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सेहत /शौर्यपथ /आंखों की तमाम समस्याओं के लिए लोग स्मार्टफोन को दोषी ठहराते हैं, लेकिन अब यही स्मार्टफोन आपके लिए मददगार भी साबित हो सकते हैं। दरअसल, शोधकर्ताओं ने बताया कि साउंडवेव्स की मदद से आंखों में ग्लूकोमा के शुरुआती लक्षणों को पहले भांप लिया जा सकता है, जिससे कि अंधेपन और आंखों की अन्य गंभीर समस्याओं को होने से रोकने में मदद मिल सकती है।
इंजीनियरिंग रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि ब्रिटेन के बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने साउंडवेव्स और एक आई मॉडल का इस्तेमाल कर अपने प्रयोग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
विश्वविद्यालय में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप के निदेशक खामिस एससा ने कहा कि हमने किसी वस्तु के आंतरिक दबाव और उसके ध्वनिक प्रतिबिंब गुणांक के बीच संबंध की खोज की है। आंखों की बनावट और साउंडवेव्स के प्रति इनकी प्रतिक्रिया का अधिक अध्ययन करने पर हमने पाया कि घर बैठे आईओपी का निर्धारण करने के लिए संभावित रूप से स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
बता दें कि ग्लूकोमा ऑप्टिक सिस्टम की एक बीमारी है, जिससे कि दुनियाभर में 7.96 करोड़ लोग प्रभावित हैं। अगर सही से इसका इलाज न करवाया जाए, तो इसके और भी कई गंभीर नुकसान हैं। ग्लूकोमा के अधिकतर मामलों में सही इलाज व नियंत्रण से अंधेपन को रोका जा सकता है।
रोग का जल्द पता लगा सकता साउंडवेव्स
मोबाइल मेजरमेंट मेथड के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साउंडवेव्स ग्लूकोमा इंट्राओकुलर प्रेशर (आईओपी) की बढ़ती मात्रा का पता लगाने में मददगार है, जिससे रोग के होने का पता जल्दी लग जाएगा और इस हिसाब से इसका उपचार भी जल्दी शुरू होगा।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / संगीत हमारे मनोरंजन का साधन है। मगर इसके साथ ही यह मानसिक सेहत का भी भरपूर ख्याल रखने में सक्षम है। संगीत के तमाम लाभों पर पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में हुए एक हालिया अध्ययन में पता चला है कि यह तमाम मानसिक विकारों के उपचार में मददगार साबित हो सकता है। इसमें कोई दोराय नहीं कि संगीत सुनना और नृत्य करना चिकित्सकीय रूप से लाभकारी हो सकता है। मानसिक और भावनात्मक सेहत के लिए भी यह प्रभावी है।
सभी आयु वर्ग के लिए समान रूप से प्रभावीः
संगीत के लाभों पर हुए हालिया शोध में यह साबित हुआ है कि संगीत चिकित्सा के क्षेत्र को बेहतर बना सकता है। इसका इस्तेमाल शारीरिक, सामाजिक, संज्ञानात्मक और भावनात्मक स्वास्थ्य की बेहतरी में हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूजिक थैरेपी सभी आयु वर्ग और स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए लाभकारी है। चाहें वह कोई वाद्य यंत्र बजाते हों या किसी संगीत कौशल में माहिर हों।
संगीत चिकित्सक ब्रायन हैरिस का कहना है कि मस्तिष्क को संगीत की बराबर धरती पर कोई दूसरी चीज प्रेरित और उत्तेजित नहीं कर सकती। संगीत को न्यूरोप्लास्टी में सहायता करने में भी कारगर पाया गयाहै। पुराने कनेक्शन को मजबूत करने व नए कनेक्शन को बनाने में भी मस्तिष्क को मजबूत करने के मामले में संगीत कारगर है।
क्या है म्यूजिक थैरेपी ?
पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में संगीत चिकित्सक जेनिफर बोर्गवर्ड के अनुसार संगीत चिकित्सा पद्धति में निम्मलिखति प्रकार शामिल हैः
- गीतलेखन
- गानों पर प्रस्तुति
- संगीत सुनना
- वाद्य यंत्र बजाना
व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से इनमें से किसी का इस्तेमाल किया जा सकता है। संगीत का साथ स्मृति, सीखने की प्रक्रिया, भाषा और तर्क से संबंधित मुद्दों के प्रभाव को कम कर सकता है। अगर किसी को स्ट्रोक के कारण चलने में दिक्कत है तो उपचार उनके लिए मददगार हो सकता है।
शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्रभावीः
संगीत का शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से सेहत पर सकारात्मक प्रभाव होता है। यह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार में अधिक लाभकारी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि संगीत, डिमेंशिया, अस्थमा, तेज दर्द, ऑटिज्म, चिंता,अवसाद, स्ट्रोक, पार्किंसन, सिजोफ्रेनिया, सामाजिक व्यवहार, अल्जाइमर आदि रोगों में मददगार है।
गैर-पेशवरों के लिए भी फायदेमंदः
विशेषज्ञों का कहना है कि यहां तक कि अगर किसी को बोलने या अभिव्यक्ति में दिक्कत होती है तो इस मामले में भी संगीत बेहतर विकल्प है। संगीत चिकित्सा में हमारे पास आंतरिक अनुभवों को व्यक्त करने, नए तरीकों से एक-दूसरे से जुड़ने, और हमारी सहज रचनात्मकता को बेहतर करने का अच्छा अवसर है।, जो सभी एक चिकित्सीय संबंध के संदर्भ में है। विशेषज्ञों का कहना है कि संगीत का जितना लाभ वाद्ययंत्र वादकों एवं संगीतकारों को होता है, उतना ही लाभ नॉन म्यूजिशियन को भी होता है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / जैसे चंद्रमा का और सूर्य का प्रभाव पड़ता है उसी तरह प्रत्येक ग्रह का धरती पर कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ असर या प्रभाव पड़ता है। चंद्र और सूर्य का प्रभाव तो हमें प्रत्येक्ष दिखाई देता है परंतु अन्य ग्रहों का प्रभाव नहीं दिखाई देता। चंद्रमा के कारण धरती का जल प्रभावित होता है और मंगल के कारण समुद्र के भीतर मूंगा उत्पन्न होता है। इसी तरह प्रत्येक ग्रह के कारण किसी न किसी पदार्थ की उत्पत्ति प्रभावित होती है। सूर्य की किरणे एक जैसी नहीं होती है। प्रत्येक मौसम में उसका प्रभाव अलग-अलग होता है। इसी तरह चंद्र का अमावस्य पर अलग और पूर्णिमा के दिन अलग प्रभाव होता है।
यह सही है कि सूर्य और चंद्र का प्रकाश इस धरती के एक विस्तृत भू-भाग पर एक-सा पड़ता है, लेकिन उसका प्रभाव भिन्न-भिन्न रूप में देखा जा सकता है। कहीं पर सूर्य के प्रकाश के कारण अधिक गर्मी है तो किसी ठंडे इलाके में उसके प्रकाश के कारण जीव-जंतुओं को राहत मिली हुई है। सूर्य का प्रकाश तो एक समान ही धरती पर प्रकाशित हो रहा है लेकिन धरती का क्षेत्र एक जैसा नहीं है। उसी प्रकाश से कुछ जीव मर रहे हैं तो कुछ जीव जिंदा हो रहे हैं। यदि हम यह मानें की एक क्षेत्र विशेष पर एक-सा प्रभाव होता है तो यह भी गलत है। मान लो 100-200 किलोमीटर के एक जंगल में तूफान उठता है तो उस तूफान के चलते कुछ पेड़ खड़े रहते हैं और कुछ उखड़ जाते हैं, कुछ झुककर तुफान को निकल जाने देते हैं। इसी तरह जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है तो कुछ जीवों को इससे राहत मिलती है, कुछ जीव उससे बीमार पड़ जाता हैं और कुछ की उससे मृत्यु हो जाती है। इसी तरह प्रत्येक ग्रहों का प्रभाव भी होता है।
शनि का प्रभाव : वायव्य दिशा से शनि का प्रभाव ज्यादा पड़ता है। शनि के कारण रंग श्याम या नीला है। भैंसा, गीद्ध और कौवा इससे प्रभावित हैं। लौहा और फौलाद की उत्पत्ति शनि के कारण ही है। वस्त्रों में जुलाब और जूता, वृक्षों में कीकर, आक और खजूर का वृक्ष, राशियों में मकर और कुंभ। नक्षत्रों में अनुराधा, पुष्य, उत्तरा और भाद्रपद पर प्रभाव। शरीर के अंगों में दृष्टि, बाल, भवें और कनपटी। व्यापार में लोहे से संबंधित कार्य, लुहार, तरखान और मोची। मूर्ख, अक्खड़ और कारिगर इससे प्रभावित होते हैं। देखना भालना, चालाकी, मौत और बीमारी देने वाला शनि जादूमंत्र देखने दिखाने की शक्ति, मंगल के साथ हो तो सर्वाधिक बलशाली होता है।
उल्लेखनीय है कि शनि का किसी मनुष्य के भाग्य या कर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मनुष्य अपने कही कर्मों और भाग्य से प्रभावित होता रहता है। शनि का प्रभाव धरती पर उसी प्रकार से रहता है जिस प्रकार से चंद्र और सूर्य का प्रभाव रहता है।
ऐसा कहते हैं कि शरीर में जल तत्व की कमी के कारण कई रोग उत्पन्न होते हैं और उसी तरह सूर्य में विटामिन डी रहता है जिसकी कमी के चलते भी कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती है। उसी तरह प्रत्येक ग्रह का इस धरती के साथ ही हमारे शरीर पर भी बहुत सूक्ष्म रूप से प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष में कहा गया है कि शनि के प्रभाव के कारण अच्छा भी होता है और बुरा भी।
बुरे में कहते हैं कि मुख्य रूप से समय से पूर्व ही आंखें कमजोर होने लगती हैं और भवों के बाल झड़ जाते हैं। कनपटी की नसों में दर्द बना रहता है। समय पूर्व ही सिर के बाल झड़ जाते हैं। फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और तब सांस लेने में तकलीफ होती है। हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, तब जोड़ों का दर्द भी पैदा हो जाता है। रक्त की कमी और रक्त में बदबू बढ़ जाती है। पेट संबंधी रोग या पेट का फूलना। सिर की नसों में तनाव। अनावश्यक चिंता और घबराहट बढ़ जाती है। हालांकि इस सभी बातों की वैज्ञानिक रूप से कभी पुष्टि नहीं हुई है।
शनि ग्रह की पीड़ा शांत करने के लिए पहनते हैं ये 5 तरह के रत्न
शनि ग्रह को बलवान करने, शनि की साढ़े साती, शनि की ढैय्या, दशा, महादशा या अन्तर्दशा में या शनि संबंधी किसी भी प्रकार की पीड़ा को शांत करने के लिए शनि के रत्न पहने जाते हैं। रत्नों के अलावा भी और भी कुछ पहना जाता है। आओ जानते हैं सभी के संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
1. नीलम : शनि के लिए अक्सर नीलम रत्न को पहने की सलाह दी जाती। संस्कृत में नीलम को इन्द्रनील, तृषाग्रही नीलमणि भी कहा जाता है। नीलम के प्रकार- 1. जलनील, 2. इन्द्रनील।
2. नीलम के उपरत्न : लीलिया, जमुनिया, नीली, नीला टोपाज, लाजवर्त, सोडालाइट, तंजनाईट आदि।
3. नीलमणि : यह नीलम की ही तरह होती है।
4. लोहे का छल्ला : जब बुध और राहु हो तो छल्ला बेजोड़ खालिस लोहे का होगा। मतलब यह कि तब लोहे का छल्ला अंगुली में धारण करना चाहिए।
5. घोड़े की नाल : यह भी लोहे का छल्ला ही होता है। बस फर्क यह होता है कि यह घोड़े की नाल के लोहे से बना छल्ला होता है जो कि ज्यादा प्रभावकारी माना गया है।
उल्लेखनीय है कि शनि का रत्न या छल्ला शनि की अंगुली में पहना जाता है। शनि की अंगुली मध्यमा अर्थात सबसे बड़ी वाली अंगुली होती है।
शनि का वक्री होना और उससे बचने के उपाय
अधिकतर लोग शनि भगवान से डरते हैं इसी कारण वे उनके मंदिर में उनकी आराधना करने जाते हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने शनिदेव और हनुमानजी दोनों को ही साध रखा है। आओ जानते हैं कि शनिदेव की वक्री दृष्टि किस राशि पर पड़ती है और क्या है बचने के उपाय।
शनि की वक्र दृष्टि :
1. सूर्य और चंद्र को छोड़कर सभी ग्रह वक्री होते हैं। वक्री अर्थात उल्टी दिशा में गति करने लगते हैं। जब यह वक्री होते हैं तब इनकी दृष्टि का प्रभाव अलग होता है। वक्री ग्रह अपनी उच्च राशिगत होने के समतुल्य फल प्रदान करता है। कोई ग्रह जो वक्री ग्रह से संयुक्त हो उसके प्रभाव मे मध्यम स्तर की वृद्धि होती है। उच्च राशिगत कोई ग्रह वक्री हो तो, नीच राशिगत होने का फल प्रदान करता है।
इसी प्रकार से जब कोई नीच राशिगत ग्रह वक्री होता जाय तो अपनी उच्च राशि में स्थित होने का फल प्रदान करता है। इसी प्रकार यदि कोई उच्च राशिगत ग्रह नवांश में नीच राशिगत होने तो तो नीच राशि का फल प्रदान करेगा। कोई शुभ अथवा पाप ग्रह यदि नीच राशिगत हो परन्तु नवांश मे अपनी उच्च राशि में स्थित हो तो वह उच्च राशि का ही फल प्रदान करता है।
2. इस ग्रह की दो राशियां है- पहली कुंभ और दूसरी मकर। यह ग्रह तुला में उच्च और मेष में नीच का होता है। जब यह ग्रह वक्री होता है तो स्वाभाविक रूप से तुला राशि वालों के लिए सकारात्मक और मेष राशि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। लेकिन शनि जब अन्य राशियों में भ्रम करता है तो उसका अलग असर होता है। यदि वह मेष की मित्र राशि धनु में भ्रमण कर रहा है तो मेष राशि वालों पर नकारात्मक असर नहीं डालेगा। केंद्र में शनि (विशेषकर सप्तम में) अशुभ होता है। अन्य भावों में शुभ फल देता है। प्रत्येक ग्रह अपने स्थान से सप्तम स्थान पर सीधा देखता है। सातवें स्थान के अलावा शनि तीसरे और दसवें स्थान को भी पूर्ण दृष्टि से देखता है।शनि जिस राशि में है वहां से उक्त स्थान को वक्री देखता है।
उपाय :1. शनिग्रह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सर्वप्रथम हनुमानजी की पूजा करें और फिर भगवान भैरव की उपासना करें।
2. शनि की शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं।
3. तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गौ, और जूता दान देना चाहिए।
4. कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावे। छायादान करें, अर्थात कटोरी में थोड़ा-सा सरसो का तेल लेकर अपना चेहरा देखकर शनि मंदिर में अपने पापों की क्षमा माँगते हुए रख आएं।
5. दांत साफ रखें। नशा न करें। पेट साफ रखें। अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों से अच्छा व्यवहार रखें।
लाल किताब में शनि ग्रह के उपाय :
1. लाल किताब के अनुसार शनि ग्रह को शुभ करने के लिए सर्वप्रथम भगवान भैरव की उपासना करें।
2. भैरव महाराज को कच्चा दूध चढ़ाएं।
3. भैरव महाराज के समक्ष शराब छोड़कर उन्हें शराब अर्पित करने से भी शनि के शुभ प्रभाव प्रारंभ हो जाते हैं।
4. कौवे या कुत्ते को प्रतिदिन रोटी खिलाने,
5. छाया दान करने और अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों से अच्छा व्यवहार रखकर उन्हें दान करने से भी शनि ग्रह के शुभ प्रभाव प्रारंभ हो जाते हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ /धरती के विस्तार और इस पर विविध प्रकार के जीवन निर्माण के लिए देवताओं के भी देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने लीला रची और उन्होंने देव तथा उनके भाई असुरों की शक्ति का उपयोग कर समुद्र मंथन कराया। इस समुद्र मंथन से एक से एक बेशकीमती रत्न निकले थे लेकिन उनमें 14 तरह के रत्न खास थे। जैसे सबसे पहले निकला हलाहल विष, केमधेनु, उच्चैःश्रवा घोड़ा, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, अप्सरा रंभा, लक्ष्मी, चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, शंख, धन्वंतरि वैद्य और अमृत, लेकिन एक और चीज निकली थी और वह थी खास करह की शराब। आओ जानते हैं इसके बारे में संक्षिप्त में।
वारुणी (मदिरा):1. कहते हैं कि समुद्र मंथन से वारुणी नाम से एक मदिरा निकली थी। जल से उत्पन्न होने के कारण उसे वारुणी कहा गया। वरुण का अर्थ जल।
2. वरुण नाम के एक देवता हैं, जो असुरों की तरफ थे। वरुण की पत्नी को भी वरुणी कहते हैं। कहते हैं कि यह समुद्र से निकली मदिरा की देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुई और वही वरुण देवी की पत्नी वारुणी बनी। समुद्र मन्थन करने पर कमलनयनी कन्या के रूप में वारुणी देवी प्रकट हुई थी। कहते हैं कि सुरा अर्थात मदिरा लिए हुए वारुणी देवी समुद्र से प्रकट हुईं। भगवान की अनुमति के बाद इन्हें असुरों को सौंप दिया गया।
3. यह भी कहा जाता है कि कदंब के फलों से बनाई जाने वाली मदिरा को वारुणी कहते हैं। कुछ लोग ताल अथवा खजूर से निर्मित मदिरा को वारुणी मानते हैं। ये समुद्र से निकले वृक्ष भी माने जाते हैं।
4. चरकसंहिता के अनुसार वारुणी को मदिरा के एक प्रकार के रूप में बताया गया है और यक्ष्मा रोग के उपचार के लिए इसे औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।
5. वारुणी नाम से एक पर्व भी होता है और वारुणी नाम से एक खगोलीय योग भी।
6. उल्लेखनीय है कि देवता सुरापान करते थे और असुर मदिरा। कहते हैं कि सुरों द्वारा ग्रहण की जाने वाली हृष्ट (बलवर्धक) प्रमुदित (उल्लासमयी) वारुणी (पेय) इसीलिए सुरा कहलाई। गौरतलब है कि देवता सोमरस भी पीथे जो कि एक शरबत होता था, शराब नहीं।
महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया सहित सांसद, विधायक, महापौर सामूहिक कन्या विवाह में हुए शामिल
कोरोना महामारी के कारण छत्तीसगढ़ में एक साथ 22 जिलों में सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन: सभी जिले वर्चुअली जुड़े राजधानी के समारोह से
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम परिसर में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह समारोह में शामिल हुए। शहनाई की मंगल ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 3 हजार 229 जोड़े परिणय-सूत्र में बंधे। मुख्यमंत्री बघेल ने सभी नव-दम्पत्तियों को आशीर्वाद और उनके सुखमय जीवन के लिए शुभकामनाएं दी। छत्तीसगढ़ में पहली बार 22 जिलों में एक साथ इस योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया, सभी जिले राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह से वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के माध्यम से जुड़े। मुख्यमंत्री बघेल ने विभिन्न जिले के नवविवाहित जोड़ो से बातचीत कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
रायपुर के समारोह में 233 जोड़ों का विवाह सम्पन्न कराया गया। इनमें से तीन क्रिश्चयन और एक मुस्लिम जोड़े का विवाह उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया गया। समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से पांच जोड़ों को उपहार सामग्री और एक हजार रूपए का चेक प्रदान किया। इस अवसर पर कई जोड़ों ने मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी लेकर अपने विवाह को यादगार बना लिया। मुख्यमंत्री ने सामूहिक विवाह में वर-वधुओं को बर्तन प्रदान करने के लिए रायपुर के श्री कमलेश चोपड़ा और हाथ घड़ी प्रदान करने के लिए अंकित गांधी को जनसहयोग हेतु प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 22 जिलों में एक साथ तीन हजार 229 जोड़ों के सामूहिक विवाह के आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया। इसकी घोषणा मंच पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की ओर से श्रीमती सोनल राजेश शर्मा ने की।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, ससदीय सचिव श्रीमती रश्मि आशीष सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, विधायक धरसींवा श्रीमती अनिता योगेन्द्र शर्मा, विधायक एवं छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, महापौर एजाज ढेबर, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल उपस्थित थे। कोण्डागांव के समारोह में राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदेवी नेताम और विधायक मोहन मरकाम भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री बघेल ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि माघी पुन्नी के शुभ अवसर पर वर-वधु विवाह बंधन में बंध रहे हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि एक साथ बराती और घराती दोनों बनने का अवसर मिला है। कन्यादान से बड़ा पुण्य और कोई नही है। माघी पुन्नी के दिन इसका महत्व और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में शादियों में होने वाले फिजूल खर्ची से लोग उकता चुके हैं। इसमें समय के साथ साधन का भी बहुत अपव्यय होता है। सामूहिक विवाह में शामिल होकर माता-पिता के साथ वर-वधुओं ने नया कदम उठाया है, इसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूॅ। अब राज्य सरकार के साथ कई समाज में सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है, जो एक सराहनीय कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह के तहत पहले 15 हजार रूपए का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर हमने 25 हजार रूपए कर दिया। अब कई जाति, धर्म के लोग सहित बड़ी संख्या में आदिवासी लोग भी सामूहिक विवाह में शामिल होने लगे हैं। श्री बघेल ने कहा कि विवाह में विवाहित जोड़े सात वचनों और साथ निभाने का वचन लेते हैं। मैं भी जिंदगी भर अपने परिवार के लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान देने का वचन वर-वधुओं विशेषकर वर से लेना चाहता हूॅ। वर पत्नी के साथ पूरे परिवार के सुपोषण का ध्यान रखे, क्योंकि माता के स्वस्थ होने से आने वाली पीढ़ियां भी स्वस्थ होंगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती भेंड़िया ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के मुखिया व्यस्तम समय में भी स्वयं सभी नवविवाहित वर-वधुओं को आशीर्वाद देने पहुंचे हैं। पिछले वर्ष कोरोना के कारण आयोजन संपन्न नहीं हो पाया था। बड़ी संख्या में कई घर परिवार के लोग आज इस कार्यक्रम में उपस्थित हुए हैं, जिससे सभी का आशीर्वाद सभी नवविवाहितों को मिल रहा है। मंहगाई के समय में कम खर्च में शादी के लिए सामूहिक कन्या विवाह एक अच्छी योजना है। प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत 10 हजार रूपए की बढ़ोतरी कर 25 हजार रूपए का प्रावधान किया है, इसी प्रकार दिव्यांग जोड़ों के लिए विवाह की प्रोत्साहन राशि भी 50 हजार रूपए से बढ़ाकर एक लाख रूपए कर दी है। उन्होंने नव विवाहित जोड़ों को सुखमय नये जीवन की शुभकामनाएं भी दी।
महिला एवं बाल विकास के सचिव श्रीमती शहला निगार ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत इस वर्ष 7 हजार 600 विवाह कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस समारोह में नारी निकेतन रायपुर में निवासरत कन्या का विवाह कराकर उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए 22 जिलों को वर्चुअल मोड से जोड़ा गया है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास की संचालक श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, रायपुर कलेक्टर एस. भारतीदासन सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और वर-वधुओं के परिजन उपस्थित थे।
धर्म संसार /शौर्यपथ /पौराणिक कथाओं के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सीता जी प्रकट हुई थी। इसी खुशी में हर साल सीता जयंती या जानकी जयंती मनाई जाती है। इस साल सीता जयंती 06 मार्च दिन रविवार को मनाई जा रही है। सीता अष्टमी का व्रत सुहागिन स्त्रियों के लिए खास होता है। इस खास दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां खत्म होती हैं। इतना ही नहीं जिन लड़कियों को शादी में बाधा आ रही हो वो भी इस व्रत को रखकर मनचाहे वर की प्राप्ति कर सकती हैं।
सीता जयंती का महत्व-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सीता जयंती का व्रत करने से वैवाहिक जीवन से जुड़े सभी कष्टों का नाश होकर उनसे मुक्ति मिलती है। जीवनसाथी दीर्घायु होता है। साथ ही इस व्रत को करने से समस्त तीर्थों के दर्शन करने जितना फल भी प्राप्त होता है।
जानकी जयंती का शुभ मुहूर्त-
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ- 05 मार्च को शाम 07 बजकर 54 मिनट पर।
अष्टमी तिथि का समापन- 06 मार्च शनिवार को शाम 06 बजकर 10 मिनट पर।
उदया तिथि- 06 मार्च 2021
कैसे मनाएं सीता अष्टमी पर्व-
1. सीता अष्टमी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत होकर माता सीता और भगवान श्रीराम को प्रणाम कर व्रत करने का संकल्प लें।
2. पूजा शुरू करने से पहले पहले गणपति भगवान और माता अंबिका की पूजा करें और उसके बाद माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा करें।
3. माता सीता के समक्ष पीले फूल, पीले वस्त्र और और सोलह श्रृंगार का सामान समर्पित करें।
4. माता सीता की पूजा में पीले फूल, पीले वस्त्र ओर सोलह श्रृंगार का समान जरूर चढ़ाना चाहिए।
5. भोग में पीली चीजों को चढ़ाएं और उसके बाद मां सीता की आरती करें।
6. आरती के बाद श्री जानकी रामाभ्यां नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
7. दूध-गुड़ से बने व्यंजन बनाएं और दान करें।
8. शाम को पूजा करने के बाद इसी व्यंजन से व्रत खोलें।
सेहत /शौर्यपथ /क्या आपको पता है, कि भारत के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा नहाने वालों लोगों में शुमार हैं। धार्मिक मान्यताओं के चलते औसतन भारतीय तकरीबन रोज नहाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करके वो अपने शरीर को पवित्र करते हैं। बहुत से लोग इसलिए रोज नहाते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि रोज पूजा-पाठ करने के लिए नहाना बेहद जरूरी है। पर असल में हर रोज नहाना आपकी सेहत के लिए भी बहुत जरूरी है।
पर हम जानते हैं कि कुछ लोग इस पवित्रता से परे अपनी बिंदास दुनिया में जीते हैं। उनसे पहले उनके गैजेट्स जाग जाते हैं और उसके बाद उन्हें खुद पता नहीं चलता कि दिन कब आगे बढ़ जाता है। उस पर पल-पल रंग बदलता मौसम, नहाने के मामले में कुछ रह ही जाता है। अगर आप भी उसी गैजेट वाली आलसी दुनिया का हिस्सा हैं, तो जान लीजिए कि नहाने में आलस करना आपकी सेहत के लिए बुरा हो सकता है।
क्या कहते हैं अध्ययन
नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल इनफार्मेशन में प्रकाशित शोध के अनुसार नहाने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। कुछ लोगो पर किये गए इस अध्ययन में हर रोज नहाने से लोगों के दर्द, तनाव और अवसाद जैसे लक्षणों में कमी देखने को मिली। साथ ही नियमित नहाने से त्वचा में भी सुधार देखने को मिला।
यहां हैं हर रोज नहाने के स्वास्थ्य लाभ
1 नहाने से कम होता है ह्रदय रोग का खतरा
नहाने से रक्तचाप में सुधार होता है और ब्लड वेसल्स बेहतर तरीके से काम करती हैं। ऐसे लोग जिन्हें पहले से कोई ह्रदय की समस्या नहीं है, उनके लिए हल्के गर्म पानी से नहाना फायदेमंद साबित हो सकता है। हल्के गुनगुने पानी से नहाने से ब्लड प्रेशर कम होने लगता है और ह्रदय की प्रक्रियाओं में सुधार होता है। साथ ही गर्म पानी में नहाने से शरीर का रक्तचाप सुधरता है।
2 नियमित स्नान से श्वसन तंत्र मज़बूत होता है
स्नान करने से आपको आसानी से सांस लेने में मदद मिल सकती है। जब आप गर्म पानी से नहाते हैं तो आपका दिल तेजी से धड़कने लगता है और ऑक्सीजन का लेवल बेहतर हो जाता है। गुनगुने पानी की भाप आपके साइनस और सीने को साफ करने में मददगार होती है। यहां तक कि ठंडे पानी में डुबकी लगाने से भी फेफड़ों की सेहत में सुधार होता है और ऑक्सीजन लेने की क्षमता बढ़ जाती है। यही कारण हैं कि तैरने को भी सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।
3 मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में भी होता है सुधार
नहाने से दर्द और सूजन में कमी आती है और तंत्रिका तंत्र को शांति मिलती है। जिससे शरीर में तनाव और चिंता का स्तर कम होता है और आपके मूड में सुधार होता है। हाइड्रोथेरेपी उन लोगों को मदद कर सकती है जो स्केलेरोसिस से पीड़ित हैं, क्योंकि पानी का तापमान और दबाव धीरे-धीरे रीढ़ के दर्द को कम करता है।
पोस्टुरल स्थिरता प्रदान करके, नहाना पार्किंसन्स रोग जैसी स्थितियों से जुड़े लक्षणों को कम कर सकता है।
4 नहाने से मांसपेशियों, जोड़ों और हड्डियों को फायदा हो सकता है
ये ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम को कम करता है और किसी भी तरह के साइड इफेक्ट्स को कम करता है। नहाने से शरीर में रक्त का प्रवाह अच्छा रहता है, जिससे जोड़ों और मांसपेशियों की कसरत भी हो जाती है। स्नान करने से इम्युनिटी बढ़ती है और ये सर्दी या फ्लू से रहत दे सकता है।
5 नहाने से हॉर्मोन संतुलित रहते हैं
हर रोज़ स्नान करने से पिट्यूटरी ग्रंथि जैसे एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन या एसीटीएच और अन्य हार्मोन जैसे बीटा एंडोर्फिन और कोर्टिसोल द्वारा जारी हार्मोन अधिक संतुलित हो सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, गर्म पानी से स्नान सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ा सकता है, जो मस्तिष्क में हैप्पी हॉर्मोन रिलीज़ करता है।
6 त्वचा के लिए फायदेमंद है नहाना
गर्म पानी से स्नान हमारे छिद्रों को खोलता है और हमारे पसीने का कारण बनता है, जो कि शरीर को प्राकृतिक तरीके से नमी पहुंचाता है। इसी तरह ठंडा पानी हमारी त्वचा को कस सकता है और पसीना और खुले छिद्रों को कम कर सकता है। पानी हमारी त्वचा को हाइड्रेटेड रख सकता है। वहीं गर्म पानी से स्नान करने से बैक्टीरिया मरते हैं और प्रतिरक्षा में सुधार हो सकता है।
7 स्नान करने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है
बदलते मौसम के साथ तालमेल बैठाने में भी नहाना मददगार हो सकता है। सर्दियों में हल्के गुनगुने और गर्मियों में ठंडे पानी से स्नान करने से पूरे शरीर का तापमान संतुलित रहता है। साथ ही इसका कोई साइड इफैक्ट भी नहीं है।
सेहत / शौर्यपथ /भारतीय घरों में मैदा से बने नाश्ते का सेवन करना आम बात है जैसे, कचोरी, मठरी, नमक पारे, समोसे आदि। यह सब पुराने समय से होता आया है, लेकिन अब इसकी जगह पिज़्ज़ा और ब्रेड ने ले ली है। मगर बात वही है, हम पहले भी मैदा खाते थे और आज भी खाते हैं। माना की मैदे से बना अधिकतर खाना बहुत स्वादिष्ट होता है जैसे- रूमाली रोटी, नान, केक, पेस्ट्री, बेक्ड फ़ूड जैसे बिस्कुट, नमकीन, पास्ता, नूडल्स, समोसे ... ये सूची कभी न ख़त्म होने वाली है!
मैदा सभी जंक फूड में पाया जाता है। यह होटल, घरों, स्ट्रीट फूड और बेकरी सभी जगह बहुतायत में इस्तेमाल होता है। जबकि हमें पता है कि मैदा (सफेद आटा) या इससे बने उत्पाद हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। लेकिन वास्तव में यह क्यों खराब है या यह हमें कितना नुकसान पहुंचा सकता है, यह हम में से बहुत से लोगों को नहीं पता है।
आइये जानते हैं कि मैदा सेहत के लिए क्यों हानिकारक है:
मैदा से बनी चीजें हमारे पेट को लंबे समय तक भरा होने का अहसास करवाती हैं। क्योंकि उसमें सिर्फ कैलोरीज होती हैं। आटे को महीन पीसकर मैदा बनाया जाता है और इस प्रक्रिया में उसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया और चोकर निकल जाता है।
इसलिए मैदे से बने खाद्य पदार्थ पचने के लिए शरीर में मौजूद न्यूट्रीएंट्स का इस्तेमाल करते हैं। जिससे शरीर में विटामिन और खनिजों का भंडार कम हो जाता है। गेहूं, अपने परिष्कृत रूप में, शरीर के लिए हानिकारक है, क्योंकि यह न केवल आपको मोटा कर सकता है, बल्कि कई बीमारियों को न्यौता भी देता है।
साथ ही मैदा से बने फूड्स को बनाने और लंबे समय तक प्रीज़र्व रखने की प्रक्रिया में कई हार्मफुल टोक्सिंस मिलाये जाते हैं, जो शरीर के लिए और भी ज्यादा नुकसानदेह हैं जैसे:
1. बेंज़ोयल पेरोक्साइड
बेंज़ोयल पेरोक्साइड, एक ब्लीचिंग एजेंट है, जिसका उपयोग करके, मैदे को सफेद रंग दिया जाता है। बेंज़ोयल पेरोक्साइड एक हानिकारक रसायन है जिसे दांतों को सफेद करने वाले उत्पादों और हेयर डाई में उपयोग करने के लिए डाला जाता है। अपने केंद्रित रूप में, यह काफी विस्फोटक हो सकता है।
2. एलोक्सन
मैदा को एक चिकनी बनावट प्रदान करने के लिए एक अन्य रसायन, एलोक्सन भी जोड़ा जाता है। पशु परीक्षण से संकेत मिले हैं कि ऐलोक्सान पैनक्रियाज़ की बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप टाइप 2 मधुमेह होता है।
3. बेंजोइक एसिड
मैदे में खतरनाक रसायन जैसे बेंजोइक एसिड और सोडियम मेटा बाय-सल्फेट होते हैं, जो विशेष रूप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए गहन जोखिम कारक हो सकता है।
अगर आप भी हर रोज मैदा से बने आहार ले रहीं हैं, तो आपको उठाने पड़ सकते हैं ये स्वास्थ्य जोखिम
1. मोटापे का खतरा
मैदे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक है, लगभग 71। यानी इसमें अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में कैलोरी की मात्रा दोगुनी होती है। इसलिए, इसे खाने से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। ज्यादा कैलोरी खाने से शरीर की कोशिकाओं को आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज प्राप्त हो सकता है, जो वसा के रूप में जमा हो जाता है, जिससे तेजी से वजन बढ़ता है।
2. पाचन संबंधी समस्याएं
मैदे का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह है कि यह पाचन तंत्र में गड़बड़ी पैदा कर सकता है। मैदा में बहुत कम पोषण मूल्य और शून्य फाइबर होता है। फाइबर की कमी से इसे पचाना मुश्किल हो जाता है। यह चयापचय की दर को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और नियमित रूप से मल त्याग में बाधा उत्पन्न करता है जिससे कब्ज और अन्य पाचन समस्याएं हो सकती हैं।
3. अन्य घातक बीमारियों को बुलावा देता है
ज्यादा मैदा खाने से रक्तचाप में गड़बड़ी हो सकती है जिसकी वजह से ह्रदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। मैदे में कोलेस्ट्रोल होता है जो आर्ट्रीज़ ब्लाक कर सकता है और तनाव को भी बढ़ा सकता है। इस सब का इम्युनिटी पर बहुत नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा मैदा एसिडिक होता है जो इन्फ्लामेंशन को बढ़ाता है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / इतिहास के पन्नो में लगभग समा चुकी 'कठपुतली' कला और इससे जुड़े कलाकारों को आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उदबोधन ने ऑक्सीजन दे दी है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलौना मेला के सजीव उदबोधन को सुन भदोही के कठपुतली कलाकार चहक उठे हैं और दशकों से मकान के बड़ेरी पर धूल मिट्टी से सने पड़े कठपुतलियों के खिलौनों को एक बार फिर साफ-सुथरा करने में जुट गए हैं। भदोही शहर के मखदूमपुर नट एवं सपेरों की बस्ती में आज सुबह एक मड़हे में जमे लगभग 12 से नट परिवार प्रधानमंत्री का लाइव भाषण दूरदर्शन पर देख रहें थे।
भीड़ देख उत्सुकतावश यूनीवातार् संवाददाता के कदम मड़हे के पास रूक गये। पूछने पर नट परिवार के लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खिलौने मेले का उद्घाटन किया है। साथ ही कठपुतली कला के उत्थान को लेकर भी बताया है। श्री मोदी की पहल की सराहना करते हुए शराफत अली बताते हैं कि उसके पिता कई दशक पहले चैत्र माह में जब गेहूं कटने का समय होता था तो गांव में पहुंचकर कठपुतली नचाते थे। बदले में उन्हे अनाज और सम्मान मिलता था लेकिन वक्त के साथ ही साथ कठपुतली कला भी विलुप्त हो गई लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण को सुनकर ऐसा लगता है कि हमारे पूर्वजों की कठपुतली कला एक बार फिर जीवित हो जायेगी। शराफत अली बात करते हुए खपरैल के मकान के बड़ेरी पर रखी दो जोड़ी कठपुतली खिलौना ले आये और पोछते हुए उसके आंखो से आंसू निकल पड़े। शराफत नट बताता है कि महमूदपुर के इस बस्ती में कठपुतली नचाने वाले लगभग तीन दर्जन परिवार रहते थे। लेकिन अब तो न कठपुतली देखने वाले हैं और न ही इस कला को सजोने वाले जिससे अब धीरे-धीरे यह परिवार सपेरों के बस्ती के रूप में बदल गया है लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल से सपेरों के बस्ती के लोगों को अब उम्मीद है कि कठपुतली कला की पुरानी परंपरा अब एक बार फिर जिवित हो जायेगी।
खाना खजाना /शौर्यपथ / आपका मन कुछ स्पेशल खाने का कर रहा है, तो आप घर में हक्का नूडल्स बनाकर खा सकते हैं। आप चाहें, तो मैगी से भी हक्का नूडल्स बना सकते हैं।
सामग्री :
फ्रेश नूडल्स 300 ग्राम
तेल 4 चम्मच
प्याज 3 (बारीक कटा हुआ)
गाजर 2 (स्लाइस किया हुआ)
हरी शिमला मिर्च 2 (स्लाइस की हुई)
पत्ता गोभी 100 ग्राम (स्लाइस की हुई)
हरा प्याज 3 (बारीक कटा हुआ)
अदरक 1 इंच (बारीक कटा हुआ)
हरी मिर्च 4 (बारीक कटी हुई)
सोया सॉस ढाई चम्मच
सफेद मिर्च का पाउडर आधा चम्मच
नमक डेढ़ चम्मच
अजीनोमोटो 1/8 चम्मच
लहसुन 2 कलियां
विधि:
मध्यम आंच पर एक पैन रखें और उसमें तेल डालकर गर्म करें। इसमें प्याज, हरी मिर्च, अदरक और लहसुन डालकर कुछ मिनट के लिए फ्राई करें। इसी बीच नूडल्स को भी पैकेट पर जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं उसके अनुसार उबाल कर अलग रख लें।
अब पैन में कटी हुई सब्जियां, अजीनोमोटो, नमक और सफेद मिर्च का पाउडर डालें। इस वक्त आंच को तेज कर दें और 3 से 4 मिनट के लिए सभी सब्जियों को पकाएं।
इसमें उबले हुए नूडल्स को डालें और हल्के हाथ से मिक्स करें। सोया सॉस डालें और एक मिनट के लिए पकाएं। हक्का नूडल्स तैयार है। इसे हरे प्याज से सजाकर सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ /वेट लॉस करने के लिए हम कितनी ही कोशिशें करते हैं लेकिन कभी-कभी ये कोशिशें हम पर भारी पड़ जाती यानी फैट लॉस की जगह जरूरी वजन घटने लगता है जिससे कि शरीर में कमजोरी आने लगती है। ऐसे में डाइट में ऐसी चीजों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए जिससेसे वजन बढ़ता हो। आज हम आपको ऐसी चीजें बता रहे हैं जिन्हें वेट लॉस सुपरफूड्स के रूप में जाना जाता है।
सांबर
प्रोटीन से भरपूर साउथ इंडियन डिश इडली और सांभर एक बेहतरीन ब्रेकफास्ट है। सांबर में अलग-अलग तरह की सब्जियां डालकर इसे और भी ज्यादा हेल्दी बना सकते हैं।
अंडे
अंडा आपके वजन को नियंत्रित रखने में काफी मदद करता है। अंडा खाने के बाद आपकी भूख शांत हो जाती है और आप ओवरइटिंग से बच जाते हैं। अंडा विटामिन और खनिज, जैसे सेलेनियम और राइबोफ्लेविन से भरपूर है।
मूंग दाल चीला
मूंग दाल अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन से भरी होती है। प्रोटीन भूख कम करने वाले हार्मोन जैसे जीएलपी -1, पीवाईवाई और सीसीके के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है जिससे शरीर में कमजोरी नहीं आती।
दही
दही का सेवन करने से भूख के स्तर में कमी आ सकती है और चॉकलेट और स्नैक्स की क्रेविंग कम हो सकती है। दही पेट को हल्का रखने में मददगार है। इसके अलावा दही खाने से शरीर हाइड्रेट भी रहता है।
जामुन
जामुन में नाम मात्र की कैलोरी होती है। साथ ही इसमें विटामिन और खनिज और फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जिससे भूख और भोजन का सेवन कम हो सकता है।
केला
केले में फाइबर अधिक होता है, जो आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करवा सकता है। कच्चा केले में प्रतिरोधी स्टार्च भी होता है, जिससे कि पेट की चर्बी कम होती है।
पोहा
पोहा वजन कम करने के अलावा पेट की चर्बी भी तेजी से कम करता है। पोहे में कई सब्जियां और मूंगफली डालकर इसका सेवन करने से पेट की चर्बी भी कम होती है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /गूगल द्वारा संचालित वीडियो-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यू-ट्यूब ने एक नई सुविधा की घोषणा की है जो माता-पिता को यह नियंत्रित करने में मदद करेगी कि उनके बच्चे प्लेटफॉर्म पर विभिन्न सामग्री सेटिंग्स को सक्षम करके प्लेटफॉर्म पर क्या देखते हैं।
नई सुविधा माता-पिता को यूट्यूब से एक्सप्लोर, एक्सप्लोर मोर और अधिकांश का चयन करने की क्षमता देगी। जेम्स बेसर, प्रोडक्ट मैनेजमेंट, किड्स एंड फैमिली, यूट्यूब के निदेशक ने बुधवार को एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि पिछले साल हमने बाल सुरक्षा, बाल विकास और संबंधित क्षेत्रों में दुनिया भर में माता-पिता और विशेषज्ञों के साथ काम किया है।
कंपनी ने कहा कि आने वाले महीनों में, हम माता-पिता के लिए बीटा में एक नया अनुभव शुरू करेंगे, ताकि वे अपने बच्चों को एक पर्यवेक्षित गूगल खाते के माध्यम से यूट्यूब तक पहुंच सकें। एक्सप्लोर में वीडियो की एक विस्तृत श्रृंखला होगी, जो आमतौर पर दर्शकों के लिए उपयुक्त होती है, जो नौ वर्ष से अधिक पुराने होते हैं, जिनमें व्लॉग, ट्यूटोरियल, गेमिंग वीडियो, संगीत क्लिप, समाचार, शैक्षिक सामग्री और बहुत कुछ शामिल हैं।
एक्सप्लोर मोर में वीडियो का एक बड़ा सेट भी शामिल होगा और एक्सप्लोर के समान श्रेणियों में लाइव स्ट्रीम भी होगा। कंपनी ने कहा, यह पर्यवेक्षित अनुभव सामग्री सेटिंग्स और सीमित सुविधाओं के साथ आएगा। हम सहमति की उम्र से कम उम्र के बच्चों के परिवारों के लिए एक शुरुआती बीटा के साथ परीक्षण और प्रतिक्रिया प्रदान करना शुरू करेंगे।
खाना खजाना /शौर्यपथ /अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो पालक की सब्जी खाना पसंद नहीं करते लेकिन उसमें मौजूद पोषक तत्वों का लाभ उठाना चाहते हैं जो शरीर में पहुंचकर आयरन की कमी को दूर करते हैं तो वीकेंड पर ट्राई करें पालक के कबाब की ये टेस्टी रेसिपी।
पालक के कबाब बनाने के लिए सामग्री-
-पालक के पत्ते 250 ग्राम
-चना दाल आधा कप
-लौंग 2
-दालचीनी 1 इंच का टुकड़ा
-4-5 काली मिर्च के दाने
-2 बड़े चम्मच चावल का आटा
-आधा कप ब्रेड का चूरा
नमक स्वादानुसार
-तेल कबाब फ्राई करने के लिए
कबाब भरने के लिए सामग्री
-कद्दूकस किया पनीर
-100 ग्राम
किशमिश
-1 बड़ा चम्मच
काजू
-1 बड़ा चम्मच
काली मिर्च पाउडर -
-आधा चम्मच
नमक
पालक के कबाब बनाने की विधि-
पालक के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले चने की दाल को पानी में आधा घंटा भिगोकर अलग रख दें। इसके बाद पालक के पत्तों को साफ करके अच्छे से धोकर बारीक काटकर कुकर में दाल, पालक, एक कप पानी, लौंग, दालचीनी, कालीमिर्च और नमक डालकर पकाएं। कुकर की एक सीटी के बाद गैस धीमी करके पालक को 5-6 मिनट तक पकाएं। कुकर ठंडा होने के बाद दाल छानकर पालक के साथ उसे हैंड ब्लेंडर से पीस लें। अब इस मिश्रण में चावल का आटा भी मिला लें।
इसके बाद पनीर को कद्दूकस करके उसमें नमक, काली मिर्च पाउडर, किशमिश और काजू मिला दें। पालक का मिश्रण लेकर उसे टिक्की का आकार दें। उसके बीच में पनीर वाला मिश्रण भर दें। एक प्लेट में ब्रेड का चूरा फैला लें। अब सारी टिक्कियों को इस चूरे से लपेटकर रख लें। गर्म तवे पर थोड़ा सा तेल डालकर सुनहरा होने तक सेक लें। आपकी गरमा-गरम टिक्कियां बनकर तैयार हैं। इन्हें हरी चटनी के साथ सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ /दांतों के प्रति अक्सर लोग लापरवाह हो जाते हैं। ज्यादातर लोग सुबह ब्रश करने को ही काफी मान लेते हैं लेकिन दांतों की साफ-सफाई और मजबूती कई बातों पर निर्भर करती है। वहीं, दांतों के बारे में कुछ मिथक भी जुड़े हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर बातें सही नहीं हैं। आइए, जानते हैं डेंटल से जुड़ीं कुछ गलतफहमियां और उनकी सच्चाई-
दांतों को सफेद करने वाले टूथपेस्ट के कारण आपके दांतों का रंग सुधरेगा।
हम अक्सर मानते हैं कि दांतों को सफेद करने वाले गम हमारे दांतों के पीले रंग को सफेद कर देंगे। ये गलत है! इन उत्पादों में कुछ श्वेत रसायन होते हैं, लेकिन यह आपके लिए पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं।
दांत साफ करने से इनोमेल टिशू पर नकारात्मक प्रभावित पड़ेगा।
यह सच नहीं है! दांत सफेद करने का एक सिद्ध दंत चिकित्सा प्रक्रिया है जो पेशेवर दंत चिकित्सकों द्वारा किया जाना चाहिए। प्राकृतिक घरेलू उपचार या सौंदर्य सैलून जाने की बजाय, दंत चिकित्सकों से अपने दांतों की देखरेख करवाना बेहतर होता है।
दांत सफेद करना स्थायी समाधान है।
यह एक सच्चा तथ्य है कि पेशेवर उपचार के बाद, आपके दांत लंबे समय तक सफेद रहेंगे। लेकिन यह कहना गलत है कि आपके दांत जीवन भर के लिए सफेद बने रहेंगे। हमारी खाने की आदतें और जीवनशैली के साथ हमें नियमित रूप से दांत को सफेद करवाना चाहिए।
जब आपके मसूड़ों से खून बह रहा है तो आपको ब्रश करना बंद कर देना चाहिए।
ब्रश करते समय जब आपके मसूड़ों से खून बहता दिखे तो आपको चिकित्सक से तुरंत मिलना चाहिए। मसूड़ों से खून तभी बहता है जब आप अपने दांतों को ठीक से साफ नहीं करते हैं। लगातार ब्रश करने से आपकी समस्याओं का समाधान होगा।
दांतों के दर्द को कम करने के लिए एस्पिरिन की जरूरत है।
यह कुछ हद तक सही है कि एस्पिरिन से आपको दर्द से राहत मिल सकती है लेकिन एस्पिरिन भी मसूड़ों और दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है।
रूट कनाल अत्यधिक दर्दनाक और जोखिम भरा प्रक्रिया है।
यह उन लोगों की एक और गलतफहमी है जो दांत के दर्द से पीड़ित हैं। दंत चिकित्सा में तकनीकी प्रगति के साथ, रूट कनाल उपचार अब एक दर्दनाक प्रक्रिया नहीं रही। दांतों में लंबे समय तक होने वाले दर्द की चिंता करना और उनसे संघर्ष करना बंद करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
