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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में किसानों, दलितों, आदिवासियों की जमीनों के लूटने का षड्यंत्र चल रहा। सरकार जमीनों के इस लूट की सहभागी है। कल खैरागढ़ छुईखदान गया था, वहां पर सिमेंट प्लांट लगाने के नाम पर किसानों की जमीन जबरिया अधिग्रहित की गयी, जनसुनवाई का विरोध कर रहे ग्रामाणों पर लाठियां चलवाई गयी। पूरे प्रदेश में उद्योगों कोयला खदानों आदि के नाम पर किसानों की जमीन जबरिया अधिग्रहित की जा रही, किसान विरोध कर रहे तो उन पर लाठियां चलाई जा रही। हसदेव, अमोरा, तमनार, खैरागढ़, मैनपाट, बीजापुर, बैलाडीला कांकेर में यही हुआ, सरकार ने लोगों की सहमति के बिना उनकी जमीनों को उद्योगपतियों को दे दिया। खैरागढ़, अमोरा, तमनार, मैनपाट में ग्रामीणों पर लाठियां चलवाई गई। यह सरकार उद्योगपतियों की दलाल बन गई है।
दुर्दांत नक्सलियों के प्रकरण वापस लेंगे, निर्दोष आदिवासियों के बारे में कब फैसला होगा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मंत्रिमंडल के द्वारा समर्पित नक्सलियों के आपराधिक प्रकरण वापस फैसले लेने की और उसकी समीक्षा की फैसला का निर्णय बेहद ही दुर्भाग्यजनक है। सरकार बताये जो झीरम कांड में शामिल थे, जो ताड़मेटला, रानीबोदली, एडसमेटा जैसे नरसंहार में शामिल थे, जो सैकड़ों हजारों नरसंहार में शामिल थे, क्या उनका भी अपराधिक प्रकरण सरकार वापस लेगी? सरकार की अपनी नक्सल नीति है, मुख्यधारा में लाने के लिए, सरकार उनके पुनर्वास के बारे में फैसला करे लेकिन गंभीर आपराधिक घटना में शामिल नक्सली और सामान्य घटना में बंद जिसके खिलाफ चार्जशीट तक नहीं दाखिल कर पाये उनके बारे में सरकार अपना मत स्पष्ट करे। नक्सली के नाम पर जिन आदिवासियों को सरकार ने नक्सली बताकर जबरिया बंद कर रखा है, जिनके बारे में अदालत में चालान तक नहीं पेश किया गया है। सरकार बताये उनको छोड़ने के लिये क्या किया जा रहा है? जो निर्दोष है किसी घटना और हत्या में शामिल नहीं थे, उनके बारे में पहले फैसला लिया जाना चाहिये। पुलिस के द्वारा सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिये सैकड़ों आदिवासियों को जेल में बंद किया था। जो निर्दाष है उनके बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है, पहले तो उनके लिये फैसला होना चाहिये।
एसआईआर की समय सीमा तीन माह और बढ़ाया जाए
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आज एसआईआर की अंतिम दिन है। अभी तक सभी नागरिकों का एसआईआर नहीं हो पाया है। प्रदेश के बहुत से नागरिक रोजी-रोटी के लिए बाहर गए हैं, उनका एसआईआर नहीं हुआ है। आज भी लाखों लोगों का फॉर्म बीएलओ तक नहीं पहुंचा है। हमारी मांग है एसआईआर की अवधि 3 माह और बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में आ सके।
आरक्षक भर्ती परीक्षा में घोटाला हुआ है
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में घोटाला हुआ है इस बात को कांग्रेस पार्टी और अभ्यर्थी लगातार उठाते रहे हैं। अभी जब परिणाम घोषित हुए हैं उसके बाद घोटाले की पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं। एक ही क्रमांक के 33 अभ्यर्थियों के आवेदन सामने आए हैं, वे सभी चयनित किये गये है। एक अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा में 39 नंबर मिला है उसका उसका चयन हो गया है। शारीरिक परीक्षा का पूर्णांक 100 नंबर का है यदि उसे शारीरिक परीक्षा में 100 में 100 मिला होगा तो भी उसका कुल अंक 139 ही होगा, जबकि 143 नंबर वाले का चयन नहीं हुआ। लिखित परीक्षा का नंबर सार्वजनिक हो सकता है तो शारीरिक परीक्षा का नंबर क्यों नहीं जारी हुआ? दोनों मिलाकर प्राप्तांक क्यों नहीं जारी किया गया? सरकार भर्ती परीक्षा में घोटाले कर युवाओं के सपने बेच रही है। पुलिस आरक्षक ही नहीं फॉरेस्ट आरक्षक, आरआई परीक्षा सहित अनेकों परीक्षाओं में भाजपा सरकार ने घपले करवाया है।
सोसायटियों का लिमिट फिक्स खरीदी बाधित हो रही
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार ने सभी सोसायटियों के लिए एक दिन की अधिकतम खरीद सीमा तय कर दी है। एनआईसी ऐसा सिस्टम तय किया है लिमिट के बाद कंप्यूटर लॉक हो जाता है। जिसके कारण सोसायटियां चाह कर भी लिमिट से अधिक धान नहीं खरीद सकती। इस लिमिट के कारण दोपहर के बाद सोसायटी में सन्नाटा पसर जाता है। इस लॉक के कारण नियत समय में सभी किसानों का धान कैसे बिक पाएगा? सरकार जानबूझकर यह लिमिट सिस्टम बनाई है ताकि समर्थन मूल्य में कम खरीदी करनी पड़े।
जिले के 02 लाख 47 हजार 143 महिलाओं के खाते में अब तक कुल 22 करोड़ 80 लाख 65 हजार 200 रूपये की राशि अंतरित की गई
बालोद / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाकर उन्हें सुरक्षा एवं सम्मान दिलाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई राज्य शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ राज्य सहित बालोद जिले के महिलाओं के लिए भी अनेक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी एवं कारगर साबित हो रहा है। इस योजना के माध्यम से लाभार्थी महिलाओं के खाते में प्रतिमाह 01-01 हजार रूपये की राशि अंतरित होने से महिलाओं में आत्मविश्वास एवं सुखद भविष्य की नई आश जगी है।
उल्लेखनीय है कि बालोद जिले के कुल 02 लाख 47 हजार 143 लाभार्थी महिलाओं के खाते में अब तक कुल 22 करोड़ 80 लाख 65 हजार 200 रूपये की राशि जारी अंतरित की जा चूकी है। प्रतिमाह महीने के अंतिम तारीख को लाभार्थी महिलाओं के खाते में महतारी वंदन योजना की राशि अंतरित हो जाने से आज यह योजना राज्य के लाखों मातृ शक्तियों के लिए आर्थिक संबलता का आधार बन गया है। राज्य शासन की इस कल्याणकारी योजना के फलस्वरूप महिलाओं के खाते में प्रतिमाह समय पर 01-01 हजार रूपये की राशि अंतरित हो जाने से राज्य की महिलाओं में सर्वस्व हर्ष व्याप्त है।
ज्ञातव्य हो कि हमारा समाज पुरूष प्रधान होने के कारण आज भी मेहनतकश महिलाओं को आवश्यक कार्यों तथा अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए पैसे की प्रबंध करने के लिए अपने घर एवं परिवार के पुरूषों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इस समस्या एवं पीड़ा का सर्वाधिक सामना समाज के खेतिहर मजदूर तथा मेहनत, मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले महिलाओं को सर्वाधिक करना पड़ता है। लेकिन आज राज्य सरकार के संवेदनशील सोच के फलस्वरूप राज्य में लागू की गई महतारी वंदन योजना के फलस्वरूप राज्य में इस मिथक को तोड़ने में कामयाबी मिली है।
इस योजना के राज्य में सफल क्रियान्वयन के फलस्वरूप अब महिलाओं को अपने जरूरी कार्यों एवं आर्थिक जरूरतों के लिए पुरूषों का मुँह नही ताकना पड़ता। प्रतिमाह महीने के अंत में महतारी वंदन योजना की राशि प्राप्त हो जाने से राज्य की महिलाएं अब अपने इलाज एवं दवाइयों आदि की व्यवस्था के अलावा अन्य सभी छोटी-मोटी जरूरतों की पूर्ति स्वयं कर पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में महतारी वंदन योजना मार्च 2024 से प्रारंभ की गई है। इस योजना से जिले के लाभान्वित हितग्राहियों के खाते में अब तक कुल 21वें किश्त की राशि अंतरित की जा चूकी है। इस योजना के अंतर्गत 21 वर्ष से अधिक की आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को इस योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। इस योजना से लाभान्वित महिला हितग्राहियों के खाते में प्रतिमाह डीबीआई के माध्यम से राशि अंतरित की जाती है। इस तरह से यह योजना संपूर्ण परिवार के भरण-पोषण एवं उनके देखभाल की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने वाली महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाकर उनके सम्मान एवं गौरव को प्रतिस्थापित करने वाली अत्यंत लोकहितैषी, दूरगामी तथा बहुपयोगी योजना साबित हो रहा है।
दाम बढ़ने छूट खत्म करने तथा स्मार्ट मीटर के कारण विद्युत के बिल तीन गुना बढ़ गये- शुक्ला
रायपुर/ शौर्यपथ / भाजपा सरकार बिजली बिल के नाम पर जनता को लूट रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने बिजली के दाम चार बार बढ़ा दिया। 400 यूनिट हाफ योजना को बंद कर दिया। स्मार्ट मीटर लगा दिया इन सबसे बिजली के दाम बेतहाशा बढ़ गए, जनता परेशान है। सरकार, जनता को राहत देने के बजाय अब बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एफपीपीएस) के रूप में अतिरिक्त चार्ज इस महीने से लगाने जा रही, इससे बिजली के दाम एक बार फिर से बढ़ेंगे। कांग्रेस, सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। सरकार, कोयले का सेस कम होने के कारण बिजली का दाम कम तो नहीं कर रही, ऊपर से एक नया टैक्स लगा रही।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 400 यूनिट तक छूट को आधी करके 200 यूनिट किया, उसमें भी यह शर्त लगा दिया गया कि खपत 400 यूनिट से अधिक होते ही सारी छूट, राहत, रियायत पूरी तरह खत्म। ऊपर से सभी घरों में स्मार्ट मीटर लगाकर अधिक वसूली कर रहे है। अधिक मुनाफाखोरी के लालच में यह सरकार अनाप-शनाप बिजली बिल वसूलने के लिए नए नए पैंतरे अपना रही है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि हर जगह बिजली उपभोक्ताओं की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उनकी खपत वास्तविक खपत से अधिक बताई जा रही है, स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर की तुलना में बहुत तेजी से चल रहा है। बिजली उपभोक्ताओं का यह अधिकार है कि अपनी वास्तविक खपत को जान सके। चेक मीटर का प्रावधान पहले से ही था, लेकिन यह सरकार अपनी लूट पर परदेदारी करने के लिए चेक मीटर लगाने और मीटर चेक करवाने उपभोक्ताओं से 1000 और 1500 रुपए शुल्क लेने का प्रावधान कर दिया गया है, यदि मीटर में गड़बड़ी का आरोप उपभोक्ता लगा रहे हैं, तो उसे मुफ्त में चेक किया जाए, किसी भी तरह से अतिरिक्त शुल्क अनुचित है। यह प्रावधान सरकार ने गड़बड़ी छुपाने के लिये किया है। मीटर चेक शुल्क का प्रावधान तत्काल वापस ले सरकार।
बालोद / शौर्यपथ / राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने आज विशेष गहन पुनरीक्षण, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कार्य, जिला स्तरीय युवा उत्सव, सांसद खेल महोत्सव, बालोद टेक्नोफेस्ट, ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य फसल अंतर्गत फसल चक्र, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, जिला पंचायत कार्यालय बालोद का डिजिटलाईजेशन, आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति, मिशन गोद विषय पर आज संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में मासिक प्रेस वार्ता लेकर बालोद जिले में उक्त सभी योजनाओं की अद्यतन स्थिति तथा कार्यों एवं योजनाओं के प्रगति के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, जनसंपर्क अधिकारी श्री चंद्रेश ठाकुर सहित मीडिया प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
मोहला / शौर्यपथ / कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 31 दिसंबर 2025 तक जिले में सघन कुष्ठ खोज अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत मितानीनों और ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों द्वारा घर-घर सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
सीएमएचओ डॉ. विजय खोब्रागढ़े के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकास खंडों में अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के सम्बन्ध में जिले के कुष्ठ नोडल अधिकारी डॉ. एसआर कोवाची ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मितानीनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा संभावित रोगियों की पहचान कर उनकी जाँच और आवश्यक उपचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुष्ठ के प्रसार को रोकने के लिए रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और समय पर उपचार बेहद आवश्यक है।
अभियान के सफल संचालन और सतत निगरानी के लिए जिला एवं विकासखण्ड स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। कुष्ठ की पहचान मुख्य रूप से त्वचा की संवेदनशीलता, दाग-धब्बे, सुन्नपन, गठाने, मोटापन और आंख-पलकों की स्थिति जैसी लक्षणों के आधार पर की जाएगी। डॉ. कोवाची ने बताया कि इन लक्षणों में से कोई भी दिखाई देने पर तुरंत स्थानीय कार्यकर्ता या मितानिन से संपर्क कर जांच कराना आवश्यक है। सीएमएचओ ने जनसामान्य से अपील की है कि किसी भी प्रकार की कुष्ठ की शंका होने पर स्वास्थ्य टीम से जांच कराएं और अभियान में सहयोग प्रदान करें, ताकि जिले को कुष्ठ मुक्त बनाया जा सके।
- अवैध बिक्री पर सख्ती, 1 हजार 718 क्विंटल धान जप्त
- जिले के 2 हजार 353 किसानों से 754.94 हेक्टेयर रकबा कराया गया समर्पित
मोहला / शौर्यपथ / जिले में खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी कार्य सुचारू रूप से संचालित करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियाँ की गई हैं। किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी 27 उपार्जन केन्द्रों में कैप लगाकर कृषकों के एग्रीस्टेक में छूटे हुए खसरे जोड़े जा रहे हैं, जिससे वे अपने वास्तविक रकबे के अनुसार धान विक्रय कर सकें। यदि किसानों के रकबे या फसल प्रविष्टि में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो शासन द्वारा खाद्य विभाग के भौतिक सत्यापन ऐप के माध्यम से विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा उसका सत्यापन कर आवश्यक संशोधन किया जा रहा है।
जिले के सभी 27 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी लगातार जारी है। अब तक 8 हजार 469 किसानों द्वारा कुल 4 लाख 06 हजार 697 क्विंटल धान विक्रय किया जा चुका है। किसानों को लंबी कतारों से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से प्रशासन ने तुहर टोकन ऐप के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन टोकन जारी करने की सुविधा उपलब्ध कराई है, वहीं जो किसान ऑनलाइन टोकन प्राप्त नहीं कर पा रहे, उन्हें उपार्जन केन्द्रों से सीधे टोकन उपलब्ध कराया जा रहा है।
अवैध धान बिक्री पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने उड़नदस्ता दल और निगरानी दल का गठन कर सख्त कार्रवाई की जा रही है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 28 मामलों में 1 हजार 718 क्विंटल से अधिक धान जप्त किया गया है। इसी के साथ बिचौलियों द्वारा अनियमित बिक्री रोकने के उद्देश्य से किसानों द्वारा धान विक्रय के बाद बचे हुए रकबे को शून्य करने की प्रक्रिया भी जारी है, जिसके तहत अब तक 2 हजार 353 किसानों से 754.94 हेक्टेयर रकबा समर्पित क राया गया है।- अवैध बिक्री पर सख्ती, 1 हजार 718 क्विंटल धान जप्त
दुर्ग। शौर्यपथ। दुर्ग के प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं मेघ गंगा ग्रुप के संस्थापक मनीष पारख को "प्राइड ऑफ इंडिया 2025-26" के सम्मानों से नवाजा गया। यह सम्मान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान (पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश) द्वारा प्रदान किया गया।यह विशेष मान्यता स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक उत्थान, एवं व्यापारिक दूरदर्शिता के क्षेत्र में मनीष पारख और उनके समूह के अतुलनीय योगदान को सम्मानित करती है।
मेघ गंगा ग्रुप, जो दुर्ग शहर का प्रमुख व्यवसायिक संगठन है, नवाचार, उत्कृष्टता और सामुदायिक विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण निष्ठा से निभा रहा है।मेघ गंगा ग्रुप के अंतर्गत विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थान कार्यरत हैं, जैसे—
अविश एडुकॉम
लाइफकेयर डायग्नोसिस (NABL, NABH मान्यता प्राप्त)
महावीर ज्वैलर्स
जयदीप गैस एजेंसी
डिजाइनो डिज़ाइन एनीथिंग
TISD (द इंटरनेशनल स्कूल ऑफ डिज़ाइन)
फाडे
इस समूह के ये स्तंभ न केवल व्यावसायिक सफलता बल्कि सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में भी अग्रणी हैं।
मनीष पारख ने इस सम्मान को अपने समर्पित टीम और मेघ गंगा ग्रुप के परिवार को समर्पित करते हुए कहा, "यह उपलब्धि हमारी सामूहिक मेहनत, विश्वास और अटूट समर्थन का परिणाम है। यह मील का पत्थर हमें भविष्य में और भी व्यापक तथा प्रभावशाली कार्य के लिए उत्साहित करता है।
"पिछले दो वर्षों में मनीष पारख के नेतृत्व में हुए उल्लेखनीय कार्यों में शामिल हैं—
मोर शहर मोर जिम्मेदारी पहल के तहत दुर्ग के गांधी चौक, शहीद चौक, राजेंद्र प्रसाद चौक और Y शेप ब्रिज स्थित चौक का पुनर्निर्माण कार्य।
स्वच्छता के उच्चतम मानकों के लिए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा सम्मान प्राप्त।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए धन्वंतरि अवार्ड द्वारा सम्मानित।
मेघ गंगा ग्रुप के विस्तार में TISD, FADE, VANNAKHAM एवं चॉकलेट स्टोरी जैसे नए उपक्रमों का विस्तार।
लाइफकेयर डायग्नोसिस में अत्याधुनिक तकनीक एवं महत्वपूर्ण मशीनों का समुचित इंस्टालेशन।
यह सम्मान न केवल मनीष पारख के अथक परिश्रम का परिणाम है, बल्कि दुर्ग शहर के लिए गर्व का विषय भी है कि यहां के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय समर्पण और उत्कृष्टता के प्रतीक के रूप में सम्मानित किया गया।
PWD की आंखें बंद—ठेकेदार की हिम्मत बुलंद, सड़कें बनते ही उखड़ रहीं!
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। नगर निगम क्षेत्र में PWD विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से चल रहा बी.टी. पैच रिपेयर कार्य अब जगदलपुर शहर की सड़कों से ज्यादा विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है। काम अभी पूरा भी नहीं हुआ, लेकिन जहाँ-जहाँ नया डामर डाला जा रहा है, वहाँ कुछ ही घंटों में डामर उखड़कर सड़क की असली सूरत सामने आने लगी है। मानो करोड़ों का यह प्रोजेक्ट सड़क सुधार का नहीं, बल्कि सड़क उजाड़ने का ठेका लेकर किया जा रहा हो। शहर में चर्चा है—“डामर से ज़्यादा कमीशन की परत चढ़ाई गई है!”
सबसे बड़ी हैरानी यह है कि इतनी बड़ी परियोजना की निगरानी जिस अधिकारी को करनी चाहिए वही मौके से नदारद बताए जा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी की गैरमौजूदगी और सुस्त देखरेख ने ठेकेदार को इतना बेलगाम कर दिया है कि वह खुलेआम घटिया काम कर रहा है, जैसे शहर उसकी निजी जागीर हो? लोग तंज कस रहे हैं—“जब साहब आंखें मूंदे बैठे हैं, तो ठेकेदार क्यों न काम में आंख मारे!”
यह भी कम चौंकाने वाली बात नहीं कि शहर के कई ऐसे सड़क है जिससे रोज शहर के VIP गुजरते हैं। लेकिन फिर भी घटिया गुणवत्ता वाला पैच रिपेयर ऐसे डाला जा रहा है जैसे सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि जनता की समझदारी और धैर्य पैच किए जा रहे हों। शहरवासियों का गुस्सा इस बात पर और भड़क रहा है कि VIP एक्सेस वाली इस सड़क पर जब इतनी बड़ी लापरवाही हो सकती है, तो बाकी शहर का क्या हाल किया जाएगा? साफ संदेश मिल रहा है “जिम्मेदारों की चुप्पी ही ठेकेदार की ताकत है।”
लोग सवाल उठा रहे हैं—क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्यपालन अभियंता श्री बत्रा ने गुणवत्ता देखने की जिम्मेदारी ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी है? क्या इस पैच रिपेयर में डामर से ज्यादा कुछ और बह रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि निरीक्षण की फाइलों में सब कुछ सही है, और जमीन पर सिर्फ दुकानदारों और आम जनता के पैसे बह रहे हैं? यह भी चर्चा गर्म है कि कुछ “चार पैसे” की चमक ने विभागीय आंखों पर ताला लगा दिया है, और उसी का फायदा उठाकर ठेकेदार शहर की सड़कों को प्रयोगशाला समझकर खेल खेल रहा है?
करोड़ों का यह काम यदि ऐसे ही चलता रहा तो शहर के गड्ढे तो भरेंगे नहीं, पर PWD की जवाबदेही के गड्ढे जरूर और गहरे होते जाएंगे। जनता ने स्पष्ट कहा है—यह सिर्फ खराब सड़क का मामला नहीं, बल्कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से होने वाले सफेदपोश भ्रष्टाचार की बू है, जिसे अब छुपाना मुश्किल हो रहा है। लोगो का कहना है की जरूरत इस बात की है कि पूरे काम की तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो, ठेकेदार को रोका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
और अब बात PWD के ‘भाग्य-विधाता’ श्री बत्रा साहब की…
इस विषय पे कार्यालय पहुँच, मुँह खोलकर सवाल रखने से पहले हि साहब बिना कुछ सुने ही अपने आप बोलने लगे— “अभी टाइम नहीं है… मीटिंग में जाना है… बाद में बात करेंगे…” लग ही नहीं रहा था कि कोई अधिकारी जनता के सवालों का सामना कर रहा है; बल्कि ऐसा लगा जैसे सवाल सुनने की ज़िम्मेदारी भी किसी और विभाग को ठेके पर दे दी गई हो!
साहब का व्यवहार बिल्कुल ऐसा—जवाबदेही नहीं, बल्कि सवाल पूछना ही अपराध हो गया हो। काम की गुणवत्ता सड़क पर लोटपोट है, पर साहब का एटीट्यूड?
जिम्मेदारी से भागने का रफ्तार VIP स्पीड साहब!
दुर्ग । शौर्यपथ । नगर निगम में विपक्ष की भूमिका सुचारू रखने और जनता की आवाज़ बनने के दायित्व पर खरा उतरने को लेकर कांग्रेस के भीतर सांबा-सा तनाव स्पष्ट दिखने लगा है। पिछले छह महीनों के आंदोलन और नेता प्रतिपक्ष पद की प्रतीक्षा के बाद जब संजय कोहले को वह आरामदेह ऑफिस-व्यवस्था मिल गई, तो उनसे जुड़ी असंतुष्टि धीरे-धीरे मुखर होती जा रही है। अब कांग्रेस के नव-निर्वाचित जिला अध्यक्ष व पूर्व महापौर धीरज बांकलीवाल के ऊपर यह दायित्व सुलझाने की बड़ी जिम्मेदारी आ खड़ी हुई है — कि वे क्या निगम में सचमुच मजबूत विपक्ष तैयार कर पाएंगे या मामला फिर भी धूल में दफन हो जाएगा।
वृहत आरोप और नगर की बदहाल हालत
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और शहरवासियों के कहे अनुसार पिछले 20 सालों में जिस तरह निगम की हालत वर्तमान में बदहाली के शिखर पर नजर आ रही है, वह पहली बार भयावह रूप में नजर आ रहा है। जल आपूर्ति में अनियमितता, टूटे-फूटे और गड्ढों से भरी सड़कें, अतिक्रमण, रात में अंधेरे वाले रास्ते, बदबूदार वातावरण, कार्यालयों में अधिकारियों का अनुपस्थित होना, सफाई व्यवस्था की विफलता और धनवानों द्वारा अवैध पक्का निर्माण — ये वे मुद्दे हैं जो नागरिकों की रोज की परेशानियों का कारण बने हुए हैं।
इन तमाम समस्याओं के बीच कांग्रेस के दर्जनभर पार्षदों की उम्मीद थी कि उन्हें मिले नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले निगम में विपक्षी तीखापन बनाए रखकर जनता की आवाज़ बुलंद करेंगे। पर स्थानीय लोगों और कई पार्षदों का आरोप है कि कोहले पिछले छह महीने में सिर्फ़ एसी-कमरा और कैमरा मिलने के लिए आंदोलन करते रहे; और जैसे ही सुविधाएँ मिलीं, उन्होंने महापौर की प्रशंसा करने वाले व्यवहार में आ धीरे-धीरे विपक्षी भूमिका से दूरी बना ली।
कांग्रेस बनाम भाजपा: संगठनात्मक अनुशासन और जनता की धारणा
असंतुष्टि केवल कांग्रेस पार्षदों तक सीमित नहीं रही — दबी जुबां में भाजपा के कुछ पार्षद भी कहते सुने गए हैं कि जब नेता प्रतिपक्ष ही मौन हो जाए तो उनको किसके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषण यह बताता है कि विपक्ष की सक्रियता ही लोकतंत्र में सत्ता को जवाबदेह बनाती है; और यदि विपक्ष का नेतृत्व स्वयं साइलेंट मोड में चला जाए तो नगर शासन की जवाबदेही कमजोर पड़ती है और प्रशासनिक अनियमितताएँ बढ़ती हैं।
पार्टी कार्यकारिणी के अंदर यह मत बनता जा रहा है कि संगठन द्वारा दी गई ज़िम्मेदारी का यदि निर्वाह ईमानदारी से नहीं हो रहा तो बदलाव अपरिहार्य है। कई कांग्रेस पार्षद अब धीरज बांकलीवाल से यही अपेक्षा रखते हैं कि वे युवा जोश और सशक्त नेतृत्व के साथ नगर निगम में विपक्षी चेहरा बदलकर नए सिरे से सक्रियता दिखाएँ — वरना आरोपों को लेकर अंदरूनी असंतोष और सार्वजनिक धारणा दोनों ही पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती हैं।
धीरज बांकलीवाल पर क्या दबाव है?
धीरज बांकलीवाल, जिनके पास निगम की राजनीति की जानकारी और पूर्व महापौर के नाते अनुभव भी है, के ऊपर अब दो तरह का दबाव है — एक, निगम में अनियमितताओं और जनक्रोध के मुद्दों को उजागर कर एक जिम्मेदार और संघर्षशील विपक्षी नेतृत्व स्थापित करना; और दूसरा, संगठनात्मक संतुलन बनाए रखते हुए ऐसे कदम उठाना कि पार्टी की छवि सुधारे और स्थानीय लोकप्रियता बनी रहे। यदि बांकलीवाल पहले ही कार्यालय आवंटन आदि जैसी सुविधाएँ मिलने के बाद मौन रहने वालों की राह अपनाते हैं, तो कांग्रेस के लिए दीर्घकालिक राजनैतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सम्भावित परिणाम और राजनीतिक रणनीति
यदि जिला अध्यक्ष शीघ्र ही कदम नहीं उठाते — जैसे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका पर पुनर्विचार, नया चेहरा उतारना, या पारदर्शी सामूहिक रणनीति अपनाना — तो निगम में कांग्रेस का संघर्ष कमजोर दिखेगा और स्थानीय मतदाता वर्ग में निराशा बढ़ेगी। दूसरी तरफ़, सक्रिय विपक्ष और नियमित धरनों, प्रश्न-काल, जन सुनवाइयों और मीडिया-प्रेसर के जरिये मुद्दों को उठाने से निगम प्रशासन पर असर पड़ सकता है और नगर की समस्याओं का समाधान भी तेज़ हो सकता है — यही कांग्रेस पार्षदों की अपेक्षा है।
निष्कर्ष — यह मरीज कौन ठीक करेगा?
कुर्सी का मोह — यह केवल एक व्यक्तिगत दोष का टैग नहीं रह जाता बल्कि जब वह मोह लोकतंत्र के आवश्यक प्रतिस्पर्धी तंत्र को प्रभावित करने लगे, तब मामला गंभीर हो जाता है। आज की सवा-सवाल भरी राजनीति में धीरज बांकलीवाल के सामने यह चुनौती है कि वे क्या संजय कोहले को नए सिरे से सक्रिय कर पाएँगे, या आवश्यकता हुई तो विपक्ष का चेहरा बदलकर निगम में जनता की आवाज़ को फिर से बुलंद कर पाएँगे।
कांग्रेस की अगले कुछ कार्यवाहियों और निगम में उठने वाले सार्वजनिक मुद्दों पर उनके कदम यह तय करेंगे कि क्या दुर्ग नगर निगम में विपक्ष फिर से एक दबंग और जवाबदेह शक्ति बनकर उभरेगा — या कुर्सी का मोह लोकतंत्र की ज़रूरतों पर भारी पड़ जाएगा।
भारतीय लोक जीवन में श्री राम कृष्ण व्याप्त है
यही है सनातन संस्कृति - संत निरंजन
दुर्ग ग्रामीण / शौर्यपथ / पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू धर्मपत्नी श्रीमती स्व.कमला देवी साहू जी की पुण्य स्मृति में आयोजित ग्राम पाऊवारा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म का भव्य आयोजन किया गया।
कथा के पांचवे दिन कथा वाचक संत श्री निरंजन महाराज जी ने भगवान श्री कृष्ण अवतार की कथा का विस्तृत वर्णन करते हुये श्रोताओं को आनंदित किये।
ईश्वर के संकल्प सृष्टि का सृजन पालन संहार होता है। भगवान के नेत्र खोलने पर मुस्कुराने पर प्रलय और आंख टेढ़ी कर देने पर संहार हो जाता है।मानव मात्र को कर्तव्य कर्म मे प्रेरित करने अकर्ता ईश्वर हमें कार्य करते हुए दिखाई देते हैं। आत्मा राम अनुभूति का विषय है निर्गुण ब्रह्म सगुन रूप में लीला करते है आत्म तत्व के लिए स्वयं पर स्वयं की कृपा होना आवश्यक है।
सच्चिदानंद भगवान को जानने के लिए गुरुओं सन्तो के सरणों में लोट कर पद-रज से स्वयं को आनन्दित करें। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलायें और श्री कृष्ण के रूप में सर्वत्र प्रेम बाँटे। जंगलो में घुमते हुए बनवासी राम भोले -भाले आदिवासीयो को, पिछड़ो को गले लगाकर समाज के मूल धारा से जोड़े। वही योगीराज भगवान कृष्ण गोरक्षा प्रकृति संवर्धन, संगठन,स्वास्थ्य, सात्विक भोजन, निर्भीकता, सहजता धैर्य, साहस, स्नेह जैसी मानवीय मूल्यों को स्थापित कर संसार को पीड़ा देने वाले दैत्यों' का संहार किये।
द्वारीकाधीश के रूप में भगवान श्री कृष्ण कला संस्कृति का पोषण करते हुए कुशल प्रज्ञा पालन किये।कर्तव्य पथ में असहाय बने अर्जुन को युध्द कि किए प्रेरित कर कुशल युध्द संचालक बनकर गीला-ज्ञान भक्ति और वैराग्य को संदेशवाहक बने।भगवान के इन दिब्य लीलाओ का स्मरण करते हुए दुःख दर्द भरे इस दुनिया में जीवन का बाग सजाना है। पल भर सत्संग कथा हरि का सबसे अनमोल खजाना है।
जीवन को उत्सव बनाकर सम्पूर्ण जीवन को प्रेम और आनंद पूर्वक व्यतित करते, नित्य हम भगवान श्री कृष्ण के संदेश को आत्मसात कर धन्य बनें।
जैसे ही कथा में वासुदेव जी नवजात श्रीकृष्ण जी को लेकर कथा स्थल पर पहुंचे तो श्रद्धालु झूम उठे। श्रद्धालुओं नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से पांडाल गूंज उठा। इस मौके पर श्रीकृष्ण जन्म की खुशी में बधाई गाई गई और प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष डॉ निरेन्द्र साहू,पूर्व विधायक बालोद प्रीतम साहू,पूर्व विधायक साजा लाभचंद बाफना,पूर्व अध्यक्ष हस्त शिल्प बोर्ड दीपक साहू जिला अध्यक्ष साहू समाज नंद लाल साहू, कृष्णा साहू, मंजु साहू,रमेश साहू,अध्यक्ष सेवादल धमतरी होरिलाल साहू,तुलसी साहू,राष्ट्रीय महासचिव लक्ष्मी गुप्ता, हलधर साहू,कलाम, प्रभात धुर्वे,सरस्वती चंद्रकार,युगल पांडे, अखिलेश तिवारी,महेश दुबे, नवीन ताम्रकार,ईश्वर सोनी, राजेन्द्र ठाकुर, दीपिका चन्द्रकार, भीषम हिरवानी, रत्ना नारम देव,झमित गायकवाड़,सनीर साहू, रिवेन्द्र यादव, तारकेश्वर चन्द्रकार, घसिया देशमुख, बाबू लाल देशमुख, भुनेश्वरी ठाकुर,रुपेश देशमुख, मुकेश साहू, देवा साहू,गोपाल साहू, डालेश साहू नोहर साहू, सहित हजारों की संख्या में श्रोता समाज एवं समस्त आयोजन कर्ता व समस्त ग्रामवासी पाऊवारा बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
लेकिन इस बार समीकरण बदले हैं।
चार दशक बाद पहली बार दुर्ग कांग्रेस संगठन ने बंगले की छाया से बाहर निकलकर स्वतंत्र पहचान की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है। यह बदलाव केवल एक कार्यालय परिवर्तन भर नहीं है, बल्कि पूरी संगठनात्मक संस्कृति में हो रहे परिवर्तन का संकेतक है।
दुर्ग ग्रामीण, भिलाई शहर और दुर्ग शहर—तीनों क्षेत्रों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति ने कार्यकर्ताओं के मन में उत्साह का संचार किया। उम्मीदें तब और मजबूत हुईं जब तीनों अध्यक्षों ने कांग्रेस कार्यालय में भव्य समारोह के साथ पदभार ग्रहण किया और यहीं से अपना दैनिक कार्य प्रारंभ किया।
सालों बाद पहली बार यह कार्यालय वास्तव में ‘आबाद’ दिखाई दिया।
यह दृश्य कार्यकर्ताओं के लिए महज़ औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि अब संगठन की पहचान किसी व्यक्तिगत निवास पर नहीं, बल्कि अपने आधिकारिक भवन की छत के नीचे बनेगी।
राजनीतिक विज्ञान में संगठनात्मक ढांचे की मजबूती को किसी भी पार्टी की रीढ़ माना गया है।
जहाँ छत सबको एक साथ जोड़ती है, वहीं उसका अभाव सभी को बिखेर भी सकता है।
दुर्ग में भी यही स्थिति थी—
कागज़ों में सैकड़ों पदाधिकारी, लेकिन जमीनी स्तर पर गिनती के सक्रिय कार्यकर्ता।
गुटबाजी का बोलबाला, किन्तु समाधान का कोई साझा मंच नहीं।
लेकिन अब जब संगठन एक स्वतंत्र छत के नीचे सक्रिय दिख रहा है, तो यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं बल्कि सत्ता केंद्रण से सामूहिक निर्णयवाद की ओर बढ़ते कदमों का सूचक है। पर्दे के पीछे चल रही मनमानी और मतभेद अब खुले में विमर्श के माध्यम से सुलझाए जाएंगे। यह बदलाव केवल संरचनात्मक नहीं, बल्कि मानसिकता का परिवर्तन भी है।
वर्षों तक संगठन का दायरा इतना सीमित था कि आम जनता और कार्यकर्ताओं के लिए कांग्रेस मतलब बंगला हो गया था। यही राजनीतिक असंतुलन संगठन की जड़ें कमजोर कर रहा था।
आज जब कार्यकर्ता अपने कार्यालय में सक्रियता देख रहे हैं, तो उनमें अपनत्व की भावना जागृत हो रही है। संगठन और कार्यकर्ता के बीच की दूरी अब कम होती दिखाई दे रही है।
यह परिवर्तन कुछ लोगों को जरूर असहज कर रहा है—क्योंकि व्यक्तिगत सत्ता का परिदृश्य सिमट रहा है—लेकिन बहुसंख्य कार्यकर्ताओं के लिए यह लंबे समय से प्रतीक्षित सकारात्मक बदलाव है।
यह सही है कि केवल कांग्रेस ही नहीं, हर राजनीतिक दल में गुटबाजी का अस्तित्व रहता है।
परंतु महत्वपूर्ण यह है कि
संगठन वह मंच होता है जहाँ अलग-अलग विचारधाराएँ, अलग-अलग व्यक्तित्व और अलग-अलग मत एक ही छत के नीचे खड़े होकर पार्टी की दिशा तय करते हैं।
दुर्ग कांग्रेस में यह मंच वर्षों तक निष्क्रिय रहा।
अब जबकि कार्यालय केंद्रित संरचना विकसित हो रही है, उम्मीद की जा रही है कि नेतृत्व सामूहिक रणनीति, सामूहिक निर्णय और सामूहिक मेहनत की दिशा में कार्य करेगा।
तीनों अध्यक्षों पर अब एक बड़ी जिम्मेदारी है—
संगठन को बंगले की राजनीति से दूर रखते हुए, कार्यकर्ताओं में विश्वास, पारदर्शिता और समन्वय स्थापित करना।
यह बदलाव स्थायी बनेगा या फिर समय के साथ वापस पुराने ढर्रे पर लौटेगा—यह आने वाले दिनों में तय होगा। किंतु वर्तमान परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि दुर्ग कांग्रेस अब परिवर्तन की राह पर अग्रसर है। संगठन सक्रिय है, कार्यकर्ता आशान्वित हैं और लंबे समय से स्थिर पड़ी राजनीतिक ऊर्जा अब गति पकड़ती दिख रही है।
दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस वर्तमान में विपक्ष की भूमिका में है।
ऐसे में संगठन की सक्रियता केवल आंतरिक मजबूती ही नहीं, बल्कि मजबूत विपक्ष के रूप में जनता के मुद्दों को उठाने की क्षमता भी प्रदान करेगी।
नई नेतृत्व टीम यदि इसी सामूहिक सोच के साथ आगे बढ़ी, तो संगठन न केवल अपने अंदरूनी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में भी प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।
चार दशक बाद दुर्ग कांग्रेस में आया यह परिवर्तन केवल कार्यालय परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
मनमानी की राजनीति के बजाय सामूहिक नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम—यह वही बदलाव है जिसकी कार्यकर्ताओं को वर्षों से प्रतीक्षा थी।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह नया ढांचा भविष्य में संगठन को किस दिशा में ले जाएगा।
लेकिन एक बात तय है—
दुर्ग कांग्रेस की यह नई शुरुआत न केवल उत्साहजनक है, बल्कि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज होने योग्य भी है।
भिलाई निगम / शौर्यपथ / कैलाश नगर, मानसरोवर मंदिर के समीप स्थित खसरा नंबर 1591, 1592 एवं 1593, जो लंबे समय से शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, को बचाने के लिए स्थानीय नागरिकों ने बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। वर्ष 2023 में पार्षद नेहा साहू की पहल पर इस भूमि पर सामुदायिक भवन निर्माण हेतु नगर निगम भिलाई द्वारा निविदा जारी की गई थी, परंतु शासन परिवर्तन के बाद निविदा निरस्त हो गई।
भूमि पर कब्जे के लगातार प्रयास
भूमि लंबे समय से खाली होने के कारण भू-माफियाओं की नजर बनी हुई थी। इसी क्रम में आशा वैष्णव द्वारा अपने निजी खसरों (1588 और 1590/1) का सीमांकन शासकीय भूमि पर करवाने का प्रयास किया गया। मोहल्लेवासियों एवं पार्षद नेहा साहू ने स्थल पंचनामा में इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, क्योंकि बिना मूल दस्तावेज और रजिस्ट्री के शासकीय भूमि पर सीमांकन किया जा रहा था।
लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम आयुक्त एवं अतिरिक्त तहसीलदार को भूमि संरक्षण हेतु आवेदन किया गया, जिसके आधार पर राजस्व प्रकरण दर्ज कर टीम गठित की गई। सीमांकन प्रक्रिया कई बार भू-माफियाओं के हस्तक्षेप के कारण बाधित होती रही और महीनों तक प्रकरण लंबित रहा।
शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा
18 नवंबर 2025 को सुनील कश्यप एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा संपूर्ण भूमि पर पोल, प्री-कास्ट दीवार और कैमरा लगाकर कब्जा कर लिया गया। जब मोहल्लेवासियों ने इसका विरोध किया तो सुनील कश्यप ने दावा किया कि उसने यह जमीन आशा वैष्णव से खरीदी है। इसकी शिकायत पार्षद नेहा साहू ने नगर निगम, तहसीलदार, एसडीएम दुर्ग और कलेक्टर को दी, परन्तु तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच भू-माफियाओं द्वारा अवैध प्लॉटिंग भी शुरू कर दी गई।
01 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना
प्रकरण में विलंब व लगातार कब्जों के विरोध में पार्षद नेहा साहू तथा मोहल्लेवासी 01 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। इसी दिन तहसीलदार भिलाई ने आशा वैष्णव को काम रोकने और शासकीय भूमि सीमांकन का आदेश जारी किया।
सीमांकन में 80% भूमि शासकीय पाई गई
दो दिन चली सीमांकन प्रक्रिया में कब्जाई गई भूमि का करीब 80% हिस्सा शासकीय पाया गया।
जांच टीम ने बताया कि निजी खसरा 1590/1 का चिन्हांकन भी आवश्यक है। सीमांकन के बाद लगभग 28–30 घर शासकीय भूमि पर निर्मित पाए गए, जिनमें से आधे से अधिक घरों को आशा वैष्णव या उनके पिता द्वारा बेचा गया था। शेष घर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमोदित पाए गए।
छह दिन बाद प्रशासन से वार्ता
लगातार छह दिनों के धरने के बाद 06 दिसंबर 2025 की शाम को तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, जामुल थाना प्रभारी व टीम धरनास्थल पहुंचे। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि शासकीय भूमि को सुरक्षित किया जाएगा। निजी खसरों की स्थिति स्पष्ट होने तक क्षेत्र की वर्तमान स्थिति यथावत रखी जाएगी।
धरना समाप्त
संतोषजनक चर्चा के बाद पार्षद नेहा साहू एवं मोहल्लेवासियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की और जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा मीडिया का आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि तुलाराम बेहरा ने उद्बोधन में कहा कि कार्यक्षेत्र में वार्तालाप हिंदी में करने से संवाद सरल बनता है। कंप्यूटर, दस्तावेजों एवं रजिस्टरों में हिंदी में लेखन आज की आवश्यकता है। राजभाषा नीति के अनुसार पत्राचार एवं कार्यालयीन कार्य हिंदी में किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें शत-प्रतिशत कार्य हिंदी में करने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए। हिंदी हमारे समग्र निष्पादन को भी बेहतर बनाती है।
महाप्रबंधक एवं विभागीय हिंदी समन्वय अधिकारी एम.एस. नायडू ने विभाग द्वारा हिंदी के क्षेत्र में की जा रही पहलों, विशेष कार्यों तथा संयंत्र स्तरीय प्रतियोगिताओं के विजेताओं की जानकारी दी। विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विभाग में राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों का पालन किया जाता है तथा अधिकारियों के सभी नामपट्ट और रबर स्टाम्प द्विभाषी हैं।
कार्यक्रम में राजभाषा विभाग द्वारा सामान्य ज्ञान आधारित एक रोचक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें एम.एस. नायडू, विजेन्द्र कुमार वर्मा और हेमराज क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार विजेता रहे। प्रोत्साहन पुरस्कार मधुसूदन नायक (महाप्रबंधक–प्रभारी सीआरजी), देवेन्द्र कुमार सोनी (इंजीनियरिंग एसोसिएट) और डी. विक्टर (चार्जमेन) को प्रदान किए गए।
कार्यशाला में महाप्रबंधक (प्रभारी प्रचालन) झगर सिंह, महाप्रबंधक (यांत्रिकी) मधुसूदन नायक, टी.ए. गगन किशोर, इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा, रमेश दौने, राजेन्द्र कुमार गजेन्द्र, लोकचंद यादव, लेखराम घरेन्द्र, भोपाल सिंह ब्राहेन, उदय राज रामटेके, केदार वर्मा, अनिश कुमार राम, जूनियर इंजीनियरिंग एसोसिएट नरेन्द्र कुमार जोशी तथा टेक्नीशियन वी. दिवाकर राव, डेविड कुमार और दीनबंधु दुर्गा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उप प्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन–राजभाषा) जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों की जानकारी दी तथा ऑनलाइन वॉइस टाइपिंग एवं ‘सैप’ प्रणाली में हिंदी में नोटशीट तैयार करने का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का संचालन इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन इंजीनियरिंग एसोसिएट विजेन्द्र कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
