September 18, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

      शौर्यपथ लेख / 15 अगस्त 2026 को भारतवासी आजादी के 80 वां पर्वोल्लास से सराबोर होंगे।खुले आसमान में लहराते तिरंगा तले जयहिन्द, भारत माता की जय का उ‌द्घोष जनमन को भावविभोर कर देगा। यह विशेष दिवस आत्मविश्लेषण-आत्मचिंतन की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण दिवस होता है। यही वजह है कि देशभर में आजादी के पूर्व और बाद की स्थिति "अतीत से अद्यतन" की चर्चा इस पर्व पर विविध माध्यमों से की जाती है। वीर-वीरांगनाओं के त्याग- समर्पण का स्मरण करके उन्हे शत शत नमन् किया जाता है।
    स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास बताता है कि 15 अगस्त 1947 के पहले अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और बढ़ते अत्याचारों के सामने हर हिंदुस्तानी दासत्व में जीने को विवश हो चला था। दिन में भी घटाटोप अंधियारी रात का अहसास होता था। ऐसे दमघोटू माहौल से आक्रोशित देशभक्त हिंदुस्तानियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंक दिया। 1857 की क्रांति के साथ ही हर ओर भारत छोड़ो का नारा गूंज उठा था। उस दौर में क्रांतिकारियों के हृदय में धधकती ज्वाला को ओजस्वी शब्दों में चित्रित करते हुए कविश्री लिखते हैं उठो जवानों नाम मिटा दो,पापी और शैतान का, दुश्मन की छाती में गाड़ो झण्डा हिन्दुस्तान का।
    स्वतंत्र भारत की पवित्र धरा पर खुली हवा में सांस लेते हुए देशवासियों ने आज तक जो कुछ भी अर्जित किया है, वह प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से तीन सौ वर्षों की गुलामी की पीड़ा सहे वीर पूर्वजों की देन है। फिरंगियों के खिलाफ विद्रोह की मशाल लेकर क्रांति में कूदे, शहीद हुए माँ भारती के सपूतों की कुर्बानी का सुफल है।
    इस नाते सदैव नवपीढ़ी को यह स्मरण रखना होगा कि उन्हें विरासत में मिली आजादी की पूंजी खैरात की नहीं है। यह वीर वीरांगनाओं की कठोर तपस्या से तैयार की गई फसल से उपजी पूंजी है। इसकी हिफाजत हर हाल में किसी भी कीमत पर करने के लिए युवा वर्ग को तत्पर रहना होगा।
    प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है कि आजादी की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के सपूतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1824 में ही छत्तीसगढ़ के वीर आदिवासी सपूतों ने फिरंगियों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। आदिवासी सेनानियों की हुंकार से ताकतवर अंग्रेज हुकुमत थरथर कांपती थी।
    ऐसे पारंपरिक शौर्य का प्रदर्शन करने वालों में छत्तीसगढ़ महतारी के महावीर बेटो में वीर गेंदसिंह, गुंडापुर, इंदरू केवट, वीरनारायण सिंह, राजा भेरम देव आदि शामिल है। उन दिनों सोना खान के सपूत वीर नारायण सिंह का शौर्य और साहस जनगीत बनकर गुंजता था- परन ठान के,कफन बांध के,भारत माँ के करीन बिचार,गरजिस बधवा बीर नारायण, लिन तलवार निकाल।
    स्वराज पथ गामियों में अग्रणीय ऐसे आदिवासी समाज की विशेषताओं को अभिव्यक्त करती हैं ये पंक्तियां- छत्तीसगढ़ के आदिवासी भाईयों के मिजाज लाजवाब है, गणित की किताब में ये रखते गुलाब है।
    फिरंगियों के राज को नेस्तनाबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ की वीरांगनाओं ने भी ब्रिटिश हुकूमत की ईंट से ईंट बजा दी थी। रणचंडी की तरह हूंकार भरती रौद्ररुपा डॉ. राधाबाई, रोहणी बाई परगनिहा, केतकी बाई, बेला बाई, फूलकुंवर बाई और मीनाक्षी देवी (मिनीमाता) की राष्ट्रवादी भावना के आगे अंग्रेजों के नापाक ईरादे ताश के पत्तों से बने मीनार की भांति भरभरा कर गिरते-टूटते चले गए थे।
    अंततः अंग्रेजों को मां भारती के वीर लाल और ललनाओं के सामने झुकना पड़ा। पराधीनता की बेड़ियों से माँ भारती को मुक्ति मिल गई। मां भारती की आन- बान- शान के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले शूरवीरों की शहादत की कीमत चुकाना असंभव है। इसे अजर अमर बनाए रखने के लिए महान विभूतियों की तस्वीरें केवल शासकीय कार्यालयों में ही नहीं घर-घर में भी लगनी चाहिए।
    स्वतंत्रता सेनानियों ने देशवासियों पर जो उपकार किया है, वह अमूल्य है। अतुल्य है। वे पूज्य है अतः आजादी के पर्व पर एक नया संकल्प लें कि घर घर तिरंगा फहराएंगे। दीवारों पर परिवार के पूज्य सदस्यों की भांति कम से कम एक महान विभूति की तस्वीर लगाएंगे। यह नई पहल आत्मसुख देगी। नई पीढ़ी के मानस पटल पर देशभक्ति का बीजारोपण करने में अवश्य कारगर होगी। शूरवीरों को नमन करते हुए कहें दिल से - यही पूजा सुबह-शाम कर लें, देश के अमर शहीदों को बस प्रणाम कर लें।


    विजय मिश्रा 'अमित' अग्रोहा कॉलोनी रायपुर (छग) 492013 मो.9893123310

    बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से बिलासपुर जिले के पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बिलासपुर के ग्राम रहंगी (बिल्हा) में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। 100 करोड़ से ज्यादा की यह स्वास्थ्य परियोजना है।

    श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी सुलभ

    बिलासपुर जिले में लंबे समय से पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के उपचार के लिए ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना की मांग की जा रही थी। श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।

    बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति

    श्रम मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों को सफलता मिली। 30 जून 2026 को आयोजित ईएसआईसी कॉरपोरेशन की 198 वीं बोर्ड बैठक में बिलासपुर के रहंगी ग्राम में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान की गई। अस्पताल के स्थापित होने से बिलासपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में ईएसआईसी से जुड़े पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रित परिवारजनों को बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे श्रमिक परिवारों को उपचार के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भरता भी कम होगी।

    पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का मिलेगा लाभ

    श्रमिक हितों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिलासपुर में ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना से जिले के हजारों पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?

    वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।

    सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?

    सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।

    प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”

    इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।

    " लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "

    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में NEET और छात्र आंदोलनों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध बुधवार को उस समय और तीखा हो गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को 24 घंटे की खुली चर्चा की पेशकश कर दी। शाह ने कहा कि यदि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष को लिखित में चर्चा के लिए देता है, तो वह बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक सदन में मौजूद रहकर हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

    “संसद में लगातार आ रहा हूं, चैंबर में बैठता हूं”

    अमित शाह ने विपक्ष की उन टिप्पणियों पर भी पलटवार किया, जिनमें उनके संसद में मौजूद नहीं रहने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। गृह मंत्री के मुताबिक, मानसून सत्र शुरू होने के बाद से वह नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने चैंबर में बैठ रहे हैं। उनका तर्क था कि विपक्ष के लगातार हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने के कारण सदन के भीतर जाकर चर्चा का अवसर नहीं मिल रहा था।

    शाह ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह चर्चा के लिए तैयार है तो सरकार भी पीछे नहीं हटेगी और वह स्वयं लंबे समय तक सदन में रहकर सवालों का जवाब देंगे।

    NEET और छात्र आंदोलन पर 24 घंटे की बहस का प्रस्ताव

    गृह मंत्री की पेशकश का केंद्र NEET से जुड़े विवाद और छात्र आंदोलनों पर हुई पुलिस कार्रवाई है। शाह ने कहा कि विपक्ष लिखित रूप से चर्चा की मांग करे तो वह 24 घंटे तक सदन में मौजूद रहकर मुद्दे पर जवाब देने को तैयार हैं।

    इस प्रस्ताव को सरकार की ओर से संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष की मांग है कि छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई और कथित बल प्रयोग पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब दिया जाए।

    राहुल गांधी का पलटवार—“हमें लेक्चर नहीं, जवाब चाहिए”

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह की पेशकश को स्वीकार नहीं किया। राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष गृह मंत्री का उपदेश सुनने के लिए चर्चा नहीं चाहता, बल्कि वह यह जानना चाहता है कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी।

    छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग का मुद्दा राहुल गांधी पहले भी संसद के बाहर और सार्वजनिक बयानों में उठा चुके हैं तथा उन्होंने अमित शाह की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।

    केरल का नाम ‘केरलम’ करने वाला विधेयक भी चर्चा में

    इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह द्वारा Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 और National Co-operative Development Corporation (Amendment) Bill, 2026 को आगे बढ़ाए जाने का कार्यक्रम भी संसद की कार्यवाही में रहा। केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाले विधेयक को लोकसभा ने पारित कर दिया है।

    संसद में टकराव बरकरार

    एक ओर सरकार चर्चा के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से जवाबदेही की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में अमित शाह की 24 घंटे की चर्चा की पेशकश और राहुल गांधी का उसे ठुकराना संसद के मानसून सत्र में सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव को और स्पष्ट करता है।

    अब निगाह इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष इस प्रस्ताव के जरिए संसद की कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर सहमत होते हैं या NEET और छात्र आंदोलन का मुद्दा आगे भी सदन में गतिरोध का कारण बना रहता है।

    By - नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?

    वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।

     

    सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?

    सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।

    प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”

     

    इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।

    " लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "

    अंबिकापुर साइबर ठगी मामले की जांच में गंभीर आरोप | हवाला के जरिए दो किस्तों में रकम देने का दावा | WhatsApp कॉल रिकॉर्डिंग शिकायत के साथ पेश किए जाने की बात

    अंबिकापुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ कैडर के अंडर-ट्रेनिंग IPS अधिकारी राहुल बंसल पर अंबिकापुर में साइबर ठगी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान करीब ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित रकम हवाला के जरिए दो किस्तों में दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और CBI निदेशक से रिपोर्ट तलब की है।

    साइबर थाने की जांच से जुड़ा है मामला

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अंबिकापुर साइबर थाने से जुड़े मामले की जांच के दौरान IPS अधिकारी राहुल बंसल और दो पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका रही। शिकायत में कथित लेन-देन से संबंधित WhatsApp कॉल की रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई है।

    शिकायतकर्ता ने जून 2026 में CBI निदेशक को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी। शिकायत में कथित रिश्वतखोरी और उससे जुड़े लेन-देन की जांच की मांग उठाई गई है।

    अदालत ने मांगी दो स्तरों पर रिपोर्ट

    मामले में दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के DGP से पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक रिपोर्ट और CBI निदेशक से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

    अदालत का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शिकायत में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अदालत ने आरोपों को सही ठहराने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। आरोपों की सत्यता जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

    कौन हैं राहुल बंसल?

    राहुल बंसल मूल रूप से जयपुर के रहने वाले बताए गए हैं। उन्होंने B.Tech की पढ़ाई के बाद UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2021 उत्तीर्ण की और उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वे अगस्त 2025 से सरगुजा क्षेत्र में पदस्थ हैं।

    अब जांच की दिशा पर नजर

    करीब ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत, हवाला के जरिए भुगतान और WhatsApp कॉल रिकॉर्डिंग जैसे आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब निगाहें DGP और CBI निदेशक की रिपोर्ट पर रहेंगी। इन रिपोर्टों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के पीछे प्रथम दृष्टया क्या तथ्य सामने आए हैं और अब तक संबंधित एजेंसियों ने क्या कार्रवाई की है।

    महत्वपूर्ण: राहुल बंसल और अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम सत्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

    *केन्द्रीय मंत्री ने डीपीआर तैयार करने अधिकारियों को दिए निर्देश*

    *बायपास बनने से यातायात सुगम होने के साथ दुर्घटनाओं पर लगेगा अंकुश*

    *अंतर्राज्यीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा*

    रायपुर / छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास मंत्री एवं रामानुजगंज विधायक श्री रामविचार नेताम ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी से सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मंत्री श्री गडकरी से इस दौरान बलरामपुर एवं रामानुजगंज शहरों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-343 पर बायपास मार्गों की स्वीकृति का आग्रह किया। श्री नेताम ने दोनों शहरों में बढ़ते यातायात दबाव, दुर्घटनाओं की आशंका तथा अंतर्राज्यीय वाणिज्यिक गतिविधियों को देखते हुए 4-लेन बायपास निर्माण को अत्यंत आवश्यक बताया। केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने दोनों मांगों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करते हुए शीघ्र स्वीकृति की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने मंत्री श्री नेताम की मांग पर शीघ्र डीपीआर तैयार करने अधिकारियों को निर्देशित किया।

    *छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय मार्ग*

                 मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि अम्बिकापुर-रामानुजगंज-गढ़वा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-343 छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय मार्ग है। इस मार्ग से यात्री बसों, छोटे-बड़े व्यावसायिक वाहनों, भारी मालवाहकों तथा आम नागरिकों का बड़ी संख्या में आवागमन होता है। प्रशासनिक एवं विशिष्टजनों का आवागमन भी इसी मार्ग से होता है। मंत्री श्री नेताम ने बताया कि बलरामपुर जिला मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग-343 के शहरी हिस्से में स्थित है। शहर के दोनों ओर घनी व्यावसायिक एवं आवासीय बसाहट होने के कारण छोटे वाहनों से लेकर भारी मालवाहकों तक का आवागमन शहर के भीतर से होता है। इससे आए दिन यातायात जाम की स्थिति निर्मित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। 

    *नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की मिलेगी सुविधा* 

             केंद्रीय मंत्री से बलरामपुर शहरी क्षेत्र के लिए लगभग ’’10 किलोमीटर लंबाई के 4-लेन बायपास’’ को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। प्रस्तावित बायपास बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसी प्रकार रामानुजगंज शहर के लिए लगभग ’’8 किलोमीटर लंबाई के 4-लेन बायपास’’ की मांग भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी। मंत्री श्री नेताम ने बताया कि रामानुजगंज अंतर्राज्यीय आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है। शहर के भीतर ही स्कूली बच्चों, स्थानीय नागरिकों, शासकीय एवं निजी वाहनों के साथ-साथ भारी व्यावसायिक एवं मालवाहक वाहनों का आवागमन होने से यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    *छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच अंतर्राज्यीय व्यापार एवं परिवहन को मिलेगी गति* 

               मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण एवं यातायात में संभावित वृद्धि के साथ आने वाले समय में शहरी क्षेत्र में यातायात संबंधी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। ऐसे में समय रहते बायपास का निर्माण शहर की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और नगरीय विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि बलरामपुर और रामानुजगंज में बायपास मार्गों का निर्माण केवल यातायात सुगमता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच अंतर्राज्यीय व्यापार एवं परिवहन को गति मिलेगी। भारी वाहनों को शहरों के बाहर से सुगम मार्ग उपलब्ध होने से परिवहन समय और यातायात दबाव में कमी आएगी। इसके साथ ही दोनों शहरों में व्यवस्थित नगरीय विकास, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और राजस्व वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

              मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री को यह भी अवगत कराया कि एनएच-343 के कॉरिडोर योजना के अंतर्गत निर्माण कार्य के लिए क्रमशः 397.44 करोड़ रुपये और 199.05 करोड़ रुपये की स्वीकृति पूर्व में प्रदान की जा चुकी है तथा संबंधित निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने इसी क्रम में बलरामपुर एवं रामानुजगंज के शहरी हिस्सों में बायपास निर्माण को भी प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

    *बायपास निर्माण से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सड़क कनेक्टिविटी होगी मजबूत* 

              केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने दोनों बायपास प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए शीघ्र स्वीकृति की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बायपास निर्माण से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ क्षेत्र के आर्थिक एवं नगरीय विकास को नई गति मिलेगी।

    रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और समाजसेविका स्वर्गीय मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि मिनीमाता जी ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में समाज से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठाई। 

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समाज एवं महिलाओं के उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिनीमाता जी के नाम पर राज्य सरकार द्वारा राज्य अलंकरण पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी का सेवाभावी व्यक्तित्व हम सभी को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

    *मुख्यमंत्री निवास नया रायपुर में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा छत्तीसगढ़ का पहला लोकपर्व हरेली*

    *खेती-किसानी, लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की दिखेगी जीवंत झलक*

    *गेड़ी, पारंपरिक खेल और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंगों से सराबोर होगा मुख्यमंत्री निवास*

      रायपुर / छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जनजीवन की पहचान हरेली तिहार के अवसर पर 12 अगस्त को मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हरेली का यह लोकपर्व पूरे पारंपरिक उल्लास और छत्तीसगढ़ी रंग में मनाया जाएगा। संस्कृति विभाग एवं कृषि विभाग द्वारा आयोजित यह विशेष कार्यक्रम प्रातः 10 बजे प्रारंभ होगा।

    हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख और पहला लोकपर्व माना जाता है। खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अच्छी फसल की कामना और ग्रामीण जीवन के सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। सावन की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला हरेली तिहार प्रदेश की कृषि प्रधान संस्कृति और प्रकृति के साथ छत्तीसगढ़ के आत्मीय संबंध को अभिव्यक्त करता है।

    हरेली के दिन किसान अपने कृषि उपकरणों और हल-नांगर की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। खेती में उपयोग होने वाले औजारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। गांवों में घरों और चौपालों में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हरेली की खुशियां साझा की जाती हैं। गेड़ी चढ़ने की परंपरा और विभिन्न छत्तीसगढ़ी खेल इस पर्व के उत्साह को और बढ़ाते हैं।

    मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ की इन्हीं लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक देखने को मिलेगी। आयोजन स्थल को हरेली की भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश में सजाया जाएगा। खेती-किसानी से जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं, कृषि उपकरणों और लोक संस्कृति के विविध प्रतीकों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में हरेली से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों और लोक संस्कृति के विविध रंगों के साथ उत्सव का वातावरण निर्मित होगा। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन की समृद्ध विरासत से जोड़ना भी है।

    हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की उस जीवन पद्धति का प्रतीक है जिसमें प्रकृति, कृषि और संस्कृति एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हैं। यह पर्व किसान और खेती के सम्मान के साथ सामूहिकता, प्रकृति संरक्षण और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, तीज-त्योहारों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार का आयोजन इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ की माटी, महतारी, खेती-किसानी और लोकजीवन के गौरव का उत्सव बनेगा।

    रायपुर / छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।

    *मक्का की खेती से शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह* 

            राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।

    *सब्जियों से मक्का की ओर रुख, बढ़ी उत्पादन और आय की उम्मीद*

            कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

    *मुख्यमंत्री एवं शासन का जताया आभार*

          कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।

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