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खेल / शौर्यपथ /कोलकाता नाइटराइडर्स की टीम को आईपीएल का दो बार खिताब जिताने वाले पूर्व बल्लेबाज गौतम गंभीर अपनी पुरानी फ्रेंचाइजी पर जमकर बरसे हैं। गौतम गंभीर की कप्तानी में केकेआर की टीम ने साल 2012 और 2014 में आईपीएल की ट्रॉफी को अपने नाम किया था। इसके बाद, अगले छह सालों में टीम एक बार भी फाइनल तक नहीं पहुंच सकी है। आईपीएल 2020 में भी कोलकाता का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और टीम प्लेऑफ में पहुंचने में नाकाम रही थी।
गौतम गंभीर केकेआर की टीम पर सूर्यकुमार यादव को साल 2018 में रिलीज किए जाने को लेकर जमकर बरसे हैं और उन्होंने इसे टीम की सबसे बड़ी गलती बताया है। गंभीर ने ईसपीएन क्रिकइंफो के साथ बात करते हुए कहा, 'सूर्यकुमार यादव को मुंबई इंडियंस ने आसानी से हासिल नहीं किया है। केकेआर का यह पिछले 13 सालों में सबसे बड़ा नुकसान है। कोई जो युवा है, वो केकेआर की टीम में आाता है, चार साल खेलता है, बिल्कुल, हमारी उस समय की बल्लेबाजी को देखते हुए उनको वो बल्लेबाजी नंबर नहीं मिला, जहां उनको खेलना चाहिए था। मनीष पांडे तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते थे, लेकिन सूर्यकुमार नंबर 6 या 7 पर बल्लेबाजी कर रहे थे। केकेआर आसानी के साथ सूर्यकुमार के आसपास बन सकती थी।'
बता दें कि सूर्यकुमार यादव मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल होने से पहले केकेआर की टीम का हिस्सा थे और वो इस टीम की तरफ से चार साल आईपीएल में खेले थे। हालांकि, बल्लेबाजी क्रम के चलते सूर्यकुमार का प्रदर्शन कोलकाता के लिए इतना अच्छा नहीं रहा था और 2018 में उनको टीम ने रिलीज कर दिया था। 2018 में सूर्यकुमार यादव मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल हुए थे और उसके बाद से तीनों ही सीजन में उनका बल्ला जमकर बोला है।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा की फिल्म ‘छलांग’ रिलीज होने के लिए तैयार है। दिवाली के मौके पर यह फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर 13 नवंबर को रिलीज होने वाली है। इसे लेकर नुसरत भरूचा और राजकुमार राव दोनों ही काफी एक्साइटेड हैं। इस बीच नुसरत भरूचा ने अपने उस दिन को याद किया, जिसने उनके जीवन को बदल दिया।
नुसरत ने एक थ्रोबैक फोटो शेयर की है जो उनके बचपन की है। इस फोटो में वह स्कूल एक्टिविटी करती नजर आ रही हैं। नुसरत ने लिखा, “जैसे की आप देख सकते हैं कि मुझे शुरू से ही स्टेज और कैमरा पसंद है। ये उस पल को डिफाइन करता है, जब मैंने पहली छलांग ली। आपका छलांग मोमेंट क्या है, जिसने आपकी जिंदगी बदल दी?”
‘छलांग’ के थिएटर के बजाए ओटीटी प्लैटफॉर्म पर रिलीज होने के बारे में नुसरत ने बताया कि फिल्म फाइनली दर्शकों तक पहुंच रही है। यह काफी समय से तैयार थी। मैं खुश इसलिए भी हूं क्योंकि ये अमेजन प्राइम पर आ रही है। प्राइम के पास वही ऑडियंस है जो हमें इस फिल्म के लिए चाहिए। मुझे लगता है कि हमें बेहतर व्यूअरशिप मिलेगी और चूंकि टीवी की पहुंच ज्यादा है, इसलिए यह ज्यादा से ज्यादा दर्शकों के पास पहुंचेगी।
नुसरत की अगली फिल्म 'हुडदंग' होगी, जिसकी शूटिंग अभी बाकी है। ये 1990 के दशक में आरक्षण लागू हो जाने के विषय पर बनी है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / दीपावली का त्योहार या पर्व 5 दिनों तक मनाया जाता है। कार्तिक माह की त्रयोदशी से शुक्ल द्वितिया तक यह त्योहार मनाया जाता है जिसमें कार्तिक माह की अमावस्या को मुख्य दीपावली पर्व होता है। अर्थात धनतेरस से भाई दूज तक यह त्योहार चलता है। आओ जानते हैं कि आखिर यह त्योहार किन किन कारणों से मनाया जाता है।
1. इस दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्नतापूर्वक दीपावली मनाई थी।
2. इस दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह रुप धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था।
3. इसी दिन समुद्रमंथन के पश्चात लक्ष्मी व धन्वंतरि प्रकट हुए थे। इसी दिन माता काली भी प्रकट हुई थी इसलिए बंगाल में दीपावली के दिन कालिका की पूजा का प्रचलन है।
4. इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। कहते हैं कि श्रीराम रावण का वध करने के 21 दिन बाद अयोध्या लौटे थे। इसीलिए इस दिन राम विजयोत्सव के रूप में दीप जलाए जाते हैं।
5. इस दिन के ठीक एक दिन पहले श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस खुशी के मौके पर दूसरे दिन दीप जलाए गए थे।
6. यह दिन भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी है। जैन मंदिरों में निर्वाण दिवस मनाया जाता है।
7. गौतम बुद्ध के अनुयायियों ने 2500 वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध के स्वागत में लाखों दीप जला कर दीपावली मनाई थी।
8. इसी दिन उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ था।
9. इसी दिन गुप्तवंशीय राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने 'विक्रम संवत' की स्थापना करने के लिए धर्म, गणित तथा ज्योतिष के दिग्गज विद्वानों को आमन्त्रित कर मुहूर्त निकलवाया था।
10. इसी दिन अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था।
11. दिवाली ही के दिन सिक्खों के छ्टे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को कारागार से रिहा किया गया था।
12. इसी दिन आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती का निर्वाण हुआ था।
13. इस दिन से नेपाल संवत में नया वर्ष आरम्भ होता है।
14.भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का था। उन्हें आयुर्वेद का जन्मदाता और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। धनतेरस के दिन उनका जन्म हुआ था। इस दिन यम पूजा भी होती है।
15. भाई दूज को यम द्वीतीया भी कहते हैं। यम के निमित्त धन तेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज पांचों दिन दीपक लगाना जाहिए। कहते हैं कि यमराज के निमित्त जहां दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस दिन यम के मुंशी भगवान चित्रगुप्त की पूजा का भी प्रचलन है। इस दिन श्रीकृष्ण ने इंद्रोत्सव की जगह गोवर्धन पूजा को प्रारंभ किया था।
उक्त सभी कारणों से हमारी सांझा संस्कृति दीपावली का त्योहार मनाती हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / रामचरित मानस के उत्तरकांड में श्रीराम के अयोध्या आगमन पर भव्य स्वागत का उल्लेख मिलता है। कहते हैं कि कार्तिक अमावस्या को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। जब प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटे तो सभी शहरवासी उनके आगमन के लिए उमड़ पड़े। भगवान श्रीराम अपना 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद पुन: लौट आए थे। आओ जानते हैं कि वे दीपावली के दिन ही पहुंचे थे या कि और किसी दिन?
1. श्रीराम के अयोध्या लौटने की तिथि पर इतिहासकारों में मतभेद हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार कार्तिक अमावस्या अर्थात दीपावली को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे।
2. रावण का वध करने के बाद लंका से अयोध्या लौटते समय राम, लक्ष्मण, सीता एवं हनुमानजी पुष्पक विमान से अयोध्या के पास नंदीग्राम नामक स्थान पर उतरे थे, जहां पर राम की खड़ाऊं रखकर राजा भरत अपना राजपाट चलाते थे। कहते हैं कि नंदीग्राम में एक दिन रुकने के बाद वे दूसरे दिन अयोध्या पहुंचे थे।
3. यह भी उल्लेख मिलता है कि रावण वध यदि दशमी के दिन हुआ था तो उसके दूसरे दिन सीता को अग्नि परीक्षा से गुजरने के बाद अर्थात उन्हें अग्निदेव से वापस मांगने के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे थे। मतलब यह कि वे एकादशी के दिन अयोध्या की ओर चले थे और रास्ते में वह निषादराज गुह केवट के यहां रुके भी थे।
4. वाल्मीकि रामायण में उल्लेख मिलता है कि श्रीराम का नंदीग्राम में भव्य स्वागत किया गया था। उस दौरान अयोध्या के सभी आठों मंत्री और राजा दशरथ की तीनों रानियां हाथियों पर सवार होकर नंदीग्रम पहुंचे। उनके साथ अयोध्या के सभी नागरिक भी नंदीग्रम पहुंचे।
5. वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड सर्ग 127 के अनुसार सभी नागरिकों, मंत्रियों और रानियों ने देखा की श्रीराम पुष्पक विमान से धरती पर उतरे। सभी ने विमान पर विराजमान श्रीराम के दर्शन किए और वे उन्हें लेकर अयोध्या गए।
6.श्रीराम का जन्म इंडियन गर्वनमेंट के साइंस मिनिस्ट्री से मान्यता प्राप्त 'इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च ऑन वेदाज' (आईसर्व) के शोधानुसार श्रीराम का जन्म इस शोधानुसार 5114 ईसा पूर्व हुआ था। आईसर्व डायरेक्टर सरोज बाला के शोध अनुसार श्रीराम ने रावण का वध 4 दिसंबर 5076 ईसा पूर्व किया था। फिर वे अलग अलग जगहों पर रुकते हुए 29वें दिन 2 जनवरी 5075 ईसा पूर्व वापस अयोध्या लौटे थे। अयोध्या लौटने के खुशी में अयोध्यावासियों ने दीपावली मनाई थी। रुकने के दिनों को छोड़कर इस सफर में उन्हें करीब 24 दिन लगे। इस दौरान वे 8 से 9 जगहों पर रुके। यह निष्कर्ष वाल्मीकि रामायण में लिखे उस दौर के ग्रहों, नक्षत्रों, तारामंडलों की स्थिति के आधार पर नासा के वेद स्पेशल 'प्लेटिनम गोल्ड' सॉफ्टवेयर से निकाला गया।
7.श्रीरामजी की खड़ाऊ ले जाते समय भरतजी ने कहा था कि
चर्तुर्दशे ही संपूर्ण वर्षेदद्व निरघुतम।
नद्रक्ष्यामि यदि त्वां तु प्रवेक्ष्यामि हुताशन।।
अर्थात: हे रघुकुल श्रेष्ठ। जिस दिन चौदह वर्ष पूरे होंगे उस दिन यदि आपको अयोध्या में नहीं देखूंगा तो अग्नि में प्रवेश कर जाऊंगा। भरत के मुख से ऐसे प्रतिज्ञापूर्ण शब्द सुनकर रामजी ने भरत को आश्वस्त करते हुए कहा था- तथेति प्रतिज्ञाय- अर्थात ऐसा ही होगा।
8. इसी प्राकार महर्षि वशिष्ठजी ने महाराजा दशरथ से राम के राज्याभिषेक के संदर्भ में कहा था-
चैत्र:श्रीमानय मास:पुण्य पुष्पितकानन:।
यौव राज्याय रामस्य सर्व मेवोयकल्प्यताम्।।
अर्थात: जिसमें वन पुष्पित हो गए। ऐसी शोभा कांति से युक्त यह पवित्र चैत्र मास है। रामजी का राज्याभिषेक पुष्प नक्षत्र चैत्र शुक्ल पक्ष में करने का विचार निश्चित किया गया है। षष्ठी तिथि को पुष्य नक्षत्र था। रामजी लंका विजय के पश्चात अपने 14 वर्ष पूर्ण करके पंचमी तिथि को भारद्वाज ऋषि के आश्रम में उपस्थित हुए। वहां एक दिन ठहरे और अगले दिन उन्होंने अयोध्या के लिए प्रस्थान किया उससे पहले उन्होंने अपने भाई भरत से पंचमी के दिन हनुमानजी के द्वारा कहलवाया-
अविघ्न पुष्यो गेन श्वों राम दृष्टिमर्हसि।
अर्थात: हे भरत! कल पुष्य नक्षत्र में आप राम को यहां देखेंगे। इस प्रकार राम चैत्र के माह में षष्ठी के दिन ही ठीक समय पर अयोध्या में पुन: लौटकर आए।
9. वाल्मीकि रामायण के अनुसार सीताजी का हरण बसंत ऋतु में हुआ था। अपहरण के पश्चात रावण ने उन्हें बारह मास का समय देते हुए कहा कि हे सीते! यदि इस अवधि के भीतर तुमने मुझे स्वीकार नहीं किया तो मेरे याचक तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर डालेंगे।
10. यह बाद हनुमानजी ने जब श्रीराम से कही तो उन्होंने भली प्रकार चिंतन करके सुग्रीव को आदेश दिया कि
उत्तरा फाल्गुनी हयघ श्वस्तु हस्तेन योक्ष्यते।
अभिप्रयास सुग्रिव सर्वानीक समावृता:।।
अर्थात आज उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है। कल हस्त नक्षत्र से इसका योग होगा। हे सुग्रीव इस समय पर सेना लेकर लंका पर चढ़ाई कर दो। इस प्रकार फाल्गुन मास में श्री लंका पर चढ़ाई का आदेश श्री राम ने दिया। यह जानकर रावण ने भी अपने मंत्री से सलाह लेकर कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को युद्धारंभ करके अमावस्या के दिन सेना से युक्त होकर विजय के लिए निकला और चैत्र मास की अमावस्या को रावण मारा गया। तब रावण की अंत्येष्टि क्रिया तथा विभीषण के राजतिलक के पश्चात रामचंद्र यथाशीघ्र अयोध्या के लिए निकल पड़े। तब यह सिद्ध होता है कि रामजी चैत्र के माह में ही अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी में लोगों ने अपने अपने घरों में दीप जलाकर उनका स्वागत किया।
दुर्ग न्यूज़ । शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम एक तरफ से कचरा फेकने वालो पर सख्त है , अतिक्रमण पर निम्न वर्ग पर कार्यवाही को सदैव तैयार रहती है। किंतु यदि यह मामला अगर किसी रसूखदार की हो तो दुर्ग निगम मौन हो जाती है। ऐसा ही एक मामला है साई राम हौंडा का , जो गुरुद्वारा रोड पर संचालित है। राजेन्द्र पार्क चौक से ग्रीन चौक के बीच का मार्ग कहने को तो काफी चौड़ा है। किंतु इस चौड़े रोड का दर्शन सिर्फ रात में ही होता है। दिन में कई व्यापारियों द्वारा सड़क के बहुत बड़े हिस्से को कब्ज़ा कर व्यापार किया जाता है। साई राम होंडा द्वारा अपने शो रूम के सामने के हिस्से में सड़क तक वाहन व टेंट लगा कर व्यापार किया जा रहा। किन्तु वर्तमान में भी निगम प्रशासन छोटे छोटे व्यापारियों पर ही कार्यवाही कर रही। बता दे कि साल 2 साल पहले भी समृद्धि बाजार के बगल में पार्किंग की जगह पर तीन दिनों का व्यापार मेला लगाया गया था। जिस पर निगम द्वारा कार्यवाही के नाम पर मौन ही साधा गया। क्या निगम प्रशासन ऐसे व्यापाारियों पर कार्यवाही करेगा ? त्योहारी मौसम में सड़कों पर यातायात का काफी दबाव रहता है ऐसे में सड़क तक अतिक्रमण कर यातायात को प्रभावित करने वाले ऐसे संस्थानों पर लगाम लगाने में निगम सही दुर्ग यातायात विभाग को भी सख्त रवैया अपनाने चाहिए किन्तु जिस तरह निगम प्रशासन कार्यवाही के नाम पर मौन है वही दुर्ग यातायात विभाग भी छोटे छोटे वाहन चालकों पर जुर्माना लगा कर टारगेट पूरा कर रही किन्तु कार्यवाही के नाम पर शून्य । आखिर रसूखदारों के अवैधानिक कृत्य पर मौन रहकर विभाग क्या संदेश देने की कोशिश कर रही है ?
शौर्य की बाते / शौर्य वो नाम जिस पर मेरी दुनिया टिकी है . शौर्य हाँ यही नाम है जिससे मेरी पहचान बनी किन्तु अब सिर्फ नाम ही रह गया मेरी जिदगी में . जिस शौर्य के बिना एक पल जीना दूभर था अब सारी जिन्दगी उसी के बिना जीना है क्योकि शौर्य ने जीने के लिए अपनी बहन को जो छोड़ दिया शायद शौर्य को भी मालूम था कि उसके मम्मी पापा उसके बिना नहीं रह इसलिए अपने जन्म के 9 साल बाद अपनी छोटी बहन को बुला लिया दुनिया में और खुद दुनिया से दूर एक अनजाने जगह पर लम्बी सफर के लिए चला गया . और दे दी जिम्मेदारी सिद्धि की . हम तो शौर्य के साथ ही चले जाते पर सिद्धि का क्या होता .उसके जीने के हक को कैसे छिनते . शायद यही हमारा भाग्य है कि एक पत्थर की तरह जिन्दगी जी रहे है जिसमे ना कोई अहसास ना कोई भाव बस सिर्फ सुनी सुबह और अँधेरी रात कब सुबह होती है कब रात इसका भी कोई अहसास नहीं .
आज त्यौहार का समय चल रहा है सब तरफ एक उमंग दिख रही है एक उत्साह है किन्तु ये सब हमारे लिए बेमानी है जिन्दगी तो हमने जी ली बस अब एक कहानी के अंत का इंतज़ार है कब हमारी कहानी का आखरी अध्याय लिखा जाएगा इसी पल के इंतज़ार में हम दोनों जी रहे है ताकि जब अंत हो तब नयी शुरुवात फिर से शौर्य के संग हो . हम तुझे बहुत याद करते है मेरे लाल बस तुझे ही याद करते है . आजा मेरे लाल आजा मेरा बेटा आजा निक्की ...( शरद पंसारी - एक बेबस बाप )
दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पाटन क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान के दौरान उन महिलाओं से मिले जिनके द्वारा गोबर से बनाए दीयों, वंदनवार, शुभ-लाभ,वॉल हैंगिंग इत्यादि ने न केवल प्रदेश में बल्कि देश के बाहर भी छत्तीसगढ़ को पहचान दिलाई है।
महिलाओं ने मुख्यमंत्री जी को शुध्द गोबर से बने वंदनवार और दीये भेंट भी किए।महिलाओं द्वारा दी गई भेंट को मुख्यमंत्री जी ने बड़े स्नेह से स्वीकार किया और उनके साथ तस्वीर भी खिंचवाई।संस्था की संचालिका श्रीमती निधि चन्द्राकर ने जब मुख्यमंत्री जी को बताया कि उन्होंने देश के बाहर भी दीये और वंदनवार भेजे हैं तो वे बहुत खुश हुए। उनकी मेहनत की सराहना की और आशीर्वाद दिया ऐसे ही अच्छा काम करते रहिए।महिलाओं की हुनरमंदी देखकर मुख्यमंत्री जी ने उनका उत्साहवर्धन भी किया।उन्होंने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं आपने गोधन से बने उत्पादों को देश के बाहर पहचान दिलाई जो काबिले तारीफ है।
संस्था की सभी महिलाएं श्रीमती कल्पना वर्मा, श्रीमती शशि ,श्रीमती मनीषा और श्रीमती पिंकी मुख्यमंत्री से मिलकर काफी उत्साहित नजर आईं।इन महिलाओं ने बताया उन सबको बहुत अच्छा लगा जब उन सबको प्रदेश के मुख्यमंत्री का इतना स्नेह और आशीर्वाद मिला।अब वे दुगने उत्साह से काम करेंगी।
दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए गौठान का सशक्तिकरण आवश्यक है। गौठान के बनने से यहां जानवरों के रखने की व्यवस्था हो गई। गोधन न्याय योजना के माध्यम से पशुधन को लोग ज्यादा सहेजने लगे हैं। इससे फसल सुरक्षा भी हो रही है। कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने काफी समय पहले ओन्हारी फसल ली थी। इस बार उन्होंने फिर से यह फसल लगाई है। यह बताता है कि मवेशियों से फसल सुरक्षा बेहद आवश्यक थी।
गौठान और गोधन न्याय योजना से इसका रास्ता खुला। यह खेती और पशुपालन की बेहतरी के लिए शानदार योजना है। साथ ही जैविक खेती की ओर भी इससे राह प्रशस्त होती है। उन्होंने कहा कि पिछली बार किसानों ने गौठान के लिए मुक्त हस्त से पैरादान किया था। गोमाता के संवर्धन के लिए ये सबसे उत्तम कार्य है। इस बार भी खेतों में फसल अवशेष जलाएं नहीं अपितु पैरादान करें।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गौठान ग्रामीण आजीविका केंद्र के रूप में स्थापित होंगे। अभी स्वसहायता समूह की महिलाओं ने दीपावली को देखते हुए उत्पाद तैयार किये हैं। इनकी अच्छी बिक्री हो रही है। इन्हें स्थानीय जरूरत के मुताबिक चीजें तैयार करने के लिए कहा जा रहा है। अपने हुनर, गुणवत्ता और मेहनत से ये अपने उत्पादों की बाजार में जगह बना लेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान उत्पादन करने वाले किसानों को एथेनॉल का प्लांट लगने से विशेष मदद मिलेगी। इसके लिए केंद्र से अनुमति मांगी गई थी, प्लांट आरम्भ होने से धान उगाने वाले किसानों की समृद्धि और बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों को खेती किसानी में किसी तरह की दिक्कत न आये, इसके लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना की किश्त ऐसे समय में दी गई जब किसानों को खेती के लिए सबसे ज्यादा राशि की जरूरत होती है।
संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक शहीदों के परिजनों को भेंट करेंगे मुख्यमंत्री का संदेश
शहीद जवानों का बलिदान अविस्मरणीय: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
परिजनों को विगत दो वर्षों में प्रदान की गई 21 करोड़ रुपये की सहायता राशि
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दीपावली के पावन पर्व पर शहीद जवानों के परिजनों को शुभकानाएं प्रेषित की हैं। मुख्यमंत्री बघेल का शुभकामना संदेश पुलिस महानिदेशक स्वयं शहीद के परिजनों को भेंट करेंगे। शुभकामना संदेश संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के भी माध्यम से शहीदों के परिजनों को भेंट किया जायेगा। पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी पुलिस अधीक्षकों को शहीदों के परिजनों को सम्मान सहित शुभकामना संदेश भेंट करने हेतु निर्देशित किया गया है।
मुख्यमंत्री बघेल ने शहीदों की शहादत को नमन करते हुए कहा है कि राज्य बनने के बाद अब तक छत्तीसगढ़ पुलिस के 517 वीर जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर राज्य और देश के लिए बलिदान दिया है। हमारे जवानों के शौर्य और पराक्रम को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। शासन द्वारा शहीदों के परिजनों के कल्याण हेतु तत्परता से कार्यवाही की जा रही है। विगत दो वर्षों में 47 शहीदों के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गयी है। इसके साथ ही शहीदों के परिजनों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है, विगत दो वर्षो में शहीदों के परिजनों को लगभग 21 करोड़ रूपए की सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों के परिजनों को आर्थिक कठिनाई न उठाना पड़े इसके लिए हम सदैव चिंतित हैं। इसी तारतम्य में शहीद जवानों के परिजनों को दी जाने वाली एक्सग्रेशिया राशि (अनुग्रह अनुदान) 03 लाख रूपये से बढ़ाकर 20 लाख रूपए भी कर दी गयी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हाल ही में शहीद स्मृति दिवस के अवसर पर शहीदों के परिजनों की समस्याओं का तत्काल निराकरण किया गया। परिजनों द्वारा निजी कारणों से स्थानांतरण और आवास आवंटन की मांग की गई, जिस पर तत्काल कार्यवाही करते हुए मौके पर ही उन्हें स्थानांतरण और आवास आबंटन के आदेश प्रदान कर दिये गये।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि शहीदों के परिजन स्वयं को अकेला ना समझें, आप हमारे परिवार का हिस्सा हैं और आपके हर सुख-दुख में हम हमेशा आपके साथ हैं। दीपावली अंधकार को मिटाकर रोशनी फैलाने का पर्व है। इस पर्व पर मेरी शुभकानाएं हैं कि आपके परिवार में हमेशा खुशियों की रोशनी बनी रहे।
मुख्यमंत्री ने शहीद जवानों के शौर्य को याद करते हुए कहा कि उन्होंने असाधारण वीरता और कर्तव्य निष्ठा का परिचय देते हुए अपनी जान की भी परवाह नहीं की। जवानों का साहस और शौर्य हम सभी के लिए हमेशा अनुकरणीय रहेगा। हमारे जवानों की शहादत को सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरा देश याद रखेगा।
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन जांजगीर-चांपा के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय हस्त निर्मित उत्पादों का विक्रय एवं प्रदर्शन केन्द्र (बिहान बाजार) कचहरी चौक पर लगाया जा रहा है। धनतेरस से दीपावली तक यहां पर स्व सहायता समूह की ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं के द्वारा मिट्टी, गोबर आदि से बनाए गए दीपक, सुगन्धित अगरबत्ती, धूपबत्ती, कोसा के कपड़े, फिनायल आदि सामग्री एक ही स्थान पर आमजन के लिए उपलब्ध कराएंगी। कलेक्टर यशवंत कुमार ने नागरिकों से अपील की कि वे स्थानीय स्व सहायता समूहों के द्वारा विभिन्न हस्त निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक कचहरी चौक एवं अन्य बिहान समूहों से खरीदारी करें। इसको लेकर बुधवार को जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री तीर्थराज अग्रवाल ने स्थल निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को समूह के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने कहा।
कलेक्टर यशवंत कुमार के मार्गदर्शन में स्थानीय लोगों को बढ़ावा देने के लिए धनतेरस से दीपावली पर्व तक स्व सहायता समूह के द्वारा विभिन्न हस्त निर्मित उत्पादों को एक मंच प्रदान करने के लिए तीन दिवसीय विक्रय एवं प्रदर्शन केन्द्र (बिहान बाजार) का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे हमारे परंपरागत व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे और उनकी आमदनी भी होगी। शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत निर्मल जांजगीर स्व सहायता समूह की महिलाएं द्वारा मिट्टी, गोबर से बनाए गए आकर्षक सुंदर दीये, मूर्तियां, पूजन सामग्री का स्टॉल लगाया जाएगा। समूह द्वारा मिट्टी, गोबर से पिछले कई दिनों से मेहनत करते हुए रंगबिरंगे दिए तैयार किए गए है, जिन्हें बाजार में नागरिकों के लिए विक्रय के लिए रखा जाएगा। इसके अलावा जय मॉ मौली दाई स्व सहायता समूह नवापारा, सरस्वती स्व सहायता समूह पेंड्री द्वारा जिले की शान कोसा के कपड़ों का स्टॉल लगाया जाएगा। जिसमें समूह के द्वारा तैयार की गई साड़ी, ठंड से बचने के लिए शॉल, लेडीस सूट एवं अन्य कपड़ों को नागरिकों को उपलब्ध कराया जाएगा। तो वहीं जनपद पंचायत नवागढ़ के प्रगतिशील स्व सहायता समूह पेंड्री एवं छग मछुवारा स्व सहायता समूह गोद के द्वारा घरों के फर्श को साफ-स्वच्छ एवं बीमारियों से बचाने के लिए तैयार बिहान फिनायल का विक्रय किया जाएगा।
इसके अलावा अन्य समूहों द्वारा भी गांव-गांव में समूहों के द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों को भी स्थानीय स्तर पर नागरिकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। समूह की महिलाओं ने भी अपील करते हुए कहा कि-दीदी बहिनी मन हर आए छत्तीसगढ़ के दुलारी, समूह के समान बिसाके मनावव सुघ्घर दीवाली।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
