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खाना खजाना /शौर्यपथ /चटनी खाने के स्वाद को दुगुना कर देती है। खासतौर पर अगर सब्जी अच्छी नहीं बनी है, तो आप स्वादिष्ट चटनी से रोटी खा सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं नारियल और दही की चटनी। आइए, जानते हैं रेसिपी-
सामग्री :
1/2 कप नारियल (कद्दूकस किया हुआ)
4 टेबलस्पून भुनी हुई चने की दाल
4 टेबलस्पून दही
1/2 इंच अदरक
2 हरी मिर्च
10-12 करी पत्ता
1 टीस्पून राई
1 चुटकी हींग
नमक स्वदानुसार
तेल जरूरत के अनुसार
पानी जरूरत के अनुसार
विधि :
सबसे पहले एक बर्तन में दही को अच्छी तरह से फेंट लें।
अब ग्राइंडर जार में नारियल, चना दाल, अदरक, हरी मिर्च, नमक और पानी डालकर पेस्ट बना लें।
चटनी को दही में डालकर अच्छी तरह से फेंट लें।
मीडियम आंच पर पैन में तेल डालकर गर्म करने के लिए रखें।
इसमें राई, करी पत्ता और हींग डालकर हल्का भून लें।
तड़के के भुनने के बाद इसे चटनी के ऊपर डाल दें।
तैयार है नारियल-दही की चटनी। डोसा, इडली आदि के साथ सर्व कर इसका लुत्फ उठाएं।
आस्था /शौर्यपथ / शनिवार का ग्रह शनि ग्रह है। शनिवार की प्रकृति दारुण है। यह भगवान भैरव और शनि का दिन है। शनि हमारे जीवन में अच्छे कर्म का पुरस्कार और बुरे कर्म के दंड देने वाले हैं। कहते हैं कि जिसका शनि अच्छा होता है वह राजपद या राजसुख पाता है। यदि कुंडली में शनि की स्थिति निम्निलिखित अनुसार है तो शनिवारका व्रत करना चाहिए। आओ जानते हैं कि किसे शनिवार का व्रत रखना चाहिए।
1. यदि आपकी राशि मकर और कुंभ है तो आपको शनिवार का उपवास करना चाहिए।
2. यह ग्रह तुला में उच्च और मेष में नीच का होता है। यदि आपका शनि नीच का है तो आपको भी शनिवार का उपवास करना चाहिए।
3. यदि आपकी कुंडली में शनि सातवें भाव या ग्यारहवें भाव में या शनि मकर, कुंभ और तुला में है तो कोई बाद नहीं परंतु इसके अलावा किसी भाव में है तो शनिवार का उपवास करना चाहिए।
4. शनि के अशुभ प्रभाव के कारण मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता है या क्षति ग्रस्त हो जाता है, नहीं तो कर्ज या लड़ाई-झगड़े के कारण मकान बिक जाता है। यदि ऐसा है तो आपको शनिवार का उपवास करना चाहिए।
5 . अंगों के बाल तेजी से झड़ जाते हैं। अचानक आग लग सकती है। धन, संपत्ति का किसी भी तरह नाश होता है। समय पूर्व दांत और आंख की कमजोरी है तो आपको शनिवार के उपवास करना चाहिए।
6. यदि आपको लगाता है कि शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही है तो भी आपको शनिवार का उपवास करना चाहिए।
7. यदि कुंडली में किसी भी प्रकार से पितृदोष है तो भी आपको शनिवार का उपवास करना चाहिए।
8. यदि आप बुरा कार्य और बुरे कर्म करते हैं और अब सुधरना चाहते हैं तो आपको शनिवार के उपाय के साथ ही शनिवार का व्रत रखना चाहिए।
9. शनि यदि कुंडली में सूर्य या केतु के साथ स्थिति है तो भी आपको शनिवार के उपवास करना चाहिए।
10. यदि आप जीवन में किसी तरह से भी मृत्यु तुल्य कष्ट नहीं चाहते हैं तो उपाय के सात ही शनिवार का व्रत रखना चाहिए।
शनि को यह पसंद नहीं : शनि को पसंद नहीं है जुआ-सट्टा खेलना, शराब पीना, ब्याजखोरी करना, परस्त्री गमन करना, अप्राकृतिक रूप से संभोग करना, झूठी गवाही देना, निर्दोष लोगों को सताना, किसी के पीठ पीछे उसके खिलाफ कोई कार्य करना, चाचा-चाची, माता-पिता, सेवकों और गुरु का अपमान करना, ईश्वर के खिलाफ होना, दाँतों को गंदा रखना, तहखाने की कैद हवा को मुक्त करना, भैंस या भैसों को मारना, सांप, कुत्ते और कौवों को सताना। शनि के मूल मंदिर जाने से पूर्व उक्त बातों पर प्रतिबंध लगाएं।
उपाय : सर्वप्रथम भगवान भैरव की उपासना करें। शनि की शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं। तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गौ, और जूता दान देना चाहिए। कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावे। छायादान करें, अर्थात कटोरी में थोड़ा-सा सरसो का तेल लेकर अपना चेहरा देखकर शनि मंदिर में अपने पापो की क्षमा मांगते हुए रख आएं। दांत साफ रखें। अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों से अच्छा व्यवहार रखें।
सावधानी : कुंडली के प्रथम भाव यानी लग्न में हो तो भिखारी को तांबा या तांबे का सिक्का कभी दान न करें अन्यथा पुत्र को कष्ट होगा। यदि आयु भाव में स्थित हो तो धर्मशाला का निर्माण न कराएं। अष्टम भाव में हो तो मकान न बनाएं, न खरीदें। उपरोक्त उपाय भी लाल किताब के जानकार व्यक्ति से पूछकर ही करें।
सेहत /शौर्यपथ /हमारे घर में रखी वस्तुएं हमारे जीवन पर, सेहत पर और मानसिक स्थिति पर बहुत गहरा असर डालती है। वास्तु अनुसार घर में कई तरह की नकारात्मक वस्तुएं होती है जिसका हमें पता ही चलता है। ऐसी वस्तुओं को घर से बाहर निकाल देना चाहिए या उन्हें उचित स्थान पर रखना चाहिए। आओ जानते हैं ऐसी ही 10 तरह की वस्तुओं के नाम जिनसे घर का वातावरण हो जाता है विशैला।
1. दवाइयां : घर में एंटीबॉयोटिक दवा या दवाइयों के लिए उचित स्थान होना चाहिए। हर कहीं दवाइयां बिखरी पड़ी नहीं रहना चाहिए। इससे आपके दिमाग में नेगेटिव बनी रहती है और इससे वातारवण भी अशुद्ध रहता है। ऐसा लगता है जैसे बीमार लोगों का घर है।
2. एसिड की बोतल : कई बार लोग टॉयलेट या वॉशरूम साफ करने के लिए एसिड की बोतल खरीदकर लाते हैं। यह बहुत ही हानिकारक वस्तु है। यदि आपको यह जांचना ही कि यह कितनी खराब है तो आप इस बोतल को तुलसी के पौधे या अन्य किसी पौधे के पास रख कर देख लें। 10 से 15 दिन में फर्क पता चल जाएगा। यह बोतल जहां भी रखी रहती है वहां के आसपास का वातावरण खराब कर देती है।
3. टॉयलेट क्लिनर शोप : यह भी एसिड की बोतल जैसा ही असर करता है। इसे भी टॉयलेट में उचित स्थान पर ही दूर रखा रहना चाहिए।
4. फिनॉयल की बोतल : यह भी एसिड की बोतल जैसा ही असर करता है। इसे भी उचित स्थान पर ही दूर रखा रहना चाहिए।
5. कीटनाशक : किसान घरों में कीटनाशक खाद या दवाइयां होती हैं जो कि बहुत ही खतरनाक होती है। इन्हें भी उचित स्थान पर ही रखें।
6. जहरीले रसायन : कई घरों में मच्छर मारने, चूहा मारने और अन्य तरह के कीड़े मकोड़े मारने की जहरीली दवाएं होती हैं। इन्हें अच्छे से पैक करके उचित स्थान पर ही रखना चाहिए।
7. अधिक बल्ब : कई घरों में अधिक रोशनी के लिए ढेर साले बल्ब लगा दिए जाते हैं। प्रकाश की अधिकता के चलते भी आंखों के अलावा भी मस्तिष्क को बहुत नुकसान होता है।
8. एयर फ्रेशनर : कार या घर में भीनी भीनी सुगंध फैलाने के लिए रूम फ्रेशनर या एयर फ्रेशनर का उपयोग किया जाता है। यदि एयर फ्रेशनर किसी रसायन से बने हैं तो यह बहुत ही ज्यादा नुकसानदायक सिद्ध हो सकते हैं।
9: प्लास्टिक का सामान : आजकल प्लास्टिक का प्रचलन बढ़ गया है। आटे का डब्बा, रोटी का डब्बा, चम्मच, चाय का डब्बा, पानी की बोतल, मसाले आदि के छोटे-छोटे डब्बे आदि कई सामान प्लास्टिक के आने लगे हैं। प्लास्टिक की थेलियां भी बहुत से घरों में इकट्ठी करके रखी जाती है। घर में यदि प्लास्टिक है तो यह उर्जा का कुचालक होता है। आपके घर का वातावरण बदल जाएगा और इससे आपके भीतर का उत्साह समाप्त होकर निराशा में बदल जाएगा। यह संकट को आमंत्रित करने का अच्छा साधन है। वैज्ञानिक कहते हैं कि प्लास्टिक कैंसर का भी कारण बन सकता है।
10. नॉन स्टिक पॉटरी : इसमें तेल की बचत होती है परंतु इस पर कैमिकल की कोटिंन होती है जो सेहत के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकती है।
इसके अलावा घर में ऐसी कई हानिकारक वस्तुएं होती है जिसके घर में रखें होने से घर का वातावरण विशैला बन जाता है। यह स्थूल रूप से दिखाई नहीं देता लेकिन हवा का गुण धर्म इससे बदल जाता है। ऐसे कई वस्तुएं हैं जो हमारे आसपास बिखरी पड़ी रहती है। सभी तरह की हानिकारक वस्तुओं के लिए एक स्थान नियुक्त होना चाहिए और वह भी ऐसा जहां वे सुरक्षित रखी हों। ऐसी वस्तुओं के लिए अलग से लकड़ी या लोहे का एक बॉक्स बनवाएं और उसमें रखें जो किचन और बेडरूम से दूर हो।
धर्म संसार /शौर्यपथ / हिंदू धर्मशास्त्रों में शनि अमावस्या का दिन बड़ा ही पवित्र माना गया है। अत: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या का विशेष महत्व है। वर्ष 2021 में यह तिथि शनिवार, 13 मार्च 2021 को पड़ रही है। इस दिन यूं तो तेल में बनी सामग्री शनिदेव को अर्पित की जाती है। शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का योग बन रहा है।
फाल्गुन अमावस्या पूजन के मुहूर्त-
शुक्रवार 12 मार्च, 2021 को 15:04:32 से अमावस्या आरंभ होगी तथा शनिवार, 13 मार्च, 2021 को 15:52:49 पर अमावस्या समाप्त होगी।
शनिवार, शनि अमावस्या, शनि प्रदोष ऐसे अवसर हैं जब शनि महाराज को प्रसन्न किया जा सकता है। सामान्य समय में शनि की शुभता के लिए यह 10 उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानें 10 सरलतम उपाय-
1. दोनों समय भोजन में काला नमक और काली मिर्च का प्रयोग करें।
2. शनिवार के दिन बंदरों को भुने हुए चने खिलाएं और मीठी रोटी पर तेल लगाकर काले कुत्ते को खाने को दें।
3. यदि शनि की अशुभ दशा चल रही हो तो मांस-मदिरा का सेवन न करें।
4. प्रतिदिन पूजा करते समय महामृत्युंजय मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करें शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
5. घर के किसी अंधेरे भाग में किसी लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें तांबे का सिक्का डालकर रखें।
6. शनि ढैया के शमन के लिए शुक्रवार की रात्रि में 8 सौ ग्राम काले तिल पानी में भिगो दें और शनिवार को प्रातः उन्हें पीसकर एवं गुड़ में मिलाकर 8 लड्डू बनाएं और किसी काले घोड़े को खिला दें। आठ शनिवार तक यह प्रयोग करें।
7. शनि के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए शनिवार के दिन काली गाय की सेवा करें। पहली रोटी उसे खिलाएं, सिंदूर का तिलक लगाएं, सींग में मौली (कलावा या रक्षासूत्र) बांधे और फिर मोतीचूर के लड्डू खिलाकर उसके चरण स्पर्श करें।
8. प्रत्येक शनिवार को वट और पीपल वृक्ष के नीचे सूर्योदय से पूर्व कड़वे तेल का दीपक जलाकर शुद्ध कच्चा दूध एवं धूप अर्पित करें।
9. शनिवार को ही अपने हाथ के नाप का 29 हाथ लंबा काला धागा लेकर उसको मांझकर(मसलकर) माला की तरह गले में पहनें।
10. यदि शनि की साढ़ेसाती से ग्रस्त हैं तो शनिवार को अंधेरा होने के बाद पीपल पर मीठा जल अर्पित कर सरसों के तेल का दीपक और अगरबत्ती लगाएं और वहीं बैठकर क्रमशः हनुमान, भैरव और शनि चालीसा का पाठ करें और पीपल की सात परिक्रमा करें।
शौर्यपथ / प्रतिवर्ष मार्च माह के दूसरे गुरुवार को विश्व किडनी दिवस (डब्ल्यूकेडी) मनाया जाता है। वर्ष 2021 में यह दिन 11 मार्च, गुरुवार को मनाया जा रहा है। यह विश्वभर में किडनी रोग और उससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव को कम करने और उसके बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस दिन की शुरुआत की गई। किडनी से जुड़ी बीमारियों की अगर समय रहते पहचान नहीं की गई तो यह जानलेवा साबित हो सकती है।
किडनी हमारे शरीर का वह अंग है जो गंदगी बाहर निकालने का काम करती हैं। दोनों किडनियों में छोटे-छोटे लाखों फिल्टर होते हैं जिन्हें नेफरोंस कहते हैं। नेरोफेंस हमारे खून को साफ करने का काम करते हैं। किडनी में किसी प्रकार की समस्या होने पर शरीर से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते जिससे कई रोग पैदा हो सकते है।
इन रोगों से बचने के लिए आइए, जानते हैं 7 ऐसे लक्षण जो किडनी के खराब होने का संकेत देते हैं -
1 युरिनरी फंक्शन में बदलाव : सबसे पहला लक्षण जो उभर कर आता है वह है युरिनरी फंक्शन में बदलाव। किडनी में किसी प्रकार की समस्या के चलते पेशाब के रंग, मात्रा और कितने बार पेशाब आती है, इन चीजों में बदलाव आने लगते है।
2 शरीर में सूजन आना : जब किडनियों की कार्यप्रणाली में कोई दिक्कत आती है तो शरीर से बाहर न निकलने वाली गंदगी और तरल पदार्थ समस्याएं उत्पन्न करते हैं। जिनसे शरीर में सूजन आ जाती है। यह सूजन हाथों, पैरों, जोड़ों, चेहरे और आंखों के नीचे हो सकती है। अगर आप अपनी त्वचा को उंगली से दबाएं और डिम्पल थोड़ी देर तक बने रहें तो डॉक्टर के पास जाने में देर न करें।
3 चक्कर आना और कमजोरी : जब किडनियों की कार्यप्रणाली में अवरोध होता है, तो आपको चक्कर आने की अशंका बढ़ जाती है। पूरे समय आप थकावट महसूस करते हैं और कमजोरी का एहसास होता है। ये लक्षण खून की कमी और गंदगी के शरीर में जमा होने से उत्पन्न हो सकते हैं।
4 पीठ दर्द का कारण न समझ पाना : आपकी पीठ और पेट के किनारों में बिना वजह दर्द महसूस होना, किडनी में इंफेक्शन या किडनी संबंधी बिमारियों के लक्षण हो सकते हैं।
5 स्किन खुरदुरी हो जाना और खुजली होना : अचानक त्वचा का फटना, रेशेज होना, अजीब लगना और बहुत ज्यादा खुजली महसूस होना शरीर की गंदगी के एकत्रित होने के परिणाम हो सकते हैं। किडनी के निष्प्रभावी हो जाने से शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा प्रभावित होती है, जिससे अचानक से बहुत ज्यादा खुजली होने लगती है। आमतौर पर स्वस्थ त्वचा भी फटने लगती है, खुरदुरी हो जाती है और खुजली होती है।
6 उल्टियां आना : किडनी से जुड़ी समस्याओं के परिणामस्वरूप उल्टी आने जैसे लक्षण आम बात हो जाते हैं। इसके अलावा गैस से जुड़ी समस्याएं हर सुबह सामने आती हैं। अगर आप उल्टी के दवाईयां लेने के बाद भी समस्या को जस की तस पाएं तो फौरन डॉक्टर से पूरा चेकअप करवाएं ।
7 ठंड लगना : अच्छे मौसम के बावजूद अजीब-सी ठंड लगना और कभी-कभी ठंड लगकर बुखार भी आ जाना भी इसके लक्षणों में शामिल है। आपके तापमान अधिक होने पर भी ठंड का एहसास हो तो डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है।
Herbal Tea
सेहतमंद रहने के लिए शरीर का अंदर से साफ और मजबूत होना बेहद जरूरी है। हमारी किडनी शरीर को अंदर साफ रखती है। लेकिन हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम भी उसका ध्यान रखें और उसे समय-समय पर डिटॉक्स करते रहें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कुछ हर्बल चाय के बारे में जिसका नियमित सेवन कर आप अपने लिवर और किडनी को डिटॉक्स कर सकते हैं।
गुड़हल की यह चाय आपके लिवर को स्वस्थ व सुरक्षित रखती है और अवांछित तत्वों को बाहर करने में मदद करती है। इसका नियमित सेवन आपको लिवर संबंधी बीमारियों से दूर रखता है।
दालचीनी की चाय किडनी और लिवर को साफ यानी डिटॉक्स करने के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इससे आप अपनी सुबह की शुरुआत कर सकते हैं।
चुकंदर की चाय एक बेहतरीन किडनी क्लींजर है और यह आपके लिवर के स्वास्थ्य को भी बेहतर करेगा। चुकंदर का रस एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो फ्री रेडिकल्स को दूर करता है। यह गुर्दे की पथरी को बाहर निकालने में भी मदद करता है।
औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का सेवन न सिर्फ किडनी को डिटॉक्स करने में मदद करता है, बल्कि इससे सूजन की समस्या भी दूर होती है। वहीं हल्दी ब्लडप्रेशर को कम करती है, जो गुर्दे की बीमारी का दूसरा प्रमुख कारण है।
यही नहीं, यह किडनी के कार्य को भी बेहतर करती है। लेकिन गर्मी में हल्दी की चाय शरीर में ज्यादा गर्मी कर सकती है, ऐसे में गर्मी के मौसम में इसका सेवन न करना ही ठीक माना जाता है।
सेहत /शौर्यपथ / अच्छी नींद हमारे लिए हमारी सेहत के लिए कितनी जरूरी है इस बात से हम सभी वाकिफ हैं। अगर आप लगातार कम नींद ले रहे है, तो इसका असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है और कई तरह की सेहत से जुड़ी परेशानियां आपको घेरने लगती है, तो आइए जानते हैं कम नींद होने पर आपको क्या-क्या सेहत से जुड़ी परेशानियां हो सकती है।
अगर आप भी 5 घंटे से कम नींद लेते हैं तो आपकी सेहत को हो सकते हैं ये नुकसान-
1- अगर आप लगातार कम नींद ले रहे है तो इसका असर आपकी याददाश्त पर पड़ता है। अगर आप लगातार कम सो रहे है तो इसका असर आपकी याददाश्त को कमजोर करेगा और आप चीजें भूलने लगेंगे।
2- नींद पूरी नहीं होने पर दिमाग भी थका हुआ रहता है ऐसे में मूड भी खराब रहता है। अचानक से मूड में बदलाव होते है। आप तनाव ग्रस्त महसूस करने लगते है।
3- बीमारी से बचने के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है वहीं अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते है, तो इसका सीधा असर आपके इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। ऐसे में बदलते मौसम में आपको जल्दी बीमारियां अपनी चपेट में लेती है। सर्दी, खांसी, बुखार जैसी बीमारियां ज्यादा होती हैं और शरीर का इम्यून सिस्टम उनसे लड़ नहीं पाता है।
4- जो लोग पूरी नींद नहीं लेते है उनका ब्लड शुगर लेवल ज्यादा होता है। ऐसे में उन्हें डायबिटीज का भी खतरा हो सकता है।
5- नींद न होने के कारण आपको चक्कर भी आ सकते हैं। आप थकान महसूस कर सकते है। किसी भी काम को करके आप जल्दी थकान महसूस करने लगेंगे। इसलिए एक्टिव रहने के लिए एक अच्छी नींद का होना भी जरूरी है।
6- अगर आप पूरी नींद नहीं लेते है तो इसका असर आपकी खूबसूरती पर भी पड़ता है। कम नींद की वजह से आंखों के नीचे काले घेरे होने लगते हैं और चेहरा बेजान और थका हुआ नजर आने लगता है।
आस्था /शौर्यपथ / श्रीकृष्ण के बचपन के कई मित्र थे जैसे मनसुखा, मधुमंगल, श्रीदामा, सुदामा, उद्धव, सुबाहु, सुबल, भद्र, सुभद्र, मणिभद्र, भोज, तोककृष्ण, वरूथप, मधुकंड, विशाल, रसाल, मकरन्द, सदानन्द, चन्द्रहास, बकुल, शारद, बुद्धिप्रकाश आदि। बचपन में यह सभी गोकुल और वृंदावन की गलियों में माखन चोरते और उधम मचाते थे। बाल सखियों में चन्द्रावली, श्यामा, शैव्या, पद्या, राधा, ललिता, विशाखा तथा भद्रा आदि के नाम लिए जाते हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सखियों के नाम इस तरह हैं- चन्द्रावली, श्यामा, शैव्या, पद्या, राधा, ललिता, विशाखा तथा भद्रा। कुछ जगह ये नाम इस प्रकार हैं- चित्रा, सुदेवी, ललिता, विशाखा, चम्पकलता, तुंगविद्या, इन्दुलेखा, रंगदेवी और सुदेवी। कुछ जगह पर ललिता, विशाखा, चम्पकलता, चित्रादेवी, तुंगविद्या, इन्दुलेखा, रंगदेवी और कृत्रिमा (मनेली)। इनमें से कुछ नामों में अंतर है। आओ जानते हैं श्रीकृष्ण की सखी ललिता के बारे में रोचक जानकारी।
1. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन में इन अष्टसखियों का मंदिर भी स्थित है। इस सखियों में सबसे करीबी ललिता था।
2. कहते हैं कि ललिता भी श्रीकृष्ण से उतना ही प्रेम करती थी जितान की राधा, परंतु ललिता ने अपने प्रेम को कभी भी अभिव्यक्त नहीं किया था।
3. राधा और श्रीकृष्ण के प्रेम और निकुंज लीलाओं की साक्षी थीं ललिता। ललिता ने राधा का हर मौके पर साथ दिया था। ललिताजी का राधारानी की सहचरी के अतिरिक्त खंडिका नायिका के रूप में भी चित्रंण होता है, मतलब सेविका के रूप में राधा माधव के साथ आती हैं, और कभी-कभी नायिका बनकर कृष्णजी के साथ विहार करती हैं।
4. कहते हैं कि स्वयं भगवान शिव ने भी ललिता से 'सखीभाव' की दीक्षा प्राप्त की थी। ललिताजी ने शिवजी से कहा था कि रासलीला में श्रीकृष्ण के अतिरिक्त किसी पुरुष को प्रवेश नहीं है तब शिवजी को भी सखी बनना पड़ा था।
5. कई लोग यह भी मानते हैं कि मीरा के रूप में ललिता ने ही जन्म लेकर श्रीकृष्ण भक्ति का प्रचार प्रसार किया था। भक्त सुरदासजी ने ललिता के बारे में अपनी रचनाओं में बहुत कुछ लिखा है। यह भी कहा जाता है कि भक्त सुरदासजी श्रीकृष्ण के काल में किसी और नाम से जन्में थे और तब भी वे अंधे ही थे। उस काल में वे यादवकुल के गुरु से मिले थे।
6. माना जाता है कि अकबर के समय में राधा रानी की सखी ललिता ने स्वामी हरिदास के रूप में अवतार लिया था। स्वामी हरिदास वृन्दावन के निधिवन के एकांत में अपने दिव्य संगीत से प्रिया-प्रियतम (राधा-कृष्ण) को रिझाते थे। बांके बिहारी नाम से वृन्दावन में मंदिर स्थित है जिसकी स्थापना स्वामी हरिदास ने की थी। तानसेन भी उनके संगीत और गायन के बहुत ही ज्यादा प्रभावित थे।
7. मथुरा जिले में बरसाना के ऊंचागाव में ललिता अटोर नामक पहाड़ी पर ललिता का भव्य मंदिर है। इस मंदिर की जन्मोत्सव परंपरा के अनुसार 2021 में ललिताजी को हुए 5249 वर्ष हो चुके हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ /कृष्ण के प्रपौत्र वज्र को बहुत सी जगह पर वज्रनाभ भी लिखा गया है। वज्रनाभ द्वारिका के यदुवंश के अंतिम शासक थे, जो यदुओं की आपसी लड़ाई में जीवित बच गए थे। द्वारिका के समुद्र में डूबने पर अर्जुन द्वारिका गए और वज्र तथा शेष बची यादव महिलाओं को हस्तिनापुर ले गए। कृष्ण के प्रपौत्र वज्र को हस्तिनापुर में मथुरा का राजा भी घोषित किया था। जब वज्रनाभ मथुरा के राजा बने, उस समय पूरा ब्रज्रमण्डल उजाड़ पड़ा था। उन्होंने महाराज परीक्षित और महर्षि शांडिल्य के सहयोग से संपूर्ण ब्रजमंडल की पुन: स्थापना की थी। वज्रनाभ के नाम से ही मथुरा क्षेत्र को ब्रजमंडल कहा जाता है। मथुरा क्षेत्र में सिर्फ मथुरा ही नहीं और भी बहुत कुछ है, हां श्रीकृष्ण ने लीलाएं रची थी।
1. गोकुल-नंदगांव : मथुरा की जेल में जन्म लेते ही श्रीकृष्ण इस क्षेत्र में पहुंच गए थे जहां उनका बचपन गुजरा और कई असुरों का वध किया और देवों का उद्धार किया।
2. वृंदावन-मधुबन : श्रीकृष्ण जब थोड़े बड़े हुए तो वृंदावन उनका प्रमुख लीला स्थली बन गया। उन्होंने यहां रास रचा और दुनिया को प्रेम का पाठ पढ़ाया।
3. गोवर्धन : जहां उन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठाकर नई परंपरा और त्योहार को प्रकट किया।
4. बरसाना : जहां उनकी प्रेमिका राधा रानी रहती थीं।
5. मथुरा : जहां उनका जन्म हुआ, कंस का वध किया और जहां रहकर जरासंध से कई युद्ध किए।
संपूर्ण ब्रजमंडल में होली और रास की बड़ी धूम रहती है। ब्रजमंडल में खासकर मथुरा में लगभग 45 दिन के होली के पर्व का आरंभ वसंत पंचमी से ही हो जाता है। बसंत पंचमी पर ब्रज में भगवान बांकेबिहारी ने भक्तों के साथ होली खेलकर होली महोत्सव की शुरुआत की थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
शौर्यपथ / महाशिवरात्रि व्रत रखने के दौरान आस्था के साथ अपनी सेहत पर ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है जिससे कि आपको बाद में नुकसान न उठाना पड़े। ऐसे में बहुत जरूरी है कुछ बातों का ध्यान रखना। हम आपको ऐसे हेल्थ टिप्स बता रहे हैं, जो आपके व्रत को आसान बनाने में मदद करेंगे। इन टिप्स को फॉलो करके आपको थकान भी नहीं होगी और आप कमजोरी से भी बच जाएंगे।
आंखों को आराम दें
सबसे जरूरी है कि आंखों को आराम दें। आप व्रत के दौरान जितना मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल करेंगे, आपकी आंखें उतनी ज्यादा थकने लगेंगी। आंखों को आराम न देने पर शरीर में कमजोरी आने लगती है और आपको हर पल नींद आती रहेगी।
मन को शांत रखें
आप खुद को भरोसा दिलाएं कि इस व्रत को करने से आपके जीवन में सकारात्मकता आएगी यानी व्रत के दौरान कुछ भी नकारात्मक न सोचें। मन को शांत रखें और सच्चे मन से प्रार्थना करें। किसी भी प्रकार का तनाव या चिंता आपको भावनात्मक और शारीरिक रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे बीमार होने का खतरा रहता है।
हाइड्रेट रहें
फास्टिंग करते समय कम से कम आठ गिलास पानी पिएं ताकि आप टॉक्सिंस बाहर निकालकर बॉडी डिटॉक्स कर सकें। यदि आप सिर्फ पानी पीकर फास्टिंग कर रहे हैं ,तो अपनी पानी पीने की मात्रा को बढ़ाएं। यह आपको ऊर्जावान बनाएं रखने में मदद करता है।
फिजिकल एक्टिविटी से बचें
व्रत के दौरान हेवी फिजिकल एक्टिविटी ना करें क्योंकि यह शरीर के मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाता है जिसके कारण आपको भूख, प्यास या अधिक थकान महसूस होने लगती है। इसके बजाय, डेस्क वर्क चुनें, आध्यात्मिक किताबें पढ़ें, भक्ति संगीत सुनें या बस अपने शरीर और दिमाग को आराम दें।
थोड़े-थोड़े समय पर खाएं
यदि आप फास्टिंग के दौरान फल खा रहे हैं, तो हर थोड़े समय पर खाते रहें। इससे आपका पेट भरा रहेगा और आपको भूख नहीं लगेगी। कुछ नहीं, तो नारियल पानी पीते रहें इससे आपको कमजोरी नहीं होगी और व्रत खोलने के बाद खाना खाने पर फूड पॉयजनिंग का खतरा भी नहीं होगा।
शौर्यपथ /आप अगर शिवरात्रि का व्रत रखने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए है। जब लम्बे समय तक भूखे रहने के बाद जब हम काफी मात्रा में खाना खा लेते हैं, तो फूड पॉयजनिंग का खतरा हो सकता है। खासतौर पर व्रत रखने के बाद जब व्रत खोलने के लिए कुछ खाते हैं, तो पेट खराब होने के साथ फूड पॉयजनिंग का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इसका कारण यह है कि व्रत में लम्बे समय तक भूखे रहने के बाद तली-भुनी चीजें खाने से इसका असर पाचन शक्ति पर पड़ता है, जिससे एसिड बनने की समस्या हो जाती है। ऐसे में कुछ उपाय ऐसे हैं जिनसे फूड पॉयजनिंग के खतरे को कम किया जा सकता है।
फूड पॉयजनिंग क्या है
फूड पॉयजनिंग एक तरह का संक्रमण है, जो स्टैफिलोकोकस नामक बैक्टीरिया, वायरस या अन्य जीवाणु के कारण हो सकता है। जब स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया किसी खाद्य पदार्थ को खराब कर देता है, तो उसे खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है। इस कारण उल्टी और डायरिया जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा, फूड पाइजनिंग की समस्या कॉली बैक्टीरिया के कारण भी हो सकती है। यह गंदा पानी पीने से शरीर में आ सकता है।
फूड पॉयजनिंग से बचने के घरेलू उपाय-
-हाजमे को सुधारने के लिए अदरक विशेष रूप से फायदा पहुंचाता है। खाने के साथ अदरक के लच्छे पर जरा-सा काला नमक और नीबू डाल कर खाएं। अदरक की चाय पिएं।
-पेट की तकलीफ में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।
-शहद का सेवन भी पेट को आराम पहुंचाता है।
-भुने जीरे को पतली छाछ में मिलाकर पीने से पेट को राहत मिलती है। भूख लगने लगती है।
-फूड पॉयजनिंग होने पर तुलसी के पत्तों का रस अदरक में मिलाकर पीने से काफी लाभ मिलता है।
-पानी उबाल कर ही पिएं, क्योंकि उबालने से पानी हल्का हो जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
-खाना हमेशा साबुन से अच्छी तरह हाथ धोकर ही बनाएं।
-हमेशा साफ-सुथरे और अच्छी तरह धुले बर्तनों का ही इस्तेमाल करें।
-खाने की चीजें खरीदते समय कच्चे मांस, मछली या चिकन को फल और सब्जियों से अलग ही रखें, वरना क्रॉस कन्टेमिनेशन का खतरा बढ़ सकता है।
-खाना हमेशा अच्छी तरह पका कर खाएं, ताकि उच्च ताप से सभी हानिकारक जीव नष्ट हो जाएं
-खाना पकाने के बाद उसे देर तक बाहर या खुला न छोड़ें। आमतौर पर पके भोजन में भी करीब दो घंटे बाद बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।
-यदि पके हुए भोजन का रंग या गंध बदली हुई लगे तो उसे बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
-बारिश के मौसम में अपच की समस्या भी बढ़ जाती है, इसलिए ज्यादा चटपटा या तला-भुना भोजन करने से बचना चाहिए।
-रसोई घर में इस्तेमाल होने वाले झाड़न को भी रोज गर्म पानी से धोना चाहिए। उनमें मौजूद ई-कोलाई बैक्टीरिया पेट में कई तरह की गड़बड़ियां कर सकता है।
-फल व सब्जियों को बहुत अच्छी तरह नल के बहते पानी में ही धोना चाहिए।
किसानों की बढ़ेगी आय और बढ़ेंगे रोजगार के नए अवसर , जैविक खेती को मिलेगा प्रोत्साहन, आवारा मवेशियों की समस्या होगी हल
रायपुर / शौर्यपथ / लोकसभा में कृषि मामलों की स्थायी समिति ने मंगलवार को सदन में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना की सराहना करते हुए केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि किसानों से मवेशियों के गोबर खरीद की ऐसी ही योजना पूरे देश के लिए शुरु की जानी चाहिए। श्री पर्वतागौड़ा चंदनगौड़ा गद्दीगौडर की अध्यक्षता वाली लोकसभा की कृषि मामलों की स्थायी समिति ने केंद्र सरकार को दिए अपने सुझाव में कहा है कि किसानों से उनके मवेशियों का गोबर खरीदने से उनकी आय में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे, जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा, साथ ही आवारा मवेशियों की समस्या का भी समाधान होगा। लोकसभा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पूर्व यह समिति केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों को भी ऐसा ही सुझाव दे चुकी है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बघेल के नेतृत्व में 20 जुलाई 2020 से छत्तीसगढ़ में गोबर को गोधन बनाने की दिशा में सुविचारित कदम उठाते हुये गोधन न्याय योजना लागू की गई है, जिसमें पशु पालकों से गोबर क्रय करके गोठानों में वर्मीकंपोस्ट एवं अन्य उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना का संचालन सुराजी गांव योजना के तहत गांव-गांव में निर्मित गौठानों के माध्यम से किया जा है। इन गोठानों में पशुओं के चारे और स्वास्थ्य की देखभाल के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। इन्हीं गोठानों में गोधन न्याय योजना के तहत वर्मी कंपोस्ट टांकों का निर्माण किया गया है, जिनमें स्व सहायता समूहों की महिलाएं जैविक खाद का निर्माण कर रही हैं। गोबर की खरीद गोठान समितियों के माध्यम से 2 रुपए किलो की दर से की जाती है। अब तक गोबर विक्रेता किसानों, पशुपालकों और संग्राहकों को 80 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
स्व सहायता समूहों द्वारा अब तक 71 हजार 300 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा चुका है। वर्तमान में 7 हजार 841 स्व-सहायता समूह गोठान की गतिविधि संचालित कर रहे है। इन समूहों के लगभग 60 हजार सदस्यों को वर्मी खाद उत्पादन, सामुदायिक बाड़ी, गोबर दिया निर्माण इत्यादि विभिन्न गतिविधियों से 942 लाख की आय प्राप्त हो रही है। गोठान योजना के लिये वर्ष 2021-22 के बजट में 175 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। स्व सहायता समूहों द्वारा निर्मित जैविक खाद के विक्रय के लिए छत्तीसगढ़ में 10 रुपए प्रति किलो की दर तय की गई है। राज्य में वन, उद्यानिकी, कृषि समेत सभी शासकीय विभागों द्वारा आवश्यकतानुसार स्व सहायता समूहों से जैविक खाद की खरीद की जाती है, इसके साथ-साथ किसानों द्वारा भी जैविक खाद खरीदा जा रहा है। गोधन न्याय योजना से भूमिहीन कृषि श्रमिकों को भी नियमित आय हो रही है।
छत्तीसगढ़ शासन की गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन से जैविक खेती एवं गौ-पालन को बढ़ावा, पशु पालकों को आर्थिक लाभ तथा रोजगार के नये अवसरों का सृजन हो रहा है। सरकार की इस पहल को भारत सरकार एवं अन्य राज्यों द्वारा भी सराहा जा रहा है।
खाना खजाना /शौर्यपथ /मोरधन के ढोकले सामग्री :
1 कटोरी दही, 100 ग्राम सिंघाड़ा आटा, 200 ग्राम मोरधन, 100 ग्राम राजगीरा आटा, जीरा, सोडा एक चम्मच, आवश्यकतानुसार सेंधा नमक, तलने के लिए तेल।
विधि :
मोरधन को सबसे पहले 2 घंटे गला दें। दही फेंट कर राजगीरा व सिंघाड़ा आटा मिला दें। मोरधन को पीसकर सभी चीजें मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसमें एक चम्मच सोड़ा एवं नमक डालकर अच्छे से फेंटे और कुकर के डिब्बे में भर कर एक सीटी तक पकाएं।
अब इसे ठंडा होने दें। ठंडा होने पर पीस करें। अब एक बर्तन में तेल गर्म करके जीरा तड़काएं और ढोकले बघार दें या फिर उस तेल को कटे हुए ढोकले पर चारों तरफ बुरकाएं, ऊपर से धनिया से सजाएं और तली हुई मिर्च अथवा दही के साथ लाजवाब मोरधन के ढोकले पेश करें।
सेहत /शौर्यपथ /बेहतर सेहत के लिए अलसी के कई फायदे हैं। लेकिन इन फायदों को और भी बेहतर बनाने के लिए इसका सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है। जानिए, बेहतरीन लाभ पाने के लिए कैसे करें अलसी का उपयोग...
क्या आप जानते हैं कि अलसी का सेवन त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करता है। अलसी का सेवन भोजन के पहले या भोजन के साथ करने से पेट भरने का एहसास होकर भूख कम लगती है। इसके रेशे पाचन को सुगम बनाते हैं, इस कारण वजन नियंत्रण करने में अलसी सहायक है। चयापचय की दर को बढ़ाता है एवं यकृत को स्वस्थ रखता है। प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रख कब्ज से मुक्ति दिलाता है।
कैसे लें अलसी : अलसी को धीमी आंच पर हल्का भून लें। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख लें। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ लें। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें।
अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा मांगता है। एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि यह पानी आधा न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शकर मिलाकर सेवन करें। सर्दी, खांसी, जुकाम में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। अस्थमा में भी यह चाय बड़ी उपयोगी है।
अलसी और अस्थमा : अस्थमा वालों के लिए एक और नुस्खा भी है। एक चम्मच अलसी पावडर आधा गिलास पानी में सुबह भिगो दें। शाम को इसे छानकर पी लें। शाम को भिगोकर सुबह सेवन करें। गिलास कांच या चांदी का होना चाहिए।
क्या है अलसी में : अलसी में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन पाए जाते हैं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा के उपचार में उपयोगी है।
सेहत / शौर्यपथ / गर्मियों में अंगूर एक बेहद पसंद किया जाने वाला फल है, हरे अंगूर के अलावा काले अंगूर भी बहुत ही स्वादिष्ट होते है। अब तक अगर आप काले अंगूर कभी नहीं खरीदते थे तो इसके सेहत लाभ जानने के बाद तुरंत खरीदकर खाना शुरू कर देंगे -
गर्मियों में अंगूर एक बेहद पसंद किया जाने वाला फल है, हरे अंगूर के अलावा काले अंगूर भी बहुत ही स्वादिष्ट होते है। अब तक अगर आप काले अंगूर कभी नहीं खरीदते थे तो इसके सेहत लाभ जानने के बाद तुरंत खरीदकर खाना शुरू कर देंगे -
1 काले अंगूर अल्जाइमर के मरीजों के लिए फायदेमंद है। इसमें मौजूद रेसवेराट्रोल नामक तत्व अल्जाइमर से लड़ने में बेहद प्रभावकार है, साथ ही यह न्यूरो डि-जनरेटिव डिसीज में भी काफी फायदेमंद होता है।
2 इसमें फ्लेवेनॉइड्स के अलावा ऐसे कई तत्व मौजूद हैं जो हृदय रोगों से लड़ने में मददगार साबित होते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हार्ट अटैक, रक्त का थक्का जमना और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से लड़ने में सक्रिय भूमिका निभाता है।
3 अगर आप वजन बढ़ने की समस्या से परेशान हैं, तो काले अंगूर का सेवन आपकी यह समस्या हल कर सकता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के निर्माण को रोकता है और मोटापे के अलावा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाता है।
4 शरीर में यूरिक एसिड का स्तर अधिक होने पर काले अंगूर का सेवन फायदेमंद होगा। यह शरीर में यूरिक एसिड के बढ़े हुए स्तर को कम करता है जिससे किडनी पर भार नहीं बढ़ता और किडनी भी स्वस्थ रहती है।
5 कैंसर से बचाव के लिए काले अंगूर फायदेमंद है। खास तौर से
त्वचा के कैंसर से बचने के लिए इसका सेवन बेहद प्रभावी तरीका है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
