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सेहत / शौर्यपथ / जब आपका पेट फूल जाता है, तो कब्ज की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में आपकी इंस्टेंट रेमेडी क्या होनी चाहिए? अगर आप घरेलू नुस्खों में यकीन रखते हैं, तो आज हम आपके लिए एक ऐसा अचूक आयुर्वेदिक नुस्खा लाए हैं, जो कुछ ही समय में आपकी कब्ज की समस्या को हल कर देगा।
पेश है कब्ज के लिए घरेलू उपाय : एक चम्मच घी के साथ गर्म पानी पीना।
इस बात को लेकर सिर्फ हम ही निश्चित नहीं है, बल्कि आयुर्वेद की स्वर्ण पुस्तक इसे कब्ज के लिए एक “रामबाण” इलाज मानती है!
यहां जाने घी के साथ गर्म पानी का सेवन कब्ज के लिए नंबर वन उपाय क्यों है?
आइए इस पर ध्यान दें: घी को कई बार गलत माना गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम इसके लाभों को प्राप्त करने के लिए इसका इस्तेमाल करने का उचित तरीका नहीं जानते हैं। घी बायट्रिक एसिड का एक समृद्ध स्रोत है, कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार और पोलिश पत्रिका प्रेज़ग्लाड गैस्ट्रोएंटेरोलोगिकज़नी (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी रिव्यू) में प्रकाशित एक अध्ययन द्वारा बताया गया है कि इसके सेवन से कब्ज में जल्द ही राहत मिलती है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि बायट्रिक एसिड का सेवन इंटेस्टाइन के चयापचय में सुधार करता है और मल को बाहर निकलने में मदद करता है। साथ ही, यह पेट दर्द, सूजन और कब्ज के अन्य लक्षणों को कम करता है।
बताने की कोई जरूरत नहीं है कि घी सभी लैग्जेटिवो में सबसे बेस्ट लैग्जेटिव है। इसके अन्य लाभ यह भी हैं – जैसे हड्डियों की ताकत में वृद्धि, नींद को प्रेरित करना और वजन कम करना और यह बेनिफिट्स अपको खुद ही महसूस होंगे।
आयुर्वेदिक हेल्थ कोच और प्राण हेल्थकेयर सेंटर की संस्थापक डिंपल जांगडा बताती हैं कि घी हमारे शरीर को चिकनाई प्रदान करने में मदद करता है और आंतों के मार्ग को साफ करता है। यह वेस्ट प्रोडक्ट के मूवमेंट में सुधार करता है, जिससे कब्ज का खतरा कम होता है।
आप घी से कैसे कर सकती हैं कब्ज का इलाज?
डॉ.जांगडा का सुझाव है कि रोज सुबह एक चम्मच घी में 200 मिली गर्म पानी मिलाकर पीना चाहिए। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, वह इसे खाली पेट पीने की सलाह देती हैं।
“हार्ड कोष्ट के कारण कब्ज होती है, जिससे पाचन क्रिया, आंत और कोलोन, खुरदरा और कठोर हो जाता है। ऐसे में घी जैसे सुपरफूड् के साथ गर्म पानी का सेवन पाचन तंत्र को चिकनाई देकर, हमारे सिस्टम को नरम कर सकता हैं और शरीर से वेस्ट प्रोडक्ट को बाहर निकालने में मदद कर सकता हैं।
घी कब्ज के लिए एक अच्छा और सटीक घरेलू उपचार है। अब तो आप भी जान ही गई होंगी।
शौर्यपथ /हर कोई दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए दिनरात मेहनत करता है। भोजन भगवान द्वारा दिया गया प्रसाद है। अन्न को देवता माना जाता है। इसलिए अन्न का पूरा सम्मान करें। वास्तु में भोजन को ग्रहण करने और भोजन को बनाने को लेकर कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
भोजन ग्रहण करने से पहले हमेशा भगवान को भोग लगाएं। अन्न देवता और अन्नपूर्णा माता का स्मरण कर उन्हें धन्यवाद करें। अगर भोजन स्वादिष्ट न लगे तो कभी भी उसका तिरस्कार न करें। भोजन ग्रहण करते समय न तो किसी से बात करें और न ही कोई अन्य कार्य। वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि गीले पैरों के साथ भोजन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आयु भी बढ़ती है। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर भोजन करने से ईश्वर की कृपा बनी रहती है।
कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख कर भोजन ग्रहण न करें। इससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। कभी भी टूटे या गंदे बर्तन में भोजन न खाएं। कभी भी बिस्तर पर बैठकर भोजन न ग्रहण करें। थाली को हाथ में उठाकर भी खाना न खाएं। जमीन पर बैठकर भोजन ग्रहण करना सबसे उत्तम है। भोजन की थाली को हमेशा अपने बैठने के स्थान से ऊपर रखें। ऐसा करने से घर में कभी भी खाने की कमी नहीं होगी। हर रोज गाय को रोटी खिलाएं। बिना स्नान किए रसोईघर में भोजन नहीं बनाना चाहिए। घर आए मेहमानों को दक्षिण या पश्चिम दिशा में बैठाकर भोजन कराएं। भोजन बनाते समय मन को शांत रखें और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य का विचार करें।
शौर्यपथ /काम के बढ़ते बोझ के बीच ‘फील गुड’ करना घर के बाहर रंग-बिरंगे फूल लगाना जितना आसान है। ब्रिटेन स्थित रॉयल हॉर्टिकल्चर सोसायटी का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक गुलाब, गुलमोहर और मालती जैसे फूल न सिर्फ स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्त्राव घटाते हैं, बल्कि ‘डोपामाइन’ व ‘सेरोटोनिन’ हार्मोन के उत्पादन को भी बढ़ावा देते हैं, जिन्हें नकारात्मक विचारों पर काबू पाने तथा जीवन से संतुष्टि का एहसास जगाने के लिए अहम माना जाता है।
लॉरियैन सुइन-पुई के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 42 वयस्कों को अपने घर के बगीचे में कुछ पौधे रखने को दिए। सभी पौधे ऐसे गमले में लगाए गए थे, जिनमें समय-समय पर खुद बखुद जरूरी मात्रा में पानी की आपूर्ति होती रहती थी। यानी प्रतिभागियों को इनकी देखभाल करने की जरूरत नहीं थी।
हालांकि, पौधे रखने के बाद प्रतिभागी खुद इनके रखरखाव में दिलचस्पी दिखाने लगे। इस दौरान शोधकर्ताओं ने उनमें ‘कॉर्टिसोल’, ‘डोपामाइन’ और ‘सेरोटोनिन’ सहित अन्य हार्मोन के स्तर की जांच की।
उन्हें 53 फीसदी प्रतिभागियों में सभी हार्मोन संतोषजनक स्थिति में मिले, जबकि शुरुआत में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत के करीब था। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल लैंडस्केप एंड अर्बन प्लानिंग’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / बस या मेट्रो में दूर खड़े किसी अजनबी से समय पूछने के लिए आप क्या करते हैं? यकीनन अपनी कलाई की तरफ उंगली दिखाते होंगे। हालांकि, ब्रिटेन स्थित लिंग्विस्टिक्स एंड कम्युनिकेशन्स इंस्टीट्यूट के हालिया अध्ययन की मानें तो इशारों-इशारों में बात करने का यह अंदाज जल्द बीते दिनों की बात बन जाएगा। मोबाइल सहित अन्य गैजेट के आविष्कार से नई पीढ़ी का इन इशारों को समझने में असमर्थ होना इसकी मुख्य वजह है।
शोधकर्ता वाइव इवांस के मुताबिक कुछ इशारों के खास मायने होते हैं। हर देश, हर भाषा, हर सभ्यता के लोग आपसी संवाद के लिए इनका बढ़-चढ़कर इस्तेमाल करते हैं। पर चूंकि ये इशारे चुनिंदा उपकरण, गैजेट या फीचर से जुड़े हैं, इसलिए तकनीकी बदलाव और बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ इनका इतिहास के पन्नों में दफन होना लाजिमी है। युवा पीढ़ी को पता ही नहीं होगा कि कलाई की तरफ उंगली दिखाने, अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को कान के पास ले जाने या फिर रेस्तरां में हवा में लिखने का इशारा करने का क्या मतलब है।
इतिहास बनते इशारे-
1.बिल मांगना
-होटल-रेस्तरां में वेटर को हवा में लिखकर यह संदेश देना कि वह बिल ले आए।
2.नकद का जिक्र
-उंगलियों और अंगुठे को आपस में रगड़कर यह जताना कि आप पैसे की बात कर रहे।
3.फोन कॉल करना-
-अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को मुट्ठी से बाहर निकालकर कान के पास ले जाना।
4.समय पूछना-
-कलाई पर उंगली थपथपाकर सामने वाले से यह पूछना कि टाइम क्या हो रहा है?
5.शीशा चढ़ाना-गिराना-
-हाथ को गोल-गोल घुमाकर खिड़की के शीशे चढ़ाने और गिराने का संकेत देना।
स्मार्टफोन का आविष्कार जिम्मेदार-
-इवांस कहते हैं, सड़कों पर अब पीसीओ बूथ कम ही दिखते हैं। घरों में भी लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल न के बराबर होता है। हर हाथ में स्मार्टफोन का आ जाना इसकी मुख्य वजह है। चूंकि, स्मार्टफोन को पकड़ने का तरीका लैंडलाइन से जुदा होता है, इसलिए युवा पीढ़ी फोन कॉल का इशारा करने के लिए अंगुठे और कनिष्ठा उंगली का इस्तेमाल करने के बजाय पूरी हथेली को कान के पास ले जाती है। समय पूछने और बिल मांगने से जुड़े इशारे भी स्मार्टफोन में घड़ी की मौजूदगी व डिजिटल भुगतान की सुविधा के चलते गायब हो रहे हैं।
वायरल वीडियो से सामने आया सच-
-पुराने इशारे कैसे दम तोड़ रहे हैं, इसकी बानगी सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल एक वीडियो में दिखी। न्यूयॉर्क निवासी डैनियल अलवाराडो अपनी पत्नी मार्सिएला के पास जाते हैं और उनसे इशारे में यह बताने को कहते हैं कि वह फोन पर बात कर रही हैं? मार्सिएला अपने अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को कान के पास ले जाकर दिखाती हैं। इसके बाद डैनियल अपने बच्चों से भी ऐसा करने को कहते हैं। इस दौरान दोनों अपनी हथेली को कान पर रखकर यह बताते हैं कि वे फोन पर बात करने में व्यस्त हैं। इस वीडियो को दो करोड़ से ज्यादा हिट मिल चुके हैं।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / दुनिया के 22 देशों में किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार होने वाली बड़ी आबादी में लड़कियों और युवा महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा है।
यह सर्वेक्षण ब्रिटेन के संगठन 'प्लान इंटरनेशनल ने किया है और इसका शीर्षक 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स गर्ल्स रिपोर्ट यानी दुनिया में लड़कियों की स्थिति है। भारत, ब्राजील, नाइजीरिया, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, थाईलैंड और अमेरिका समेत 22 देशों की 15-25 वर्ष की 14,000 किशोरियों और महिलाओं ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया।
इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली 58 फीसदी लड़कियों और महिलाओं ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, व्हाट्सऐप और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए समान था।
यह सर्वेक्षण 11 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस से पहले जारी हुआ है।
सर्वेक्षण के अनुसार, ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाली लड़कियों में से 47 फीसदी को शारीरिक और यौन हिंसा की धमकियां मिलीं जबकि 59 फीसदी को दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा। सर्वेक्षण के मुताबिक, अल्पसंख्यक और एलजीबीटीक्यू समुदायों से ताल्लुक रखनेवाली महिलाओं का कहना है कि उन्हें उनकी पहचान की वजह से निशाना बनाया गया।
प्लान इंटरनेशनल की मुख्य कार्यकारी एन-बिरगिट अलब्रेस्टन ने कहा, ''लड़कियों को उत्पीड़न के जरिए चुप कराया जा रहा है। लैंगिक समानता और एलजीबीटी समेत अन्य मुद्दों पर बोलने वाले कार्यकर्ताओं को भी प्राय: निशाना बनाया जाता है। ऐसे लोगों और उनके परिवार को धमकियां मिलती हैं।
सेहत /शौर्यपथ / बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर में यह है अंतर-
-सबसे पहले यह जान लें कि बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर दोनों अलग अलग चीजें होती है। दोनों ही चीजों का इस्तेमाल भी अलग-अलग कामों के लिए किया जाता है।
-बेकिंग पाउडर चिकना मुलायम मैदे जैसा होता है, लेकिन बेकिंग सोडा दरदरा होता है।
-बेकिंग सोडा का इस्तेमाल खट्टी चीजों जैसे दही, छाछ और नींबू के रस में किया जाता है, लेकिन बेकिंग पाउडर का इस्तेमाल नमी वाली चीजों के लिए किया जाता है।
- कोई भी नान, भटूरा जैसी चीजों को बनाने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जाता है, वही केक और बेकरी जिन्हे तला नहीं जाता उनमें बेकिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है।
बेकिंग सोडा का इस्तेमाल खाने के अलावा इन जरूरी काम के लिए भी होता है-
-बेकिंग सोड़ा का इस्तेमाल कपड़े साफ करने के लिए भी किया जाता है। ज्यादा गंदे कपड़े हो तो उन्हे साफ करने के लिए बेकिंग सोड़ा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
-घर की सफाई करते समय फ्लोर और टाइल्स को चमकाने के लिए भी बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जाता है।
-खाना पकाते समय अगर बर्तन ज्यादा जल गए हैं तो बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर आप उन जले बर्तनों को साफ कर सकते हैं।
शौर्यपथ / विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने कहा है कि विश्व भर में प्रत्येक दस में से एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है। विशेषज्ञ पहले से ही कहते रहे हैं कि संक्रमण के जितने मामलों की संख्या बताई जा रही है, वास्तव में उससे अधिक लोग संक्रमण का शिकार हैं।
वैश्विक स्वास्थ्य निकाय में कोरोना महामारी पर सोमवार को हुई 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड की बैठक में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख डॉ. माइकल रायन ने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संख्या में परिवर्तन हो सकता है, लेकिन अंततः इसका अर्थ यही है कि ‘विश्व की बड़ी आबादी खतरे में है। अब हम मुश्किल समय की ओर जा रहे हैं।’
10 प्रतिशत आबादी चपेट में आने की आशंका-
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया की 10 प्रतिशत आबादी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुकी है। अब भी बहुत बड़ी आबादी पर इसका खतरा मंडरा रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, लोगों के संक्रमित होने के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बस एक पहलू हैं क्योंकि इतने वृहद स्तर पर सटीक गिनती होने की संभावना कम है। डॉ. रायन ने कहा कि यह महामारी लगातार फैल रही है। दक्षिण पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और यूरोप तथा पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में संक्रमण और मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं।
कोरोना से मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुईं-
दुनियाभर में अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को कोरोना महामारी के कारण गहरा खामियाजा भुगतना पड़ा। डब्ल्यूएचओ द्वारा सोमवार को जारी एक नए सर्वेक्षण के अनुसार इससे 93 प्रतिशत देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुईं हैं। करीब 72% बच्चों और किशोरों, 70% बुजुर्गों तथा 61% गर्भवती महिलाओं मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल सकीं।
130 देशों में हुआ सर्वेक्षण-
डब्ल्यूएचओ ने जून से अगस्त के बीच 130 देशों में यह सर्वेक्षण किया और पता लगाया कि कोरोना महामारी के कारण मानसिक और न्यूरोलॉजिकल सेवाओं पर कितना प्रभाव पड़ा है। साथ ही देश इससे निपटने के लिए क्या तरीके अपना रहे हैं। सर्वेक्षण से पता चला है कि 67 प्रतिशत काउंसलिंग तथा साइकोथेरेपी सेवा में बाधा पहुंची और खुद को गहरी क्षति पहुंचाने वाले मरीजों को दी जाने वाली 65 प्रतिशत सेवाओं में व्यवधान आया।
10 अक्तूबर को वैश्विक कार्यक्रम होगा-
आगामी 10 अक्तूबर को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर डब्ल्यूएचओ द्वारा वैश्विक ऑनलाइन एडवोकेसी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के मद में अधिक निवेश की जरूरत पर चर्चा होनी है।
सेहत / शौर्यपथ / हम भारतीय महिलाओं की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती है फ्लैट बेली पाने की, जिसे हमने सिर्फ फिल्मों में ही देखा है। लेकिन क्या आप इसके लिए आवश्यक मेहनत करती हैं? पेट की चर्बी के लिए हम कभी अपने जीन्स तो कभी भारतीय खानपान को दोष दे देते हैं। लेकिन सच तो यह है कि बहुत छोटी-छोटी आदतें अगर हम छोड़ दें तो हम भी पेट की चर्बी से छुटकारा पा सकते हैं।
बेली फैट यानी पेट पर मौजूद चर्बी सिर्फ आपको क्रॉप टॉप पहनने से ही नहीं रोकती, आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत खतरनाक है। पेट या एब्डोमेन के हिस्से में ही हमारी महत्वपूर्ण मांसपेशियां होती हैं, जो हमारी सेहत में अपरिहार्य भूमिका अदा करती हैं। पेट में मौजूद चर्बी दिल की बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ा सकती है। यही नहीं, डायबिटीज के लिए भी पेट की चर्बी एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है।
हम बताते हैं व्यायाम की कमी के अलावा आपकी वह बुरी आदतें जो आपके बेली फैट के लिए जिम्मेदार हैं:
1. आप मील्स स्किप कर रही हैं
जी हां, ज्यादा खाने से अधिक खतरनाक है मील स्किप करना। जब आप लम्बे समय तक भूखी रहती हैं तो शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है। इसमें दिमाग यह सोचता है कि आप विकट परिस्थितियों से गुजर रही हैं, जहां आपको खाने के लिए कुछ मिल नहीं रहा। ऐसा होते ही शरीर अगली मील को पूरी तरह फैट के रूप में एकत्र कर लेता है। और फैट स्टोर करने के लिए सबसे पहली जगह है पेट।
इसलिए मील स्किप ना करें, बल्कि कम देरी पर थोड़ा-थोड़ा खाएं और हेल्दी खाएं।
2. आप सोडा बहुत पीती हैं
कोल्ड ड्रिंक और सोडा असल में मीठे जहर हैं। जर्नल फिटनेस के अनुसार एक गिलास कोल्ड ड्रिंक में 10 चम्मच के बराबर चीनी होती है और 150 खाली कैलोरी। इससे आपका पेट बिल्कुल नहीं भरता, लेकिन आपके शरीर में कैलोरी पहुंचती हैं। यह चिप्स जैसे स्नैक खाने से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसे पीने के बाद भी आपकी भूख नहीं मिटती तो आप खाते भी हैं। कोल्ड ड्रिंक और सोडा तो अपने आहार से बिल्कुल बाहर कर दें।
3. आपको काम करते वक्त ब्रेक लेने की आदत नहीं है
ऑफिस हो या वर्क फ्रॉम होम, अगर आप घण्टों बैठने की आदी हैं तो आपकी यह आदत आपके बेली फैट को बढ़ा रही है। जब आप कई घण्टें बैठी रहती हैं, तो आपका मेटाबॉलिक रेट धीमा पड़ जाता है।
इसके बजाय हर एक-दो घंटे पर पांच मिनट का ब्रेक लें। इस ब्रेक में स्ट्रेचिंग करें या कोई हल्की एक्सरसाइज करें। आप थोड़ा चल भी सकती हैं। आजकल तो घर पर ही हैं, तो आप अपने छोटे मोटे कामों को इन ब्रेक्स में ही निपटा सकती हैं। लम्बे अंतराल के लिए बैठने की आदत छोड़ दें।
4. आप इमोशनल ईटर हैं
फ्रंटियर ऑफ साइकोलॉजी में प्रकाशित स्टडी के अनुसार महिलाएं अधिकांश भावनाओं में बह कर खाती हैं और ऐसा करने पर वे 350 से 500 कैलोरी एक्स्ट्रा ले लेती हैं। यही नहीं, भावनात्मक ईटिंग में हम अधिकतर मीठे भोजन की ओर ही आकर्षित होते हैं, जो कैलोरी काउंट बढ़ा देता है।
5. आप बहुत जल्दी-जल्दी खाती हैं
क्या आप जानती हैं कि आपके पेट भरने और दिमाग को यह सिग्नल मिलने में 20 मिनट तक लग सकते हैं? दिमाग यह 10 से 20 मिनट बाद एहसास करता है कि पेट भर गया है। ऐसे में अगर आप तेजी से खाएंगी तो आप अपनी भूख से अधिक खा सकती हैं।
इसलिए एक्सपर्ट्स धीरे-धीरे और देर तक चबा कर खाने की सलाह देते हैं। जब आप देर तक चबाकर खाती हैं, तो दिमाग जल्दी यह सिग्नल कर देता है कि पेट भर गया है।
अगर आपको जल्दी खाने की आदत है, तो खाने से 20 से 30 मिनट पहले एक गिलास पानी पी लें। इससे पेट जल्दी भर जाएगा और आप एक्स्ट्रा कैलोरी नहीं लेंगी।
धर्म संसार / शौर्यपथ / शारदीय नवरात्र ऐसा अवसर है जब देवी दुर्गा सिंह को छोड़ किसी अन्य सवारी से पृथ्वी पर आती हैं। इसके लिए पंचांगों की गणना, देवीपुराण एवं दुर्गाशप्तसती के आधार पर सवारी का निर्धारण होता है। इस वर्ष आगमन और प्रस्थान दोनों को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।
बंगीय पंचांगों के अनुसार देवी का आगमन दोला (झूला) पर होगा जबकि देवी पुराण के अनुसार देवी घोड़े पर आएंगी। घोड़े और झूला दोनों पर ही आगमन हाहाकारी माना गया है। पं. वेदमूर्ति शास्त्री के अनुसार शनिवार से नवरात्र की शुरुआत हो रही है इसलिए देवी का आगमन घोड़े पर और समापन सोमवार को होने से प्रस्थान हाथी पर माना जाएगा। देवीपुराण के अनुसार नवरात्र में देवी के आगमन एवं प्रस्थान को भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में देखा जाता है। घोड़े पर देवी के आगमन को 'छत्रभंग स्तुरंगमे' कहा गया है। घोड़े पर देवी का आगमन सर्व समाज के लिए अशुभ माना गया है। सत्ता पक्ष के लिए यह विशेष कष्टप्रद होता है।
पंचांग भेद के कारण देवी के प्रस्थान की सवारी में भेद सामने आ रहा है। कुछ के अनुसार देवी का प्रस्थान हाथी पर होगा तो कुछ भैंसे पर मान रहे हैं। इस दृष्टि से आगमन और प्रस्थान दोनों ही शुभदायक नहीं हैं।
देवीपुराण के अनुसार सवारी का निर्धारण
देवीपुराण के अनुसार नवरात्र की शुरुआत सोमवार-रविवार को हो तो देवी का आगमन हाथी पर होता है। शनिवार-मंगलवार होने से आगमन घोड़े पर होता है। गुरुवार-शुक्रवार को कलश स्थापन का अर्थ देवी का आगमन डोली पर है। बुधवार के दिन नाव पर आगमन माना गया है।
दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्यसेवा मुख्य परीक्षा 2019 की घोषित तिथि में परिवर्तन कर आगे बढ़ाने की घोषणा किया गया था छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित किया गया था जिसमें पूरे प्रदेश के अभ्यर्थियों के साथ हर जिले से भी अभ्यर्थी शामिल होंगे जिसे देखते हुए एनएसयुआई जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू ने बताया कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में कोविड-19 कोरोना संक्रमण भयावह रूप में फैल रहा है ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण परेशानियों का कारण बन सकता है अगर इन गंभीर परिस्थितियों में भी यह परीक्षा आयोजित होती है तो संभावित भीड़ के कारण कोरोना संक्रमण का खतरा और बढ़ जाएगा।
जिसे देखते हुए आज एनएसयुआई के प्रतिनधिमंडल ने प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्ग जिला कांग्रेस प्रभारी एवम् खनिज न्यास विकाश विभाग के अध्यक्ष गिरीश देवांगन को ज्ञापन सौंपा कर तिथि में परिवर्तन कर आगे बढ़ाने का के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी को इस परेशानी से अवगत कराने के लिए संगठन प्रभारी गिरीश देवांगन जी से आग्रह किया आज दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा उत्तरप्रदेश में हाथरस में बच्ची के साथ हुए अनाचार के मामले को लेकर आयोजित एक दिवसीय मौन धरना प्रदर्शन में का कार्यक्रम रखा गया है जिसमें सामिल होने दुर्ग देवांगन जी दुर्ग आए हुए थे इस दौरान हितेश सिन्हा,जय सेन,हरीश देवांगन,विनिश साहू,अमोल जैन,विकाश साहू,अंकुश सोनी,गोल्डी कोसरे,दीपक मेश्राम, यश बाकलीवाल सहित अन्य लोग मौजूद थे
शौर्यपथ / कोविड-19 के कारण करीब छह महीने ठप रहे हिमाचल प्रदेश के पर्यटन कारोबार से लॉकडाऊन के बादल हटते ही कारोबारियों के चेहरे पर रौनक की धूप खिलने लगी है क्योंकि पर्यटकों का रेला लौटने लगा है। एक अरसे बाद आज शहर के रिज मैदान, मालरोड सहित ऊपरी शिमला के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर सैलानियों की चहल-पहल दिखी। शहर में दिनभर जगह-जगह जाम भी लगता रहा पर संभवत: इसका बुरा किसीने नहीं माना।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सप्ताहंत का लुत्फ उठाने प्रदेश के मुख्य पर्यटक स्थलों पर हजारों की तादाद में बाहरी राज्यों से पर्यटक पहुंचे हैं।
पिछले 24 घंटों में राजधानी में 13400 गाड़ियां पहुंची हैं। एक होटल संचालक ने बताया कि शिमला के होटलों की ऑक्यूपेंसी 8० से 9० फीसदी तक चल रही है। उन्होंने बताया कि अनलॉक प्रक्रिया के तहत सीमा खोेले एक पखवाड़ा ही हुआ है और पर्यटकों की बुकिंग आनी शुरू हो गई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार सर्दियों के दौरान पिछले साल से ज्यादा पर्यटक आने की उम्मीद है।
होटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अश्वनी सूद ने कहा कि जो लोग छह महीनों से घरों में कैद थे। अब वह पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। इससे होटल कारोबार में सुधार आना शुरू हो गया है। इस सप्ताहंत पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ का कारण शिमला का खुशनुमा मौसम भी है। इन दिनों शिमला में अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के करीब चल रहा है।
सेहत / शौर्यपथ / कई लोगों की आदत होती है कि वो खाने के साथ कई चीजें भी अपनी थाली में शामिल कर लेते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले आपको जान लेना चाहिए कि आयुर्वेद के अनुसार किन चीजों को साथ खाने की मनाही की गई है। आइए, जानते हैं किन चीजों को एक साथ नहीं खाना चाहिए-
दूध के साथ ये चीजें खाना हानिकारक
उड़द की दाल, पनीर, अंडा, मीट
उड़द की दाल खाने के बाद दूध नहीं पीना चाहिए। हरी सब्जिियां और मूली खाने के बाद भी दूध नहीं पीना चाहिए। अंडा, मीट, और पनीर खाने के बाद दूध पीने से बचना चाहिए। इनको एक साथ खाने से डाइजेशन में दिक्कअत आ सकती है।
दही के साथ न खाएं ये चीजें
खट्टे फल
दही के साथ खासतौर पर खट्टे फल नहीं खाने खहिए। दरअसल, दही और फलों में अलग-अलग एंजाइम होते हैं। इस कारण वे पच नहीं पाते, इसलिए दोनों को साथ लेने की सलाह नहीं दी जाती।
मछली
दही की तासीर ठंडी है। उसे किसी भी गर्म चीज के साथ नहीं लेना चाहिए। मछली की तासीर काफी गर्म होती है, इसलिए उसे दही के साथ नहीं खाना चाहिए।
शहद के साथ क्या न खाएं
शहद को कभी गर्म करके नहीं खाना चाहिए। चढ़ते हुए बुखार में भी शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। शहद और मक्ख न एक साथ नहीं खाना चाहिए। घी और शहद कभी साथ में नहीं खाना चाहिए। यहां तक कि पानी में मिलाकर भी शहद और घी का सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
इन चीजों को भी एक साथ खाने से करें परहेज
- ठंडे पानी के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, खीरा, जामुन और मूंगफली नहीं खानी चाहिए।
- खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई और कठहल नहीं खाना चाहिए।
- चावल के साथ सिरका नहीं खाना चाहिए।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /‘वर्क फ्रॉम होम’ ने घर और दफ्तर के बीच की दीवार को धुंधला कर दिया है। कभी कुकर की सीटी तो कभी टीवी का शोरगुल, कभी फल-सब्जी वाले की आवाज तो कभी बच्चों की उछल-कूद, घर में बैठकर ऑफिस का काम निपटाना कतई आसान नहीं। ऐसे में मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट फर्म ‘लॉरेल एंड वोल्फ’ के विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे उपाय सुझाए हैं, जो ‘वर्क फ्रॉम होम’ में होने वाली मुश्किलों को दूर करने के साथ ही उत्पादकता बढ़ाने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।
घर का पसंदीदा कोना चुनें:
घर में ऑफिस का सेटअप स्थापित करते समय यह मत भूलिए कि आपको वहां कम से कम आठ घंटे तो गुजारने ही हैं। ऑफिस टेबल को घर के किसी खाली कोने के बजाय खिड़की के पास लगाने की कोशिश करें, ताकि हर 15 से 20 मिनट पर स्क्रीन से ब्रेक लेकर हरियाली का दीदार कर सकें। अगर ऑफिस टेबल को खिड़की के पास स्थापित करने का विकल्प नहीं मौजूद है तो सामने की दीवार पर रंग-बिरंगी पेंटिंग लगाएं, जिससे न सिर्फ आपको ‘फील गुड’ हो, बल्कि ताजगी का एहसास भी बना रहे।
रोशनी का खास ख्याल रखें:
‘वर्क फ्रॉम होम’ में घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन से चिपके रहने से आंखों की रोशनी प्रभावित होना लाजिमी है। ऐसे में घर में पर्याप्त मात्रा में धूप न आती हो तो उसकी भरपाई कृत्रिम लाइट से करें। कमरे की छत पर बल्ब लगाने के साथ ही डेस्क पर लैंप की व्यवस्था करें, ताकि स्क्रीन पर नजर टिकाए रहने के दौरान आंखों पर ज्यादा जोर न पड़े। ऑफिस सेटअप में एलईडी या व्हाइट लाइट का ही इस्तेमाल सुनिश्चित करें, क्योंकि ये आंखों को सुकून पहुंचाती हैं।
नीली, पीली दीवारें फायदेमंद:
‘लॉरेल एंड वोल्फ’ के मुताबिक पीला-नारंगी रंग जहां ‘फील गुड’ हार्मोन का स्त्राव बढ़ाता है, वहीं नीला-हरा रंग स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के उत्पादन में कमी लाता है। इसलिए ऑफिस सेटअप में दीवारों को इन रंगों में रंगवाना खासा फायदेमंद साबित हो सकता है। यही नहीं, ऑफिस जैसी ऊर्जा महसूस करने के लिए सामने की दीवार पर एक व्हाइट बोर्ड भी जरूर लगाएं। उस पर रोजाना के लिए निर्धारित काम के साथ ही प्रमुख फोन नंबर और मन में आने वाले विचार लिखते रहें।
फर्नीचर आरामदायक होना जरूरी:
-अगर आप सोचते हैं कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ बस चंद दिनों की बात है। ऐसे में टेबल या कुर्सी पर पैसे खर्च करने की क्या जरूरत है तो आप गलत हैं। जरूरत से ज्यादा ऊंची या नीची टेबल-कुर्सी पर बैठकर काम करने से आपको न सिर्फ पीठ, कमर, कंधे और गर्दन में दर्द की शिकायत सता सकती है, बल्कि चक्कर व सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस की समस्या भी पनप सकती है। ‘वर्क फ्रॉम होम’ में बिस्तर पर लेटकर या बैठकर काम करने से भी बचें। इससे रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
डेस्क पर छोटे-छोटे पौधे लगाएं:
-पेड़-पौधे न सिर्फ आंखों को सुकून पहुंचाते हैं, बल्कि तनाव का एहसास घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में भी खासे असरदार पाए गए हैं। इसलिए ऑफिस डेस्क के आसपास बोनसाई या कैक्टस का पौधा लगाएं, जिनका रखरखाव बेहद आसान है। टेबल और फर्श पर सफेद या क्रीम चादर व रग बिछाएं, ताकि मन हमेशा शांत व तरोताजा बना रहे। पेन स्टैंड या फाइल बॉक्स खरीदने की जरूरत नहीं। घर में मौजूद पुराने डिब्बों या गत्ते को सजाकर पेन-फाइलें रखने के लिए इस्तेमाल करें। यह भी सुनिश्चित करें कि ऑफिस जोन टीवी से दूर हो।
काम के बोझ तले दबे कर्मचारी:
-59% कर्मचारियों ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ में ऑफिस से कहीं ज्यादा काम करने की बात कही
-91% ने अतिरिक्त काम के बदले कोई भत्ता या छुट्टी न दिए जाने पर नाखुशी जाहिर की
-87% का मानना है कि नियोक्ताओं को ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए पारदर्शी नीति बनानी चाहिए
शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर असर:
-56% में पीठ-कमर-कंधे में दर्द, 52% में अनिद्रा और 38% में सिरदर्द की समस्या पनपी
-54% घर में रहते हुए भी बीवी-बच्चों, अभिभावकों के साथ अच्छे पल बिताने को तरसे
-33% को लॉकडाउन के शुरुआती महीनों में छुट्टी न मिलने से बेचैनी की शिकायत हुई
धर्म संसार / शौर्यपथ / हमने अक्सर मंदिरों में आटे के दीये जलते हुए देखे हैं, लेकिन हम नहीं जानते कि ऐसा क्यों किया जाता है? आइए जानते हैं शास्त्रसम्मत कुछ बातें...
1. वास्तव में आटे के दीपक का प्रयोग किसी बहुत बड़ी कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है।
2. अक्सर मन्नत के दिए आटे के बने होते हैं।
3. अन्य दीपक की तुलना में आटे के दीप को शुभ और पवित्र माना गया है। मां अन्नपूर्णा का आशीष इस दीप को स्वत: ही मिल जाता है।
4. मां दुर्गा, भगवान हनुमान, श्री गणेश, भोलेनाथ शंकर, भगवान विष्णु, भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम और श्री कृष्ण सभी के मंदिरों में आटे का दीप कामना पूर्ति के लिए जलाया जाता है।
5. मुख्य रूप से तांत्रिक क्रियाओं में आटे का दीप जलाते हैं।
6. कर्ज से मुक्ति, शीघ्र विवाह, नौकरी, बीमारी, संतान प्राप्ति, खुद का घर, गृह कलह, पति-पत्नी में विवाद, जमीन जायदाद, कोर्ट कचहरी में विजय, झूठे मुकदमे तथा घोर आर्थिक संकट के निवारण हेतु आटे के दीप संकल्प के अनुसार जलाए जाते हैं।
7. ये दीप घटती और बढ़ती संख्या में लगाए जाते हैं। एक दीप से शुरुआत कर उसे 11 तक ले जाया जाता है। जैसे संकल्प के पहले दिन 1 फिर 2, 3, ,4 , 5 और 11 तक दीप जलाने के बाद 10, 9, 8, 7 ऐसे फिर घटते क्रम में दीप लगाए जाते हैं।
8. आटे में हल्दी मिला कर गुंथा जाता है और हाथों से उसे दीप का आकार दिया जाता है। फिर उसमें घी या तेल डाल कर बत्ती सुलगाई जाती है।
9. मन्नत पूरी होने के बाद एक साथ आटे के सारे संकल्पित दीये मंदिर में जाकर लगाए जाते हैं।
10. अगर दीप की संख्या पूरी होने से पहले ही कामना पूरी हो जाए तो क्रम को खंडित न करें। संकल्प में माने गए दीप पूरे जलाएं। किसी भी अच्छे दिन, अच्छे वार के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया में दीप जलाने का प्रण लिया जा सकता है। हर दीप के साथ कामना अवश्य बोलें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
