August 09, 2026
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         ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /लंबे, घने और लगातार बढ़ते बाल आखिर किसे अच्छे नहीं लगेंगे. लेकिन, धूल, मिट्टी, प्रदूषण और व्यस्तता के चलते भी बालों का सही तरह से ख्याल रखना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में बालों की थोड़ी ज्यादा देखरेख करना जरूरी हो जाता है. यहां जानिए किस तरह घर पर ही शैंपू  तैयार किया जा सकता है. इस शैंपू को बनाने के लिए आपको एक से 2 चीजों की ही जरूरत होगी. इससे ना सिर्फ बालों का झड़ना कम होगा बल्कि बालों को बढ़ने में भी मदद मिलेगी और बाल पहले से ज्यादा खूबसूरत नजर आएंगे सो अलग. जानिए कैसे बना सकते हैं बेहद ही आसानी से शिकाकाई  से शैंपू.
    कैसे बनाएं शिकाकाई शैंपू |
        शैंपू बनाने के लिए आपको सबसे पहले किसी बर्तन में डेढ़ गिलास पानी लेकर उसमें 50 ग्राम शिकाकाई, 50 ग्राम आंवला  और 50 ग्राम रीठा डाल लेना है. इसे रातभर भिगोकर रखें. अगले दिन हाथों से मसलते हुए बीज और गूदे को अलग कर लें और हाथों से एक बार फिर शिकाकाई, आंवला और रीठा को रगड़ें जिससे बाउल का पानी झागदार हो जाए. अब शिकाकाई, आंवला और रीठा समेत इस पानी को आंच पर चढ़ा दें और थोड़ी देर बाद 2 चम्मच रोजमेरी मिला लें. बिना रोजमेरी भी इस शैंपू को तैयार किया जा सकता है लेकिन रोजमेरी से बालों को तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है. कुछ देर पकाने के बाद इस मिश्रण को छानकर पानी अलग कर लें.
       आप इस मिश्रण को शैंपू की तरह इसी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर इस पानी में एक चौथाई कप कोई भी शैंपू मिला लें. शैंपू डालने से यह गाढ़ा हो जाएगा. अच्छे से हिलाएं और बस तैयार है आपका शिकाकाई, रीठा और आंवला वाला शैंपू.
       इस शैंपू के कई फायदे हैं. आपके बाल डैमेज से बचे रहेंगे, बालों को जरूरी पोषण मिलेगा, बाल प्राकृतिक रूप से घने बनेंगे, बाल बढ़ने लगेंगे, बाल समय से पहले सफेद नहीं होंगे और स्कैल्प की अच्छी सफाई होगी सो अलग. शिकाकाई के इस शैंपू को आप आम शैंपू की ही तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होने वाला पितृ पक्ष हिन्दुओं के लिए काफी जरूरी त्योहार माना जाता हैं. इस दौरान जातक अपने-अपने पूरवजों को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग अनुष्ठान करते हैं. पितृ पक्ष हर साल भाद्रपद  महीने की पू्र्णिमा तिथि से शुरू होकर अश्विन  मास की अमावस्या  पर खत्म होते हैं. अधिक मास का वर्ष होने के कारण इस साल पितृ पक्ष 15 दिन की देरी से शुरू होने वाले हैं. पितृ पक्ष 2023 के दौरान इन बातों का ध्यान रखना जरूरी हैं.
    पितृ पक्ष 2023: सही तिथि और मूहूर्त
      पितृ पक्ष के 15 दिनों के दौरान सभी अपने पितरों के मृत्यु की तिथि के दिन श्राद्ध करते हैं. साल 2023 में भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि 29 सितंबर 2023 को है और अश्विन मास की अमावस्या तिथि 14 अक्टूबर 2023 को है. इस तरह पितृ पक्ष 2023 29 सितंबर 2023 से शुरू होकर 14 अक्टूबर 2023 को खत्म होगी. इस बार अश्विन मास की अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण  भी लग रहा है.
      अगर किसी जातक को अपने पितर के देहावसान की तिथि याद न हो तो वे अश्विन मास के अमावस्या के दिन अपने पितरों का श्राद्ध क्रम कर सकते हैं. इस दिन को सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाते हैं.
    क्या है मान्यता
         पौराणिक हिन्दु मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान अपने पितरों को याद करने और विधिवत पूजा अनुष्ठान करने से वे प्रसन्न होते हैं और इससे जातकों के जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं. आमतौर से ये तीन घटकों को आपस में जोड़ती है. पहला पिंडदान , दूसरा तर्पण और तीसरा ब्राह्मण को खिलाना  . इसके साथ ही इस दौरान पवित्र शास्त्रों को पढ़ना भी शुभ माना गया है.
    पितृ पक्ष 2023: श्राद्ध की जरूरी तिथियां
    पूर्णिमा श्राद्ध - 29 सितंबर 2023
    प्रतिपदा और द्वितीया - 30 सितंबर 2023
    द्वितीया श्राद्ध - 1 अक्टूबर 2023
    तृतीया श्राद्ध - 2 अक्टूबर 2023
    चतुर्थी श्राद्ध - 3 अक्टूबर 2023
    पंचमी श्राद्ध - 4 अक्टूबर 2023
    षष्ठी श्राद्ध - 5 अक्टूबर 2023
    सप्तमी श्राद्ध - 6 अक्टूबर 2023
    अष्टमी श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2023
    नवमी श्राद्ध - 8 अक्टूबर 2023
    दशमी श्राद्ध - 9 अक्टूबर 2023
    एकादशी श्राद्ध - 10 अक्टूबर 2023
    द्वादशी श्राद्ध- 11 अक्टूबर 2023
    त्रयोदशी श्राद्ध - 12 अक्टूबर 2023
    चतुर्दशी श्राद्ध- 13 अक्टूबर 2023
    अमावस्या श्राद्ध- 14 अक्टूबर 2023

        सेहत टिप्स /शौर्यपथ / अश्वगंधा का वानस्पतिक नाम विथानिया सोम्नीफेरा है, और इसे "इंडियन जिनसेंग" और "विंटर चेरी" सहित कई अन्य नामों से भी जाना जाता है. अश्वगंधा का पौधा पीले फूलों वाला एक छोटा झाड़ी है जो भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है. लोग चिंता और प्रजनन संबंधी समस्याओं सहित विभिन्न स्थितियों के इलाज के लिए पौधे की जड़ या पत्तियों के अर्क या पाउडर का उपयोग करते हैं. शोध के आधार पर अश्वगंधा के 8 संभावित लाभ यहां दिए गए हैं जिसके बारे में आपको जरूर जान लेना चाहिए.
    अश्वगंधा खाने के लाभ
    - शोध से पता चलता है कि अश्वगंधा की खुराक तनाव और चिंता से राहत दिलाने में मदद कर सकती है.  58 प्रतिभागियों के साथ एक छोटे से अध्ययन में, जिन लोगों ने 8 सप्ताह तक 250 या 600 मिलीग्राम अश्वगंधा अर्क लिया, उनमें प्लेसबो लेने वालों की तुलना में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर काफी कम हो गया था.
    - कुछ सबूत बताते हैं कि अश्वगंधा कुछ हद तक अवसाद सहित अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है. एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित 66 लोगों में अश्वगंधा के प्रभावों को देखा, जो अवसाद और चिंता का अनुभव कर रहे थे. उन्होंने पाया कि जिन प्रतिभागियों ने 12 सप्ताह तक प्रतिदिन 1,000 मिलीग्राम अश्वगंधा अर्क लिया, उनमें प्लेसबो लेने वालों की तुलना में अवसाद और चिंता में अधिक कमी आई.
    - मधुमेह वाले लोगों में 5 क्लीनिकल ​​अध्ययनों सहित 24 अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि अश्वगंधा के उपचार से रक्त शर्करा, हीमोग्लोबिन A1c, इंसुलिन, रक्त लिपिड और ऑक्सीडेटिव तनाव मार्करों में काफी कमी आई है.
    - कई लोग आरामदायक नींद को बढ़ावा देने के लिए अश्वगंधा का सेवन करते हैं, और कुछ सबूत बताते हैं कि यह नींद की समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है. उदाहरण के लिए, 65-80 वर्ष की आयु के 50 वयस्कों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 12 सप्ताह तक प्रति दिन 600 मिलीग्राम अश्वगंधा की जड़ लेने से प्लेसबो उपचार की तुलना में जागने पर नींद की गुणवत्ता और मानसिक सतर्कता में काफी सुधार हुआ.

      सेहत टिप्स /शौर्यपथ / मसाले न सिर्फ हमारे खाने का स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि कुछ मसाले सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं. इन्हीं में से एक है छोटी सी दिखने वाली काली मिर्च  जो हमारे खाने में स्वाद का तड़का लगाती है. जब छोटी सी काली मिर्च का सेवन घी के साथ किया जाता है तो ये हमारे शरीर को कई बेहतरीन फायदे दे सकती है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं घी और काली मिर्च का सेवन कैसे किया जाना चाहिए और इसके फायदे क्या हैं.
    काली मिर्च और घी का सेवन
         सबसे पहले आपको बताते हैं कि काली मिर्च में कैरोटीन, विटामिन ए, सी, फ्लेवोनोइड्स और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को भी कम कर सकते हैं. वहीं, आयुर्वेद में घी  को एक सुपरफूड माना गया है जिसमें हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं और रोजाना एक चम्मच घी का सेवन करना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. काली मिर्च का पाउडर बनाकर रख लें और आधा चम्मच घी में चुटकीभर काली मिर्च का पाउडर  अच्छी तरह से मिलाएं और इसका सेवन करें.
    आंखों की रोशनी तेज करे
      जब आप रोजाना काली मिर्च और घी का सेवन करते हैं तो इससे आपके आंखों को फायदा पहुंचता है और आंखों की रोशनी बेहतर होती है. बढ़ती उम्र के लोगों को घी और काली मिर्च का सेवन जरूर करना चाहिए.
    रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
       काली मिर्च और घी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो हमारे शरीर को अंदर से मजबूत करते हैं और हमारे इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग करते हैं.
    जोड़े के दर्द से छुटकारा दिलाए
         काली मिर्च और घी को एकसाथ खाने से जोड़ों के दर्द   से राहत मिलती है. खासकर, जिन लोगों को सूजन या गठिया की समस्या होती है उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए.
    पाचन तंत्र के लिए
        काली मिर्च और घी का मिश्रण खाने से पहले लेने से पाचन शक्ति मजबूत होती है. इससे खाना जल्दी पचता है और पेट संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है.
    दिल की सेहत रहती है अच्छी
       घी में हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं जिनका सेवन अगर काली मिर्च के साथ किया जाए तो यह दिल को फायदा पहुंचाते हैं. दरअसल, घी और काली मिर्च को एक साथ खाने से शरीर में एंजियोजेनेसिस को बढ़ावा मिलता है.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / मासिक शिवरात्रि हर माह पड़ने वाली शिवरात्रि है. शिवरात्रि के अवसर पर भक्त अपने आराध्य शिव के लिए व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं. हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है. माना जाता है कि जो भक्त शिवरात्रि पर व्रत और भगवान शिव   की पूजा करते हैं उनपर भोलेनाथ की खास कृपादृष्टि पड़ती है और भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. जानिए किस तरह मासिक शिवरात्रि पर पूजा की जाए.
    मासिक शिवरात्रि की पूजा
       पंचांग के अनुसार भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 13 सितंबर रात 2 बजकर 21 मिनट पर होगा और उसका समापन 14 सितंबर की सुबह 4 बजकर 48 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में मासिक शिवरात्रि का व्रत 13 सितंबर के दिन ही रखा जा रहा है. मासिक शिवरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त 13 सितंबर देररात से अगले दिन 12 बजकर 40 मिनट तक बताया जा रहा है.
           शिवरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह-सवेरे जल्दी उठा जाता है और साफ वस्त्र पहने जाते हैं. इसके बाद भक्त व्रत का संकल्प लेते हैं. पूजा करने के लिए शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और शमी के पत्ते आदि अर्पित किए जाते हैं. इसके अलावा शिव मंत्रों का जाप होता है और सभी देवी-देवताओं का भी ध्यान किया जाता है.
    माना जाता है कि शिवरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों पर भगवान शिव मेहरबान रहते हैं और भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं. निम्न कुछ ऐसे मंत्र हैं जिनका शिव पूजा के दौरान उच्चारण किया जा सकता है.
    शिव गायत्री मंत्र
    ।। ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात ।।
    महामृत्युंजय मंत्र
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
    अन्य मंत्र
    ।। श्री शिवाय नम:।।
    ।। श्री शंकराय नम:।।
    ।। श्री महेश्वराय नम:।।
    ।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
    ।। श्री रुद्राय नम:।।
    ।। ओम पार्वतीपतये नम:।।
    ।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।।

       व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है, 16 दिनों की अवधि है जो अनंत चतुर्दशी के बाद शुरू होती है. पितृ पक्ष अश्विनी महीने में कृष्ण पक्ष या चंद्रमा के घटते चरण के दौरान पूर्णिमा तिथि या पूर्णिमा के दिन शुरू होता है. पितृ पक्ष के 16 दिनों में पितरों का श्राद्ध करने का काम किया जाता है. यह कार्य पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है. ऐसे में चलिए जानते हैं इस बार कब शुरू हो रहा है श्राद्ध पक्ष.
        कब से शुरू हो रहा पितृ पक्ष- इस साल पितृपक्ष 28 सितंबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर को समाप्त होगा.
    क्यों करते हैं पितृपक्ष में श्राद्ध
    - ऐसा मान्यता है कि अगर हमारे पूर्वजों की आत्मा को विधि-विधान से संतुष्टि नहीं मिलती है तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती है और मृत्यु के बाद उनकी आत्मा भटकती रहती है.
    - वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भाद्रपद माह की पूर्णिमा को पृथ्वी ग्रह पर देवता उत्तर (गोल) की ओर चले जाते हैं और दक्षिण (गोल) चंद्र लोक के साथ पृथ्वी के करीब से गुजरता है.
    - हमारे पूर्वजों की आत्माएं साल भर इस महीने का इंतजार करती हैं. वे अपनी मृत्यु तिथि पर चंद्रलोक से होते हुए दक्षिण दिशा में अपने घर के द्वार पर पहुंचते हैं और उनका (प्रसाद) सम्मान प्राप्त करके, वे खुशी-खुशी अपनी नई पीढ़ी को छोड़ देते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं.

       ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /समय से पहले बालों के सफेद   होने में योगदान देने वाले कारकों में तनाव  , धूम्रपान, जरूरी विटामिन   और खनिजों की कमी वाला खराब आहार, हार्मोनल असंतुलन और थायरॉयड या ऑटोइम्यून रोग जैसी चिकित्सीय स्थितियां   शामिल हैं. ऐसे में आपको सबसे पहले अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करने की जरूरत है. इसके अलावा सफेद बालों  से छुटकारा पाने के लिए यहां बताई गई केमिकल फ्री हेयर डाई  का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं इसको बनाने की पूरी प्रॉसेस.
    केमिकल फ्री हेयर डाई कैसे बनाएं
    सामग्री
    - 01 कटा हुआ चुकंदर
    - 02 बड़े चम्मच भीगे मेथी दाने
    - 4 से 5 लौंग
    - एक बाउल हिना मेहंदी
    - 02 चम्मच कॉफी
    बनाने की विधि
       अब आप इन सभी सामग्रियों को मिक्सर ग्राइंडर में डालकर अच्छे से पीस लीजिए. इसके बाद ग्राइंडर से निकालकर एक बाउल में पेस्ट निकाल लीजिए. फिर इसमें कॉफी पाउडर और हिना मिला देना है पानी डालकर. अब आप इस मिश्रण को 15 मिनट के लिए ढककर रख दीजिए. इसके बाद आप इस हेयर डाई को पूरे बाल में अच्छे से अप्लाई कर लीजिए और 2 घंटे के लिए बालों में लगा रहने दीजिए. इसके बाद आप हेयर वॉश ले लीजिए.

        ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /सभी चाहते हैं कि उनकी स्किन पर एक भी दाग-धब्बा ना हों. इसके लिए स्किन की रोजाना, क्लीनिंग, टोनिंग और मॉइश्चरजिंग करनी जरूरी है. तभी आपकी त्वचा खिली-खिली और चमकदार बनी रहेगी. अगर ये रूटीन फॉलो करने के बावजूद चेहरे पर झाई और दाग-धब्बे हो रहे हैं तो, इसका मतलब आपकी डाइट में विटामिन सी और ई की कमी हो गई है. ऐसे में आप सबसे पहले सेब, संतरा, अंगूर जैसे फलों को खाना शुरू कर दीजिए. इसके अलावा आप इस रेमेडी को भी अप्लाई करिए जिसके बारे में आगे आर्टिकल में हम आपको बताने वाले हैं .
    झाई कैसे करें ठीक
       आपको पपीते की पत्ती को पीसकर पेस्ट तैयार कर लेना है फिर उसे चेहरे पर अप्लाई कर लेना है, पैक की तरह. 15 मिनट तक पेस्ट को लगाकर रखना है इसके बाद नॉर्मल पानी से चेहरे को साफ कर लीजिए. अगर आप इस रेमेडी को सप्ताह में दो बार अप्लाई कर लेते हैं तो फिर आपके चेहरे की झाई 15 दिन में हल्की पड़ने लग जाएगी और 1 महीने में गायब हो जाएगी.
    अन्य उपाय
    - नींबू के रस में शहद मिलाकर सूती कपड़े की मदद से चेहरे पर लगाएं. फिर इस पेस्ट को 15 मिनट लगा रहने दीजिए. इसके बाद चेहरे को साफ कर लीजिए. फिर आप चेहरे को मॉइश्चराइज कर लीजिए.
    - इसके अलावा आप एक चुटकी हल्दी में दूध और बेसन मिलाकर पेस्ट तैयार कर लीजिए. फिर 15 मिनट के लिए सूखने के लिए छोड़ दीजिए, फिर आप चेहरे को साफ पानी से धो लीजिए. और चेहरे को सूखाकर मॉइश्चराइज कर लीजिए.
    - वहीं, पके हुए केले के छिलके को झाइयों पर 5 मिनट के लिए रगड़िए. फिर करीब 20 मिनट तक रस को चेहरे पर रहने दीजिए. ऐसा करने से भी आपके चेहरे की झाईयां एक महीने में हल्की पड़ने लग जाएगी.

       ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /बाल आपके व्यक्तित्व को निखारता है. इसके बिना सुंदरता की कल्पना करना भी डरावना लगता है. इसलिए लोग इसकी देखभाल में जरा सी भी लापरवाही नहीं बरतते हैं. लेकिन आजकल के बढ़ते प्रदूषण और अनहैल्दी लाइफस्टाइल के कारण कम उम्र में बाल सफेद होने लग रहे हैं. जिसको काला करने के लिए लोग केमिकल युक्त डाई का इस्तेमाल करते हैं. जिसके कई साइडइफेक्ट भी देखने को मिलते हैं. ऐसे में फिर आपको बालों को काला करने के लिए घरेलू उपाय अपनाने चाहिए. हम यहां पर आपको बहुत ही आसान रेमेडी के बारे में बताने वाले हैं जिससे आपके बालों का रंग जेट ब्लैक हो जाएगा.
    बाल काला कैसे करें
    - आंवला पाउडर  को लोहे के बर्तन में 1 घंटा भिगोएं और फिर उसमें नारियल तेल अच्छे से मिक्स करें. इसके बाद पेस्ट की तरह पूरे बाल में अप्लाई कर लीजिए और 1 घंटे के बाद माइल्ड शैंपू से सिर धोएं.
     - प्याज का रस कैटेलिस्ट  एंजाइम को बढ़ाता है जिससे मेलानिन बढ़ता है, जो बाल के रंग को काला करता है. आप 03 चम्मच प्याज के रस में 01 चम्मच नारियल या बादाम का तेल और 01 चम्मच नींबू का रस मिलाकर लगाएं और फिर 30 मिनट बाद शैंपू कर लीजिए.
    - इसके अलावा आप लोहे की कड़ाही में इंडिगो और हिना पाउडर मिलाकर रातभर भिगो दीजिए. फिर सुबह उसमें नारियल का तेल मिलाकर पूरे बालों में अप्लाई कर लीजिए. फिर 2 घंटे बाद माइल्ड शैंप से हेयर वॉश कर लीजिए.

    टिप्स /शौर्यपथ / पति-पत्नी का रिश्ता प्यार और विश्वास पर टिका बेहद खूबसूरत रिश्ता होता है, लेकिन कई बार समय के साथ हसबैंड वाइफ  के साथ रहते हुए भी उनसे ज्यादा बात नहीं करते हैं. अधिकतर पत्नियों को अपने पति से यह शिकायत रहती है कि पति घर आने के बाद भी मोबाइल या टीवी मे व्यस्त रहते हैं और उनकी बातों में दिलचस्पी नहीं लेते हैं.
    बात नहीं करते हैं
       कई बार पति-पत्नी के साथ बैठे तो होते हैं लेकिन ज्यादा बातचीत नहीं करते हैं. पत्नी अगर बात करना चाहे तो हां ना से ज्यादा कुछ नहीं कहते हैं. इसकी शिकायत करने पर उनकी दलील होती है तुम्हारे साथ ही था, अब और क्या चाहती हो.
    अकेलेपन की फीलिंग
      पति के साथ रहने पर भी कई महिलाओं को अकेलेपन की फीलिंग सताती है. क्योंकि पति साथ होकर भी साथ नहीं होते हैं. वे इमोशनली कनेक्ट नहीं होते हैं. इसके कारण पति पत्नी का रिश्ता प्रभावित होने लगता है.
     फिजिकल प्रेजेंस लेकिन मेंटली गायब
        ज्यादातर पत्नियों की यही शिकायत होती है कि छुट्टी के दिन भी भले ही पति फिजिकली घर पर प्रेजेंट हों लेकिन उनका मन इधर-उधर लगा रहता है हमारे साथ नहीं होते. ऐसे में पूरा दिन साथ होकर भी साथ महसूस नहीं होता.
     साइकोलॉजिस्ट डॉ नेहा पतियों को पत्नी और बच्चों के लिए कुछ समय डेडीकेट करने की सलाह देते हुए कहती हैं कि उस समय फिजिकली ही नहीं मेंटली और इमोशनली भी प्रजेंट रहना जरूरी है. परिवार के साथ वक्त बिताने से रिश्ते मजबूत होते हैं और किसी को अकेलेपन की फीलिंग परेशान नहीं करती है.

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