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May 31, 2026
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व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है. ऐसी मान्यता है कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश की इस दिन पूजा अर्चना करने से सारे परेशानियां दूर होती हैं. ऐसे में जून के महीने में यह महत्वपूर्ण व्रत किस दिन रखा जाएगा 9 या 10 जून को, इसको लेकर लोगों में बहुत कंफ्यूजन हैं. तो आपको बता दें दृक पंचांग के अनुसार, 9 जून 2024 को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से विनायक चतुर्थी शुरू होगी जो अगले दिन यानी 10 जून 2024 को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि पड़ने के कारण 10 जून 2024 को चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. वहीं पूजा विधि और शुभ मुहूर्त आपको आगे आर्टिकल में बताया जा रहा है.
विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त -
पूजा का मुहूर्त - इस दिन यानी 10 जून 2024 को सुबह 10 बजकर 26 मिनट से लेकर 1 बजकर 6 मिनट तक है. वहीं, चंद्रोदय का समय 08 बजकर 40 मिनट है. ऐसे में रात 10 बजकर 54 मिनट तक चंद्रदेव को अर्घ्य देने का समय है.
गणेश पूजा विधि -
हर प्रकार की पूजा की तरह इस पूजन के लिए भी सुबह स्नान ध्यान कर मन और तन दोनों को शुद्ध करें. साफ वस्त्र पहन भगवान गणेश की प्रार्थना करें.भगवान गजानन को तिलक लगाने के बाद, वस्त्र, धूप, दीप, दूर्वा कुमकुम, लाल रंग के फूल, अक्षत, सुपारी और पान अर्पित कर मोदक का भोग.
गणेश मंत्र -
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लंबोदराय सकलाय जगद्धितायं।
नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।
अमेयाय च हेरंब परशुधारकाय ते।
मूषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः।।
एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः।
प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।
एकदंताय विद्‍महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात।।
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश ।।

सेहत टिप्स /शौर्यपथ /सत्तू शरबत एक बहुत ही पौष्टिक और ठंडक देने वाला ड्रिंक है जो गर्मियों में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. सत्तू भुने चने के आटे से तैयार किया जाता है. इसे आप अपनी पसंद के अनुसार मीठा और नमकीन बना सकते हैं. सत्तू से कई तरह की रेसिपीज बनाई जा सकती हैं. सत्तू के शरबत का सेवन करने से आप दिनभर एनर्जेटिक महसूस कर सकते हैं. सत्तू में फाइबर, आयरन, मैंगनीज, प्रोटीन, मैग्नीशियम और लो सोडियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. जो शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं कैसे बनाएं सत्तू का स्वादिष्ट शरबत.
कैसे बनाएं सत्तू का शरबत-
सामग्री-
सत्तू (चने का आटा)
पानी
नींबू का रस
काला नमक
भुना जीरा पाउडर
चीनी या गुड़
पुदीने की पत्तियां
बर्फ के टुकड़े
विधि-
एक बड़े बर्तन में सत्तू डालें. इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए अच्छी तरह मिलाएं ताकि कोई गुठली न रह जाए. जब सत्तू अच्छे से मिल जाए, तो बाकी का पानी डालकर फिर से मिलाएं. अब इसमें नींबू का रस, काला नमक, भुना जीरा पाउडर और चीनी या गुड़ डालें. इन्हें अच्छी तरह से मिलाएं. शरबत को अच्छे से मिलाने के बाद, इसमें बर्फ के टुकड़े डालें. गिलास में डालें और ऊपर से पुदीने की पत्तियों से सजाएं. सत्तू का शरबत बनकर तैयार है.
सत्तू के फायदे-
गर्मियों के मौसम में सत्तू के सेवन से शरीर को एनर्जेटिक रखा जा सकता है. सत्तू फाइबर से भरपूर होता है, जो भूख को कंट्रोल करने और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद करता है. इससे वजन घटाने में मदद मिलती है. इतना ही नहीं सत्तूू के सेवन से पाचन को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ /कुकिंग में ऑयल सबसे जरूरी सामग्री में से एक है. लेकिन आज के समय में हर कोई अपनी सेहत के प्रति सजग हो गए हैं. इसलिए या तो वो कम ऑयल वाला खाना पसंद करते हैं या हेल्दी ऑयल ऑप्शन को चुनना पसंद करते हैं. मार्केट में आपको कई तरह के ऑयल मिल जाएंगे जो हेल्दी होने का दावा करते हैं. क्योंकि ऑयल का सेवन हमारी सेहत पर सीधा असर डालता है. अगर आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि कौन से ऑयल हमारे लिए अच्छे हैं तो हमने आपको कवर किया है. आज हम आपको ऐसे 5 कुकिंग ऑयल के बारे में बता रहे हैं जिसे सेहत के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है. तो चलिए जानते हैं कौन से हैं वो ऑयल.
कुकिंग के लिए बेस्ट हैं ये ऑयल-
1. नारियल तेल-
नारियल तेल का उपयोग खाना बनाने के साथ स्वास्थ के लिए भी किया जाता है. नारियल तेल को पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा माना जाता है. नारियल तेल से बने खाने का स्वाद लाजवाब होता है.
2. मूंगफली का तेल-
मूंगफली में विटामिन और खनिज की मात्रा भरपूर होने से शरीर को ऊर्जा मिलती है. मूंगफली का तेल दिल और त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है.
3. एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल-
एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल ऑलिव ऑयल (जैतून तेल) के मुकाबले ज्यादा अच्छा होता है. इसे तेल ताजे काटे हुए ऑलिव से बनाया जाता है.
4. सूरजमुखी का तेल-
सूरजमुखी के तेल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इससे फैट बर्न होता है, दिल को स्वस्थ रखता है. सूरजमुखी के तेल से बने खाने का सेवन सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है.
5. तिल तेल के फायदे-
तिल के तेल से कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता मिलती है. तिल का तेल डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है.

खाना खजाना /शौर्यपथ /बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए हम क्या कुछ नहीं करते हैं. डाइटिंग से लेकर एक्सरसाइज तक. लेकिन डाइटिंग करना उन लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है जो खाने के शौकीन हैं. अगर आप भी खाने के शौकीन हैं और वजन को खा पीकर कम करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं. आज हम आपके लिए ऐसी रेसिपीज लेकर आए हैं जिसे आप डाइट में शामिल कर वजन को आसानी से कम कर सकते हैं. तो चलिए बिना किसी देरी के रेसिपीज पर चलते हैं.
स्वाद और सेहत से भरपूर हैं ये रेसिपीज-
1. मूंग दाल सलाद-
सामग्री-
मूंग दाल
कटा हुआ टमाटर
कटा हुआ खीरा
कटा हुआ प्याज
कटा हुआ हरा धनिया
नींबू का रस
हरी मिर्च
नमक- स्वादानुसार
विधि-
भीगी हुई मूंग दाल को अच्छी तरह से धो कर पानी निथार लें. एक बर्तन में मूंग दाल, टमाटर, खीरा, प्याज और हरा धनिया डालें. नमक, नींबू का रस और हरी मिर्च मिलाएं. अच्छी तरह से मिलाकर सर्व करें.
2. रागी डोसा-
सामग्री-
रागी का आटा
चावल का आटा
दही
नमक- स्वादानुसार
पानी
तेल
विधि-
डोसा बनाने के लिए एक बर्तन में रागी का आटा, चावल का आटा, दही और नमक मिलाएं. आवश्यकतानुसार पानी डालकर पतला बैटर तैयार करें. बैटर को 30 मिनट के लिए रख दें. तवा गरम करें और थोड़ा तेल डालें. बैटर को तवे पर फैलाकर डोसा बनाएं. गोल्डन और क्रिस्पी होने तक सेंकें और अपनी पसंद की चटनी के साथ सर्व करें.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हमारे खाने पीने के आदतों से सेहत का सीधा संबंध होता है. खासकर ताजा और हरी सब्जियां सेहत के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है. लौकी ऐसी ही एक सब्जी है. लौकी का जूस सेहत को बहुत फायदा पहुंचाती है. लौकी का जूस विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. लौकी के लो कैलोरी और हाई फाइबर कंटेंट के कारण इससे वेट कंट्रोल करने, डाइजेशन सुधारने में मदद मिलती है. आइए जानते हैं लौकी के जूस से सेहत को होने वाले फायदे
खाली पेट लौकी के जूस पीने के फायदे
इम्यूनिटी बेहतर
लौकी के लूस में विटमिन सी होने के कारण इसके सेवन से इम्यूनिटी बेहतर होती है. नियमित रूप से लौकी के जूस को डाइट में शामिल करने से बीमार पड़ने का खतरा कम हो जाता है.
डाइजेशन बेहतर
लौकी में फाइबर कब्ज, गैस और बवासीर जैसी परेशानियों से राहत प्रदान कर डाइजेशन को सुधारने में मदद करता है. इससे वेट कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है.
मेटाबॉलिज्म में सुधार
लौकी में मौजूद बायोएक्टिव सैपोनिन और टेरपेनोइड्स सेल्स तक ग्लूकोज के ट्रांपोटेशन को बढ़ावा देकर और लिवर और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में सुधार लाकर डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर लेवल को कम रखने में मदद करता है.
बॉडी डिटॉक्सिफाइड
लॉकी का जूस बॉडी से टॉक्सिक पदार्थों को बाहर करने में मदद करता है. इससे लिवर को डिटॉक्सिफाइड होने में मदद मिलती है औश्र बेहतर तरीके से काम करता है.
बॉडी हाइड्रेट
लौकी के जूस में पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है इससे र्गी के दिनों में बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है. गर्मी के दिनों में लौकी का जूस और फायदेमंद हो जाता है.
ऐसे बनाएं लौकी का जूस
ताजी लौकी को छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें. लौकी के टुकड़ों को पुदीने के पत्तों के साथब्लेंडर में डालकर अच्छे से क्रश कर लें और फिर उसे छान कर जूस अलग कर लें. जूस का टेसट बेहतर करने के लिए काला नमक और लेमन जूस मिलाएं

 

ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / बालों की देखरेख में बाजार से खरीदी गई चीजों का इस्तेमाल तो किया ही जाता है, साथ ही घर के भी कई नुस्खे आजमाए जा सकते हैं. यहां भी ऐसे ही पत्तों की बात की जा रही है जिनके इस्तेमाल से बालों की एक नहीं बल्कि कई दिक्कतें दूर हो सकती हैं. ये पत्ते हैं नीम के पत्ते. बालों पर नीम के पत्ते लगाने पर बालों की कायापलट हो सकती है. नीम के पत्ते एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन ई, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होते हैं. इन पत्तों को आमतौर पर चेहरे पर लगाया जाता है लेकिन बालों पर भी ये पत्ते अलग-अलग तरह से लगाए जा सकते हैं. यहां जानिए बालों पर नीम के पत्तों का पानी कैसे लगाते हैं.
बालों के लिए नीम का पानी |
पानी में नीम के पत्ते डालकर उबालने पर नीम का पानी तैयार हो जाता है. इस पानी से सिर धोने पर उलझे बाल मुलायम बनते हैं. शैंपू करने के बाद नीम के पानी को सिर पर डालें और 10 मिनट लगाए रखने के बाद साफ पानी से सिर धोकर साफ कर लें.
नीम के पानी को हेयर टोनरकी तरह भी बालों पर छिड़क सकते हैं. बालों की स्कैल्प पर इस टोनर को छिड़कने से स्कैल्प की अच्छी सफाई हो जाती है और स्कैल्प पर जमा डैंड्रफ हटने लगता है.
नीम के पानी को हेयर मास्क की तरह भी बालों पर लगाया जा सकता है. दही में नीम का पानी डालकर पेस्ट बनाएं और इस हेयर मास्क (Hair Mask) को बालों पर जड़ों से सिरों पर लगाए रखने के 15 मिनट बाद सिर धोकर साफ कर लें. नीम के पानी के अलावा नीम के पाउडर या इन पत्तों के पेस्ट को भी बालों पर लगा सकते हैं.
नीम का पानी शैंपू में मिलाकर इस शैंपू से बालों को धोया जा सकता है. नीम के पेस्ट में एलोवेरा जैल डालकर भी बालों पर लगा सकते हैं. इससे हेयर ग्रोथ में भी सहायता मिलती है और बालों को एलोवेरा के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मिलते हैं.
बालों पर नीम के तेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. नीम के तेल को बालों पर जस का तस लगाने के बजाय इसे किसी कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर बालों पर लगाकर मालिश की जा सकती है.

ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /त्वचा का सही तरह से ख्याल रखा जाए तो ना सिर्फ स्किन निखरी हुई दिखती है बल्कि जवां भी नजर आने लगती है. ऐसे एक नहीं बल्कि कई घरेलू नुस्खे हैं जिन्हें त्वचा का ख्याल रखने के लिए आजमाया जाता है. यहां भी एक ऐसे ही अनाज के पानी का जिक्र किया जा रहा है जिससे ना सिर्फ त्वचा निखरती है बल्कि त्वचा को एंटी-एजिंग गुण भी मिलते हैं. यह अनाज है चावल. बढ़ती उम्र ही नहीं बल्कि स्किन का सही तरह से ख्याल ना रखने, जीवनशैली की बुरी आदतें आजमाने और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी त्वचा को नुकसान पहुंचाता है. अगर आप भी चेहरे पर कसावट लाना चाहते हैं और एंटी-एजिंग गुण पाना चाहते हैं तो त्वचा पर चावल के पानी का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं. चावल का पानी ना सिर्फ एक घरेलू नुस्खा है बल्कि इसका कई स्किन केयर प्रोडक्ट्स में भी इस्तेमाल किया जाता है. यहां जानिए एंटी-एजिंग गुण पाने के लिए किन-किन तरीकों से चावल के पानी को चेहरे पर लगाया जा सकता है.
स्किन पर कसावट लाने के लिए चावल का पानी |
चावल का पानी एंटी-ऑक्सीडेंट्स, अमीनो एसिड्स, विटामिन बी, विटामिन सी और विटामिन ई का अच्छा स्त्रोत होता है. इसे चेहरे पर टोनर की तरह लगा सकते हैं या फिर इससे अलग-अलग फेस पैक्स बनाकर लगाए जा सकते हैं. इस पानी के इस्तेमाल से ओपन पोर्स कम होने में मदद मिलती है, स्किन ब्रेकाउट्स नहीं होते, चेहरे से फोड़े-फुंसी और एक्ने कम होते हैं, त्वचा ग्लास स्किन की तरह चमकने लगती है, चेहरे पर कसावट आती है और स्किन मुलायम बनती है सो अलग.

चावल का पानी चावल को भिगोकर, उबालकर या फिर फर्मेंट करके बनाया जा सकता है. चावल को कम से कम आधा घंटा भिगोकर रखते हैं और फिर पानी को छान लेते हैं. इस पानी को चेहरे पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसी तरह चावल को उबालकर इसके ऊपर जो पानी बच जाता है और त्वचा पर लगाने के लिए रखा जाता है. चावल को 1 से 2 दिनों तक पानी में भिगोकर रखा जाता है और फिर इस पानी को अलग करते हैं.
झुर्रियां कम करने और स्किन पर कसावट लाने के लिए चावल के पानी को रूई की मदद से चेहरे पर लगा सकते हैं. इसे चेहरे पर 20 से 25 मिनट लगाकर रखने के बाद चेहरा धोकर साफ करें.
किसी स्प्रे बोतल में चावल के पानी को भरकर सुबह-शाम चेहरे पर इस पानी को छिड़का जा सकता है. चेहर पर जमी डेड स्किन सेल्स तो हटती ही हैं, साथ ही स्किन निखर जाती है सो अलग.
जिन लोगों को किसी तरह की स्किन कंडीशन हो या चेहरे पर कटने-फटने के निशान हों उन्हें चावल का पानी लगाने से परहेज करने की जरूरत होती है. इसके अलावा, चावल के पानी को चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करके देखें. अगर स्किन पर किसी तरह की इरिटेशन होती है तो इसके इस्तेमाल से परहेज करें.

आस्था /शौर्यपथ /मां पार्वती के नौ रूपों में से एक हैं देवी दुर्गा जिनकी अगर सच्चे मन से आराधना की जाए, तो वे अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं और उन्हें सभी दुख, कष्ट और पापों से मुक्ति दिलाती हैं. ऐसे में अगर आप रोजाना दुर्गा मां की इस चालीसा का पाठ करते हैं तो इससे जीवन में आए बड़े से बड़े संकट को आप दूर कर सकते हैं और मां दुर्गा की असीम कृपा पाकर उनके परम भक्त बन सकते हैं. जानिए दुर्गा चालीसा का पाठ करने के फायदे क्या हैं और आपको कैसे दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए.
दुर्गा चालीसा का पाठ करने के फायदे
दुर्गा चालीसा का पाठ प्रतिदिन करने से आपको मानसिक रूप से मजबूती मिलती है. यह पाठ आपके मन को शांत करने का काम करता है और जो भी बुरी शक्तियां आपके आसपास हैं उनसे बचाने में आपकी मदद करता है. आपके मन को नियंत्रित रखता है, साथ ही अगर आपकी कुंडली में राहु दोष है, तो उसको भी कमजोर करता है. इतना ही नहीं दुर्गा चालीसा का पाठ सच्चे मन से करने से सभी दुख और कष्टों का नाश होता है और आपको सम्मान और संपत्ति प्राप्त होती हैं.
अब बात आती है कि आपको दुर्गा चालीसा का पाठ कब करना चाहिए. आप सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. फिर मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने फूल, रोली, हल्दी, चावल, दीपक और प्रसाद चढ़ाएं और इसके बाद दुर्गा चालीसा का पाठ करें. फिर मां दुर्गा की आरती करें और सच्चे मन से उनसे प्रार्थना करें.
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥
रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥
तुम संसार शक्ति लै कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला ।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥
रूप सरस्वती को तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा ।
परगट भई फाड़कर खम्बा ॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।
श्री नारायण अंग समाहीं ॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥
मातंगी अरु धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥
केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै ।
जाको देख काल डर भाजै ॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँलोक में डंका बाजत ॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब ।
भई सहाय मातु तुम तब तब ॥
अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब रहें अशोका ॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नरनारी ॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई ।
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥
शंकर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥
शक्ति रूप का मरम न पायो ।
शक्ति गई तब मन पछितायो ॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥
आशा तृष्णा निपट सतावें ।
मोह मदादिक सब बिनशावें ॥
शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥
करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥
जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥
देवीदास शरण निज जानी ।
कहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥
॥दोहा॥
शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे नि:शंक ।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक ॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा ॥

वास्तु शास्त्र /शौर्यपथ /हर घर में पूर्वजों को याद किया जाता है और उनके ना रहने के बाद उनकी तस्वीर जरूर रखी जाती है. ऐसा कहा जाता है कि पूर्वजों की तस्वीर घर में होने से सुख-समृद्धि बनी रहती है, साथ ही घर के सदस्यों को पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है. यही वजह है कि ज्यादातर लोग घर के लिविंग रूम या फिर बेड रूम में घर के पूर्वजों की तस्वीर लगाते हैं. कई लोग घर के पूर्वजों की तस्वीर पूजा घर में भी रखते हैं. पर क्या आप जानते हैं कि वास्तु के अनुसार पूर्वजों की तस्वीर रखने की भी अपनी एक निश्चित दिशा होती है. कहा जाता है कि अगर सही दिशा में पूर्वजों की तस्वीर ना रखी जाए तो घर में सुख-शांति के बजाय कलेश का सामना भी करना पड़ सकता है.
दीवार पर नहीं लटकानी चाहिए पूर्वजों की तस्वीर
इसे लेकर ज्योतिषाचार्य का मानना है कि पूर्वजों की तस्वीर घर में लगाते वक्त कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए. वास्तु के अनुसार तस्वीरों को हमेशा किसी फ्रेम में लगाकर ही रखना चाहिए. इसके साथ ही इन तस्वीरों को किसी शेल्फ या अलमारी में रखना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि पूर्वजों की तस्वीरों को दीवार पर लटकाकर नहीं रखनी चाहिए. दीवार पर तस्वीर लगाने से पूर्वजों का अपमान होता है. कहते हैं कि ऐसा करने से उनकी कृपादृष्टि प्राप्त नहीं होती और ये पितृ दोष का कारण भी बनता है. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक घर के दक्षिण दिशा में ही पूर्वजों की तस्वीर रखी जानी चाहिए.
वास्तु विदों की माने तो पूर्वजों की तस्वीर घर में लगाते वक्त दिशा का भी खास ख्याल रखना चाहिए. अक्सर आपने देखा होगा कि लोग अपने एक ही पूर्वज की तस्वीर घर के अलग-अलग स्थान पर लगा लेते हैं, जबकि कहा जाता है कि एक पूर्वज की तस्वीर एक से ज्यादा नहीं लगानी चाहिए. कहते हैं कि ऐसा करने से पितर नाराज हो जाते हैं और घर में यह कलह और कलेश का कारण बनता है. वास्तु के हिसाब से पितरों की तस्वीर घर के ब्रह्म स्थान या घर के मध्य स्थान में कभी नहीं लगना चाहिए. इसके साथ ही कहा यह भी गया है कि जीवित लोगों के चित्रों के साथ कभी पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए.

आस्था /शौर्यपथ /हिंदू धर्म के अनुसार घर में तुलसी का पौधा लगाना पवित्र और शुभ माना गया है. मान्यता है कि तुलसी धन की देवी लक्ष्मी का स्वरूप है और तुलसी के पौधे में कई देवी देवताओं का वास होता है. घर में तुलसी के पौधे की सही देखभाल नहीं होने पर उसके मुरझा जाने का डर होता है जिसे अच्छा नहीं माना जाता है. आइए जानते हैं भगवान गणेशकी भूख और तुलसी के पौधे से जुड़ी पौराणिक कथा और तुलसी के पौधे की सही देखभाल का तरीका
भगवान गणेश की भूख और तुलसी के पत्ते
पौराणिक कथा के अनुसार एकबार धन के देवता कुबेर को अपने धन संपत्ति का घमंड हो गया. उन्होंने भगवान शिव को परिवार के साथ भोजन पर आमंत्रित किया. भगवान शिव के समझाने पर उन्होंने कहा मेरे पास अकूत धन है. इसके बाद भगवान शिव ने पुत्र गणेश को भोजन करने के लिए कुबेर के घर भेज दिया. भोजन करने बैठे गणेश भगवान की भूख के आगे कुबेर का सारा खनाजा कम पड़ गया. परेशान होकर कुबेर ने भगवान शिव और माता पार्वती से रक्षा की गुहार लगाई. भगवान शिव और माता पार्वती ने उन्हें गणेश जी को तुलसी का पत्ता खिलाने की सलाह दी और इस तरह भगवान गणेश की भूख शांत हो गई.
तुलसी के पौधे की देखभाल
तुलसी के पौधे में ज्यादा पानी देने से जड़ों में फंगस लगने का डर होता है. इसलिए पौधे के लिए सही तरह की मिट्‌टी जरूरी होती है. तुलसी लगाने के लिए 50 प्रतिशत गार्डन की मिट्‌टी में 20 प्रतिशत बालू और 10 प्रतिशत कोई भी वर्मी कंपोस्ट मिलाएं. इससे जड़ों में पानी ज्यादा देर नहीं टिकेगा और उसके खरब होने का डर नहीं रहेगा. तुलसी के पौधे को हमेशा थोड़े बड़े आकार के गमले में लगाना चाहिए. गमले में छेद होना जरूरी है ताकि आवश्यकता के ज्यादा पानी गमले में न रहे. तुलसी का पौधा उस पर आने वाले बीजों से आसानी से उगाया जा सकता है. बीजों को मिट्‌टी में छिड़क दें और कुछ ही समय के बाद उन बीजों से नए पौधे निकल आते हैं. कुछ हेल्दी पौधों को चुन कर गमले में लगा सकते हैं.

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