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रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की महिलाओं में महतारी वंदन योजना को लेकर अपार उत्साह देखा जा रहा है। खास कर गरीब, मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग की महिलाओं को इस योजना से मिलने वाली राशि से काफी राहत मिली है। महिलाओं का कहना है कि इस योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ गया है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का ही प्रतिफल है कि उन्हें समय पर महतारी वंदन योजना की राशि माह दर माह मिल रही है। महतारी वंदन योजना में इस माह 5वीं किश्त के रूप में एक-एक हजार रूपए की राशि मिली है। राशि के उपयोग से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह राशि महिलाओं के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुंच रही है। महिलाओं के खाते में राशि आने से परिवार में भी उनकी पूछ परख बढ़ गई है।
धमतरी के कलेक्टोरेट परिसर में कैंटिन का संचालन करने वाली सहेली संघ स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती हेमा साहू ने बताया कि महतारी वंदन योजना से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को काफी फायदा हो रहा है। समूह की महिलाओं द्वारा अब नियमित रूप से आर्थिक गतिविधियों के लिए अपना योगदान दे पा रही हैं।
श्रीमती हेमा ने यह भी कहा कि महतारी वंदन योजना से मिल रही राशि से महिलाएं अपने बच्चों के लिए आवश्यकतानुसार बेहतर प्रबंध कर पा रही हैं। महिलाएं निजी जरूरतों, घरेलू आवश्यकताओं व दैनिक उपयोग की चीजों की खरीदी एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम हुई है। साथ ही भविष्य के लिए बचत भी कर रही है। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी समस्याएं होना आम हैं. पसीना, धूल-मिट्टी की वजह से स्किन बहुत डल भी लगने लगती है. साथ ही सूरज की रोशनी की वजह से स्किन को बहुत नुकसान भी पहुंचते हैं. स्किन की समस्या को दूर करने के लिए लोग केमिकल वाली क्रीम या लोशन का इस्तेमाल करने लगते हैं. इससे उस समय तो फायदा मिलने लगता है लेकिन एक टाइम के बाद केमिकल आपकी स्किन को खराब भी करने लगते हैं. ऐसे में स्किन के लिए घरेलू उपाय बेस्ट हैं. घर पर ही आप एक जेल बनाकर लगा सकते हैं और इससे स्किन को कोई नुकसान नहीं होता है. ये जेल बनेगा अलसी के बीजों से. अलसी के बीज में कई पोषक तत्व होते हैं. लोग हेल्दी रहने के लिए इसका सेवन भी करते हैं. आज हम आपको बताते हैं कि कैसे बनाए अलसी के बीज से जेल और इसके क्या फायदे हैं.
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कैसे बनाएं अलसी के बीज से जैल
ग्लोइंग स्किन के लिए अलसी के बीज से जेल बनाना बहुत आसान हैं. इसे बनाने के लिए रातभर 2 बड़े चम्मच अलसी के बीज भिगोकर रख दीजिए. जब आप सुबह उठकर देखेंगे तो अपने आप अलसी के बीज से जेल बाहर आता नजर आएगा. उसके बाद एक कॉटन के कपड़े की मदद से जेल और अलसी के बीजों को अलग कर लें. इस जेल को एक कंटेनर में स्टोर करके फ्रिज में रख लें.
इस तरह करें इस्तेमाल
अलसी के बीज के जेल का इस्तेमाल करना बहुत आसान है. इसके लिए फेस वॉश का इस्तेमाल करना बंद कर दें. बस सुबह उठकर पानी से मुंह धोएं. उसके बाद चेहरे को सुखाकर ये जेल पूरे फेस पर लगाएं. 15 मिनट तक जेल को चेहरे पर लगे रहने दें. 15 मिनट बाद चेहरे को नॉर्मल पानी से धो लें. इसका फर्क आपको एक दिन में ही चेहरे पर दिखने लगेगा.
जब आप रोजाना अलसी के बीज के जेल का इस्तेमाल करते हैं तो इसके कई फायदे होते हैं. ये चेहरे की नसों को एक्टिव करने में मदद करता है साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है. इससे आपकी स्किन हेल्दी होती है. इसके अलावा ये जेल झुर्रियां कम करता है, स्किन को टाइट करता है, काले धब्बों को हटाने में मदद करता है. साथ ही इससे चेहरे की डलनेस भी कम होती है और स्किन ग्लो करने लगती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / जब भी बात अच्छी सेहत की होती है तो हेल्थ एक्सपर्ट्स ड्राई फ्रूट्स खाने की सलाह जरूर देते हैं. क्योंकि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व आपकी ओवरऑल हेल्थ का ख्याल रखते हैं. वैसे तो सभी सूखे मेवे आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन आज हम यहां पर पिस्ता कैसे आपकी सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है, इसके बारे में बात करेंगे. शुरूआत हम इसके पोषक तत्वों से करते हैं. पिस्ता में कैलोरी, कार्ब्स, प्रोटीन, वसा, पोटैशियम, फॉस्फोरस, विटामिन बी6, थायमिन, कॉपर, मैंगनीज पाया जाता है. आपको बता दें कि पिस्ता विटामिन बी 6 रिच ड्राई फ्रूट्स में से एक है.
28 ग्राम पिस्ता में
कैलोरी: 159
कार्ब्स: 8 ग्राम
फाइबर: 3 ग्राम
प्रोटीन: 6 ग्राम
वसा: 13 ग्राम
पोटैशियम: DV का 6%
फॉस्फोरस: DV का 11%
विटामिन B6: DV का 28%
थायमिन: DV का 21%
कॉपर: DV का 41%
मैंगनीज: DV का 15%
अब आते हैं इसके फायदों पर -
1- पिस्ता खाने से आपके चेहरे पर समय से पहले नजर आने वाली झुर्रियों का असर कम होता है. यह आपकी स्किन में कसाव बनाए रखती हैं. इससे डैमेज स्किन सेल्स की मरम्मत में भी मदद मिलती है.
2- जिन लोगों के शरीर में प्रोटीन की कमी हो गई है उन्हें तो इस सूखे मेवे का सेवन जरूर करना चाहिए. यह आपके प्रोटीन डिफिशिएंसी दूर करने में मदद कर सकता है.
3- पिस्ता में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं. ऐसे में यह वजन घटाने में मदद कर सकता है.
4- थोड़ी मात्रा में पिस्ता खाने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रखकर आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है. वहीं, आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. जो लोग हार्ट पेशेंट हैं उन्हें इसका सेवन करना चाहिए.
5- शोध से पता चलता है कि पिस्ता आपकी आंखों की रोशनी को भी मजबूत करती है. जिन लोगों की आई साइट वीक है अपनी डाइट में शामिल कर लेना चाहिए.
हमने पिस्ता के पोषक तत्वों और फायदों के बारे में बात कर ली अब आते हैं बाजार में मिलने वाले नकली पोषक तत्वों की पहचान कैसे करें-
जब भी आप पिस्ता खरीदने जाएं तो चखकर जरूर देखें. अगर आपको मूंगफली का स्वाद आता है पिस्ता से तो समझ जाइए ये नकली है.
वहीं, पिस्ता अगर चबाने में हार्ड लगता है तो समझिए वो बहुत पुराना हो गया है तो ऐसे मेवे को ना खरीदिए.
आपको बता दें कि पिस्ता बनाने के लिए मूंगफली का इस्तेमाल किया जाता है. इसको पिस्ते की तरह दिखाने के लिए कैमिकल कोटिंग की जाती है.
खाना खजाना /शौर्यपथ /रोज-रोज एक ही तरह की चीजें खाकर बोर होना लाजमी है. अगर आप भी कुछ स्पाइसी खाना चाहते हैं लेकिन किचन में ज्यादा समय भी नहीं बिताना चाहते तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं. आज हम आपके लिए एक ऐसी चाट रेसिपी लेकर आए हैं जो आपके टेस्ट को बदल देगी. असल में चाट का नाम लेते ही हमारे मुंह में पानी आ जाता है. भारत में चाट की आपको कई वैराइटी मिल जाएंगी. चाट एक स्ट्रीट फूड है जिसे आप हर कली के कॉर्नर में आसानी से पा सकते हैं. बात जब तंदूर की आती है तो तंदूरी स्वाद! चाहे वह तंदूरी चिकन हो, तंदूरी पनीर, या यहां तक कि तंदूरी मशरूम- स्मोकी, बर्न हुए और चारकोल जैसा स्वाद हममें से ज्यादातर लोगों को पसंद होता है! तो चलिए जानते हैं तंदूरी चाट बनाने की रेसिपी.
तंदूरी चाट कई चीजों और ढेर सारे मसालों से बनाया जाता है. अनानास, पनीर, सेब और शिमला मिर्च, आलू और सेब से बना यह तंदूरी चाट निस्संदेह आपके रेगुलर चाट डिश में एक नया ट्विस्ट एड कर सकता है. इसे आप घर पर पार्टी में स्टार्टर के रूप में भी सर्व कर सकते हैं.
कैसे बनाएं तंदूरी चाट-
इस चाट को बनाने के लिए सबसे पहले अनानास के चार टुकड़े, पनीर, सेब और शिमला मिर्च, उबले आलू और उबले हुए सेब लें. इसके बाद, अनानास, लाल मिर्च, पीली शिमला मिर्च, शकरकंद और पनीर. सुविधाजनक बैचों में क्रम को दोहराएं. उन्हें मीडियम गर्म तंदूर या चारकोल ग्रिल में, या पहले से गरम ओवन में 3 मिनट के लिए रोस्ट करें. फिर निकाल कर एक तरफ रख दें. इसे बाउल में निकाल लें, और नमक, सिरका, लाल मिर्च पाउडर, अनारदाना पाउडर, चाट मसाला डालकर अच्छी तरह मिक्स करें और सर्व करें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /अलसी के बीज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं. अलसी के बीजों का तेल और साबुत अलसी को खाने में इस्तेमाल किया जाता है. अलसी में औषधीय गुण पाए जाते हैं. अलसी के बीज में विटामिन बी-1, प्रोटीन, कॉपर, मैंगनीज, ओमेगा-3 एसिड, लिगनन समेत कई माइक्रो न्यूट्रिएंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. भुनी अलसी को डाइट में शामिल कर शरीर को कई लाभ पहुंचा सकते हैं. तो चलिए जानते हैं किन लोगों को करना चाहिए भुनी अलसी का सेवन.
भुनी अलसी खाने के फायदे-
1. मोटापा-
अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो भुनी अलसी को ब्रेकफास्ट में शामिल कर सकते हैं. इसे आप ओट्स, दलिया और सलाद में डालकर खा सकते हैं.
2. पेट के लिए-
भुनी अलसी को डाइट में शामिल कर कब्ज, पाचन, पेट गैस जैसी समस्याओं में राहत पा सकते हैं. पेट के लिए भुनी अलसी का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है.
3. कोलेस्ट्रॉल-
शरीर में बढ़ा कोलेस्ट्रॉल कई समस्याओं की वजह बन सकता है. रोजाना सुबह भुनी अलसी खाने से हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
4. स्किन-
अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो स्किन को हेल्दी रखने में मददगार है.
5. एनर्जी-
अगर आपको भी थकन और कमजोरी महसूस होती है तो आप भुनी अलसी को डाइट में शामिल कर सकते हैं. भुनी हुई अलसी का सेवन करने से शरीर को एनर्जेटिक रखने में मदद मिल सकती है.
आस्था /शौर्यपथ /आज से जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू हो गई है. यह यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित की जाती है. इसका आयोजन ओडिशा के पुरी में किया जाता है जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. आपको बता दें कि भगवान जगन्नाथ के साथ दो और रथ निकलते हैं जिसमें उनके भाई और बहन होते हैं. इस रथ यात्रा की शुरूआत से पहले तीनों रथों की पूजा की जाती है. इसके बाद सोने की झाड़ू के साथ मंडप और रथ के रास्ते की सफाई का जाती है. इसके अलावा और क्या कुछ खास है इस पवित्र रथ यात्रा से जुड़ा हम आपको आगे आर्टिकल में बताने वाले हैं.
जगन्नाथ रथ यात्रा की क्या है मान्यता -
इस यात्रा को लेकर मान्यता है कि इसमें शामिल होने से 100 यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि दुनिया भर से लोग इस यात्रा में प्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने के लिए शामिल होते हैं. साथ ही यह भी मान्यता है कि इस यात्रा में शामिल होने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव भी कम होता है. क्योंकि जगन्नाथ रथ यात्रा में नवग्रहों की पूजा की जाती है.
ओडिशा के पुरी से निकलने वाली प्रभु जगन्नाथ की रथ के साथ दो और रथ निकलते हैं जिसमें से एक में उनके भाई बलराम और दूसरे में बहन सुभद्रा विराजमान होती हैं. सबसे आगे भाई बलराम का रथ उसके बाद बहन सुभद्रा और फिर भगवान जगन्नाथ का रथ होता है. इस तरह कुल 3 देवताओं की यह यात्रा निकलती है.
तीनों रथों के क्या हैं नाम -
पुरी से निकलने वाली इस धार्मिक रथ यात्रा में शामिल रथों के अलग-अलग नाम हैं, जो इस प्रकार हैं
भगवान जगन्नाथ का रथ - इस रथ को नंदीघोष और गरुड़ध्वज के नाम से जाना जाता है.
- यह रथ 42.65 फीट ऊंचा होता है और इसमें 16 पहिए होते हैं,
- वहीं इस रथ का रंग लाल और पीला होता है.
- प्रभु जगन्नाथ के सारथी दारुक हैं.
भाई बलराम का रथ - इस रथ को तालध्वज नाम से जाना जाता है.
- इसकी ऊंचाई 43.30 फीट होती है, जो भगवान जगन्नाथ के रथ से बड़ा होता है.
- इसका रंग लाल और हरा होता है जिसमें 14 पहिए लगे होते हैं. इस रथ के सारथी मातलि हैं.
बहन सुभद्रा का रथ - इस रथ का नाम दर्पदलन है और इसकी ऊंचाई 42.32 फीट होती है.
- इसका रंग लाल और काला होता है जिसमें 12 पहिए लगे होते हैं और इस रथ के सारथी अर्जुन हैं.
कितने दिन रहते हैं मौसी के घर
भाई बलराम और बहन के साथ जब प्रभु यात्रा पर निकलते हैं तो रास्ते में गुंडिचा मौसी के घर भी रुकते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां पर तीनों भाई बहन स्वादिष्ट पकवान खाते हैं जिससे उनकी तबीयत बिगड़ जाती है. ऐसे में वो अज्ञातवास में चले जाते हैं. यहां पर पूरे 7 दिन तक रुकते हैं और स्वस्थ्य होने के बाद पुरी वापस आते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /ओडिशा में पुरी जगन्नाथ धाम में महाप्रभु जगन्नाथ आज अपनी मौसी के घर रवाना होंगे. भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ आज से हो रहा है. इसको लेकर विधि-विधान चल रहा है. आज 14 दिनों बाद महाप्रभु जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देंगे. अभी पहंडी की विधि चल रही है. इसके बाद तीनों रथों को आस्था की मजबूत रस्सी से खींचा जाएगा, जिसके लिए देश-विदेश से लाखों लोग पुरी में जुटे हुए हैं. इस साल होने वाली महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा इस साल इसलिए बेहद खास है, क्योंकि 53 वर्षों बाद यह यात्रा दो-दिवसीय होगी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी रविवार को लाखों श्रद्धालुओं के साथ रथ यात्रा देखने वाली हैं। राज्य सरकार ने उनकी यात्रा के लिए विशेष व्यवस्था की है.
रथयात्रा के बारे में एक पंडित ने बताया, "अभी पूरे विधि-विधान से भगवान की पूजा हो रही है. पूजा पूरी होने के बाद यहां के महाराजा आएंगे और वो सोने की झाड़ू से सफाई करेंगे, इसके बाद ही यात्रा शुरू होगी. ऐसी भी प्रथा है कि सायंकाल होने पर जगन्नाथ भगवान का रथ रोक दिया जाता है. फिर अगले दिन फिर से यात्रा शुरू होती है."
53 वर्षों बाद यह दो-दिवसीय यात्रा
ग्रह-नक्षत्रों की गणना के अनुसार इस साल दो-दिवसीय यात्रा आयोजित की गई है, जबकि आखिरी बार 1971 में दो-दिवसीय यात्रा का आयोजन किया गया था. यानि 53 साल ये अवसर आया है. परंपरा से हटकर, तीन भाई-बहन देवी-देवताओं - भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र से संबंधित त्योहार से संबंधित कुछ अनुष्ठान भी रविवार को एक ही दिन में आयोजित किये जा रहे हैं. रथों को जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के सामने खड़ा किया गया है, जहां से उन्हें गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा. वहां रथ एक सप्ताह तक रहेंगे.
भगवान के बीमार होने की पौराणिक कथा
पुरी में उपस्थित लाखों भक्त आज रथों को खींचेंगे. इस वर्ष, रथ यात्रा और संबंधित अनुष्ठान जैसे 'नवयौवन दर्शन' और 'नेत्र उत्सव' एक ही दिन सात जुलाई को आयोजित किए जाएंगे. ये अनुष्ठान आम तौर पर रथ यात्रा से पहले आयोजित किए जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्नान पूर्णिमा पर अधिक स्नान करने के कारण देवता अस्वस्थ हो जाते हैं और इसलिए अंदर ही रहते हैं. 'नवयौवन दर्शन' से पहले, पुजारी 'नेत्र उत्सव' नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिसमें देवताओं की आंखों की पुतलियों को नए सिरे से रंगा जाता है.
समाचार सार ...
सरकारी स्कूलों में अब हर साल ग्रीष्मकालीन शिविर होंगे आयोजित: मुख्यमंत्री ने की घोषणा
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बनेगा आवासीय विद्यालय
बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ मिलेगी व्यावसायिक शिक्षा भी
एक पेड़ मां के नाम रोपित कर राज्यव्यापी वृक्षारोपण अभियान की शुरूआत
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का शुभारंभ राजधानी रायपुर के बजाय राज्य के सुदूर सीमावर्ती जशपुर जिले के आदिवासी बहुल गांव बगिया से करके न सिर्फ वर्षो से चली आ रही परंपरा को बदला है बल्कि इसके माध्यम से उन्होंने राज्य के सुदूर कोने तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर बगिया और बंदरचुआ के स्कूल को मॉडल स्कूल बनाने तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक आवासीय विद्यालय बनाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने इस मौक पर एक पेड़ मां के नाम रोपित कर राज्यव्यापी वृक्षारोपण अभियान की शुरूआत की और लोगों से पौध रोपण के इस महायज्ञ में सहभागी बनने की भी अपील की। राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में बालिका शिक्षा का बढ़ावा देने का संदेश दिया और स्कूली बालिकाओं को साइकिल प्रदान करके यह सुनिश्चित किया कि बालिकाओं को स्कूल आने जाने में किसी भी तरह का व्यवधान न आए और आगे की शिक्षा हासिल कर सकें।
मुख्यमंत्री साय ने जशपुर सरकारी स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब्स में से एक में रोबोटिक्स मॉडल विकसित करने वाले छात्र से बातचीत की। उन्होंने इस सुदूरवर्ती जिले में किये गये व्यावसायिक शिक्षा कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी के लिए कौशल और व्यावसायिक शिक्षा जरूरी है। इस मौके पर वह स्वयं छात्रों के साथ मिट्टी के बर्तन बनाकर यह संदेश भी दिया कि बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति की परिकल्पना के अनुसार स्थानीय भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस क्षेत्र में बोली जाने वाली सदरी बोली भाषा में भी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने की बात कहीं। छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में अब तक 18 स्थानीय भाषाओं-बोलियों में स्कूली बच्चों पुस्तकें तैयार की गई है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को नई शिक्षा नीति के अनुरूप मेगा पीटीएम आयोजित करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने समर कैंप के दौरान छात्रों द्वारा किए गए कार्य को देखकर प्रसन्नता जताई और सरकारी स्कूलों में हर साल ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए राज्य सरकार इस साल से दो बोर्ड परीक्षाएं आयोजित होंगी। उन्होंने कहा कि पीएमश्री के तहत राज्य में प्रथम चरण में 211 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने भी बच्चों को शिक्षा-दीक्षा में माता-पिता की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के लिए कई उपयोगी टिप्स दिए और कहा कि बच्चों को मोबाइल का उपयोग सिर्फ शिक्षा, ज्ञान और जीवनोपयोगी जानकारी हासिल करने के लिए करना चाहिए।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /भगवान गणेश को सभी देवों में प्रथम पूजनीय कहा गया है. खुशहाली और सुख-समृद्धि का वरदान देने वाले गणपति को विनायक भी कहा जाता है. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है और गणपति के लिए व्रत रखा जाता है. इस दिन विधि-विधान से गणपति की पूजा होती है. चलिए जानते हैं कि इस साल विनायक चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और साथ ही ये भी जानेंगे कि विनायक चतुर्थी पर भगवान गणपति की पूजा किस तरह करें
कब है विनायक चतुर्थी 2024
हिंदू पंचांग की बात करें तो आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विघ्नहर्ता भगवान गणेश के निमित्त व्रत रखा जाता है. इस साल यानी 2024 में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 9 जुलाई को सुबह छह बजकर आठ मिनट पर आरंभ हो रही है और इसका समापन अगले दिन दस जुलाई को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर होगा. इस लिहाज से देखा जाए तो विनायक चतुर्थी का व्रत 9 जुलाई को रखा जाएगा. इस दिन गणपति पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 3 मिनट से दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक है. इस दौरान आप गणपति पूजा करेंगे तो आपको शुभ फल मिलने के योग बनेंगे. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से अगर भगवान गणपति की पूजा की जाए तो जातक के जीवन में सभी तरह के विघ्न और संकट दूर हो जाते हैं और परिवार में खुशहाली आती है.
विनायक चतुर्थी पर इस तरह करें गणपति की पूजा
विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें और साफ वस्त्र धारण करें. अब घर में मंदिर के सामने एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणपति की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. अब गंगाजल हाथ में लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें. अब गणेश भगवान को सिंदूर लगाएं. उन्हें माला पहनाकर फूल अर्पित करें. इसके बाद भगवान गणपति को दूर्वा अर्पित करें और फिर मोदक का भोग लगाएं. इसके बाद धूप और दीपक जलाकर भगवान गणपति की आरती करें. इसके बाद गणेश जी के बीज मंत्रों का जाप करें.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा गुप्त नवरात्रि का भी बेहद महत्व होता है और खासकर आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि देवी दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा के लिए समर्पित होती है. इस साल आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 6 जुलाई से हो रही है जो कि 15 जुलाई 2024 तक चलेगी. कहा जाता है कि इस गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विशेष आराधना करने के साथ ही कई लोग मंत्र भी सीखते हैं. ऐसे में इस दौरान आपको किन चीजों से बचना चाहिए, आइए हम आपको बताते हैं.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में रखें इन चीजों का ध्यान
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है, इनमें मां दुर्गा का रौद्र रूप भी होता है. ऐसे में पूजा अर्चना करने के दौरान आपको साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान साफ सफाई का ध्यान रखने के साथ ही आपको तामसिक चीजों से दूरी बनानी चाहिए. नवरात्रि से पहले अगर आपके घर में कोई भी तामसिक चीजें मौजूद है तो उसे घर से बाहर कर दें.
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान घर में देवी दुर्गा के रौद्र स्वरूप की स्थापना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इनकी स्थापना केवल तंत्र विद्या के लिए की जाती है. आप घर में मां दुर्गा की कोई भी साधारण सी प्रतिमा लगा सकते हैं.
- आषाढ़ नवरात्रि के दौरान घर में केवल हवन और सात्विक पूजा का पालन ही करना चाहिए, तंत्र मंत्र का अधिकार केवल तांत्रिकों का होता है.
आषाढ़ नवरात्रि पर क्या करें
अब बात आती है कि आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि पर आपको क्या करना चाहिए, तो कहा जाता है कि इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है. इस नवरात्रि में ज्वार नहीं बोए जाते हैं, ऐसे में गुप्त नवरात्रि के दौरान आप मां दुर्गा के नामों का जाप कर सकते हैं और उनकी असीम कृपा पा सकते हैं.
चाक पर हाथ चला और दीया बनाकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दिया सन्देश
बच्चों के हुनर और प्रस्तुति की सराहना की
राज्य स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में स्टॉल का किया अवलोकन
रायपुर /शौर्यपथ /बच्चे तो मन के सच्चे होते हैं और यह बिल्कुल ही गीली मिट्टी की तरह होते हैं.. आप इन्हें जिस रूप में आकार देना चाहते हैं, दे सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कुम्हार की चाक पर हाथ चलाते हुए राज्य स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में शायद यहीं संदेश दे रहे थे। जशपुर जिले में अपने गृहग्राम बगिया में मुख्यमंत्री श्री साय ने अपनी पत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय के साथ कार्यक्रम स्थल पर चाक पर न सिर्फ हाथ आजमाए...उन्होंने गीली मिट्टी से दीया बनाकर मौके पर उपस्थित बच्चों और अभिभावकों को अलग-अलग संदेश दिया कि गीली मिट्टी की तरह बच्चे भी कोमल होते हैं और उन्हें किसी भी रुप में ढाला जा सकता है। वहीं दीया बनाकर उन्होंने अँधेरे को दूर करने में दीये की उपयोगिता को बताने की भी कोशिश की।
इस दौरान बगिया में कार्यक्रम स्थल पर लगायें एक- एक स्टाल का मुख्यमंत्री श्री साय ने अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा तैयार मॉडल,सामग्रियों को देखकर उनकी सराहना की और उन्हें प्रेरित भी किया।
राज्य स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम स्थल पर अलग अलग विभागों की स्टाल लगाई गई थी। जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों में वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने मॉडल, स्वास्थ्य विभाग द्वारा डायरिया के रोकथाम, आदिवासी विकास विभाग द्वारा एकलव्य आवासीय विद्यालय में अध्यापन और आदिवासी बच्चों को दी जाने वाली सुविधाएं, लाइवलीहुड कॉलेज नवगुरूकुल द्वारा आजीविका पाठ्यक्रम की जानकारी दी गई। स्टाल में पीएमश्री प्राथमिक शाला लवाकेरा के विद्यार्थियों ने बैंड से देशभक्ति धुनों की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना की। शासकीय कन्या आश्रम बगीचा, पीएमश्री विद्यालय कांसाबेल, पीएमश्री विद्यालय कडरेगा के बच्चों ने स्कूल में तैयार की गई मॉडल, वैज्ञानिक सोच और तार्किकता को बढ़ावा देने वाले मॉडल से मुख्यमंत्री का ध्यान अपनी ओर खींचा। छात्रा कु.अनामिका ,समिस्ता टोप्पो, दीपिका सिंह,दृष्टि साय, अनुष्का टोप्पो ने जादुई पिटारे सहित अन्य प्रस्तुत सामग्रियों के विषय में बताया। शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला पत्थलगांव के विद्यार्थियों ने हुनर के पेटी,खेल सामग्री ,जादुई पिटारा,बायो गैस मॉडल के माध्यम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
शासकीय विद्यालय दोकड़ा द्वारा हेल्थकेयर सेजेस जशपुर के विद्यार्थियों द्वारा रोबोट के माध्यम से यातायात के दौरान दुर्घटना से बचाव,शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई विद्यालय जशपुर की श्रुति डहरे, सरस्वती और भूमिका डहरे ने थ्री डी प्रिंटर के माध्यम से कलात्मक प्रिंट तैयार करने, हाइट फाइंडर के माध्यम से ऊंचाई नापने की जानकारी दी।
शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल चराई डाँड़ के विद्यार्थियों ने ड्रिप सिंचाई, शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय गम्हरिया द्वारा मशरूम उत्पादन की जानकारी दी गई। स्टाल में बाँस कला, माटी कला अंतर्गत सामग्री की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री ने स्टाल में मिली जानकारी को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि बच्चों की यह प्रतिभा जीवन में आगे बढ़ने के काम आएगी।
बीमारियों को बढ़ने से रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती: स्वास्थ्य मंत्री
शादी के पहले जन्मकुंडली की तरह ही जेनेटिक कुंडली भी मिलाएं: श्री जायसवाल
आईआईटी भिलाई में आयोजित "हेल्थ इनोवेशन केयर इन छत्तीसगढ़" के दूसरे राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए स्वास्थ्य मंत्री
रायपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल आज IIT भिलाई में आयोजित "हेल्थ इनोवेशन केयर इन छत्तीसगढ़" के दूसरे राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। इस कॉन्फ्रेंस में IIT, IIM, AIIMS, NIT और मल्टी नेशनल कंपनी के पदाधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचल तक बेहतर मेडिकल सुविधा कैसे पहुंचे इस पर सकारात्मक चर्चा हुई। कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए सुझाव और तकनीक को लेकर चर्चा हुई जो आने वाले दिनों में राज्य के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे।
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री जायसवाल ने कहा कि स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जो इंसान के साथ ताउम्र जुड़ा रहता है , लिहाजा एक बीमारी को ठीक करना हे स्वास्थ्य नहीं है बल्कि व्यक्ति बीमार ही न हो यह ज्यादा आवश्यक है। ऐसी स्थिति लाने की लिए युवा पीढ़ी को शादी से पहले जन्म कुंडली ही नहीं बल्कि जेनेटिक कुंडली भी मिला लेनी चाहिए ताकि सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारी पूरी तरह से खत्म हो जाए।
श्री जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है और इसका लाभ भी दूरस्थ अंचल के लोगों को मिल रहा है। अंबिकापुर से उदयपुर तक ड्रोन चिकित्सा सेवा और रायपुर के मेकाहारा में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत नई तकनीक का ही उदाहरण है।
श्री जायसवाल ने भारत की अग्रणी संस्थाओं से कहा कि वो स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए तकनीक की खोज करें जिसके लिए राज्य सरकार का हर संभव सहयोग रहेगा। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य कर रही है जिसमें रायपुर और बिलासपुर में 700 बेड के अस्पताल तथा बस्तर और सरगुजा में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण की घोषणा शामिल हैं।
कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ धीरेंद्र तिवारी, IIT भिलाई के निदेशक प्रो.डॉ. राजीव प्रकाश , AIIMS रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल , NIT रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमन्ना राव सहित IIM रायपुर और स्टैनफोर्ड बायर्स सेंटर फॉर बायोडिजाइन के पदाधिकारी और IIT भिलाई के रिसर्च स्कॉलर्स उपस्थित थे।
योजना के क्रियान्वयन में गांव की महिलाएं निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका
रायपुर/शौर्यपथ /जलजीवन मिशन योजना अंतर्गत दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में हर घर जल का सपना साकार हो रहा है। इस योजना से जिले के दूरस्थ अंचलों में भी घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचने से ग्रामीणों का पेयजल संकट भी दूर हो रहा है। महिलाओं को इस योजना से काफी राहत मिल रही है। पहले कई ग्रामीण महिलाओं को शुद्ध पेयजल के लिए कई किलोमीटर की दूरी भी तय करनी पड़ती थी, जिससे आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था और शारीरिक परिश्रम भी अधिक लगता था। जल जीवन मिशन में ग्रामवासियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिसमें महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
जिला मुख्यालय कांकेर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नरहरपुर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिरनपुर के आश्रित ग्राम करियापहर भी ऐसा गांव है, जहां जलजीवन मिशन के तहत हर घर शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। ग्राम करियापहर गांव में 149 परिवारों की कुल जनसंख्या 767 है, जिसमें महिलाओं की संख्या 369 एवं पुरूषों की संख्या 398 है। यह गांव के कुल भू-भाग का 3 प्रतिशत हिस्सा उबड़-खाबड़ तथा पथरीला होने के कारण यहां पानी सामान्य से कम मात्रा में पाया जाता है। साथ ही सभी मौसमों में पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं रहता है। यहां निस्तारी के लिए अन्य स्त्रोतों का उपयोग किया जाता है, जिनमें तालाब तथा कुएं शामिल हैं। यहां के पानी में उपलब्ध खनिजों में लोहे की अधिकता पाई गई। अलग-अलग मौसमों में यहां के लोगों को पानी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कई मोहल्लों में गर्मी के दिनों में हैण्डपम्प सूख जाने से पीने तथा निस्तारी के लिए अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कई लोगों के घरों में शासन द्वारा शौचालय का निर्माण किया गया है, परन्तु पानी की कमी के कारण गांव वालों द्वारा शौचालयों का उपयोग नही किया जाता था। स्कूल तथा आंगनबाड़ी में भी पीने के पानी की समस्या हमेशा बनी रहती थी, लेकिन अब जलजीवन मिशन के तहत योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन से करियापहर के ग्रामवासियों को पानी की समस्याओं से छुटकारा मिला है।
ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा जल संरक्षण का दिया जा रहा संदेश
जलजीवन मिशन के सदस्य सचिव और कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री बी.एन. भोयर ने बताया कि इसके तहत सबसे पहले गांव में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया एवं उन्हें नियमानुसार प्रशिक्षण प्रदान किया गया। गांव के लोगों को साफ एवं शुद्ध पेयजल से होने वाले लाभों के बारे में जानकारी दी गई। गांव की पांच महिलाओं का चयन कर उन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण सिखाया गया है। स्कूलों में बच्चों को सफाई की आदतों को अपनाने एवं साफ-सफाई के बारे में जानकारी प्रदान की गई। ग्रामवासियों को जल स्रोतों के स्थायित्व के लिए भूमिगत जल के संरक्षण के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही गांव में जलजीवन मिशन द्वारा लगाए गए जल स्रोतों की सुरक्षा तथा रख-रखाव हेतु गांव के लोगों को प्रेरित किया गया।
जलजीवन मिशन के सफल क्रियान्वयन में गांव की महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की ओर से जलजीवन मिशन के तहत ग्राम करियापहर में ग्रामसभा का आयोजन कर समिति के सदस्यों द्वारा जलजीवन मिशन और इसके क्रियान्वयन के विषय में जानकारी दी गई। इस अवसर पर गांव में जल प्रबंधन समिति का गठन किया गया, जिसमें 50 प्रतिशत महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित की गई। इस समिति में गांव के सरपंच को अध्यक्ष तथा पंचायत सचिव को सचिव बनाया गया। इसके अलावा गुणवत्ता समिति व पानी जांच समिति का गठन कर समिति के सदस्यों को जल परीक्षण की दोनों विधियों (एफ.टी.के. एवं एच.2एस.) की जानकारी के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। इस गुणवत्ता समिति में गांव की मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी शामिल किया गया है। समिति की सदस्यगण जल की गुणवत्ता की जांच के बाद परिणामों को पोर्टल पर अपलोड करते हैं।
सभी से इस मुहिम में जुड़ने की अपील की
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत अपनी जन्मभूमि बगिया में अपनी माताजी के सम्मान में पौधरोपण किया। उन्होंने शासकीय हाईस्कूल बगिया परिसर में रुद्राक्ष का पौधा रोपा। उन्होंने कहा कि इस अभियान अंतर्गत लगे पौधे जननी और जन्मभूमि के रिश्ते को एक नई पहचान देंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में शामिल होने यहां पहुंचे थे। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने भी रुद्राक्ष का पौधा लगाया। वहीं प्रदेश के वित्त मंत्री और जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ पी चौधरी ने आंवले का पौधा लगाया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मां के साथ रिश्ता अनमोल होता है। जिस प्रकार मां हमे जीवन देती है, हमारा पालन पोषण करती है, वैसे ही प्रकृति भी हमारे लिए जीवनदायिनी है। इसकी सुरक्षा और संवर्धन हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस मुहिम से हम सभी को जुड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान जरूर देना चाहिए। इस दौरान उन्होंने सभी से "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पेड़ लगाने आग्रह किया। साथ ही सभी से पौधों का संरक्षण हेतु संकल्प लेने कहा।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस मानसून में ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करें। अपने घर, आसपास के परिवेश, गांव और शहरों और जंगलों को खूब हरा-भरा बनाएं। इस अवसर पर रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री राधेश्याम राठिया, विधायक जशपुर श्रीमती रायमुनी भगत, विधायक पत्थलगांव श्रीमती गोमती साय, विधायक आरंग गुरु खुशवंत साहेब सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
