July 17, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    मनोरंजन/ शौर्यपथ /‘भाबीजी घर पर हैं’ फेम शुभांगी अत्रे उर्फ ‘अंगूरी भाभी’ ने हाल ही में अपना टिकटॉक अकाउंट डिलीट कर दिया। दरअसल, उन्होंने ऐसा ‘लोकल कैंपेन’ को सपोर्ट करते हुए किया है। ऐप डिलीट करते हुए शुभांगी अत्रे ने कहा कि मैंने टिकटॉक इसलिए छोड़ा क्योंकि मैं लोकल बिजनेस को सपोर्ट करना चाहती हूं। मैं नहीं चाहती कि बाहर के ऐप्स हमारे देश की अर्थ व्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालें।

    शुभांगी आगे कहती हैं कि यह सच है कि यह एक पॉप्युलर मीडियम है और इसका इस्तेमाल आगे भविष्य में प्रमोशनल एक्टिविटी के लिए किया जा सकता है। लेकिन मैं अपने निर्णय पर अटल रहूंगी और इस ऐप का इस्तेमाल नहीं करूंगी। और भी कई मीडियम हैं जो लोकल हैं, मैं अब उन्हें इस्तेमाल करूंगी। उम्मीद करती हूं कि बाकी लोग भी इसे डिलीट कर लोकल प्लैटफॉर्म्स का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे।

    टिकटॉक पर न दिखने के कारण फैन्स उन्हें काफी मिस कर रहे हैं। इस बारे में बात करते हुए शुभांगी कहती हैं कि हां, मेरे बहुत सारे टिकटॉक फैन्स थे। अब मैं इतने सारे लोगों को एक साथ इस प्लैटफॉर्म को छोड़ने के लिए तो नहीं कह सकती। यह मेरा तरीका है देश के बाहर के प्रोडक्ट को न कहने का। खासकर उस दौर में जब उन्होंने हमारे देश, उसकी सेना और जवानों को इतनी मुश्किलें दीं।

    शुभांगी अत्रे ‘वोकल फॉर लोकल’ कैंपेन को सपोर्ट करते हुए कहती हैं कि मुझे हमेशा से ही इस कैंपेन में भरोसा था। मैं हैंडलूम खरीदना बहुत पसंद करती हूं। घर पर भी जूट के कारपेट, डेकोरेशन का सामान, कई चीजें मैंने लोकल आर्टिस्ट से खरीदी हुई हैं। मोदी जी ने हमें इसे सपोर्ट करने के लिए कहा है तो अब तो मैं और इन चीजों को खरीदने का प्रयास करूंगी। हालांकि, फॉरेन प्रोडक्ट्स ने हमारे जीवन को आसान बनाया है लेकिन हमें भारतीय उत्पादों पर ध्यान देने की जरूरत है। मैं घर पर देख रही थी कि मेरे पास कितने फॉरेन उत्पाद हैं। हम सभी को आगे आकर इस कैंपेन को सपोर्ट करना चाहिए और देश के हित के बारे में सोचना चाहिए।

     

    नजरिया / शौर्यपथ / दिल्ली में आप (आम आदमी पार्टी) सरकार की ताजा रायशुमारी सवालों के घेरे में है। उसने लोगों से यह पूछा है…
    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / अमेरिका में श्वेत-अश्वेत के बीच तनाव की वापसी दुखद और चिंताजनक है। अमेरिका अपनी रंगभेदी नीतियों को करीब आधी सदी…
    यह किसकी जिम्मेदारी मेलबॉक्स /शौर्यपथ /जिस देश में अनाज का भंडारण खपत से तीन गुना ज्यादा हो, वहां कोई मां भूख से क्यों मर रही…
    ओपिनियन / शौर्यपथ / पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं में तनातनी जारी है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति को मजबूत…

    मुंगेली / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण काल के इस कठिन समय में लोगो को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने मे राज्य शासन लगातार कार्य कर रही है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। मुंगेली जिले मे दिल्ली, आध्रप्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कई अन्य राज्यों से प्रतिदिन आने वाले श्रमिको के ईलाज की व्यवस्था की गई है।
    इन श्रमिको के ईलाज के लिए 1487 क्वारेंटाइन सेंटर स्थापित किये गये है। इन क्वारेंटाइन सेंटर मे जिले के लगभग 31 हजार श्रमिको को अस्थाई रूप् से ठहराया गया है। इन श्रमिको के ईलाज के साथ-साथ उन्हे भोजन, आवास, पेयजल, दवाई, आदि की सुविधा दी जा रही है। क्वारेंटाइन सेंटर मे संदिग्ध श्रमिक की जांच मे जिन श्रमिको मे कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है। उन्हे उपचार हेतु अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर भेजा जा रहा है।
    इसके अलावा जिला मुख्यालय मे त्वरित उपचार हेतु सौ बिस्तर की कोविड-19 अस्पताल और 48 बिस्तर की जिला स्तरीय क्वारेंटाइन सेंटर की स्थापना की गई है। इसी तरह क्वारेंटाइन सेंटर मे यदि किसी व्यक्ति को कोरोना के लक्षण (खंासी, सिर दर्द, सांस लेने मे तकलीफ) दिखाई देगी। तो उन्हे पृथक कर ईलाज हेतु जिले मे स्थापित सर्व सुविधा युक्त आईसोलेशन केंद्र मे रखा जाएगा। इन सर्व सुविधा आईसोलेशन केंद्र मे डॉक्टरो का दल तैनात रहेंगे और मरीजो का बेहतर ईलाज कर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेंगे।

    // सर्वाधिक परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में देश में दूसरे स्थान पर
    // इस साल अब तक 25.97 लाख ग्रामीणों को काम, 1114 करोड़ का मजदूरी भुगतान
    // मुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने लॉक-डाउन के दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और मैदानी अधिकारियों की पीठ थपथपाई

      रायपुर / शौर्यपथ / मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के विभिन्न मानकों पर लॉक-डाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी है। मुख्यमंत्री बघेल के निर्देश पर चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के शुरूआती दो महीनों में ही प्रदेश ने साल भर के लक्ष्य का 37 फीसदी काम पूरा कर लिया है। इस वर्ष अप्रैल और मई माह के लिए निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध प्रदेश में 175 प्रतिशत काम हुआ है। इन दोनों मामलों में छत्तीसगढ़ देश में सर्वोच्च स्थान पर है। दो माह के भीतर सर्वाधिक परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर है। यहां 1996 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार दिया जा चुका है।
    चालू वित्तीय वर्ष में अब तक पांच करोड़ तीन लाख 37 हजार मानव दिवस रोजगार का सृजन कर 25 लाख 97 हजार ग्रामीण श्रमिकों को काम उपलब्ध कराया गया है। इस दौरान 1114 करोड़ 27 लाख रूपए का मजदूरी भुगतान भी किया गया है। कोविड-19 का संक्रमण रोकने लागू देशव्यापी लॉक-डाउन के बावजूद प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाए रखने में मनरेगा के अंतर्गत व्यापक स्तर पर शुरू किए कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विपरीत परिस्थितियों में इसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को रोजी-रोटी की चिंता से मुक्त करने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
    मुख्यमंत्री बघेल और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने लॉक-डाउन के दौरान मनरेगा में उत्कृष्ट कार्यों के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और मैदानी अधिकारियों की पीठ थपथपाई है। उन्होंने प्रदेश भर में सक्रियता एवं तत्परता से किए गए कार्यों की सराहना करते हुए सरपंचों, मनरेगा की राज्य इकाई तथा जिला एवं जनपद पंचायतों की टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच यह बड़ी उपलब्धि है। उनकी कोशिशों से कोविड-19 से बचाव और लाखों लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही बड़ी संख्या में आजीविकामूलक सामुदायिक एवं निजी परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है।
    केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा मनरेगा के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम दो महीनों अप्रैल और मई के लिए दो करोड़ 88 लाख 14 हजार मानव दिवस रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया था। इसके विरूद्ध प्रदेश ने पांच करोड़ तीन लाख 37 हजार मानव दिवस रोजगार का सृजन कर 175 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। यह इस वर्ष के लिए निर्धारित कुल लेबर बजट साढ़े तेरह करोड़ मानव दिवस का 37 प्रतिशत है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1996 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। मनरेगा में प्रदेश में प्रति परिवार औसत 23 दिनों का रोजगार प्रदान किया गया है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 16 दिन है। इस मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में शीर्ष पर है।
    प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों को समयबद्ध मजदूरी भुगतान के लिए मस्टर रोल बंद होने के आठ दिनों के भीतर द्वितीय हस्ताक्षर कर 98 प्रतिशत फण्ड ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। बीते अप्रैल और मई महीने के दौरान कुल 1114 करोड़ 27 लाख रुपए का मजदूरी भुगतान श्रमिकों के खातों में किया गया है। कोविड-19 के चलते विपरीत परिस्थितियों में श्रमिकों के हाथों में राशि पहुँचने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर पड़ा है। इसने रोजगार की चिंता से मुक्त करने के साथ ही ग्रामीणों की क्रय-क्षमता भी बढ़ाई है। प्रदेश भर में काम कर रहे मजदूरों की संख्या मई महीने के आखिरी में 25 लाख 27 हजार पहुंच गई है। अप्रैल के आखिरी में यह संख्या 15 लाख 74 हजार तथा मार्च के आखिरी में 57 हजार 536 थी। अभी प्रदेश की 10 हजार 155 ग्राम पंचायतों में कुल 44 हजार 964 कार्य चल रहे हैं। इनसे मौजूदा लॉक-डाउन में ग्रामीण जन-जीवन में आया ठहराव दूर हो गया है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आज पुलगांव नाका स्थित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और…
    दुर्ग / शौर्यपथ / नीलामी में अधिक ऑफर मूल्य होने के बाद भी दुर्ग नगर पालिका निगम द्वारा परिवादियों को दुकान का आवंटन नहीं किया…

    कोरबा / शौर्यपथ / कोरबा जिले में अन्य प्रांतों से आये सभी प्रवासी श्रमिकों को कोरोना जांच की रिपोर्ट आ जाने पर ही क्वारेंटाइन सेंटरों से रिलीज किया जायेगा। जांच रिपोर्ट पाजिटिव आने पर संक्रमित श्रमिक को ईलाज के लिए विशेष कोविड अस्पताल भेजा जायेगा। 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर चुके श्रमिकों की जांच रिपोर्ट निगेटिव मिलने पर ही उन्हें घर जाने दिया जायेगा। ऐसे सभी श्रमिकों को घर में भी अगले 14 दिनों तक होम क्वारेंटाइन में रहने का शपथ पत्र भरना होगा। कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने इस संबंध में जरूरी निर्देश भी जारी किये हैं। श्रीमती कौशल ने कोविड प्रोटोकाल के अनुसार 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी करने के बाद क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गये लोगों को रिलीज करने के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की भी नियुक्ति की है। नगर निगम कोरबा क्षेत्र में स्थित क्वारेंटाइन सेंटरों से लोगों को रिलीज करने के लिए नगर निगम आयुक्त श्री एस. जयवर्धन प्राधिकृत अधिकारी होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में क्वारेंटाइन सेंटरों से 14 दिन की अवधि पूरी करने वाले जांच रिपोर्ट प्राप्त लोगों को रिलीज करने के लिए संबंधित अनुभाग के एसडीएम प्राधिकृत अधिकारी बनाये गये हैं। पाली तहसील के क्वारेंटाइन सेंटरों से लोगों को घर जाने के लिए छोडऩे का निर्णय तहसीलदार पाली करेंगे।
    कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने आज यहां बताया कि अन्य राज्यों से कोरबा लौटे लोगों को कोविड प्रोटोकाल के आधार पर 14 दिन क्वारेंटाइन में रखा गया है। इस अवधि में ऐसे सभी लोगों और श्रमिकों का आरटीपीसीआर पद्धति से कोरोना टेस्ट कराया जाता है। 14 दिवस क्वारेंटाइन अवधि पश्चात भी यदि किसी श्रमिक का आरटीपीसीआर का रिपोर्ट जांच उपरांत प्राप्त नहीं हुआ है तो रिपोर्ट प्राप्त होने तक ऐसे श्रमिकों को किसी भी स्थिति में घर नहीं जाने दिया जायेगा। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों को निगेटिव रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही अगले 14 दिवस के लिए होम क्वारेंटाइन का शपथ पत्र भरवाकर ही छोड़ा जायेगा। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे जिन लोगों का क्वारेंटाइन अवधि के भीतर आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं हो पाया है उनकी 14 दिन बाद रैपिड टेस्ट किट से जांच की जायेगी और रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त होने पर ही अगले 14 दिवस के लिए होम क्वारेंटाइन का शपथ पत्र भरवाकर छोड़ा जायेगा। 14 दिन के बाद क्वारेंटाइन अवधि पूरा करने के बाद छोड़े गये सभी श्रमिकों की निगरानी संबंधित क्षेत्र के सचिव, रोजगार सहायक, मितानीन-एक्टिव सर्विलेंस टीम के माध्यम से की जायेगी।

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