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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
बीजापुर के 9 लोगों की आंखों की रोशनी जाना सरकार की लापरवाही
भाजपा सरकार में फिर नसबंदी और ऑंखफोड़वा कांड रमन सरकार के समय की पुनर्रावृत्ति
रायपुर/शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर आम लोगों के जान के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण बीजापुर में आंख के ऑपरेशन के बाद 8 महिला एवं 1 पुरुष की आंख से दिखना बंद हो गया, जिसे ईलाज के लिये रायपुर रिफर किया गया है। दुर्ग में नसबंदी के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई। स्वास्थ विभाग की लापरवाही के कारण हुई इस घटना के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल जिम्मेदार है। सरकार के द्वारा खरीदी दवाईया अमानक औऱ नकली है जो जानलेवा साबित हो रही है। अभी हुई नशबंदी कांड और ऑंखफोड़वा कांड ने पूर्व रमन सरकार के दौरान हुई घटना को ताजा कर दिया। भाजपा सरकार में ही इस प्रकार की घटनाएं होने की वजह भाजपा सरकार में दवाई खरीदी में कमीशन खोरी भ्रष्टाचार है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह पहली घटना नहीं है, इसके पहले भी बस्तर के एक दर्जन से अधिक लोगों की आंखों की रोशनी सरकार की लापरवाही से गयी थी। स्वास्थ्य विभाग के लापरवाही के चलते नसबंदी और ऑंखफोड़वा कांड के पहले नकली दवाई एवं ईलाज में लापरवाही के कारण मौत हो चुकी है फिर स्वास्थ मंत्री जागे नही है। गैर जिम्मेदार स्वास्थ मंत्री के कारण सरकारी अस्पताल मौत का कारण बन रहे है। सरकारी अस्पताल की विश्वसनीयता संकट में है। गरीब आदमी इलाज कहाँ कराये? निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से पूरा इलाज नहीं हो रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश में नकली दवाई सप्लाई करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाया जा रहा है? क्यों उन्हें बचाया जा रहा है इसे स्पष्ट है की दवा सप्लायरों से भारतीय जनता पार्टी ने मोटी रकम वसूली की है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में छोटे बच्चों को 14 महीने से क्रीमी की दवाई दी जा रही है, उसे अमानक मान कर अब प्रतिबंध लगा दिया गया। सरकारी अस्पताल में ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने पर तबीयत खराब हो जा रहा है, फफूंद लगी दवाईयां दी जा रही है, पेरासिटामोल टेबलेट, सर्जिकल इंजेक्शन, ग्लूकोज ड्रिप, एल्बेंडाजोल टेबलेट, प्रेगनेंसी किट सहित कई दवाईयां अमानक है, इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार के लापरवाही के चलते अमानक दवाइयों के कारण मरीज की आंखों की रोशनी गयी है, नसबंदी से जिनकी जान गयी है, सरकार उन्हें मुआवजा दे? सरकार यह सुनिश्चित करें कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मरीज को वितरित की जाने वाली दवाइयां पूर्णत सुरक्षित और तय मानकों को पूरा करने वाला हो? जिन कंपनियों की दवाईयां अमानक पाई गई है उनके खिलाफ अपराध पंजीबद हो दवा सप्लाई करने वाले एजेंसी को ब्लैकलिस्टेड किया जाए, दवा खरीदी में शामिल अधिकारियों को पर भी कड़ी कार्रवाई हो।
कोयले का सेस भी कम हुआ है, बिजली के बढ़े दाम भी कम किया जाये - कांग्रेस
रायपुर/शौर्यपथ / बढ़े बिजली बिल ने आम जनता का बजट बिगाड़ दिया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि तीन महिने से आ रहे बेतहाशा बढ़ा बिजली बिल से राज्य का हर नागरिक परेशान है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार भूपेश सरकार के समय शुरू की गयी बिजली बिल हाफ योजना को फिर शुरू करें, ताकि जनता को बढ़े बिजली बिल में कुछ राहत मिल सके। बिजली उत्पादन का प्रमुख घटक कोयला है। कोयले पर लगने वाला सेस कम हो गया है, जिसके कारण कोयले का दाम न्यूनतम 400 रू. कम हो गया है, अतः सरकार वीसीए (वेरियेबल कास्ट एडजेस्टमेंट) में कटौती के आधार पर बिजली के दाम तुरंत घटाये।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार की नाकामी लापरवाही और मुनाफाखोरी वाली नीति के कारण प्रदेश के लोगों के लिए बिजली कटौती और मंहगी बिजली बड़ी समस्या बन गई है। राज्य बनने के बाद प्रदेश में बिजली के दाम सबसे ज्यादा वर्तमान समय में है। सरकार ने बिजली बिल हाफ योजना को बंद कर दिया जिससे लोगों के बिजली के बिल दुगुना से भी अधिक आ रहा। महंगी बिजली के बाद भी सरकार जनता को चौबीस घंटे बिजली नहीं उपलब्ध करवा पा रही। ग्रामीण क्षेत्र में आठ-नौ घंटे तक हो रही बिजली कटौती से जनता परेशान हो रही, लोग बिजली कटौती के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार के बिजली के दाम बढ़ाकर भेजने के अन्यायपूर्ण फैसले का विरोध करती है, कोयला हमारा, पानी हमारा, जमीन हमारी और हमें ही महंगे दर पर बिजली बेचा जा रहा है। जनता में बढ़े हुए बिजली बिल के कारण आक्रोश और निराशा है उसके बाद भी सरकार बिजली के दामें पर लूट जारी रखे हुए है।
औद्योगिक नीति में बदलाव बेहतर तो 4,000 से अधिक कंपनियां बंद क्यों हो गई?- कांग्रेस
रायपुर/शौर्यपथ / गुजरात से 33,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार जापान, कोरिया, अमेरिका जाकर और छत्तीसगढ़ निवेशकों को बुलाकर 21 महीने में 7 लाख करोड़ से अधिक निवेश और इसे हजारों लोगों को रोजगार देने का दावा कर रही है लेकिन यह निवेश धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहा है। सरकार दावा कर रही है कि उनके द्वारा बनाई गई नई औद्योगिक नीति और उसमें किए गए 350 से अधिक बदलाव के कारण निवेशक आकर्षित हो रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है जब नई औद्योगिक नीति बेहतर है, फिर प्रदेश से 4,288 कंपनियां बंद क्यों हो गई? जिसके कारण हजारों लोग बेरोजगार हो गए यह भाजपा सरकार की नाकामी है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार को प्रदेश की जनता को गुमराह नहीं करना चाहिए, सरकार के मुखिया और मंत्री विदेश जाकर बड़ी-बड़ी निवेश लाने की बात करते हैं, निवेशकों का भरोसा जीत क्यों नहीं पा रहे हैं? अमेरिका, जापान और कोरिया से सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक आइटम आई टी एआई टेक्सटाइल फार्मास्यूटिकल एवं खाद्य प्रसंस्करण में नई निवेश होने का दावा किया था। लेकिन अब तक कोई भी विदेश के निवेशक छत्तीसगढ़ क्यों नहीं आए? बस्तर में इन्वेस्टर कनक्वे 967 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव आया था कितने निवेशक, कौन है, बस्तर में काम शुरू किया है?
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार उद्योगों के अनुकूल माहौल बनाने में पूरी तरह से नाकाम रही है और अपनी इस नाकामी से जनता का ध्यान भटकने के लिए नए-नए इवेंट करने का दावा कर रही है, निवेशक आने का दावा कर रही है और लाखों युवा जो बेरोजगार हैं, जो रोजगार की औसत तलाश रहे उनके साथ धोखा कर रही है, भाजपा की सरकार प्रदेश में रोजगार के अवसर देने में असफल साबित हो गई है, सरकार की उदासीनता के चलते प्रदेश में पूर्व से संचालित रोलिंग मिल, राइस मिल, सहकारी शक्कर कारखाना, एथेनॉल प्लांट, स्पंज आयरन, ट्रैवल कंपनियों, अस्पताल फार्मा, उद्योग सभी अपने कारोबार को बंद कर रहे हैं, सरकार इस विषय को गंभीरता में ले, प्रदेश से संचालित उद्योग बंद ना हो उसके अनुकूल माहौल बनाएं और नए निवेशकों के नाम से प्रदेश को धोखा देना बंद करें।
शौर्यपथ संपादकीय। 3 नवंबर 2025 को करनाल रेलवे स्टेशन से बिहार के लिए चलाई गई स्पेशल ट्रेन और उससे जुड़े विवाद ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। इस मामले में भाजपा, रेलवे मंत्रालय और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज से मामला अधिक विवादित हो गया है, जिसमें यात्रियों ने खुद को भाजपा समर्थक बताया और बिहार में वोट डालने की बात स्वीकार की।
पूरा मामला: ट्रेन, टिकट और वीडियोकरनाल से गई इस स्पेशल ट्रेन में सैकड़ों यात्रियों ने सफर किया, जिनमें कई ने दावा किया कि उन्हें भाजपा नेताओं ने टिकट उपलब्ध कराए और वे बिहार चुनाव में वोट डालने जा रहे हैं। वायरल वीडियो में यात्रियों की सूची चेक करते भाजपा नेता नजर आए; यात्रियों ने भाजपा के स्कार्फ पहने हुए थे, जिससे यात्रा और राजनीतिक उद्देश्य का सीधा संबंध जताया गया।
विपक्ष का आरोप और रेलवे का जवाब:कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस मामले में रेलवे मंत्रालय से सवाल पूछे और रेल मंत्रालय के पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इतनी अल्प सूचना पर विशेष ट्रेन चलाने का क्या औचित्य है? उन्होंने पूछा कि अगर ये सभी 'असली मतदाता' थे, तो वे अपने खर्चे पर क्यों नहीं गए और बिना वापसी टिकट के क्यों भेजे गए।
रेल मंत्रालय ने जवाब में कहा कि त्योहारी भीड़ को देखते हुए लाखों यात्रियों के लिए हजारों स्पेशल ट्रेनें नियमित रूप से चलाई जाती हैं, और जब भीड़ बढ़ती है तो अनिर्धारित ट्रेनें तैनात होती हैं।
चुनावी आचार संहिता का प्रश्न: प्रश्न यह उठता है कि क्या यह पूरा मामला भारतीय चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन है? चुनावी आचार संहिता के अनुसार, किसी भी दल या सरकार द्वारा मतदाताओं को प्रलोभन देना, विशेष रूप से फ्री टिकट या विशेष सहूलियत देकर, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है। इस मामले में यह आरोप है कि भाजपा ने अपने पक्ष के मतदाताओं के लिए संगठित यात्रा और फ्री टिकट की व्यवस्था की।
संभावित उल्लंघन और जांच की आवश्यकता: राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं की संगठित यात्रा, खासतौर पर सरकार या पार्टी के माध्यम से, चुनावी निष्पक्षता पर प्रभाव डालती है। यदि टिकट व्यवस्था और ट्रेन संचालन पार्टी द्वारा वित्तपोषित पाया गया, तो यह आदर्श आचार संहिता और निष्पक्ष चुनाव सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन होगा। चुनाव आयोग को तत्काल जांच कर जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आम मतदाता का लोकतांत्रिक विश्वास बना रहे।
संपादकीय विश्लेषण: लोकतंत्र की विश्वसनीयता और निष्पक्ष चुनाव
यह घटना भारतीय लोकतंत्र की संवेदनशीलता और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता की परीक्षा है। अगर राजनीतिक दल मतदाताओं को संगठित तरीके से राज्य बदलकर वोट डलवाने की व्यवस्था करेंगे, और सरकारें या उनकी संस्थाएं इसमें भूमिका निभाएंगी, तो निष्पक्ष चुनाव का सिद्धांत कमजोर हो जाएगा। रेलवे जैसी सार्वजनिक सेवा का राजनीतिक उद्देश्य के लिए दुरुपयोग न हो, इसके लिए स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश की आवश्यकता है।मतदाता की स्वतंत्रता, चुनावी आचार संहिता का पालन और प्रशासन की निष्पक्षता लोकतंत्र की मूल आत्मा है। ऐसे मामलों में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप या सफाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और कानूनी कार्रवाई ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल रख सकती है
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस समारोह में NACHA बे एरिया चैप्टर बना सहभागी
प्रवासी छत्तीसगढ़वासी राज्य के सांस्कृतिक राजदूत, छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विश्व में दे रहे पहचान - मुख्यमंत्री साय
रायपुर / शौर्यपथ / अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोक-कला ने विदेश की भूमि पर अपनी विशेष छाप छोड़ी। इस कार्यक्रम में NACHA (North America Chhattisgarh Association) के बे एरिया चैप्टर ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ राज्य को समर्पित एक आकर्षक स्टॉल लगाया, जिसमें राज्य के विशिष्ट उत्पादों, हस्तशिल्प, लोककला और पारंपरिक आभूषणों का सुंदर प्रदर्शन किया गया। इस स्टॉल के माध्यम से छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और हस्तशिल्प की विविधता को प्रदर्शित किया गया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने अत्यंत सराहा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य का मनमोहक प्रदर्शन, जिसने वहां मौजूद भारतीय प्रवासी समुदाय और अन्य देशों के प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में प्रस्तुत यह लोकनृत्य न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि उसने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा को भी सजीव कर दिया।
NACHA के सदस्यों ने बताया कि उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और लोक परंपरा को विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़वासी अपने मूल राज्य की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इस आयोजन ने उन्हें अपनी जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ने का एक सशक्त अवसर प्रदान किया।
मुख्यमंत्री साय ने NACHA बे एरिया चैप्टर के सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि उनका यह प्रयास छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़वासी राज्य के “सांस्कृतिक राजदूत” हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और मूल्यों को पूरी दुनिया में स्थापित कर रहे हैं।
"बिहार विधानसभा चुनाव: लोकतंत्र की जीत, जनता का नया विश्वास"
"नीतीश की वापसी या नए युग की शुरुआत? बिहार का फैसला तय"
"मतदान में रिकॉर्ड भागीदारी से साबित हुआ भारत का लोकतंत्र सशक्त"
राजनीतिक विश्लेषण: शरद पंसारी, संपादक – शौर्यपथ दैनिक समाचार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान संपन्न होते ही पूरे राज्य की नजरें अब 14 नवंबर की मतगणना पर टिक गई हैं। टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल का माहौल गर्म है, और लगभग हर सर्वेक्षण नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए को स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता हुआ दिखा रहा है। वहीं, महागठबंधन इस बार ‘तीसरे नंबर’ की परिस्थिति से भी जूझता नजर आ रहा है।
बिहार की जनता ने इस बार मतदान में ऐसी भागीदारी दिखाई है कि बीते दो दशकों का रिकॉर्ड टूट गया। महिला वोटर्स की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जो लोकतंत्र की मजबूती और जागरूक नागरिकता की दिशा में एक शुभ संकेत है।
पहले चरण में 94 सीटों पर लगभग 62.5 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में 149 सीटों पर मतदान का प्रतिशत 64.8 तक पहुंच गया। यह स्पष्ट संकेत है कि चाहे राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप कितने भी हों, जनता अपने मताधिकार का प्रयोग पूरी सजीवता के साथ कर रही है।
एग्जिट पोल का रुझान और भविष्य की राजनीति
देश की प्रमुख एजेंसियों—सर्वे इंडिया, सी-वोटर और टाइम्स पोल्स—के एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए को इस बार 160 से 175 सीटों के बीच मिलने का अनुमान है। वहीं, महागठबंधन को 55 से 65 सीटों तक सीमित बताया जा रहा है। जन स्वराज पार्टी ने परिवर्तन की राजनीति का दावा किया, लेकिन कई एग्जिट पोल उन्हें शून्य से अधिकतम दो सीटों तक सीमित मान रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के आखिरी चरण में जिस आक्रामक रफ्तार के साथ प्रचार किया, उसने एनडीए के आत्मविश्वास को मजबूती दी। दूसरी ओर, कांग्रेस और राजद लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे, लेकिन जनता के मौन जनादेश ने यह संकेत दिया है कि बिहार ने फिर स्थिरता को तरजीह दी है।
महागठबंधन के लिए मुश्किल राह
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर चुनावी नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की, मगर नीतीश कुमार की विकासपरक राजनीति और नरेंद्र मोदी के राष्ट्रव्यापी प्रभाव के आगे यह कोशिश कमजोर पड़ती दिखी। कांग्रेस ने बार-बार चुनाव आयोग पर ‘‘फर्जी मतदान’’ के आरोप लगाए, किन्तु यदि नतीजे एग्जिट पोल के अनुरूप रहे, तो ये सारे आरोप निराधार ठहरेंगे।
जनता का जनादेश और लोकतंत्र की जीत
बिहार का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं बल्कि लोकतंत्र के पुनः सशक्त होने का संकेत है। मतदाता अब जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर अपने भविष्य की दिशा तय कर रहा है। गांव हो या शहर, युवा मतदाता हो या वरिष्ठ नागरिक—हर वर्ग ने मतदान को लोकतंत्र के महापर्व के रूप में स्वीकार किया है।
इस चुनाव से यह संदेश जा रहा है कि भारत का लोकतंत्र आज भी जीवंत, सक्षम और सर्वश्रेष्ठ है। परिणाम चाहे जिसके पक्ष में आएं, असली जीत लोकतंत्र की ही होगी—क्योंकि जनता ने यह साबित किया है कि सत्ता की चाबी किसी पार्टी या नेता के पास नहीं, बल्कि जनमत के पास है।
नई दिल्ली / एजेंसी /10 नवंबर 2025 की शाम, राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त और ऐतिहासिक स्थल लाल किले के पास एक भीषण कार धमाका हुआ जिसने पूरे इलाके को दहलाकर रख दिया। यह हादसा लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के समीप पार्किंग स्थल में खड़ी एक कार में अचानक विस्फोट के रूप में सामने आया। धमाके की तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि आसपास खड़ी कई गाड़ियों के शीशे चकनाचूर हो गए और तीन-चार गाड़ियां आग की आग में जल गईं। धमाके के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और लोगों में भारी भय व्याप्त हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की सात से अधिक गाड़ियां घटनास्थल पर मौजूद हो गईं और तेज आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत की गई। दमकल, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम ने जोखिम भरे हालातों में करुणामय बचाव कार्य किया। भीषण आग के चलते कई दुकानों और आस-पास की संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचा। आसपास के इलाकों को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में घेर लिया और पूरे क्षेत्र में कार तथा अन्य वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।
इस धमाके ने न केवल कई निर्दोष नागरिकों की जान ली बल्कि कई अन्य लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। एलएनजेपी अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है, जहाँ कई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार विस्फोट में घायल लोग छर्रों, कंक्रीट के टुकड़ों से गहरे जख्मी हुए हैं। मृतकों की संख्या 10 बताई जा रही है, हालांकि यह संख्या अधिक भी हो सकती है क्योंकि जांच जारी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे के बाद तुरंत एलएनजेपी अस्पताल
जाकर घायलों से मुलाकात की तथा सुरक्षा एवं जांच अधिकारियों से विस्तृत ब्रीफिंग ली। उन्होंने कहा कि घटना की हर एंगल से गंभीरता से जांच हो रही है, एनआईए, एनएसजी, यूपी एटीएस और फॉरेंसिक टीमों को मौके पर तैनात किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी भी तरह की साजिश हो, सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और जिम्मेदारों को कड़ी सजा दी जाएगी।
धमाके की प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित आतंकी हमला हो सकता है। धमाके के मलबे से आईईडी के अवशेष मिले हैं। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों तक पहुंचा जा सके। फरीदाबाद में मिले 2900 किलो अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक के संदर्भ में भी जांच चल रही है, लेकिन अभी इसे धमाके से सीधे जोड़ना जल्दबाजी होगी।
धमाके के बाद संपूर्ण क्षेत्र के बाजारों में सन्नाटा पसरा है। चांदनी चौक मार्केट असोसिएशन ने सुरक्षा कारणों से मंगलवार को चांदनी चौक बाजार बंद रखने का ऐलान किया है। यह बाजार देशभर से रोजाना हजारों लोगों की भीड़ वाला प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, इसलिए इसे बंद रखना सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
सामाजिक और राजनैतिक वर्गों ने इस निंदनीय और कायराना हमले की कड़ी निंदा की है। जीवन की रक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले सुरक्षा बलों को पूरा सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया जा रहा है। आम जनता से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और पुलिस तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
यह कायराना हमला न केवल निर्दोष नागरिकों के खिलाफ है बल्कि इस राष्ट्र की आत्मा पर प्रहार है। ऐसे आतंकवादी तत्वों को सबसे सख्त कानून के तहत सबक सिखाने की आवश्यकता है ताकि भावी पीढ़ियां सुरक्षित और शांतिपूर्ण भारत में जी सकें। सुरक्षा एजेंसियां हर संभव संसाधन लगा कर दोषियों को जल्द अदालत में लाने के लिए कार्यरत हैं।
इस घटना ने एक बार फिर देशवासियों को यह याद दिलाया है कि आतंकवाद और विघटनकारी ताकतों के विरुद्ध सतर्कता और स्पष्टता के साथ लड़ना आवश्यक है। हम शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं। इस लड़ाई में सभी नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को एकजुट होकर खड़ा होना होगा क्योंकि हम सबका लक्ष्य केवल और केवल सुरक्षा एवं शांति ही हो सकती है।
यह कायराना हमला, जिसने निर्दोष नागरिकों की जानें लीं, भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी और समाज के लिए एक अपील है कि एकजुट होकर ऐसी निंदनीय हरकतों को समाप्त किया जाना चाहिए।
दुर्ग। शौर्यपथ । रविशंकर स्टेडियम मार्ग पर सुराना कॉलेज के सामने इन दिनों हर दिन बाजार की चहल-पहल है। सब्जियां, कपड़े, घरेलू सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक आइटम तक—यह बाजार लोगों की जरूरतों का केंद्र बन गया है। दुकानदारों की भी खूब आमदनी हो रही है और ग्राहकों को वाजिब दरों पर सामान मिल रहा है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि यह बाजार आखिर लग किसकी अनुमति से रहा है?
नगर निगम दुर्ग के ठीक पास लग रहे इस बाजार के संचालन की जानकारी निगम के अफसरों को है या नहीं—इस पर चुप्पी बरकरार है। नियमों के मुताबिक ऐसे अस्थायी या नियमित बाजारों की अनुमति निगम और जिला प्रशासन दोनों स्तर पर दी जानी चाहिए, मगर यहाँ ऐसा कोई स्पष्ट दस्तावेज या आदेश नहीं दिख रहा।
लोगों को डर है कि कहीं यह नया बाजार भी वही हाल न दोहराए, जैसा सुपेला संडे बाजार के साथ हुआ था—जब प्रशासन को अचानक हटाने की कार्रवाई करनी पड़ी और पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी।
लोगों का कहना है कि हमें बाजार से नहीं, बल्कि नियम-विरुद्ध गतिविधियों से आपत्ति है। प्रशासन की अनदेखी से भविष्य में विवाद या अतिक्रमण जैसी स्थिति बन सकती है।
अब सवाल यह है कि नगर पालिक निगम दुर्ग की महापौर अलका बाघमार और उनके अधिकारी इस उभरते बाजार को देखकर भी क्यों अनजान बने हुए हैं? क्या वाकई यह बाजार निगम की जानकारी के बिना चल रहा है, या फिर अनदेखी की नीति अपनाई जा रही है?
नागरिकों का कहना है कि यदि निगम व प्रशासन नियम से बाजारों को नियंत्रित करें तो न तो व्यापारियों को परेशानी होगी, न ही भविष्य में अवैध कब्जे का संकट खड़ा होगा। नियम से संचालित बाजार अपराध की संभावनाओं को भी खत्म करता है।
बालोद / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बालोद जिले के डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम बटेरा स्थित हेलीपैड पहुॅचने पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। उनके साथ संजारी बालोद विधायक श्रीमती संगीता मौजूद थी। हेलीपैड स्थल में छत्तीसगढ़ प्रदेश कोसरिया पटेल समाज के पदाधिकारी, जिले के जनप्रतिनिधि सहित जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने मुख्यमंत्री श्री साय का आत्मीय स्वागत व अभिनंदन किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष श्री यज्ञदत्त शर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य यशवंत जैन, नगर पंचायत डौंडीलोहारा के अध्यक्ष लाल निवेंद्र सिंह टेकाम, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवलाल ठाकुर, नगर पालिका परिषद बालोद के पूर्व अध्यक्ष राकेश यादव, छत्तीसगढ़ कोसरिया मरार समाज के प्रदेश पदाधिकारियों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों, दुर्ग रेंज के आईजी राम गोपाल गर्ग, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने पुष्प गुच्छ प्रदान कर स्वागत किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज संबलपुर में कोसरिया मरार पटेल समाज द्वारा आयोजित युवक युवती परिचय सम्मेलन एवं शाकम्बरी महोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बड़ा हमला
भिलाई (दुर्ग)। शौर्यपथ। भिलाई के वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रबोध के संपादक पवन केसवानी पर हाल ही में हुए कातिलाना हमले ने न केवल प्रेस की स्वतंत्रता बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। पवन केसवानी द्वारा अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बेबाक समाचार प्रकाशित करने के बाद उन पर अपराधी तत्वों ने यह हमला किया। इस घटना का सीधा संदेश यही है कि अपराधी तत्व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संविधान और कानून व्यवस्था में कतई विश्वास नहीं रखते।
अभिव्यक्ति की आजादी को चोट
भारत का संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19) का अधिकार प्रदान करता है, परंतु यह स्वतंत्रता भी अनुशासन और व्यवस्था के दायरे में ही मान्य है। यदि किसी समाचार में तथ्यगत दोष या दुर्भावना झलकती भी हो, तो न्यायालय और विधिक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं―अपनी आपत्ति को दर्ज कराने के लिए, न कि हिंसा या आत्म निर्णय का विकल्प है। न्याय का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, न कि किसी व्यक्ति या समूह के पास।
अपराधियों की मानसिकता : कानून को अंगूठापवन केसवानी पर हमला करने वालों की यह प्रवृत्ति समाज और कानून दोनों के लिए हर प्रकार से घातक है। ये तत्व संविधान, कानून और लोकतंत्र को नकारकर स्वयं को सर्वोपरि समझते हैं। ऐसे लोगों को समाज का कोई अधिकार नहीं, बल्कि उन पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए ताकि संविधान का सम्मान अक्षुण्ण रहे और लोकतंत्र की चतुर्थ शक्ति अर्थात् मीडिया की आवाज बुलंद रहे।
पुलिस-प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था का दायित्व
जरूरी है कि ऐसे हमलों के अपराधियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई हो तथा सामाजिक स्तर पर यह संदेश जाए कि न तो कानून से बड़ा कोई है और न ही लोकतंत्र को ठेस पहुंचाने वाले को बख्शा जाएगा। इतिहास गवाह है कि गलत खबर पर न्यायालय सजा भी देता है, लेकिन न्याय व्यवस्था की जगह खुद फैसला करना सीधा-सीधा कानून तोड़ना और देशद्रोह के बराबर है।
संवैधानिक संदेश
लोकतंत्र में संवाद, असहमति और समीक्षा से ही रास्ता निकलता है। पत्रकार की अच्छाई-बुराई का फैसला न्यायपालिका करती है, न कि अपराधी। पत्रकार चाहे बड़ा हो या छोटा, वह अगर कोई भी खबर प्रकाशित करता है और उस पर आपत्ति है, तो केवल न्यायिक उपाय ही विकल्प हैं। पवन केसवानी के मसले ने पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर दिया है और यह चेतावनी देता है कि प्रेस पर हमला, लोकतंत्र पर हमला है।
प्रशासन और न्याय प्रणाली से मांग
शौर्यपथ दैनिक ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि अपराधियों पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई हो, ताकि समाज में भय का माहौल न बने और हर पत्रकार स्वतंत्रता से अपनी जिम्मेदारी निभा सके। दोषियों पर सख्ती जरूरी है ताकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा हो सके। इतिहास में कई उदाहरण हैं जहां गलत समाचार पर न्यायिक सजा दी गई, लेकिन फैसला अदालत करेगी, अपराधी नहीं।
दुर्ग। शौर्यपथ। जनसेवा में समर्पित और सादगी की मिसाल दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर का जन्मदिन इस बार एक अनोखा उदाहरण बन गया। 7 नवंबर को जब विधायक चंद्राकर बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी निभा रहे थे, तब उनके गृह नगर दुर्ग में उनके हजारों समर्थक और शुभचिंतक स्वयं उनके आवास पर पहुंचकर जन्मदिन की शुभकामनाएं देने उमड़ पड़े।
विधायक की अनुपस्थिति के बावजूद दिनभर उनके घर पर बधाइयों का तांता लगा रहा। समर्थक पुष्पगुच्छ, मिठाइयां और बधाई संदेश लेकर पहुंचे और विधायक के परिजनों से मिलकर अपने लाडले जनप्रतिनिधि के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त किया।
यह दृश्य जनसेवा के उस रिश्ते को दर्शाता है, जो केवल राजनीति तक सीमित नहीं बल्कि जनता के दिलों में गहराई तक बसा है। विधायक के समर्थकों ने दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र के कई स्थानों पर धूमधाम से केक काटकर, दीप प्रज्वलन कर और जरूरतमंदों को वस्त्र एवं मिठाई वितरित कर उनका जन्मदिन मनाया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी विधायक ललित चंद्राकर के जन्मदिन की बधाईयों की बाढ़ आ गई। बिहार प्रवास से ही उन्होंने सभी समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा —
> “आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है। जनसेवा ही मेरा जीवन धर्म है।”
ललित चंद्राकर के जन्मदिन पर जिस प्रकार उनके अनुपस्थिति में भी जनसैलाब उमड़ा, वह इस बात का प्रमाण है कि वे केवल एक विधायक नहीं बल्कि जनता के हृदय में बसे एक सच्चे जननायक हैं।
7 नवंबर का दिन न केवल विधायक ललित चंद्राकर और उनके परिवार के लिए, बल्कि दुर्ग ग्रामीण की जनता के लिए भी जनसंपर्क और जनस्नेह का अविस्मरणीय पर्व बन गया।
शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र परिवार विधायक ललित चंद्राकर को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं एवं दीर्घायु जीवन की मंगल कामना करता है।
चंपारण की आखिरी रैली में प्रधानमंत्री ने किया नीतीश को मुखिया घोषित, युवाओं की बंपर वोटिंग से बदलते दिखे बिहार के समीकरणशौर्यपथ राजनीति।
चम्पारण। शौर्यपथ राजनीती। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। प्रथम चरण की बंपर 65% से अधिक वोटिंग के बाद राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदलते दिख रहे हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे और अंतिम चरण के प्रचार के आखिरी दिन पश्चिम चंपारण की ऐतिहासिक रैली में बड़ा ऐलान करते हुए कहा — “नहीं चाहिए कट्टा सरकार, अबकी बार नीति सरकार।
”इस बयान के साथ ही प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संकेत दे दिया कि यदि आईएनडीआईए गठबंधन की सरकार बनती है, तो उसके मुखिया नीतीश कुमार ही होंगे। यह वही नीतीश हैं जिन पर पहले चरण से पहले एनडीए खेमे में “मुख्यमंत्री चेहरा” को लेकर संशय बना हुआ था। गृह मंत्री अमित शाह ने भी पहले चरण के मतदान से पहले कहा था कि परिणामों के बाद विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री का चयन होगा। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं — बंपर मतदान ने बिहार की राजनीति में नई हवा बहा दी है।
प्रधानमंत्री मोदी की रैली में उमड़े जनसैलाब और युवाओं की भारी भागीदारी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बिहार का मतदाता इस बार निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है। रैली में प्रधानमंत्री ने कटाक्ष भरे अंदाज में कहा कि बिहार को अब "कट्टा और भ्रष्टाचार" की राजनीति नहीं चाहिए, बल्कि "विकास की नीति" चाहिए — और यह नीति केवल नीतीश सरकार ही दे सकती है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रथम चरण की उच्च मतदान दर और मोदी का यह अंतिम चुनावी संदेश मिलकर बिहार में नई दिशा निर्धारित कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे अगली बार जनता से सीधे शपथ ग्रहण समारोह में मुलाकात करेंगे।अब निगाहें 11 नवंबर को होने वाले अंतिम चरण के मतदान पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि मोदी की "नीति सरकार" का नारा बिहार के जनादेश में कितना असर दिखा पाता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
