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May 31, 2026
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लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / बांसुरी प्रकृ‍‍ति का एक अनुपम वरदान है। भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी अतिप्रिय है। वे इसे हमेशा अपने साथ रखते हैं। घर में जहां देवता बैठे हो वहां एक सुंदर सी बांसुरी लाकर रखना चाहिए।
आइए जानें बांसुरी के बारे में >
1. बांसुरी को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है।
2. बांसुरी की अभिव्यक्त शक्ति अत्यंत विविधतापूर्ण है, उससे मधुर संगीत बजाया जाता है।
3. बांसुरी प्राकृतिक आवाजों की नकल करने में निपुण है, उससे कई तरह के पक्षियों के आवाज की हू-ब-हू नकल की जा सकती है।
4. बांसुरी घर के वातावरण में मौजूद समस्त नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करके सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय करने का कार्य करती है।
5. बांसुरी बांस से बनी होती है तथा इसके पौधे को दिव्य माना जाता है। अत: घर में बांसुरी का प्रयोग करके कई तरह से लाभ उठाया जा सकता है।
6. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति अपनी नौकरी से परेशान रहता हैं, वह अपने घर में बांसुरी रखें , बांसुरी उसकी सारी मुश्किलें आसान कर सकती है।
7. अगर कोई काफी मेहनत के बाद भी अपने बिजनेस में सफलता हासिल नहीं कर पा रहा है तो उसे बांस की बनी बांसुरी अपने दुकान में रखनी चाहिए इससे व्यापार में उन्नति होती है।
8. नए व्यवसाय का आरंभ और ईश्वर का पूजन करते समय अपने दुकान की छत पर दो बांसुरी चिपकानी चाहिए या टांग देनी चाहिए। यह बांसुरी अच्छी सफलता दिलाने में मददगार साबित होता है।
9. बांसुरी से निकलने वाला स्वर प्रेम की बरखा करता है। जिस घर में बांसुरी रखी होती है वहां प्रेम और धन की कोई कमी नहीं रहती है।
10. बांसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब बांसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है तो बुरी आत्माएं दूर हो जाती हैं और जब इसे बजाया जाता है तो घरों में शुभ चुंबकीय प्रवाह का प्रवेश होता है।

धर्म संसार / शौर्यपथ / नवरात्रि में कैसे करें पूजन - आइए जानें नवरात्रि में पूजन कैसे करना चाहिए और इसके क्या नियम हैं?
* आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
* घर के ही किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।
* वेदी में जौ और गेहूं दोनों को मिलाकर बोएं।
* वेदी पर या समीप के ही पवित्र स्थान पर पृथ्वी का पूजन कर वहां सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।
* इसके बाद कलश में आम के हरे पत्ते, दूर्वा, पंचामृत डालकर उसके मुंह पर सूत्र बाधें।
* कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।
* इसके बाद वेदी के किनारे पर देवी की किसी धातु, पाषाण, मिट्टी व चित्रमय मूर्ति विधि-विधान से विराजमान करें।
* तत्पश्चात मूर्तिका आसन, पाद्य, अर्ध, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पुष्पांजलि, नमस्कार, प्रार्थना आदि से पूजन करें।
* इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा स्तुति करें।
* पाठ स्तुति करने के बाद दुर्गाजी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
* इसके बाद कन्या भोजन कराएं। फिर स्वयं फलाहार ग्रहण करें।
प्रतिपदा के दिन घर में ही जवारे बोने का भी विधान है। नवमी के दिन इन्ही जवारों को सिर पर रखकर किसी नदी या तालाब में विसर्जन करना चाहिए। अष्टमी तथा नवमी महातिथि मानी जाती हैं।
इन दोनों दिनों में पारायण के बाद हवन करें फिर यथा शक्ति कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।
नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें
* इन दिनों व्रत रखने वाले को जमीन पर सोना चाहिए।
* ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
* व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए।
* नारियल, नींबू, अनार, केला, मौसमी और कटहल आदि फल तथा अन्न का भोग लगाना चाहिए।
* व्रती को संकल्प लेना चाहिए कि हमेशा क्षमा, दया, उदारता का भाव रखेगा।
* इन दिनों व्रती को क्रोध, मोह, लोभ आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए।
* देवी का आह्वान, पूजन, विसर्जन, पाठ आदि सब प्रातःकाल में शुभ होते हैं, अतः इन्हें इसी दौरान पूरा करना चाहिए।
* यदि घटस्थापना करने के बाद सूतक हो जाएं, तो कोई दोष नहीं होता, लेकिन अगर पहले हो जाएं, तो पूजा आदि न करें।
दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की पौराणिक कथा
पुराणों में दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की अलग अलग कथाएं मिलती हैं। कई जगहों पर उन्हें माता सती या माता पार्वती की बहनें बताई गई हैं तो कुछ जगहों पर उन्हें माता सती का ही रूप बताया गया है। यह भी कहा जाता है कि उनमें से कुछ माता की बहनें हैं तो कुछ उनका ही रूप हैं। उनकी उत्पत्ति कथाओं में से एक कथा पढ़ें।
पुराणों अनुसार जब भगवान शिव की पत्नी सती ने दक्ष के यज्ञ में जाना चाहा तब शिवजी ने वहां जाने से मना किया। इस इनकार पर माता ने क्रोधवश पहले काली शक्ति प्रकट की फिर दसों दिशाओं में दस शक्तियां प्रकट कर अपनी शक्ति की झलक दिखला दी। इस अति भयंकरकारी दृश्य को देखकर शिवजी घबरा गए। क्रोध में सती ने शिव को अपना फैसला सुना दिया, 'मैं दक्ष यज्ञ में जाऊंगी ही। या तो उसमें अपना हिस्सा लूंगी या उसका विध्वंस कर दूंगी।'
हारकर शिवजी सती के सामने आ खड़े हुए। उन्होंने सती से पूछा- 'कौन हैं ये?' सती ने बताया,‘ये मेरे दस रूप हैं। आपके सामने खड़ी कृष्ण रंग की काली हैं, आपके ऊपर नीले रंग की तारा हैं। पश्चिम में छिन्नमस्ता, बाएं भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, पूर्व-दक्षिण में धूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, पश्चिम-उत्तर में मातंगी तथा उत्तर-पूर्व में षोड़शी हैं और मैं खुद भैरवी रूप में अभयदान देने के लिए आपके सामने खड़ी हूं।' यही दस महाविद्या अर्थात् दस शक्ति है। बाद में मां ने अपनी इन्हीं शक्तियां का उपयोग दैत्यों और राक्षसों का वध करने के लिए किया था।
दस महा विद्या : 1.काली, 2.तारा, 3.त्रिपुरसुंदरी, 4.भुवनेश्वरी, 5.छिन्नमस्ता, 6.त्रिपुरभैरवी, 7.धूमावती, 8.बगलामुखी, 9.मातंगी और 10.कमला।
प्रवृति के अनुसार दस महाविद्या के तीन समूह हैं। पहला:- सौम्य कोटि (त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, कमला), दूसरा:- उग्र कोटि (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी), तीसरा:- सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)।
जानिए राशिनुसार किस शुभ ग्रंथ से घर में आएगी समृद्धि
मेष-मेष राशि वाले प्रात:काल रुद्राष्टक के 11 पाठ करें।
वृषभ- वृषभ राशि वाले प्रात:काल देवी-कवच का पाठ करें।
मिथुन- मिथुन राशि वाले प्रात:काल गणपति-अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
कर्क- कर्क राशि वाले गौरी-जी की आराधना करें।
सिंह- सिंह राशि वाले आदित्य-ह्रदय-स्तोत्र के 11 पाठ करें।
कन्या- कन्या राशि वाले गायत्री-मंत्र जाप करें।
तुला- तुला राशि वाले श्री-सूक्तम का पाठ करें।
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले मंगला-स्तोत्र का पाठ करें।
धनु- धनु राशि वाले साई-चरित्र का पाठ करें।
मकर- मकर राशि वाले हनुमान चालीसा के 11 पाठ नौ दिन करें।
कुंभ- कुंभ राशि वाले सुंदरकांड का पाठ करें।
मीन- मीन राशि वाले राम-रक्षास्तो‍त्र का पाठ करें।
विशेष- उपरोक्त आराधना नवरात्रि में प्रात:काल करने से विशेष लाभ मिलेगा।

सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की दवा खाकर कोरोना संक्रमित डॉक्टर स्वस्थ हो गए। उन्हें कोरोना संक्रमण के बाद सांस लेने में दिक्कत और बुखार भी था। उनकी पत्नी भी इस बीमारी से पीडि़त थीं। उन्होंने भी इलाज के लिए इन्हीं दवाओं का उपयोग किया। दोनों अब स्वस्थ हैं।
सुपर स्पेश्यलिटी शिशु अस्पताल के कोरोना वार्ड में एक महीने मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. प्रमोद कश्यप खुद होम्योपैथी के डॉक्टर हैं। 20 दिन पहले वह कोरोना संक्रमित हो गए। दो दिन बाद उनकी पत्नी दिव्या भी कोरोना से पीडि़त मिली। दोनों को शुरू में एलोपैथी दवाएं नहीं मिलीं, ऐसे में उन्होंने आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की दवाओं का सेवन किया। करीब 10 दिन के बाद उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। अब दोनों स्वस्थ हैं और होम क्वारंटाइन हैं।
कश्यप ने बताया कि मुझे होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं पर पूरा विश्वास था। इसकी जानकारी भी थी। ऐसे में मैंने आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाएं लेनी शुरू कर दी। दो-तीन दिन मुझे बुखार भी था, लेकिन इससे घबराया नहीं। पॉजिटिव होने के बाद बुखार आया। एक दिन बाद सांस लेने भी थोड़ी परेशानी आई थी। दोनों चिकित्सा पद्धति की दवाओं का सेवन जारी रखा। धीरे-धीरे तबीयत सुधरती गई। अब पूरी तरह से स्वस्थ हूं।
पत्नी को भी यहीं दवाएं दी। एलोपैथी की दवा के नाम पर सिर्फ विटामिन बी काम्पलेक्स दवा ली। हालांकि लोगों को मेरी सलाह है कि कोरोना संक्रमण होने की स्थिति में डॉक्टरों के परामर्श के आधार पर ही दवाओं का सेवन करें। मैं खुद डॉक्टर था, इसलिए ये दवाएं लीं।
प्रतिदिन एक घंटे छत पर टहले-
कि कोरोना संक्रमण होने के बाद भी नियमित रूप से एक घंटे छत पर टहलने जरुर जाया करता था। जो प्रतिरोधक क्षमता को ठीक रखने के लिए जरुरी था। सुबह आधा घंटा और शाम को आधा घंटा टहला। जिसका फायदा भी मिला। पहले भी मैं प्रतिदिन टहला करता था। इसके लिए पार्क या सड़क के किनारे चलता था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण बाहर नहीं जा सकता था। इसलिए छत को ही पार्क बना लिया।
आयुर्वेदिक और होम्यापैथी में इन दवाओं का सेवन किया-
कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए कि आयुर्वेदिक दवाओं में गिलोय, हल्दी, तुलसी, आंवला, अश्वगंधा, ब्राह्मणी, आदि से बनी आयुर्वेदिक तरल का उपयोग किया। यह दिन में दो-तीन बार लिया करता था। वहीं होम्योपैथी में आर्सेनिक 200, सहित अन्य दवाएं ली। ताकि बुखार नियंत्रित रहे।
आजकल इन दवाओं की मांग भी बढ़ी है-
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए वर्तमान में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग बाजार में काफी बढ़ गई है। गिलोय, अश्वगंधा सहित अन्य औषधीय पौधों से बनी दवाओं की मांग पांच गुना से अधिक बढ़ गई हैं। कई आयुर्वेदिक दवाओं की बाजार में कमी हो गई है। वहीं होम्योपैथी में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आर्सेनिक 30 भी उपयोग में है।

सेहत / शौर्यपथ / कमजोर हड्डियां सिर्फ शरीर को ही कमजोर नहीं बनाती बल्कि हृदय के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं। अगर आप अपने हृदय को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो अपने हड्डियों को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है।
लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ हैंपटन के मेडिकल रिसर्च काउंसिल लाइफकोर्स इपिडेमियोलॉजी यूनिट के एक हालिया शोध में हड्डियों में मिनरल की कम मात्रा और खराब हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध पाया गया है। शोध में पाया गया है कि महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हड्डियों के कमजोर होने से हृदयरोग पनपते हैं।

जर्नल ऑफ बोन में प्रकाशित इस शोध में यूके बायोबैंक के डाटा का इस्तेमाल किया गया है। शोधकर्ताओं ने इमेजिंग और रक्त बायोमार्कर डाटा के कई प्रारूपों का संयुक्त तरीके से इस्तेमाल कर हड्डियों और हृदय के स्वास्थ्य के बीच संबंधों का आकलन किया।

इन कारणों से कमजोर हो सकती है हड्डी-
इनदिनों गठिया और हृदय की बीमारियों सबसे बड़े स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में उभर रहे हैं। दोनों तरह की बीमारियों की वजह बढ़ती उम्र, धूम्रपान और असक्रिय जीवनशैली है। शोध से पता चलता है कि जोखिम कारकों के समान होने के अलावा भी दोनों के बीच संबंध हो सकते हैं। इस शोध से यह भी पता चलता है कि दोनों तरह की समस्याओं का जैविक पाथवे भी समान हो सकता है। इस शोध से दोनों बीमारियों के लिए दवा की खोज आसान हो सकेगी।

सख्त हो जाती हैं धमनियां-
शोधकर्ताओं ने पाया कि हड्डी का घनत्व कम होने का संबंध धमनियों के सख्त होने से था। जिन महिलाओं और पुरुषों की हड्डी कमजोर थीं उनके हृदय की धमनियां ज्यादा सख्त थीं। शोध में पाया गया कि हड्डी में कमजोरी से जूझ रहे मरीजों में हृदयघात से मौत होने का खतरा ज्यादा था। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि हड्डी और हृदय के स्वास्थ्य की प्रणालियां पुरुषों और महिलाओं में अलग थी।

शोधकर्ता डॉक्टर जहरा राइशी ने कहा, हमारे शोध में कमजोर हड्डियो और दिल की बीमारियों के बीच सीधा संबंध पाया गया है। प्रोफेसर निक हार्वे ने कहा यूके बायोबैंक में मौजूद डाटा का बड़े पैमाने पर विश्लेषण करने पर पाया कि मस्क्यूलोस्केलेटल और कार्डियोवस्कुलर स्वास्थ्य का जैविक पाथवे एक जैसा है और इस खोज से इन दोनों के लिए दवा बनाने में मदद मिल सकती है। प्रोफेसर स्टीफन पीटरसन ने कहा, हृदयरोगों के जोखिम कारकों के बारे में जानकारी बढ़ने से उससे बचाव और उसके इलाज के बेहतर तरीकों के बारे में जाना जा सकेगा।
इन चीजों के सेवन से मजबूत होंगी हड्डियां-
कैल्शियम के स्रोत :
कैल्शियम के लिए आप दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां आपको कैल्शियम और आयरन दोनों ही देने में मदद करती है। मछली भी अच्छा विकल्प है। साबुत अनाज, केले, सार्डिनेस, सालमन, बादाम, ब्रेड, टोफू और पनीर कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।
विटामिन डी के स्रोत :
आप विटामिन डी के लिए फैटी फिश जैसे टूना, मेकरेल, सेलमॉन, अंडे का सफेद भाग, सोया मिल्क, डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, दही वगैरह मशरूम, अनाज, चीज, संतरे का जूस, कोका को आहार में शामिल कर सकते हैं।
पोटैशियम के स्रोत : पोटैशियम के लिए आप अपने आहार में जड़ यानी कंद-मूल शामिल करें। इनमें शकरकंद, आलू छिलके के साथ सहित अच्छा विकल्प है। इसके अलावा दूध या दूध से बनी चीजें भी आप आहार में शामिल कर सकते हैं।
मैग्नीशियम के स्रोत :
मैग्नीशियम के लिए आप हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। पालक मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत होता है। इसे अलावा टमाटर, आलू, शकरकंद भी ले सकते हैं।
नंबर गेम-
-हड्डियों का एक सामान्य वयस्क में +1 से -1 एसडी घनत्व होना चाहिए
-हड्डियों का घनत्व गठिया की बीमारी होने पर -2.5 एसडी हो जाता है

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोना वायरस ने पूरे विश्व को चपेट में ले रखा है। दुनियाभर के वैज्ञानिक आए दिन इसे लेकर नए-नए शोध कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के जॉर्जिया विश्वविद्यालय ने संक्रमण को लेकर एक नया अध्ययन किया है, जो बंद जगहों पर कोविड-19 के हवा में संचरण के बढ़ते सबूतों का समर्थन करता है।

शोधकर्ताओं ने कोरोना से संक्रमित एक चीनी रोगी पर अध्ययन किया, जिसके चलते बस के एयर कंडिशनिंग सिस्टम के जरिए बस में सवार दूसरे लोग भी संक्रमण की चपेट में आ गए। हालांकि बस में शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा था। इसका कारण यह था कि बस की खिड़कियां बंद थीं। वेंटिलेशन की समस्या के चलते दूसरे यात्री भी कोरोना का शिकार हो गए।

जामा इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित किए गए यह अध्ययन इस सवाल पर विचार करता है कि कोविड-19 हवा के जरिए कैसे फैल सकता है। यूजीए कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ की सहयोगी प्रोफेसर और रिसर्च की लेखक ये शेन ने कहा कि हवा के जरिए कोरोना संक्रमण के प्रसार की संभावना कई वैज्ञानिकों ने जताई है पर सीमित साक्ष्यों के साथ। हमारे शोध से ऐसे प्रमाण सामने आए हैं, जिसने इस संदेह को हकीकत में बदल दिया है।

शेन ने कहा कि काफी हद तक यही माना जाता रहा था कि खांसने और छींकने से निकलीं बूंदों के माध्यम से यह वायरस फैल रहा है। इसके बाद विश्व स्तर पर शारीरिक दूरी और हाथ धोने जैसे उपायों को अपनाया गया ताकि इसके प्रसारण पर लगाम लग सके। बावजूद इसके कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है।

भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जोखिम ज्यादा-
शेन ने कहा कि हमारे इस शोध के निष्कर्ष उन परिदृश्यों को उजागर करते हैं, जहां कोविड-19 एरोसोल कणों के माध्यम से एक बंद स्थान में हवा के जरिए फैल सकता है। भीड़-भाड़ वाली बंद जगहों पर ज्यादा खतरा है, क्योंकि वहां वेंटिलेशन नहीं हो पाता और संक्रमण का जोखिम दोगुना जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि चाहे आप अपने दफ्तर में हों या दुकान में या किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर कर रहे हों, आपके लिए मास्क पहनना अनिवार्य है।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / इंसानों को भोजन, दवा और ईंधन देने वाले विश्व के 40 फीसदी पौधे विलुप्ति के कगार पर हैं। संयुक्त राष्ट्र समिट में जारी की गई एक रिपोर्ट से इस भयावह स्थिति का खुलासा हुआ। विश्व के पौधों और कवक की स्थिति पर 42 देशों के 200 से अधिक वैज्ञानिकों ने यह रिपोर्ट तैयार की है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये पौधे 39.4 प्रतिशत की दर से विलुप्त हो रहे हैं।

इन वैज्ञानिकों का कहना है कि ये पौधे इतनी तेजी से विलुप्त हो रहे हैं कि हमें उनकी विलुप्ति से पहले उनके नाम और विवरण देने के लिए समय के साथ दौड़ लगानी पड़ रही है। रिपोर्ट के बारे में रॉयल बॉटेनिक गार्डन के निदेशक प्रो. एलेक्सजेंडर अंटोनी ने कहा कि जो पौधे दुनिया को खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से लड़ने का उपाय दे सकते थे, उनके विलुप्त हो जाने से दुनिया यह अवसर भी खो देगी।

जंगल कटने से आया संकट -
रिपोर्ट में बताया गया है कि बेतहाशा जंगल काटे जाने से इन पौधों के पनपने का अनुकूल वातावरण नष्ट होता जा रहा है इसलिए बहुत बड़ी तादाद में ये प्रजातियां नष्ट हो रही हैं। प्रो. एलेक्सजेंडर ने कहा कि अब हम विलुप्ति के दौर में जी रहे हैं, सभी देशों के नेताओं को इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत उपाय करने चाहिए।

1.4 लाख पौधों को खतरा-
रिपोर्ट में बताया गया कि विश्व में पौधों की प्रजातियों का कुल 39.4 प्रतिशत यानी 1.4 लाख पौधों को विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। 2016 में विलुप्ति की दर का अनुमान 21 प्रतिशत माना गया था।

बिना उपयोग में आए ही नष्ट हो जाएंगे -
रिपोर्ट में बताया गया कि जो पौधे जल्दी नष्ट होने वाले हैं, उनमें से बहुत सी ऐसी प्रजातियां हैं जिनका अब तक इंसानी जरूरतों के लिए इस्तेमाल ही नहीं हुआ। सात हजार से ज्यादा खाद्य योग्य ऐसे पौधे नष्ट हो सकते हैं जिनसे खेती करके दुनिया की बड़ी आबादी का पेट भरा जा सकता था। अभी मौजूद 2500 प्रजातियों से करोड़ों लोगों तक बायो ईंधन पहुंच सकता पर वे निकट भविष्य में नहीं बचेंगे।

अभी दुनिया में बायो ईंधन बनाने के लिए मात्र छह फसलें- मक्का, गन्ना, सोयाबीन, ताड़ का तेल, रेपसीड और गेहूं का ही उपयोग होता है। संरक्षण विज्ञान के प्रमुख डॉ. कोलिन कहते हैं कि हमने भोजन, दवा व ईंधन बनाने में जंगली प्रजातियों की क्षमता की अनदेखी की है।

एक नजर में-
-2016 में 21% की दर से विलुप्ति का लगाया गया था अनुमान
-2020 में 39.4% दर से पौधों के लुप्त होने का अनुमान लगाया
-7000 से ज्यादा पौधों से भविष्य में खेती हो सकती थी
-2500 से ज्यादा पौधे करोड़ों लोगों को जैव ईंधन दे सकते थे
-723 औषधि वाले पौधे, 1,942 अन्य पौधे व 1,886 कवक पर संकट

खाना खजाना / शौर्यपथ / बच्चे हों या बड़े चॉकलेट आइसक्रीम हर किसी की फेवरेट होती है। खास बात यह है कि इस टेस्टी डिजर्ट का लुत्फ आप किसी भी मौसम में उठा सकते हैं। यह आइसक्रीम खाने में जितनी टेस्टी है बनने में उतनी ही आसान भी है। तो डिजर्ट लवर्स देर किस बात की, आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी आइसक्रीम।
चॉकलेट आइसक्रीम बनाने के लिए सामग्री-
-2 1/2 कप फुल क्रीम दूध
-1 टी स्पून कस्टर्ड पाउडर
-2 टी स्पून कोको पाउडर
-1 कप चीनी
-1/2 टी स्पून वनीला एसेंस
-1 1/2 कप क्रीम
-नट्स
चॉकलेट आइसक्रीम बनाने का तरीका-
चॉकलेट आइसक्रीम बनाने के लिए सबसे पहले आधा कप दूध में चीनी, कोको और कस्टर्ड पाउडर मिलाने के बाद बचे हुए दूध को उबालकर उसमें बनाया हुआ कस्टर्ड मिक्सचर मिला लें। अब इस मिक्सचर के उबलने के बाद आधा मिनट गैस की आंच हल्की करके ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
ठंडा होने पर इसमें क्रीम और वनीला एसेंस मिलाकर इसे 1 डिब्बे में भरकर रख दें। आइसक्रीम जमने के बाद इसे ब्लैंडर में पीसकर दोबारा फ्रिज में जमने के लिए रख दें। यह प्रकिया दो बार दोहराएं। अब करीब 2 घंटे तक इसे नॉर्मल टैंपरेचर पर जमाकर नट्स डालकर गार्निश करके सर्व करें।

खाना खजाना / शौर्यपथ / जब कभी इंडियन स्नैक्स की बात होती है तो चाय की प्याली के साथ पकौड़ों का जिक्र जरूर होता है। पकौड़े तो आपने कई तरह के खाए होंगे पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं कैसे बनाया जाता है चिकन पकौड़ा। चिकन पकौड़े हर तरह की पार्टी के लिए एक बढ़िया स्टार्टर होने के साथ शाम की चाय के लिए एक अच्छा स्नैक भी है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाएं जाते हैं क्रिस्पी चिकन पकौड़े।

चिकन पकौड़ा बनाने के लिए सामग्री-
-1/2 टी स्पून चिकन बोनलेस
-स्वादानुसार नमक
-1 टी स्पून अदरक लहसुन का पेस्ट
-2 कप बेसन
-1 टी स्पून चिली फलेक्स
-1 छोटा चम्मच पीसा जीरा
-1 छोटा चम्मच पीसे धनिये के बीज
-1 टी स्पून चिकन पाउडर
-1 टी स्पून आमचूर
-2 टी स्पून अनारदाना
-एक चुटकी बेकिंग सोडा
-2 टेबल स्पून हरा धनिया कटा हुआ
-2 टेबल स्पून पुदीना कटा हुआ
-8 टेबल स्पून तेल

चिकन पकौड़ा बनाने का आसान तरीका-
चिकन पकौड़ा बनाने के लिए सबसे पहले चिकन को नमक और अदरक-लहसुन के पेस्ट में लगाकर 10 मिनट के लिए मैरीनेट होने के लिए अलग रख दें। अब एक दूसरे बाउल में सभी सामग्री को मिलाकर पानी की मदद से एक अच्छा सा बैटर तैयार कर लें। अब चिकन के टुकड़ों को बैटर में डिप करके उन्हें तेल में डीप फ्राई करें। आपके गर्मा-गर्म चिकन पकौड़े बनकर तैयार हैं, उन्हें शाम की चाय के साथ और हरी चटनी के साथ सर्व करें।

टिप्स /शौर्यपथ / मैदा, सूजी और बेसन से बनी डिश सभी को अच्छी लगती है लेकिन लम्बे समय तक इन चीजों को रखने के साथ एक परेशानी जुड़ी हुई है। पैकेट खोलने के कुछ दिनों या महीने बाद इनमें घुन या कीड़े लग जाते हैं। इस वजह से कम मात्रा में इन चीजों को घर में रखना पड़ता है। किचन टिप्स की बात करें, तो कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे इन चीजों को लम्बे समय तक प्रिजर्व करके रखा जा सकता है। आइए, जानते हैं कुछ तरीके-

-आटे को सुरक्षित रखने के लिए आप आटे में नीम की पत्तियां रख दें। इससे चीटियाँ और घुन आटे में नहीं लगेंगे। अगर आपको नीम की पत्तियां नहीं मिलती, तो उसकी जगह आप तेज़ पत्ता या बड़ी इलायची का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
-दलिया और सूजी को कीड़ों से बचाने के लिए आप किसी कढ़ाई में इसे भून लें और इसे ठंडा होने पर इसमें 8-10 इलायची डालकर किसी एयर टाइट कंटेनर में रख दें। इससे कीड़े की समस्या दूर हो जाएगी।
-मैदा और बेसन को बहुत जल्दी कीड़े लग जाते हैं। इन्हें कीड़ों से बचाने के लिए आप बेसन या मैदा को डिब्बे में डालकर इसमें बड़ी इलायची डाल दें। इससे लगने वाले कीड़ों से बचा जा सकता है।
-चावल को नमी और घुन से बचाने के लिए लगभग 10 किलो चावल में 50 ग्राम पुदीने की पत्तियां डाल दे, इससे चावल में कीड़े नहीं पड़ेंगे।
-बदलते मौसम में चने या दाल में कीड़े पड़ जाते हैं। इससे बचने के लिए दालों और चने में सूखी हल्दी और नीम के पत्ते डालकर रख सकते हैं। इससे इनमें कीड़े नही लगते।
-चीनी और नमक बारिश के मौसम में न सिर्फ चिपचिपे हो जाते हैं बल्कि पिघलने भी लगते हैं। इस समस्या से बचने के लिए इन्हें कांच के डिब्बे में रखें। आप चीनी और नमक के डिब्बें में थोड़े से चावल भी रख सकती है।

धर्म संसार / शौर्यपथ / चार धाम में श्रद्धालुओं के दर्शन का समय बढ़ाया जाएगा। अब मंदिर में दर्शन दोपहर 12 बजे की बजाय तीन बजे तक किए जाने का निर्णय उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड लेने जा रहा है।

चार धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रियायतें बढ़ाए जाने और नियमों को सरल किए जाने के बाद अब संख्या बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सामाजिक दूरी के तय मानक का पालन सुनिश्चित कराने को पूजा का समय बढ़ाने की तैयारी है। उत्तरखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड फिलहाल अभी प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहा है। हर धाम के प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का जो मानक है, वो फिलहाल पूर्व की तरह ही रहेगा। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर पूजा का समय बढ़ाने के साथ ही सामाजिक दूरी के गोलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ताकि अधिक से अधिक लोगों को दर्शन का मौका मिल सके।

श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित कराने को दर्शन का समय 12 बजे से बढ़ा कर तीन बजे किए जाने पर विचार किया जा रहा है। जल्द इस पर फैसला होगा। अभी श्रद्धालुओं की तय संख्या को नहीं बढ़ाया जा रहा है। क्योंकि अभी तय श्रद्धालुओं से भी कम संख्या में लोग आ रहे हैं। रियायतें बढ़ने के बाद अब हेली सेवाओं से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा होगा। - रविनाथ रमन, सीईओ उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड

चार धाम यात्रा मानक

श्रद्धालुओं को बोर्ड की वेबसाइट www.badrinath-kearnath.gov.in पर पंजीकरण कराना होगा।
बिना पंजीकरण के आने वालों को धामों में दर्शन की मंजूरी नहीं है।
पंजीकरण के दौरान फोटो आईडी, एड्रेस प्रूफ का दस्तावेज अपलोड करना होगा।
पूरी यात्रा के दौरान मूल दस्तावेज के रूप में वही फोटो आईडी, एड्रेस प्रूफ दिखाना होगा, जो वेबसाइट में अपलोड किया गया है।
श्रद्धालुओं की निर्धारित जांच केंद्रों पर थर्मल स्क्रीनिंग होगी।
जांच केंद्र में स्क्रीनिंग के दौरान यदि कोविड 19 के लक्षण पाए जाते हैं। तो उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं होगी।
ऐसी स्थिति में कोविड निगेटिव आने के बाद ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी।
हेलीकॉप्टर से आने वाले श्रद्धालुओं को वेबसाइट पर पंजीकरण अनिवार्य नहीं।
प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
बदरीनाथ -1200
केदारनाथ - 800
गंगोत्री - 600
यमुनोत्री - 400

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