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सेहत / शौर्यपथ / रक्तचाप बढ़ने के डर से एकदम फीका खाना खाते हैं? अगर हां तो संभल जाइए। नमक के सेवन में जरूरत से ज्यादा कटौती संक्रामक रोगों का सबब बन सकती है। लंदन स्थित रॉयल फ्री हॉस्पिटल का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक नमक की अति की तरह ही, इसकी कमी भी बुरी है। दरअसल, लंबे समय तक कम मात्रा में नमक खाने से शरीर में ‘इंटरल्यूकिन-17’ का उत्पादन ठप पड़ जाता है। ‘इंटरल्यूकिन-17’ एक तरह की श्वेत रक्त कोशिका है, जो विषाणुओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में प्रतिरोधक तंत्र की मदद करती है। इसकी कमी से इनसान संक्रामक रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
किडनी रोगियों के लिए घातक-
-अध्ययन दल में शामिल प्रोफेसर जैक पमबेरटॉन-व्हिटली की मानें तो किडनी रोगियों को चिकित्सकीय सलाह के बगैर खाने में नमक की मात्रा नहीं घटानी चाहिए। खासकर ‘जिटेलमैन सिंड्रोम’ और ‘बार्टर सिंड्रोम’ से जूझ रहे मरीजों को। दरअसल, इन दोनों ही बीमारियों में किडनी से सोडियम छनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही वजह है कि इनकी जद में आए मरीजों को बार-बार फंगल और मूत्र संक्रमण से जूझना पड़ता है।
डायबिटीज के मरीज भी रहें सतर्क-
व्हिटली ने बताया कि डायबिटीज रोगी या फिर थायरॉयड और डिप्रेशन के इलाज में कारगर दवाएं खाने वाले मरीजों को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत सता सकती है। इससे उनके शरीर में सोडियम का स्तर घटने का जोखिम रहता है। सोडियम की कमी चक्कर, कमजोरी, सुस्ती, थकान और भ्रम की शिकायत को जन्म दे सकती है। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
शरीर को कितनी जरूरत-
-स्वस्थ वयस्कों को रोजाना 2300 मिलीग्राम अधिकतम सोडियम का सेवन करना चाहिए
-अमेरिकी सीडीसी के मुताबिक 3400 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम खा रहे औसत वयस्क
ये तीन खतरे भी मौजूद-
1.सोडियम की मात्रा में अत्यधिक कमी इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का सबब बन सकती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है।
2.शरीर के विभिन्न अंगों में खून की आपूर्ति करने के लिए हृदय को सोडियम की जरूरत पड़ती है, इसकी कमी से हार्ट फेल होने का खतरा रहता है।
3.विभिन्न अध्ययनों में देखा गया है कि सोडियम का स्तर घटने से बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर बढ़ता है, जो दिल के लिए घातक है।
सेहत / शौर्यपथ घर में अकेले रहने और नकरात्मक सोच के चलते मस्तिष्क पर अधिक जोर देने पर अल्जाइमर बीमारी होने की संभावना रहती है। यह बीमारी बुजुर्गों में अधिक मिलती है। इससे दूर रहने के लिए व्यक्ति को सभी माहौल में रहने की आदत होनी चाहिए। साथ ही लोगों से संपर्क रखना चाहिए।
उम्र बढ़ने के साथ ही तमाम तरह की बीमारियां हमारे शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं। वहीं अल्जाइमर भी इसमें प्रमुख बीमारी है, यह बुजुर्ग लोगों में देखने को मिलती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ याद करने की क्षमता कम होती रहती है और बातों को भूल जाते हैं। इस बीमारी को कम करने के लिए हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर्स-डिमेंशिया दिवस मनाया जाता है ।
इसी के तहत 21 से 27 सितंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय डिमेंशिया जागरूकता सप्ताह के तहत प्रदेश के हर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये इस बीमारी की सही पहचान और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
कोलंबिया अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि अल्जाइमर की बीमारी में याददाश्त और सोचने की क्षमता खत्म हो जाती है। महामारी के समय में जो लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं उन्हें ज्यादा देखभाल की होती है। उन्हे हाथ की सफाई, मास्क पहनने, सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए याद दिलाना जरूरी है।
महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। वे इस वजह से पोस्ट ट्रॉमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीएसटीडी) से पीड़ित हो गए हैं। इसकी वजह से अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। अर्टफिसियल इंटेलिजेंस जैसी कई तकनीक हैं, जिससे अल्जाइमर की बीमारी का इलाज बहुत ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इस बीमारी के में परिवार और समाज के लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है।
सेहत / शौर्यपथ / गुस्सा, चिड़चिड़ापन और धीरे-धीरे रोजमर्या की छोटी-छोटी चीजें भूलने लगना, ये सभी अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अल्जाइमर एक तरह का मानसिक विकार है। इस बीमारी में दीमाग की कोशिकाओं पर असर पड़ता है।
चिकित्सकों के मुताबिक शराब और धूम्रपान करने वालों में इसके होने का खतरा ज्यादा रहता है। यही कारण है कि अब युवा वर्ग में भी ये बीमारी पाई जाने लगी है। जीवन शैली में बदलाव के कारण केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इससे ग्रस्त पाई जाती हैं।
पारस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रजनीश कुमार का कहना है कि लोगों को खुलकर इस बीमारी के बारे में जागरूक करना जरूरी हो गया है। तनाव, श्रवण दोष, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, डायबिटीज और सामजिक रूप से अलग रहना इसके मुख्य कारणों में शामिल है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन भी इस बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
शराब पीने से एमिलॉयड प्लेक को खत्म करने की दिमाग की कोशिकाओं की क्षमता प्रभावित होती है और ऐसे लोगों में अल्जाइमर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। तनावपूर्ण जीवन और कई कामों के बोझ की वजह से यह बीमारी होने पर याददाश्त की कमी होने लगी है।
लॉकडाउन ने मरीजों की परेशानी बढ़ाई-
कोलंबिया अस्ताल के सहालकार चिकित्सक डॉ. अपूर्वा शर्मा का कहना है कि अल्जाइमर की बीमारी एक प्रोग्रेसिव कंडीशन होती है, जिसमे मस्तिष्क की कोशिकाओं को याददाश्त, रास्ते, भाषा, ध्यान और योजना बनाने की क्षमता में कमी करता है। देखभाल करने वालों को अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को क्वालिटी लाइफ प्रदान करने में मुश्किल आती है और यह तनावपूर्ण भी होता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। लॉकडाउन ने अल्जाइमर के मरीजों के लिए थोड़ी मुश्किल बढ़ा दी है। ऐसे मरीज कहीं जा नहीं सकते, किसी से मिल नहीं सकते, इस तरह से उन पर साइकोलॉजिकल दबाव बढ़ गया है।
हमें जरुरत है की हम इन मरीजों को ज्यादा से ज्यादा समय दें ताकि वो अच्छे से रिकवरी कर सकें। उन्होंने बताया कि कोविड-19 का समय खासकर वृद्ध मरीजों के लिए बहुत ही मुश्किल भरा रहा है और उनको डायगनोसिस करने में बहुत ही कमी आई है।
65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ये दिक्कत ज्यादा-
आर्टेमिस अस्पताल के6 न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. सुमित सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, याददाश्त प्रभावित होती जाती है, लेकिन विस्मृति किसी भी उम्र में हो सकती है। अधिकांश लोगों में भूलने की समस्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है।
65 वर्ष से अधिक उम्र के कम से कम आधे से अधिक लोगों का कहना है कि अपनी युवावस्था की तुलना में अब वे चीजें ज्यादा भूलने लगे हैं। उन्हें वृद्धावस्था का अनुभव होने लगता है, भूलने की यह समस्या उम्र बढऩे के कारण हो रही हो, यह जरूरी नहीं, क्योंकि वृद्धावस्था के दौरान पर्याप्त दिमागी कसरत नहीं होती है। इसलिए, दिमाग और शरीर दोनों को सक्रिय बनाए रखने वाली गतिविधियों में हिस्सा लेने से विस्मृति को कम किया जा सकता है।
उनके अनुसार यदि आपको या किसी और को याददाश्त से जुड़ी कोई गंभीर समस्या महसूस होती है तो अपने डॉक्टर से बात करें। जो लोग इससे पीड़ित हैं उन्हें समस्या को आगे बढऩे से रोकने के लिए पहले से ही कदम उठाने चाहिए। रक्तचाप को नियंत्रित करना, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के उच्च स्तर को नियंत्रित करना और उसका इलाज करना और धूम्रपान से परहेज करने जैसे उपाय करके इससे बचा जा सकता है।
अल्जाइमर के लक्षण-
-चिड़चिड़ापन
-सोचने की क्षमता कम होना
-याददाश्त कम हो जाना
-उदासीनता
-भटकाव
-व्यवहार में परिवर्तन
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में अनुसार हर तीसरे साल में अतिरिक्त मास यानी अधिक मास जुड़ता है। इसका कारण सूर्य और चंद्रमा की वार्षिक चाल में 11 दिनों का अंतर होता है, जिसे पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष अधिक को जोड़ दिया जता है। इससे वर्ष में संतुलन हो जाता है जबकि उसे वर्ष चंद्रमास 13 माह का हो जाता है। इस बार अधिकमास 18 सितंबर से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर 2020 तक रहेगा।
अधिकमास के अधिपति देवता भगवान विष्णु है। इस मास की कथा भगवान विष्णु के अवतार नृःसिंह भगवान और श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है। इस मास में श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और श्रीविष्णु भगवान के श्री नृःसिंह स्वरूप की उपासना विशेष रूप से की जाती है। इस माह उपासना करने का अपना अलग ही महत्व है।
इस माह में अधिक मास के 33 देवताओं की पूजा का महत्व है- विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, भधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, नारायण, मधुरिपु, अनिरुद्ध, त्रीविक्रम, वासुदेव, यगत्योनि, अनन्त, विश्वाक्षिभूणम्, शेषशायिन, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैत्यारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धरावास, दामोदर, मघार्दन एवं श्रीपति जी की पूजा से बड़ा लाभ होता है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री नृःसिंह भगवान ने इस मास को अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस मास का स्वामी हो गया हूं और इसके नाम से सारा जगत पवित्र होगा। इस महीने में जो भी मुझे प्रसन्न करेगा, वह कभी गरीब नहीं होगा और उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। इसलिए इस मास के दौरान जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अपने लक्ष्य के अनुसार ही आपको अपनी प्राथमिकताएं चुननी होती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि हम अस्थायी चीजों को अपनी प्राथमिकता समझकर उनपर अपना पूरा ध्यान देने लगते हैं, जबकि ऐसा करने से हमारे हाथ अंत में निराशा ही लगती है। आज हम आपको ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे, जिन्हेंं अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने से आप कभी भी निराश नहीं होंगे और आपको सफलता जरूर मिलेगी-
टाइम टेबल बनाना
आप कॉलेज, कोचिंग या ऑफिस कहीं भी जाते हैं, अगर आपने कोई लक्ष्य रखा है, तो सबसे पहले अपना टाइम टेबल बनाएं। आप अपने 24 घंटे को किस हिसाब से मैनेज करते हैं, यह बेहद जरुरी है। आप पेपर या मोबाइल चेक लिस्ट में टाइम टेबल सेव कर सकते हैं।
नींद पूरी करें
आप अपनी प्राथमिकताओं में नींद को भी जोड़ लें। आपके पास काम निपटाने के अलावा जितना भी टाइम बचता है, उसमें अपनी नींद पूरी कर लें। नींद न लेने की वजह से आपका दिमाग सही से काम नहीं कर पाएगा।
आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति
जीवन में कई बार ऐसे मौके आएंगे, जब आपका विश्वास डगमगाने लग जाएगा और आपको लगेगा कि आपका लक्ष्य व्यर्थ है, लेकिन उस वक्त आपको इन नकरात्मकताओं से दूर रहकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना है।
पेपर पर अपने लक्ष्य को लिखें
इसके लिए आपको थोड़ी दिमागी कसरत भी करनी पड़ेगी। बेहतर होगा कि आप अपना लक्ष्य पेपर पर लिखकर उससे जुड़ी चुनौतियां भी लिख लें, इससे आपको उन चुनौतियों से कैसे लड़ना है, यह भी अंदाजा हो जाएगा।
समय व्यर्थ करने वाले और नकरात्मक लोगों से दूरी
आपको समय व्यर्थ करने वाले लोगों और नकरात्मक स्वभाव वाले लोगों से दूरी बनाकर रखनी है। इससे आप अपने लक्ष्य पर ध्यान दे पाएंगे।
सेहत / शौर्यपथ / आज पूरा विश्व कोरोना महामारी के खौफ में डूबा हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना और समान्य फ्लू के लक्षणों में काफी समानता होने की वजह से लोग संक्रमित व्यक्ति को शुरूआती समय में ही लक्षण देखकर पहचान नहीं पा रहे हैं। ऐसे में चलिए आपको बताते आखिर कौन सा है वो प्रमुख लक्षण जो करता है समान्य फ्लू को कोरोना से अलग।
व्यक्ति में सूखी खांसी का लक्षण दिखना COVID-19 से संक्रमित होने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। अगर आप किसी प्रदूषण वाली जगह में रहते हैं तो आपको खांसी किसी एलर्जी की वजह से भी हो सकती है।
क्या आपकी खांसी और सर्दी कोविड -19 का है संकेत-
कोरोना का खौफ लोगों के दिलों में इस कदर बैठ गया है कि पास बैठे व्यक्ति के छींकने या खासने पर ही लोग सहम जाते हैं , कहीं उन्हें भी कोरोना न हो जाए। हालांकि हर बार ऐसा हो ये जरूरी नहीं है।विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना का सबसे प्रमुख लक्षण किसी चीज को सूंघने की क्षमता का प्रभावित होना होता है।
इस लक्षण को पहचानकर न करें अनदेखा-
कोरोना के बाकी लक्षणों की ही तरह कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के भीतर सूंघने, स्वाद पहचानने का क्षमता थोड़ी या ज्यादा प्रभावित होने लगती है, इस लक्षण को अनदेखा न करें। कोरोना से संक्रमित कुछ लोगों में यह लक्षण प्रमुख तौर पर देखे गए हैं।
हालांकि, अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हो पाई है कि सूंघने की शक्ति का कम होना कोरोना का लक्षण है। विशेषज्ञों के अध्ययन के अनुसार घर पर ही कोरोना के लक्षण जैसे सूंघने की शक्ति का कम होना, सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होने जैसे लक्षणों का परीक्षण करके इस जानलेवा वायरस से बचाव किया जा सकता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / गोभी मंचूरियन एक इंडो- चाइनीज रेसिपी है, जिसे खाना हर वर्ग के लोग पसंद करते हैं। गोभी मंचूरियन को आप किसी पार्टी में भी स्टार्टर की तरह सर्व कर सकती हैं। यह बेहद पसंद की जाने वाली डिश है। इसे ग्रेवी या ड्राई दोनों तरह से बनाया जा सकता है। तो देर किस बात की अगर आपका भी कुछ क्रिस्पी चटपटा खाने का मन कर रहा है तो ट्राई करें ये टेस्टी गोभी मंचूरियन ।
गोभी मंचूरियन बनाने के लिए सामग्री-
-1 बड़े आकार की गोभी
-3 बड़े चम्मच कॉर्न फ्लोर
-5 बड़े चम्मच मैदा
-1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
-1/2 कप पानी
-2 बड़े प्याज बारीक कटे हुए
-1 बड़े साइज की शिमला मिर्च बारीक कटी हुई
-2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
-2 चम्मच सोया सॉस
-2 चम्मच चिली सॉस
-2 चम्मच रेड चिली सॉल
-2 चम्मच सिरका
2 चम्मच टोमेटो केचप
-तलने के लिए तेल
-नमक स्वादानुसार
गोभी मंचूरियन बनाने का तरीका-
गोभी मंचूरियन बनाने के लिए सबसे पहले प्याज और शिमला मिर्च को बारीक काटकर साथ ही अदरक-लहसुन का पेस्ट भी तैयार कर लें। अब एक बर्तन में पानी उबालकर इसमें कटी हुई गोभी के टुकड़ों को 5 मिनट के लिए डाल दें। ध्यान रखें कटे हुए गोभी के टुकड़े न तो बहुत ज्यादा छोटे हों और न ही बड़े। गर्म पानी से 5 मिनट बाद गोभी के टुकड़ों को निकालकर साफ पानी से धो लें। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गोभी में अगर कोई कीड़ा हो तो वह आसानी से बाहर आ जाए।
अब एक बड़ा बाउल लेकर इसमें मैदा, कॉर्न फ्लोर, अदरक-लहसुन का पेस्ट और नमक डालकर मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं। अब इस मिश्रण में पानी डालकर न ज्यादा गाढ़ा और न ज्यादा पतला घोल तैयार कर लें। इसी घोल में गोभी के टुकड़े डालकर अच्छे से मिला दें।
अब कढ़ाई में तेल गर्म करके उसमें मीडियम आंच पर गोभी को हल्का भूरा होने तक तलें। सभी तले हुए टुकड़ों को एक तरफ अलग रख लें। अब इसी तेल में अदलक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, बारीक कटी शिमला मिर्च और प्याज डालें और अच्छी तरह से इन्हें भी फ्राई करें।
कढ़ाई में सिरके के साथ चारों तरह के सॉस डालकर उसमें फ्राइड गोभी के टुकड़े डालकर 4 से 5 मिनट तक के लिए मीडियम आंच पर पकाएं। आपकी गर्मा-गर्मा गोभी मंचूरियन सर्विंग के लिए बनकर तैयार है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / सुबह का नाश्ता अगर हेल्दी हो तो व्यक्ति पूरा दिन फ्रेश और एनर्जेटिक फील करता है। ऐसे ही एक केरल के एक नाश्ते का नाम है रवा अप्पम। ये खाने में तो बाकी साउथ इंडियन रेसिपीज की तरह टेस्टी होता ही है लेकिन स्वाद के साथ-साथ ये आपकी सेहत और ब्रेकफास्ट के लिए हेल्दी ऑप्शन भी है। तो आइए जानते हैं कैसे बनाया जाता है वेजिटेबल रवा अप्पम।
रवा अप्पम बनाने के लिए सामग्री-
-रवा- 1/2 कप
-दही - 1/2 कप
-हरी मटर- 1/2 कप
-फूलगोभी- 1/2 कप
-साबूत सरसों- 1/2 टेबल स्पून
-अदरक- ½ टेबल स्पून
-हरी मिर्च- 3
-करी पत्ता- 8-9
-बेकिंग सोडा- ¼ टेबल स्पून
-तेल- 2 टेबल स्पून
-नमक- स्वादानुसार
रवा अप्पम बनाने का तरीका-
रवा अप्पम बनाने के लिए सबसे पहले फूलगोभी और हरी मिर्च को बारीक काटकर अदरक के साथ मिक्सर में उसका पेस्ट बना लें। अब एक बाउल में रवा और दही मिक्स कर लें। इस मिश्रण में फूलगोभी, मटर, हरी मिर्च, अदरक का पेस्ट और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें। यदि मिश्रण ज्यादा गाढा़ लगे तो उसमें थोडा सा पानी डालकर उसे पतला कर लें। अब इस मिश्रण को थोड़ी देर ढककर अलग रख दें ताकि रवा फूल जाए।
अब तेज आंच पर एक कढ़ाई में तेल डालकर उसे गर्म कर लें। तेल गर्म होने पर उसमें सरसों ,करी पत्ता डालकर थोड़ा सा भून लें। अब इस तड़के को मिश्रण में डालकर मिला लें। अब मिश्रण में बेकिंग सोडा या ईनो फ्रूट सॉल्ट का इस्तेमाल करें। अब अप्पम मेकर को गर्म करके उसके प्रत्येक खाने में थोडा-थोडा तेल डालकर इस मिश्रण को सभी खानों में थोडा-थोडा भर दें। मिश्रण डालने के बाद अप्पम मेकर को ढककर धीमी आंच पर अप्पम पकने का इंतजार करें। ध्यान रखें अप्पम सेकते समय गैस की आंच हल्की रखें, तेज आंच रखने पर अप्पम जल सकते हैं।
जब अप्पम एक साइड से गोल्डन ब्राउन सिक जाए तो इसे दूसरी साइड पलट दें और फिर से ढककर पकाएं। अप्पम को दोनों ओर से गोल्डन ब्राउन होने तक पका लें। जब अप्पम दोनों तरफ से गोल्डन ब्राउन हो जाए तो गैस बंद कर दें। आपका रवा अप्पम तैयार है, इसे आप प्लेट में निकालकर हरे नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी, मीठी चटनी, धनिये की चटनी या टमैटो सॉस के साथ सर्व करें।
खाना खाजन / शौर्यपथ / घरवालों को कुछ नया खिलाकर मुंह मीठा कराना चाहते हैं, तो हमारी मावा कचौड़ी की रेसिपी आपको बहुत पसंद आएगी। आइए जानते हैं इसकी रेसिपी :
सामग्री :
मैदा 1-1/2 कप
नमक 1/2 चम्मच
तेल 2 चम्मच
तेल 1 चम्मच
बादाम 2 चम्मच (टूटे हुए)
काजू 2 चम्मच (टूटे हुए)
सूखा नारियल 2 चम्मच (कद्दूकस किया हुआ)
पिस्ता 2 चम्मच (टूटे हुए)
जायफल पाउडर 1/4 चम्मच
इलायची 1/2 चम्मच
खोया 100 ग्राम
चाशनी
पानी 1 कप
हरी इलायची 3-4
चीनी 1 कप
तलने के लिए तेल
विधि
एक बाउल में मैदा, नमक और रिफाइंड ऑयल डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। अब थोड़ा-थोड़ा कर पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें। गूंथे हुए आटे को 30 मिनट तक ढक कर अलग रख दें।
अब फ्राइंग पैन में रिफाइंड ऑयल डालें, बादाम, काजू, सूखा नारियल, पिस्ता, जायफल पाउडर और इलायची पाउडर डालकर मिक्स करते हुए 2 मिनट के लिए भून लें। अब इसमें खोया मिलाएं और सारी सामग्री को 2 मिनट के लिए मध्यम आंच पर भून लें। अब गैस बंद कर दें और मिश्रण को ठंडा होने दें।
एक पैन में पानी डालें और गैस पर चढ़ा दें। इसमें हरी इलायची और चीन डालें और उबाल आने दें। चीनी घुलने और शीरा गाढ़ा होने तक पकाएं।
अब आटे को एक बार हाथों से मसल लें। इसकी लोई बनाकर पूड़ी के आकार में बेल लें। इसके बीच में मावा का मिश्रण रखें और साइड को पानी लगाकर चिपका दें। इसे हाथों के हल्के दबाव से कचौरी की तरह बना लें।
कढ़ाई में तलने के लिए तेल डालें और जब तेल अच्छा गर्म हो जाए तो एक-एक कचौरी डालकर तल लें।
सर्व करने के लिए कचौड़ी को बीच में फोड़ कर उसमें तैयार शीरा भर दें और बादाम-पिस्ता से कर दें।
सेहत /शौर्यपथ / हम सभी अपने 20s में अपनी खूबसूरत त्वचा को फ्लॉन्ट करते हैं। बस एक अच्छा क्लींजर और मॉइस्चराइजर- और चेहरा चमकने लगता है।
लेकिन हमारी आंखें तब खुलती हैं जब चेहरे पर सबसे पहली झुर्रियां नजर आने लगती हैं। चेहरे पर फाइन लाइन्स नजर आने के बाद ही हम अपने स्किन केयर रूटीन को लेकर गंभीर होते हैं। ये लाइन्स संकेत हैं कि आपकी त्वचा की एजिंग शुरू हो गयी है। अब हम एन्टी एजिंग क्रीमों का प्रयोग करते हैं और अपनी स्किन की एजिंग को टालने की कोशिश करते हैं। लेकिन जो झुर्रियां पहले ही हमारे चेहरे पर आ चुकी हैं, वह तो नहीं जाने वाली ना!
यह प्रश्न महिलाओं में बहुत आम है ‘कब हमें एन्टी एजिंग क्रीमों का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए?’ और इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमने बात की फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम की सलाहकार डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ सोनल बंसल से।
“हमें यह जानना जरूरी है कि एजिंग दो प्रकार की होती है- अंदरूनी और बाहरी। पहले आपकी उम्र अंदर से बढ़ती है और फिर चेहरे पर झलकती है। इसलिए आपको बाहरी एजिंग होने से पहले ही एन्टी एजिंग उत्पादों का प्रयोग शुरू कर देना चाहिए।”
क्या हैं उम्र बढ़ने के पहले संकेत?
“एजिंग के सबसे पहले संकेत जो भारतीयों में नजर आते हैं वह है आंखों के नीचे का फैट गलना। सबसे पहले फाइन लाइन्स भी चेहरे पर ही नजर आती हैं। इससे आंखें गड्ढे में नजर आती हैं और काले घेरे बढ़ जाते हैं। इसका कारण यह है कि आंखों के नीचे की त्वचा बाकी त्वचा से ज्यादा नाजुक होती है।”
क्या है एंटी-एजिंग उत्पादों के उपयोग की सही उम्र
“ज्यादातर लोगों को एंटी-एजिंग उत्पादों का उपयोग 30 के दशक की शुरुआत में ही करना शुरू कर देना चाहिए। उम्र बढ़ने के विजिबल लक्षण दिखाई देने से पहले ही आपके पास कुछ साल हैं। यदि आप उन संकेतों के प्रकट होने से पहले प्रभावी उत्पादों का उपयोग करना शुरू करती हैं, तो आपके पास कुछ समय के लिए एजिगं में देरी करने का मौका है।”
कौन से एंटी-एजिंग उत्पाद होते हैं बेहतर?
विभिन्न उत्पाद हैं जो आज बाजार में उपलब्ध हैं। आप हमेशा अपनी त्वचा के प्रकार के अनुरूप कुछ चुन सकतीं हैं। हालांकि, रेटिनॉल के सभी रूप कारगर हैं। आजकल, आपको कई क्रीम के साथ-साथ सीरम भी मिलेंगे जिनमें एंटी-एजिंग के रूप में रेटिनोल कम्पाउन्ड होता है। अगर आप चिकनी, कोमल त्वचा पाना चाहती हैं, तो यह बेहद मददगार हो सकता है।
तो लेडीज, समय बर्बाद न करें, घड़ी टिक टिक आगे बढ़ते समय का संकेत दे रही है। इसलिए यदि आप अपने शुरुआती 30 में हैं तो एंटी-एजिंग उत्पाद को अपने ब्यूटी रूटीन में शामिल करें।
सेहत / शौर्यपथ / हेल्दी डाइट, वर्कआउट और समय पर सोना कुछ ऐसी चीजें हैं जो आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दिनचर्या के अलावा कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर आपको बीमारियों से बचाती है. आज हम आपको ऐसा कारगर उपाय बता रहे हैं, जिससे आप फ्लू को 4-5 दिनों में आसानी से ठीक कर सकते हैं, वहीं इससे आपकी इम्युनिटी भी मजबूत होगी।
गुणों से भरी अजवाइन
अजवाइन में बहुत से पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर को हेल्दी और फिट रखने में मदद करता है। अजवाइन में एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होता है, जो सर्दी-जुकाम के लिए फायदेमंद है।
सामग्री
1/2 चम्मच अजवाइन के बीज
5 तुलसी के पत्ते
1/2 चम्मच काली मिर्च पाउडर
1 बड़ा चम्मच शहद
ऐसे बनाएं : एक गहरा पैन लें और उसमें 1 गिलास पानी, अजवाइन, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते डालें। पानी को 5 मिनट तक उबलने दें। गैस को बंद करें। इसमें शहद मिलाने से पहले मिश्रण को थोड़ी देर के लिए ठंडा होने दें। काढ़ा को अच्छी तरह से मिलाएं और इसे पी लें।
इसके फायदे-
अजवाइन गुणों से भरी हुई है। इसमें जब काली मिर्च, तुलसी, शहद डालकर काढ़ा बनाया जाता है, तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं। फ्लू से छुटकारा दिलाने के साथ अजवाइन का काढ़ा इन परेशानियों से भी मुक्ति दिलाता है।
पेट की बीमारियों से छुटकारा।
सर्दी-जुकाम और खांसी में राहत।
मसूड़ों की सूजन।
पीरियड्स के दर्द से छुटकारा।
मुंहासों से छुटकारा।
इन बातों का रखें ध्यान
एक दिन में बहुत ज्यादा अजवाइन सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है, इसलिए इस काढ़े को दिन में सिर्फ एक ही बार पिएं. वहीं, स्तनपान कराने वाली मां और गर्भवती को इस काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ आधुनिक जीवनशैली में हमनें खाने की तरीके में भी बहुत बदलाव किया है। पहले लोग जमीन पर सुखासन में बैठकर खाना खाया करते थे। खाना खाते वक्त किसी से बात नहीं करते थे। ज्योतिष की दृष्टि से खाना खाने की आदतों का हमारे ग्रहों पर असर पड़ता है। पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए रोजमर्रा में प्रयुक्त होने वाली आदतें और उनका असर।
-भोजन कभी भी अपने बेड पर बैठकर ना खाएं। इससे अन्न का अपमान होता है और राहु अप्रसन्न होते हैं।
-खाना खाते समय टीवी देखना, किताब पढ़ना ठीक नहीं होता। इससे हमारी श्वास नली में भोजन के कण फंसने का डर रहता है।
-खाना खाने से पहले हाथ और पैर अवश्य धोएं। इससे हानिकारक बैक्टिरिया भोजन के जरिए हमारे पेट में नहीं पहुंच पाते। भोजन जल्दी-जल्दी ना चबााएं। भोजन के तुरंत बाद पानी ना पिएं। खाना खाने के 40 मिनट बाद पानी पी सकते हैं। भोजन हमेशा बैठकर ही करें।
- भोजन कररने के बाद कुछ लोग थाली में ही अपने हाथ धो देते हैं। इससे अन्नपूर्णा का अपमान होता है। चंद्र और शुक्र अप्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे घर से बरकत चली जाती है।
-थाली में जूठन छोड़ना अन्न का अपमान होता है। इससे मां अन्नपूर्णा का शाप लगता है।
-भोजन करते समय हमारा मुंह पूर्व या उत्तर में होना चाहिए।
-भोजन करने से पहले या भोजन करने के बाद लघु शंका करनी चाहिए।
शौर्यपथ/ आज से अधिकमास शुरूहो गया है। अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। इस महीने कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। लेकिन अधिकमास में खरीददारी करने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ग्रह प्रवेश, मुंडन, सगाई, विवाह आदि कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा इस महीने को पुरुषोत्तम के नाम से भी जानते हैं। अधिकमास में सर्वार्थसिद्धि योग समेत बन रहे हैं ये 5 ऐसे योग बन रहे हैं जो बहुत ही उत्तम योग हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार अक्टबूर में अधिकमास में ये सभी योग आपको सफलता दिला सकते हैं। आपको बता दें कि सितंबर की 26 तारीख को छोड़कर अक्टूबर की 1, 4, 6, 7, 9, 11, 17 को सवार्थ सिद्धि योग रहेगा। आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग बेहद शुभ योग माना जाता है। यह नक्षत्र, तिथि और वार के संयोग से बनता है।
कहते हैं कि यह शुभ योग मनचाहा वरदान और तरक्की दिलाता है। इस संयोग में कहा जाता है कि जो भी शुभ कार्य शुरू होता है तो वो दोबारा भी होता है। इसलिए इस योग में आप जो खरीदेंगे और भी लाएंगे। 19 एवं 27 सितंबर को द्विपुष्कर योग है। अक्टूबर में ही अमृतसिद्धि योग पड़ रहा है। इस योग में किए गए कार्य का फल अमृत होता है। अधिक मास में दो दिन पुष्य नक्षत्र भी पड़ रहा है। 10 अक्टूबर को रवि पुष्य और 11 अक्टूबर को सोम पुष्य नक्षत्र रहेगा।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / हवन-यज्ञ हमारी पुरातन परंपरा है। यह शुद्धिकरण का प्रभावकारी उपाय है। हवन में उत्पन्न औषधीय धुआं हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह वातावरण को शुद्ध करता है और हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। माना जाता है कि हवन के औषधीय धुएं का असर 30 दिन तक बना रहता है।
घर या प्रतिष्ठान में मौजूद वास्तु दोषों को दूर करने में भी हवन यज्ञ बहुत प्रभावकारी उपाय है। अग्नि ही यज्ञ के प्रधान देवता हैं। अग्नि को ईश्वर स्वरूप माना जाता है। अग्नि जहां रहती है वहीं प्रकाश फैलता है। हवन यज्ञ करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार रोजाना घर या प्रतिष्ठान में धूप जलाने से वास्तु दोष दूर हो जाता है। घर में रोजाना सुबह-शाम कर्पूर जलाने से तनाव दूर रहता है। रात्रि में सोने से पहले पीतल के बर्तन में घी में भीगा हुआ कर्पूर जलाएं। एक कंडे में गुड़ की धूप और घी मिलाकर जलाने से गृह कलह नहीं होता है। घर में गुग्गुल की धूप जलाने से शांति बनी रहती है। नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए पीली सरसों के दानों को जलाएं। गुग्गुल की धूप जलाने से रोगों का नाश होता है। घर में कच्चे नीम पत्ती की धूनी जलाएं। इससे हानिकारक जीवाणु नष्ट होते हैं और वास्तु दोष भी दूर होता है। धूप, आरती, दीप, पूजा अग्नि को कभी भी मुख से फूंक मारकर न बुझाएं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
