
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के वीर बलिदानियों की पावन स्मृति को संजोने और उनकी शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम सोनपुर में शौर्य वाटिका का भूमिपूजन किया गया। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में जिले के 37 शहीद परिवारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर लगभग एक एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही 'शौर्य वाटिका'में शहीदों के नाम पर उनके परिजनों द्वारा स्मृति वृक्ष लगाए गए। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने भी शहीदों की स्मृति में पीपल का पौधा रोपित कर शौर्य वाटिका में पौधरोपण की शुरुआत की। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा ने लगभग 78.96 लाख रुपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें तालाब गहरीकरण, खेल मैदान, पहुंच मार्ग निर्माण, शौचालय, चबूतरा निर्माण, वृक्षारोपण एवं शेड निर्माण सहित विभिन्न कार्य शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के अंतर्गत 37.95 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण, आहता निर्माण एवं शेड निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया गया।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ के जवानों और बस्तर के लोगों ने बड़ी कीमते चुकाई है। उन्होंने शहीद जवानों और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा कि आज बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। जिन क्षेत्रों में कभी नक्सल हिंसा के कारण स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाती थीं, वहां अब विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे में शहीद जवानों की बहादुरी और बलिदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आज नक्सल क्षेत्रों में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, जहां कभी जाना मुश्किल था, अब वहां शांति और बदलाव का माहौल है। उपमुख्यमंत्री ने सोनपुर गांव के विकास की सराहना करते हुए कहा कि यहां शहीदों की स्मृति में शौर्य वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के शहीद परिवारों और शहीदों के नाम पर यहां पौधरोपण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग और शौर्य को याद रख सकें। उन्होंने कहा कि सोनपुर गांव में योजना के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। उपमुख्यमंत्री ने गांव में निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनरेगा सहित वीवीजी राम जी के माध्यम से रोजगार के साथ-साथ कौशल विकास और अधोसंरचना निर्माण को गति दी जा रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजनाबद्ध तरीके से गांव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सांसद विजय बघेल ने भी शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम में साजा विधायक ईश्वर साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष कीर्ति नायक, सुरेन्द कोशिक, सरपंच संत कुमार कुंभकार, सेवानिवृत शिक्षक रामू राम चक्रधर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक गण उपस्थित थे।
साभार : धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य
इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।
प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ
शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:
• विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।
• एनीमिया से बचाव 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।
• पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।
• कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।
• दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।
जागरूकता एवं परामर्श सत्र
केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:
• स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।
• ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें। जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।
• अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।
• अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।
शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।
नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आगामी त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में चीनी के दामों में करीब 40 प्रतिशत तक का उछाल आने की खबरों के बीच अलग-अलग बाजारों में खुदरा कीमतें बढ़कर 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। वहीं, कुछ रिपोर्टों के अनुसार पिछले एक-दो महीनों में चीनी के दाम में औसतन 10 से 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।
रक्षाबंधन सहित आगामी त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में चीनी की महंगाई का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ने की संभावना है। चीनी महंगी होने के साथ-साथ मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री और उत्पादन लागत बढ़ने पर त्योहारी सीजन में मिठाइयों के दाम करीब 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी इस बार त्योहारों पर मिठाई खरीदना आम परिवारों की जेब पर पहले की तुलना में अधिक भारी पड़ सकता है।
कम होता स्टॉक बढ़ा रहा चिंता
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक को माना जा रहा है। सितंबर के अंत तक देश में चीनी का घरेलू स्टॉक घटकर 30 से 35 लाख टन रहने की आशंका है। यदि स्टॉक इस स्तर तक पहुंचता है तो आगामी सीजन के शुरुआती महीनों में घरेलू मांग पूरी करने को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
एथेनॉल उत्पादन की ओर गन्ने का डायवर्जन भी असरदार
चीनी की उपलब्धता पर एथेनॉल उत्पादन का भी असर पड़ा है। गन्ने के रस और सीरप का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किए जाने से बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने पर कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
त्योहारी मांग बढ़ने से और बढ़ सकती है कीमत
रक्षाबंधन से त्योहारी सीजन की शुरुआत होने के साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। विशेष रूप से मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ने पर इसका भार ग्राहकों पर पड़ सकता है।
सरकार ने आपूर्ति सुधारने के लिए उठाए कदम
बढ़ती कीमतों और घरेलू उपलब्धता को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति सुधारने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार ने व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा को और सख्त किया है, ताकि बाजार में अनावश्यक जमाखोरी पर नियंत्रण रखा जा सके और उपलब्ध स्टॉक का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो।
त्योहार की मिठास बचाने की जरूरत
त्योहार भारतीय समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक हैं। रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की मिठास से लेकर दीपावली की मिठाइयों तक, चीनी की बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम परिवारों की जेब पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की ओर से आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के प्रयासों के साथ-साथ व्यापारियों से भी उचित लाभ के साथ उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखने की अपेक्षा है।
आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह समय अनावश्यक खरीदारी और बर्बादी से बचते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विकल्पों और उचित कीमतों की तुलना कर खरीदारी करने का संदेश देता है। त्योहार की असली मिठास महंगे दामों में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और खुशियां बांटने में है। सरकार, कारोबारियों और उपभोक्ताओं के सामूहिक प्रयास से उम्मीद है कि महंगाई के बावजूद त्योहारों की मिठास फीकी नहीं पड़ेगी।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है कि रायपुर निवासी सौम्या राठौर का चयन भारत के सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली में माननीय जस्टिस श्री चन्द्रशेखर के कोर्ट में लीगल असिस्टेंट कम रिसर्च एसोसिएट के पद पर हुआ है। सौम्या राठौर धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर एवं श्रीमती रोशनी राठौर, कम्पीयर, आकाशवाणी, रायपुर की बेटी हैं।
सौम्या राठौर ने MHCET परीक्षा में ऑल इंडिया 23वां स्थान प्राप्त कर एशिया के सबसे पुराने लॉ कॉलेज Government Law College, Mumbai से Legal Science and LL.B. की शिक्षा पूर्ण की है। अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिभा के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आयोजित लीगल असिस्टेंट परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद सौम्या राठौर की मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री एन. के. चंद्रवंशी के कोर्ट में लीगल असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति हुई, जहां वे वर्तमान में कार्यरत थीं। अब उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था भारत के सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली तक पहुंचाया है।
सौम्या राठौर की बहन शौर्या राठौर भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर रही हैं। शौर्या राठौर Government Medical College, Jagdalpur से MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। सौम्या राठौर और शौर्या राठौर दोनों बहनें प्रारंभ से ही मेधावी छात्राएं रही हैं और अपनी मेहनत एवं प्रतिभा के बल पर लगातार सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं।
सौम्या राठौर के पिता धनंजय राठौर मूलतः जांजगीर के निवासी हैं और वर्तमान में रायपुर में निवासरत हैं। बेटी की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से राठौर परिवार के साथ-साथ जांजगीर और रायपुर के लोगों में भी हर्ष और गर्व का माहौल है।
सुप्रीम कोर्ट में लीगल असिस्टेंट कम रिसर्च एसोसिएट के रूप में सौम्या राठौर का चयन उनकी मेहनत, मेधा, निरंतर अध्ययन और विधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। उनकी यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं, विशेषकर विधि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।
अगर आलोचना है अधिकार, तो अपमान की सीमा कहां से शुरू होती है? त्रिपुरा हाईकोर्ट ने एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से किया इनकार
अगरतला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक आलोचना का अधिकार है, लेकिन आलोचना के नाम पर अभद्र, अपमानजनक या मानहानिकारक भाषा का इस्तेमाल स्वतः कानूनी संरक्षण का हकदार नहीं हो जाता।
राजनीतिक विरोध की आजादी, लेकिन भाषा की भी एक सीमा
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना। अदालत के मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी जनप्रतिनिधि अथवा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है। हालांकि, इस अधिकार की आड़ में किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जो कानून के दायरे में आपत्तिजनक या मानहानिकारक हो।
प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद का भी अदालत ने किया उल्लेख
अदालत ने प्रधानमंत्री के पद की संवैधानिक गरिमा का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया। कोर्ट की टिप्पणियों का सार यह रहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की राजनीतिक आलोचना और उसके प्रति अभद्र अथवा मानहानिकारक टिप्पणी—दोनों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने की मांग को झटका
मामले में कंटेंट क्राइटर की ओर से एफआईआर तथा जांच के बाद दाखिल चार्जशीट को रद्द करने की मांग की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने से इनकार कर दिया। यानी अब मामला आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत बढ़ेगा और आरोपों की न्यायिक जांच का रास्ता खुला रहेगा।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी बड़ा संदेश
यह फैसला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी कानूनी सीमाओं को लेकर महत्वपूर्ण बहस को सामने लाता है। अदालत ने संकेत दिया कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और आलोचना करना अपराध नहीं है, लेकिन अभद्र एवं मानहानिकारक भाषा को केवल 'राजनीतिक अभिव्यक्ति' बताकर कानूनी कार्रवाई से बचा नहीं जा सकता।
फैसले का मूल संदेश साफ है—सत्ता की आलोचना लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कानूनी मर्यादा भी जुड़ी है।
पटना। शौर्यपथ । :अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद अब क्या बिहार की धरती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विशाल मंदिर बनने जा रहा है? बीते कुछ दिनों से गलियारों में यह खबर तेजी से तैर रही है कि करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से पीएम मोदी का एक भव्य मंदिर तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी 'श्रीराम अवतार' जैसी सोने की मूर्ति स्थापित होगी। इस खबर ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। लेकिन क्या वाकई जमीन पर ऐसा कोई मंदिर बनने जा रहा है, या यह सिर्फ एक सियासी शिगूफा है? आइए जानते हैं इस पूरे मामले का असली सच।
? सस्पेंस से उठा पर्दा: कहाँ से आया यह अनोखा आइडिया?
इस पूरे मामले के पीछे कोई धार्मिक संस्था या मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी नहीं है। दरअसल, यह चौंकाने वाला प्रस्ताव बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड (Bihar State Transgender Welfare Board) की एक आंतरिक बैठक से निकलकर सामने आया है। बोर्ड के सदस्य डॉ. राजन सिंह ने देश के प्रति पीएम मोदी के योगदान को देखते हुए पटना में उनके नाम पर 5 एकड़ के परिसर में एक भव्य मंदिर और 'श्रीराम' रूपी स्वर्ण प्रतिमा बनाने की इच्छा जताई है।
?️ क्या है 'आधिकारिक सच' और कानूनी पेंच?
भले ही इस खबर को लेकर सोशल मीडिया और गलियारों में भारी उत्साह या चर्चा देखी जा रही हो, लेकिन कागजी और कानूनी हकीकत इससे कोसों दूर है:सिर्फ एक विभागीय इच्छा: यह प्रस्ताव केवल एक सलाहकार बोर्ड की बैठक में पारित हुआ है। यह बोर्ड बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के तहत आता है।
कैबिनेट की मंजूरी बाकी: किसी भी बोर्ड के प्रस्ताव को हकीकत बनने के लिए राज्य सरकार के कैबिनेट सचिवालय विभाग की अंतिम मुहर की जरूरत होती है, जो कि अभी तक नहीं मिली है।
बजट और जमीन पर सस्पेंस: बोर्ड ने सरकार से 5 एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये के फंड की मांग की है। लेकिन आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार सरकार या कैबिनेट ने इस भारी-भरकम बजट या जमीन आवंटन को लेकर कोई भी आधिकारिक या कानूनी स्वीकृति जारी नहीं की है।
? निष्कर्ष: मंदिर या सिर्फ एक प्रस्ताव?अंतिम सच यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की यह योजना अभी सिर्फ फाइलों और शुरुआती चर्चाओं तक ही सीमित है। जब तक बिहार कैबिनेट इस पर कोई बड़ा फैसला नहीं लेती, तब तक इसे केवल एक 'प्रस्ताव' ही माना जाएगा, किसी मंदिर के निर्माण की शुरुआत नहीं।
रायपुर । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (CGHB) द्वारा आवंटियों को विलंब अवधि की ब्याज राशि और बकाया जल प्रभार (Water Charges) के सरचार्ज पर 50 प्रतिशत की विशेष छूट एकमुश्त भुगतान (One-Time Settlement) योजना के तहत दी गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित थी।
*गृह निर्माण ने हितग्राहियों को दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा*
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपने हितग्राहियों को बड़ी सौगात दी है। मंडल मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बकायादार हितग्राहियों को दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की।
*विशेष आवासीय योजना के अंतर्गत OTS-1 एवं OTS-2 में आबंटित संपत्तियां इस योजना के दायरे से बाहर*
यह छूट मंडल की समस्त योजनाओं में निर्मित एवं निर्माणाधीन आबंटित संपत्तियों पर लागू होगी। हालांकि, विशेष आवासीय योजना के अंतर्गत OTS-1 एवं OTS-2 में आबंटित संपत्तियां इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगी। पात्र हितग्राही अपनी आबंटित संपत्ति की संपूर्ण बकाया राशि एकमुश्त जमा कर दाण्डिक ब्याज अर्थात विलंबित अवधि के ब्याज में 50 प्रतिशत छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि मंडल द्वारा पूर्व में भी निर्मित भवनों के विरुद्ध बकाया राशि एकमुश्त जमा करने पर दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट का लाभ 31 मार्च 2026 तक दिया गया था। इस योजना को हितग्राहियों से अच्छा प्रतिसाद मिला। मंडल की निधि में तरलता बनाए रखने तथा हितग्राहियों को बकाया राशि एकमुश्त जमा करने की सुविधा देने के उद्देश्य से पुनः यह योजना लागू की गई है।
*वाटर चार्जेस के सरचार्ज में भी 50 प्रतिशत छूट*
अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि कई हितग्राहियों द्वारा जलप्रदाय शुल्क (वाटर चार्जेस) समय पर जमा नहीं किए जाने के कारण लंबित राशि पर सरचार्ज भारित हो रहा था। हितग्राहियों द्वारा लगातार सरचार्ज में छूट देने का अनुरोध किया जा रहा था। हितग्राहियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंडल ने अपनी आबंटित संपत्तियों पर लंबित जलप्रदाय शुल्क का एकमुश्त भुगतान करने पर भारित सरचार्ज में भी 50 प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया है। इससे हितग्राहियों को बकाया राशि के निपटारे में राहत मिलेगी और वे सरचार्ज में छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में मंडल द्वारा संबंधित इकाइयों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने हितग्राहियों से इस सुविधा का लाभ उठाते हुए अपनी बकाया राशि का शीघ्र एकमुश्त भुगतान करने की अपील की।
रायपुर / शौर्यपथ ।
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर में आज स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली । बैठक में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, साफ-सफाई की व्यवस्था तथा मरीजों को दी जा रही अन्य सुविधाओं की बारीकी से समीक्षा की गई। अधिकारियों से जिलेवार जानकारी लेते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक भी जरूरी दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं समय पर पहुंचें, जिससे आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
स्वास्थ्य मंत्री ने समीक्षा बैठक मे सेवाओं को और अधिक बेहतर एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था को हर हाल में दुरुस्त रखने, आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले, इसके लिए कार्ययोजना के अनुसार अमल करने को कहा गया। इसके साथ ही चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव, स्टाफ की उपस्थिति और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से हिदायत दी गई कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने चार दिवसीय प्रतियोगिता का किया उद्घाटन, पांचों संभागों के 540 खिलाड़ियों ने किया आकर्षक मार्चपास्ट
*स्कूली छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुती
रायपुर । रिमझिम फुहारों के बीच खुशनुमा और उत्साहपूर्ण माहौल में मंगलवार को पेण्ड्रा के फिजिकल कॉलेज मैदान में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने ध्वजारोहण कर 18 से 21 अगस्त तक चलने वाली चार दिवसीय प्रतियोगिता के विधिवत शुभारंभ की घोषणा की। उद्घाटन समारोह में खेल प्रतिभाओं के उत्साह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक मार्चपास्ट ने पूरे वातावरण को खेलमय बना दिया।
प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा से 14 से 19 वर्ष आयु वर्ग के कुल 540 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभागी अपनी खेल प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
*खेल भावना और अनुशासन के साथ खेलने की दिलाई शपथ*
उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को खेल नियमों का पूर्ण पालन करते हुए सच्चे अनुशासन, निष्ठा और खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने की शपथ दिलाई। उन्होंने खिलाड़ियों से अपने खेल के गौरव, राज्य के सम्मान और खेल भावना की उच्च परंपराओं को अक्षुण्ण रखने का आह्वान किया।
उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों एवं अतिथियों का जीपीएम की धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि अब खेल को देखने का नजरिया बदल गया है। खेल में हम या तो जीतते हैं या सीखते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल को ऐसे खेलें कि वह पढ़ाई बन जाए और पढ़ाई को ऐसे पढ़ें कि वह खेल बन जाए।
श्री साहू ने खिलाड़ियों को तनाव और अवसाद से मुक्त होकर पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और खेल भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता में जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और संघर्ष की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
*चार खेल विधाओं में प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे 540 खिलाड़ी*
चार दिवसीय राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जिम्नास्टिक, कबड्डी, क्रिकेट और ताइक्वांडो की स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। जिम्नास्टिक में बालक एवं बालिका, कबड्डी में बालिका, क्रिकेट में बालक तथा ताइक्वांडो में बालक एवं बालिका खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
प्रतियोगिता के अंतर्गत जिम्नास्टिक की स्पर्धाएं जिम्नास्टिक हॉल, गुरुकुल गौरेला, क्रिकेट की स्पर्धाएं फिजिकल कॉलेज मैदान, गुरुकुल पेण्ड्रा, ताइक्वांडो की स्पर्धाएं जनपद सभागार पेण्ड्रा तथा कबड्डी की स्पर्धाएं कबड्डी प्रशिक्षण केन्द्र पेण्ड्रा में आयोजित की जा रही हैं।
*रंग-बिरंगी पोशाकों में खिलाड़ियों का आकर्षक मार्चपास्ट*
उद्घाटन समारोह का सबसे आकर्षक दृश्य पांचों संभागों से आए खिलाड़ियों का मार्चपास्ट रहा। केसरिया, पीला, नीला, हरा, लाल और सफेद रंग की आकर्षक पोशाकों में सजे खिलाड़ियों की टुकड़ियों ने पूरे अनुशासन और उत्साह के साथ मार्चपास्ट किया। खिलाड़ियों के जोश और उमंग से पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इस अवसर पर स्कूली छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति देकर समारोह में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और विद्यार्थियों की प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया।
*फिजिकल कॉलेज मैदान में बनेगा भव्य मंच*
कार्यक्रम के दौरान कोटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रतियोगिता की सफलता की कामना की।
फिजिकल कॉलेज मैदान पेण्ड्रा में भविष्य में आयोजित होने वाले खेल एवं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सुंदर, सुसज्जित और बड़े मंच के निर्माण की घोषणा भी की गई। सांसद सह केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने 10 लाख रुपये तथा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने 5 लाख रुपये, इस प्रकार कुल 15 लाख रुपये देने की घोषणा की। इस घोषणा का उपस्थित लोगों ने स्वागत किया।
*खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर*
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रतियोगिता की सफलता की कामना की। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों की सुविधा, सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रतियोगिता से संबंधित खेल प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। आयोजक मंडल की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
*खेल प्रतिभाओं के लिए राज्य स्तरीय मंच*
26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए स्कूली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रही है। चार दिनों तक चलने वाली विभिन्न खेल स्पर्धाओं में खिलाड़ी न केवल अपनी खेल क्षमता का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि अनुशासन, टीम भावना, प्रतिस्पर्धा और खेल भावना की सीख भी प्राप्त करेंगे।
उद्घाटन समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा श्री राकेश जालान, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गौरेला श्री मुकेश दुबे, जनपद पंचायत गौरेला अध्यक्ष श्री शिवनाथ बघेल, जनपद पंचायत मरवाही अध्यक्ष श्रीमती जानकी कुशरो, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खिलारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री रजनीश तिवारी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि एवं प्रतिभागी खिलाड़ी उपस्थित रहे।
रायपुर / मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
*बैठक के मुख्य बिंदु एवं निर्देश*
दुर्घटना में घायलों का इलाज प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 108 एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता की सख्त मॉनिटरिंग और ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिकों (गुड सेमेरिटन) को यथाशीघ्र प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
*दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने निर्देश*
अधिक दुर्घटना वाले 8 जिलों पर विशेष फोकस किया गया, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा और जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
*दुर्घटनाओं में कमी लाने सड़क निर्माण के पूर्व ही डिजाइन सही बनाएं*
ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं विश्लेषण के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट्स में समय-सीमा के भीतर सुधार करने और सुधार के बाद दुर्घटनाओं में आई कमी का विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने जोर दिया कि बाद में सुधार करने से बेहतर है कि सड़कों की शुरुआती डिजाइन ही सही हो। सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
*युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को यातायात जागरूकता से जोड़े*
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों में रोड क्लब गठित करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सुगम यातायात प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बनी रहे। सभी जिलों के कलेक्टरों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए।
बैठक की शरुआत में परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) श्री प्रदीप गुप्ता सहित लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य, जनसंपर्क और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
