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सेहत / शौर्यपथ / कोरोना काल में कई महीने से घर के अंदर रहने के कारण बच्चों को नजर कमजोर हो रही है। उनको दूर की चीजें देखने में दिक्कत महसूस हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना काल में बच्चे घरों में मोबाइल-कम्प्यूटर स्क्रीन पर घंटों काम कर रहे हैं। इससे उन्हें निकट दृष्टि रोग (मायोपिया) हो सकता है, जिसमें दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल शर्मा के मुताबिक कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच फिलहाल घर से ही पढ़ाई हो रही है। कई घंटों तक चलने वाली ऑनलाइन क्लास के दौरान बरती गईं छोटी-छोटी लापरवाही आंखों में खुजली, लालिमा, रुखापन और सिरदर्द को बढ़ा रही हैं। लम्बे समय तक ऐसी स्थिति रही तो इससे मायोपिया हो सकता है। बच्चों में मोबाइल व टीवी के बढ़ते इस्तेमाल, आउटडोर खेलों से दूरी व लगातार पढ़ते रहने से यह बीमारी तेजी से फैल रही है। बच्चों को एक घंटे से ज्यादा मोबाइल या टीवी न इस्तेमाल करने दें।
धुंधलापन और रूखापन की समस्या
स्क्रीन पर आंखों की पलकें नहीं झपकती हैं। जिसकी वजह से बच्चों की आंख में चुभन, दर्द, जलन और सूखने की दिक्कतें आ रही हैं। काफी देर बाद स्क्रीन से आंख हटाने पर दूर की चीजें धुंधली दिखने के साथ आंखों में तनाव और थकान लगती है। सिरदर्द, ज्यादा पलक झपकाना, आंख रगडऩा और बच्चों में थकान महसूस करना, देखने में परेशानी के संकेत हो सकते हैं। अगर मायोपिया का इलाज नहीं किया जाता है तो यह भविष्य में मायोपिक मैक्युलर डीजनरेशन, रेटिनल डिटैचमेंट, कैटेरेक्ट्स और ग्लुकोमा जैसी गंभीर बीमारियों की प्रवृत्ति का कारण बन सकती है। पढ़ाई के बीच एक घंटे के अंतराल पर आंखों को आराम देना चाहिए। रोजाना खिड़की से दूर की चीजें दिखाएं।
दिल्ली और आसपास के 13.1 फीसदी बच्चे मायोपिया के शिकार
एम्स में कुछ साल पहले हुए अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली और इसके आसपास के शहरों में करीब 13.1 फीसदी बच्चे मायोपिया से पीडि़त हैं। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना काल में अभिभावकों को बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
ऐसे करें बचाव
20/20/20 नियम का पालन करें
गंगाराम अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रोवर अभिभावकों को 20/20/20 रूल को फॉलो करने की सलाह देते हैं। इसके तहत हर 20 मिनट में बच्चों को 20 फीट की दूरी पर कम से कम 20 सेकंड के लिए कुछ देखना चाहिए। इससे आपकी आंखों को आराम मिलता है और वे अपने नेचुरल पोज में आ जाती हैं।
मोबाइल की जगह कंप्यूटर या लैपटॉप इस्तेमाल करें। स्क्रीन की तेज रोशनी से बचाव करने वाले एंटीग्लेयर चश्मे का इस्तेमाल करें। योग को जीवन शैली का हिस्सा बनाएं। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के वक्त खुले कमरे या प्राकृतिक रोशनी में बैठाना चाहिए। क्योंकि मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन की लाइट आंखों पर पड़ती है, जो नुकसानदायक है।
ये व्यायाम भी करें
हाथ योग
अपने दोनों हाथों को तब तक रगड़ें, जब तक की वो गर्म न हो जाएं। अब अपने हाथों को अपनी आंखों पर रख लें। इससे आंखों के आस-पास की नसों को आराम मिलेगा और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा।
आंखों की पुतलियों को क्लॉकवाइस और एंटी-क्लॉकवाइस घुमाएं। ऐसा अपनी आंखें बंद कर के करें। इसे दिन में दो बार करें। हालांकि, इसे आप दिन में दो से अधिक बार भी कर सकते हैं।
क्या है मायोपिया या निकट दृष्टि रोग
मायोपिया या निकट दृष्टि रोग में आंख की पुतली (आई बॉल) का आकार बढऩे से प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के बजाय थोड़ा आगे बनता है। इससे दूर की वस्तुएं धुंधली और अस्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन पास की वस्तुएं देखने में कोई परेशानी नहीं होती है।
कोरोना काल में बच्चों और वयस्कों को घर पर घंटों ऑनलाइन काम करना पड़ रहा है। इससे उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। अस्पतालों में आंखों में जलन, ड्राइनेस और धुंधलापन के काफी मामले आ रहे हैं। लोग एहतियात रखेंगे तो वे इन परेशानियों को नियंत्रित कर सकते हैं।
सेहत / शौर्यपथ /शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक औषधियों की रानी कही जाने वाली तुलसी की मांग वैश्विक महामारी कोरोना काल में बढ़ गयी है। आयुष अस्पताल एवं रिसर्च सेन्टर के आयुवेर्दाचार्य नरेन्द्र नाथ का कहना है कि तुलसी कई बीमारियों का रक्षा कवच है। यह हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में अहम् भूमिका का निर्वहन करती है।
इसकी पत्तियों में विटमिन सी, कैल्शियम, जिंक और आयरन के साथ ही सिट्रिक टारटरिक एवं मैलिक एसिड भी प्राप्त होता है। इनमें एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभ दायक होते हैं। आयुवेर्दिक कंपनियां दवाइयां बनाने में इसका इस्तेमाल करती हैं।
उन्होने बताया कि आयुवेर्द में तुलसी को रोग नाशक जुडी-बूटी माना जाता है। इसे सौ बीमारियों की 'एक दवाÓ कहें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। यह सदीर्-जुकाम और गले में खरास से राहत दिलाने के लिए इसकी पत्तियों और कालीमिर्च का काढ़ा रामबाण साबित होता है। वहीं कोरोना वायरस से बचाव के दौरान लोगों के काढ़ा तैयार कर उपयोग में लाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी सहायक हुई है।
आयुवेर्दाचार्य नरेन्द्र नाथ ने बताया कि आयुवेर्द मे इसे रोग नाशक जड़ी-बूटियों की रानी कहा गया है।Óतुलसी पंचाग (जूस) वैज्ञानिक दृष्टकोण से 90 फीसदी क्षारीय (एल्काइन) होता है। यह प्रतिरोधक क्षमता के लिए श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) का निमार्ण करते हैं जिसे ही हम इम्यून या प्रतिरोधकता कहते हैं। उन्होने बताया कि जब शरीर अधिक लवणीय हो जाती है तब डब्ल्यूबीसी का निमार्ण होना कम हो हो जाता है जिसे समस्त बीमारियों की जननी कहते हैं।
उन्होने बताया कि इसमें इसेंसियल ऑयल, वोलेटाइल ऑयल पाया जाता है जो एंटीवैक्टीरीअल, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण पाया जाता है जो शरीर के समस्त धातुओं के विषैलापन को दूर करता है और शरीर के मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। तुलसी की चाय का सेवन किया जाए तो इससे कैंसर होने की संभावना काफी कम हो जाती है क्योंकि तुलसी कैंसर को जन्म देने वाली अनियंत्रित कोशिकाओं को बढ़कर विभाजित होने से रोकता है और कैंसर से शरीर की रक्षा करता है।
तुलसी का प्रयोग आयुवेर्द, यूनानी, होम्योपैथी एवं एलोपैथी दवाओं में होता है। इसकी जड़, तना, पत्तियों समेत सभी भाग उपयोगी हैं। तुलसी में विटामिन व खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह सभी रोगों में लाभप्रद मानी जाती है। वह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ कफ, वात दोष, पाचन शक्ति बढ़ाने बुखार, पेटदर्द, बैक्टीरियल संक्रमण खत्म करने में काम आती है। श्वांस लेने में हो रही परेशानी को राहत दिलाने में सहायक होती है।
आयुवेर्दाचार्य का कहना है कि जिन लोगों का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होता है उन्हें कोरोना का खतरा ज्यादा होता हैण। ऐसे में इम्यूनिटी सिस्टम मजबत रहना आवश्यक है। इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए वैसे तो कई तरीके हैं लेकिन इसे नेचुरल तरीके से बढ़ाया जा सकता है। नेचुरल तरीके से इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा सबसे अच्छा ऑप्शन है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़े से इम्युनिटी मजबूत होगी और शरीर कोरोना से लडऩे में बेहतर रूप से सक्षम हो पाएगा।
नरेन्द्र नाथ ने बताया कि श्वास संबंधित रोग, बुखार, जुकाम को ठीक करती है। किडनियों को स्वस्थ रखती है। इसकी पत्तियों में चमकीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीड़ों एवं वैक्टीरिया के खिलाफ काफी कारगर साबित होता है। तुलसी को संजीवनी बूटी की संज्ञा भी दी गयी है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होने बताया कि यह स्ट्रेस और डिप्रेसन को भी दूर भागने में सहायक होता है। पारंपरिक तुलसी का उपयोग कंजक्टीवाइटिस (आंख आना) की समस्या से राहत पहुंचाता है। किसी भी प्रकार के श्वसन संबंधी रोग के दौरान इसका उपयोग गुणकारी है।
नैनी क्षेत्र के फूलमंडी में तुलसी विक्रेता रोशन ने बताया कि कोरोना काल में लोगों का विश्वास आयुवेर्द के प्रति बढ़ा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने वाली औषधियों में तुलसी की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। कोरोना से पहले तुलसी की पत्तियों की कीमत 50 रुपये प्रति किलो थी, जो कि अब 100 किलो से अधिक तक पहुंच गई है। फुटकर बाजार में तो यह और भी महंगी बिक रही है। इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर गिलोय और अश्वगंधा के मूल्यों में भी मांग के कारण उछाल आया है।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन द्वारा कॉलेजों में प्रवेश की तिथि को 22 अक्टूबर से बढ़ा कर 29 अक्टूबर कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति की अनुमति से महाविद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। राज्य शासन द्वारा कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्थिति के कारण छात्र हित में यह निर्णय लिया गया है। कॉलेजों में प्रवेश की तिथि 29 अक्टूबर तक बढ़ाने के संबंध में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मंत्रालय महानदी भवन से आदेश जारी किया गया है।
गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग के सचिव धनंजय देवांगन ने 9 अक्टूबर को मंत्रालय में वीडियो कॉन्फं्रेसिंग के जरिए सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और विद्यालयों के प्राचार्यो से कॉलेजों में प्रवेश, ऑनलाइन क्लास, परीक्षा परिणाम और पाठ्यक्रमों के संबंध में चर्चा की। इस दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने कॉलेजों में शत प्रतिशत सीटों में प्रवेश हो सके इसके लिए प्रवेश के लिए निर्धारित तिथि 22 अक्टूबर से बढ़ाकर 30 अक्टूबर तक करने के भी सुझाव दिए थे।
सेहत / शौर्यपथ / ग्रीन-टी न सिर्फ दिल, बल्कि दिमाग की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के हालिया शोध की मानें तो इसमें मौजूद कैफीन ‘एडिनोसिन’ का उत्पादन बाधित करती है। ‘एडिनोसिन’ एक अहम न्यूरोट्रांसमिटर है, जो यह निर्धारित करता है कि व्यक्ति कब सुस्त या तरोताजा महसूस करेगा। इसकी अधिकता से तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने और अल्जाइमर पनपने के संकेत मिले हैं।
रक्तचाप घटाने में कारगर
रिंग ने ग्रीन-टी को रक्तचाप घटाने में भी बेहद असरदार करार दिया। उन्होंने 2016 में प्रकाशित एक अमेरिकी अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें हफ्ते में कम से कम छह कप ग्रीन-टी पीने वालों के हाइपरटेंशन का शिकार होने का खतरा 33 फीसदी कम मिला था।
कोलेस्ट्रॉल काबू में रहेगा
शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्रीन-टी में ‘कैटेचिन’ नाम का एंटीऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह खाने में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को सोखने की शरीर की क्षमता घटाता है। यही वजह है कि जो लोग दिन में दो कप ग्रीन-टी पीते हैं, उनमें हार्ट अटैक का खतरा आधा हो जाता है।
हड्डियां-मांसपेशियां मजबूत होंगी
-ग्रीन-टी हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी अहम है। इसमें मौजूद फ्लैवेनॉयड जहां हड्डियों-मांसपेशियों में क्षरण की शिकायत दूर रखते हैं, वहीं फाइटोएस्ट्रोजन ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचने देते। मांसपेशियों का विकास सुनिश्चित करने में भी उनकी अहम भूमिका है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / अयि गिरि नन्दिनी नन्दिती कालिदास रचित यह सर्वाधिक लोकप्रिय और असरकारी कालिका स्तुति है। इस पर नृत्य प्रस्तुतियां आपने बहुत देखी होंगी, आइए पढ़ें यह दिव्य स्तुति, इसके पढ़ने से सौभाग्य चमकता है, सफलता के दरवाजे अपने आप खुलने लगते हैं...
कालिका स्तुति
अयि गिरि नन्दिनी नन्दिती मेदिनि, विश्व विनोदिनी नन्दिनुते।
गिरिवर विन्ध्यशिरोधिनिवासिनी, विष्णु विलासिनीजिष्णुनुते।।
भगवति हे शितिकण्ठ कुटुम्बिनी, भूरि कुटुम्बिनी भूत कृते।
जय जय हे महिषासुर मर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
अयि जगदम्ब कदम्ब वन प्रिय, वासिनी वासिनी वासरते।
शिखर शिरोमणी तुंग हिमालय, श्रृंगनिजालय मध्यगते।।
मधुमधुरे मधुरे मधुरे, मधुकैटभ भंजनि रासरते।
जय जय हे महिषासुर मर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
सुर वर वर्षिणी दुर्धरधर्षिणी, दुर्मुखमर्षिणी घोषरते।
दनुजन रोषिणी दुर्मदशोषिणी, भवभयमोचिनी सिन्धुसुते।।
त्रिभुवन पोषिणी शंकर तोषिणी, किल्विषमोचिणी हर्षरते।
जय जय हे महिषासुर मर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्डवितुण्डित शुण्ड गजाधिपते।
रिपुगजदण्डविदारण खण्ड, पराक्रम चण्ड निपाति मुण्ड मठाधिपते।।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
अयि सुमन: सुमन: सुमन: सुमन:, सुमनोरम कान्तियुते।
श्रुति रजनी रजनी रजनी, रजनी रजनीकर चारुयुते।।
सुनयन विभ्रमर भ्रमर भ्रमर, भ्रमराधिपते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
सुरललना प्रतिथे वितथे, वितथेनियमोत्तर नृत्यरते।
धुधुकुट धुंगड़ धुंगड़दायक, दानकूतूहल गानरते।।
धुंकट धुंकट धिद्धिमितिध्वनि, धीर मृदंग निनादरते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
जय जय जाप्यजये जयशब्द परस्तुति तत्पर विश्वनुते।
झिणिझिणिझिणिझिणिझिंकृत नूपुर, झिंजिंत मोहित भूतरते।।
धुनटित नटार्द्धनटी नट नायक, नायक नाटितनुपुरुते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
महित महाहवमल्लिम तल्लिम, दल्लित वल्लज भल्लरते।
विरचित पल्लिक पुल्लिक मल्लिक, झल्लिकमल्लिक वर्गयुते।।
कृत कृत कुल्ल समुल्लस तारण, तल्लिज वल्लज साललते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
यामाता मधुकैटभ प्रमथिनी या महिषोन्मलूनी।
या धूम्रेक्षण चण्डमुण्ड मथिनी या रक्तबीजाशनी।।
शक्ति: शुम्भ निशुम्भ दैत्य दलिनी या सिद्धि लक्ष्मी परा।
सा चण्डी नवकोटि शक्ति सहिता मां पातु विश्वेश्वरी।।
।।इति श्रीकालिदास विरचित् कालिक स्तुति।।
लजीज मनभावन बनाना खिचड़ी
खाना खजाना / शौर्यपथ / सामग्री : आधा दर्जन कच्चे केले, 2 चम्मच राजगिरा आटा, मूंगफली दाने 100 ग्राम, जीरा 1 चम्मच, शक्कर 1 चम्मच, काली मिर्च 5-7 बारीक पिसी हुई, हरी मिर्च 4-5 बारीक कटी हुई, हरा धनिया, बड़ा आधा चम्मच घी, नींबू, सेंधा नमक स्वादानुसार।
विधि : सबसे पहले मूंगफली दाने को सेंक कर दरदरा पीस लें। कच्चे केले को हल्के उबाल कर छील लें और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब कड़ाही में आधा चम्मच घी लेकर जीरा फ्राई करें एवं हरी मिर्च और केले के पीस कर डाल दें। इसे थोड़ी देर पकने दें।
अब इसमें दरदरी पिसी मूंगफली डाल दें और
सारा मसाला डालकर धीमी आंच पर पांच मिनट पकने दें। लीजिए तैयार है कच्चे केले से बनी लजीज फलाहारी खिचड़ी। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालें
और पेश करें।
केले की नमकीन चटपटी पूरी
सामग्री :
3 कच्चे केले, 250 ग्राम सिंघाड़ा अथवा राजगिरा आटा, आधा चम्मच लाल मिर्च पावडर, 1 चम्मच सौंफ, सेंधा नमक स्वादानुसार, चुटकी भर शक्कर, पाव चम्मच काली मिर्च पावडर, बारीक कटा हरा धनिया, तलने के लिए घी अथवा तेल।
विधि : सबसे पहले कच्चे केले को उबाल लें। ठंडे होने पर छिलके उतार कर हाथ से मैश कर लें। अब एक थाली में सिंघाड़ा अथवा राजगिरा आटा लेकर छान लें। उसमें उपरोक्त मसाला सामग्री और केले का मिश्रण मिलाएं। तत्पश्चात आटे को गूंथ कर 10-15 मिनट कपड़े से ढंककर रख दें।
अब तैयार आटे की छोटी-छोटी लोई बनाकर पूरियां बेल लें। एक कड़ाही में घी/तेल गरम करके केले की फलाहारी पूरी कुरकुरी होने तक तल लें। गरमा-गरम पूरी को दही के रायते या हरी चटनी के साथ पेश करें।
कच्चे केले की चिप्स
सामग्री : आधा दर्जन कच्चे केले, आधा छोटा चम्मच काली मिर्च पिसी हुई, सेंधा नमक एक छोटा चम्मच, आधा चम्मच भूने जीरे का पावडर, तलने के लिए घी अथवा तेल।
विधि : सबसे पहले कच्चे केले के छिलके उतार लीजिए। अब एक कड़ाही में घी अथवा तेल अच्छा गरम रखें, तेल गरम होने के पश्चात किसनी के माध्यम से तेल में चिप्स घिसती जाएं। चिप्स कुरकुरी होने पर तेल से बाहर निकाल लें। ऊपर से काली मिर्च, जीरा पावडर और सेंधा नमक बुरकाएं।
ठंडी होने पर चिप्स को एयर टाइट डिब्बे में भर कर रख दें। फिर घर में बनी शुद्ध केले की चिप्स से फलाहार करें। आप चाहे तो ऊपर से सूखा या तला हरा धनिया डालकर भी पेश कर सकती हैं।
कच्चे केले की लजीज टिकिया
सामग्री :
5 कच्चे केले, 250 ग्राम उबले आलू, 30 ग्राम कुट्टू का आटा, अदरक, 2-3 हरी मिर्च, लाल मिर्च पावडर एक चम्मच, 2 चम्मच भूना जीरा पावडर, आधा चम्मच अमचूर पावडर, 100 ग्राम पनीर, घी तलने के लिए, सेंधा नमक या नमक स्वादानुसार, हरा धनिया, पाव कटोरी किशमिश।
विधि : पहले कच्चे केले को उबालें, छीले और ठंडा होने के लिए रख दें। अब धनिया, हरी मिर्च व अदरक को बारीक काट लें। उबले केले और आलू का मिश्रण तैयार करके अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया मिला लें।
इसमें कुट्टू का आटा, सेंधा नमक, मिर्च और जीरा पावडर मिलाएं और छोटी-छोटी गोलिया बनाकर रख लें। अब एक दूसरे बर्तन में पनीर को लेकर किशमिश, नमक, अदरक, मिर्च और धनिया मिलाएं। इस मिश्रण को केले के गोले में भरकर टिक्की की तरह हाथ से दबा लें।
अब अपनी सुविधानुसार इसे नॉन स्टिक तवे पर या ड्रीप फ्राई कर गरमागरम टिकिया को हरी और मीठी चटनी के साथ पेश करें। आप चाहे तो ऊपर से फलाहारी आलू की सेंव भी बुरका सकती हैं।
टिप्स / शौर्यपथ / नवरात्रि का पवित्र उत्सव शुरू हो चुका है। इस दौरान माता के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं। अगर आपने भी इस नवरात्रि व्रत रखा है लेकिन अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं तो आपकी मदद कर सकते हैं ये 5 गजब के टिप्स। नवरात्रि के दौरान व्रत करने वाले लोग अपने खान-पान का काफी ख्याल रखते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इस दौरान बाहर की चीजों को खाने से भी परहेज किया जाता है। जो बाकी दिनों में हमारे वजन बढ़ाने का काम करता है। व्रत के दौरान हेल्दी चीजों का सेवन करने से आपकी इम्यूनिटी अच्छी होने के साथ आपको कमजोरी भी महसूस नहीं होगी। साथ ही आपका वजन भी बड़ी आसानी से कम किया जा सकेगा। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे आप नवरात्रि व्रत के दौरान अपने बढ़ते वजन को कम कर सकते हैं ।
व्रत के दौरान ऐसा रखें अपना ब्रेकफास्ट-
व्रत के दौरान अपने ब्रेकफास्ट में आप रात के भिगोए हुए सूखे मेवों का सेवन करें। इसके अलावा सुबह की डाइट में आप ड्राई फ्रूट के अलावा सेब और दूध का सेवन भी कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको लंबे समय तक भूख महसूस नहीं होगी और आप ज्यादा खाने से बच जाएंगे। जिससे आपका वजन कंट्रोल रहेगा।
लंच-
व्रत के दौरान लंच करने से पहले अपने शरीर को डिटॉक्स करने के लिए छाछ, नींबू पानी, ग्रीन टी,लस्सी या नारियल पानी का सेवन कर सकते हैं। ऐसा करने से आप फ्रेश फील करेंगे और आपका वजन भी नहीं बढ़ेगा। लंच में आप ज्यादा से ज्यादा सब्जियों का सेवन करें। सब्जियों के साथ आप दही -साबूदाना, कुट्टू की पूरी और चाट की जगह कुट्टू की रोटी का सेवन करने की कोशिश करें। लंच के बाद एक कप ग्रीन टी जरूर पिएं।
शाम का नाश्ता हो कुछ ऐसा-
व्रत के दौरान आप शाम के नाश्ते में भूनी हुई मूंगफली, अखरोट, मखाना और किशमिश का सेवन करें। बाजार में मिलने वाले पैक्ड नमकीन पदार्थों का सेवन करने से बचें। इनमें मौजूद फैट आपके वजन को बढ़ाने का काम करता है।
डिनर-
नवरात्रों के दौरान तले हुए खाने की जगह भूने हुए खाने का सेवन करने की कोशिश करें। रात को उबले हुए शकरकंद के साथ दही का सेवन कर सकते हैं। सब्जियों को भी उबालकर खाने की कोशिश करें।
वर्कआउट-
व्रत के दौरान सुबह वर्कआउट में एरोबिक्स एक्सरसाइज जैसे, तेज चलना तैराकी दौड़ना या साइकिल जैसी एक्टिविटी कर सकते हैं। ऐरोबिक एक्सरसाइज करने से हार्ट रेट बढ़ जाता है, जिससे कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है।
शौर्यपथ / सुबह बिस्तर छोड़ने के बाद तरोताजा महसूस करने के लिए ठंडे-ठंडे पानी से नहाते हैं? अगर हां तो आपके भूलने की बीमारी का शिकार होने की आशंका न के बराबर है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं ने लंदन के पार्लियामेंट हिल स्विमिंग स्टेडियम में तैराकी का लुत्फ उठाने वाले वयस्कों के खून की जांच की। इस दौरान उन में ‘कोल्ड-शॉक प्रोटीन’ के नाम से मशहूर ‘आरबीएम-3’ अधिक मात्रा में मिला।
यह यौगिक आमतौर पर शीतस्वाप अवधि (हाइबरनेशन) में रह रहे स्तनपायी जीवों में पैदा होता है। तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित करने वाले पुल (सिनैप्स) के पुनर्विकास के लिए इसे बेहद अहम माना जाता है।
मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर जियोवाना मालुसी के मुताबिक डिमेंशिया रोगियों में ‘सिनैप्स’ पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इससे तंत्रिका तंत्र के बीच सूचनाओं का प्रवाह नहीं हो पाता। नतीजतन मरीज को याददाश्त, तर्क शक्ति और एकाग्रता में कमी की शिकायत से जूझना पड़ता है। सूचनाओं का विश्लेषण करने और एकसाथ कई काम निपटाने की उसकी क्षमता में भी गिरावट आती है।
आरबीएम-3 अहम क्यों
आरबीएम-3’ तंत्रिका तंत्र में ‘सिनैप्स’ के पुनर्विकास में अहम भूमिका निभाता है। ‘सिनैप्स’ तंत्रिका तंत्र की दो कोशिकाओं के बीच न्यूरोट्रांसमिटर का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित करने वाले पुल को कहते हैं। न्यूरोट्रांसमिटर यादें संजोने, सूचनाओं का विश्लेषण करने, विभिन्न कार्य निपटाने और अहम यौगिकों के उत्पादन के लिए जरूरी दिशा-निर्देशों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करते हैं।
पशुओं में ऐसे करता है काम
-भालू, गिलहरी सहित अन्य स्तनपायी जीव जब शीतस्वाप अवस्था में होते हैं, तब ‘आरबीएम-3’ उनके तंत्रिका तंत्र में मौजूद 20 से 30 फीसदी ‘सिनैप्स’ को नष्ट कर देता है। हालांकि, वसंत ऋतु में जब ये जीव फिर सक्रिय अवस्था में लौटते हैं तो ‘आरबीएम-3’ फिर ‘सिनैप्स’ का उत्पादन शुरू कर देता है। चूहों पर शोध में इसे अल्जाइमर्स-डिमेंशिया की रोकथाम में कारगर पाया गया है।
संभावना : दवा बनाने में मदद मिलेगी
मानव शरीर में ‘आरबीएम-3’ प्रोटीन के उत्पादन की पुष्टि होने से अल्जाइमर्स और डिमेंशिया के इलाज में कारगर दवाओं के निर्माण की उम्मीद जगी है। शोध दल ने कहा, इससे बिना ठंडे पानी से नहाए ही ‘आरबीएम-3’ के उत्पादन की विधि ईजाद की जा सकेगी, ताकि भूलने की बीमारी से बचाव में मदद मिले।
सावधान : ज्यादा ठंडे पानी से न नहाएं
शोधकर्ताओं ने नहाने के लिए 34 डिग्री सेल्सियस से कम ठंडे पानी का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। उनकी मानें तो ऐसा करने वाले लोगों की नसों में खून का बहाव रुक सकता है। अहम अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने से उनके खराब होने और व्यक्ति की जान जाने का खतरा रहता है।
फायदेमंद
-शरीर में ‘कोल्ड-शॉक प्रोटीन’ के नाम से मशहूर ‘आरबीएम-3’ पैदा होगा।
-तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं थमेगा।
सेहत / शौर्यपथ / जब भी आप सब्जी खरीदने जाते होंगे तो साथ में अदरक भी जरूर खरीदते होंगे, आखिर अदरक के बिना घर के कई सदस्यों को चाय नहीं भाती है। अदरक की चाय पीने से सेहत को कई फायदे होते हैं ये तो अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन क्या आपको ये पता हैं कि अदरक का पानी पीना भी बहुत ही फायदेमंद होता है और ये पानी कई सेहत समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। आइए, जानते हैं अदरक का पानी पीने के सेहत लाभ -
1 त्वचा के लिए फायदेमंद :
अदरक का पानी पीने से खून साफ रहता है, जिसका असर त्वचा पर बढ़ती चमक के रूप में दिखई देता है। साथ ही ये पिंपल्स और स्किन इंफेक्शन जैसी परेशानियां से भी बचाता है।
2 प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
अदरक का पानी पीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, साथ ही ये सर्दी-खांसी और वायरल इंफेक्शन जैसी बीमारियों की आशंका कम कर देता है।
3 खाना पाचन में फायदेमंद :
इसे पीने से आपका पाचन तंत्र सही काम करता है और खाना आसानी से पचने में मदद मिलती है।
4 वजन कम करने में सहायक :
इसे नियमित पीने से शरीर का अतिरिक्त फैट खत्म होते जाता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
5 कैंसर से रक्षा :
अदरक में ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में असरदार होते हैं। इसलिए ये कैंसर होने की आशंका को कम करने में सहायक होता है।
सेहत / शौर्यपथ /क्या आप जानते हैं, छुहारा और खजूर एक ही पेड़ से उत्पन्न होते हैं। दोनों की तासीर गर्म होती है और दोनों शरीर को मजबूत बनाने में विशेष भूमिका निभाते हैं। गर्म तासीर होने के कारण ही सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। आइए, जानें छुहारे के अनूठे फायदे।
1. मासिक धर्म : सर्दी के दिनों में कई महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़ी समसयाएं भी होती हैं, इसके लिए छुहारे फायदेमंद है। छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है।
2. बिस्तर पर पेशाब : छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है। बुढ़ापे में पेशाब बार-बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा। छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है। यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह शक्ति पहुंचाते हैं।
3. रक्तचाप : कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं। कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जाएगा।
4 . दांतों का गलना : छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं।
5. कब्ज : सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है। खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए।
6. मधुमेह : मधुमेह रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का हलवा इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।
7. पुराने घाव : पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें। घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं।
8. आंखों के रोग : खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं।
9. खांसी : छुहारे को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी, छींक, जुकाम और बलगम में राहत मिलती है।
10. जुएं : खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / 1 कप मैदा, 1 कप दूध, 1 कप शक्कर, 1 चम्मच नींबू का रस, 1 चम्मच सौंफ, घी अथवा रिफाइंड तेल (मोयन और तलने के लिए)
विधि :
पहले एक बर्तन में शक्कर, नींबू का रस और तीन-चौथाई कप पानी डालकर चाशनी बना लें। अब मैदे में 1 चम्मच तेल का मोयन डालें। इसके बाद दूध और सौंफ मिलाकर घोल तैयार करें।
एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और घोल से एक-एक कड़छी डालकर उसे करारे फ्राई करें और चाशनी में डुबोकर अलग एक बर्तन में रखें। तैयार मालपुए पर कतरे हुए पिस्ता-बादाम बुरकें और पेश करें और भोग लगाएं।
लौकी-खोया का लजीज हलवा, पढ़ें आसान विधि
> > सामग्री :
1 किलो कद्दूकस की हुई लौकी, 50 ग्राम ताजा मावा (खोया), 2 बड़े चम्मच घी, 150 ग्राम शकर, पाव चम्मच इलायची पावडर और 2-3 केसर के लच्छे।
विधि :
सबसे पहले एक कड़ाही में घी डालकर किसी हुई लौकी को हल्का भूनकर अलग रख लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा पानी डालें, फिर चीनी डालें। जब शकर पूरी तरह घुल जाए, तब इसमें भूनी हुई लौकी डालकर चलाएं।
जब शकर का पानी पूरी तरह खत्म हो जाए और चाशनी जैसा गाढ़ा दिखाई देने लगे, तब इसमें मावा डालकर हिलाएं। फिर इलायची पावडर डालें और अच्छी तरह चलाकर 2-3 मिनट तक चलाएं। अब केसर को हाथ से मसलकर ऊपर से बुरकाएं।
लीजिए आपके लिए तैयार है लौकी और खोया का जायकेदार हलवा। व्रत के दिनों में लाभदायी ये हलवा सेहत की दृष्टि से बहुत फायदेमंद है।
झटपट बनाएं फलाहारी नमकीन क्रिस्पी पूरी, पढ़ें 5 स्टेप्स
सामग्री :
2 कटोरी राजगिरे का आटा, 1/2 कटोरी सिंघाड़े का आटा, 1/2 कटोरी मूंगफली दाने, 1 चम्मच सौंफ दरदरी पिसी हुई, 4-5 हरी मिर्च का पेस्ट, 1 चम्मच लाल मिर्च, नमक (सेंधा) स्वादानुसार, हर धनिया बारीक कटा, तेल या घी तलने के लिए।
विधि :
Steps 1. राजगिरे व सिंघाड़े का आटा छानकर हल्का गुलाबी होने तक सेंक लें।
Steps 2. दाने को सेंक कर बारीक पिस लें।
Steps 3. एक थाली में दोनों आटे लेकर उपरोक्त सारी सामग्री डालकर अच्छी तरह मिक्स करके आटा गूंध लें और थोड़ी देर ढंक कर रखें।
Steps 4. अब आटे की छोटी-छोटी लोइयों की पूड़ियां बना कर मूंगफली तेल या शुद्ध घी में कुरकुरी तल लें।
Steps 5. तैयार गरमा-गरम फलाहारी नमकीन क्रिस्पी पूरी हरी चटनी या दही के रायते के साथ परोसें।
धर्म संसार / शौर्यपथ /चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।
इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। इनका गुण शोधकार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं। ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं।
भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी। इसीलिए ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं।
इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है।
भक्तों के रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि विश्वविद्यालयों का कार्य केवल डिग्री देना नहीं, समाज और राज्य की समस्याओं का प्रभावी और वैज्ञानिक हल खोजना भी है। मुख्यमंत्री आज यहां अपने निवास कार्यालय में राज्य योजना आयोग और राज्य के 14 विश्वविद्यालयों एवं 4 उच्च शैक्षणिक संस्थानों ट्रिपल आईटी, आईआईएम, एम्स और आईआईटी कुल 18 शैक्षणिक संस्थानों के मध्य शोध एवं अनुसंधान के लिए आयोजित वर्चुअल ऑनलाइन एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में राज्य के समावेशी विकास में इन उच्च शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके ज्ञान और कौशल से स्थानीय और कृषि, उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं के प्रभावी और वैज्ञानिक समाधान, अनुसंधान, अध्ययन और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए तीन वर्षों के लिए एमओयू किया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है, जहां राज्य के विकास में उच्च शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी होगी।
कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, योजना और संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अजय सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, राजेश तिवारी और रूचिर गर्ग भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। एमओयू में राज्य योजना आयोग के अधिकारी और संबंधित शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य योजना के सदस्य डॉ. के. सुब्रमणियम, सदस्य सचिव अनुप कुमार श्रीवास्तव, प्रदेश के 14 विश्वविद्यालयों के कुलपति, रजिस्ट्रार, विद्यार्थी और 4 उच्च शैक्षणिक संस्थानों के निदेशक जुड़े।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य योजना आयोग और इन संस्थानों के मध्य एमओयू के माध्यम से प्रदेश की विशिष्ट समस्याओं और दिक्कतों की पहचान कर उन पर अनुसंधान, अध्ययन, नवाचार द्वारा समाधान ढूंढे जा सकेंगे और इन संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान कौशल का उपयोग राज्य की जनता कर सकेगी। इन संस्थानों की उपलब्धियों का लाभ आम आदमी को मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि, रोजगार, ग्रामीण विकास, कुटीर उद्योगों से लेकर बड़े उद्योगों तक की समस्याओं और सामाजिक समस्याओं के वैज्ञानिक ढ़ंग से सरल समाधान हो, इसमें उच्च शैक्षणिक संस्थानों की फैकल्टी, प्रतिभावान विद्यार्थियों के ज्ञान और कौशल का लाभ मिले, इस उद्देश्य से यह एमओयू आज किया गया है। इससे विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को प्रदेश की जमीनी समस्याओं से रू-ब-रू होने का मौका मिल सकेगा। आने वाले समय में इसका लाभ प्रदेश, प्रदेशवासियों और देश को मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस एमओयू के तहत राज्य योजना आयोग के समन्वय के साथ उच्च शैक्षणिक संस्थानों में बनने वाले Óशोध और अनुसंधान प्रकोष्ठÓ में लघु वनोपजों के वेल्यू एडिशन, कृषि उत्पादों, उद्यानिकी, फसलों में वेल्यू एडिशन, कृषि और उद्यानिकी फसलों पर आधारित उद्योगों को खोलने के संबंध में भी अध्ययन और अनुसंधान किया जाएगा। राज्य में कुटीर उद्योगों के विकास और राज्य में उत्पादित इस्पात और एल्युमिनियम पर आधारित वेल्यू एडिशन के सहायक उद्योग जैसे सायकल बनाने के उद्योग और आटोमोबाइल उद्योगों के विकास में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के लिए बिजली, कच्चा माल और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध है। उच्च शैक्षणिक संस्थानों की मदद से प्रदेश में वेल्यू एडिशन के उद्योगों की स्थापना के लिए उद्योगपतियों को छत्तीसगढ़ लाने में और लोगों को हुनरमंद बनाने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में इस कार्यक्रम में शोध और अनुसंधान के लिए स्थापित कोऑडिनेशन यूनिट का शुभारंभ किया।
शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण की जद में फंसी लाखों जिंदगियां भले ही मौत के कुएं से निकलकर बाहर आ गई हों, लेकिन इसका शरीर की हड्डियों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह हम नहीं, बल्कि अलीगढ़ में संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने के बाद डॉक्टर्स की रिपोर्ट कह रही है। बढ़ती उम्र के साथ कमजोर हड्डियों पर कोरोना संक्रमण की दोहरी मार पड़ने लगी है। कोरोना संक्रमित हो चुके मरीजों में हड्डियों में दर्द की समस्या सबसे ज्यादा आ रही है।
दुनियाभर में आज विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है। यह हड्डी का एक ऐसा रोग है जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जिसके बाद ज्वाइंट्स में दर्द और कमजोरी शिकायत रहने लगती है। डॉक्टर्स के मुताबिक कोरोना संक्रमण का हड्डियों पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। इस बीमारी से बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा ग्रसित होती हैं।
मगर कोरोना संक्रमण की वजह से इनपर दोहरी मार पड़ने लगी है। जो मरीज पहले इस बीमारी से काफी हद तक ठीक हो चुके थे वह दोबारा इससे ग्रसित होने लगे हैं। डॉक्टर्स ने बताया कि किसी भी कोरान मरीज को 15 से लेकर 21 दिन तक आइसोलेशन में रखा जाता है। जहां उसे पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिल पाती है। विटामिन डी ही एक ऐसा श्रोत है जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है।
क्या कहते हैं कोरोना मरीज :
इस संबंध में 20 कोरोना संक्रमित रह चुके मरीजों से बात की गई, जिसमें से 12 लोगों ने हडि्डयों के दर्द की शिकायत की। जिसमें कोरोना संक्रमित रह चुके अपर मंडला आयुक्त शमीम अहमद ने बताया कि कोरोना तो ठीक हो गया पर जिंदगी भर का दर्द दे गया है। संक्रमण के बाद से हड्डियों में सबसे ज्यादा दर्द रहने लगा है। रीढ़, घुटने और गर्दन की हडि्डयों हमेशा दर्द रहता है। वहीं 62 वर्षीय सुरेंद्र कुमार ने बताया कि हडि्डयों में दर्द की शिकायत पहले से थी, लेकिन कोरोना संक्रमित होने के बाद यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी :
यह एक गंभीर बीमारी है फिर भी लोगों में इसके बारे में पता नहीं है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन पुरुष भी इससे अछूते नहीं है। यह हड्डियों को कमजोर और नाजुक बनाती है। जरा सी चोट लगने पर हड्डियां टूट सकती हैं। कभी-कभी झुकने, खांसने या छींकने से भी फ्रैक्चर हो सकता है। ऐसे कई कारण हैं जो इस रोग के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या को कोरोना संक्रमण और विकराल कर सकता है। खासकर बुजुर्ग लोगों का कोरोना संक्रमित होना। संक्रमण की वजह से उनपर ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या और बढ़ जाएगी। जो मरीज पहले ठीक हो चुके हैं उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस फिर अपने जद में ले सकता है।
कोरोना संक्रमित होने की वहज से मरीजों को 21 दिन तक अस्पताल या आइसोलेशन में रहना पड़ता है। जहां उन्हें पर्याप्त मात्र में विटामिन डी नहीं मिल पाता। जो की हडि्डयों के लिए बहुत खरनाक है। जरूरी है कि आइसोलेशन के समय भी विटामिन की पर्याप्त मात्रा उन्हें दी जाए।
फिजियोथेरेपी के लिए महामारी से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही। लगातार बढ़ रही संख्या से एक अनुमान लगाया जा सकता है कि संक्रमण ने हमारी हडि्डयों को प्रभावित किया है। मरीज ठीक होने के बाद एक्सरसाइज और खानपान में सुधार करें तो कुछ हद तक समस्या कम हो सकती है।
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण :
आधुनिक जीवनशैली, निष्क्रिय रहने की आदत, शराब और तंबाकू का सेवन, धूम्रपान, अधिक कैलोरी और जंक फूड का सेवन जैसी शहरी खान-पान की आदतें, भोजन में मिलावट और कम उम्र में मधुमेह रोग।
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण :
कमर में दर्द की शिकायत, शरीर में लगातार थकावट, काम की इच्छा न करना, हाथ और पांव में दर्द रहना, हल्की चोट पर हड्डियों का टूटना।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
