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June 01, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग / शौर्यपथ / गरीब कल्याण रोजगार अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य से एक भी जिले को शामिल न करने पर केंद्र सरकार पर कांग्रेस शासित राज्यों की जनता के साथ अन्याय कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना संकट से निबटने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लेकर कुशल प्रबंधन से सर्वहारा वर्ग के लिए काम किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता और सरकार के जनहितैषी काम केंद्र को रास नहीं आ रहे हैं। इसी कारण राज्य की जनता के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उक्त बातें दुर्ग शहर विधायक अरूण वोरा ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के निम्न आय वर्ग के लोगों के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुकी है। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य को किसी तरह का आर्थिक पैकेज नहीं दिया।
जीएसटी से राज्य का हिस्सा समय पर जारी हो रहा है। बीपीएल परिवार पक्के मकानों की आस में अपना मकान तोड़ बैठे हैं। प्रधानमंत्री आवास की राशि भी केंद्र सरकार ने रोक दी है। छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना संकट के दौरान 5 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई है,जिनके सामने रोजगार का संकट है। राज्य सरकार अपने स्तर पर मनरेगा व खेती के लिए उत्साह का माहौल पैदा करते हुए लोगों को इस कठिन समय में भी रोजगार उपलब्ध करा रही है।
अरुण वोरा ने कहा कि रोज कमाने रोज खाने वालों के लिए पर्याप्त मात्रा में रोजगार उपलब्ध कराना तात्कालिक आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के भाजपा नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि यह समय दलीय राजनीति करने का समय नहीं है। पूरे प्रदेश के भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री से राज्य के सभी जिलों को गरीब कल्याण योजना में शामिल करने व राज्य को आर्थिक पैकेज देने की मांग करना चाहिए।

दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई, क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पशुपालकों से रोका-छेका संकल्प अभियान के तहत 513 पशु मालिकों से संकल्प पत्र भराया गया। शासन के निर्देश के परिपालन में निगमायुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने निगम के अधिकारी/कर्मचारियों की नियुक्ति इस कार्य के लिए की है, इसके लिए नोडल अधिकारी सहित टीम का गठन किया जा चुका है। रोका-छेका संकल्प अभियान के तहत पशु मालिकों को अपने मवेशी की सुरक्षा स्वंय करने, पालतू मवेशियों को अपने स्थान पर रखकर चारा, पानी की समुचित व्यवस्था करने, शहर की सड़कों में आवारा घूमने के लिए नहीं छोडऩे, आसपास के खेतों में फसलों तथा उद्यानों में पालतू मवेशियों का प्रवेश रोकने स्वयं व्यवस्था करने, सामूहिक व्यवस्था में सहभागिता निभाने, पशुपालन से उत्सर्जित होने वाले अपशिष्ट के लिए कंपोस्टिंग के लिए स्वयं व्यवस्था करने के लिए भिलाई निगम क्षेत्र में संकल्प पत्र भराया जा रहा है।
सड़क पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की हो रही है धरपकड़ निगम क्षेत्र में सड़क किनारे घुमने वाले आवारा पशुओं की धरपकड़ विगत दो-तीन दिनों से की जा रही है निगम का अमला सड़क पर घुमने वालें 32 पशुओं को अब तक पकड़ चुके हैं। जोन 02 के एआरओ संजय वर्मा व जोन 04 के एआरओ बालकृष्ण नायडू ने बताया कि निगम क्षेत्र में आवारा घुमने वाले पशुओं को खुर्सीपार, तेलहा नाला, नेहरू नगर, मॉडल टाउन चैक क्षेत्र में घुमते हुए पाए जाने पर पकड़ा गया है।
भिलाई की सड़कों पर पालतू मवेशियों के घूमते हुए पाए जाने पर पशु पालकों पर होगी कार्यवाही उपायुक्त अशोक द्विवेदी ने बताया कि सड़कों पर यूं ही घूमने वाले आवारा मवेशी पाए जाने पर पशु मालिकों पर भी नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा गौधन को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशु जो यातायात में बाधक बन कर दुर्घटना का कारण बनते हैं जिससे होने वाली दुर्घटना में पशुधन एवं जनधन की हानि होती है। निगम की अपील है कि इससे बचने के लिए पशुपालक अपने पालतू मवेशियों को सड़कों पर आवारा घूमने न दें।
513 पशु मालिकों से भराया जा चुका है संकल्प पत्र निगम के सभी जोन कार्यालयों की टीम 19 जून से शासन के आदेश के पालन में रोका छेका अभियान के तहत पशु पालकों से संकल्प पत्र भरवा रहे है। संकल्प पत्र अभियान में जोन कं. 01 में 113 पशु मालिक, जोन 02 में 122 पशु मालिक, जोन 03 में 79 पशु मालिक, जोन 04 में 176 पशु मालिक, जोन 05 में 23 पशु मालिक से संकल्प पत्र भरवाया जा चुका है।

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / चीन के साथ सीमा पर विगत 45 वर्षों से जिस उदारता को भारत निभाता चला आ रहा था, उसमें अब बदलाव जितना स्वाभाविक है, उतना ही स्वागतयोग्य भी। सीमा पर जरूरत पड़ने पर हथियार प्रयोग को जो मंजूरी मिली है, वह चीन की ही साजिशों का नतीजा है। आम तौर पर वह परोक्ष रूप से हमें घेरता आ रहा था, लेकिन अब जब उसने प्रत्यक्ष रूप से भारतीय उदारता की भारी कीमत वसूल ली है, तब भारत के रक्षा मंत्री के नेतृत्व में जरूरत पड़ने पर सेना को हथियार प्रयोग की छूट कतई गलत नहीं है। अब जब सीमा पर जरूरत पड़ी, तो बंदूकों का इस्तेमाल करने के लिए सेना को दिल्ली से पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सेना के कमांडर ही तत्काल फैसला ले सकेंगे। सबसे बड़ी बात कि यह फैसला तीनों सेनाओं के प्रमुखों की भागीदारी में हुआ है। सेना में ही नहीं, बल्कि देश में भी यह भावना रही है कि सेना के हाथ न बांधे जाएं, क्योंकि इससे दुश्मनों का मनोबल बढ़ता है।
हम अपने पड़ोसियों को ऐसे आश्वस्त क्यों करते रहे हैं कि हम उनका अहित नहीं करेंगे? यह नीति अच्छे दिनों के लिए तो ठीक है, जब सीमा विस्तार का इरादा किसी के मन में नहीं हो, लेकिन जब चीन खुलेआम भारतीय जमीन पर दावे करता है, तब ऐसे किसी समझौते या उदार व्यवहार को ताक पर रख देना ही बेहतर है। भारत ने चीन की किसी भूमि पर दावा नहीं किया है। चीन के सीमा विस्तार के खिलाफ भारत में उठने वाली आवाजों को खामोश ही रखा गया है। हम पड़ोसी धर्म निभाते रहे हैं, लेकिन चीन क्या कर रहा है, यह दुनिया को भी पता चलना चाहिए। हमारी सरकार को भी अपनी माटी की रक्षा के लिए साहस का परिचय देना चाहिए। भारत ने अपनी सैन्य-नीति में जो ताजा बदलाव किए हैं, वह कायम रहने चाहिए। जब चीन हमें निश्चिंत नहीं देखना चाहता, तब हम उसे क्यों बैठे-बिठाए आश्वस्त रखें?
घाटी-दर-घाटी लाठी-डंडों से धकियाते हुए सीमा में बदलाव का मौका उसे अब नहीं देना चाहिए। भारत के पास जो अपना प्रामाणिक कागजी नक्शा है, उसे जमीनी नक्शे से पुख्ता तौर पर मिला लेना चाहिए और देश को भी बताना चाहिए कि हमारी माटी कहां तक है। कम से कम यह तो बताया ही जा सकता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा कहां है? वास्तविक नियंत्रण रेखा का आदर करने के लिए चीन को विवश करना चाहिए और साथ ही, हमेशा के लिए सीमा विवाद को सुलझाने की पहल शुरू हो जानी चाहिए। ध्यान रहे, रूस ने जब कड़ाई का परिचय दिया, तभी चीन ने उसके साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाया। चीन-रूस के बीच 4,209 किलोमीटर लंबी सीमा का जब समाधान निकल सकता है, तो चीन-भारत की 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा का निपटारा कैसे नहीं हो सकता? सीमा विवाद का निपटारा हमेशा के लिए इसलिए भी जरूरी है, ताकि छोटे-छोटे घाव या विवाद की गुंजाइश न रहे। चीन अगर भारत के साथ तार्किक सीमा समाधान नहीं चाहता है, तो यह भी भारत-चीन के लोगों के साथ ही दुनिया को भी पता होना चाहिए। किसी की मंशा बुरी है, तो उसे उजागर करने में ही भारत की भलाई है। और एक बार जब मंशा स्पष्ट हो जाए, तो भारत को चीन के प्रति अपनी सामरिक नीति ही नहीं, बल्कि अपनी समग्र नीति का निर्धारण करना चाहिए।

 

दुर्ग / शौर्यपथ / निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा आज निगम अधिकारियों के साथ शहर का भ्रमण करते हुये बारिश को देखते हुये शंकर नगर नाला अंतर्गत दुर्गा चैक, विजय नगर, संतराबाड़ी, शदाणी नगर, केलाबाड़ी, पोटिया नाला, कसारीडीह नाला क्षेत्र को निरीक्षण किया गया। सभी नालों बारिश का पानी पूरे वेग से प्रवाह हो रहा है नालों के कारण किसी भी क्षेत्र में बारिश का पानी भरने की स्थिति नहीं दिखा । उन्होंने नाला में कार्य को संतोषजनक पाये। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, स्वच्छता निरीक्षक जसवीर सिंह भुवाल, मेनसिंग मंडावी, दरोगा राजू सिंह, सुपरवाईजर व अन्य उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि आयुक्त ने बताया बारिश के पूर्व सभी बड़े नालों की सफाई युद्ध स्तर पर कराया गया है। बारिश प्रारंभ होने के बाद आज नालों में बारिश के पानी का निकासी की स्थिति का जायजा लिया गया। जहॉ बारिश का पानी पूरे वेग के साथ निकासी हो रही हैं कहीं भी जलभराव की स्थिति नहीं है फिर भी निगम अधिकारियों को सजग रहने और स्थिति पर नजर रखने कहा गया है। इसके अलावा निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा निगम क्षेत्र में वर्षा ऋतु के दौरान आम नागरिकों को होने वाली समस्याओं का निराकरण करने निगम के समस्त कार्यपालन अभियंताओं, सहायक अभियंताओं, और उपअभियंताओं को सजग रहने निर्देश दिये हैं। उन्होनें आदेश जारी कर कहा है कि सभी अपने प्रभार के वार्डो में गहन निरीक्षण करें और कार्यवाही सुनिश्चित करें।
उन्होनें कहा बारिश के दौरान वार्डो के नालियों में पानी जाम, सड़क पर पानी भरने, के अलावा नालों में कचरा आकर फंसने और साफ-सफाई की समस्या आम नागरिकों को होती है। उन्होनें अधिकारियों को निर्देशित कर कहा बारिश के कारण एैसे नालियॉ जो क्षतिग्रस्त हो गया है उनका संधारण हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करें। साथ ही बारिश के कारण जाम नालियोंं को संबंधित सफाई दरोगा एवं सुपरवाईजर से संपर्क कर साफ करवाने का कार्य करायें। पोटिया नाला, केलाबाड़ी नाला, गिरधारी नाला, पुलगांव नाला एवं शंकर नाला में मिलने वाली समस्त नालियों जहॉ जाली लगाने का कार्य नहीं हुआ है वहॉ जाली लगाने हेतु संधारण मद से प्रस्ताव प्रस्तुत करें। उन्होनें कहा कार्यपालन अभियंता सहित सभी इंजीनियर अपने प्रभार क्षेत्र का निरंतर भ्रमण कर पेचवर्क कार्य करायें, ताकि शहर का आवागमन बाधित ना हो। उन्होनें कहा वार्ड निरीक्षण के दौरान वे संबंधित वार्ड पार्षद से अवश्य संपर्क कर समस्याओं का नियमानुसार निराकरण करायें।

मुंगेली / शौर्यपथ / राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के बैनर तले देश में राष्ट्रीय अध्यक्ष बीपी सिंह रावत व राज्य में प्रदेश संयोजक संजय शर्मा,वीरेंद्र दुबे व सह-संयोजक संजय उपाध्याय के नेतृत्व में प्रदेश के शिक्षकों एवं समस्त विभाग के कर्मचारियों द्वारा 21 जून को पुरानी पेंशन बहाली सहित अन्य मांगों को लेकर देशव्यापी पोस्टर बैनर प्रदर्शन किया गया। लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए कर्मचारियों द्वारा अपने-अपने घरों में प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के जिला संयोजक बलराज सिंह ने बताया कि छग सरकार ने अभी तक कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान नही दिया है। इसके कारण शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों के वेतन में भारी विसंगति व्याप्त है। जिसे दूर करने के लिए कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार मांग किया जाता रहा है।
इसके अलावा केंद्र सरकार से पुरानी पेंशन बहाली किए जाने की भी मांग भी लंबे अरसे से की जा रही है। लेकिन इस दिशा में सरकार ने अब तक कोई निर्णय नही लिया है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा जिला मुंगेली संयोजक दीपक वेंताल ने बताया कि रविवार को हुए देशव्यापी प्रदर्शन में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम पुरानी पेंशन बहाली, वार्षिक वेतनवृद्धि कटौती आदेश वापसी, वेतन विसंगति दूर करने सहित क्रमोन्नति व पदोन्नति की मांग का पोस्टर, बैनर बनाकर अपने घरों के दीवार में लगाया गया। साथ ही सेल्फी लेकर सोशल मीडिया, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भेज कर अपनी मांग को बुलंद किया।ताकि इसके माध्यम से उनकी आवाज सरकार तक पहुंच सके।
ब्लाक संयोजक शिव चंद्राकर, व नेमीचंद भास्कर ने बताया कि देश के सभी कर्मचारी एकजुट हैं। सरकार यदि हमारी मांगों पर ध्यान नही देगी तो आने वाले समय में समस्त कर्मचारी बड़ा देशव्यापी प्रदर्शन करेंगे।

मेलबॉक्स / शौर्यपथ /लद्दाख में चीन और भारत के सैनिकों के बीच आपसी टकराव के बाद देश में चीन के बने उत्पादों के बहिष्कार का अभियान चल पड़ा है। मगर इसे अमल में लाना आसान नहीं होगा, क्योंकि भारतीय सामान में भी चीन के कल-पुर्जे लगे होते हैं। आंकड़ों की मानें, तो पिछले साल अप्रैल से इस साल फरवरी तक देश में 7.5 अरब डॉलर के पीसीबी और मोबाइल फोन के पुर्जों का आयात हुआ, जिसमें 45 फीसदी पुर्जे चीन से ही मंगाए गए हैं। भले ही सरकार द्वारा आयात पर निर्भरता खत्म करने का आह्वान किया गया था, लेकिन सच्चाई यही है कि हम इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल उपकरण, दवाई, दूरसंचार उपकरण, उर्वरक, खिलौने, वाहन, सोलर उपकरण आदि क्षेत्रों में काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। जाहिर है, सिर्फ चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की बात कह देने से काम नहीं चलेगा। चीनी उत्पादों को हटाकर भारतीय उत्पादों को जगह देने के लिए हमें देश में फैक्टरियां लगानी होंगी और संयंत्रों की उत्पादन-क्षमता बढ़ानी होगी। इससे हालांकि, वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होगी, मगर चीन पर हमारी निर्भरता भी खत्म होगी। इससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बलराम साहू, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

मानसून में सावधानी
भारत में मानसून दस्तक दे चुका है। यह तब आया है, जब कोरोना महामारी लगातार अपने पांव पसार रही है। चूंकि बारिश अपने साथ कई बीमारियों को भी लेकर आती है, इसलिए इस बार हमें विशेष सावधानी बरतनी होगी। कोरोना के कारण अस्पतालों पर पहले ही काफी बोझ है। ऐसे में, अपने और स्वजनों की सेहत का पूरा ख्याल रखना आवश्यक है। जीवन में स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है, इसलिए सतर्क रहकर खुद को और अपने परिवार को बीमारियों से बचाना हमारा कर्तव्य होना चाहिए। इसके लिए हमें तमाम जरूरी उपाय करने चाहिए।
सुमित ओझा, बलिया

जिम्मेदार बनें
देश में हर दिन कोरोना के रिकॉर्ड मरीज सामने आ रहे हैं। कई तरह की पाबंदियों के बाद भी देश में मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। जब लॉकडाउन लगाया गया था, तब यही माना गया था कि लोग जवाबदेह बनेंगे और नियमों का कड़ाई से पालन करेंगे। मगर एक तरफ लॉकडाउन की समय-सीमा बढ़ती रही, तो दूसरी तरफ देश में संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होता रहा। रही-सही कसर अनलॉक-1 ने पूरी कर दी, जब कमोबेश सब कुछ खोल दिया गया। लोगों के आने-जाने में कोई पाबंदी न रहने की वजह से यात्राएं बढ़ गईं और संक्रमण का भी दूरदराज तक प्रसार हो गया। साफ है, अब हमें और सावधान व जिम्मेदार बनना होगा। अगर हम खुद को कोरोना-संक्रमण से बचाना चाहते हैं, तो हमें हर सरकारी और डॉक्टरी निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
रजत यादव, सुजानपुर, कानपुर

बेरोजगारी की काट
हमारे देश में बेरोजगारी पहले भी एक बड़ी समस्या रही है, लेकिन कोरोना ने इसे और गंभीर बना दिया है। सरकार की ओर से घोषित राहत-पैकेज से उम्मीद जगी है, लेकिन ईमानदारी के साथ इसका वितरण तो हो? अगर इस पैकेज का सही इस्तेमाल होता है, तो काफी उद्योग-धंधों का जन्म होगा, जिससे बेरोजगारी काफी हद तक दूर हो सकती है। आवश्यकता इस बात की भी है कि सरकारी मशीनरी में सब काम सिंगल विंडो द्वारा ऑनलाइन माध्यम से हो, ताकि काफी काम सुगमता से हो सकें। इसी के साथ, सरकार की मंशा के परिप्रेक्ष्य में लोकल यानी स्थानीय वस्तु और कार्य पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। यह मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी मांग है। इससे पलायन को भी रोका जा सकता है। बेरोजगारी-दर को यदि कम करना है, तो स्थानीयता को आगे बढ़ना ही होगा।
तनुज कुमार, मेरठ

 

ओपिनियान / शौर्यपथ / तमिलनाडु के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह अच्छी तरह से शासित राज्य रहा है। इस सूबे को यह उपलब्धि इसलिए हासिल हुई है, क्योंकि बीते वर्षों में इसने तमाम मुश्किलों का बखूबी सामना किया है। फिर चाहे वह संकट प्राकृतिक हो या सामाजिक विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा अथवा अर्थव्यवस्था से जुड़ा कोई मसला- तमिलनाडु बड़ी आबादी वाले राज्यों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता रहा है। मगर मौजूदा सूबाई सरकार जिस तरह से कोरोना वायरस महामारी से मुकाबिल है, उससे ये तमाम उपलब्धियां तार-तार हो रही हैं। वायरस संक्रमण के मामले में यह देश का तीसरा सबसे बड़ा सूबा बन गया है। यहां मृत्यु-दर भी धीरे-धीरे बढ़ रही है और चेन्नई के अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड कम पड़ने लगे हैं।
मुख्यमंत्री के पलानीसामी की मन:स्थिति इसी से जाहिर होती है कि पिछले हफ्ते पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था, ‘सिर्फ ईश्वर को पता है कि तमिलनाडु में कोविड-19 का अंत कब होगा’। शुरुआती गलतियों के बाद राज्य ने अपनी नीतियां फिर से बनाई हैं, लेकिन लगता है कि नुकसान हो चुका है। सवाल यह है कि पहले बेहतरीन काम करने वाले इसके प्रशासनिक तंत्र के साथ आखिर हुआ क्या?
उल्लेखनीय है कि यह राज्य 2004 की सुनामी से जल्द ही उबरने में कामयाब हो गया था, जबकि उस आपदा में इसका बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। 2015 की बाढ़ के समय भी इसने मिला-जुला प्रदर्शन किया था, क्योंकि तब भौतिक संपदा की हानि बेशक हुई, मगर अधिकतर लोगों की जान बचा ली गई थी। कई बड़े चक्रवातों का इसने बखूबी सामना किया है। पिछले वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर केंद्र ने जब ‘गुड गवर्नेंस इंडेक्स’ जारी किया था, तो उसमें भी यह सूबा शीर्ष पर था। कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों, वाणिज्य व उद्योग, मानव संसाधन विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक सुशासन, सामाजिक कल्याण व विकास, न्यायिक व सार्वजनिक सुरक्षा, पर्यावरण व जन-हितकारी शासन जैसे क्षेत्रों में मूल्यांकन के बाद यह सूची जारी की गई थी। पलानीसामी के लिए यह रैंकिंग नया जीवन लेकर आई, जो स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण मुश्किल में थे। इसी के बाद उनकी कुरसी पर नजर टिकाए नंबर दो नेता पन्नीरसेल्वन को किनारे करके वह अन्नाद्रमुक के सर्वेसर्वा बन गए।
मगर कोविड-19 के विरुद्ध तमिलनाडु की रणनीति इस बात को साबित करती है कि केंद्र प्रायोजित रैंकिंग क्षेत्रीय सरकार के प्रदर्शन का सही मापक नहीं हो सकती। अतीत में यह राज्य तीन स्तंभों के आधार पर कामयाब माना गया था- कुशल नौकरशाही, सामाजिक रूप से संवेदनशील राजनीतिक नेतृत्व और सजग जनता। अभी इन तीनों ही स्तंभों में दरार दिख रही है।
सबसे पहले बात नौकरशाही की। यहां के नौकरशाह अपने कुशल कामकाज के लिए जाने जाते हैं। इसी दक्षता के कारण तमिलनाडु अपनी सामाजिक योजनाओं को जनता तक पहुंचाता रहा है। बेहतर प्रशासन की वजह से राज्य में कानून-व्यवस्था भी अच्छी रही है। जाहिर है, यह राजनीतिक नेतृत्व है, जो फिसलता दिख रहा है। शीर्ष पर कोई मजबूत नेता न होने के कारण कमजोरी साफ-साफ दिख रही है। नतीजतन, नेतृत्व को पूजने वाली जनता भी अब बेचैन होने लगी है।
कोविड-19 के खिलाफ जो रणनीति बनाई गई, उसमें कई गलतियां रहीं। शुरुआत में जब तबलीगी जमात के संक्रमित प्रवासियों के बारे में पता चला, तो संक्रमण थामने के कदम जरूर उठाए गए, लेकिन उनकी धार्मिक पहचान भी बताई जाती रही। हालांकि, जल्द ही राज्य ने अपनी गलती दुरुस्त कर ली और साप्रदायिक उन्माद से बचने के लिए संक्रमितों का नाम लेना बंद कर दिया। इसी तरह, लॉकडाउन और संपर्कों को खोजने की रणनीति ने भी कुछ हद तक काम किया, पर कोयांबदु थोक मार्केट कोरोना का नया हॉटस्पॉट बन गया। यहां से खुदरा व्यापारी अपने-अपने जिलों में संक्रमण ले गए।
शुरुआत में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भास्कर कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का चेहरा बने। कुछ मौकों पर उन्हें मुख्यमंत्री के साथ देखा गया। पर तबलीगी जमात की वजह से संक्रमण में आया उछाल जैसे ही थमा, मुख्यमंत्री ने अति आत्मविश्वास में यह घोषणा कर दी कि महामारी सिमटने लगी है। हालात विपरीत होते ही उन्हें अपने शब्द वापस लेने पड़े। इसके समाधान के लिए उन्होंने मीडिया को जानकारी देने की जिम्मेदारी विजय भास्कर से वापस लेते हुए राज्य के स्वास्थ्य सचिव को दे दी। तब यही अनुमान लगाया गया कि मुख्यमंत्री को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा, क्योंकि उनके अन्य कैबिनेट सहयोगी विजय भास्कर के रोजाना मीडिया में आने से असहज हो रहे थे।
बहरहाल, स्वास्थ्य सचिव भी नाकाम साबित हुईं, क्योंकि संक्रमण फैलता रहा। आरोप उछला कि उन्हें चेन्नई नगर आयुक्त का साथ नहीं मिला, जो इसलिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह इलाका हॉट स्पॉट घोषित था। चेन्नई में संक्रमण बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री 2004 की सुनामी में बेहतर काम करने वाले आईएएस अधिकारी जे राधाकृष्णन को लेकर आए। मगर मुख्यमंत्री इसके बाद भी नहीं रुके। जल्द ही उन्होंने अपने पांच कैबिनेट मंत्रियों को शहर के विभिन्न हिस्सों का प्रभारी बनाया, फिर भी हालात नहीं संभले। मुख्यमंत्री को यह समझने में थोड़ा वक्त लगा कि बहुत सारे रसोइए शोरबे को खराब कर रहे हैं। पलानीसामी ने आत्मघाती गोल 19 जून को किया, जब उन्होंने 12 दिनों के सख्त लॉकडाउन की घोषणा कर दी, जबकि देश अनलॉक-1 की ओर बढ़ चला था।
नौकरशाही पर मुख्यमंत्री की कमजोर पकड़ के कारण जिलाधिकारियों ने चेन्नई से आने वाले प्रवासियों को रोकने के लिए अलग-अलग नियम लागू किए। हालांकि, खुद को निष्पक्ष बताने के लिए यहां का प्रशासन दूसरे राज्यों की तुलना में अधिक टेस्ट भी करने लगा है। शनिवार को यहां 35 हजार टेस्ट किए गए, जो पश्चिम बंगाल में पूरे महीने की जांच के बराबर है। जांच का दायरा बढ़ते ही संक्रमितों की संख्या में भी उछाल आने लगा है।
अभी भी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। बेशक जांच ज्यादा होने लगी है, पर संक्रमण-दर पिछले कुछ दिनों से या तो स्थिर है या कम हो रही है। राधाकृष्णन को मोर्चे पर लगाने के बाद जरूर समन्वित प्रयास होते दिख रहे हैं, मगर तमिलनाडु अब भी खतरे से उबरा नहीं है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)एस श्रीनिवासन, वरिष्ठ पत्रकार

 

दुर्ग ( रिसाली निगम )/ शौर्यपथ / रिसाली नगर निगम वार्डों की सम्पत्ति करदाता अब अपना भवनध्भूमि का टैक्स आन लाईन जमा कर सकते है। इसके लिए करदाताओं को डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट सीजी सूडा डॉट काम में जाकर रिसाली मुन्सिपल कार्पोरेशन में जाकर ऑन लाईन जमा कर सकेंगे। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2020-2021 का टैक्स 30 जून तक जमा करने पर करदाताओं को 6.25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। वहीं जुलाई माह में 5 प्रतिशत की छूट दी जायेगी । इसके अलावा 1 अगस्त से 30 सितम्बर तक 4 प्रतिशत की छूट तथा 1अक्टूबर से 30 नवम्बर तक छूट का लाभ भूस्वामि प्राप्त कर सकेंगे।
करदाताओं को विशेष सुविधा प्रदान करने हेतु रिसाली निगम की कर वसूली कंपनी स्पैरो सॉप्टेक लिमिटेड द्वारा सभी वार्डों में टैक्स वसूली हेतु कंपनी के कर्मचारी नियुक्त किये गये है। जहां पर करदाताओं को घर बैठे ही टैैक्स जमा प्राप्त कर सकते है।
करदाताओं को सम्पत्ति कर जमा प्राप्त करने हेतु रिसाली निगम कार्यालय में जिला प्रशासन की गाईड लाईन के तहत मास्क पहनकर व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा। अधिक जानकारी हेतु कंपनी के कर्मचारी वेदप्रकाश देशमुख मो. नं. 6260278583 से संपर्क कर सकते है। उक्त जानकारी रिसाली निगम के जनसंपर्क अधिकारी शैलेश साहू द्वारा दी गई है।

दुर्ग / शौर्यपथ / भाजपा राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय के जन्म दिवस पर आज जिला भाजयुमो पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने कोरोना वैश्विक महामारी से बचाव के लिए श्रमिकों आटो चालकों व फुटफाथ में भीख मांगने वालों लोगो को मास्क सेनेट्राईज बांटकर वृद्धा आश्रम में वृद्ध महिलाओं से केक कटवाकर जन्म दिन मनाया इससे पूर्व जल परिसर स्थित निवास पहुंचकर जिला भाजयुमो अध्यक्ष दिनेश देवांगन के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सादगी के साथ सुश्री सरोज पांडेय को फूल माला व बुके देकर जन्म दिन पर बधाई व शुभकामनाएं दिया।
वैश्विक महामारी कोरोना संकट के चलते भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद ने अपना जन्म दिवस सादगी पूर्ण ढंग से मनाने का निर्णय लेकर समर्थकों से अपील किया था कि इस संकट के चलते जिन लोगों के पास आय के स्रोत कम हो चुके हैं उनकी मदद करें तथा वे भूखे ना सोए इसकी भी चिंता सतत करते हुए उन्हें इस वायरस से सुरक्षित करने के सामग्री उपलब्ध कराए इसी भावना को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा पदाधिकारियों द्वारा आज उनके जन्मदिन पर उनसे मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं देने के पश्चात दुर्ग रेलवे स्टेशन जाकर पार्सल ऑफिस में हमाली करने वाले हमाल भाईयों,कुली भाईयों, सफाई कर्मचारियों को, स्टेशन में ऑटो चलाने वाले ऑटो चालकों को तथा फुटपाथ में रहने वाले लोगों को सैनिटाइजर एवं मास्क का वितरण पूरी तरह सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए किया गया तत्पश्चात वृद्धा आश्रम में जाकर वृद्धों के बीच सुश्री सरोज पाण्डेय जी के नाम से केक काटकर उन्हें मुंह मीठा कराया गया।
इस दौरान भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर देव नारायण तांडी, जिला महामंत्री नितेश साहू उपाध्यक्ष राहुल पंडित मंत्री राहुल दीवान शुभम ताम्रकार प्रचार मंत्री राजा महोबिया,गौरव शर्मा, उत्तम साहू ,अनुपम मिश्रा,कुलदीप सिंह,पार्षद मनीष साहू,अजय वैद्य मंडल अध्यक्ष अजय चंद्राकर तेखन सिन्हा ,नीलेश अग्रवाल ,अरुणी राहुल पाटिल,बंटी चौहान अजय वेद,चंद्रकांत साहू ,दीपक सिन्हा, विनीत ताम्रकार,संतोष कोसरे, टोमन साहू सनी राजपूत ,अभिषेक टंडन,पीयूष टंडन सहित बड़ी संख्या में भाजयुमो के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

// भाजपा के सांसदों को संकट काल में भी नहीं है छत्तीसगढ़ के मजदूर किसानों की चिंता
// गरीब कल्याण योजना से छत्तीसगढ़ को दूर रखना भाजपा सांसदों के अक्षम होने का प्रमाण
// मोदी के सामने छत्तीसगढ़ की हित अधिकार की बात रखने से डरते हैं भाजपा सांसद रेणुका सिंह, विजय बघेल, सुनील सोनी
// जनता केंद्रीय योजनाओं में अपने हक अधिकार की मांग रखने आत्मनिर्भर बने भाजपा सांसदों के भरोसे ना रहे
// केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह सुनील सोनी संतोष पांडे विजय बघेल जनता को जवाब दे केंद्रीय योजनाओं में मोदी सरकार क्यों कर रही है छत्तीसगढ़ के साथ भेदभाव?

   रायपुर / शौर्यपथ / मोदी सरकार के द्वारा शुरू की गई गरीब कल्याण योजना से छत्तीसगढ़ को दूर रखने की कांग्रेस ने कड़ी निंदा की प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने रेणुका सिंह पर तंज करते हुए पूछा अंधेरी कोठरी में छुपे बैठे हैं क्या मंत्री जी? मोदी सरकार ने गरीब कल्याण योजना से छत्तीसगढ़ को वंचित कर छत्तीसगढ़ के गरीब प्रवासी मजदूरों के साथ अन्याय किया है। मोदी सरकार के सामने खड़े होकर दबंगई दमदारी से छत्तीसगढ़ की हक अधिकार को रखने का साहस तो दिखाइए ?रेणुका सिंह जी मोदी जी के सामने अकेले बात करने में डर लगता हो तो सुनील सोनी,गुहराम अजगले, विजय बघेल ,संतोष पांडे,अरुण साव चुन्नीलाल साहू,मोहन मंडावी,गोमती साय,को भी साथ रख लीजिए और निडरता के साथ एक जुटता से छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता की आवाज को बुलंद करिए? छत्तीसगढ़ की जनता को आज अफसोस हो रहा होगा आखिर उन्होंने भाजपा के सांसदों को वोट क्यों दिया? जो संकटकाल में मदद करने के बजाए सिर्फ गाल बजाते फिर रहे है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने भाजपा को 9 सांसद दिए हैं दुर्भाग्य है भाजपा सांसदों के रहते छत्तीसगढ़ के साथ हमेशा केंद्रीय योजनाओं में भेदभाव हो रहा है। भाजपा सांसदो का रवैया हमेशा छत्तीसगढ़ विरोधी ही साबित हुआ है।कोरोना महामारी संकटकाल में प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग हो,कोरोना संकट से राज्य में बन्द पड़ी आर्थिक गतिविधयों को शुरू करने 30 हजार करोड़ की राहत पैकेज की मांग हो,छत्तीसगढ़ के हिस्से का खनिज रॉयल्टी एवं जीएसटी राशि की बकाया की मांग हो,मनरेगा की रोकी गई भुगतान राशि देने की बात हो,कोरोना से निपटने में सहयोग की बात हो,किसानों के धान खरीदी का मामला हो,मुद्रा योजना,किसान सम्मान निधि योजना में किसानों को लाभ दिलाने का मामला हो,उज्ज्वला योजना,प्रधानमंत्री आवास योजना, सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में छत्तीसगढ़ के हक अधिकार की बात हो भाजपा सांसदों ने मौन रहकर छत्तीसगढ़ के साथ किए जा रहे मोदी सरकार के भेदभाव का ही समर्थन किया है।
छत्तीसगढ़ की जनता ने 9 भाजपा के सांसदों को अपना प्रतिनिधि चुना है और भाजपा के सांसद जनता के प्रतिनिधि होने के दायित्व का पालन नहीं कर पा रहे हैं जनता के अधिकारों का रक्षा नहीं कर पा रहे ऐसे सांसदों को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ किये जा रहे मोदी सरकार के भेदभाव अन्याय पूर्ण नीतियों का निरंतर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार और कांग्रेस के सांसद विरोध कर रहे है। छत्तीसगढ़ के हक अधिकार को रोकने के प्रयासों का हर स्तर पर विरोध होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ को भी गरीब कल्याण योजना में तत्काल शामिल करने की मांग की है। दुख की बात है अभी तक भाजपा सांसदों ने इस विषय पर मौन मुद्रा में है।

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