January 26, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन में भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ी की प्रेरणा से बस्तरिया नौजवान खिलाड़ियों का बढ़ा जोश

जगदलपुर, शौर्यपथ। संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक का भव्य समापन समारोह इस बार एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। इस अवसर पर भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में से एक, बाईचुंग भूटिया ने कार्यक्रम में शिरकत की, जिनकी उपस्थिति ने पूरे माहौल में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। अपने चहेते खिलाड़ी को अपने बीच पाकर बस्तर के नौजवान खिलाड़ी अत्यधिक उत्साहित और रोमांचित हो उठे।

      बाईचुंग भूटिया, जिन्हें भारतीय फुटबॉल में सिक्किमी स्निपर के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर पर जगदलपुर पहुँचे थे। उन्होंने केवल अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उनका उत्साह बढ़ाया और खेल के प्रति उनके समर्पण तथा जुनून की सराहना की।

      बाईचुंग भूटिया का नाम भारतीय फुटबॉल के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वह यूरोपियन क्लब (इंग्लैंड के बरी फुटबॉल क्लब) के लिए खेलने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने थे, जिसने भारतीय प्रतिभा के लिए वैश्विक द्वार खोले। लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का उनका रिकॉर्ड आज भी प्रेरणास्रोत है। खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार और देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया है।

     एक ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया, उनके प्रेरक शब्द और सहज उपस्थिति ने बस्तर के खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि वे भी बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। स्थानीय युवा खिलाड़ियों की आँखों में एक चमक और अपने सपनों को साकार करने का एक नया जोश साफ दिखाई दिया। बस्तर ओलम्पिक का यह समापन समारोह अब बाईचुंग भूटिया की यादगार यात्रा के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा, जिसने बस्तर की खेल प्रतिभाओं को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है।

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलम्पिक का समापन समारोह स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहाँ नारायणपुर के मलखम्भ खिलाड़ियों ने अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन से पूरे स्टेडियम को स्तब्ध कर दिया। इस प्राचीन भारतीय कला और खेल के महारथियों ने अपनी अद्भुत साहस और उत्कृष्ट सन्तुलन का ऐसा नजारा पेश किया कि दर्शक अपनी सीटों से हिल नहीं पाए और दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।

       खिलाड़ियों ने ऊँचे, चिकने लकड़ी के खंभे और लोहे के पतले खंभे पर जिस सहजता और नियंत्रण के साथ जोखिम भरे आसन किए, वह उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है। गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती उनकी कलाबाजियाँ और शारीरिक लचीलापन हर किसी के लिए प्रेरणादायक था। यह प्रदर्शन केवल खेल का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि देश के इस पारंपरिक खेल की गरिमा और सुंदरता का एक जीवंत प्रमाण था। नारायणपुर के इन युवा खिलाड़ियों के हैरतअंगेज प्रदर्शन ने बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर को न केवल यादगार बना दिया, बल्कि इस क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं की उत्कृष्टता को भी राष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर दिया।

केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की गरिमामयी उपस्थिति में गूंजेगी कलम के सिपाहियों की आवाज

कोंडागांव, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा ने जानकारी दिए की आगामी 21 दिसंबर को आयोजित होने वाले विशाल 'पत्रकार महासम्मेलन' की रूपरेखा पूरी तरह से तैयार कर ली गई है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इस महासम्मेलन के सफल क्रियान्वयन के लिए अंतिम मुहर लगा दी गई है, जिसके बाद से तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है।

 

लखीराम ऑडिटोरियम में होगा भव्य समागम

प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल ने बताया है की महासम्मेलन के लिए बिलासपुर के प्रतिष्ठित लखीराम ऑडिटोरियम का चयन किया गया है। 21 दिसंबर को यह ऑडिटोरियम प्रदेश भर से जुटने वाले पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और समाज के प्रबुद्ध जनों से खचाखच भरा रहेगा। कार्यक्रम की भव्यता को देखते हुए तैयारियों को युद्ध स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। मंच सज्जा से लेकर अतिथियों  के स्वागत और भोजन तक की व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है, ताकि कार्यक्रम में शामिल होने वाले किसी भी पत्रकार साथी को असुविधा का सामना न करना पड़े।

 

केंद्रीय मंत्री तोखन साहू होंगे मुख्य अतिथि

प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा के द्वारा बताया गया कि इस महासम्मेलन की गरिमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संगठन में उत्साह का माहौल है। केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति न केवल इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए शासन और प्रशासन भी गंभीर है। उम्मीद की जा रही है कि श्री तोखन साहू पत्रकारों के हितों, उनकी सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखेंगे और संगठन का मार्गदर्शन करेंगे।

 

पत्रकारिता के सरोकार और भविष्य पर मंथन

छ.ग. प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश कोषाध्यक्ष  अध्यक्ष राजेंद्र कश्यप ने कहा यह आयोजन केवल एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि पत्रकारिता के गिरते स्तर को संभालने और पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक वैचारिक महाकुंभ होगा। महासम्मेलन के दौरान पत्रकार सुरक्षा कानून, फील्ड रिपोर्टिंग में आने वाली चुनौतियां और डिजिटल युग में मीडिया की भूमिका जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। संगठन का उद्देश्य प्रदेश के सुदूर वनांचलों से लेकर शहरों तक काम करने वाले पत्रकारों को एक मंच पर लाना है, ताकि वे अपनी आवाज बुलंदी से उठा सकें।

 

संपन्न हुई रूपरेखा बैठक

जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा ने बताया की हाल ही में संपन्न हुई संगठन की उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश भर के जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में कार्यक्रम की मिनट-टू-मिनट रूपरेखा तय की गई। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि 21 दिसंबर का यह आयोजन छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

 

आयोजन में शामिल होने की अपील

संघ के जिला उपाध्यक्ष एवं जिला महासचिव गौतम बाल बोंदरे  और कोर कमेटी ने छत्तीसगढ़ के समस्त पत्रकार साथियों, छायाकारों और मीडिया कर्मियों से अपील की है कि वे 21 दिसंबर को बिलासपुर के लखीराम ऑडिटोरियम में भारी संख्या में पहुंचकर अपनी एकता का परिचय दें। यह आयोजन संगठन की शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ आपसी भाईचारे को मजबूत करने का एक स्वर्णिम अवसर है।

कार्यक्रम में उपस्थित थे प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेंद्र कश्यप प्रदेश सचिव सुधीर तिवारी प्रदेश सचिव अजय द्विवेदी प्रदेश सचिव उमा साहू जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा जिला उपाध्यक्ष भूषण प्रसाद श्रीवास जिला महासचिव गौतम बाल बोदंरे जिला सचिव उमाशंकर शुक्ला मीडिया प्रभारी यू मुरली राव बिल्हा ब्लॉक अध्यक्ष रूपचंद अग्रवाल जिला सदस्य पवन वर्मा रमेश यादव रमेश गोयल संजय ठाकुर जितेन्द्र पोर्तें रंजीत खनूजा दुर्गेश मरावी दिव्यांग सोनी मोहन मदवानी अजय साहू अनिल यादव अरविन्द परिहार रोहिणी अग्रवाल गीता सोंचे पुष्पा साहू लता गुप्ता रेशमा लहरे आदि उपस्थित थे।

शौर्यपथ विशेष नगर पालिक निगम क्षेत्र में कहां क्या गतिविधियां संचालित हो रही हैं, नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या है, स्वच्छता, वैधानिक बाजार, स्ट्रीट वेंडर्स की सूची, उनके पुनर्वास…

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर में सालों तक सड़कें तब टूटती थीं जब नक्सली IED फोड़ते थे। पुल-पुलिया उड़ जाते थे, रास्ते गायब हो जाते थे, और लोग समझते थे यह यहां की मजबूरी है, हालात हैं। लेकिन आज दिल को जो चीर देने वाली तस्वीर सामने है, वह किसी विस्फोट की नहीं… यह भ्रष्टाचार के फटने की तस्वीर है। और यही डर भी है कि कहीं यह बस्तर में आने वाले समय की “नई सामान्य घटना” न बन जाए।

तोकापाल ब्लॉक की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना वाली Nh -16 KM 476.60 से पटेलपारा लम्बाई 5.20 किलोमीटर लगभग 72 लाख रुपए की सड़क, जो गांव की एकमात्र जीवन-रेखा थी, आज मौत के गड्ढे में बदल चुकी है। जहां कभी रास्ता था, वहां अब सड़क हवा में झूलती और नीचे मिट्टी पूरी तरह धंसी हुई दिखती है। गांव वाले रोज़ इसी टूटे हुए खड्डे के किनारे से गुजरने को मजबूर हैं। कई बार बड़ा हादसा टल चुका है, लेकिन जिम्मेदारों की तरफ से अब तक ना चेतावनी बोर्ड, ना मरम्मत, ना निरीक्षण, सिर्फ खामोशी।

 

यह हाल देखकर यही लगता है—

यहां डामर नहीं बहा… जिम्मेदारी बह गई।

यहां मिट्टी नहीं धंसी… ईमानदारी धंस गई।

यहां सड़क नहीं टूटी… सिस्टम की आत्मा टूट गई।

 

और सबसे ज्यादा चुभने वाली बात यह कि

जनप्रतिनिधि-विशेषकर विधायक साहब—इस खाई के सामने भी खामोश बैठे हैं। मंचों से विकास की गूंज, पोस्टरों में चमकते वादे, फोटोशूट में मुस्कान… पर इस सड़क पर विकास का चेहरा घावों से भरा दिखाई देता है।

 

विधायक क्षेत्र के इस हालत पर लोगों ने यह भी कहा कि

“अगर यह सड़क विधायक के घर तक जाती, तो क्या इतने दिन चुप्पी रहती?” यह सवाल किसी की भावना नहीं, बल्कि असल दर्द है।

विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी जनता के निशाने पर हैं।

जिन्हें निर्माण की गुणवत्ता देखनी थी, निरीक्षण करना था, उसी सड़क की हालत आज उनके हस्ताक्षरों और स्वीकृति पर सबसे भीषण सवाल खड़ा कर रही है।

गांव में चर्चा साफ-साफ है—

“सड़क नहीं टूटी… अधिकारियों की नीयत टूटी है।” 72 लाख की सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल पाई।अगर यह भ्रष्टाचार नहीं, तो फिर क्या है? अगर यह लापरवाही नहीं, तो फिर किसे कहेंगे? और कार्रवाई के इंतजार में जनता पूछ रही है—क्या किसी की मौत का इंतज़ार किया जा रहा है, साहब?

ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच, घटिया निर्माण की जिम्मेदारी, और ठेकेदार से लेकर फाइल पास करने वाले अधिकारी तक हर स्तर पर कार्रवाई की जाए। क्योंकि जनता का सब्र अब अंतिम सीमा पर है, और गांव की आवाज़ पहले से कहीं ज्यादा तीखी— “सड़क कट गई तो क्या हुआ… अब जिम्मेदारों की कुर्सी कटनी चाहिए, साहब!”

 

छत्तीसगढ़ ग्राम सड़क विकास अभिकरण विभाग के SDO धनंजय देवांगन ने इस मामले पर कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया।

गरीबों पर बुलडोजर, अमीरों पर खामोशी… क्या रिमोट कंट्रोल से चल रहा? दुर्ग। शौर्यपथ। दुर्ग नगर पालिक निगम की शहरी सरकार इन दिनों अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जनता…

नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा साहित्य उत्सव
रायपुर (शौर्यपथ) अगले वर्ष 23 जनवरी से नवा रायपुर में होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव के लिए राज्य शासन ने सलाहकार समिति का गठन कर दिया है। इस समिति में नौ सदस्य बनाए गए हैं। समिति में सदस्य के रूप में श्री अनंत विजय, डॉ. सुशील त्रिवेदी, श्री सतीश कुमार पंडा, श्रीमती जयमति कश्यप, श्री संजीव कुमार सिन्हा, श्री शंशाक शर्मा, श्री पंकज कुमार झा और श्री विवेक आचार्य को भी शामिल किया गया है। समिति रायपुर साहित्य उत्सव के सफल और प्रभावी आयोजन के लिए विशेष सलाह देगी। इसके साथ ही साहित्यकारों के चयन और आयोजन के विषयों पर भी आयोजकों को सहयोग करेगी। जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल समिति के सदस्य सचिव होंगे।

उल्लेखनीय है कि नए वर्ष की शुरुआत के साथ आगामी महीने रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा, जिसमें देश भर से 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होंगे। राज्य स्थापना के रजत वर्ष पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा इस आयोजन की परिकल्पना की गई थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संकल्पना पर आधारित इस आयोजन की व्यापक कार्ययोजना मात्र दो माह में तैयार की गई है। यह तीन दिवसीय महोत्सव 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को जनजातीय संग्रहालय के समीप आयोजित होगा। इस उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे। इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र, और 3 संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा।

   दुर्ग / शौर्यपथ / भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) दुर्ग विधानसभा में संगठनात्मक शिथिलता और लगातार मिल रही अनुशासनहीनता की शिकायतों के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए संपूर्ण पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वरुण केवळतानी द्वारा जारी आदेश ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस संगठन अब ढिलाई, निष्क्रियता और निर्देशों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

गंभीर कार्यक्रमों में अनुपस्थिति बनी कार्रवाई का मुख्य आधार

आदेश में उल्लेखित है कि जिला कांग्रेस के महत्वपूर्ण एवं गरिमामय कार्यक्रमों में वरिष्ठ नेतृत्व स्वयं उपस्थित था, किंतु NSUI दुर्ग विधानसभा के पदाधिकारियों की अनुपस्थिति लगातार देखी गई। कई बार सूचित किए जाने के बावजूद समिति के एक भी पदाधिकारी की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।
संगठन ने इसे “कर्तव्य के प्रति उदासीनता और अनुशासनहीनता” बताते हुए कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।

नोटिस का जवाब न देना बना निर्णायक कारण

दिनांक 06 दिसंबर 2025 को स्पष्टीकरण हेतु नोटिस जारी किया गया था, परंतु किसी भी पदाधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। NSUI जैसे अनुशासन-आधारित संगठन में इसे गंभीर त्रुटि माना गया। यही कारण रहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सामूहिक रूप से सभी पदाधिकारियों के पद समाप्त करने का फैसला सुना दिया।

राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत—युवा संगठन में साफ-सफाई की शुरुआत?

यह फैसला न केवल संगठनात्मक अनुशासन का संदेश देता है, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस द्वारा अपने युवा मोर्चे को नए सिरे से सक्रिय, जिम्मेदार और जमीनी रूप से मजबूत करने की स्पष्ट राजनीतिक रणनीति भी दिखाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र कांग्रेस संगठन युवा नेतृत्व में ऊर्जा और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन मजबूती से खड़ा हो सके।

किसे भेजा गया संदेश?

सामूहिक पदमुक्ति का यह फैसला साफ संकेत देता है कि संगठन में केवल पद धारण करने से नहीं, सक्रियता और समर्पण से पहचान बनेगी। कार्यकर्ताओं को वरिष्ठ नेतृत्व के निर्देशों और कार्यक्रमों को प्राथमिकता देनी होगी। कांग्रेस अब निष्क्रिय इकाइयों और गैर-जिम्मेदार पदाधिकारियों पर निगरानी और कार्रवाई दोनों करेगी।
आगे क्या?
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि NSUI दुर्ग विधानसभा की नई संरचना जल्द घोषित की जाएगी।नई टीम में सक्रिय, जमीनी, प्रतिबद्ध और संगठनात्मक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी करने वाले युवाओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
NSUI दुर्ग विधानसभा में की गई यह कड़ी कार्रवाई केवल आंतरिक अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की नई नीति का संकेत भी है—“अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस, और सक्रियता ही संगठन में सम्मान का आधार।”

रायपुर (शौर्यपथ)
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सक्ती जिले के हसौद ग्राम में आयोजित 251 कुण्डीय विशाल गायत्री महायज्ञ के भव्य अनुष्ठानों में शामिल हुए। उन्होंने इस आयोजन को “आध्यात्मिक एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत प्रतीक” बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महामाया की पावन भूमि में 251 कुंडों के माध्यम से एक साथ प्रज्वलित हो रहे यज्ञ-अग्नि के तीर्थ से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।

“छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल, इसलिए हमारी संस्कृति विशिष्ट”—मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने कहा— “500 वर्षों के बाद अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प हुआ। छत्तीसगढ़ स्वयं भगवान श्रीराम का ननिहाल है—माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का गौरव हमें प्राप्त है।”
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम जाकर दर्शन-लाभ ले चुके हैं।
गायत्री मंत्र के 24 अक्षर देते हैं 24 शक्तियाँ—मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गायत्री मंत्र केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कारित, ऊर्जावान और सदाचारमय बनाने वाली दिव्य शक्ति है। उन्होंने कहा—“गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 सिद्धियों और शक्तियों के प्रतीक हैं, जो मनुष्य को अध्यात्म, ऊर्जा, विवेक और चरित्र निर्माण की दिशा प्रदान करते हैं।”इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज हरिद्वार के कुलपति डॉ. चिन्मय पण्डया ने मुख्यमंत्री का शॉल एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मान किया।
कार्यक्रम में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि तथा देशभर से जुटे अखिल विश्व गायत्री परिवार के पदाधिकारी उपस्थित रहे। विशाल संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियाँ अर्पित कीं।
140 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद
महायज्ञ के दौरान आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने 140 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने मंच से ही सभी लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने और बेटियों के सम्मान के लिए हर संभव सहायता दे रही है।
जैतखाम में पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना
हसौद प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जैतखाम पहुँचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
उन्होंने प्रदेशवासियों की शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा, समानता और मनखे-मनखे एक समान के संदेश समाज में सद्भाव एवं एकता का पथ प्रशस्त करते हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इन आदर्शों को अपनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक का किया विधिवत शुभारंभ
बस्तर संभाग के सातों जिलों और नुवाबाट के खिलाड़ियों ने आकर्षक मार्चपास्ट प्रस्तुत कर दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
बस्तर अब शांति, समरसता और समृद्धि की ओर अग्रसर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर / शौर्यपथ / आपका मुख्यमंत्री आपके समाज के बीच का है, आपका भाई है....आप आगे बढ़ें, सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बस्तर ओलिंपिक 2025 के तहत संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने आज जगदलपुर के स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में संभाग स्तरीय बस्तर ओलिंपिक का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने समूचे बस्तर संभाग के खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों के खिलाड़ियों ने आकर्षक मार्चपास्ट प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बस्तर के गांव-गांव तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप बस्तर अब शांति, समरसता और समृद्धि की ओर निरंतर अग्रसर हो रहा है और प्रदेश तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर के युवाओं ने बड़ी संख्या में इस महती आयोजन में भाग लेकर इसे सफल और ऐतिहासिक बनाया है। सबसे अधिक हर्ष की बात यह है कि बस्तर ओलम्पिक में नुवाबाट के प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक शामिल होकर इसे एक विशेष आयाम प्रदान किया है। बड़ी संख्या में बेटियों और बहनों की सहभागिता यह प्रमाणित करती है कि बस्तर में महिला सशक्तिकरण नई दिशा ले रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार बस्तर के युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें विकास में सहभागी बनाने के लिए कटिबद्ध है। यही कारण है कि बस्तर के युवा लोकतंत्र में आस्था एवं विश्वास के साथ आगे आ रहे हैं और विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक खेल प्रतियोगिता के विजेता आने वाले समय में खिलाड़ियों के लिए रोल मॉडल बनेंगे। सरकार बस्तर के युवाओं को बेहतर अवसर एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ओलम्पिक स्पर्धाओं में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर आने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः तीन-तीन करोड़, दो करोड़ तथा एक करोड़ रुपए की सम्मान निधि प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक न केवल युवाओं को खेल के माध्यम से आगे बढ़ाने की पहल है, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि बस्तर में खेल अधोसंरचना को और मजबूत किया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों को उचित मंच मिल सके। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल जितना सिखाता है, उतना ही हार से सीखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि बस्तर ओलम्पिक युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का सकारात्मक प्रयास है। उन्होंने कहा कि सरकार बस्तर के अंदरूनी इलाकों के युवाओं को अधिक अवसर देकर उन्हें प्रोत्साहित कर रही है और भविष्य में यह पहल और अधिक सशक्त रूप में जारी रहेगी।
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप और ओलम्पिक में ब्रॉन्ज मेडल सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक विजेता खिलाड़ी पद्मश्री एम.सी. मेरीकॉम ने भी उपस्थित होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और शुभकामनाएँ दीं।
संचालक, खेल एवं युवा कल्याण, सुश्री तनुजा सलाम ने स्वागत उद्बोधन में अवगत कराया कि बस्तर ओलम्पिक की संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बस्तर जिले के साथ ही नुवा बाट के करीब तीन हजार पाँच सौ खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह बस्तर के लिए गौरव का क्षण है और बस्तर के उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्य सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय अत्यंत सराहनीय है। बस्तर ओलम्पिक में तीन स्तर की प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि गत वर्ष के 1,65,000 प्रतिभागियों की तुलना में इस वर्ष 3,92,000 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 2,27,000 से अधिक महिला प्रतिभागी शामिल हैं - यह बस्तर में परिवर्तन की नई बयार है।
कार्यक्रम की शुरुआत खिलाड़ियों द्वारा मशाल प्रज्ज्वलन और आतिशबाजी के साथ हुई। इसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत माता रूकमणी कन्या आश्रम तथा अन्य विद्यालयों की छात्राओं द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इस अवसर पर विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, राष्ट्रीय खिलाड़ी किरण पिस्दा एवं खुशबू नाग, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जिलों के नोडल अधिकारी, खेल अधिकारी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पूवर्ती के खिलाड़ी विजय डोडी और ओरछा सलोनी बनीं मशालवाहक

बस्तर ओलम्पिक 2025 की संभाग स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ आज अत्यंत गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, मंत्रीगण तथा बॉक्सर पद्मश्री मेरी कॉम द्वारा किया गया। हजारों दर्शकों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बस्तर ओलम्पिक की मशाल प्रज्ज्वलित की।
इसके बाद यह गौरवशाली मशाल सुकमा जिले के सुदूर अंचल पूवर्ती के प्रतिभावान खिलाड़ी विजय डोडी और नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक की निवासी सलोनी कवाची को सौंपा गया। कबड्डी खिलाड़ी विजय डोडी और खो-खो खिलाड़ी सलोनी कवाची ने पूरे उत्साह, ऊर्जा और गौरव के साथ ग्राउंड की परिक्रमा करते हुए मशाल को मुख्य प्रज्वलन स्थल तक पहुंचाया। यह क्षण सुकमा और नारायणपुर जिलों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और भावनात्मक था - जब माओवाद-प्रभावित एवं दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ हजारों दर्शकों के सामने दौड़ रहे थे। दर्शकों का उत्साह भी इस दौरान चरम पर पहुंच गया।
संभागभर से पहुंचे हजारों खिलाड़ियों और दर्शकों ने इस ऐतिहासिक क्षण का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। बस्तर ओलम्पिक के इस भव्य उद्घाटन ने एक बार फिर सिद्ध किया कि बस्तर की माटी में असीम खेल प्रतिभाएं जन्म ले रही हैं और राज्य सरकार तथा प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से इन प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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