाद इस प्रतिष्ठित लेकिन बहुत आम जानकारी से बहुत दूर रहने वाले ऊंचाइयों पर लड़ने वाले इन योद्धाओं की थोड़ी झलकियां सामने आई हैं. फोर्स अधिकतर तिब्बती शरणार्थियों को भर्ती करती है, जो 1959 में विफल रहे बगावत के बाद दलाई लामा के भारत में शरण लेने के बाद से भारत आ गए थे. बाकी कुछ भारतीय नागरिक हैं.
1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद इस कोवर्ट फोर्स का संगठन किया गया था. हालांकि, इस फोर्स के बारे में बहुत जानकारी सार्वजनिक नहीं है. अनुमान है कि इस फोर्स में 3,500 पुरुष सैनिक हैं.
बता दें कि पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने बताया था कि चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख के पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर दो बार 'आक्रामक सैन्य गतिविधियां' की थीं, लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें पीछे खदेड़ दिया था.

   शौर्यपथ / किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए व्यवहार प्रमुख आधार होता है। कद-काठी या रंग-रूप का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन एक हालिया अध्ययन की मानें तो थोड़ी मोटी काया वाले पुरुष बेहतर पिता साबित होते हैं। उन्हें बेहतर अभिभावकीय क्षमता वाला आंका जाता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक अभिभावक के तौर ऐसे पुरुष बच्चों से दुबली कद-काठी वाले पिताओं की तुलना में बेहतर रूप से पेश आते हैं। वहीं अध्ययन में गठीले बदन वाले पिताओं की अभिभावकीय क्षमताओं को नकारात्मक तौर पर आंका गया। द टाइम्स में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक लोग पुरुषों की अभिभावकीय क्षमताओं का आकलन उनके शरीर के अनुसार करते हैं।

प्रतिभागियों को दिखाई तस्वीरें -
-अध्ययन में शामिल 800 से अधिक प्रतिभागियों को दुबले, सामान्य, थोड़े मोटे और अधिक वजन वाले पुरुषों की तस्वीरें दिखाई गईं। फिर उनसे इसके आधार पर बेहतर पिता की छवि के बारे में पूछा गया। दुबली काया वाले पुरुषों को लेकर प्रतिभागियों ने उनके अभिभावक वाले गुणों को नकारात्मक आंका। वहीं, थोड़े ज्यादा वजन वाले पिताओं को बेहतर पिता माना।

बच्चों पर विचार नहीं थोपते-
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न मिसिसिपी के शोधकर्ताओं ने बताया कि ज्यादा वजन वाले पिताओं को लेकर हम मानते हैं कि वह बच्चों पर जल्दी अपने विचार नहीं थोपते हैं। इसलिए बच्चों से उनके रिश्ते कीफी मजबू होते हैं। लोग अक्सर इसकी मिसालें भी दिया करते हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी कहा गया कि बहुत अधिक वजन होना भी ठीक नहीं। इससे भी पिता के तौर पर नकारात्मक छवि ही बनती है।

 

खाना खजाना / शौर्यपथ / भिंडी की सब्जी तो आपने कई बार खाई होगी लेकिन इसका अचार भी खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। खास बात यह है कि इसे पकने में सिर्फ 5 मिनट का ही समय लगता है और यह अचार बाकी अचारों के मुकाबले थोड़ा हेल्दी होता है। तो अगली बार जब कभी आपके घर लंच या डिनर पर कोई मेहमान आएं तो उन्हें भी खाने के साथ जरूर परोसे यह टेस्टी अचार।

भिंडी का अचार बनाने के लिए सामग्री-
-250 ग्राम भिंडी
-2 चम्मच मेथी दाना
-1 चम्मच हल्दी पाउडर
-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
-2 चम्मच सरसों पाउडर
-2 चम्मच रोस्टेड तिल
-10-12 करी पत्ते
-चुटकी भर हींग
-1 कप नींबू का रस
-नमक स्वादानुसार
-2 छोटे चम्मच तेल

भिंडी का अचार बनाने का तरीका-
भिंडी का अचार बनाने के लिए सबसे पहले भिंडी को धोकर सुखा लें। भिंडी सुखाने के बाद उसे बीच से चीरा लगाकर काट लें। अब एक कटोरी में लाल मिर्च पाउडर, नमक, हल्दी पाउडर, सरसों पाउडर, हींग और दो चम्मच नींबू का रस एक साथ मिलाएं।अब इस मसाले को भिंडी में भर लें।

एक पैन में तेल गर्म करके उसमें करी पत्ते डालने के बाद भिंडी भी डालकर भून लें। भिंडी को ज्यादा नहीं भूनना है वरना भिंडी का मसाला जलने लगेगा। गैस बंद करके बचा हुआ नींबू का रस और भुने हुए तिल को भी इसमें अच्छे से मिलाएं।

आपका टेस्टी इंस्टेंट भिंडी का अचार बनकर तैयार है। आप इसे तुरंत ही खा सकते हैं, अगर आप इस अचार को 3-4 दिन के लिए स्टोर करना चाहते हैं तो उसके लिए एयर टाइट कंटेनर का ही इस्तेमाल करें।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / विकटासुर पुतले से पैदा किए अपने असुर अचंभासुर को भानामति और प्रद्युम्न का वध करने के लिए गंधमादन पर्वत पर भेजता है। उधर भानामति से मायावी विद्या सिखने के बाद प्रद्युम्न दक्षिणा देने के बाद करते हो तो भानामति कहती है कि तुम मुझे गुरु दक्षिणा देना चाहते हो ना? तब प्रद्युम्न कहता है- हां गुरुदेव। फिर भानामति कहती है- तो उठो वत्स और देखो आसमान में संभुरासुर का भेजा हुआ राक्षस हमें ढूंढता हुआ आ रहा है। तुम मेरी दी हुई शिक्षा से उस राक्षस का वध कर दो यही मेरी गुरु दक्षिणा होगी। तभी वह राक्षस अचंभासुर जिसे विकटासुर ने भेजा था उन दोनों को देख लेता है।
अचंभासुर उन्हें देखकर कहता है- अच्छा तो तुम यहां हो। अब मैं तुम्हें असुरेश्वर के पास ले जाऊंगा। यह देखकर प्रद्युम्न अपनी माया से एक धनुष और बाण प्राप्त करता है और फिर उसे बाण मारने का प्रयास करता है तो वह असुर अपनी माया से अदृश्य होकर जोर-जोर से हंसने लगता है। वह असुर भी अदृश्य होकर अस्त्र-शस्त्र चलाता है। अंत में भानामति कहती है कि किसी मायावी से मायावी युद्ध ही करना चाहिए तुम उसकी माया नष्ट कर दो। फिर वह तुम्हारे सामने आ जाएगा। फिर जैसे ही वह दिखाई देने लगता है तो भानामति कहती है- अब समय मत गवांओ और इसी समय इसका वध कर दो वर्ना संभरासुर के कई मायावी यहां आ जाएंगे।

तब प्रद्युम्न अपने तीर से अचंभासुर का एक हाथ काट देता है परंतु वह फिर जुड़ जाता है। फिर वह गर्दन काट देता है तो गर्दन भी फिर से जुड़ जाती है। फिर तलवार से दो टूकड़े कर देता है तो वह असुर कहता है कि मैंने कहा था न कि मेरा कोई वध नहीं कर सकता। मुझे कोई मिटा नहीं सकता। यह कहकर वह दानव अदृश्य हो जाता है तो भानामति घबराकर श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती है कि हे प्रभु! इस संकट में मेरे प्रद्युम्न की रक्षा करो।

तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि भानामति विकटासुर ने अचंभासुर का निर्माण किया है। उसने एक मिट्टी की मूरत बनाकर उस मूरत से अचंभासुर के प्राणों की स्थापना की है। तुम्हें उस मूर्ति को नष्ट करना होगा। जिस पल तुम उस मूर्ति को नष्ट कर दोगी उसी पल प्रद्युम्न अचंभासुर का वध करने में सफल हो जाएगा। यह सुनकर भानामति अपने सूक्ष्म शरीर से वहां से चली जाती है और इधर प्रद्युम्न अचंभासुर से लड़ता और बचता रहता है।

उधर, भानामति विकटासुर के द्वारा स्थापित पुतले को ढूंढते हुए उसके पास पहुंच जाती है और फिर अपनी माया से उस पुतले को नष्ट कर देती है। जैसे ही वह पुतला नष्ट होता है उधर प्रद्युम्न भी अचंभासुर का वध कर देता है। फिर भानामति पुन: अपने स्थान पर लौट आती है। जब यह घटना विकटासुर को पता चलती है तो वह कहता है- भानामति मैं तुमसे बदला लूंगा। मैं किसी भी प्रकार तुम्हारा वध करूंगा। ऐसा कहकर विकटासुर भी गंधमादन पर्वत की ओर उड़ चलता है।

उधर, भानमति कहती है कि इन आयुधों को देखकर लगता है कि तुम्हें विकटासुर का विस्मरण हो गया है। यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है- नहीं माताश्री। तब वह कहती है कि तो फिर तुमने इन आयुधों को नीचे क्यों रख दिया है? अभी तक तो युद्ध का प्रारंभ ही नहीं हुआ पुत्र प्रद्युम्न और तुमने इन आयुधों को नीचे रख दिया। तुमने जिस अचंभासुर का वध किया था उसका निर्माण विकटासुर ने किया था और वह बदला लेने यहां अवश्‍य ही आएगा। इसके बाद तो तुम्हें हर पल सावधान रहना चाहिए। अचंभासुर की तरह विकटासुर का भी ‍वध कर दिया तो समझ लो कि युद्ध प्रारंभ होने के पहले ही संभरासुर का आत्मविश्वास डगमगा गया।..

यह सारी बातें विकटासुर सुन लेता है और अपनी माया से एक सुंदर हिरण बनाकर उस उपवन में छोड़ देता है। उसे देखकर भानामति और प्रद्युम्न दोनों ही प्रफुल्लित हो जाते हैं। तब प्रद्युम्न उस हिरण को अपने तीर से मार देता है तो भानामति कहती है कि ठहरों इसे मैं लेकर आती हूं। जब मायावती वहां से चली जाती है तो विकटासुर अपनी माया से भानामति बनकर हाथ में मृत हिरण लेकर प्रद्युम्न के पास पहुंच जाता है। तब प्रद्युम्न कहता है- माताश्री आप अतिशीघ्र आ गई? तब भानामति बना विकटासुर कहता है कि हां पुत्र प्रद्युम्न कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो अतिशीघ्र पूरे किए जाते हैं। यदि मैं इस हिरण को अतिशीघ्र उठाकर नहीं लाती तो अन्य वनपशु इसे ले जाते। अब मैं इसका स्वादिष्ट भोजन बनाकर तुम्हें खिलाऊंगी, लो इसे जाकर रख दो।

प्रदयुम्न वह हिरण हाथ में से ले लेता है तभी वहां पीछे से असली भानामति हिरण लेकर आती है तो वह यह दृश्य देखकर अचंभित हो जाती है। वह जोर से चीखती है- प्रद्युम्न। यह देखकर प्रद्युम्न भी अचंभित हो जाता तभी नकली भानामति असली भानामति पर अपने मायावी अस्त्र का प्रहार करती है। तत्काल भानामति भी अस्त्र का प्रहार करके उसे विफल कर देती है। प्रद्युम्न को समझ में नहीं आता कि कौन असली है। तभी विकटासुर अपने असली रूप में आकर वहां से भागकर आकाश में स्थित हो जाता है। प्रद्युम्न के हाथ में रखा मायावी हिरण सर्प में बदलकर प्रद्युम्न को जकड़ लेता है। यह देखकर भानामति घबरा जाती है।

फिर विकटासुर अपनी माया से सर्प में जकड़े प्रद्युम्न को आसमान में खींच लेता है। तब भानामति कहती है- प्रद्युम्न! अपनी मायावी विद्या का प्रयोग करके विकटासुर का प्रतिकार करो। फिर प्रद्युम्न मंत्र पढ़कर नागपाश से मुक्ति होकर विकटासुर से मायावी युद्ध करने लगता है। फिर दोनों अग्निरूप धारण करके नीचे उतरकर मल्ल युद्ध करने लगते हैं। फिर वह संभरासुर को आसमान में फेंक देता है जहां पर वह अपने असली रूप में आ जाता है तब प्रद्युम्न कहता है कि विकटासुर जब तक तुम मेरी जीत का कथन संभरासुर को नहीं कर देते तब तक तुम्हारे प्राण तुम्हारे मुंड में अटके रहेंगे। ऐसा कहकर प्रद्युम्न एक दिव्य त्रिशूल छोड़ता है जिससे उसका सिर धड़ से अलग हो जाता है। धड़ भूमि पर गिर पड़ता है और सिर आसमान में दूर चला जाता है।..यह देखकर भानमति हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण का धन्यावाद करती है। प्रद्युम्न अपनी माता भानामति को प्रणाम करता है।

उधर, कुंभकेतु अपने पिता संभुरासुर से कहता है कि पिताश्री अब आप विश्राम कीजिये। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि विश्राम कैसे करूं। उधर विकटासुर प्रद्युम्न के साथ युद्ध कर रहा है फिर मैं विश्राम कैसे कर सकता हूं। यह सुनकर मायावती कहती है कि परंतु विकटासुर अभी तक आया कैसे नहीं?
इस पर संभरासुर कहता है कि अवश्य आएगा महारानी अवश्य। वह किसी भी पल आएगा और बताएगा कि स्वामी मैंने प्रद्युम्न का वध कर दिया है। कदाचित वह प्रद्युम्न का सिर भी प्रमाणित करने के लिए साथ लेकर आएगा। ऐसा कहकर संभरासुर जोर-जोर से हंसने लगता है।

तभी वहां पर प्रद्युम्न द्वारा त्रिशूल से फेंका गया विकटासुर का अकेला मुंड आकर कहता है- स्वामी, स्वामी।.. यह देखकर संभरासुर, मायावती और कुंभकेत अचंभित हो जाते हैं। तब वह मुंड कहता है- स्वामी प्रद्युम्न अजेय है, प्रद्युम्न तुम्हारा काल है। प्रद्युम्न के हाथों तुम्हारी मृत्यु निश्चित है। विकटासुर ही क्या बल्कि आप भी प्रद्युम्न का बाल भी बांका नहीं कर सकते स्वामी।

यह सुनकर संभरासुर क्रोधित होकर कहता है- विकटासुर तुमने मेरा और मेरी मायावी शक्तियों का अपमान किया है। तब विकटासुर का मुंड कहता है- क्षमा करें महाराज। मैं आपको वास्तविकता बताना चहता था। मुझे खेद है कि मैं आपकी आज्ञा का पालन नहीं कर सका। मुझे दुख है महाराज कि मैं आपकी सेवा पूरी तरह से नहीं कर सका।..

यह सुनकर संभरासुर कहता है कि फिर भी तुम मुझे अपना मुंह दिखाने का साहस कर रहे हो। यह सुनकर विकटासुर कहता है- क्षमा कीजिये स्वामी मैं यहां आना नहीं चाहता था। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि फिर भी तुम अपनी हार की कहानी मुझे सुनाने चले आए हो। यह सुनकर विकटासुर कहता है कि मुझे प्रद्युम्न ने विवश किया स्वामी प्रद्युम्न ने। यह सुनकर संभरासुर कहता है फिर से तुम मेरे सामने शत्रु की प्रशंसा कर रहे हो।

इस पर विकटासुर कहता है कि क्षमा करें स्वामी मैं आपको वास्तविकता बताना चाहता हूं कि प्रद्युम्न ने मेरा वध करके मेरा सिर आपके पास भेज दिया है।....यह सुनकर संभरासुर अचंभित रह जाता है तब विकटासुर कहता है ये उसकी माया है माया। जब तक मैं प्रद्युम्न की जीत का समाचार आप तक नहीं पहुंचाता तब तक मेरे प्राण मेरे मुंड में अटके रहेंगे, स्वामी अटके रहेंगे। स्वामी मेरा अंतिम प्रणाम स्वीकार करें। ऐसा कहते हैं कि विकटासुर का मुंड भस्म हो जाता है। यह देखकर संभरासुर अचंभित और भयभित हो जाता है।

उधर, भानामति अपने पुत्र प्रद्युम्न की आरती उतारती है और तिलक लगाती है तब प्रद्युम्न कहता है कि माताश्री मैं धर्मयुद्ध आरंभ करने जा रहा हूं। आप मुझे आशीर्वाद दीजिये। भानामति उसे विजयीभव: पुत्र कहकर आशीर्वाद देती है और फिर युद्ध का उपदेश देकर कहती है कि शत्रु के घर में आचानक घुसकर उसे आश्चर्य चकित करो पुत्र। धर्मयुद्ध में जीत हमेशा धर्म की ही होती है। फिर भानामति कहती है कि संभरासुर के घमंड का प्रतीक है उसका विजय स्तंभ। तुम अपने अंतरचक्षुओं से देखो तो तुम्हें अवश्य नजर आएगा।

फिर उधर, संभरासुर को अपने विजयी स्तंभ के पास खड़ा हुआ बताया जाता है जहां पर वह खड़ा होकर अपने सभी पुत्रों को युद्ध के लिए एक-एक करके तलवार भेंट कर रहा होता। तलवार भेंट करते वक्त वह विजयी स्तंभ की ओर देखकर ही तलवार भेंट करता है।.. प्रद्युम्न अपने अंतरचक्षु से यह सब देख रहा होता है।

तब संभरासुर कहता है मेरे वीर पुत्रों हमारा ये विजय ध्वज और ये विजय स्तंभ हमारे लिए हमारे प्रणों से भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारी विजय और हमारी सत्ता का प्रतीक है। इसलिए हम इस विजयी स्तंभ की सुरक्षा दिन-रात करते रहते हैं। परंतु अब मैं चाहता हूं कि इस विजयी स्तंभ की सुरक्षा का मेरे चारों वीर पुत्र अपने सर लें। चारों पुत्र कहते हैं- अवश्‍य पिताश्री। तब संभरासुर कहता है कि तुम लोग ये बात भलिभांति समझ लो की चाहे महाप्रलय आ जाए परंतु इस विजय स्तंभ पर तनीक भी खरोच नहीं आनी चाहिये।

फिर इधर, भानामति कहती है- पुत्र तुमने त्रिलोक के सांप और उसके चारों सपोलों के साथ विजयी स्तंभ को भी देख लिया है। तुम्हें इस विजय स्तंभ को तोड़ना है परंतु उससे पहले तुम्हें संभरासुर का घमंड तोड़ना है। इसके लिए तुम्हें उसके घर में जाकर उसे भयभित करना है और उसे युद्ध के लिए ललकारना है। इस पर प्रद्युम्न कहता है- अवश्य माताश्री। अब मुझे आज्ञा दीजिये। मैं शत्रु के घर में घुसकर उसे ललकारने जा रहा हूं।

फिर उधर, राजदरबार में अपने सभी पुत्रों और दरबारियों से संभरसुर कहता है कि मेरा एक शत्रु चूहे की भांति बिल में छुपा बैठा है। फिर संभरासुर बताता कि प्रद्युम्न रसायन विद्या से युवा बन बैठा है और छल से उसने मेरे असुरों का वध कर दिया है। त्रिलोक पर आक्रमण करने से पहले हमें उसका वध करना अति आवश्‍यक है। इसलिए यदि वो पातल में भी छुपा बैठा हो तो उसे ढूंढ निकालो क्योंकि वह कायर कभी भी सामने से आक्रमण करने वाला नहीं है।

तभी वहां पर कुछ सैनिक गिर पड़ते हैं तो संभरासुर क्रोधित होकर कहता है सैनिकों ये क्या कर रहे हो। तभी वहां पर द्वार के बाहर से कुछ और सैनिक फेंके जाने लगते हैं। संभरासुर कहता है ये सब क्या हो रहा है? किसने सैनिकों को फेंककर हमारा अपमान किया है, हमारे दरबार का अपमान किया है? यह सुनकर एक सैनिक कहता है- क्षमा करें महाराज! कोई सिरफिरा युवक है जो अंदर आना चाहता था जब हमने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने हमें उठाकर यहां फेंक दिया है। यह सुनकर संभारासुर कहता है कि अवश्य ही उसकी मृत्यु उसे यहां खींच लाई है जाओ उसे इसी क्षण बंदी बनाकर हमारे सामने प्रस्तुत करो।

तभी वहां पर प्रद्युम्न खुद ही द्वार पर आ धमकता है और कहता है- हे दैत्यराज।....सभी उसकी ओर देखने लगते हैं। फिर प्रद्युम्न चलकर सभा के बीच में उपस्थित हो जाता है तो संभरासुर उसे उपर से नीचे तक देखता है तब प्रद्युम्न कहता है- मुझे कहीं भी जाने से और कहीं भी आने से कोई भी रोक नहीं सकता।

यह सुनकर संभरासुर कहता है- अच्छा तो बड़ा गुमान है तुम्हें अपने बाहुबल पर। सैनिकों ले जाओ इसे और डाल तो कारागार में। चार सैनिक प्रद्युम्न का हाथ पकड़ लेते हैं परंतु वह उसे खींच नहीं पाते हैं। प्रद्युम्न एक ही जगह खड़ा-खड़ा मुस्कुराता रहता है और फिर वह चरों सैनिकों को जब उठाकर फेंक देता है तो संभरासुर के चार पुत्र तलवार निकालकर उसके पास पहुंचते हैं तो संभरासुर कहता है- रुको। चारों पुत्र पुन: अपने सिंहासन पर बैठ जाते हैं।

तब संभरासुर कहता है- हे युवक मेरे पुत्र तुम पर मृत्यु बनकर टूट पड़े थे फिर भी तुम्हें भय नहीं लगा। तब प्रद्युम्न कहता है कि मृत्यु से भय कैसा, अपनी मृत्यु से तो कायर डरते हैं। यह सुनकर संभरासुर कहता है- वाह तुम्हारी बहादुरी ने तो हमारा दिल जीत लिया। तब प्रद्युम्न कहता है- जीत तो मेरा भाग्य है असुरेश्वर, जिसे कोई बदल नहीं सकता। तब संभरासुर कहता है- हे तेजस्वी वत्स! अपना परिचय नहीं दोगे हमें? कौन हो तुम और हमारी इस सभा में क्यूं आए हो? इससे पहले तो हमने अपने साम्राज्य में तुम्हें पहले कभी नहीं देखा।

इस पर प्रद्युम्न कहता है कि मैं एक योद्धा हूं और आप ही के साम्राज्य में रहता हूं। मेरा नाम, मेरी पहचान मेरी शक्ति और विद्याएं हैं। मैंने सभी विद्याएं ग्रहण की है और उनका प्रदर्शन करने के लिए ही मैं आपकी सभा में उपस्थित हुआ हूं। यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं उनका प्रदर्शन करूं। यह सुनकर संभरासुर मायावती की ओर देखता है तो महाराजी मायावती कहती है- आज्ञा है।

फिर प्रद्युम्न अपनी माया से वहां पर बादल पैदा कर देता है और उन बादलों में बिजली भर देता है। भयानक बिजलियां कड़कने लगती है। ये देखकर सभी घबरा जाते हैं। फिर प्रद्युम्न भूमि पर आग का गोला प्रकट कर देता है तो सभी अपने-अपने सिंहासन से उठकर दूर खड़े हो जाते हैं। सभी में भय व्याप्त हो जाता है। संभरासुर और मायावती ये देखकर भयभित और अचंभित रह जाते हैं। फिर प्रद्युम्न अपनी माया से वहां वर्षा उत्पन्न कर देता है। उस वर्षा से आग बुझ जाती है और फिर सबकुछ पहले जैसा हो जाता है। संभरासुर ये देखकर अवाक् रह जाता है। फिर प्रद्युम्न अपनी माया से अदृश्य हो जाता है।


फिर वहां पर अपनी माया से वह भानमति और उसके हाथ में छोटा-सा बालक सभा में उपस्थित कर देता है। बालक हाथ में लेकर भानामति कहती है- महाराज महाराज।.. ये देखकर संभरासुर और मायावती अचंभित हो जाते हैं। भानामति रोते हुए अपने बालक को अपने हाथ में लेकर संभरासुर के पास पहुंचती है और कहती है- महाराज..महाराज मेरे बच्चे की रक्षा कीजिये महाराज। मेरे पुत्र की रक्षा कीजिये महाराज। मेरे प्रद्युम्न की रक्षा कीजिये।...यह देखकर संभरासुर को कुछ समझ में नहीं आता कि ये हो क्या रहा है तभी वहां पर भानामति अदृश्य हो जाती है और विशाल काया में प्रद्युम्न प्रकट होकर जोर-जोर से हंसता और फिर कहता है और माया दिखाऊं असुररेश्वर?

भयभित खड़ा असुरेश्वर संभरासुर पूछता है- कौन हो तुम? यह सुनकर प्रद्युम्न जोर-जोर से हंसने लगता है तो संभरासुर क्रोधित होकर कहता है- कौन हो तुम बताते क्यों नहीं? यह सुनकर प्रद्युम्न पुन: जोर-जोर से हंसने लगता है तो संभरासुर कहता है कि तुम मेरा उपहास कर रहे हो। जानते हो संभरासुर ऐसे लोगों को मृत्युदंड देता है मृत्युदंड। यदि तुम समझते हो कि संभरासुर तुम्हारी माया के प्रभाव में आ गया होगा तो ये तुम्हारी भूल है। मैं स्वयं महान मायावी हूं। यदि मैं चाहूं तो तुम्हें इसी पल मृत्यु के हवाले कर सकता हूं।

यह सुनकर प्रद्युम्न पुन: जोर-जोर से हंसते हुए कहता है परंतु आप ऐसा नहीं कर सकते असुरेश्वर। यह सुनकर संभरासुर कहता है- क्यों, क्यों नहीं कर सकता? तब प्रद्युम्न कहता है- क्योंकि आप ही ने तो मुझे अभय दिया है। इस पर संभरासुर कहता है- मैंने अभय दिया है तुम्हें! कब अभय दिया है तुम्हें? तुम्हें तो आज मैं पहली बार देख रहा हूं। हे मायावी युवक तुम मुझे भ्रमित करने का प्रयास मत करो।

यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है कि मैं आपको भ्रमित नहीं कर रहा हूं असुरेश्वर बल्कि आपका भ्रम तोड़ने का प्रायास कर रहा हूं। मैं आपको स्मरण करा देना चाहता हूं कि मेरी और आपकी भेंट पहले भी हो चुकी है। आप ही ने तो मुझे अपने हाथों में लेकर मुझे सीने से लगाया था और आपने ही मेरा नामकरण भी किया है। यह सुनकर संभरासुर और मायावती चौंक जाते हैं। फिर भी संभुरासुर आश्चर्य से पूछता है- मैंने तुम्हारा नामकरण किया है? यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है कि हां असुरेश्वर और जब युवराज कुंभकेतु जब मेरा वध करने आया था तब आप ही ने मुझे अभय दिया था। यह सुनकर संभरासुर, मायावती और कुंभकेतु आश्चर्य चकित और भयभित हो जाते हैं। जय श्रीकृष्णा।

मनोरंजन / शौर्यपथ / बच्चन परिवार के लिए जुलाई 2020 का महीना काफी मुश्किलों भरा रहा। इस दौरान अमिताभ बच्चन, बेटे अभिषेक बच्चन, बहु ऐश्वर्या राय बच्चन और पोती आराध्या बच्चन, सभी कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए थे। कुछ समय के लिए हॉस्पिटल में भर्ती रहे, बाद में होम क्वारंटाइन पर रहे। ऐश्वर्या राय बच्चन सोशल मीडिया पर काफी कम एक्टिव रहती हैं। हाल ही में टीचर्स डे के मौके पर जरा देर से ही सही लेकिन ऐश्वर्या ने बेटी आराध्या बच्चन की एक फोटो शेयर की।
इस फोटो में आराध्या राय बच्चन ने टीचर्स के लिए एक नोट लिखा है, जिसे हाथ में पकड़कर वह पोज देती नजर आ रही हैं। आराध्या राय बच्चन की यह फोटो फैन्स को खूब पसंद आ रही है। वह ऐश्वर्या की पोस्ट पर कॉमेंट कर आराध्या की तारीफ कर रहे हैं। कोविड-19 के बाद ऐश्वर्या ने आराध्या की यह पहली पोस्ट शेयर की है।
बता दें कि ऐश्वर्या इन दिनों परिवार के साथ समय बिता रही हैं। वह साल 2018 में आई फिल्म फन्ने खान में नजर आई थीं। इस फिल्म में उनके साथ अनिल कपूर और राजकुमार राव लीड रोल में थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा पाईं।
आराध्या और अबराम की जोड़ी होगी ऑनस्क्रीन हिट
शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी ऑनस्क्रीन हिट रही है। दोनों ने एक साथ कई हिट फिल्में दी हैं और शाहरुख को लगता है कि उनकी जोड़ी को अगर कोई जोड़ी रिप्लेस कर सकती है तो वह है अबराम खान और आराध्या बच्चन की जोड़ी। दरअसल, एक इंटरव्यू में शाहरुख से पूछा गया कि उनकी और काजोल की हिट जोड़ी को रणबीर कपूर-दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह-दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट-सिद्धार्थ मल्होत्रा और फवाद खान-सोनम कपूर में से कौन-सी जोड़ी रिप्लेस कर सकती है।
शाहरुख अपने बेटे और अमिताभ बच्चन की नातिन आराध्या बच्चन का नाम लेते हैं। जिसके बाद काजोल कहती हैं, अबराम, आराध्या से छोटा है। काजोल की इस बात का शाहरुख तुरंत जवाब देते हैं, प्यार में उम्र नहीं देखी जाती।
वहीं जब अमिताभ बच्चन से शाहरुख के इस कॉमेंट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था, 'उनके मुंह में घी शक्कर और दूध मलाई'।
बता दें कि साल 2018 में बिग बी ने आराध्या के बर्डथे पर अबराम के साथ फोटो शेयर करते हुए लिखा था, शाहरुख खान के नन्हे अबराम, जो ये सोचते और विश्वास ही नहीं करते बल्कि पूरी तरह से ये मानते हैं कि मैं शाहरुख खान का पिता हूं। साथ ही वह इस बात से हैरान रहते हैं कि मैं शाहरुख के घर में उनके साथ नहीं रहता हूं।
बिग बी के इस पोस्ट पर शाहरुख ने कॉमेंट किया था, सर आया करो न...शनिवार को कम से कम अबराम के साथ घर पर रहें। उसके आईपैड पर कुछ बहुत ही मजेदार गेम्स हैं।

मनोरंजन / शौर्यपथ / अजय देवगन और काजोल की बेटी न्यासा अपने लुक्स को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं। उनकी फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। अब खबर है कि काजोल कुछ समय के लिए बेटी न्यासा के साथ सिंगापुर में रहेंगी, वहीं अजय देवगन मुंबई में बेटे युग के साथ रहेंगे।

मुंबई मिरर ने अपनी रिपोर्ट में सूत्र के आधार पर बताया कि न्यासा सिंगापुर के युनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज ऑफ साउथ ईस्ट एशिया में पढ़ाई कर रही हैं। काजोल और अजय देवगन नहीं चाहते हैं कि न्यासा की पढ़ाई पर कोई असर पड़े। इसके अलावा वे कोरोना महामारी के बीच न्यासा को पढ़ने के लिए सिंगापुर में अकेला नहीं छोड़ना चाहते हैं। इसलिए अब काजोल ने फैसला किया है कि न्यासा के साथ वह सिंगापुर में रहेंगी।

अजय देवगन ने सिंगापुर में एक अपार्टमेंट भी खरीदा है ताकि काजोल और न्यासा को रहने में कोई परेशानी न हो। बताया जा रहा है कि काजोल अगले कुछ महीने सिंगापुर में ही रहेंगी।

मुंबई में बेटे युग के साथ रहेंगे अजय देवगन

जहां काजोल बेटी के साथ रहेंगी, वहीं अजय देवगन बेटे युग के साथ मुंबई में रहेंगे। अजय देवगन फिलहाल 2 स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं। इसके लिए अलावा वह अपनी अगली फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन के काम में व्यस्त हैं। पिछली बार अजय देवगन फिल्म 'तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर' में नजर आए थे। इसमें उनके अपोजिट काजोल ने काम किया था। फिल्म में सैफ अली खान ने विलेन की भूमिका निभाई थी। अजय देवगन की आने वाली फिल्मों में मैदान, कैथी रीमेक, गोलमाल 5, भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया जैसी फिल्में शामिल हैं।

 

शौर्यपथ लेख । देश सहित प्रदेश में कोरोना का विस्फोट हो गया दुर्ग जिला प्रदेश में कोरोना के मामले में रायपुर के बाद दूसरा स्थान है । दुर्ग में कोरोना आपदा से जहां बेरोजगारी बढ़ी वही जिला प्रशासन के एक फैसले से कुछ निजी अस्पताल की बल्ले बल्ले हो गई । यह हम सभी अस्पताल की बात ना कर एक एक अस्पताल की बात करे तो दुर्ग जिले में सबसे ज्यादा विवादित अस्पताल bsr अपोलो का नाम ले तो कोई गलत नही होगा । वर्तमान में bsr apollo हॉस्पिटल bsr super specialist के नाम से संचालित ज़रूर है किंतु अब इसे नए नाम से पुकारा जाने लगा है नया नाम है hitech । जी हां जनवरी माह में इस हॉस्पिटल का एक बार फिर उद्घाटन हुआ वो भी प्रदेश के गृहमंत्री के हांथो ये बात अलग है कि अभी तक इस हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग से अनुमति नही मिली और इस पर कमेटी बैठाकर जांच की बात जिला प्रशासन द्वारा भी किया गया । जिले के cmo गंभीर सिंह ठाकुर ने भी स्वीकारा था कि लाइसेंस की प्रक्रिया चालू है यानी कि अभी तक शासन द्वारा इसका भौतिक परीक्षण नही किया गया । किन्तु कहते है कि सारे नॉयम सिर्फ आम व गरीब जनता के लिए ही होते है जो आज प्रत्यक्ष दिख भी रहे है । करोड़ो रूपये के फर्जी बाड़े ( बीएसपी कर्मचारियों से इलाज के लिए लिए गए ) का प्रकरण का निपटारा भी नही हुआ और पूर्व संचालक डॉ खंडूजा ने हॉस्पिटल बेच दिया । प्राप्त जानकारी के अनुसार अब हॉस्पिटल में संचालक के तौर पर डॉ खंडूजा के पुत्र का नाम है यानी सिर्फ कागजो में ही फेर बदल और कई लोगो की मेहनत की कमाई अंदर । ऐसा नही कि यह फर्जीवाड़ा किसी से छुपी हुई है किंतु यह फर्जीवाड़ा का मास्टरमाइंड रसूखदार है तो प्रशासन मौन है । एक तरफ तो bsr super स्पेशिलिटी हॉस्पिटल को अभी तक शासन से अनुमति नही मिली वही दूसरी तरफ शासन ने इस हॉस्पिटल को कोविड के इलाज की अनुमति भी दे दी वो भी ए श्रेणी में रखकर । अब तो hitech ( bsr सुपर स्पेशिलिटी ) के संचालकों की चांदी ही चांदी । इसे दूसरी भाषा मे कहे तो आपदा में अवसर या खुलकर बिना अनुमति के ग्राहकों ( मरीज ) की जेब मे प्रवेश । मरीज इसलिए नही कह सकते क्योकि जो हॉस्पिटल बिना अनुमति के खुलेआम स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य कर रहा उसका मकसद स्वास्थ्य सेवाएं देने से ज्यादा जरूरी जेब की सेवा करना है । वैसे भी शुरुवात से अभी तक कई छोटे बड़े विवाद का नाता bsr से रह है अब जब सरकार ने कोविड की अनुमति दे दी फिर तो संचालकों के हांथ ही नही सिर भी कढ़ाई में होने जैसी कहावत चरितार्थ हो गई । इसे ही कहते है आपदा में अवसर का लाभ उठाना । खैर अब अवसर तो मिल ही गया एक गैर अनुमति प्राप्त हॉस्पिटल को बस अब देखना यह है कि यहां कोविड के इलाज के नाम पर क्या क्या खेल होता है और क्या क्या रंग देखने को मिलेंगे । वैसे सिर्फ bsr हॉस्पिटल ही अकेले नही है जिसे विभाग से अनुमति नही मिली हो ऐसे कई हॉस्पिटल सालो से दुर्ग में संचालित है जो शासन के नियमो का नर्सिंग होम एक्ट 2013 का मजाक उड़ाते हुए संचालित हो रहे है और हो भी क्यो ना क्योकि इतने सालों में ज़िम्मेदार अधिकारी नोटिस का खेल ही खेल रहे है यही सत्य है और सत्य को अब स्वीकार करना ही पड़ेगा क्योंकि नियम और कानून गरीबो के लिए कमजोरों के लिए ही है । ( शरद पंसारी की कलम से )

दुर्ग । शौर्यपथ । कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए तकियापारा मस्जिद कमेटी ने आगामी दस दिनों के लिए मस्जिद बंद रखने की धोषणा की है। अंजुमन फाउंडेशन के अध्यक्ष सैय्यद सैफ ने बताया कि शाम को हुई मस्जिद कमेटी की बैठक में कोरोना के बढते मामलों के प्रति चिंता जताते हुए मस्जिद को बंद रखने का निर्णय लिया गया।इसके साथ ही शनिवार की शाम से आगामी दस दिनों के लिए मस्जिद को पूरी तरह बंद कर दिया गया है अवाम से घरों मे रहकर इबादत करने की अपील की गई है।

बेंगलुरु / शौर्यपथ / बेंगलुरु पुलिस ने कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी समेत 12 लोगों के खिलाफ मादक पदार्थ दुरुपयोग का एक मामला दर्ज किया है. पुलिस ने कहा कि ये लोग ड्रग तस्करों के माध्यम से पार्टियों में अनेक लोगों को नशीले पदार्थों की आपूर्ति करते थे. पुलिस ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों में अब तक 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और इनमें से छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
शीर्ष पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस विभाग ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसिस (एनडीपीएस) कानून के तहत स्वत: ही मामला दर्ज किया है. बेंगलुरु की केंद्रीय अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त के सी गौतम की शिकायत पर मामला लिया गया है.

उन्होंने कहा कि शिवप्रकाश, रागिनी द्विवेदी, वीरेन खन्ना, प्रशांत रांका, वैभव जैन, आदित्य अल्वा, लूम पीपर सांबा, प्रशांत राजू, अश्विनी, अभिस्वामी, राहुल थोंशे और विजय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस के मुताबिक लूम पीपर सेनेगल का नागरिक है और बाकी बेंगलुरु के हैं.

एक अलग प्रकरण में रागिनी द्विवेदी के करीबी तथा सड़क परिवहन कार्यालय में लिपिक बी के रविशंकर के खिलाफ एक अलग मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने कहा कि वह एक अन्य मामले में हिरासत में है.

पुलिस के अनुसार द्विवेदी, रविशंकर, राहुल, वीरेन खन्ना और लूम पीपर समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने बृहस्पतिवार को रियल एस्टेट कारोबारी राहुल शेट्टी को भी गिरफ्तार किया था.

 

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