August 09, 2026
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        व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /दस दिवसीय गणेशोत्सव   के दूसरे दिन बुधवार सुबह महाराष्ट्र के पुणे में प्रसिद्ध दगडूशेठ गणपति पंडाल में 31,000 से अधिक महिलाओं ने 'अथर्वशीर्ष' का जाप किया. यह जाप ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश को समर्पित है. श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट के अनुसार, यह उनके गणेश उत्सव समारोह में अथर्वशीर्ष के वार्षिक पाठ का 36वां साल है.
    आपको बता दें कि पारंपरिक पोशाक पहने 31,000 महिलाओं ने लोकप्रिय दगडूशेठ गणपति पंडाल के सामने यह भजन गाया. इस साल पंडाल की सजावट की थीम अयोध्या के निर्माणाधीन राम मंदिर की प्रतिकृति है.
        राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को 10 दिवसीय उत्सव के पहले दिन इस पंडाल में विशेष पूजा अर्चना की. राज्य में त्योहार का सार्वजनिक उत्सव 1890 के दशक से शुरू हुआ जब राष्ट्रवादी नेता बाल गंगाधर तिलक और अन्य लोगों ने जनता को संगठित करने के लिए यह फैसला किया.
         पिछले कुछ दिनों में मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों में गणेश मंडल बड़ी मूर्तियों को ढोल-नगाड़े की थाप के साथ अपने पंडालों में ले गए. घरेलू गणेश मूर्तियां ज्यादातर सोमवार की रात या मंगलवार की सुबह 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों के साथ लाई गईं.

          व्रत त्योहार /शौर्यपथ /स्कंद षष्ठी  हर महीने शुल्क पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है. इसे कांदा षष्ठी भी कहा जाता है. यह भगवान स्कंद की पूजा करने के लिए मनाया जाता है, जो भगवान कार्तिकेय के अवतार माने जाते हैं और भगवान शिव माता पार्वती के पुत्र हैं. इस षष्ठी में लोगों के द्वारा व्रत रखा जाता है, और कार्तिकेय भगवान की विधिवत रूप से पूजा अर्चना की जाती है. यह प्रमुख दक्षिणी त्योहार है जो भगवान स्कंद और सब्रमण्यम से जुङा है. आम तौर पर लोग जानते हैं कि गणेश चतुर्थी भाद्रपद में होती है, लेकिन संकष्टी चतुर्थी  और विनायक चतुर्थी भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दोनों भगवान गणेश से संबंधित हैं. अगर आप भी भगवान कार्तिकेय की कृपा-दृष्टि के चाहते हैं, तो  इस तरीके से भगवान स्कंद की पूजा करें.
    क्या है शुभ मुहूर्त
    पंचांग के अनुसार स्कंद षष्ठी की शुरुआत 20 सितंबर, बुधवार को दोपहर 2 बजकर 16 मिनट पर होगी और 21 सितंबर, गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर इसका समापन होगा.
    क्या है पूजा की सही विधि
         भारत में चाहे कोई भी त्योहार हो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. स्कंद षष्ठी में भी आपको ऐसी कुछ बातें याद रखनी चाहिए ताकि भगवान की कृपया हमेशा आप पर बनी रहे. सुबह उठकर नहाना सबसे जरूरी माना जाता है. ठीक इसी तरह इस दिन भी आपको सबसे पहले सुबह उठकर नहा लेना चाहिए. स्वच्छ और साफ कपड़े धारण करें. उसके बाद शुभ मुहूर्त पर एक चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला रंग का कपड़ा बिछाए और भगवान कार्तिकेय को चौकी पर विराजमान करें. ध्यान रहे उनकी जगह को बदलना नहीं है और जिस दिन आपने उनकी स्थापना की उस दिन से लेकर अगले दिन तक उनकी पूजा अर्चना करें.  उन्हें नहलाएं, नए वस्त्र पहनाएं. धूप- दीप, हल्दी, चंदन, फूल और फल चढ़ाएं. कार्तिकेय चालीसा का पाठ और मंत्र जाप करें.  फिर आरती करके परिवार के लिए सुख, समृद्धि और शांति की कामना करें. शाम में आरती करके फलाहार करें. 

        टिप्स /शौर्यपथ / घर से आराम से खाना ऑर्डर करना किसे पसंद नहीं होगा? चाहे बटर चिकन हो, नान हो या बिरयानी, जब कोई नहीं देख रहा हो तो अकेले ही अपने फूड को इंजॉय करने के एक्सपीरिएंस से बढ़कर कुछ नहीं है. लेकिन अक्सर इसे अकेले खतम करना थोड़ा मुश्किल होता है. हम सभी कम से कम एक बार ऐसी स्थिति में रहे हैं जब हमें बचे हुए खाने को दोबारा गर्म करना पड़ा. और यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि फूड का टेस्ट हमेशा वैसा नहीं होता जैसा कि उसे ऑर्डर किया गया था, स्पेशली नान का. चिंता न करें, हमारे पास एक वीडियो है जिसमें इसे दोबारा गर्म करने का सही तरीका दिखाया गया है ताकि इसका टेस्ट बिल्कुल फ्रेश हो.
           एक फूड ब्लॉगर को नान री-हीटिंग करते देखा जा सकता है. आपको बस नान को गर्म तवे पर रखना है और इसमें तीन से चार बड़े चम्मच पानी डालना है. अब इसे गर्म होने दें. अपने बर्तन का ढक्कन न ढकें. क्या आप सबसे अच्छा पार्ट जानना चाहते हैं? इस तकनीक से आपको नान को पलटने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और यह दोनों तरफ से गर्म हो जाएगा. ब्लॉगर ने कैप्शन में कहा, “नान को दोबारा गर्म करने के लिए हैक करें! हमें सूखे और सख्त नान को नरम, खाने योग्य नान में बदलने का सबसे अच्छा तरीका मिला! ये बहुत हुआ होगा आपके साथ, क्योंकि आपका नान बहुत ज्यादा सूख जाता है और उसे खाना मुश्किल हो जाता है. इस हैक को ट्राई करें जिसमें आप पैन में पानी की कुछ बूंदें डालें और नान को बुलबुले बनने तक गर्म करें. पैन को ढक्कन से न ढकें. एक बार दोबारा गर्म करने पर यह सॉफ्ट हो जाएगा और लंबे समय तक सॉफ्ट रहेगा!”

      खाना खजाना /शौर्यपथ /दिल्ली अपने हलचल भरे शहर के साथ अपने पॉपुलर खाने के लिए भी काफी फेमस है. अगर आप दिल्ली आए होंगे तो जरूर आपने यहां पर मिलने वाले छोले भटूरे का स्वाद चखा होगा. लेकिन दिल्ली से बाहर रहने वाले हर बार छोले भटूरे खाने के लिए दिल्ली तो नहीं आ सकते हैं. आपकी इस परेशानी को दूर करने के लिए हम यहां हैं. अगर आप छोले भटूरे खाने के शौकीन हैं और बिल्कुल दिल्ली स्टाइल के बनाना चाहते हैं, तो हमने आपको कवर किया. आज हम आपको छोले भटूरे की आसान रेसिपी बता रहे हैं, जिसे आप चल रहे गणपति फेस्टिवल में घर आए गेस्ट को भी बना कर खिला सकते हैं. तो चलिए बिना किसी देरी के रेसिपी पर चलते हैं.
    घर पर कैसे बनाएं मसालेदार छोले भटूरे-
    सामग्री-
        2 कप चने
        सूखा आवंला/ अमचूर पाउडर
        2 तेजपता
        1 दालचीनी स्टिक
        3 इलाइची
        1/2 टी स्पून जीरा
        1 बड़ी इलाइची
        7 काली मिर्च के दाने
        2 लौंग
        3 प्याज, टुकड़ों में कटा हुआ
        1/2 टी स्पून लहसुन
        1/2 टी स्पून अदरक
        1 टी स्पून हल्दी पाउडर
        1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
        1 टी स्पून धनिया पाउडर
        1 टी स्पून जीरा पाउडर
        नमक स्वादानुसार
        पानी
        2 टमाटर, टुकड़ों में कटा हुआ
        हरा धनिया
        3 कप मैदा
        1/2 कप गेंहू का आटा
    विधि-
       छोले बनाने के लिए रात में ही छोलों को पानी में भिगो कर रख दें. दूसरे दिन एक बर्तन लें और छोले के साथ सूखा आवंला डालकर उबाल लें. एक पैन लें और उसमें तेल डालें. इसके बाद तेल गर्म होने के बाद उसमें तेजपता, दालचीनी, जीरा, काली मिर्च और लौंग डालें. अब इसमें प्याज डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक भूनें. इसमें लहसुन, अदरक, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा पाउडर और नमक डालकर अच्छे से मिलाएं. मिश्रण में पानी मिलाएं और अब इसमें उबले हुए छोले और कटा हुआ टमाटर डालें. मिश्रण में पानी मिलाएं और अब इसमें उबले हुए छोले और कटा हुआ टमाटर डालें. हरा धनिया डालकर प्रेशर कुकर में पकाएं. एक बड़े बाउल में मैदा लें, थोड़ा सा गेंहू का आटा को मिक्स करके आटा गूंथ लें. अब इस आटे को गीले कपड़े से ढककर 2-3 घंटे के लिए छोड़ दें ताकि उसमें खमीर आ जाए. थोड़ा सा आटा लेकर इसकी रोटी बना लें. एक पैन में तेल गर्म करके इन्हें फ्राई कर लें. एक प्लेट में निकाल कर गर्मागर्म सर्व करें.

         सेहत टिप्स /शौर्यपथ /विटामिन बी12 की कमी बहुत आम है और शरीर में कई समस्याओं को जन्म दे सकता है. कई लोगों में विटामिन बी12 की कमी के भयानक परिणाम हो सकता है. विटामिन बी12 हेल्दी नर्व्स, ब्लड वेसल्स और डीएनए के लिए जरूरी है. बेहतर हेल्थ के लिए और शरीर में विटामिन बी12 की कमी को दूर करने के लिए इस विटामिन से भरपूर फूड्स को डाइट में शामिल करना जरूरी है. अगर आपको लगता है कि विटामिन बी12 के सोर्स को पाना कठिन है और आप शाकाहारी हैं तो यहां हम आपके लिए आसानी से उपलब्ध फूड्स सोर्सेज को लेकर आए हैं.
    शाकाहारियों के लिए विटामिन 12 स्रोत
         विटामिन बी12 हेल्दी नर्व्स, ब्लड वेसल्स और डीएनए के लिए जरूरी है. बेहतर स्वास्थ्य के लिए इन फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें.
    1. डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करें
      शाकाहारी भोजन में पर्याप्त विटामिन बी12 लेने के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स खाना सबसे सरल तरीकों में से एक है.
    3. फॉर्टिफाइड फूड्स
        वेजिटेरियन्स और वेगन्स के लिए फोर्टिफाइड फूड्स बी12 का अच्छा स्रोत हैं. ब्रेकफास्ट सीरियल्स और न्यूट्रिशनल यीस्ट हाई बायोअवेलिबिलिटी वाले फॉर्टिफाइड विकल्प हैं.
    4. पालक
       पालक जैसी हरी सब्जियां शरीर में विटामिन बी12 एड करने के लिए सबसे अच्छे शाकाहारी विकल्पों में से एक हैं. आप पालक से हर तरह की रेसिपी बना सकते हैं, सब्जी, सूप और स्मूदी.
    5. चुकंदर
         चुकंदर में आयरन, फाइबर, पोटैशियम के साथ-साथ विटामिन बी12 भी भरपूर मात्रा में होता है. नियमित रूप से चुकंदर खाने से बालों की ग्रोथ में सुधार होता है, स्किन चमकदार बनती है, ब्लड सर्कुलेशन और सहनशक्ति बढ़ती है.

        टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /हम में से बहुत से लोगों के लिए दिखावट मायने रखती है. चाहे हमारे सफेद दांत हों या ग्लोइंग स्किन सभी चाहते हैं वे अट्रैक्टिव दिखें. आजकल हमारी अनहेल्दी लाइफस्टाइल के चलते दांतों का पीलापन दिखने में बहुत भद्दा लगता है. ऐसे में बहुत से लोग दांतों को चमकाने के लिए महंगा इलाज या दांतों की सफाई करवाते हैं और अच्छा महसूस करने के लिए ढेर सारा पैसा खर्च करते हैं, लेकिन प्राकृतिक तरीके से दांतों की चमक को बरकरार रखने में मदद कर सकते है. खराब पीले दांतों से दांतों में कैविटी के साथ-साथ सांसों से दुर्गंध की समस्या भी होती है. अगर आप सफेद दांत पाने के उपाय तलाश रहे हैं तो यहां हम आपके लिए एक ऐसा कारगर घरेलू उपाय लेकर आए हैं जो दांतों को हमेशा क्लीन और चमकदार बनाए रख सकता है.
    पीले दांतों को सफेद बनाने के लिए घरेलू नुस्खा
    सबसे अच्छा तरीका प्राकृतिक है जिसे आप 'नीम' के साथ आसानी से कर सकते हैं. अध्ययनों से पता चला है कि नीम आपके दांतों के लिए चमत्कार कर सकता है, क्योंकि इसमें सूजनरोधी, एंटीफंगल और जीवाणुरोधी गुण होते हैं. यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे नीम दांतों को हेल्दी को बनाए रखने में आपकी मदद कर सकता है.
    1. नीम के पत्ते
        यह आपके लिए आश्चर्य की बात होगी, लेकिन ये कड़वी स्वाद वाली पत्तियां आपको मसूड़ों में बनने वाले प्लाक और टार्टर को मारने में मदद कर सकती हैं, जो सांसों की दुर्गंध का मूल कारण हैं.
    2. नीम की छाल
         हेल्दी दांतों के लिए आप नीम की छाल को चबा सकते हैं. ये न केवल दंत रोगों से लड़ता है, बल्कि कैविटी को भी रोक सकता है, जो आज भारतीयों द्वारा सामना की जाने वाली आम दंत समस्याओं में से एक है.
    3. नीम का काढ़ा
         यह दांतों को हेल्दी बनाए रखने के आसान तरीकों में से एक है. आपको बस इतना करना है कि नीम की पत्तियों का एक गुच्छा पानी में तब तक उबालना है जब तक कि यह एक चौथाई न रह जाए. अच्छी सांस और सफेद दांतों के लिए इस मिश्रण से गरारे करें क्योंकि यह आपके मुंह के अंदर बैक्टीरिया को मारता है.
    4. नीम टूथपेस्ट
         ये आपके परेशान दंत स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा काम कर सकता है. बाजार में कई प्रकार के प्राकृतिक टूथपेस्ट उपलब्ध हैं जिनमें नीम का अर्क होता है. सफेद दांतों के लिए आप इस टूथपेस्ट से अपने दांतों को साफ कर सकते हैं.

          सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हाई कोलेस्ट्रॉल दिल के लिए एक बुरा संकेत हैं. कुछ खाने पीने की चीजों में हाई कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है. अक्सर उनका सेवन हमारे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता है. खून में बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल खतरनाक है और हार्ट अटैक और स्ट्रोक बीमारियों का कारण बन सकता है. जब आपके खून में कोलेस्ट्रॉल होता है, तो प्लाक यानि फैटी मोमी कोलेस्ट्रॉल ज्यादा मात्रा में जमा होने लगता है. ये प्लाक आपकी आर्टरीज की दीवारों से चिपक जाता है, जिससे वे सिकुड़ जाती हैं. ये आर्टरीज में ब्लड फ्लो को रिस्ट्रिक्ट करता है, जिससे हार्ट अटैक हो सकता है. हालांकि हम कुछ उपाय करके हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल कर सकते हैं. कुछ आयुर्वेदिक उपाय हैं जो कारगर माने जाते हैं. यहां हम आपको आज उन्हीं के बारे में बता रहे हैं. तो चलिए जानते हैं हाई कोलेस्ट्रॉल को घटाने वाले रामबाण नुस्खों के बारे में.
    हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के रामबाण नुस्खे
    1. गुग्गुल कम करेगा कोलेस्ट्रॉल
        ये शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी पित्त एसिड को बढ़ाकर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मददगार मानी जाती है, जो शरीर से कोलेस्ट्रॉल को हटाने में सहायता करती है. गुग्गुल एक पूरक है जिसका सेवन किया जा सकता है या इसे अपने खाने में शामिल किया जा सकता है.
    2. लहसुन खाएं
      लहसुन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और सूजन रोधी जड़ी बूटी है जिसे कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करने के लिए जाना जाता है. इसमें एलिसिन और डायलिल डाइसल्फ़ाइड नामक कॉम्पोनेंट होते हैं, जो लिवर को कोलेस्ट्रॉल पैदा करने से रोकते हैं. आप कच्चे लहसुन का सेवन कर सकते हैं, इसे भोजन में शामिल कर सकते हैं.
    3. दालचीनी का सेवन करें
         दालचीनी एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने की क्षमता रखती है. दालचीनी एक मसाला है जो एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करके खराब कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है.
    4. आंवला करेगा मदद
        हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए आंवला किसी रामबाण उपाय से कम नहीं है. सुपरफूड आंवला एक और फल है जो आपके शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने के लिए बहुत अच्छा हो सकता है. ये फल विटामिन सी से भी भरपूर है.

         सेहत टिप्स /शौर्यपथ /कब्ज एक आम समस्या है. कब्ज से पीड़ित लोगों को नियमित और आरामदायक मल त्याग करने में कठिनाई होती है. इस समस्या के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं, जैसे पर्याप्त फाइबर न खाना, पर्याप्त पानी न पीना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी या कुछ दवाएं. इस समस्या के समाधान के लिए कई लोग दवाओं का सहारा लेते हैं या पानी का सेवन बढ़ा देते हैं. पोषण विशेषज्ञ ऋजुता दिवेकर ने अपनी एक इंस्टाग्राम रील में तीन चीजों को शेयर किया है जो कब्ज से प्रभावी ढंग से निपट सकती हैं. उनकी सलाह कब्ज से जूझ रहे लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है.
    कब्ज से लड़ने के कारगर उपाय
    1. लंच के बाद गुड़ और घी
         लंच के बाद पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए बराबर मात्रा में पिसा हुआ गुड़ और घी मिलाएं. गुड़ आयरन से भरपूर होता है, जबकि घी हेल्दी फैट प्रदान करता है. ये शक्तिशाली जोड़ी पाचन को हेल्दी रखने में मदद करती है. पोषक तत्वों के एब्जॉर्प्शन को बढ़ाती है और शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर नहीं निकाल सकती है. ये आपके डायजेशन के लिए अद्भुत काम कर सकता है.
    2. शाम के स्नैक्स में खरबूजा
         डिहाइड्रेशन अक्सर कब्ज से राहत दिला सकता है. खरबूजा में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे ये कब्ज के लिए अचूक उपाय है. वे न केवल आपके शरीर को हाइड्रेट करते हैं बल्कि जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं और आपके इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बनाए रखने में मददगार हैं. शाम 3-4 बजे के आसपास ईवनिंग स्नैक्स में ताजा खरबूज का आनंद लें. अगर खरबूजे का मौसम नहीं है, तो पका हुआ केला आपके हाइड्रेशन लेवल को कंट्रोल रखने के लिए एक हेल्दी विकल्प है.
    3. रात के खाने में तिल के बीज
        तिल को शामिल करके अपने डिनर को बेहतर बनाएं. ये छोटे पावरहाउस फाइबर, विटामिन ई और आवश्यक फैटी एसिड से भरे हुए हैं, जो पाचन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाते हैं. इन्हें अपने भोजन में शामिल करने के लिए रोटी बनाते समय अपने आटे में बस एक चम्मच तिल मिलाएं. चाहे आप ज्वार की रोटी, रागी रोटी या पूरी गेहूं की रोटी चुनें, यह छोटी सी खुराक कब्ज से राहत देने और गट हेल्थ को बढ़ावा देने में काफी मदद कर सकती है.

      आस्था /शौर्यपथ / आप जब भी गणेश भगवान  के चेहरे के बारे में सोचते होंगे आपको एक बड़ा सा सिर, लंबा सूढ़, बड़ा सा कान और एक टूटा हुआ दांत दिखता होगा. यहां तक कि घर में लगे किसी फोटो में भी आप यही देखते होंगे. दादी- नानी से भी आपने उनके इसी रूप की कहानियां सुनी होंगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एकमात्र  ऐसा मंदिर भी है जहां गणेश भगवान का मानवीय चेहरा देखने को मिलता है. यानीी उनका चेहरा बिल्कुल एक साधारण मनुष्य के तरह दिखाई देता है. चलिए आपको बताते हैं कि भारत के किस कोने में स्थित है यह मंदिर.
    तमिलनाडु के इस जिले में स्थित है ये मंदिर
       हर मंदिर की अपनी एक खासियत और पौराणिक महत्व होता है. उन्हीं मंदिरों में शामिल है तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले में स्थित आदि विनायक मंदिर. यहां गणेश जी की प्रतिमा एक नए रूप में विराजमान है. यहां गणेश भगवान की मूर्ति सूढ़ और दांत की नहीं बल्कि मनुष्य की है. और इसलिए दुनिया के कोने-कोने से लोग भगवान गणेश के इस नए रूप का दर्शन करने इस मंदिर में आते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में हुआ था और यह तमिलनाडु राज्य के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है.
    मूर्ति की क्या है विशेषता
       तमिलनाडु के इस अनोखे आदि विनायक मंदिर में पाए जाने वालें गणेश भगवान की प्रतिमा भी अनोखी है. इस मूर्ति को ग्रेनाइट का इस्तेमाल करके बनाया गया है. जहां भगवान गणेश के एक हाथ में कुल्हाड़ी है वहीं दूसरे हाथ में उन्होंने अपना पसंदीदा भोजन मोदक लिया हुआ है.
    पितरों की शांति के लिए भी होती है पूजा
        कहा जाता है कि एक बार भगवान राम ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए आदि विनयगर मंदिर में पूजा करवाई थी. तब से इस मंदिर में लोग अपने पितरों की शांति की पूजा- पाठ करवाने आते हैं. पूजा नदी के किनारे की जाती है. वैसे तो ये मंदिर बहुत साधारण दिखाई देता है लेकिन लोगों के बीच में इसकी बहुत लोकप्रियता है.

        आस्था /शौर्यपथ /10 दिनों तक चलने वाला गणेश उत्सव बप्पा की मूर्ति की स्थापना के साथ शुरू होता है जो अनंत चतुर्दशी को विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है. इस पूरे दस दिनों में पंडालों और घरों में सुबह-शाम गणेश आरती और पूजा की जाती है. हिन्दू धर्म के सबसे बड़े पर्वों में से एक इस उत्सव में इन 5 मंदिरों की गणेश प्रतिमा  का एकबार जरूर दर्शन करना चाहिए.
        सिद्धिविनायक मंदिरमुंबई के प्रभादेवी में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक है. यहां पर मशहूर हस्तियां अक्सर भगवान गणेश से आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं.
    दगडूसेठ हलवाई गणपति मंदिर
        यह प्रतिष्ठित मंदिर पुणे में है. इस मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति 7.5 फीट ऊंची और 4 फीट चौड़ी है. यहां पर भी कई मशहूर हस्तियां और राजनेता आशीर्वाद प्राप्त करने आते है.  गणेश चतुर्थी के दौरान, गणेश की मूर्ति को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है, जिससे उनकी भव्यता और बढ़ जाती है.
    लालबागचा राजा
         लालबागचा राजा मुंबई में गणेश की सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित मूर्तियों में से एक है. इसे गणेश चतुर्थी के अवसर पर मूल्यवान आभूषणों से सजाया जाता है.
    मोती डूंगरी मंदिर
      यह भारत में सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय गणेश मंदिरों में से एक है. इसमें गुजरात से लाई गई एक गणपति की मूर्ति है, जो आधी सदी से भी अधिक पुरानी मानी जाती है. मंदिर की आधिकारिक साइट के अनुसार, मंदिर और मूर्ति की स्थापना एक सेठ जय राम पालीवाल ने की थी.
    खजराना गणेश मंदिर
         यह मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर में है. यह ईंटों, गुड़, चूना पत्थर, मिट्टी, मिट्टी, पानी और अन्य कच्चे माल से बना एक प्रसिद्ध मंदिर है. मंदिर का द्वार और बाहरी दीवार चांदी से बनी है और इस पर विभिन्न मनोदशाओं और त्योहारों को दर्शाया गया है. आधिकारिक साइट के अनुसार, देवता की आंखें हीरे से बनी हैं और मंदिर की ऊपरी दीवार चांदी से बनी है.

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