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सेहत/शौर्यपथ /कौन सी चीज आपको खराब मूड में डालती है? काम, दोस्तों के साथ मतभेद या सामान्य तौर पर उदास महसूस करना? उदास महसूस होने पर कुछ लोग टहलने जाते हैं, संगीत सुनते हैं, चिल्लाते हैं या बहुत बार ठूस-ठूस कर खाते हैं. सवाल उठता है: क्या आप नेचुरल तरीके से अपना मूड सुधार सकते हैं? क्या ऐसी कोई चीज है जिसका सेवन आपको अपना मूड बेहतर करने के लिए करना चाहिए? क्या ऐसी कोई चीज है जिसे बेहतर महसूस करने के लिए आपको खाने से बचना चाहिए? कुछ हेल्दी फूड्स हैं जो आपके मूड को बेहतर बनाएंगे.
मूड में सुधार करने वाले फूड्स
1. केले
केले खराब मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. इनमें विटामिन बी6 प्रचुर मात्रा में होता है, जो डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन में सहायता करता है. फाइबर के साथ मिलाने पर चीनी धीरे-धीरे ब्लड सर्कुलेशन में रिलीज होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर होता है और मूड में सुधार होता है. लो ब्लड शुगर लेवल चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव का कारण बन सकता है.
2. अंडे
अंडे हमारे पसंदीदा मूड बूस्टर में से एक प्रोटीन और विटामिन डी और बी12 से भरपूर होते हैं. इनमें एंटीऑक्सिडेंट सेलेनियम के अलावा, कोलीन, एक विटामिन शामिल है जो न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को सपोर्ट करता है, मूड को बढ़ावा देता है. एंटीऑक्सीडेंट ब्रेन की रक्षा और रखरखाव कर सकता है क्योंकि इससे ऑक्सीडेटिव नुकसान होने की संभावना ज्यादा होती है.
3. फर्मेंटेड फूड
प्रोबायोटिक्स डिप्रेशन का इलाज करने में सहायता कर सकते हैं. फर्मेंटेड फूड्स, जैसे इडली, डोसा और डेयरी-फ्री दही, प्रोबायोटिक्स से भरे होते हैं. इन्हें घर पर बनाना आसान है और ये हमारे पसंदीदा मूड बूस्टर में से एक हैं.
4. चिया बीज
चिया बीज में फैटी एसिड ओमेगा -3 के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और आयरन जैसे कई अन्य पोषक तत्वों का एक प्लांट बेस्ड सोपर्स हैं. इस मूड-बूस्टिंग भोजन में मैग्नीशियम होता है, जो तनाव और चिंता को दूर करने में मदद कर सकता है.
5. बादाम
इस मूड-बढ़ाने वाले भोजन में प्रोटीन, मैग्नीशियम, फाइबर और विटामिन ई सभी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. विटामिन ई को मेमोरी बढ़ाने के लिए जाना जाता है. बादाम को स्नक्स के रूप में खाएं उन्हें रोल्ड ओट्स या ग्रेनोला में मिलाएं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /बालों के नमी अब्जॉर्ब करने और उसे बनाए रखने की क्षमता को बालों की पोरसिटी कहा जाता है. हाई पोरसिटी वाले बाल काफी फ्रिजी और ड्राई होते हैं. ह्यूमिड वेदर में यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है. इस तरह के बालों में टूटने और उलझने की समस्या भी ज्यादा होती है. बाल डल और बेजान नजर आते हैं. बालों पर कैमिकल्स और हीटिंग के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से उनकी पोरसिटी बढ़ जाती है और ये बेजान हो जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे बालों के केयर के लिए कौन से घरेलू उपाय आ सकते हैं काम....
हाई पोरसिटी वाले बालों के लिए घरेलू उपाय
1. एप्पल साइडर विनेगर
एप्पल साइडर विनेगर फ्रिजी और उलझे बालों के लिए बेहतरीन घरेलू उपाय साबित होता है. इसमें मौजूद पोटेशियम और एसिटिक एसिड बालों के डलनेस को दूर करने में मदद करता है. बालों को शैंपू करने के बाद पानी में समान मात्रा में विनेगर मिलाएं और हाथों की मदद से बालों की पूरी लंबाई पर अप्लाई करें. कुछ समय बाद नॉर्मल वाटर से धो लें.
2. आल्मंड ऑयल और एग
आल्मंड ऑयल में नैचुरल मॉइश्चराइजर होता है यह बालों के लिए कंडीशनर का काम करता है. एग में मिलने वाला प्रोटीन बालों को उलझने से बचाता है. आल्मंड ऑयल और एग को मिलाकर मिक्सचर तैयार करें और बालों की जड़ों से सिरे तक लगाएं. इसे 40 मिनट तक बालों में लगा रहने दें फिर शैंपू कर लें. गीले बालों पर किसी अच्छे कंडीशनर अप्लाई करें.
3. नारियल का तेल और विटामिन ई
विटामिन ई में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो बालों को फ्री रेडिकल्स से बचाता है. नारियल तेल बालों को गहराई से पोषण देता है. नारियल का तेल और विटामिन ई मिलाकर स्कैल्प से लेकर बालों के सिरे तक अप्लाई करें. आधे घंटे बाद शैंपू करें.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / स्किन ब्लीचिंग का इस्तेमाल शरीर के डार्क हिस्सों में निखार लाने के लिए किया जाता है, जिसमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड ब्लीचिंग एजेंट का इस्तेमाल होता है, जो स्किन के साथ रिएक्ट करके उस हिस्से को निखारता है. लेकिन कई बार यह ब्लीचिंग स्किन के लिए हार्मफुल भी हो सकती है. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि ब्लीच करने के नुकसान क्या होते हैं और अगर आप ब्लीच करते हैं तो आपको कैसे ब्लीच करना चाहिए ताकि आपको इसके फायदे भी मिल सकें.
कैसे काम करती है स्किन ब्लीच
त्वचा को ब्लीच करने से त्वचा में मेलेनिन की सांद्रता या उत्पादन कम हो जाता है. मेलेनिन एक पिगमेंट है, जो मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं से बनता है. आपकी त्वचा में मेलेनिन की मात्रा आनुवंशिकी से तय होती है.
सांवली त्वचा वाले लोगों में मेलेनिन अधिक होता है. हार्मोन, सूरज की रोशनी और कुछ रसायन भी मेलेनिन उत्पादन को प्रभावित करते हैं.
जब आप त्वचा पर हाइड्रोक्विनोन जैसे उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं यानी की ब्लीच का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपकी त्वचा में मेलानोसाइट्स कम कर देता है. नतीजतन त्वचा को ब्राइट कर सकता है और त्वचा अधिक समान दिखाई दे सकती है.
ब्लीच करने के नुकसान
कई देशों ने स्किन ब्लीचिंग उत्पादों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा रखा है. 2006 में, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने एक नोटिस भी जारी किया था कि ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) स्किन ब्लीचिंग उत्पादों को सुरक्षित और प्रभावी नहीं माना जाता है. साक्ष्यों की समीक्षा के आधार पर उत्पादों को मानव उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं माना गया. कई मामलों में आप इससे त्वचा पर ऐसे काले धब्बों का अनुभव भी कर सकते हैं, जो कभी न हटें.
ब्लीच करने के कुछ नुकसान भी है, जैसे- इससे स्किन इरिटेशन हो सकता है.
स्किन में ड्राइनेस आ सकती है और जो लोग सेंसेटिव स्किन से परेशान है, उन्हें ब्लीच का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
यह आपकी स्किन को डैमेज कर सकता है. इसके अलावा बार-बार ब्लीच करने से स्किन और पतली हो जाती है और समय के साथ काली पड़ने लगती है.
कुछ ब्लीचिंग प्रोडक्ट में मरकरी भी मिलाया जाता है, जो सीरियस हेल्थ इश्यू पैदा कर सकता है. इससे किडनी डैमेज और न्यूरोलॉजिकल समस्या भी हो सकती है.
स्किन पर ब्लीच करने के फायदे
अगर आप अपने चेहरे, गर्दन, कोहनी या घुटनों के कालेपन से परेशान है तो आप ब्लीच कर सकते हैं. ब्लीच करने से इन काले पड़ चुके हिस्सों को दोबारा से निखारा जा सकता है.
इसके लिए केमिकल पील्स, ब्लीचिंग एक्टीवेटर हाइड्रोजन पेरोक्साइड और कई तरह की चीजें इस्तेमाल की जाती है. हालांकि, आपको अपने एक्सपर्ट से पूछ कर ही इन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए.
ब्लीच करने से पिगमेंटेशन को कम किया जाता है और अगर चेहरे पर अनइवन स्किन टोन है तो इसे भी दूर किया जा सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मछली को सेहत के लिए कितना फायदेमंद माना जाता है ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन, क्या आप ये जानते हैं कि मछली की आंख खाने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. मछली में विटामिन, मिनरल्स और फैटी एसिड जैसे कई महत्वपूर्ण तत्व होते हैं. मछली में विटामिन बी12 भी होता है, जो रेड ब्लड सेल्स के विकास और नर्वस सिस्टम को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकता है. लेकिन, क्या आप ये जानते हैं कि मछलियों की आंखें भी कई जगहों में खाई जाती हैं जी हां आपने बिल्कुल सही सुना. तो चलिए जानते हैं मछली की आंख का सेवन करने से शरीर को क्या लाभ मिलते हैं.
मछली खाने से होने वाले फायदे
1. स्किन के लिए-
मछली को डाइट में क्यों शामिल करना चाहिए. मछली में कोलेजन नाम का एक तत्व होता है. कोलेज एक किस्म का प्रोटीन होता है, जो कि स्किन, ज्वाइंट्स, बालों और नाखूनों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है.
2. याददाश्त के लिए-
मछली को मेमोरी के लिए अच्छा माना जाता है. मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड की मदद से कमजोर याददाश्त को बेहतर किया जा सकता है. लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि कुछ लोगों को मछली की आंखों से एलर्जी हो सकती है. इसलिए ध्यान से इसका सेवन करें.
3. आंखों की रोशनी के लिए-
आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मददगार है मछली की. कई जगहों पर आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए मछली की आंख को डाइट में शामिल किया जाता है. लेकिन, इससे कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या भी हो सकती है.
योग टिप्स /शौर्यपथ / महिलाएं हों या पुरुष, सभी के लिए बाल उनके शरीर का वह अहम भाग है जो लुक को अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बनाता है। हालांकि मौसम, प्रदूषण, पौष्टिक आहार की कमी और गलत जीवनशैली का असर लोगों के बालों पर होता है। कई लोगों के बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। बाल झड़ने के साथ ही उनकी ग्रोथ भी रूक जाती है। इसके अलावा उम्र से पहले बाल सफेद होने की भी समस्या हो सकती है। मानसून के मौसम में तो बाल झड़ने की शिकायत लगभग हर किसी को रहती है। बालों को लंबा, घना और काला बनाए रखने के लिए कई तरह के हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इन प्रोडक्ट्स का कई बार साइड इफेक्ट हो सकता है और बाल झड़ने की समस्या में इजाफा हो सकता है। ऐसे में अगर बालों को घना और लंबा करना है तो नियमित योगासनों का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। चलिए जानते हैं बालों की सेहत के लिए लाभकारी योगासनों के बारे में।
शीर्षासन
इस आसन से सिर की ओर रक्त प्रवाह बेहतर तरीके से होता है। शीर्षासन के अभ्यास से तनाव दूर हो सकता है, साथ ही बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। अगर आपके बाल झड़ रहे हों और बेजान हो रहे हैं या फिर समय से पहले बाल सफेद हो रहे हों तो शीर्षासन का अभ्यास करें। इस आसन को करने के लिए दोनों हाथों को सिर के पीछे ले जाएं और नीचे झुकते हुए सिर को नीचे की ओर रखें। अब शरीर का संतुलन बनाते हुए अपने पैरों को ऊपर ले जाएं। सिर के बल खड़े रहते हुए संतुलन बनाते हुए सीधे हो जाएं।
बालासन
पेट संबंधी समस्याओं और तनाव से राहत पाने के लिए बालासन का अभ्यास कर सकते हैं। पेट की समस्या और तनाव के कारण ही बाल झड़ने लगते हैं। इसलिए बालों की ग्रोथ और घने करने के लिए बालासन फायदेमंद हो सकता है। इस आसन को करने के लिए घुटनों को मोड़कर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब हाथों को ऊपर की ओर ले जाते हुए गहरी सांस लें। फिर सांस छोड़ते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं। इस अवस्था में सिर जमीन पर लगा रखें और पेट जांघों पर रखें।
त्रिकोणासन
अगर समय से पहले बाल सफेद हो रहे हैं और बालों में रूखापन है तो त्रिकोणासन का अभ्यास करें। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को कुछ दूरी पर रखकर खड़े हो जाएं। अब हाथों और कंधों को सीध में रखते हुए ऊपर उठाएं। दाहिनी ओर झुकते हुए दाहिने हाथ से पैर को छुएं। इस दौरान बाएं हाथ को आसमान की ओर उठाएं। यह प्रक्रिया दूसरी ओर से दोहराएं।
भुजंगासन
बालों को घना, काला और लंबा बनाने के लिए भुजंगासन का अभ्यास नियमित करें। इस आसन को करने के लिए पेट के बल लेटकर पैरों को आपस में मिला लें। अब हथेलियों को सीने के पास कंधों की सीध पर रखते हुए माथे को जमीन पर रखें। गहरी सांस लेते हुए शरीर के आगे के हिस्से को ऊपर उठा लें। हाथों को सीधा करते हुए इसी मुद्रा में कुछ सेकंड रहें। फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं।
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /स्ट्रेस और एंग्जाइटी मानसिक स्वास्थ्य की तेजी से बढ़ती समस्याओं में से एक है, जिसके कई प्रकार के शारीरिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। एंग्जाइटी के कारण पसीना आने, घबराहट और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होने का जोखिम हो सकता है। चिंता और तनाव के कई कारण हो सकते हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तनाव हमारे शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, हालांकि अगर ये लंबे समय तक बनी रहती है और इसके कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का खतरा हो सकता है।
डॉक्टर कहते हैं, स्ट्रेस की समस्या के शिकार कम उम्र के लोग भी देखे जा रहे हैं, यही कारण है स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे कंट्रोल करने के लिए प्रयास करते रहने की सलाह देते हैं। अगर आपको भी लंबे समय से तनाव की समस्या है और ये कंट्रोल नहीं हो रही है तो इस बारे में किसी मनोवैज्ञानिक की सलाह जरूर ले लें, इसे अनदेखा करना डिप्रेशन जैसी गंभीर स्थितियों का कारण हो सकता है।
आइए जानते हैं, तनाव को प्रबंधित करने के लिए कौन से उपाय किए जाने चाहिए, जिसका सभी उम्र के लोगों को ध्यान रखना जरूरी है।
व्यायाम की बनाएं आदत
स्ट्रेस की समस्या को कंट्रोल करने के लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से व्यायाम की आदत बनाएं। व्यायाम आपके मूड में सुधार करने के साथ हैपी हार्मोन्स को रिलीज करने में सहायक है, ये मूड को ठीक रखने के लिए भी मदद करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को रोजाना कम से कम 30 मिनट के व्यायाम की आदत बनानी चाहिए। एरोबिक जैसे अभ्यास की आदत मूड को ठीक रखने के साथ हृदय रोगों की समस्याओं से बचाने में भी मदद करती है।
गहरी सांस लेने वाले अभ्यास करें
मूड को ठीक रखने और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में गहरी सांस वाले अभ्यास करने को स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी लाभकारी मानते हैं, यही कारण है कि मेडिटेशन जैसे अभ्यास को तनाव-चिंता को कम करने वाले अभ्यास माना जाता है। धीरे-धीरे गहरी सांस लेने और छोड़ने से मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि गहरी सांस वाले अभ्यास को ब्लड प्रेशर के जोखिमों को भी कम करने वाला भी माना जाता है।
स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन
नियमित, संतुलित आहार खाने से आपके मूड को ठीक रखने में मदद मिल सकती है। मूड को नियंत्रित करने और तनाव को दूर करने के लिए भी पौष्टिक आहार के सेवन से लाभ पाया जा सकता है। भोजन में सब्जियों और फलों के साथ साबुत अनाज और लीन प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल किया जाना चाहिए। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जंक-फास्ट फूड्स के अधिक सेवन से मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव देखा गया है।
अपने ट्रिगर को पहचानें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई चीजें आपके तनाव की स्थिति को बढ़ाने वाली हो सकती है, इससे बचाव के लिए लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है। स्ट्रेस की समस्या से बचे रहने के लिए जरूरी है कि आप अपने ट्रिगर को पहचानें और इससे बचाव के लिए प्रयास करते रहें। स्ट्रेस की समस्या से बचाव के लिए अपने ट्रिगर प्वाइंट्स को पहचानें और इससे बचाव करें।
यात्रा /शौर्यपथ /भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक भद्रा माह के रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण का जन्म पाप का अंत, असत्य और अधर्म का नाश करने के लिए हुआ था।
जन्माष्टमी के मौके पर भक्त श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं। इस दौरान कृष्ण मंदिरों में खास उत्सव का आयोजन होता है। बाल गोपाल का जन्म कराया जाता है और भजन कीर्तन किया जाता है। अधिकतर मंदिर रात के समय बंद हो जाते हैं और भगवान विश्राम करते हैं लेकिन चूंकि लड्डू गोपाल का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, ऐसे में जन्माष्टमी के मौके पर आधी रात को मंदिरों में पूजा होती है।
श्रीकृष्ण का नाम आते ही सबसे पहले मथुरा, गोकुल और वृंदावन याद आता है। यहां श्रीकृष्ण का बचपन बीता। बाद में वह गुजरात के द्वारका के राजा बनें। इन जगहों पर श्रीकृष्ण के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं। हालांकि दक्षिण भारत में भी भगवान कृष्ण के बहुत ही विशाल और प्राचीन मंदिर हैं। अगर आप जन्माष्टमी के दौरान दक्षिण भारत की यात्रा पर हैं तो इन कृष्ण मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।
गुरुवायूर मंदिर, केरल
द्वारका गुजरात में है लेकिन दक्षिण भारत के द्वारका मंदिर के नाम से मशहूर गुरुवायूर मंदिर केरल में है। यह दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को भूलोका बैकुंठ भी कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भूलोका बैकुंठ पृथ्वी पर भगवान विष्णु का सबसे पवित्र स्थान है। यहां भगवान कृष्ण बाल रूप में हैं जिन्हें गुरुवायुरुप्पन कहते हैं।
मान्यता है कि जब गुजरात के द्वारका में बाढ़ आई तो कृष्ण की प्रतिमा बाढ़ में बह गई, गुरू बृहस्पति ने देखा तो प्रतिमा को बाढ़ से निकालकर दोबारा स्थापना के लिए जगह तलाशने लगें। भगवान शिव और माता पार्वती ने उन्हें केरल में मूर्ति की स्थापना करने को कहा। इस पर बृहस्पति देव ने वायु देव की मदद से केरल में कृष्ण की प्रतिमा की स्थापना की। इस कारण यह मंदिर गुरु (बृहस्पति देव) और वायुर (वायु देव) के नाम पर पुकारा जाने लगा।
पार्थसारथी मंदिर त्रिपलीकेन, चेन्नई
चेन्नई शहर में भी भगवान कृष्ण का प्रसिद्ध मंदिर है, जिसका नाम पार्थसारथी मंदिर है। यह मंदिर त्रिपलीकेन में स्थित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के चार अवतारों की पूजा होती है, एक कृष्ण, राम, नृसिंह और भगवान वराह। मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और इसकी वास्तुकला अद्भुत है।
जगन्नाथ पुरी, उड़ीसा
भारत के चार धामों में से एक उड़ीसा राज्य के पुरी में है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि द्वापर के बाद भगवान कृष्ण पुरी में निवास करने लगे थे। हर साल जगन्नाथ पुरी से रथ यात्रा निकाली जाती है, जो दुनियाभर में मशहूर है।
श्रीकृष्ण मठ मंदिर उडुपी, कर्नाटक
दक्षिण भारत में श्रीकृष्ण मठ है। कर्नाटक में भगवान श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध मंदिर है। कर्नाटक के उडुपी में श्रीकृष्ण मठ मंदिर में भगवान कृष्ण की पूजा खिड़की के नौ छिद्रों में से की जाती है। लकड़ी और पत्थर से निर्मित इस मंदिर के करीब मौजूद तालाब के पानी में मंदिर का प्रतिबिंब दिखाई देता है। जन्माष्टमी के मौके पर यहां भव्य उत्सव का आयोजन होता है और आसपास के शहरों से लोग दर्शन व पूजा अर्चना के लिए आते हैं।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /गणेश चतुर्थी के त्योहार को अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में बाजारों में इसकी धूम दिखाई देने लगी है। बप्पा के आगमन से पहले लोग अपने घरों में साफ-सफाई में लगे हैं। कई बॉलीवुड और टीवी सेलेब्स से लेकर आम आदमी तक अपने घर बप्पा को लेकर आते हैं। दस दिन तक काफी धूमधाम से लोग बप्पा को अपने घर में स्थापित करते हैं। इसके बाद अनंत चतुदर्शी के दिन बप्पा को विदा किया जाता है।
ऐसे में लोग अपने घर में गणपति को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के भोग-पकवान बनाते हैं। गणपति को भोग में मोदक काफी प्रिय है। ऐसे में आज के इस लेख में हम आपको घर पर ही बप्पा का प्रिय भोग मोदक बनाना बताएंगे, ताकि आप इसका भोग भगवान को लगा सकें। ऐसी मान्यता है कि गणपति को मोदक का भोग लगाने से हर मनोकामना पूरी होती है।
मोदक बनाने के लिए सामान
दो कप चावल का आटा
एक चम्मच देसी घी
एक कप कसा हुआ नारियल
दो चम्मच गुड़
दो बड़े चम्मच बारीक कटा काजू
बादाम
पिसी इलायची
विधि
अगर आप मोदक बनाने का सोच रही हैं तो सबसे पहले इसकी स्टफिंग तैयार कर लें। स्टफिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक पैन को गैस पर रखें और इसमें देसी घी गर्म करें। इसके बाद इसमें घिसे हुए नारियल को सही से भून लें। जब ये हल्का भून जाए तो इसे निकाल कर अलग रख लें।
अब पैन इसमें गुड़ के टुकड़े डालें। जब गुड़ पिघल जाए तो इसमें भुना हुआ नारियल डालें। अब इसे एक साथ पकाएं। इसमें स्वाद के लिए पिसी इलायची और पिसे मेवे भी डालें। अच्छे से पक जाने पर इस गैस बंद करें और स्टफिंग को एक प्लेट में निकाल लें।
अब मोदक बनाने के लिए सबसे पहले चावल का आटा लें। इसके बाद एक पैन में पानी गर्म करें और उसमें घी डालें। जब पानी उबलने लगे तो इसमें चावल का आटा डाल कर अच्छे से मिलाएं। कुछ देर आटे को पकाने के बाद अब गैस को बंद कर दें। तैयार हुए इस डो को एक प्लेट में निकाल लें। हल्का ठंडा हो जाने के बाद हाथ में घी लगाकर इसका आटा गूंथ लें।
इसके बाद बाजार में उपलब्ध मोदक के मोल्ड में हल्का सा घी लगाएं। इसके बाद छोटी सी लोई लेकर उसे मोल्ड में रखें। मोल्ड के बीच में से स्टफिंग को अंदर भरें। अब इसे तैयार करके एक साथ दस से 15 मिनट के लिए स्टीम करें। बस तैयार है गणपति का प्रिय मोदक।
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोगों का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। नसों-धमनियों में जमा होकर ये रक्त के सामान्य प्रवाह को अवरुद्ध कर देता है, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को आहार और लाइफस्टाइल को ठीक रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि रक्त में कोलेस्ट्रॉल की अधिकता पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी जोखिम हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि हम सभी अपने आहार को ठीक रखें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बैड कोलेस्ट्रॉल से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि जंक-फास्ट फूड्स या ऐसी कोई भी चीज का सेवन कम या बिल्कुल न किया जाए जो रक्त को गाढ़ा करती हों या उसके प्रवाह को बाधित करती हों। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए यह सबसे जरूरी मंत्र है।
आइए जानते हैं कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या से बचाव के लिए किन चीजों का सेवन किया जाना चाहिए, किन खाद्य पदार्थों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सबसे कम होती है?
कोलेस्ट्रॉल को करें कंट्रोल
हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न खाद्य पदार्थ आपको शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मददगार हो सकते हैं। घुलनशील फाइबर वाली चीजें न सिर्फ पाचन स्वास्थ्य को ठीक रखने में मदद करती हैं, साथ ही कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकने में भी इससे लाभ मिल सकता है।
प्लांट बेस्ड खाद्य पदार्थों से शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं साथ ही यह आपके हार्ट और नसों को स्वस्थ रखने के लिए भी मददगार हो सकती है। आइए जानते हैं इसके लिए किन चीजों का सेवन किया जाना लाभकारी माना जाता है?
खाने के तेल का करें सही चयन
शरीर को स्वस्थ रखने, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए जरूरी है कि आप खाने के लिए स्वस्थ तेलों का चयन करें। मक्खन और रिफाइंड तेल सेहत के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकते हैं और इससे रक्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का भी खतरा होता है। कैनोला, सूरजमुखी, ऑलिव ऑयल जैसे तेलों का सेवन एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकते हैं।
नट्स का सेवन जरूरी
कई अध्ययनों से पता चलता है कि बादाम, अखरोट, मूंगफली और अन्य मेवे खाना हृदय की सेहत के लिए अच्छा है। प्रतिदिन एक मुट्ठी नट्स खाने से एलडीएल लगभग 5% तक कम हो सकता है। नट्स में अतिरिक्त पोषक तत्व होते हैं जो अन्य तरीकों से हृदय की रक्षा करते हैं। मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए नट्स को आहार का हिस्सा बनाना आपके लिए लाभकारी हो सकता है।
फैटी फिश के लाभ
सप्ताह में दो या तीन बार फैटी फिश खाने से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम किया जा सकता है। बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करने के साथ ये ओमेगा-3 फैटी एसिड भी प्रदान करती हैं, जिसे मस्तिष्क और हृदय के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। ओमेगा-3, रक्तप्रवाह में ट्राइग्लिसराइड्स को भी कम करता है जो असामान्य हृदयगति को कम करने और हृदय की रक्षा करने के लिए लाभकारी है।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रात 12 बजे रोहिणी में हुआ था। इस बार भी कृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में ही पड़ रही है। इस तरह से यह एक दुर्लभ संयोग है। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व दो दिनों मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ पूरे देशभर मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था। हर बार की तरह इस बार भी कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर मतभेद है कि जन्माष्टमी किस दिन मनाई जाए। दरअसल इस वर्ष भी अष्टमी तिथि दो दिन पड़ने के कारण तिथि को लेकर असमंजस है। ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी 6 सितंबर को मनाएं या 7 सितंबर को, जन्माष्टमी पर शुभ योग, तिथि और शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
जन्माष्टमी 2023 शुभ तिथि
भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि प्रारंभ- 06 सितंबर 2023 को दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से
भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि समापन- 07 सितंबर 2023 को शाम 04 बजकर 14 मिनट पर
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तिथि- 6 और 7 सितंबर
जन्माष्टमी व्रत गृहस्थ- 06 सितंबर 2023
जन्माष्टमी व्रत वैष्णव- 07 सितंबर 2023
कृष्ण जन्माष्टमी 2023 शुभ मुहूर्त
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ- 06 सितंबर 2023 को सुबह 09 बजकर 20 मिनट से
रोहिणी नक्षत्र समापन- 07 सितंबर 2023 को सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक
निशिताकाल पूजा मुहूर्त (गृहस्थ)- 07 सितंबर को रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट
निशिताकाल पूजा मुहूर्त (वैष्णव)- 08 सितंबर को सुबह 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट
जन्माष्टमी 2023 शुभ योग
जन्माष्टमी पर 30 वर्षों पर अनोखा संयोग
इस वर्ष की कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही खास रहने वाली है क्योंकि एक साथ कई तरह के अद्भुत योग बन रहे हैं। वर्षो बाद कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व रोहिणी नक्षत्र में मनाया जा रहा है। पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रात 12 बजे रोहिणी में हुआ था। इस बार भी कृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में ही पड़ रही है। इस तरह से यह एक दुर्लभ संयोग है। इसके अलावा 06 सितंबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। वहीं इस योग के दौरान चंद्रमा वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा। इस तरह का दुर्लभ संयोग 30 वर्षों बाद बन रहा है।
कब मनाएं कृष्ण जन्मोत्सव 6 या 7 सितंबर ?
हर वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में गृहस्थ और वैष्णव के लोग जन्माष्टमी का त्योहार अलग-अलग मनाते हैं। जन्माष्टमी के पहले दिन गृहस्थ लोग जबकि दूसरे दिन वैष्णव यानी साधु-संत और महात्मा लोग मनाते हैं। इस तरह से गृहस्थ लोग 6 सितंबर और वैष्णव लोग 7 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व उत्साह के साथ मनाएंगे। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का शृंगार करने के बाद उन्हें अष्टगंध, चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाकर माखन मिश्री और अन्य भोग सामग्री अर्पित करना शुभ माना गया है।
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / स्किन केयर रूटीन में अक्सर ही फेस टोनर्स को शामिल किया जाता है. फेस टोनर्स की कंसिस्टेंसी पानी जैसी ही होती है और इन्हें फेस वॉश के बाद इस्तेमाल चेहरे पर लगाते हैं. फेस टोनर्स से फेस वॉश करने के बाद चेहरे पर बची हुई गंदगी और डेड स्किन सेल्स हट जाती हैं. टोनर्स स्किन को अन्य स्किन केयर प्रोडक्ट्स और मेकअप के लिए तैयार करते हैं और ये स्किन की सेहत का ख्याल रखते हैं. अगर आपके पोर्स गंदगी से भर गए हैं तो टोनर्स इन क्लोग्ड पोर्स को भी साफ कर देते हैं. स्किन का पीएच बेहतर बनाने में टोनर्स का असर देखा जाता है. यहां जानिए घर की ही कुछ आसान सी चीजों से किस तरह टोनर तैयार करके लगाए जा सकते हैं.
घर पर बने फेस टोनर्स |
चावल के पानी का टोनर
इस टोनर को बनाने के लिए आपको आधा कप चावल की जरूरत होगी. चावल को साफ पानी में भिगोकर रखें. आधे घंटे बाद पानी का रंग सफेद हो जाएगा. बस तैयार है आपका राइस वॉटर टोनर. इस टोनर को शीशी में भरकर रखा जा सकता है.
एलोवेरा जैल टोनर
एक कटोरी में एलोवेरा जैल लें और इसमें गुलाबजल मिला लें. कंसिस्टेंसी एकदम पतली रखें. इस फेस टोनर को आप स्प्रे बोतल में रख सकते हैं या फिर रूई में लेकर चेहरे पर मल सकते हैं. ध्यान रहे टोनर का अच्छा असर गीली त्वचा पर ही अच्छा नजर आता है.
खीरे का टोनर
त्वचा की देखरेख में खीरे को अक्सर ही इस्तेमाल किया जाता है. खीरे से त्वचा निखरती भी है और बेदाग भी नजर आती है. खीरे का टोनर बनाने के लिए बराबर मात्रा में खीरे का रस और विच हेजल मिला लें. आप सिर्फ खीरे के रस से भी यह टोनर बना सकते हैं. खीरे के रस में पानी या फिर एलोवेरा जैल भी मिलाया जा सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /दूध कैल्शियम से भरपूर होता है और कैल्शियम का प्रमुख स्त्रोत भी है. दूध को रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाया जाता है और इसे बच्चों से लेकर बड़ों तक को पीने की सलाह दी जाती है. कोई दूधगर्म पीना पसंद करता है और कोई इसे ठंडा भी पी लेता है. दूध के सेवन के कई तरीके हैं, इसके साथ कुछ चीजें खाना सेहत को बेहतर कर सकता है तो कुछ चीजों के साथ दूध पी लिया जाए तो स्वास्थ्य बिगड़ते देर नहीं लगती. जानिए किन फूड्स को दूध के साथ खाना सेहत के लिए अच्छा है और किनसे करना चाहिए परहेज.
दूध के साथ खाए और ना खाए जाने वाले फूड्स |
दूध के साथ खाने वाली चीजें
ओटमील या ओट्स दूध के साथ खाने के लिए अच्छा फूड है. ओटमील को दूध में डालने से शरीर को भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं. इनसे खासकर कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर मिलता है जो सेहत को दुरुस्त रखने में असरदार है.
सूखे मेवे भी दूध के साथ खाए जा सकते हैं. खासकर जो लोग वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं वे दूध में खजूर, बादाम, किशमिश या सूखा अंजीर मिलाकर खा सकते हैं.
दूध और पैनकेक्स को साथ खाना एक बैलेंस्ड डाइट है. इनसे पेट तो भरता ही है, साथ ही सेहत भी अच्छी रहती है.
केले भी दूध के साथ खाने के लिए अच्छे हैं. इनसे शरीर को भरपूर पोषण मिलता है. फाइबर, पौटेशियम और प्रोटीन की यह मात्रा स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त है.
दूध के साथ ना खाई जाने वाली चीजें
खट्टी चीजों को खासतौर से दूध के साथ खाने-पीने पर परेहज करने के लिए कहा जाता है. इनसे पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं.
मसालेदार चीजें दूध के साथ खाने पर सेहत बिगड़ सकती है. यह कोंबिनेशन हार्मोंस के लिए अच्छा नहीं माना जाता है.
आचार और किमची जैसी चीजों को दूध के साथ खाने-पीने से परहेज करना चाहिए. ऐसा ना करने पर पाचन खराब हो जाता है.
टमाटर और दूध को भी साथ ना खाने के लिए कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि टमाटर एसिडिक होता है और दूध के साथ खाने पर सेहत के लिए अच्छा साबित नहीं होता है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / लंबे और घने बालों की चाहत में लोग जाने क्या-क्या नहीं करते. बाजार के महंगे प्रोडक्ट्स से लेकर अनेक घरेलू नुस्खे तक आजमाकर देख लेते हैं लेकिन हाथ कुछ नहीं लगता. आपने कभी गौर किया होगा कि साउथ इंडियन लोगों के बाल बहुत ही काले और घने होते हैं. आप सोचते होंगे कि वो बालों में ऐसा क्या लगाते हैं कि उनके बाल इतने शानदार होते हैं. तो चलिए आज आपको ये सीक्रेट बता देते हैं. अगर आप भी साउथ इंडियन लोगों की तरह लंबे, घने और काले बालों की चाहत रखते हैं तो इस सीक्रेट फॉर्मूले के जरिए अपना सपना पूरा कर सकते हैं.
घर पर बनाएं यह खास तेल
साउथ इंडियन लोगों की तरह लंबे, मोटे और घने बालों के लिए एक खास तेल यहां आपको बताया जा रहा है. इस खास तेल (Hair Oil) को बनाने के लिए सबसे पहले करी पत्ता, मेथी दाना और लौंग एक कटोरी में डालिए. इन तीनों चीजों को आप एक मिक्सी में डालकर अच्छे से ग्राइंड कर लीजिए. इन चीजों को अच्छे से ग्राइंड करने के बाद इस मिश्रण को कांच की छोटी सी शीशी या कंटेनर में डालिए. अब उसमें आधा कटोरी ऑलिव ऑयल मिला लीजिए. अगर ऑलिव ऑयल नहीं है तो आप नारियल का तेल इसमें डाल सकते हैं. इस तरह आपके तेल की सारी सामग्री तैयार हो चुकी है.
तीन दिन के लिए फर्मेंट होने दीजिए
इस सारे मिश्रण को 3 दिन के लिए ढककर फर्मेंट होने के लिए रख देना है. 3 दिन बाद आप इस तेल को अपने बालों पर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए रात को अपने बालों में इस तेल की मालिश कीजिए और रातभर के लिए लगा छोड़ दीजिए. अगले दिन सुबह बालों को शैंपू (Shampoo) कर लीजिए. इस खास तेल में पड़े शानदार हर्ब्स आपके बालों को मजबूत और घना करेंगे और आपके बाल लंबे भी होने लगेंगे.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पहले भगवान कृष्ण के बड़े भाई बललामजी का जन्मोत्सव हल षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में हल षष्ठी के व्रत का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार हल षष्ठी हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। हल षष्ठी के त्योहार पर महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि का कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह पर्व देश की पूर्वी भागों में विशेष रूप से मनाया जाता है। हल षष्ठी को बलरामजी जयंती और ललही छठ के नाम भी जाना जाता है। इस बार हलषष्ठी 5 सितंबर, मंगलवार के दिन मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं हल षष्ठी की शुभ तिथि, मुहूर्त और महत्व के बारे में...
हल षष्ठी 2023 शुभ तिथि और मुहूर्त
संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को उपवास रखा जाता है। इस बार षष्ठी तिथि की शुरुआत 04 सितंबर 2023 को शाम 04 बजकर 42 मिनट से हो रही है जो 05 सितंबर 2023 को दोपहर 03 बजकर 45 मिनट पर खत्म हो जाएगी। उदया तिथि के अनुसार हल षष्ठी 5 सितंबर को मनाई जाएगी।
हलषष्ठी पूजा विधि 2023
हलषष्ठी पर माताएं जल्द ही सुबह उठकर स्नान करते हुए सबसे पहले सूर्यदेव को जल अर्पित करके व्रत का संकल्प लें। फिर इसके बाद साफ सुथरे कपड़े पहनें। माताएं हलषष्ठी का व्रत संतान की खुशहाली एवं दीर्घायु की प्राप्ति के लिए रखती हैं और नवविवाहित स्त्रियां भी संतान की प्राप्ति के लिए करती हैं। मान्यता के अनुसार इस व्रत में इस दिन दूध, घी, सूखे मेवे, लाल चावल आदि का सेवन किया जाता है। इस दिन गाय के दूध व दही का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन हल से जोते गए किसी भी अन्न का ग्रहण नहीं किया जाता है। इस व्रत के दिन घर या बाहर कहीं भी दीवार पर भैंस के गोबर से छठ माता का चित्र बनाते हैं। उसके बाद भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं घर में ही गोबर से प्रतीक रूप में तालाब बनाकर, उसमें झरबेरी, पलाश और कांसी के पेड़ लगाती हैं और वहां पर बैठकर पूजा अर्चना करती हैं एवं हलषष्ठी की कथा सुनती हैं।
हलषष्ठी व्रत का महत्व
देश के अलग-अलग हिस्सों में हलषष्ठी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे ललही छठ, हर छठ, हल छठ, पीन्नी छठ या खमर छठ भी कहा जाता है। बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल और मूसल है इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है। उन्हीं के नाम पर इस पावन पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बलरामजी पूजा और खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले उपकरणों की पूजा होती है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
