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टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक बार फिर सरकारें अलर्ट हो गई हैं। लोगों को कोविड-19 संक्रमण से दूर रखने के लिए सही तरह के मास्क पहनने और उन्हें अच्छे से धोने की सलाह दी जा रही है। बावजूद इसके कई बार लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर रहे हैं जो आगे चलकर उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं मास्क से जुड़ी वो कॉमन गलतियां।
कोविड-19 के संक्रमण से दूर रखने के लिए डब्ल्यूएचओ ने लोगों को घर से निकलने से पहले या किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में आने से पहले चेहरे पर मास्क लगाने की सलाह दी है। लंबा समय गुजर जाने के बाद भी लोगों में मन में मास्क को लेकर कई दुविधाएं अभी भी बनी हुईं हैं जैसे- मास्क को धोने का सही तरीका क्या है, मास्क को कैसे संक्रमण फ्री बनाए रख सकते हैं, मास्क को धोते समय क्या नहीं करना चाहिए। सरकार ने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल #IndiaFightsCorona पर कई वीडियो शेयर कर सही ढंग से मास्क पहनने और धोने के तरीके के बारे में जानकारी भी दी है। आइए जानते हैं मास्क को लेकर ऐसे ही कुछ सवालों के सही जवाब।
फेस मास्क धोते समय न करें ये गलतियां-
-सिर्फ पानी से धोना -कई लोग मास्क धोने के लिए सिर्फ पानी का इस्तेमाल करते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। मास्क में मौजूद जीवाणु को हटाने के लिए जरूरी है कि मास्क को साबुन या सर्फ से साफ किया जाए। पानी से मास्क धोना आपको संक्रमण से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
ठंडे पानी से मास्क धोना- ठंडे पानी से मास्क धोने की जगह गर्म पानी का इस्तेमाल करें। ये तरीका संक्रमण को दूर रखने के लिए अधिक प्रभावशाली है। इस तरह मास्क धोने से मास्क में मौजूद सारे कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
कमरे में मास्क को सूखाना- अक्सर कई लोग मास्क को घर के भीतर ही सुखा देते हैं। लेकिन याद रखें मास्क को धूप दिखाना बेहद आवश्यक है। कमरे में सूखाने से मास्क की नमी भले ही मिट जाती है लेकिन कीटाणु उसमें रह सकते हैं।
एक ही मास्क को बार-बार धोना -एक ही मास्क को बार-बार धोने से उसका प्रभाव कम होने के साथ वह कुछ समय बाद ढीला भी पड़ने लगता है। बार-बार धोने से मास्क का कपड़ा गल जाता है और वह पहले जितना प्रभावशाली नहीं रह पाता। यही वजह है कि मास्क पहनते समय कई बार लोगों के नाक से मास्क नीचे गिरने लगता है और आपको उचित सुरक्षा नहीं दे पाता है। इससे बचने के लिए मास्क को समय-समय पर बहलते रहें।
फेस मास्क धोने के असरदार तरीके-
-प्रेशर कुकर में पानी और नमक उबलते हुए इसमें 10 मिनट के लिए मास्क को डाल दें, फिर पूरी तरह सुखाकर इस्तेमाल में लाएं।
-मास्क धोने के लिए पानी और डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें,5 घंटे धूप में सूखाकर इसका दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं।
-डिटर्जेंट में मास्क धोने के बाद उसे प्रेस कर दें। ऐसा तब करें जब आप जल्दी में हो और मास्क साफ न हो, लेकिन मास्क को अच्छी तरह सूखा लें।
-डिटर्जेंट में मास्क धोने के बाद उसे सुखाने के लिए प्रेस कर दें। ऐसा तब करें जब आप जल्दी में हो और मास्क साफ न हो, ध्यान रखें मास्क पूरी तरह सूखा हुआ होना चाहिए।
-डिस्पोजेबल मास्क को उबालकर साफ न करें। उसके अंदर ऐसे कई तत्व होते हैं जो धुलाई से खराब हो सकते हैं।
सेहत /शौर्यपथ /कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें ड्राई फूट्स डाइजेस्ट नहीं होते यानी उनके शरीर का टेम्परेचर बहुत गर्म होता है इसलिए उन्हें कोई भी गर्म चीज डाइजेस्ट नहीं हो पाती। ऐसे में वे ड्राई फ्रूट्स नहीं खाते लेकिन इम्युनिटी बढ़ाने के साथ ड्राई फ्रूट्स कई बीमारियों से भी बचाते हैं। ऐसे में अगर आपको भी ड्राई फ्रूट्स डाइजेस्ट नहीं होते, तो आप इन्हें भीगाकर खा सकते हैं। वहीं कुछ ड्राई फ्रूट्स ऐसे हैं जिनका पानी पीने से भी आप स्वस्थ रहते हैं। आज हम आपको किशमिश का पानी पीने के फायदे बता रहे हैं।
ऐसे रखें किशमिश का पानी
2 कप पानी और 150 ग्राम किशमिश लें। एक पैन में, पानी डालें और उबाल लें। किशमिश को इसमें डालें और इसे रात भर भिगो दें। सुबह इस पानी को छान लें और धीमी आंच पर गर्म करें। इस पानी को सुबह खाली पेट पिएं। सुनिश्चित करें कि इस पानी को पीने के बाद अगले 30 मिनट तक आप कुछ न खाएं पिएं।
इसे पीने के फायदे
-किशमिश का पानी पीने से आपको अपने शरीर से सभी हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलेगी। यह ड्रिंक लीवर की जैव रासायनिक प्रक्रिया में सुधार करता है और आपको रक्त को साफ करने में मदद करता है।
-किशमिश का पानी आपके रक्त के शुद्धिकरण का काम करता है और आपके दिल की सेहत को बनाए रखने में मदद करता है। यह आपके शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है।
-सुबह किशमिश का पानी पीने से भी आपको वजन कम करने में मदद मिल सकती है। किशमिश फ्रुक्टोज और ग्लूकोज से भरपूर होता है, जो आपको ऊर्जा से भरपूर रखता है।
किशमिश में फाइबर होता है, जो आपके पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा होता है। किशमिश का पानी पीने से पाचन में सुधार करने में मदद मिलती है। यह कब्ज और अपच जैसी समस्याओं को भी दूर कर सकता है।
-किशमिश में बोरोन होता है जो हड्डियों के निर्माण में मदद करता है। किशमिश में कैल्शियम भी होता है, जो हड्डियों के लिए बहुत अच्छा है। जिन लोगों को आयरन की कमी होती है उनके लिए यह पानी पीना फायदेमंद होता है। किशमिश आयरन से भरपूर होता है और शरीर में रक्त की आपूर्ति बढ़ाने में मदद करता है।
खाना खजाना /शौर्यपथ /चाइनीज फूड्स के बीच समोसा लवर्स की कमी नहीं है। आज भी कई फूड ऑप्शन्स होने के बाद भी समोसे की एक अलग ही जगह है। आज हम आपको समोसे की रेसिपी कुछ अलग स्टाइल में बता रहे हैं। समोसे में आलू की जगह दाल भरने से न सिर्फ यह पहले से हेल्दी होगा बल्कि आपको समोसे की एक नई वैरायटी चखने का मौका भी मिलेगा।
सामग्री :
2 कप मैदा
तेल जरूरत के अनुसार
नमक स्वादानुसार
भरावन के लिए
1/2 कप धुली मूंग की दाल
चुटकीभर हींग
2 हरी मिर्च
1/2 इंच का टुकड़ा अदरक
2 टेबलस्पून तेल या घी
1 टीस्पून धनिया पाउडर
1/2 टीस्पून भुने जीरे का पाउडर
1/2 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर
1/2 टीस्पून मोटी सौंफ दरदरी कुटी हुई
1 टीस्पून आमचूर पाउडर
विधि :
मूंग दाल को धोकर 2-3 घंटे के लिए भिगोकर रख दें। भीगने के बाद पानी फेंक दें और दाल को अदरक और हरी मिर्च के साथ मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें। अब एक कड़ाही में तेल डालकर गर्म करें। तेल गर्म हो जाए, तो इसमें पिसी हुई दाल, हींग, नमक और सारे मसाले डालकर अच्छी तरह मिला लें। धीमी आंच पर दाल के सूखने तक भूनें और उतारकर ठंडा कर लें। मैदे को छानकर किसी बड़े बर्तन में निकाल लें। इसमें सोडा और नमक मिला लें। फिर तेल डालकर हाथ से अच्छी तरह मसल के मिला लें। पानी डालकर सख्त आटा गूंद लें। फिर हलके गीले कपड़े से से ढककर 30 घंटे के लिए रख दें। अब आटे को थोड़ा मसलकर लोइयां तोड़ लें। एक लोई लेकर रोटी की तरह बेल लें। रोटी को बीच से काटकर एक हिस्से को तिकोना मोड़ लें। इसके बीच में एक चम्मच स्टफिंग डालकर किनारों पर हल्का सा पानी लगाकर समोसे को पैक कर दें। इसी तरह से बाकी लोइयों से समोसे तैयार कर लें। कड़ाही में तेल डालकर मीडियम आंच पर गर्म होने के रख दें। तेल में समोसे डालकर सुनहरा होने तक तल लें। इसी तरह से सारे समोसे तल लें। तैयार है चिली चीज समोसे। इन्हें चटनी के साथ सर्व करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ /माता कालिका के अनेक रूप हैं जिनमें से प्रमुख है- 1.दक्षिणा काली, 2.शमशान काली, 3.मातृ काली और 4.महाकाली। इसके अलावा श्यामा काली, गुह्य काली, अष्ट काली और भद्रकाली आदि अनेक रूप भी है। सभी रूपों की अलग अलग पूजा और उपासना पद्धतियां हैं। आओ जानते हैं दक्षिण काली क्या है और क्या है उनका मंत्र।
1. दशमहाविद्यान्तर्गत भगवती दक्षिणा काली (दक्षिण काली) की उपासना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि महाकाल की प्रियतमा काली ही अपने दक्षिण और वाम रूप में प्रकट हुई और दस महाविद्याओं के नाम से विख्यात हुई। बृहन्नीलतंत्र में कहा गया है कि रक्त और कृष्णभेद से काली ही दो रूपों में अधिष्ठित है। कृष्णा का नाम दक्षिणा और रक्तवर्णा का नाम सुंदरी है।
2. दक्षिण काली मंत्र :
।। ॐ हूं ह्रीं दक्षिण कालिके खड्गमुण्ड धारिणी नम:।।
3. दक्षिण कालिका के अन्य मन्त्र :- भगवती दक्षिण कालिका के अनेक मन्त्र हैं, जिसमें से कुछ इस प्रकार है।
1.क्रीं,
2. ॐ ह्रीं ह्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं।
3. ह्रीं ह्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
4. नमः ऐं क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा।
5. नमः आं क्रां आं क्रों फट स्वाहा कालि कालिके हूं।
6. क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हुं हुं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रींह्रीं ह्रीं हुं हुं स्वाहा।
उपरोक्त में से किसी भी मंत्र का तब जाप किया जा सकता है जबकि इसकी पूजा पद्धति और विविवत जाप की विधि ज्ञात हो। इसके बाद ध्यान, स्तुति और प्रार्थना के श्लोक भी होते हैं।
10 महाविद्याओं में से एक मां काली के हैं 4 रूप, जानिए अचूक गुप्त मंत्र
कलिकाल में हनुमान, दुर्गा, कालिका, भैरव, शनिदेव को जाग्रत देव माना गया है। कालका के दरबार में जो एक बार चला जाता है उसका नाम-पता दर्ज हो जाता है। यहां यदि दान मिलता है तो दंड भी। आशीर्वाद मिलता है तो शाप भी। जिस प्रकार अग्नि के संपर्क में आने के पश्चात् पतंगा भस्म हो जाता है, उसी प्रकार काली देवी के संपर्क में आने के उपरांत साधक के समस्त राग, द्वेष, विघ्न आदि भस्म हो जाते हैं। आओ जानते हैं माता कालिका के 4 रूपों के बारे में।
चार रूप : 1.दक्षिणा काली, 2.शमशान काली, 3.मातृ काली और 4.महाकाली।
मां कालिका की साधना के कई रूप हैं लेकिन भक्तों को केवल सात्विक भक्ति ही करना चाहिए। शमशान काली, काम कला काली, गुह्य काली, अष्ट काली, दक्षिण काली, सिद्ध काली, भद्र काली आदि कई मान से मां की साधना होती है।
महाकाली को खुश करने के लिए उनकी फोटो या प्रतिमा के साथ महाकाली के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। इस पूजा में महाकाली यंत्र का प्रयोग भी किया जाता है। इसी के साथ चढ़ावे आदि की मदद से भी मां को खुश करने की कोशिश की जाती है। अगर पूरी श्रद्धा से मां की उपासना की जाए तो आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। अगर मां प्रसन्न हो जाती हैं तो मां के आशीर्वाद से आपका जीवन पलट सकता है, भाग्य खुल सकता है और आप फर्श से अर्श पर पहुंच सकते हो।
काली मंत्र : कालिका माता का यह अचूक मंत्र है। इससे माता जल्द से सुन लेती हैं, लेकिन आपको इसके लिए सावधान रहने की जरूरत है। आजमाने के लिए मंत्र का इस्तेमाल न करें। यदि आप काली के भक्त हैं तो ही करें।
साबर मंत्र :
ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली,
चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई,
अब बोलो काली की दुहाई।
इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से आर्थिक लाभ मिलता है। इससे धन संबंधित परेशानी दूर हो जाती है। माता काली की कृपा से सब काम संभव हो जाते हैं। 15 दिन में एक बार किसी भी मंगलवार या शुक्रवार के दिन काली माता को मीठा पान व मिठाई का भोग लगाते रहें।
चेतावनी : यहां कालका माता की पूजा संबंधी सामान्य जानकारी दी जा रही है। किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही माता की पूजा करना चाहिए।
धर्म संसार /शौर्यपथ शिव जी की पूजा के लिए महाशिवरात्रि का पर्व सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन को भोलेनाथ के भक्त चरम उत्साह से मनाते हैं। आइए जानते हैं इस साल महाशिवरात्रि का पर्व कब आ रहा है...
पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च 2021 गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।
महाशिवरात्रि व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि: 11 मार्च 2021
निशिता काल पूजा समय: 00:06 से 00:55, मार्च 12
अवधि: 00 घण्टे 48 मिनट
12 मार्च 2021: शिवरात्रि पारण समय - 06:34 से 15:02
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय: 18:27 से 21:29
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय: 21:29 से 00:31, मार्च 12
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय: 00:31 से 03:32, मार्च 12
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: 03:32 से 06:34, मार्च 12
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ: 11 मार्च को 14:39 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 12 मार्च को 15:02 बजे
संक्षिप्त पूजा विधि
शिवरात्रि के दिन स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
इसके उपरांत विधिवत पूजा आरंभ करनी चाहिए।
पूजा के दौरान कलश में जल या दूध भरकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए।
शिवलिंग को बेलपत्र, आक फूल, धतूरे के फूल आदि भी अर्पित करने चाहिए।
इस दिन शिवपुराण, महामृत्युंजय मंत्र, शिव मंत्र और शिव आरती का पाठ करना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण भी किया जाता है।
भगवान शिव के 12 अनमोल वचन
भगवान शिव दुनिया के सभी धर्मों का मूल हैं। शिव के दर्शन और जीवन की कहानी दुनिया के हर धर्म और उनके ग्रंथों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। भगवान शिव के अनमोल वचनों को 'आगम ग्रंथों' में संग्रहित किया गया है। आगम का अर्थ ज्ञान अर्जन। पारंपरिक रूप से शैव सिद्धांत में 28 आगम और 150 उप-आगम हैं।
शिव पुराण, शिव संहिता, शिव सूत्र, महेश्वर सूत्र और विज्ञान भैरव तंत्र सहित अनेक ग्रंथों में अनमोल वचनों को संग्रह करके रखा गया है। उनमें से ही कुछ अनमोल मोती...
1.कल्पना ज्ञान से महत्वपूर्ण : आइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि 'कल्पना' ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम जैसी कल्पना और विचार करते हैं, वैसे ही हो जाते हैं। सपना भी कल्पना है। अधिकतर लोग खुद के बारे में या दूसरों के बारे में बुरी कल्पनाएं या खयाल करते रहते हैं। दुनिया में आज जो दहशत और अपराध का माहौल है उसमें सामूहिक रूप से की गई कल्पना का ज्यादा योगदान है।
2.बदलाव के लिए जरूरी है ध्यान : आदमी को बदलाहट की प्रामाणिक विधि के बिना नहीं बदल सकते। मात्र उपदेश से कुछ नहीं बदलता। भगवान शिव ने अमरनाथ गुफा में माता पार्वती को मोक्ष की शिक्षा दी थी। पार्वती और शिव के बीच जो संवाद होता है उसे 'विज्ञान भैरव तंत्र' में संग्रह किया गया है। इसमें ध्यान की 112 विधियां संग्रहीत है।
3.शून्य में प्रवेश करो : विज्ञान भैरव तंत्र में शिव पार्वतीजी से कहते हैं, ‘आधारहीन, शाश्वत, निश्चल आकाश में प्रविष्ट होओ।’ वह तुम्हारे भीतर ही है। भगवान शिव कहते हैं- 'वामो मार्ग: परमगहनो योगितामप्यगम्य:' अर्थात वाम मार्ग अत्यंत गहन है और योगियों के लिए भी अगम्य है। -मेरुतंत्र...भगवान शिव के योग को तंत्र या वामयोग कहते हैं। इसी की एक शाखा हठयोग की है।
4.आदमी पशुवत है : मनुष्य में जब तक राग, द्वेष, ईर्ष्या, वैमनस्य, अपमान तथा हिंसा जैसी अनेक पाशविक वृत्तियां रहती हैं, तब तक वह पशुओं का ही हिस्सा है। पशुता से मुक्ति के लिए भक्ति और ध्यान जरूरी है।
भगवान शिव के कहने का मतलब यह है कि आदमी एक अजायबघर है। आदमी कुछ इस तरह का पशु है जिसमें सभी तरह के पशु और पक्षियों की प्रवृत्तियां विद्यमान हैं। आदमी ठीक तरह से आदमी जैसा नहीं है। आदमी में मन के ज्यादा सक्रिय होने के कारण ही उसे मनुष्य कहा जाता है, क्योंकि वह अपने मन के अधीन ही रहता है।
5.मरना सीखो : यदि जीवन में कुछ सीखना है तो मरना सीखो। जो मरना सीख जाता है वही सुंदर ढंग से जीना जानता है।
6.गायत्री मंत्र : 'गायत्री-मंजरी' में 'शिव-पार्वती संवाद' आता है जिसमें भगवती पूछती हैं- 'हे देव! आप किस योग की उपासना करते हैं जिससे आपको परम सिद्धि प्राप्त हुई है?' उन्होंने उत्तर दिया- 'गायत्री ही वेदमाता है और पृथ्वी सबसे पहली और सबसे बड़ी शक्ति है। वह संसार की माता है। गायत्री भूलोक की कामधेनु है। इससे सब कुछ प्राप्त होता है। ज्ञानियों ने योग की सभी क्रियाओं के लिए गायत्री को ही आधार माना है।'
7.जीवन को सुखमयी बनाने के लिए : भोजन और पान (पेय) से उत्पन्न उल्लास, रस और आनंद से पूर्णता की अवस्था की भावना भरें, उससे महान आनंद होगा। या अचानक किसी महान आनंद की प्राप्ति होने पर या लंबे समय बाद बंधु-बांधव के मिलन से उत्पन्न होने वाले आनंद का ध्यान कर तल्लीन और तन्मय हो जाएं।
8.प्रकृति का सम्मान करो : प्रकृति हमें जीवन देने वाली है, इसका सम्मान करो। जो इसका अपमान करता है समझो मेरा अपमान करता है। दुनिया का हर काम प्रकृति के नियमों और तरीकों से ही होता है, लेकिन अहंकार से ग्रसित लोग ऐसा मानते हैं कि सबकुछ वही कर रहे हैं।
9.योग की शक्ति को समझो
विस्मयो योगभूमिका:।
स्वपदंशक्ति।
वितर्क आत्मज्ञानमू।
लोकानन्द: समाधिसुखम्। -शिवसूत्र
अर्थात : विस्मय योग की भूमिका है। स्वयं में स्थिति ही शक्ति है। वितर्क अर्थात विवेक आत्मज्ञान का साधन है। अस्तित्व का आनंद भोगना समाधि है।
10.अपनी तरफ देखो- न तो पीछे, न आगे। कोई तुम्हारा नहीं है। कोई बेटा तुम्हें नहीं भर सकेगा। कोई संबंध तुम्हारी आत्मा नहीं बन सकता। तुम्हारे अतिरिक्त तुम्हारा कोई मित्र नहीं है। -शिवसूत्र
11.माया को समझो :
आत्मा चित्तम्।
कलादीनां तत्वानामविवेको माया।
मोहावरणात् सिद्धि:।
जाग्रद् द्वितीय कर:। -शिवसूत्र
अर्थात आत्मा चित्त है। कला आदि तत्वों का अविवेक ही माया है। मोह आवरण से युक्त को सिद्धियां तो फलित हो जाती हैं, लेकिन आत्मज्ञान नहीं होता है। स्थायी रूप से मोह जय होने पर सहज विद्या फलित होती है। ऐसे जाग्रत योगी को, सारा जगत मेरी ही किरणों का प्रस्फुरण है, ऐसा बोध होता है।
12.अपनी जागरूकता का विस्तार करो। अन्य प्राणियों के शरीर में अपनी जागरूकता का विस्तार करके महसूस करो कि वे क्या सोचते हैं। अपने शरीर की जरूरतों को एक तरफ छोड़ दो।- शिवसूत्र
धर्म संसार /शौर्यपथ /इस साल माघ पूर्णिमा 27 फरवरी 2021 (शनिवार) को है। माघ पूर्णिमा के दिन दान और स्नान करने से बत्तीस गुना ज्यादा फल की प्राप्ति होती है। इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है। भगवान विष्णु और चंद्रदेव को समर्पित पू्र्णिमा तिथि के दिन किए जाते हैं उपाय-
1.माघ मास की पूर्णिमा के दिन किसी पात्र में कच्चा दूध लेकर उसमें चीनी और चावल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
2. धन लाभ के लिए माघ पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए और पूजा स्थान पर 11 कौड़ियां रखकर उनपर हल्दी से तिलक करना चाहिए। इन कौड़ियों को इसी जगह पर रखा रहने दें। अगली सुबह इन कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने वाली जगह पर रख दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
3. वैवाहिक जीवन में खुशहाली लाने के लिए माघ पूर्णिमा के दिन व्रत रखने के साथ ही चंद्रोदय के बाद पति-पत्नी को मिलकर गाय के दूध से चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन विद्यालय के अध्यक्ष और प्रबंध समिति द्वारा किया जाएगा। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्राचार्यों और शिक्षकों के पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाने को भी स्वीकृति प्रदान की है। इस संबंध में इन स्कूलों में पदस्थ प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए प्रतिनियुक्ति की सेवा शर्तें भी जारी कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज जारी आदेश के अनुसार प्रतिनियुक्ति की अवधि सामान्यतः 4 वर्ष की होगी। स्कूल संचालन समिति की अनुशंसा पर प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाई जा सकेगी। प्रतिनियुक्ति की अवधि में वृद्धि अथवा कमी करने का अधिकार राज्य शासन को होगा।
स्कूल शिक्षा विभाग से जारी आदेशानुसार प्रदेश में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल से संबंधित कर्मचारी के आवेदन, सहमति के आधार पर राज्य शासन द्वारा अनापत्ति दिए जाने के बाद प्रतिनियुक्ति आदेश शाला संचालन समिति द्वारा जारी किए जाएंगे। प्रतिनियुक्ति की अवधि वर्तमान पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से शुरू होकर आगामी 4 वर्ष के लिए होगी। प्रतिनियुक्ति अवधि में वृद्धि अथवा कमी करने का अधिकार राज्य शासन को होगा। प्रतिनियुक्ति वित्त विभाग के आदेश अनुसार उसके पद के समकक्ष वेतनमान के पद अथवा आगामी पदोन्नति, क्रमोन्नति वेतनमान के समकक्ष वेतनमान के पद पर की जा सकेगी। प्रतिनियुक्ति भत्ता वित्त विभाग के आदेश के अनुरूप दिया जाएगा। अपनी बाह्य सेवा के दौरान प्रतिनियुक्ति सेवक बाह्य नियोजक से उस दर पर महंगाई भत्ता और अंतरिम राहत प्राप्त करेगा जो मूल नियोजक के नियमों के तहत समय-समय पर दिया जाता है।
प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ शासकीय सेवकों के सेवा उल्लेख का संधारण मूल विभाग द्वारा किया जाएगा। प्रतिनियुक्ति सेवक उस अवकाश नियम के अधीन रहेंगे, जो उनकी उस सेवा पर लागू होते हो, जिस सेवा के वे हों। बाह्य सेवा के दौरान लिए गए अवकाश का वेतन बाह्य नियोजक द्वारा ही भुगतान किया जाएगा और बाह्य सेवा के दौरान या उसके अंत में अवकाश अवधियों के लिए किसी भी क्षतिपूर्ति भत्ते का संपूर्ण व्यय संबंधित नियोजक द्वारा वहन किया जाएगा। बाह्य नियोजन प्रतिनियुक्ति सेवक को उनके अधीन सेवा के दौरान और सेवा समाप्ति पर किसी भी निर्योग्यता अवकाश के संबंध में छुट्टी उपलब्धि के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा। प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त कर्मचारी की वरिष्ठता का निर्धारण मूल विभाग में प्रतिवर्ष प्रकाशित होने वाली पदक्रम सूची में यथास्थान दर्शाया जाएगा। प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ कर्मचारी की सेवाएं राज्य शासन आवश्यकतानुसार कभी भी वापस ले सकता है। प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ कर्मचारियों को उनकी सेवा में अनुज्ञेय अवकाश के अलावा अन्य कोई अवकाश की पात्रता नहीं होगी।
प्रतिनियुक्ति सेवक को बाह्य सेवा की अवधि मूल नियोजक के अधीन पद का कार्यभार छोड़ने की अवधि की तिथि से प्रारंभ होगी और मूल नियोजन के अधीन पद का कार्यभार उन्हें ग्रहण करने की तारीख से समाप्त होगी। यदि प्रतिनियुक्ति सेवक की प्रतिनियुक्ति अवधि में मृत्यु हो जाती है तो प्रतिनियुक्ति अवधि के लिए वित्त विभाग के नियमानुसार अनुग्रह अनुदान का भुगतान बाह्य नियोजक को करना होगा। प्रतिनियुक्ति अवधि में प्रतिनियुक्ति सेवक को अवकाश के समर्पण और नगदीकरण की पात्रता नहीं होगी। मूल नियोजक के नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति सेवक से प्रतिनियुक्ति की अवधि में सामान्य भविष्य निधि और फेमिली बेनीफीट फंड, ग्रुप इंश्योरेन्स स्कीम के अंतर्गत निर्धारित किश्त की राशि वसूल की जाएगी। प्रतिनियुक्ति की अवधि में बाह्य नियोजक द्वारा इन आदेशों में उल्लेखित वेतन भत्ते तथा सुविधाओं के अतिरिक्त अन्य कोई सुविधा प्रतिनियुक्ति सेवक को बिना राज्य शासन की पूर्वानुमति के नहीं दी जाएगी। बाह्य नियोजक प्रतिनियुक्ति की निर्धारित अवधि के पूर्व प्रतिनियुक्ति सेवक की सेवाएं राज्य शासन की सहमति के बिना वापस नहीं लौटाई जाएंगी। यदि प्रतिनियुक्ति सेवक की प्रतिनियुक्ति की निर्धारित समय अवधि में वृद्धि आवश्यक हो तो बाह्य नियोजक उसको निर्धारित अवधि की समाप्ति के न्यूनतम एक माह पूर्व अपनी अनुशंसा अग्रेसित करेगा।
सेहत /शौर्यपथ /स्वस्थ रहने के लिए हम कितनी ही कोशिशें करते हैं। योग, एक्सरसाइज, मॉर्निंग वॉक और डाइटिंग ये कुछ टिप्स हैं जिन्हें ज्यादातर लोग फॉलो करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में खान-पान को लेकर ऐसी कई बातें लिखी गई हैं जिनका पालन करने से न सिर्फ आपकी इम्युनिटी मजबूत होती है बल्कि इससे आपका वेट भी कंट्रोल रहता है। आइए, जानते हैं आयुर्वेद के वे नियम क्या हैं-
स्टीम या हाफ बॉयल करके खाएं सब्जियां
अगर आप सब्जियों को पूरी तरह या ज्यादा गला कर खाते हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आप उसे बहुत ज्यादा न पकाएं। ऐसा करने से उनके पोषक तत्व कम होते हैं। लेकिन अगर आप उनको कच्चा छोड़ देंगे, तो ये आपकी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। खाना बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि आप सब्जियों को न तो ज्यादा पकाएं न ही उन्हें कच्चा छोड़ें।
कच्चे मसालों को भूनकर और पीसकर करें इस्तेमाल
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खड़े मसालों को तवे पर भूनकर और पीसकर इसका इस्तेमाल करें। खासतौर पर सर्दियों या बरसात के मौसम में अदरक को तवे पर भून कर खा सकते है।
छानकर न करें आटे का इस्तेमाल
गेंहूं में फाइबर होता है। लेकिन इसका ज्यादातर फाइबर ब्राउन वाले भाग में होता है। तो आप जब भी आटा इस्तेमाल करें इस बात का ध्यान रखें कि इसे बिना छाने इस्तेमाल करें। चोकर वाला आटा सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।
ठंडा भोजन करने से कमजोर होती है पाचन क्रिया
ठंडा खाना खाने से बचें। यह आपके पाचन को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही इस बात का ध्यान भी रखें कि पूरा पेट भर कर कभी न खाएं। आयुर्वेद के अनुसार भरपेट न खाने से भोजन आसानी से पचता है।
मीठा कम खाएं
आयुर्वेद के अनुसार मीठा कम खाना चाहिए। आप मीठे के विकल्प के तौर पर शहद या गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह आपको डायबिटीज जैसे रोगों से बचा सकता है।
खाना खजाना /शौर्यपथ /खाने में सोया चिली बहुत ही स्वादिष्ट होता है। इसे आप आसानी से घर में बना सकती है। यह बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी बहुत पसंद आता है आइए जानते हैं कैसे बनाते है सोया चिली:
सामग्री :
सोयाबीन नगेट्स - 100 ग्राम
लहसुन पेस्ट- 1/2 चम्मच
तेल- 2 चम्मच
बारीक कटा हरा प्याज- 1 कप
कटी हुई हरी मिर्च- 2
सोया सॉस- 2 चम्मच
विनिगर- 2 चम्मच ’
नमक- स्वादानुसार
विधि :
सोयाबीन नगेट्स को आधे घंटे के लिए पानी में भिगोने के बाद पानी निचोड़ दें। एक बाउल में सोया नगेट्स, एक चम्मच नमक और लहसुन का पेस्ट डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें हरे प्याज को डालकर थोड़ी देर भूनें। हरी मिर्च डालें और कुछ सेकेंड पकाएं। अब कड़ाही में बचा हुआ नमक, सोया सॉस, विनिगर और सोयाबीन डालें, अच्छी तरह से मिलाएं। तेज आंच पर दो-चार मिनट पकाएं और सर्व करें।
शौर्यपथ /मां बनने के बाद सबसे बड़ी समस्या होती है बढ़े हुए वजन को कम करना। इसके अलावा भी डिलीवरी के बाद मां को कई तरह की परेशानियां होती हैं। जैसे शरीर में दर्द या कमजोरी महसूस होना। ऐसे में बहुत जरूरी है कि मां और बच्चे की देखभाल के साथ उनकी डाइट का भी ख्याल रखा जाए।आज हम आपको अजवाइन के ऐसे देसी लड्डू की रेसिपी बता रहे हैं, जो डिलीवरी के बाद बच्चे और मां दोनों के लिए बेहद लाभदायक है।अजवाइन में आयरन, सोडियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए और विटामिन सी पाया जाता है, जो हमारी त्वचा और शरीर दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर भी होता है जो पाचन क्रिया को ठीक रखने में मदद करता है।
सामग्री :
अजवाइन के लड्डू बनाने के लिए 1 किलो अजवाइन पिसी हुई, डेढ़ किलो गेहूं के आटे, 250 ग्राम गोंद, 1 सूखा नारियल कटा हुआ, देसी चीनी या गुड़ और आवश्यकतानुसार देसी घी की जरूरत होती है।
अजवाइन के लड्डू ऐसे बनाएं :
गैस पर कढ़ाई रखें और उसे गर्म होने दें।
अब कढ़ाई में 1 बड़ा चम्मच घी डालें और धीमी आंच पर घी को गर्म होने दें।
इसके बाद घी में गोंद डालें और इसे अच्छी तरह से भूनने के बाद किसी खाली बर्तन में निकाल लें।
अब गर्म-गर्म ही गोंद को पीस लें।
दोबारा कढ़ाई को गर्म करके उसमें घी डालें।
अब आटा डाल दें और इसको तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि उसमें से खुशबू न आने लगे।
फिर इसमें गोंद और पिसा हुआ नारियल डालें।
इसमें पिसी हुई अजवाइन डालकर आटे के साथ मिला दें।
ठंडा होने पर इसमें चीनी या गुड़ डाल दें
चीनी मिलाने से अजवाइन का तीखापन कम हो जाता है।
अब इस चूरमे से लड्डू बना लें।
अजवाइन के लड्डू खाने के फायदे
-अजवाइन महिलाओं को प्रसव के बाद होने वाली पीड़ा से राहत दिलाने का सबसे अच्छा उपाय है। इसमें एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं जो प्रसव के बाद होने वाले दर्द को दूर करते हैं।
-अजवाइन मां और बच्चे दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
-यह कफ और बलगम को भी ठीक करती है और सर्दी, जुकाम से बचाती है।
-अजवाइन का पानी नियमित रूप से पीने से शरीर से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। अजवाइन डिलीवरी के बाद शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के गुण रखती है।
-इसमें कुछ ऐसे गुण होते हैं जो स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के दूध को और पौष्टिक बनाते हैं।
-गर्भावस्था के बाद महिलाओं को हमेशा वजन बढ़ने की शिकायत होती है जिसे अजवाइन से कम किया जा सकता है।
-अक्सर प्रसव के बाद महिलाओं को पीठ और पैरों में दर्द की परेशानी होती है, अजवाइन खाने से इस दर्द में राहत मिलती है।
धर्म संसार /शौर्यपथ /हम द्वार के आसपास स्वस्तिक बनाकर शुभ और लाभ लिखते हैं। आखिर यह शुभ लाभ क्यों लिखते हैं और इनका भगवान शिव या शंकरजी से क्या संबंध है यह बहुत ही कम लोग जानते होंगे। आओ आज हम बताते हैं कि इसका रहस्य क्या है।
शिवपुत्र गणेशजी को देवगणों का अधिपति नियुक्त किया गया है। गणेशजी की बहन का नाम अशोक सुंदरी हैं और उनके भाई का नाम कार्तिकेय है। दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ ऋग्वेद में भी भगवान गणेशजी का जिक्र है। ऋग्वेद में 'गणपतिÓ शब्द आया है। यजुर्वेद में भी ये उल्लेख है।
दरअसल, भारतीय धर्म और संस्कृति में भगवान गणेशजी सर्वप्रथम पूजनीय और प्रार्थनीय हैं। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। कोई उनकी पूजा के बगैर कार्य शुरू कर देता है तो किसी न किसी प्रकार के विघ्न आते ही हैं। सभी धर्मों में गणेश की किसी न किसी रूप में पूजा या उनका आह्वान किया ही जाता है। गणेशजी की पूर्ति या चित्र के आसपास रिद्धि सिद्धि और शुभ लाभ क्यों लिखा जाता है यह कई लोग जानते होंगे।
दरअसल विघ्ननाशक की ऋद्धि और सिद्धि नामक दो पत्नियां हैं जो प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्रियां हैं। सिद्धि से 'क्षेमÓ और ऋद्धि से 'लाभÓ नाम के दो पुत्र हुए। लोक-परंपरा में इन्हें ही शुभ-लाभ कहा जाता है। कहते हैं शिवपुत्र गणेश के भाई कार्तिकेय ने विवाह नहीं किया था।
शुभ और लाभ गणेशजी के पुत्र होने के नाते भगवान शंकर के पोते हुए यानि की शिवजी शुभ और लाभ के दादाजी हुए।
धर्म संसार /शौर्यपथ / महालक्ष्मी ने क्यों धरा बेलवृक्ष का रूप, शिव ने क्यों माना बिल्ववृक्ष को शिवस्वरूप ? नारदजी ने एक बार भोलेनाथ की स्तुति कर पूछा – प्रभु आपको प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम और सुलभ साधन क्या है. हे त्रिलोकीनाथ आप तो निर्विकार और निष्काम हैं, आप सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं। फिर भी मेरी जानने की इच्छा है कि आपको क्या प्रिय है?
शिवजी बोले- नारदजी वैसे तो मुझे भक्त के भाव सबसे प्रिय हैं, फिर भी आपने पूछा है तो बताता हूं
मुझे जल के साथ-साथ बिल्वपत्र बहुत प्रिय है।जो अखंड बिल्वपत्र मुझे श्रद्धा से अर्पित करते हैं मैं उन्हें अपने लोक में स्थान देता हूं।
नारदजी भगवान शंकर औऱ माता पार्वती की वंदना कर अपने लोक को चले गए। उनके जाने के पश्चात पार्वतीजी ने शिवजी से पूछा- हे प्रभु मेरी यह जानने की बड़ी उत्कट इच्छा हो रही है कि आपको बेलपत्र इतने प्रिय क्यों है। कृपा करके मेरी जिज्ञासा शांत करें।
शिवजी बोले- हे शिवे! बिल्व के पत्ते मेरी जटा के समान हैं।उसका त्रिपत्र यानी तीन पत्ते, ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद हैं। शाखाएं समस्त शास्त्र का स्वरूप हैं। बिल्ववृक्ष को आप पृथ्वी का कल्पवृक्ष समझें जो ब्रह्मा-विष्णु-शिवस्वरूप है।
हे पार्वती! स्वयं महालक्ष्मी ने शैल पर्वत पर बिल्ववृक्ष रूप में जन्म लिया था इस कारण भी बेल का वृक्ष मेरे लिए अतिप्रिय है। महालक्ष्मी ने बिल्व का रूप धरा, यह सुनकर पार्वतीजी कौतूहल में पड़ गईं।
पार्वतीजी कौतूहल से उपजी जिज्ञासा को रोक न पाई।उन्होंने पूछा- देवी लक्ष्मी ने आखिर बिल्ववृक्ष का रूप क्यों लिया? आप यह कथा विस्तार से कहें।
भोलेनाथ ने देवी पार्वती को कथा सुनानी शुरू की। हे देवी, सत्ययुग में ज्योतिरूप में मेरे अंश का रामेश्वर लिंग था। ब्रह्मा आदि देवों ने उसका विधिवत पूजन-अर्चन किया था।
इसका परिणाम यह हुआ कि मेरे अनुग्रह से वाणी देवी सबकी प्रिया हो गईं। वह भगवान विष्णु को सतत प्रिय हो गईं।
मेरे प्रभाव से भगवान केशव के मन में वाग्देवी के लिए जितनी प्रीति उपजी हुई वह स्वयं लक्ष्मी को नहीं भाई।
लक्ष्मी देवी का श्रीहरि के प्रति मन में कुछ दुराव पैदा हो गया। वह चिंतित और रूष्ट होकर चुपचाप परम उत्तम श्रीशैल पर्वत पर चली गईं।
वहां उन्होंने तप करने का निर्णय किया और उत्तम स्थान का चयन करने लगीं।
महालक्ष्मी ने उत्तम स्थान का निश्चय करके मेरे लिंग विग्रह की उग्र तपस्या प्रारम्भ कर दी। उनकी तपस्या कठोरतम होती जा रही थी।
हे परमेश्वरी कुछ समय बाद महालक्ष्मी जी ने मेरे लिंग विग्रह से थोड़ा उध्र्व में एक वृक्ष का रूप धारण कर लिया।अपने पत्तों और पुष्प द्वारा निरंतर मेरा पूजन करने लगीं।
इस तरह महालक्ष्मी ने कोटि वर्ष ( एक करोड़ वर्ष) तक घोर आराधना की। अंतत: उन्हें मेरा अनुग्रह प्राप्त हुआ।
मैं वहां प्रकट हुआ और देवी से इस घोर तप की आकांक्षा पूछकर वरदान देने को तैयार हुआ।
महालक्ष्मी ने मांगा कि श्रीहरि के हृदय में मेरे प्रभाव से वाग्देवी के लिए जो स्नेह हुआ है वह समाप्त हो जाए।
शिवजी बोले- मैंने महालक्ष्मी को समझाया कि श्रीहरि के हृदय में आपके अतिरिक्त किसी और के लिए कोई प्रेम नहीं है। वाग्देवी के प्रति उनका प्रेम नहीं अपितु श्रद्धा है।
यह सुनकर लक्ष्मीजी प्रसन्न हो गईं और पुन: श्रीविष्णु के ह्रदय में स्थित होकर निरंतर उनके साथ विहार करने लगी।
हे पार्वती! महालक्ष्मी के हृदय का एक बड़ा विकार इस प्रकार दूर हुआ था। इस कारण हरिप्रिया उसी वृक्षरूपं में सर्वदा अतिशय भक्ति से भरकर यत्नपूर्वक मेरी पूजा करने लगी।
हे पार्वती इसी कारण बिल्व का वृक्ष, उसके पत्ते, फलफूल आदि मुझे बहुत प्रिय है। मैं निर्जन स्थान में बिल्ववृक्ष का आश्रय लेकर रहता हूं।
बिल्ववृक्ष को सदा सर्वतीर्थमय एवं सर्वदेवमय मानना चाहिए. इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। बिल्वपत्र, बिल्वफूल, बिल्ववृक्ष अथवा बिल्वकाष्ठ के चन्दन से जो मेरा पूजन करता है वह भक्त मेरा प्रिय है।
बिल्ववृक्ष को शिव के समान ही समझो।वह मेरा शरीर है. जो विल्व पर चंदन से मेरा नाम अंकित करके मुझे अर्पण करता है मैं उसे सभी पापों से मुक्त करके अपने लोक में स्थान देता हूं।
हे देवी उस व्यक्ति को स्वयं लक्ष्मीजी भी नमस्कार करती हैं जो बिल्व से मेरा पूजन करते हैं। जो बिल्वमूल में प्राण छोड़ता है उसको रूद्र देह प्राप्त होता है।
मेरी पूजा के लिए बेल के उत्तम पत्तों का ही प्रयोग करना चाहिए.
धर्म संसार /शौर्यपथ /भगवान विश्वकर्मा की पूजा के दिन कुछ ऐसे भी कार्य हैं जिन्हें करना वर्जित माना गया है। आइए जानते हैं कि कौन से वो कार्य हैं जो विश्वकर्मा पूजा के दिन नहीं करना चाहिए और कौन-कौन से कार्य करना चाहिए।
- विश्वकर्मा पूजा पर भूलकर भी औजारों को इधर-उधर न फेंके नहीं तो आपको विश्वकर्मा भगवान के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।
1- इस दिन आप न तो स्वयं अपने औजारों का इस्तेमाल करें और न हीं किसी और को करने दें।
2- जिन वस्तुओं का आप अपने जीवन में रोज प्रयोग करते हैं उनकी विश्वकर्मा पूजा पर साफ-सफाई करना न भूलें।
3- अगर आप विश्वकर्मा भगवान की मूर्ति रखकर उनकी पूजा कर रहे हैं तो अपने औजारों को पूजा में रखना न भूलें।
4- अगर आपकी कोई फैक्ट्री है तो विश्वकर्मा पूजा के दिन उनकी पूजा न करना भूलें।
5- जिन लोगों की भी फैक्ट्री आदि है या फिर उनका मशीन से जुड़ा कोई काम है तो उन्हें विश्वकर्मा पूजा के दिन अपनी मशीनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
6- यदि आपके पास कोई वाहन हैं तो आपको विश्वकर्मा पूजा के दिन उसकी साफ-सफाई और पूजा करना नहीं भूलना चाहिए।
7- विश्वकर्मा पूजा के दिन किसी भी पुराने औजार को अपने घर, फैक्ट्री या दुकान से बाहर न फेंकें, ऐसा करना विश्वकर्मा जी का अपमान जाता है।
8- आपको विश्वकर्मा पूजा के दिन भूलकर भी मांस और मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
9- अपने व्यापार की वृद्धि के लिए आपको विश्वकर्मा पूजा के दिन निर्धन व्यक्ति और ब्राह्मण को दान अवश्य देना चाहिए।
खाना खजाना /शौर्यपथ लंच या डिनर के बाद अगर कुछ मीठा खाने का मन है लेकिन कोई झंझट नहीं चाहते तो ट्राई करें ये झटपट बनने वाली ब्रेड रसमलाई रेसिपी। यह खाने में टेस्टी होने के साथ सिर्फ 10 मिनट में बनकर तैयार हो जाती है। तो आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी रेसिपी।
ब्रेड रसमलाई बनाने के लिए सामग्री
-ब्राउन ब्रेड- 4
-2 छोटी चम्मच स्किम्ड मिल्क पाउडर
-4 बड़ी चम्मच फुल क्रीम मिल्क
-3/4 कप गाढ़ा दूध
-जरूरत अनुसार हरी इलायची
-जरूरत अनुसार बादाम
-जरूरत अनुसार पिस्ता
-जरूरत अनुसार केसर
ब्रेड रसमलाई बनाने की विधि-
ब्रेड रसमलाई बनाने के लिए सबसे पहले एक सैंडविच ब्रेड के सभी किनारे काटकर ब्रेड को गोलाई का आकार दें। अब एक पैन में दूध उबाल लें। दूध को उबलते समय लगातार उसे चम्मच से हिलाते रहें ताकि दूध पैन के तले में ना चिपक जाए। दूध को तब तक पकाएं जब तक दूध की मात्रा का एक तिहाई हिस्सा ना बच जाए। अब इस गाढे़ दूध में मिल्क पाउडर डालकर उसे अच्छी तरह से मिलाएं। मिल्क पाउडर को मिलाते समय गैस की आंच धीमी करके इस मिक्सर को 2 से 3 मिनट तक पकाएं।
उसके बाद इसमें कंडेंस मिल्क डालकर अच्छी तरह से मिला लें।अब इस मिश्रण में केसर, इलायची का पाउडर, बारीक कटे बादाम और पिस्ता डालकर पैन में ही इसे अच्छी तरह से मिला लें। इन सभी सामग्रियों को डालने के बाद इस पूरे मिश्रण को गाढ़ा होने तक 4 से 5 मिनट तक तेज आंच में पकाएं। अब कटे हुए ब्रेड को सर्विंग प्लेट में रखें और कंडेंस मिल्क, इलायची पाउडर, बारीक कटे बदाम, पिस्ता सभी के द्वारा तैयार किए गए मिश्रण को इनके ऊपर डालें। आपकी ब्रेड रसमलाई तैयार है। इसे ठंडा होने के बाद सर्व करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
