July 18, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    तुपकी चलाकर भगवान श्री जगन्नाथ को दी प्रतीकात्मक सलामी, जगदलपुर में अंडरग्राउंड बिजली व्यवस्था के निर्णय पर आयोजन समिति ने जताया आभार

    रायपुर ।

    बस्तर की 619 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा गोंचा महापर्व-2026 का निमंत्रण लेकर महापर्व आयोजन समिति के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को महापर्व में शामिल होने का आमंत्रण दिया, जिसे स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर की ऐतिहासिक परंपरा का सम्मान करते हुए तुपकी चलाकर भगवान श्री जगन्नाथ को प्रतीकात्मक सलामी दी। यह गोंचा महापर्व की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है।

    मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जगदलपुर शहर में विद्युत तारों को अंडरग्राउंड किए जाने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि इस पहल से शहर में विद्युत संबंधी समस्याओं में कमी आई है और भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान आने वाली तकनीकी बाधाएँ भी समाप्त हो गई हैं।

    360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष श्री वेदप्रकाश पाण्डे ने बताया कि समाज अपनी 619 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष 29 जून से 25 जुलाई 2026 तक ऐतिहासिक बस्तर गोंचा महापर्व का आयोजन कर रहा है। महाप्रभु श्री 1008 जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा 16 जुलाई को श्री जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर सिरहासार भवन (जनकपुरी) पहुँचेगी, जहाँ महाप्रभु विराजमान होंगे।

    इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव, महापर्व आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री मुक्तेश पाण्डे सहित आयोजन समिति के अन्य प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

    3 किलोवाट सोलर रूफटॉप प्लांट से मिली ऊर्जा आत्मनिर्भरता • ₹1.08 लाख की सरकारी सब्सिडी • अतिरिक्त बिजली ग्रिड में, परिवार को आर्थिक राहत

    रायपुर ।
    प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के हजारों परिवारों के लिए आर्थिक राहत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। इसका प्रेरक उदाहरण बस्तर जिले के ग्राम तेलीमारेंगा निवासी रघुचंद कर्रे हैं, जिन्होंने योजना के तहत अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कराया। इसके बाद उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है और परिवार को हर महीने करीब ₹1,500 की सीधी बचत हो रही है।
    रघुचंद कर्रे ने बताया कि पहले हर महीने बिजली बिल के रूप में लगभग डेढ़ हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया और सरकारी सहायता से अपने घर पर सोलर संयंत्र स्थापित कराया।

    ₹1.08 लाख की सब्सिडी से आसान हुआ सोलर प्लांट लगाना

    योजना के अंतर्गत रघुचंद कर्रे को 3 किलोवाट सोलर रूफटॉप प्लांट की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से ₹1.08 लाख की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहायता से सोलर संयंत्र लगाना उनके लिए किफायती और सरल हो गया।

    अतिरिक्त बिजली ग्रिड में, बिजली बिल हुआ 'जीरो'

    सोलर प्लांट चालू होने के बाद अब उनके घर की अधिकांश बिजली जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं। संयंत्र से बनने वाली अतिरिक्त बिजली बिजली कंपनी के ग्रिड में भेजी जा रही है। परिणामस्वरूप उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है।

    रघुचंद कर्रे का कहना है कि अब बिजली बिल की चिंता खत्म हो गई है और हर महीने होने वाली बचत से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उनके अनुसार यह योजना मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    स्वच्छ ऊर्जा के साथ आर्थिक सशक्तिकरण

    रघुचंद कर्रे ने ऊर्जा के क्षेत्र में आम नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बस्तर के अन्य नागरिकों से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि यह योजना केवल बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    मुख्य तथ्य एक नजर में
    हितग्राही: रघुचंद कर्रे, ग्राम तेलीमारेंगा, जिला बस्तर
    योजना: प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
    सोलर प्लांट क्षमता: 3 किलोवाट
    सरकारी सब्सिडी: ₹1.08 लाख
    पहले का बिजली बिल: लगभग ₹1,500 प्रति माह
    वर्तमान बिजली बिल: लगभग शून्य
    लाभ: मासिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग।

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वन महोत्सव में किया शुभारंभ, 146 करोड़ की पर्यटन परियोजनाओं से बदलेगी भोरमदेव की तस्वीर

    रायपुर/कबीरधाम,।

    कबीरधाम जिले का भोरमदेव अब छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शनिवार को भोरमदेव अभ्यारण्य में आयोजित वन महोत्सव के अवसर पर 6 किलोमीटर लंबे भोरमदेव इको ट्रेल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों, वन अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ ट्रेल का भ्रमण कर प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और वन्य जीवन का अनुभव लिया।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव प्रकृति की अनमोल धरोहर है और यहां इको-टूरिज्म के विस्तार से स्थानीय युवाओं को रोजगार, छोटे व्यवसायों को बढ़ावा तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का भी सशक्त जरिया है।

    पर्यटन से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

    श्री शर्मा ने कहा कि जंगल सफारी के बाद अब इको ट्रेल पर्यटकों को घने जंगलों, वन्यजीवों, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रोमांचक अनुभव प्रदान करेगी। होटल, परिवहन, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और अन्य व्यवसायों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जबकि स्थानीय युवा नेचर गाइड के रूप में रोजगार के नए अवसर प्राप्त करेंगे।

    146 करोड़ की स्वदेश दर्शन योजना से होगा व्यापक विकास

    उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत भोरमदेव क्षेत्र के समग्र पर्यटन विकास के लिए 146 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से प्रवेश द्वार, संग्रहालय, आधुनिक पार्क, पार्किंग, मेला स्थल, छेरकी महल, मड़वा महल, रामचूंआ और सरोदा बांध सहित अनेक पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद भोरमदेव राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान प्राप्त करेगा।

    3 से 4 घंटे का रोमांचक वन भ्रमण

    वन विभाग द्वारा विकसित लगभग 6 किलोमीटर लंबी इको ट्रेल को पूरा करने में 3 से 4 घंटे का समय लगेगा। प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ पर्यटक पक्षियों, तितलियों, औषधीय वनस्पतियों, वन्यजीवों और भोरमदेव मंदिर परिसर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

    वन महोत्सव में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

    वन महोत्सव के दौरान उप मुख्यमंत्री ने 51 काला आम के पौधों का रोपण कर काला आम उपवन की स्थापना की। साथ ही 50 हजार सीड बॉल अभियान और एक लाख पौधों के वितरण अभियान का शुभारंभ करते हुए ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट भी वितरित किए गए।

    हर सप्ताहांत मिलेगा जंगल का नया अनुभव

    वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव इको ट्रेल का संचालन प्रत्येक शनिवार और रविवार करियाआमा गेट स्थित भोरमदेव इको कैंप से किया जाएगा। इसमें भाग लेने के लिए प्रति व्यक्ति 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रतिभागियों को प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण कराया जाएगा।

    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेशर पटेल, कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण के सदस्य भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य राम कुमार भट्ट, डॉ. वीरेन्द्र साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

    NMC की मंजूरी से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को मिली नई रफ्तार, 1963 की 60 सीटों से बढ़कर अब 250 तक पहुंचा जेएनएम मेडिकल कॉलेज

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर की एमबीबीएस सीटों में 20 सीटों की बढ़ोतरी को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कॉलेज में एमबीबीएस की कुल सीटें 230 से बढ़कर 250 हो जाएंगी।

    MARB द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी लेटर ऑफ परमिशन के अनुसार, पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ से संबद्ध जेएनएम मेडिकल कॉलेज अब पहले से अधिक विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा का अवसर उपलब्ध करा सकेगा।

    60 सीटों से शुरू हुआ सफर, अब 250 तक पहुंची क्षमता

    वर्ष 1963 में मात्र 60 एमबीबीएस सीटों के साथ स्थापित जेएनएम मेडिकल कॉलेज ने पिछले छह दशकों में लगातार विस्तार किया है। समय-समय पर सीटों में वृद्धि करते हुए यह संख्या पहले 100, फिर 2009 में 150, 2019 में 180, 2023 में 230 और अब 2026 में 250 सीटों तक पहुंच गई है। यह वृद्धि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के मजबूत होते ढांचे और बढ़ती स्वास्थ्य सुविधाओं का संकेत मानी जा रही है।

    प्रदेश के युवाओं को मिलेगा बड़ा लाभ

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए कहा कि एमबीबीएस सीटों में वृद्धि से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को अपने ही राज्य में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल मेडिकल शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि भविष्य में प्रदेश को अधिक प्रशिक्षित डॉक्टर भी मिल सकेंगे।

    उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और राज्य सरकार के सतत प्रयासों को देते हुए कहा कि सरकार चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों में यह बढ़ोतरी प्रदेश के उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आई है, जो हर वर्ष सीमित सीटों के कारण अन्य राज्यों का रुख करने को मजबूर होते थे। नई सीटों के जुड़ने से प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का दायरा और व्यापक होगा तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी मजबूत होगी।

    50 नक्सल मुक्त गांवों को मिलेंगे 1-1 करोड़ रुपये, गैर-जनहानि मामलों की होगी साप्ताहिक समीक्षा, 15 अगस्त को हर नक्सल मुक्त गांव में फहराया जाएगा तिरंगा

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित जिलों में विकास, पुनर्वास और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन नक्सल आरोपियों के विरुद्ध जनहानि जैसे गंभीर अपराध दर्ज नहीं हैं, उनके मामलों की विधिसम्मत समीक्षा कर रिहाई की प्रक्रिया तेज की जाए।

    इसके लिए विधि विभाग के सहयोग से अभियोजन अधिकारियों और शासकीय वकीलों की विशेष टीम गठित की जाएगी। साथ ही प्रत्येक सप्ताह संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ऐसे प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित कर प्रगति की निगरानी की जाएगी।

    नक्सल मुक्त गांवों को मिलेगा विकास का तोहफा

    उप मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे और अब नक्सल मुक्त घोषित ग्रामों में तीव्र विकास के लिए प्रत्येक गांव को 1 करोड़ रुपये तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जाएंगे। प्रथम चरण में 50 गांवों का चयन किया गया है, जिनमें सुकमा के 20, बीजापुर के 20 और नारायणपुर के 10 गांव शामिल हैं। इन कार्यों से ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ आधारभूत सुविधाओं का भी विस्तार होगा।

    15 अगस्त को हर नक्सल मुक्त गांव में तिरंगा यात्रा

    श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि आगामी 15 अगस्त 2026 को सभी नक्सल मुक्त गांवों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा और तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी, जिससे राष्ट्रीय एकता, विश्वास और जनभागीदारी का संदेश गांव-गांव तक पहुंचे।

    पीड़ित और पुनर्वासित परिवारों को मिलेगी प्राथमिकता

    बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी नक्सल पीड़ित एवं पुनर्वासित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के विशेष प्रावधानों के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए। जिन क्षेत्रों में बड़ी नक्सली घटनाएं हुई हैं, वहां शहीद जवानों और पीड़ित नागरिकों की स्मृति में सामुदायिक स्मारकों का निर्माण भी कराया जाएगा।

    उप मुख्यमंत्री ने जिलावार शहीद जवानों, मृत नागरिकों तथा उनके परिजनों को दी गई सहायता की समीक्षा करते हुए कहा कि शासन की सभी निर्धारित सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

    एक माह में मिलेगा प्रोत्साहन राशि का भुगतान

    पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर पुनर्वासित युवाओं को घोषित प्रोत्साहन राशि का भुगतान एक माह के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पुनर्वास एवं पीड़ित परिवारों से संबंधित सभी जानकारियों को डिजिटल डैशबोर्ड पर नियमित रूप से अपडेट करने को कहा गया।

    इसके अलावा माओवादियों द्वारा लूटे गए हथियारों की बरामदगी के लिए अंतर्राज्यीय समन्वय समिति गठित करने तथा जंगलों में कोई हथियार न छूटे, यह सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

    बैठक में प्रमुख सचिव सुश्री निहारिका सिंह बारिक, सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, एडीजी श्री विवेकानंद सिन्हा सहित गृह विभाग, पुलिस विभाग एवं संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    बस्तर में 12 वर्षों के जमीनी अनुभव और 7 वर्षों के ऐतिहासिक नेतृत्व का मिलेगा देश को लाभ, आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर निभाएंगे अहम भूमिका 

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक और ऐतिहासिक अभियान का नेतृत्व करने वाले 2003 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज (Sundarraj P.) को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जून 2026 में उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को मंजूरी देते हुए आदेश जारी किए थे।

    पी. सुंदरराज का नाम बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता का पर्याय माना जाता है। उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक बस्तर संभाग में अपनी सेवाएं दीं और लगातार 7 वर्षों तक बस्तर रेंज के आईजी के रूप में कार्य करते हुए दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात सर्वाधिक संवेदनशील जिलों में सुरक्षा अभियानों का प्रभावी नेतृत्व किया।

    उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए, जिससे नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने लगातार कमजोर होते गए। कई बड़े माओवादी कमांडर मारे गए, जबकि सैकड़ों नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की। उनकी रणनीति ने बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की और नक्सल विरोधी अभियानों को नई दिशा दी।

    गृह मंत्रालय ने उनके उत्कृष्ट ट्रैक रिकॉर्ड, रणनीतिक सोच और जमीनी अनुभव को देखते हुए उन्हें देश की प्रमुख आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी एनआईए में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। एनआईए आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद से जुड़े गंभीर मामलों की जांच करने वाली देश की सर्वोच्च केंद्रीय एजेंसी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर के चुनौतीपूर्ण हालात में वर्षों तक काम करने का उनका अनुभव अब राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच और रणनीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

    46 वर्षीय पी. सुंदरराज मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के निवासी हैं। उन्होंने बी.एससी. (कृषि विज्ञान) की पढ़ाई के बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पुलिस वीरता पदक (Police Medal for Gallantry) तथा सराहनीय सेवा पदक सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

    पी. सुंदरराज की यह नियुक्ति न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि बस्तर में उनके नेतृत्व में किए गए प्रभावी नक्सल विरोधी अभियानों को राष्ट्रीय स्तर पर भी उच्च सम्मान और मान्यता मिली है।

    पाटन। बोल बम कांवर यात्रा समिति, पाटन द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य एवं विशाल कांवर यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। यात्रा को सुव्यवस्थित, भव्य एवं श्रद्धामय स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार, 11 जुलाई 2026 को दोप. 3:00 बजे रेस्ट हाउस, पाटन में आयोजित की जाएगी।

    समिति के संयोजक श्री जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि कांवर यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन बस नहीं है यह सनातन संस्कृति, आस्था, अनुशासन, सेवा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष हजारों शिवभक्त "बोल बम" के जयघोष के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कांवर यात्रा में सम्मिलित होते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी यात्रा को पहले से अधिक भव्य और सुव्यवस्थित रूप देने की योजना बनाई जा रही है।

    समिति के संयोजक वर्मा जी ने कहा कि बैठक में यात्रा के संपूर्ण आयोजन की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यात्रा मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, पेयजल एवं भोजन व्यवस्था, विश्राम स्थल, यातायात समन्वय, स्वच्छता, अनुशासन, प्रचार-प्रसार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए सभी पदाधिकारियों एवं शिवभक्तों के सुझाव लिए जाएंगे।

    समिति के संयोजक वर्मा ने पाटन क्षेत्र के सभी सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों, युवा मंडलों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारी बंधुओं, स्वयंसेवकों एवं भगवान शिव के सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर अपने सुझाव दें एवं आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।आगे उन्होंने कहा कि यह आयोजन किसी एक व्यक्ति या समिति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था और सहभागिता का उत्सव है।

    69वीं जयंती पर निःशुल्क बहुउद्देशीय प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार केंद्र की शुरुआत, मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प

    भिलाई।

    आज जब समाज सेवा को अक्सर राजनीति और पद से जोड़कर देखा जाता है, ऐसे दौर में भिलाई के समाजसेवी इंद्रजीत सिंह यह साबित कर रहे हैं कि सेवा के लिए किसी पद या राजनीतिक पहचान की नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। वर्षों से वे बिना किसी राजनीतिक पद के समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने के कार्य में निरंतर सक्रिय हैं।

    इंद्रजीत सिंह अपने पूज्य पिता स्वर्गीय बीरा सिंह के सेवा, सहयोग और मानवता के आदर्शों को जीवन का मार्ग मानते हुए उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्तदान, खेल, महिला सशक्तिकरण और जरूरतमंद परिवारों की सहायता जैसे अनेक क्षेत्रों में उनके सामाजिक कार्य लगातार लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

    स्वर्गीय बीरा सिंह की 69वीं जयंती पर उन्होंने समाज के लिए एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए आर्य नगर, कोहका स्थित सर्व समाज कल्याण समिति के कार्यालय में "बहुउद्देशीय प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार केंद्र" का शुभारंभ कराया। इस केंद्र का उद्घाटन उनकी माताजी श्रीमती कुलवंत कौर ने किया।

    इस केंद्र में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, दोना-पत्तल निर्माण, झाड़ू निर्माण, रुई-बाती, दीया एवं अगरबत्ती निर्माण सहित कई स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है।

    इंद्रजीत सिंह की समाज सेवा में उनकी माताजी श्रीमती कुलवंत कौर भी बराबर की भागीदार हैं। जरूरतमंदों की सहायता, महिला कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के प्रत्येक अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका इस सेवा यात्रा को पारिवारिक संस्कारों का जीवंत उदाहरण बनाती है।

    खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना भी इंद्रजीत सिंह की प्राथमिकताओं में शामिल है। वे युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और मंच उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं, जिससे नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

    इंद्रजीत सिंह का मानना है कि समाज में वास्तविक परिवर्तन भाषणों से नहीं, बल्कि निरंतर सेवा, संवेदनशीलता और जनभागीदारी से आता है। उनका स्पष्ट संदेश है कि व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसका पद नहीं, बल्कि उसके कर्म होते हैं।

    आज इंद्रजीत सिंह उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं जो बिना किसी राजनीतिक मंच या पद के समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहते हैं। स्वर्गीय बीरा सिंह के सेवा-संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए वे यह संदेश दे रहे हैं कि "सेवा ही सबसे बड़ा धर्म, इंसानियत ही सबसे बड़ा पद और समाज की दुआएं ही सबसे बड़ा सम्मान हैं।"

    जन्मजात होंठ की विकृति का हुआ सफल उपचार, अब सामान्य जीवन जी रही हैं 22 वर्षीय युवती

    रायपुर, / होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) एक आम समस्या है, जिसमें बच्चे के ऊपरी होंठ या तालू के ऊतक गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं। यह दरार केवल होंठ पर हो सकती है या नाक तक जा सकती है। सर्जरी द्वारा इसे 90ः से 100ः तक ठीक किया जा सकता है।

    बीजापुर जिले के दूरस्थ बासागुड़ा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय भीमे हेमला जन्म से होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) से पीड़ित थीं। इस कारण उन्हें भोजन करने, निगलने और स्पष्ट रूप से बोलने में काफी परेशानी होती थी। यह समस्या उनके आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती थी।

    उपचार के लिए भीमे हेमला ने जिला अस्पताल बीजापुर में संपर्क किया। यहां कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. विभू तिवारी के नेतृत्व में स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत उनकी सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन थिएटर के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयास से यह जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक पूरी हुई।

    सर्जरी के बाद भीमे हेमला के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब उन्हें बोलने, निगलने और सामान्य रूप से भोजन करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती। सफल उपचार से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे अब सामान्य एवं सम्मानजनक जीवन जीने की ओर आगे बढ़ रही हैं।

    जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री नम्रता चौबे के सहयोग से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी और सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के नेतृत्व में जिला अस्पताल बीजापुर में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसका लाभ अब दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही जिले में मिल रहा है।

    जिला अस्पताल बीजापुर में इस तरह की जटिल सर्जरी का सफल होना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती क्षमता और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं का प्रमाण है। इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है।

    हितग्राही की प्रतिक्रिया

    भीमे हेमला, बासागुड़ा निवासी ने बताया कि वो जन्म से इस समस्या से परेशान थी। जिला अस्पताल बीजापुर में मेरा सफल इलाज हुआ। अब मैं आसानी से बोल सकता हूं और खाना खा सकती हूं। मेरे चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ सरकार एवं डॉ. विभू तिवारी, जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।

    हर माह वीडियो आधारित निरीक्षण से गड्ढों, दरारों और पॉटहोल की होगी पहचान, त्वरित मरम्मत की बनेगी कार्ययोजना

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़कों की मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्य को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने पीएमजीएसवाई के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस एआई आधारित सड़क निरीक्षण प्रणाली को जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

    हर महीने वीडियो से होगी सड़कों की जांच

    समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि इस नई तकनीक के तहत अब राज्य की प्रत्येक पीएमजीएसवाई सड़क का हर महीने वीडियो आधारित निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए विशेष एआई आधारित ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार कर लिया गया है। एआई तकनीक सड़कों पर मौजूद गड्ढों (पॉटहोल्स), दरारों और अन्य क्षतियों की अपने आप पहचान कर उनका विश्लेषण करेगी। इससे सड़कों की श्रियल टाइमश् (वास्तविक स्थिति) की सटीक जानकारी मिलेगी और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचा जा सकेगा।

    सर्वाधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को मिलेगी प्राथमिकता

    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि एआई तकनीक से प्राप्त आंकड़ों (डेटा) के आधार पर राज्य की सबसे ज्यादा खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान प्राथमिकता से की जाएगी। इसके बाद उनके संधारण (रखरखाव) की बजट कार्ययोजना तैयार कर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का सही और बेहतर उपयोग हो सकेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम व सुरक्षित बनेगा।

    कल से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

    इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कल से ही प्रायोगिक तौर पर (पायलट प्रोजेक्ट के रूप में) प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक चयनित सड़क का एआई आधारित निरीक्षण शुरू किया जाए। इन शुरुआती निरीक्षणों से मिलने वाले परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के इस उपयोग से सड़कों की आयु बढ़ेगी और समय पर मरम्मत होने से जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

    इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव श्री भीम सिंह, सचिव श्री धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक श्री तारन प्रकाश सिन्हा तथा संचालक एनआरएलएम श्री अश्वनी देवांगन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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