August 04, 2026
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    राजनांदगांव में मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल: क्या अब पीआरओ की लकीर से चलेगी पत्रकारिता?

    • rounak group

    राजनांदगांव / शौर्यपथ /

    भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया की जिम्मेदारी केवल सूचना देना नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल करना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नजर रखना और जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाना भी है। लेकिन जब प्रशासन स्वयं मीडिया को सवाल पूछने या स्वतंत्र रूप से कवरेज करने से रोकने लगे, तो स्वाभाविक रूप से कई गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं।

    ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से सामने आया है, जहां मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

    क्या है पूरा मामला

    डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी धाम में 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का विशाल मेला प्रारंभ होने वाला है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन द्वारा तैयारियों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।

    इस बैठक में संभाग आयुक्त, राजनांदगांव आईजी, कलेक्टर जितेंद्र यादव, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस बैठक की वीडियो कवरेज कर रही थी, ताकि नवरात्रि मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जा सके।

    लेकिन इसी दौरान राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडिया को यह कहते हुए कवरेज करने से रोक दिया कि “खबर आपको पीआरओ से मिल जाएगी।”

    इस बयान के बाद बैठक में मौजूद पत्रकारों में असंतोष फैल गया और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार (बायकॉट) कर दिया।

    खड़े हो रहे हैं कई बड़े सवाल

    इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों और मीडिया जगत में कई सवाल उठने लगे हैं —

    क्या अब मीडिया को सिर्फ पीआरओ द्वारा जारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाएगा?

    क्या प्रशासन नहीं चाहता कि मीडिया सीधे घटनास्थल से सच्चाई दिखाए और सवाल पूछे?

    या फिर कहीं प्रशासन को यह आशंका तो नहीं कि मीडिया के सवालों से व्यवस्थाओं की कमजोरियां उजागर हो सकती हैं?

    लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

    लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका केवल सरकारी प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करना नहीं होती।

    मीडिया का कार्य है

    घटनास्थल से वास्तविक स्थिति सामने लाना

    प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करना

    जनता की समस्याओं को उठाना

    और शासन की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखना

    अगर मीडिया को केवल पीआरओ द्वारा जारी जानकारी तक सीमित कर दिया जाए, तो स्वतंत्र पत्रकारिता का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।

    संविधान क्या कहता है

    भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसी अधिकार के अंतर्गत मीडिया को भी स्वतंत्र रूप से समाचार जुटाने और प्रसारित करने की आज़ादी प्राप्त होती है।

    हालांकि प्रशासनिक प्रोटोकॉल और सुरक्षा कारणों से कुछ परिस्थितियों में कवरेज सीमित किया जा सकता है, लेकिन सामान्य समीक्षा बैठक में मीडिया को रोकना कई बार पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर देता है।

    पत्रकारों में नाराजगी

    इस घटना के बाद स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों में नाराजगी देखी गई। कई पत्रकारों का कहना है कि —

    “अगर खबर केवल पीआरओ के माध्यम से ही दी जाएगी, तो फिर स्वतंत्र रिपोर्टिंग कैसे होगी?

    और अगर अधिकारी मीडिया के सवालों से बचने लगें, तो जनता तक सही जानकारी कैसे पहुंचेगी?”

    प्रशासन की संभावित दलील

    कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कई बार प्रशासन व्यवस्था, सुरक्षा या बैठक की गोपनीयता के कारण मीडिया की कवरेज सीमित करता है।

    लेकिन सवाल यह भी उठता है कि जब बैठक में मीडिया को आमंत्रित किया गया था, तो फिर कवरेज से रोकना कितना उचित है?

    लोकतंत्र की मजबूती पारदर्शिता से

    लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत पारदर्शिता और जवाबदेही है। जब प्रशासन खुलकर मीडिया के सवालों का जवाब देता है, तो जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।

    लेकिन यदि मीडिया को केवल सरकारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत नहीं माना जाता।

    अब बड़ा सवाल

    डोंगरगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि —

    क्या प्रशासन और मीडिया के बीच दूरी बढ़ रही है?

    क्या पत्रकारों को केवल पीआरओ की जानकारी तक सीमित किया जाएगा?

    या फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को उसका पूरा अधिकार मिलेगा?

    यह सवाल केवल राजनांदगांव जिले का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बन गया है।

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