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June 01, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

ओपिनियन /शौर्यपथ / भारत और चीन का आपसी रिश्ता एक नाजुक, गंभीर और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। केंद्र सरकार और देश के सामने बड़ा सवाल यही है कि गलवान घाटी में जो ताजा हिंसक झड़प हुई है, जिसमें हमारे 20 अफसर और जवान शहीद हुए, उसका किस तरह से जवाब दिया जाए? आगे की हमारी चीन-नीति क्या हो? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमें भारत-चीन संबंधों की हकीकत और पृष्ठभूमि पर गौर करना होगा।
सच्चाई यही है कि आजादी मिलने के बाद से ही चीन हमारे लिए सबसे बड़ी सामरिक चुनौती रहा है। इस सच की अनदेखी 1950 के दशक में भारत सरकार ने की। तब हमारा मानना था कि दोनों देश विकासशील हैं, इसलिए उनके हितों में समन्वय बनाया जा सकता है। मगर भारत जहां शांति के पथ पर चल रहा था, वहीं चीन ने अक्साई चिन को अपने कब्जे में ले लिया। जानकारों की मानें, तो उस वक्त बीजिंग सीमाओं को लेकर भारत से समझौता करना चाहता था, लेकिन भारतीय हुकूमत का अपनी भूमि से कोई समझौता न करना एक स्वाभाविक कदम था। सन 1962 में चीन ने भारत पर हमला बोल दिया, जिसमें हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस युद्ध के बाद भारत और चीन के संबंध सीमित हो गए। इस बीच चीन ने पाकिस्तान से अपने रिश्ते सुधारने शुरू कर दिए, ताकि इस्लामाबाद की नई दिल्ली के प्रति पारंपरिक दुश्मनी का वह फायदा उठा सके। उसने पाकिस्तान की आर्थिक-सामरिक ताकत को मजबूत किया, यहां तक कि उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम को भी बुनियादी तौर पर सहायता पहुंचाई। आज भारत को चीन-पाकिस्तान के इसी गठजोड़ का मुकाबला करना है।
चीन-भारत युद्ध के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दो बड़ी हिंसक घटनाएं हुई हैं। पहली वारदात साल 1967 में सिक्किम में हुई, जिसमें हमारे 88 सैनिक शहीद हुए थे, जबकि 300 से ज्यादा चीनी सैनिकों की जान गई। दूसरी झड़प 1975 में अरुणाचल प्रदेश में हुई थी। उसमें असम राइफल्स के जवानों पर हमला किया गया था। इसके बाद बीते 45 वर्षों में गलवान घाटी की घटना से पहले भारत और चीन के सैन्य ‘गश्ती’ दल में आपसी टकराव तो हुए, लेकिन किसी सैनिक ने जान नहीं गंवाई।
दरअसल, वर्ष 1988 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री-काल में भारत ने अपनी चीन-नीति बदली। यह तय किया गया कि बीजिंग के साथ सीमा-विवाद सुलझाने की कोशिश तो होगी, लेकिन साथ-साथ तमाम क्षेत्रों में उसके साथ आपसी सहयोग भी बढ़ाया जाएगा। तब से अब तक हर भारतीय हुकूमत ने कमोबेश इसी नीति का पालन किया है। यही कारण है कि आज भारत और चीन के आर्थिक व व्यापारिक रिश्ते काफी मजबूत व व्यापक हो गए हैं। दिक्कत यह रही कि 1988 की नीति में सीमा-विवाद सुलझाने की बात तो कही गई, लेकिन चीन ने कभी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि, 1993 के बाद दोनों देशों ने यह तय किया था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति के लिए वे आपस में विश्वास बहाली के ठोस उपाय करेंगे। फिर भी, समय-समय पर चीन का रवैया बदलता रहा। यहां तक कि नियंत्रण रेखा को लेकर उसने अपना रुख अब तक स्पष्ट नहीं किया है। इसी वजह से वास्तविक नियंत्रण रेखा के कई स्थानों पर दोनों देशों की सोच एक-दूसरे से अलग है, और दोनों के सैन्य दल आपस में गुत्थमगुत्था हो जाते हैं।
तो क्या 1988 से चल रही हमारी चीन-नीति पर अब पुनर्विचार करने की जरूरत है? यह तभी हो सकता है, जब भारत सरकार ही नहीं, पूरी सामरिक और राजनीतिक बिरादरी में चीन की चुनौती का सामना करने के लिए दृढ़ एकजुटता बने। बेशक 1978 में अपनी अर्थव्यवस्था को खोलने के बाद चीन ने बहुत तरक्की कर ली है। उसने मैन्युफैक्चरिंग के मामले में इतनी ताकत हासिल कर ली है कि उसे ‘दुनिया की फैक्टरी’ कहा जाने लगा है। वहां न सिर्फ हर तरह के उत्पाद बनने लगे हैं, बल्कि उनकी दुनिया भर में आपूर्ति भी होने लगी है। मगर यह भी सच है कि चीन के बढ़ते दबाव के कारण और अंतरराष्ट्रीय नियमों की उसके द्वारा की जा रही अनदेखी को देखते हुए पूरी दुनिया चिंतित है और कई देशों ने आपसी सहयोग बनाना शुरू कर दिया है।
हाल के वर्षों में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने जिस तरह से आपस में रिश्ते बढ़ाए हैं, उससे भी चीन को ऐतराज है। इन चारों देशों का यह सहयोग अब सामरिक स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, इस चतुष्कोणीय संबंध, यानी क्वाड के साथ-साथ रूस और चीन के साथ मिलकर भारत त्रिपक्षीय बातचीत भी कर रहा है, जिसका स्पष्ट संदेश है कि नई दिल्ली अपने हितों की रक्षा के लिए हर देश से संबंध बढ़ाना चाहती है। भारत बेशक अमेरिका के करीब जाता दिख रहा है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम वाशिंगटन के पिछलग्गू बनकर बीजिंग का विरोध करने को तैयार हैं। हरेक स्वतंत्र राष्ट्र की तरह हम भी अपनी कूटनीति खुद तैयार कर रहे हैं, जिसमें अपने हितों का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया जा रहा है।
जाहिर है, चीन की ताजा हिंसक कार्रवाई का हमें पूरी दृढ़ता के साथ मुकाबला करना होगा। हाल की घटनाओं को देखकर यही लगता है कि चीन हर हाल में भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को कम करना चाहता है। लेकिन हमें हर तरीके से अपने मान-सम्मान की हिफाजत करनी है। इसके साथ-साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा में बदलाव लाने की बीजिंग की हरेक कोशिश को भी नाकाम करना होगा, और हमें ऐसे उपाय भी करने पड़ेंगे कि वह मई, 2020 से पहले की स्थिति में लौटने को मजबूर हो। अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा करते हुए हमें चीन के साथ अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों की भी समीक्षा करनी होगी। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान पर संजीदगी से आगे बढ़ना होगा, और मैन्युफैक्र्चंरग के मामले में देश को आगे ले जाना ही होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) विवेक काटजू, पूर्व राजदूत

 

    दुर्ग / शौर्यपथ / शहर के निगम सरकार में कांग्रेस 20 सालो बाद सत्ता में आई है . निगम के सत्ता में आते ही प्रभारी विभागों में सबसे ज्यादा महत्तवपूर्ण विभाग की गिनती में पीडब्ल्यूडी विभाग आता है . निगम की कांग्रेस सरकार ने पीडब्ल्यूडी का प्रभार निगम के सबसे अनुभवी पार्षद अब्दुल गनी को दिया ताकि शहर के विकास कार्य में तेजी आये और गुणवत्ता से समझौता ना हो किन्तु निगम के इन 4-5 महीनो के कार्यकाल में ऐसे कई वाकये सामने आने लगे जिससे निगम के कार्यो में विरोधाभास नजर आने लगा . पीडब्ल्यूडी विभाग की बात करे तो जो कार्य पीडब्ल्यूडी में सदस्य रहते हुए तात्कालिक पार्षद को गलत लग रहा था आज वही पार्षद और पीडब्ल्यूडी प्रभारी अब्दुल गनी को सही लगने लगा ऐसा क्या हुआ इन ५ महीनो में जो प्रभारी के सोंच में आमूलचूल परिवर्तन दिखने लगा .
बता दे कि शिवनाथ नदी मुक्ति धाम के कार्य में 18  प्रतिशत बिलो की निविदा को एमआईसी की पहली बैठक में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निरस्त करने की अनुशंसा की गयी थी ये अलग बात है कि 18 प्रतिशत बिलों के इस कार्य जो सांसद सरोज पाण्डेय की अनुशंसा पर हो रहा था के बाद 22 प्रतिशत के कार्य की अनुशंसा को अनुमति प्राप्त हो गयी और बाद में १८ प्रतिशत के मुक्तिधाम के कार्य को भी अनुमति प्राप्त हो गयी एमआईसी की बैठक में . पूर्व पीडब्ल्यूडी प्रभारी दिनेश देवांगन ने शौर्यपथ से चर्चा में कहा कि जब कांग्रेस विपक्ष में थी तब पीडब्ल्यूडी विभाग में सलाहकार समिति में सदस्य रहे अब्दुल गनी १५-२० प्रतिशत बिलों के कार्यो की गुणवत्ता के निम्न स्तर होने की बात कर विरोध करते रहे किन्तु आज जब कांग्रेस की निकाय से लेकर प्रदेश तक सरकार है और अब्दुल गनी पीडब्ल्यूडी प्रभारी है तब उनकी यह निति अब क्यों परिवर्तित हो गयी अब २०-२५ प्रतिशत बिलों कार्य की गुणवत्ता का क्या होगा . क्या अब कांग्रेस के राज में निर्माण के कार्यो की सामग्री की कीमत कम हो गयी क्या महंगाई दर कम हो गयी क्या , मजदूरी कम हो गयी जो अब बिलों रेट पर भी कार्य की अनुशंसा कर रहे है पीडब्ल्यूडी प्रभारी गनी या उन्हें भी मालुम है कि 20-25 प्रतिशत बिलों रेट पर भी कार्य किया जा सकता है . अगर ऐसा है तो क्या सिर्फ तथ्यहीन विरोध कर विपक्ष में रहकर चर्चा में रहना चाहते थे और जनता को गुमराह कर रहे थे .
    बता दे कि वर्तमान में ही दुर्ग के एमआईसी भवन में पुताई के कार्य की बात तो ईई गोस्वामी ने बताई किन्तु पुताई , वालपेपर , कांच का दरवाज़ा , खिडकिया आदि के कामो की जानकारी के बारे में ईई गोस्वामी फाइल देख कर बताने की बात कर रहे है किन्तु महीने भर हो गए समय अभाव की बात कहकर जानकारी नहीं दे रहे क्या पीडब्ल्यूडी प्रभारी इस अनियमितता पर कोई सख्त कदम उठाएंगे या फिर मौन रहेंगे . जबकि दो तीन महीने पहले इ एम्आईसी भवन की पुताई को देखने से ही स्पष्ट नजर आता है कि किस स्तर का कार्य हुआ है क्या प्रभारी मामले की निष्पक्ष जाँच करेंगे या सिर्फ मौन रहकर ऐसे कार्यो को बढ़ावा देगे ?
कांग्रेसी कार्यकर्ता भी लगा रहे भेदभाव का आरोप .
    पीडब्ल्यूडी प्रभारी तकिया पारा वार्ड से आते है इसी वार्ड के एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने वार्ड की उपेक्षा की बात को सोशल मिडिया में पोस्ट की जबकि इस वार्ड से निगम के कद्दावर मंत्री गनी आते है अगर प्रभारी के वार्ड में ही कांग्रेसी कार्यकर्त्ता उपेक्षा का आरोप लगा रहे है तो फिर शहर की व्यवस्था और आम जनता का क्या होगा . ऐसी चर्चा है कि कांग्रेसी कार्यकर्त्ता के पोस्ट के बाद इस मामले पर हलकी नोकझोक भी हुई थी सच्चाई क्या है ये तो कांग्रेस का अंदरूनी मामला है किन्तु पोस्ट करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्त्ता सैफ ने फिर एक पोस्ट की जिसमे उनके द्वारा लिखा गया वाक्य // आज मुझे बहुत तकलीफ हुई नगर निगम दुर्ग जाने के बाद एक मेरे वरिष्ठ नेता मुझे कहते हैं तेरी उंगली बहुत चल रही है Whattsapp मे उंगली कट जाएगी क्या मैं कुछ गलत लिखता हूं // क्या कांग्रेस के वरिष्ट अब कार्यकर्ताओ के सवाल पर ऊँगली काटने तक की धमकी दे सकते है क्या कांग्रेस आलाकमान और शहर विधायक मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जाँच करेंगे . ये वही कार्यकर्ता है जो सालो से विपक्ष में रहने के बाद भी कांग्रेस का दामन नहीं छोड़े आज वही कार्यकर्ता ऐसे शब्द सुनकर निराश हो रहे है ....

राष्ट्र हित के लिये केंद्र शासन पर जनता का दवाब जरुरी


रायपुर / शौर्यपथ / कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश बिस्सा ने कहा की प्रधानमंत्री जी द्वारा चीन - भारत मुद्दे को लेकर 19 जून की शाम को सर्वदलीय बैठक आयोजित किये जाने का निर्णय कांग्रेस व जागृत जनता का उनके ऊपर बनाये गये दवाब का नतीजा है। राष्ट्र हित के लिये केंद्र शासन पर जनता का दवाब जरुरी होता है जिसे निरंतर कायम रखना होगा। तभी देश की व्यवस्था पुनः पटरी पर लौट सकेगी। बिस्सा ने भारत-चीन लद्दाख बॉर्डर पर शहादत को प्राप्त हुए 20 भारतीय जवानों जिसमें बस्तर का नव युवा गणेश कुंजाम भी था को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए कहा की इन सपूतों ने तो राष्ट्र के खातिर अपनी जान न्योछावर कर दी अब हम सब भारतवासियों का लक्ष्य होना चाहिए कि इनकी शहादत व्यर्थ ना जाए। यही उन सेनानियों प्रति सच्ची श्रद्धांजली भी होगी। जवानो की शहादत पर देश ने जो एक जुटता प्रदर्शित की है वह प्रशंसनीय है, इसकी निरंतरता कायम रहनी चाहिये।

बिस्सा ने कहा की आने वाले समय में “राष्ट्र खतरे में है, राष्ट्र को एकता की जरूरत है, राष्ट्र के प्रधानमंत्री के साथ सबको खड़े होकर चलना चाहिए, राष्ट्र प्रथम” जैसी बातें हमारा मुंह बंद कराने का प्रयास करेंगी लेकिन इससे राष्ट्रीय स्वाभिमान और संप्रभुता की रक्षा नहीं की जा सकेगी यह देशवासियों को समझना होगा। बिस्सा ने कहा की देश में जनमानस के विचारों की दिशा को तय करने वाली दो शक्तियों हावी है। पहला सोशल मीडिया जो पूरी तरह विदेशी लोगों के हाथों में है। दूसरा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिसका बहुत बड़ा भाग पूंजीपतियों के हाथों में है। यह दोनों कभी नहीं चाहेंगे कि कोई ऐसा व्यक्ति शासन करे जिसके ऊपर वे हावी ना हो सके। देशवासियों को इस बात पर गहराई से चिंतन कर अपनी जवाबदारियों का दायरा सुनुश्चित करना होगा।

बिस्सा ने कहा की जब किसी के ऊपर सत्ता में बने रहने की प्रबल इच्छा हावी हो जाती है तब राष्ट्र और जनता के प्रति उसकी प्राथमिकताएं नगण्य हो जाती है। जिस तरह पूरे देश में सत्ता में बने रहने तथा अपनी ताकत बनाए रखने के लिए खरीद-फरोख्त करती भाजपा की राजनीति को हम सब देख रहे हैं, इस बात का साक्षात प्रमाण भी है। इसकी गंभीरता को महसूस करना हम सब लोगों की प्राथमिकता होना चाहिए। बिस्सा ने कहा की हमारे प्रधानमंत्री बोलने में तो बहुत जोशीले हैं लेकिन रणनीति, कूटनीति, राष्ट्र नीति, विदेश नीति, अर्थ नीति सहित सभी नीतियों में बुरी तरह असफल साबित हुए हैं। जब राजा अक्षम निकल जाए तो जनता को अपनी सक्षमता प्रदर्शित करना चाहिए वरना राष्ट्रीय संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है। अब वक्त आ गया है कि जनता आगे बढ़कर प्रश्न करे तथा शासक को मजबूर करे की वो उत्तर दे ना कि प्रश्न के प्रति उत्तर में प्रश्न करे या कीचड़ उछाले।

भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग दुर्ग संभाग के पूर्व चेयरमैन मो शरीफ खान द्वारा आज न्यूज़ 18 इंडिया के एंकर व मैनेजिंग एडिटर अमीश देवगन को सुल्तान उल हिन्द हुज़ूर ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह को आक्रान्ता चिश्ती (हमला करने वाला चिश्ती) और लुटेरा चिश्ती विडियो में बोलकर उनकी सख्त तौहीन करते हुए देखा व सुना है जोकि न्यूज़ 18 इंडिया के वेरिफाईड ट्विटर अकाउंट पर अपलोड है जिसका लिंक नीचे दिया गया है | जिस पर अल्पसंख्यक नेता मो शरीफ खान ने कड़ी निंदा करते हुवे कहा कि, ख्वाजा गरीब नवाज चिश्ती विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हैं, उनकी दरगाह देशवासियों की आस्था का केंद्र है जहां पर हर धर्म व जाति के लोग आस्था के साथ हाज़री देते हैं | एंकर ने उनकी शान में तौहीन व गुस्ताखी करके करोड़ों मुसलमानों की आस्था व भावना को ठेस पहुंचाई है | जिससे भारत समेत दुनियाभर के मुसलमानों में रोष है और उनके करोड़ो मानने वालों के दिल आहत हुए हैं | न्यूज़ 18 इंडिया के एंकर व मैनेजिंग एडिटर अमीष देवगन व न्यूज़ 18 इण्डिया के (सी. ई. ओ.) राहुल जोशी के ख़िलाफ़ आज दुर्ग कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज की गई। जहाँ थाना प्रभारी द्वारा विवेचना कर जल्द ही कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया.
लिंक: https://twitter.com/News18India/status/1272538933310525441?s=20

अवधेश टंडन की रिपोर्ट -
हसौद / शौर्यपथ / जाँजगीर चापा जिला के हसौद थाना में हसौद निवासी प्रार्थी अर्जुन बर्मन ,पिता दुजराम बर्मन द्वारा 3 अप्रैल को लिखित में शिकायत स्नढ्ढक्र दर्ज कराई गई थी। की भोला कश्यप द्वारा अपने फेसबुक अकाउंट में सतनामी समाज के प्रति अभद्र टिप्पणी किया था जिससे सतनामी समाज के लोगो को आहत पहुचा था जिससे हसौद थाना भारतीय दंड सहिता 153 ए के तहत अपराध पंजीबध्द कर लिया गया था और विवेचना किया जा रहा था, जिस पर पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर ने गंभीरता से मामला को विवेचना मे लेने को निर्देश दिया गया जिससे इनके निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह , तथा अनुविभागीय अधिकारी डभरा/चंद्रपुर भवानी भांकर खुंटीया के मार्गदर्शन पर प्रकारण को विवेचना किया गया और विवेचना के दौरान मामले में धारा 506 भी जोड़ी गई व आरोपी भोला कश्यप पिता जीतराम कश्यप उम्र 28 वर्ष साकिन मल्दा थाना हसौद के विरूद्द धारा सादर का अपराध घटीत करना पर्याप्त सबूत पाये जाने से दिनांक 16 जून 2020 को आरोपी भोला कश्यप पिता जीतराम कश्यप ग्राम मल्दा थाना हसौद को विधिवत गिरप्तार कर न्यायिक रिमांड में भेज दिया गया है। उक्त कार्यवाई मे निरिक्षक देवेश सिंह राठौर , सउनि चंदन सिंह आरक्षक शिवगोपाल रात्रे का विशेष योगदान रहा है।

 दुर्ग / शौर्यपथ / एल.ए.सी में शहीद हुए देश के जवान वीरों को मोदी आर्मी संगठन ने आज अग्रसेन चौक में श्रद्धांजलि दी,इस दौरान चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग का फोटो और उनके देश के झंडे को फाङते हुए अपना आक्रोश प्रकट किया,ज्ञात हो की चीन लगातार भारतीय सीमा पर अपनी ओछी हरकतों से भारतीय सीमा पर कब्जा करने की फिराक में है,जिसका मुँह तोङ जवाब देने के लिए हमारे देश के जवान तत्पर हैं ऐसे में अपनी नाकामी देख चीनी सेना भारतीय जवानों के साथ झङप पर उतारु हो गई,इसी झङप के तहत हमारे देश के बीस जवान बीती रात शहीद हो गये,प्रदेश अध्यक्ष वरुण जोशी ने कहा संपूर्ण विश्व में कोरोना जैसी महामारी का जातक चीन दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए अंतराष्ट्रीय सीमा विवाद को जन्म दे रहा ताकि कोरोना को लोग भुलें,चीन की हकीकत विश्व के सभी देश जान गये हैं,और वह यह भुल रहा है की हमारी सेना मुँहतोङ जवाब देने में सक्षम है,अब हिंदी चीनी भाई भाई का नारा नहीं बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया जायेगा,आज चीन हमारे देश से कमाकर हमारे दुश्मन देशों को सहयोग कर रहा है,हमारे पङोसी देशों की मित्रता तोङ रहा है इससे चीन की यह चाल समझ आती है कि वह इसबार नापाक इरादों के साथ भारत से दुश्मनी बढा रहा है,हम भारत सरकार से निवेदन करते हैं चीन से व्यापारीकरण के सारे संबंध खत्म करे,देश को आत्मनिर्भर बनने का मौका दें,यदी हम आज भी चीन से दोस्ती की उम्मीद करते हैं तो भविष्य में हमें और भी नुकसान उठाना पङ सकता है,इस दौरान मोदी आर्मी के टिंकल ताम्रकर,यश कसार,उमेश शासवत,प्रेिंस कसेर,तजेंदर सिंह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उपस्थित थे!

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोना महामारी की वजह से हुए लॉकडाउन के बाद लाखों लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। किसी को रोजगार खोने का डर तो किसी को सेहत बिगड़ने की चिंता। इस माहौल में लोगों के मन में निराशा घर करने लगी है और वो अपने जीवन के लक्ष्य और सपनों को पूरा करने में खुद को असफल महसूस कर रहे हैं। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है तो निराशा के इस दौर में सफल होने के लिए याद रखें बस ये 5 मंत्र।

कड़ी मेहनत-
सफलता हासिल करने का पहला मंत्र है कड़ी मेहनत। याद रखें मेहनत का कभी कोई शॉर्टकर्ट नहीं होता है। अगर आप पहले ही हर कठिनाई से निपटने के लिए खुद को तैयार रखेंगे तो आपको भविष्य में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।

खुश रहें-
जीवन में वही व्यक्ति अपने सपनों को हासिल करता है जो खुद को नकारात्मक विचारों से दूर रखता है। हमेशा पॉजीटिव थिकिंग रखें। आपका खुश रहने का स्वभाव आपको जीवन में सही फैसला लेना में मदद करेगा।

फोकस बनाए रखें-
जीवन में वही व्यक्ति सफलता का स्वाद चखता है जो अपने लक्ष्य के प्रति मन को एकाग्र रखकर उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करता है। असल जीवन में भी अपनी प्राथमिकताओं को फोकस रखकर उन पर काम करें।

संघर्ष करें-
जीवन में हमेशा बड़े सपने देखें और उन्हें हासिल करने के लिए एक गोल बनाएं। जब भी आपको लगे कि आप असफल हो रहे हैं तो अपने सपनों को याद करें। खुद को यह अहसास करवाएं कि आपके लिए आपके सपने पूरे करना कितना जरूरी है।

अपनी कमी को न करें नजरअंदाज-
जीवन में कभी भी कोई व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता है। हर किसी में कोई न कोई कमी जरूर होती है। लेकिन जो व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें ही अपनी ताकत बना लेते हैं उन्हें जीवन में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान योगिनी एकादशी आती है। इस एकादशी पर भगवान श्री हरि की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इस एकादशी के व्रत का उतना ही महत्व है जितना 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का होता है। इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिए हुए श्राप का निवारण हो जाता है। यह एकादशी रोगों को दूर कर सुंदर रूप, गुण और यश प्रदान करती है।

यह एकादशी प्रायश्चित के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन श्री हरि का ध्यान करें। प्रातः काल स्नान कर सूर्य देवता को जल अर्पित करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। इस व्रत में जौ, गेहूं और मूंग की दाल से बना भोजन ग्रहण न करें। नमक युक्त भोजन न करें। दशमी तिथि की रात्रि में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। यह व्रत दशमी तिथि की रात्रि से शुरू होकर द्वादशी तिथि में प्रात: काल में दान कर्म के बाद संपन्न होता है। इस व्रत में रात्रि में जागरण अवश्य करना चाहिए। योगिनी एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत में पीपल के वृक्ष की पूजा अवश्य करें।

 

खेल /शौर्यपथ / ''मेरे क्रिकेट करियर में सौरव गांगुली की भूमिका सबसे बड़ी थी। एक समय में मैं ऐसे मोड़ पर था, जब मुझे समझ नहीं आता था कि कौन मेरे साथ है, क्योंकि लोग मेरे सामने कुछ कहते थे और पीछे कुछ।''

हरभजन सिंह अपने करियर में कई कप्तानों के साथ खेले हैं। दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन ने मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में डेब्यू किया। वह सौरव गांगुली के नेतृत्व में टीम के नियमित सदस्य बने। हरभजन 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 के विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में सदस्य रहे। 2007 के वनडे विश्व कप में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में टीम इंडिया पहले ही चरण में बाहर हो गई थी। कई कप्तानों के साथ खेलने वाले हरभजन सिंह का कहना है कु उनके करियर में सबसे ज्यादा प्रभाव सौरव गांगुली का रहा है। उन्होंने ही मुझे गेंदबाजी की छूट दी और निडर स्पिनर बनाया।

हरभजन सिंह इंडियन प्रीमियर लीग में अनिल कुंबले, विराट कोहली और रोहित शर्मा की कप्तानी में भी खेले। हरभजन पर किस कप्तान का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा? जब उनसे यह पूछा गया तो 39 साल के भज्जी ने सौरव गांगुली का नाम लिया।

भज्जी ने आकाश चोपड़ा के साथ एक यूट्यूब चैनल पर कहा, ''मेरे क्रिकेट करियर में सौरव गांगुली की भूमिका सबसे बड़ी थी। एक समय में मैं ऐसे मोड़ पर था, जब मुझे समझ नहीं आता था कि कौन मेरे साथ है, क्योंकि लोग मेरे सामने कुछ कहते थे और पीछे कुछ।''

उन्होंने आगे कहा, ''लेकिन सौरव गांगुली ने उस वक्त मेरा समर्थन किया, जब मेरे पास किसी का समर्थन नहीं था।'' हरभजन ने आकाश चोपड़ा के आकाशवाणी प्रोग्राम में बातचीत के दौरान कहा, ''चयनकर्ता मेरे खिलाफ थे। उन्होंने बहुत-सी बातें मेरे सामने कीं, जिन्हें मैं नहीं बता सकता। मेरे लिए गांगुली की तारीफ के लिए शब्द नहीं हैं। यदि वह कप्तान न होते तो मैं कह नहीं सकता कि दूसरा कप्तान मुझे सपोर्ट करता या नहीं।''

हरभजन ने कहा, ''अगर सौरव गांगुली नहीं होते तो मैं कभी 100 टेस्ट नहीं खेल पाता।'' हरभजन ने कहा, ''गांगुली हमेशा गेंदबाजों के साथ खड़े रहे। वह गेंदबाजों को मर्जी से गेंदबाजी की छूट देती थे।'' उन्होंने कहा, ''यदि आप कैच पकड़ने के लिए 4-5 फील्डर सामने चाहते हैं तो गांगुली वही करते थे। कभी-कभी वह वनडे में 6-7 ओवर फिंकवाते। मैं उनका शुक्रिया अदा करते। उन्होंने मुझे एक अच्छे गेंदबाज के रूप में तैयार किया। उनकी वजह से ही मैं साहसी और भरोसे का निडर स्पिनर बन पाया।''

 

मनोरंजन /शौर्यपथ / सुशांत स‍िंह राजपूत की आत्‍महत्‍या के बाद बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक तरफ सुशांत ने सुसाइड से बॉलीवुड सदमे में वहीं नेपोटिज्म को लेकर करण जौहर और खान परिवार को सोशल मीडिया पर टारगेट किया जा रहा है। हाल ही में सुशांत के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए फिल्म निर्देशक अभिनव कश्यप ने सलमान खान के भाई अरबाज खान ,सोहेल खान सहित उनके परिवार पर कई संगीन आरोप लगाए थे। कश्यप ने अपने आरोप में कहा था कि खान परिवार ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दिया है। अब इस मामले पर एक्टर अरबाज खान का रिएक्शन आया है और उन्होंने अपने बयान में अभिनव कश्यप पर लीगल कार्यवाई करने की बात कही है। वहीं

बॉम्बे टाइम्स से बात करते हुए अरबाज ने कहा कि 'हम उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।' अपनी बात रखते हुए अरबाज ने कहा कि जब से हमने 'दबंग 2' पर काम शुरू किया हमारी अभिनव से कोई बातचीत नहीं हुई है और मैं नहीं जानता ये सब कहां से आ रहा है। इस वजह से अब हम उनके आरोपों का सामना कानूनी रूप से करेंगे।

जानिए क्या अभिनव ने लिखा था फेसबुक पर

फेसबुक पोस्ट में अभिनव ने सलमान खान , सोहेल, अरबाज और सलीम खान पर आरोप लगाते हुए लिखा कि 'दबंग' को डायरेक्ट करने के बाद उन्होंने इसलिए 'दबंग 2' का निर्देशन नहीं किया क्योंकि अरबाज और सोहेल खान अपने परिवार के साथ मिलकर मुझे तंग करने लगे थे। श्री अष्टविनायक फिल्म्स के साथ मेरे दूसरे प्रोजेक्ट को भी बर्बाद कर दिया गया। अरबाज ने प्रोडक्शन कंपनी के हेड राज मेहता को फोन करके धमकी दी कि अगर मेरे साथ फिल्म करने की उन्हें सजा भुगतनी पड़ सकती है। मुझे साइनिंग अमाउंट भी लौटाना पड़ा मैंने वेकॉम पिक्चर्स की ओर चल पड़ा। इस बार सोहेल खान ने बीच में तांड अड़ा दिया और वायकॉम के सीईओ विक्रम मल्होत्रा को फोन कर दिया। इसके बाद रिलायंस एंटरटेनमेंट ने ही मेरी मदद की और हमने मिलकर 'बेशरम' को रिलीज किया।

अभिनव आगे लिखते हैं कि मुझे मेरे दुश्मन ठीक से पता है जो हैं सलीम खान, सलमान खान, अरबाज खान और सोहेल खान, लेकिन इन सब में सलमान सबसे जहरीला है. ये सब अपने पैसे, राजनीतिक पॉवर और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की मदद से लोगों को धमकाते आए हैं। अभिनव अपनी बात को अंत पहुंचाते हुए बताते हैं कि "सुशांत सिंह राजपूत अब आगे बढ़ चुके हैं और जहां भी हैं खुश हैं, लेकिन मैं इस बात का ख्याल रखूंगा कि कोई और मासूम काम की कमी और बॉलीवुड में सम्मान की कमी के कारण इस तरह से खुद की जान न ले।

अभिनव का दूसरा पोस्ट

एक दूसरे पोस्ट में अभिनव लिखते हैं कि किसी ने अभी-अभी मेरे ईमेल अकाउंट में लॉग इन करने की कोशिश की । अब यह दिलचस्प हो रहा है... खान इतने परेशान क्यों हो रहे हैं...?? वे क्या छुपा रहे हैं..?? वे मुझे चुप करने के लिए बेताब क्यों हैं..??

 

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