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May 31, 2026
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सेहत / शौर्यपथ / अगर आप धूम्रपान से तौबा करने का मन बना रहे हैं तो यह सोचकर कदम पीछे मत खींचिए कि अब बहुत देर हो चुकी है। वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन की मानें तो आखिरी सिगरेट सुलगाने के 20 मिनट के भीतर ही मानव शरीर तंबाकू के दुष्प्रभावों से उबरने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। 15 साल बीतते-बीतते व्यक्ति में हार्ट अटैक से मौत का खतरा उन्हीं लोगों के बराबर हो जाता है, जिन्होंने जीवन में कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया।

मुख्य शोधकर्ता रेशल बी हायेस के मुताबिक व्यक्ति कितनी लंबी अवधि से सिगरेट की लत का शिकार है, यह मायने नहीं रखता। जैसे ही वह धूम्रपान से तौबा कर लेता है, हृदय से लेकर फेफड़ों तक पर उसका सकारात्मक असर दिखना शुरू हो जाता है।

हायेस ने दावा किया कि आखिरी सिगरेट के सेवन के 20 मिनट बाद ही रक्तचाप और हृदयगति सामान्य होने लगती है। दोनों ही चीजों का बढ़ना हार्ट अटैक और स्ट्रोक से असामयिक मौत का सबब बन सकता है। उन्होंने बताया कि सिगरेट छोड़ने पर स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के स्तर में भी कमी आने लगती है। इससे व्यक्ति को न सिर्फ डिप्रेशन, बल्कि अनिद्रा की समस्या पर भी काबू पाने में मदद मिलती है।

कब क्या असर
दो घंटे बाद
-सिगरेट का धुआं नसों में सिकुड़न का सबब बनता है, इससे हाथ-पैर में पर्याप्त मात्रा में खून का प्रवाह नहीं होता और वे ठंडे या सुन्न पड़े रहते हैं।
-हायेस के अनुसार धूम्रपान छोड़ने के दो घंटे बाद शरीर के विभिन्न अंगों में खून का बहाव सुचारु हो जाता है और वे सामान्य रूप से काम करने लगते हैं।

12 घंटे बाद
-धूम्रपान से दूरी बनाने के 12 घंटे के बाद खून में कॉर्बन मोनोऑक्साइड के स्तर में कमी आने लगती है, यह गैस हृदय सहित अन्य अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित करती है।
-व्यक्ति को सिरदर्द, मिचली, एकाग्रता में कमी, झुंझलाहट और आंखों के सामने धुंधलापन छाने की शिकायत भी सता सकती है, अंगों के खराब होने का जोखिम भी बना रहता है।

24 घंटे बाद
-रक्त प्रवाह, हृदयगति, ब्लड प्रेशर का स्तर सुधरने से हृदय सामान्य रूप से काम करने लगता है और हार्ट अटैक से मौत के खतरे में आने लगती है।
-हालांकि, इस दौरान खांसी की समस्या बढ़ सकती है क्योंकि शरीर फेफड़ों में जमे कफ को बाहर निकालने की प्रक्रिया को तेज कर देता है।

48 घंटे बाद
-नाक और मुंह की निष्क्रिय नसों के एक बार फिर सक्रिय हो जाने से व्यक्ति की स्वाद और गंध महसूस करने की क्षमता लौट आती है।
-हालांकि, यह समय संयम बनाए रखने के लिहाज से बेहद अहम है क्योंकि खून में निकोटीन का स्तर गिरने से सिगरेट की तलब बढ़ जाती है।

72 घंटे बाद
-फेफड़ों में सूजन घटने से श्वासगति में सुधार आता है, श्वासनली भी खुलना शुरू हो जाती है।
-कफ और कीटाणुओं को श्वासनली में जमने से रोकने वाले ‘सीलिया’ भी दोबारा पनपने लगते हैं।

एक हफ्ते बाद
-निकोटीन की तलब शांत होने लगती है, कफ का उत्पादन घटने और ‘सीलिया’ के सक्रिय होने से खांसी की समस्या से भी निजात मिलती है।

एक महीने बाद
-फेफड़ों की कार्य क्षमता में 30 फीसदी तक का सुधार आता है, चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने या कसरत करने के दौरान सांस जल्दी नहीं फूलती।

एक साल बाद
-धूम्रपान करने वाले लोगों के मुकाबले हार्ट अटैक से जान जाने का जोखिम 50 फीसदी तक घट जाता है, सर्दी-जुकाम, खांसी के प्रति संवेदनशीलता भी घटती है।

दस साल बाद
-फेफड़ा रोगों का शिकार होने की आशंका आधी रह जाती है, नसें खुलने के साथ ही खून के खक्के जमने के खतरे में उल्लेखनीय कमी आती है।

15 साल बाद
-हायेस ने बताया कि सिगरेट छोड़ने के 15 साल बाद व्यक्ति के हार्ट अटैक या दिल की बीमारियों से दम तोड़ने का खतरा धूम्रपान करने वालों के बराबर हो जाता है।

खतरनाक
-तंबाकू दुनियाभर में हर साल 81.2 लाख लोगों की जान लेता है।
-70 लाख मौतें इनमें से तंबाकू का सीधे इस्तेमाल करने से होती हैं।
-12 लाख मासूम सिगरेट के धुएं के संपर्क में आकर दम तोड़ देते हैं।
-80% तंबाकू की लत के शिकार लोग गरीब-विकासशील देशों में रहते हैं।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / सर्दी युवाओं के दिल को ज्यादा भाती है। उन्हें गर्मी या बारिश के मुकाबले ठंड की दस्तक का अधिक बेसब्री से इंतजार होता है। अमेरिका में ‘वनपोल’ की ओर से दो हजार युवाओं पर की गई रायशुमारी तो कुछ यही बयां करती है।
सर्वे में शामिल 56 फीसदी प्रतिभागियों ने ठंडी हवा के झोंके से तन-मन में नई ऊर्जा का संचार होने की बात कही। 51 फीसदी ने बताया कि पत्तियों के रंग बदलने से उत्पन्न दिलकश नजारे उन्हें ‘फील गुड’ कराते हैं।
44 प्रतिशत प्रतिभागियों को सर्दियां इसलिए भाती हैं क्योंकि उन्हें चाय-कॉफी और हॉट चॉकलेट के सेवन के बहाने नहीं ढूंढने पड़ते। 42 फीसदी को सूप और तैलीय पकवानों के सेवन का मौसम आने के चलते खुशी महसूस होती है। फीसदी प्रतिभागी क्रिसमस, हैलोविन और थैंक्स-गिविंग जैसे पर्वों के चलते सर्दियों की बाट जोहते हैं। 35 फीसदी को रंग-बिरंगे स्वेटर तो 29 फीसदी को बूट पहनने के लिए ठंड का इंतजार होता है।
हालांकि, सर्वे में यह भी देखा गया कि कोरोना संक्रमण के डर के चलते इस बार 68 फीसदी प्रतिभागी घर में ही सर्दियां बिताने की सोच रहे हैं। 31 फीसदी ने क्रिसमस और हैलोविन के जश्न से दूर रहने का फैसला किया है।

शौर्यपथ / विश्व हैंड वॉश दिवस: कोरोना से बचना है तो बार-बार अपने हाथों को धोएं आज विश्व हैंड वॉश दिवस है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य यही है कि लोगों को हाथ धोने के महत्त्व के बारे में जागरूक किया जा सके। चूंकि हाथ धोने और निरंतर हाथों की सफाई बनाए रखने से बहुत सी बीमारियों से बचा जा सकता है इसलिए हाथ धोने के महत्त्व को सभी को जानना जरूरी है। आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में आ चुकी है। कोरोना वायरस की कोई दवा या वैक्सीन ना होने की वजह से बचाव ही रोकथाम माना जा रहा है। मास्क पहनने के साथ ही हाथ धोना कोरोना से बचने का कारगर उपाय है। इस साल की थीम है- "हाथों की सफाई सभी के लिए (हैंड हाईजीन फॉर ऑल)।"
आज के समय में बहुत से डॉक्टरों का मानना है कि सैनिटाइजर की तुलना में साबुन का इस्तेमाल करना कहीं बेहतर है। वर्तमान में वायरस से निपटने और उसके बाद भी साबुन से हाथ धोना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। कोविड-19 ने हमें अपने स्वास्थ की सुरक्षा के लिए सचेत रहना सिखा दिया है। आने वाले वक्त में हमें इस आदत को ऐसे ही बनाए रखना है।
सैनिटाइजर से बेहतर है साबुन
ज्यादातर डॉक्टरों की सलाह यही है कि सैनिटाइजर का प्रयोग आवश्यकता पड़ने पर ही करें। 20 सेकेन्ड तक साबुन से हाथ धोना आपको अनगिनत बीमारियों से बचा सकता है। हाथ गंदे होने पर सैनिटाइजर से हाथों की त्वचा खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। त्वचा पर पड़ने वाली दरारों से वायरस के शरीर में प्रवेश करने की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि जहां तक संभव हो साबुन और पानी का ही प्रयोग करें। यदि साबुन नहीं है तो ही सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
कोरोना के दौर में बढ़ गयी है सैनिटाइजर की मांग
कोरोना नायरस के फैलने के बाद से ही सैनिटाइजर की मांग में गगनचुंबी इजाफा हुआ है। लोग ज्यादा से ज्यादा और अलग-अलग प्रकार के सैनिटाइजर खरीद रहे हैं। प्लास्टिक के छोटे डिब्बों में पैक होने की वजह से हैंड सैनिटाइजर को कैरी करना बहुत आसान है। एक ओर जहां सैनिटाइजर कुछ खास स्थितियों में ही काम आ सकते हैं वहीं दूसरी ओर तेल, ग्रीस आदि को निकालने में यह साबुन जितने कारगर नही हैं। सैनिटाइजर खरीदते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे-
1. 70 प्रतिशत से अधिक अत्कोहल वाले सैनिटाइजर ही खरीदें। यह वायरस को खत्म करने में ज्यादा प्रभावशाली है।
2. बाजार में बिकने वाले अल्कोहल फ्री सैनिटाइजर न खरीदें। वे वायरस का खात्मा करने में सक्षम नही हैं।
इस वक्त बाजार में तरह-तरह के उत्पाद उपल्बध हैं। ऐसे में लोगों को लगता है कि हाथ धोना उतना प्रभावी नहीं है। आज विश्व हैंड वॉशिंग डे पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को हाथ धोने के महत्त्व के बारे में जागरूक कीजिए ताकि कोरोना वायरस से लड़ाई कुछ आसान हो जाए। साथ ही अपने हाथों की त्वचा का ख्याल रखने के लिए उन पर क्रीम लगाते रहें।

खाना खजाना / शौर्यपथ / कबाब के शौकीन लोग नवरात्रि व्रत में भी ले सकते हैं स्वादिष्ट वेज कबाब का मजा। आपने मटर और दही के कबाब तो बहुत खाएं होंगे लेकिन क्या आपने कभी केले के कबाब का स्वाद भी चखा है। यकीन मानिए इसका स्वाद चखने वाले फिर किसी कबाब को चखना पसंद नहीं करते। तो आइए जानते हैं कैसे बनाया जाता है केला-ए- कबाब।
केला-ए- कबाब बनाने के लिए सामग्री-
-250 ग्राम (छीलकर कटे हुए) कच्चे केले
-1 बड़ी इलायची
-¼ कप कूटू का आटा
-2 टी स्पून सेंधा नमक
-2 छोटे चम्मच भुने हुए और पाउडर के रूप में कुटे हुए) धनिया के बीज़
-1/2 टी स्पून मिर्च पाउडर
-2 टी स्पून नींबू का रस
-एक कटी हुई हरी मिर्च
-2 टेबल स्पून धनिया कटा हुआ
-देसी घी
-ऊपर से लगाने के लिए कूटू का आटा
केला-ए- कबाब बनाने का तरीका-
केला-ए- कबाब बनाने के लिए सबसे पहले केले, अदरक और इलायची को भाप में थोड़ा पका लें। केले के मुलायम होने पर इन्हें ठंडा होने के लिए अलग रख दें। केले के ठंडा होने पर इसे मैश करके बाकी सामग्री के साथ मिला लें। अब इस मिश्रण को आटे की तरह गूंथकर लंबी गोल रोड्स तैयार करें। इसके ऊपर अब कूटू का आटा लगाएं। पैन में घी गर्म करके हल्की आंच पर इन्हें फ्राई कर लें। दोनों तरफ से हल्के भूरे रंग का होने पर इन्हें गर्मागर्म सर्व करें।

नवरात्रि स्पेशल / शौर्यपथ / का उत्सव जल्द शुरू होने वाला है। ऐसे में माता के भक्त मां को प्रसन्न् करने के लिए पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं। बता दें, इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूर से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक चलेंगे। नवरात्रि का पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। ऐसे में अगर आप भी पूरे 9 दिनों तक व्रत रखने वाले हैं तो अपनी डाइट को चुनते समय ध्यान रखें ये जरूरी बातें।

डाइट सही नहीं होने पर व्यक्ति को कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है। डाइट चार्ट बनाते समय उन चीजों को जरूर शामिल करें जिसमें आपको प्रोटीन और न्यूट्रिएंट्स की प्रचूर मात्रा मिल सके। ऐसे में आइए जानते हैं नवरात्रि व्रत में सेहतमंद बने रहने के लिए कब किस चीज का करना चाहिए सेवन।

नवरात्रि व्रत में करें इन चीजों का सेवन-
नवरात्रि के दिन ऐसे करें अपने दिन की शरूआत-
नवरात्रि के दिन सुबह ग्रीन टी और खजूर के साथ अपने दिन की शरूआत करें। ऐसा करने से आप सारा दिन फ्रेश महसूस करेंगे।

नाश्ता-
नाश्ते में आप फल और सूखे मेवों का सेवन कर सकते हैं।

लंच-
नवरात्रि व्रत में लंच के समय नारियल पानी, जूस,साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू के आटे की पूरी और खीर का सेवन करने से आपको कमजोरी महसूस नहीं होगी।

शाम का नाश्ता-
शाम के नाश्ते में आप कुछ फल और दही का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा आलू से बने स्नैक या आलू चाट का भी सेवन किया जा सकता है। ऐसा करने से आपको कमजोरी महसूस नहीं होगी।

डिनर-
डिनर में लौकी की सब्जी, गाजर का हलवा, कुट्टू के आटे की देसी घी में बनी पूरी या सिंघाड़े के आटे की बनी पूरी का सेवन करने से आप शरीर में ऊर्जा महसूस करेंगे। नवरात्रि व्रत के दौरान रात को सोने से पहले एक गिलास हल्का गर्म दूध का सेवन भी कर सकते हैं। ऐसा करने से शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होगी।

रायपुर / शौर्यपथ / प्रत्येक वर्ष 15 अक्टूबरको विश्व हाथ धुलाई दिवस (Global Hand washing Day)मनाया जाता है ।सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देने वाली गंदगी हाथों में छिपी होती है । हाथों का इस्तेमाल हम किसी भी वस्तु को छूने, उसका इस्तेमाल करने और कई तरह के रोज़मर्रा के कामों का सम्पादन में करते है ।बिना हाथ धोए सेवन करने से हाथों में लगी गंदगी हमारे शरीर में चली जाती है। जो कई बीमारियों का कारण बन जाती है। साबुन से साथ हाथ धोना बीमारियों से बचाव और जीवन की सुरक्षा के लिए एक आसान, प्रभावी और बेहतर तरीका है। इस वर्ष की थीम "सभी के लिए स्वच्छ हाथ' "(Hand Hygiene for All)पर केंद्रित है । हाथों की धुलाई के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से पूरे विश्व में 15 अक्टूबर को विश्व हाथ धुलाई दिवस (ग्लोबल हैंड वाशिंग डे) मनाया जाता है। हाथों की साफई रखने से संक्रमण से होने वाली बीमारियों से भी काफी हद तक बचा जा सकता है। ज्ञात रहे प्रथम ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे 2008 में मनाया गया, जिसमें विश्व भर के 70 से अधिक देशों के 120 मिलियन से अधिक बच्चों ने साबुन से हाथ धोये थे ।
महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के ज़िला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार पांण्डेय ने बताया ज़िले की 1880 आंगनबाडी की लगभग 3700 कार्यकर्ता और सहायिकाएं डिजिटल माध्यम से हाथ धुलाई के लियें जागरुक करेगी साथ ही गृह भेंट कर हाथों की साफई रखने और गंदे हाथों से होने वाली संक्रमित बीमारियों से भी लोगों को जागरुक करेंगी ।
हाथ धोना क्यों जरूरी
खाना खाने से पहलेऔर खाना खाने के बाद, शौच के उपरांतहाथों को साबुन से जरूर धोएं। हाथ पोंछने के लिए तौलिए या साफ कपडे का प्रयोग करें। तौलियों या हाथ पोछने के कपडे को गर्म पानी में धोएं,हो सके तो डीटॉल का प्रयोग भी कर सकते है ताकि तौलियों या हाथ पोछने के कपडा पूरी तरह से कीटाणु मुक्त हो जाएं।
हथेलीयों की लकीरों में छुपे होते कीटाणु
ज़िला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ.रवि तिवारी कहते हैं हाथ धोना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।साथ ही हाथ धोना स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी है। कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी से बचने और अन्य संक्रमण से बचने के लिये नियमित रुप से हर व्यक्ति को स्वास्थ्य की छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखना चाहिए। दिन में कई चीजों को छूते हैं जिससे कीटाणु हाथ में रह जाते हैं। हाथ धोने के लिए हर बार साबुन का प्रयोग करें विशेषकर बच्चों को खेल के उपरांत, स्कूल से आने के बाद शौच के बादकिसी संक्रामित रोगी के सम्पर्क या हाथ मिलाने के बाद कोई भी वस्तु न खाएं। खाने से पूर्व हाथ साबुन से धोने की आदत डालना चाहिए।
इसको भी समझें
खाना बनाते या खाना खाने से पहले और शौच के बाद, साबुन से हाथ धोने से तेज श्वास संक्रमण की दर को कम करता है। डायरिया जैसी प्राण लेवा बीमारियों की मृत्यु दर को कम किया जा सकता हैं। बच्चों का प्रसव कराने वाले व माताओं के साबुन से हाथ धोने से नवजात शिशु के जीवित रहने की संभावना बढ़ती हैं।
हाथ धोने का सही तरीका
हाथ धोने का सही तरीका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देता है। हाथ धोने का भी एक विशेषतरीक है। हाथ कम से कम 20 सेकंड तक अवश्य धोएं है। हाथ पानी से गीले करें साबुन लगाकर 20 सेकंड तक हाथों को एक-दूसरे पर रगड़ें। इस प्रक्रिया में हाथ के साथ हथेली, पीछे का हिस्सा, उंगलियां और नाखून के आस-पास अच्छे से रगडें उसके बाद पानी से हाथ धोएं और स्वच्छ कपड़े से हाथ पोछें। हाथ पोछने के लिए रुमाल या तौलिये का प्रयोग करें।
हाथों को धोना कब-कब जरुरी हैं
खाना-खाने से पूर्व और उपरांत, नवजात को छूने से पूर्व, शौच के उपरांत साबुन से, खांसने,छींकने, या नाक साफ़ करने, जानवर और कचरे को छूने के उपरांत ज़ख्म के उपचार से पहले और बाद में। वर्तमान में बाज़ार और अस्पताल से आने के बाद हाथों को अच्छे से धोने का नियम बना लें ।

दुर्ग / शौर्यपथ / शिक्षा माफियाओ को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग अपने कर्तव्य से भटक कर उदासीन रवैया अपना करके पालकों से विश्वासघात करके फीस जमा करने के लिए गुमराह कर दबाव बना कर रहे जिसके विरोध फलस्वरूप आज दुर्ग एनएसयूआई के तत्वधान में जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू के नेतृत्व में जिला कलेक्टर के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी के नाम से निजी स्कूलों के मनमानी पर रोक लगाने तत्काल दंडात्मक कार्यवाही करने के लिए अपर कलेक्टर दिवया वैसनव को ज्ञापन सौंपा गया पालकों को हो रही परेशानी को देखते हुए सोनू साहू ने बताया कि अशासकीय विद्यालयों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानन कर जिले के निजी विद्यालय में ट्यूशन फीस के साथ साथ पालकों से पूरे वर्ष के फीस रहे है अभिभावकों के पूछे जाने पर निजी स्कूल द्वारा ट्यूशन फीस म वृद्धि की बात कहा जाता है शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 16 के अंतर्गत कानून शासन द्वारा जारी निर्देश का उल्लंघन करते हुए निजी विद्यालय जैसे कृष्णा पब्लिक स्कूल, अमरेश मिश्रा पब्लिक स्कूल धनोरा शकुन्तला विद्यालय रामनगर भिलाई, एमजीएम स्कूल भिलाई के छात्र छात्राओं के साथ भेदभाव व मानसिक प्रतांडना कर निजी स्कूलों की ओर से लगातार पालकों से उस अंतराल की फीस की मांग किया जा रहा है शिक्षा माफियाओ को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग काम कर रहे है काम भेदभाव व मानसिक शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह से बन्द थी और इस दौरान जबकि अध्ययन कार्य बाधित थी बिना किसी सेवा की स्कूलों की ओर से फीस व अन्य खर्चों की मांग करना अवैध है। यह पूरी तरह से अनुचित है। साथ ही कुछ स्कूलों ने सितंबर महीने से ऑफ़लाइन क्लास शुरू करने की सूचना पालकों को दी है और शर्त यह रखी जा रही है कि पिछले महीनों की फीस न जमा करने की स्थिति में छात्रों को ऑनलाइन क्लास में सम्मिलित नहीं किया जाएगा यह शिक्षा के अधिकार का हनन है .
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर ने केस क्रमांक डब्लयूपिसी 10 40/2020,दिनांक 9 जुलाई 2020 में स्पष्ट निर्णय दिया गया है इस वर्ष बीते वर्ष 2020, 21 वर्ष 2019, 20 का सिर्फ ट्यूशन फीस ही लिया जाएगा ट्यूशन फीस के अलावा और कोई फीस नहीं ले सकते जब तक कि स्थिति सामान्य नहीं होतीस्कूल प्रबंधक बच्चों को शिक्षा से किसी प्रकार के जान बूझकर उसकी अनदेखी करता है तो या किशोर न्याय बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम 2015 की धारा 75 और 86 के तहत गंभीर प्रवित्तिय का अपराध है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में छात्रों के एडमिशन फॉर्म में फोर्स मेजर क्लास का उल्लेख नहीं है इसलिए बिना सेवा की फीस और अन्य खर्च की मांग करना गैरकानूनी है और तो और ऑनलाइन क्लास पर फॉर्म में कोई उल्लेख नहीं है। निजी स्कूलों को इस पर विचार करना चाहिए पूर्व वर्षों की तरह पूरे महीने की फीस वसूली कैसे कर सकती है।
अभी जो भी फीस की मांग की जा रही है, उसमें मार्च महीने से लेकर पूरे साल भर के फीस का जिक्र है जो पूरी तरह से अनुचित और व्यवहारिक है। विनम्र प्रार्थना है कि किसी भी छात्र के अध्ययन में कोई बाधा उत्पन्न ना हो और छात्र नियमित रूप से अपने अध्ययन का कार्य सकुशल करे। छात्र का नाम किसी भी स्थिति में विद्यालय से नहीं हटाया जावे हमारे इस मांग पर विचार करते हुए छात्र हित में निर्णय ले लिया जावे माँग पूरी नहीं होने पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयुआई द्वारा उग्र आंदोलन जैसे निजी स्कूलों में तालाबंदी कर प्रदर्शन किया जाएगा। जिला कलेक्टर दुर्ग के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के नाम से निजी स्कूलों के मनमानी पर रोक लगाने लिए के ज्ञापन सौपा गया इस दौरान शिवांग साहू,अंकित,अमोल जैन,विकास राजपूत,गोल्डी कोसरे,हरीश देवांगन,यश,तेजस्वी सहित बहुत से छात्र नेता उपस्थित थे।

खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि व्रत में अधिकतर घरों में व्रत खोलते समय कुट्टू के पकौड़े बनाए जाते हैं। लेकिन कई बार पूरे नौ दिनों तक कुट्टू का सेवन करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऐसे में स्वाद और सेहत को बनाए रखने के लिए आप इस नवरात्र ट्राई कर सकते हैं खीरे के कुरकुरे पकौड़े। खीरे की पकौड़ी खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है। तो देर किस बात की चलिए आपको बताते हैं कैसे बनाई जाती है खीरे की पकौड़ी।
खीरे के पकौड़े बनाने के लिए लगने वाली सामग्री-
-1 कप सिंघाड़े का आटा
-2 टी स्पून सेंधा नमक
-1/2 टी स्पून मिर्च पाउडर
-1/2 टी स्पून धनिया पाउडर
-1 टेबल स्पून हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ
-दो बड़े पतले कटे हुए खीरे
-फ्राई करने के लिए तेल
खीरे के पकौड़े बनाने का तरीका-
नवरात्रि व्रत में खीरे के पकौड़े बनाने के लिए खीरे और तेल को छोड़कर सभी सामग्री को एक साथ मिला लें। अब पकौड़े का बैटर तैयार करने के लिए इसमें थोड़ा पानी मिलाएं। कढ़ाही में तेल गर्म करके उसमें खीरे के टुकड़ों को बैटर से निकाकर तेल में डालें। पकौड़ों को कुछ मिनट बाद दूसरी तरफ से पलटकर तलें। तले हुए पकौड़ों को साइड में निकालकर अलग रख लें। ध्यान दें, इन पकौड़ों को सर्व करने से पहले एक बार दोबारा तल लें। ऐसा करने से पकौड़ों में कुरकुरापन बना रहता है। पकौड़ों को गाढ़े भूरा रंग होने तक तलकर सर्व करें।
नवरात्रि में घर पर बनाएं टेस्टी कुट्टू का डोसा, ट्राई करें ये टेस्टी क्रद्गष्द्बश्चद्ग
जल्द ही नवरात्रि का उत्सव आने वाला है। ऐसे में माता के भक्त मां को प्रसन्न रखने के लिए पूरे 9 दिनों तक उपवास रखते हैं। नवरात्रि व्रत में खाने के विकल्प बहुत कम होते है। लोग इस समय ज्यादातर आलू और कुट्टू का सेवन करते हैं। अगर आप भी कुट्टू की पूरी या पकौड़ी खाते-खाते बोर हो गए हैं तो इस बार अपनी किचन में ट्राई करें टेस्टी कुट्टू का डोसा। आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती हैं नवरात्रि व्रत की ये स्वादिष्ट रेसिपी।
कुट्टू का डोसा बनाने के लिए लगने वाली सामग्री-
आलू की फीलिंग के लिए-
-3 उबले हुए आलू
-तलने के लिए घी
-1/2 टी स्पून सेंधा नमक
-1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
-1/2 टी स्पून अदरक, टुकड़ों में कटा हुआ
डोसा बनाने का तरीका-
-5 टेबल स्पून कुट्टू का आटा
-1/2 टी स्पून अरबी
-1/2 टी स्पून सेंधा नमक
-1/2 टी स्पून अजवाइन
-1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
-1 टी स्पून अदरक
-1 टी स्पून कटी हुई हरी मिर्च
-घी
-अजवाइन
कुट्टू का डोसा बनाने का तरीका-
आलू की फीलिंग बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में घी गर्म करके उसमें आलू ?को डालकर मैश करें। अब इसके सभी मसाले डालकर अच्छे से मिला लें। इस मिश्रण को हल्का ब्राउन होने तक कुछ मिनट अच्छे से भूनने के बाद एक तरफ रख दें। अब डोसा बनाने के लिए एक बाउल में अरबी को मैश करके आटा, पानी और सेंधा नमक डालकर अच्छे से मिला लें। अब इसमें अजवाइन, लाल मिर्च पाउडर, अदरक और हरी मिर्च डालकर एक बार दोबारा मिला लें। इस मिश्रण में पानी डालकर उसका एक स्मूद बैटर बना लें।
अब एक फ्लैट पैन लेकर उसपर घी लगाएं। कड़छी की मदद से डोसे के बैटर को पैन पर फैला लें। कुछ देर डोसे को पकाने के बाद उसके किनारों पर थोड़ा सा घी डालकर और पका लें। ऐसा करने से डोसा क्रिस्पी बनेगा। अब डोसे को दूसरी तरफ से भी पलटकर सिकने दें। आप अब डोसे के बीच में फीलिंग रखकर उसे फोल्ड कर दें। आप इस व्रत के डोसे को पुदीने या नारियल की चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व कर सकते हैं।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है। एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए एक नई इलाज पद्धति खोज निकाली है, जिसे अपनाने के बाद छह महीने के भीतर ही रोज-रोज इंसुलिन के इंजेक्शन लेने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।
अस्पताल में 45 मिनट में पूरी होने वाली इस प्रक्रिया के तहत मरीज को गर्म पानी से भरा एक गुब्बारा निगलवाया जाता है। यह गुब्बारा छोटी आंत में पहुंचकर उसकी बाहरी परत ‘ड्यूडेनम’ को तेज ऊष्मा प्रदान करता है। इससे वहां मौजूद पुरानी कोशिकाएं जल जाती हैं। उनकी जगह नई कोशिकाओं का विकास होने लगता है। ये कोशिकाएं अग्नाशय को इंसुलिन के उत्पादन के लिए प्रेरित करती हैं, जो ब्लड शुगर को काबू में रखने के लिए बेहद जरूरी है।
‘यूनाइटेड यूरोपियन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी मेडिकल ग्रुप कॉन्फ्रेंस’ में पेश अध्ययन में शोधकर्ता डॉ. सुजैन मेरिंग ने दावा किया कि नई इलाज पद्धति टाइप-2 डायबिटीज के उपचार में नई क्रांति लाएगी। मरीज को महज एक बार ‘एंडोस्कोपी’ सरीखी चिकित्सकीय प्रक्रिया से गुजरना होगा और वह ताउम्र इंसुलिन के इंजेक्शन लेने के झंझट से छुटकारा पा लेगा।

उन्होंने बताया कि मरीज की आंत में पहुंचाए जाने वाले गुब्बारे में 90 डिग्री सेल्सियस तापमान वाला पानी भरा होगा, जो ‘ड्यूडेनम’ की विकृत कोशिकाओं को नई कोशिकाओं से बदल देगा। ये कोशिकाएं अग्नाशय को इंसुलिन पैदा करने का संदेश देती हैं।
असरदार-
-23% टाइप-2 डायबिटीज रोगियों को ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है।
-नई इलाज पद्धति अपनाने के बाद 75% मरीजों को छह महीने में ही इंसुलिन के इंजेक्शन से मुक्ति मिल गई।
-इन प्रतिभागियों का बीएमआई (वजन और लंबाई का अनुपात) 29.2 से घटकर औसतन 26.4 पर पहुंच गया।
इसलिए जरूरी है इंसुलिन
-इंसुलिन अग्नाशय में पैदा होने वाला एक अहम हार्मोन है, जो ग्लूकोज को ऊर्जा में तब्दील कर मोटापे और डायबिटीज की समस्या को दूर रखता है।
बढ़ती कमी चिंता का सबब
-08 करोड़ डायबिटीज रोगियों को इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ने का अनुमान 2030 तक
-इंसुलिन की मांग में एशिया-अफ्रीका में 20 फीसदी इजाफा होने की आशंका जताई गई है।
-दुनियाभर में 3.3 करोड़ डायबिटीज रोगियों को मौजूदा समय में इंसुलिन तक पहुंच हासिल नहीं है।

खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि व्रत में अधिकतर घरों में व्रत खोलते समय कुट्टू के पकौड़े बनाए जाते हैं। लेकिन कई बार पूरे नौ दिनों तक कुट्टू का सेवन करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऐसे में स्वाद और सेहत को बनाए रखने के लिए आप इस नवरात्र ट्राई कर सकते हैं खीरे के कुरकुरे पकौड़े। खीरे की पकौड़ी खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है। तो देर किस बात की चलिए आपको बताते हैं कैसे बनाई जाती है खीरे की पकौड़ी।

खीरे के पकौड़े बनाने के लिए लगने वाली सामग्री-
-1 कप सिंघाड़े का आटा
-2 टी स्पून सेंधा नमक
-1/2 टी स्पून मिर्च पाउडर
-1/2 टी स्पून धनिया पाउडर
-1 टेबल स्पून हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ
-दो बड़े पतले कटे हुए खीरे
-फ्राई करने के लिए तेल

खीरे के पकौड़े बनाने का तरीका-
नवरात्रि व्रत में खीरे के पकौड़े बनाने के लिए खीरे और तेल को छोड़कर सभी सामग्री को एक साथ मिला लें। अब पकौड़े का बैटर तैयार करने के लिए इसमें थोड़ा पानी मिलाएं। कढ़ाही में तेल गर्म करके उसमें खीरे के टुकड़ों को बैटर से निकाकर तेल में डालें। पकौड़ों को कुछ मिनट बाद दूसरी तरफ से पलटकर तलें। तले हुए पकौड़ों को साइड में निकालकर अलग रख लें। ध्यान दें, इन पकौड़ों को सर्व करने से पहले एक बार दोबारा तल लें। ऐसा करने से पकौड़ों में कुरकुरापन बना रहता है। पकौड़ों को गाढ़े भूरा रंग होने तक तलकर सर्व करें।

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