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/शौर्यपथ /
हम सब प्रकृति की देन हैं। जरूरी है कि हमारा कनेक्शन उससे बना रहे। अगर आप प्रकृति से जुड़े रहेंगे तो आपके अंदर का बच्चा निखर कर बाहर आएगा। कोशिश करें कि आपके बच्चे शुरू से नेचर से जुड़े रहें। जब तक आपके बच्चे नेचर से नहीं जुड़ेंगे, उनके दिमाग के दरवाजे खुल ही नहीं सकते। हर पैरेंट्स को मैं यह कहना चाहूंगा कि वो बच्चों के साथ मैदान में, घर के आंगन में कोई खेल जरूर खेलें। खेल नहीं सकते तो कम से कम बच्चों को वॉक पर ले जाएं। इससे बेहतरीन तोहफा किसी बच्चे के लिए हो ही नहीं सकता।
मेरे पिताजी जब चेन्नई से हैदराबाद आए तो यह जगह एक बड़ा गांव थी। 1963 में यह कस्बा भी नहीं था। टैंगबंद तालाब के पास उन्होंने करीब आठ एकड़ जंगल नुमा जमीन खरीदी। प्रकृति से इतनी नजदीकी थी कि मुझे इससे प्यार हो गया, जो अभी भी मैं बढ़ता महसूस करता हूं। उस जमीन पर हमारे पास गायों का बाड़ा था, हम अपने चावल, सब्जियां खुद उगाते थे, हमारा पोल्ट्री फार्म था। हम जो भी खा रहे थे वो सब हमारा पैदा किया हुआ था। यहां मुझे पेड़ों से प्यार हुआ। मैं छुट्टियां मनाने वहीं जाता हूं जहां मुझे पेड़ खूब दिखते हैं। मेरी मां से भी मुझे यही सीखने को मिला। उनका रोज गार्डन देखने लायक है। जब भी कोई रोज कॉम्पिटिशन होती है तो उनकी तरफ से भी एंट्रीज वहां होती हैं।
मैं चाहता हूं कि आज हर घर में तीन बातों का बेहद ख्याल रखा जाना चाहिए। पहली बात... घर में प्लास्टिक का उपयोग कम से कम हो। जब भी बाजार जाएं, कपड़े की थैली लेकर जाएं। दूसरी जरूरी बात... पानी। पानी जरा जाया नहीं होना चाहिए। वॉटर वॉर्स आने वाले वक्त की सच्चाई है क्योंकि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं। पैसे वाले पानी खरीद लेंगे, गरीब कहां से लाएंगे इसलिए पानी बचाइए। तीसरी बात... पौधे लगाइए, उन्हें पेड़ बनाइए। जहां जगह मिले, पौधा रोप दीजिए।
बातें बहुत होती हैं, यह कुछ करने का वक्त है। छोटी-छोटी कोशिश से असर होता है। आप किस कपड़े से बनी ड्रेस पहनते हैं, क्या खाते हैं, नेचर को कैसे सहेजते हैं, हर छोटी बात का अर्थ है। कोरोना के बाद तो हर कोई सस्टेनेबल लिविंग पर जोर दे रहा है। पर्यावरण हमें ही बचाना है। यह एक भव्य प्रक्रिया है। बटरफ्लाय इफेक्ट को याद रखिए। हम कुछ भी करते हैं तो उसका असर भव्य होता है.. दूर तलक होता है। तो कभी भी कोई कोशिश करें उसे छोटा या जाया ना समझें। छोटी-छोटी कोशिशें ही रंग लाती हैं, यह अहसास आपको जरूर होगा.. आज नहीं तो कुछ साल बाद होगा। पर होगा जरूर।
(2020 में शिल्पा रेड्डी से बातचीत में नागार्जुन अक्किनेनी)
मायने रखता है नागार्जुन का जंगल अपनाना
- क्योंकि जब वे अपना घर बनवा रहे थे तो पीछे खाली पड़ी बंजर जमीन पर 2500 पौधे लगवाए। आज वहां 10000 पेड़ों का जंगल है।अप्रवासी पक्षी भी वहां आते हैं।
- क्योंकि गलत तरीके से 25 फीट के पाम ट्री को निकालते देख उन्होंने काम रुकवाया। एक्सपर्ट भेजकर हटवाया। आज वह 65 फीट का है और उनके बंगले में है।
शिक्षा सस्कृति /शौर्यपथ /
आदि शंकराचार्य महान दार्शनिक एवं धर्म प्रवर्तक थे। भारतवर्ष में चार कोनों में चार मठों की स्थापना की थी।
1. सत्य की परिभाषा बस इतनी ही है कि यह सदा था, सदा है और जो सदा रहेगा, बाकी सब मिथ्या है।
2. यह परम सत्य है कि लोग आपको उसी समय तक याद करते हैं जब तक आपकी सांसें चलती हैं। इन सांसों के रुकते ही क़रीबी रिश्तेदार, दोस्त सब दूर चले जाते हैं।
3. वास्तविक रूप से मंदिर वही पहुंचता है जो धन्यवाद देने जाता है, मांगने नहीं।
4. तीर्थ के लिए किसी स्थान पर जाने की जरूरत नहीं। सबसे अच्छा और बड़ा तीर्थ आपका अपना मन है, जिसे विशेष रूप से शुद्ध किया गया हो।
5. जब मन में सत्य को जानने की तीव्र जिज्ञासा पैदा होती है, तब दुनिया की बाहरी चीज़े अर्थहीन लगने लगती हैं।
6. आंखों को दुनिया की चीज़ों की ओर आकर्षित न होने देना और बाहरी ताकतों को दूर रखना ही आत्मसंयम है।
7. वास्तविक आनंद उन्हीं को मिलता है जो आनंद कि तलाश नहीं करते हैं।
रायपुर /शौर्यपथ /
प्रदेश में मोतियाबिंद की वजह से किसी भी व्यक्ति की आंखों की दृष्टि न छिन जाए, इसके लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरूआत की गयी है। “मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त राज्य” नाम से शुरू इस महती योजना में राज्य में अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2025 तक कुल चार लाख मोतियाबिंद ऑपरेशन कर दृष्टिहीनता के मामलों में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा दृष्टिदोष रोगियों की सूची तैयार की जा रही है। नेत्र सहायक अधिकारियों के माध्यम से चयनित विकासखंडों में भेजकर तैयार सूची से रोगियों की पुष्टि कर मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिन्हांकन किया जा रहा है।
प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में 1 अप्रैल 2021 से 31 जनवरी 2022 तक 59 हजार 793 मोतियाबिंद पीड़ितों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। राज्य के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों तथा दुर्ग जिले के सुपेला सिविल अस्पताल, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के भाटापारा सिविल अस्पताल व जशपुर जिले के पत्थलगांव सिविल अस्पताल एवं कोरिया जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों मनेंद्रगढ़, सोनहत और पटना में निःशुल्क मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इन सभी अस्पतालों में उत्तम गुणवत्ता के लेंस के साथ शासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए मोतियाबिंद के मरीजों का सुरक्षित ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीजों की नियमित फालो-अप की जाती है। साथ ही उन्हें निःशुल्क दवा और चश्मा भी प्रदान किया जाता है। आयुष्मान योजना के अंतर्गत इन सभी शासकीय अस्पतालों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया जा सकता है।
माना सिविल अस्पताल में आंखों की उच्च स्तरीय जांच की सुविधा, इस सप्ताह 70 ऑपरेशन किए गए
रायपुर के माना स्थित सिविल अस्पताल में हाल ही में आंखों की जांच, इलाज और ऑपरेशन की सुविधा प्रारम्भ की गयी है। यहां मरीजों के लिए 100 बिस्तरों की व्यवस्था की गयी है। वर्तमान में जिला अस्पताल पण्डरी के उपलब्ध संसाधनों को माना अस्पताल में स्थानांतरित कर ये सेवायें शुरू की गयी है। माना सिविल अस्पताल में इस सप्ताह 70 मरीजों के आंखों का सफल ऑपरेशन भी किया गया है। यहां शासकीय कार्य दिवसों में प्रातः 8 बजे से शाम 4 बजे तक नेत्र परीक्षण की सुविधा है। अंधत्व निवारण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि छत्तीसगढ़ को मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त राज्य बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आंखों के उपचार के लिए निकट भविष्य में माना अस्पताल में और भी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
नई दिल्ली /शौर्यपथ/
अमिताभ बच्चन 80 की उम्र में भी अपनी कमाल की फिटनेस के लिए पहचाने जाते हैं. इस समय वह बॉलीवुड के सबसे व्यस्त एक्टर्स में से हैं और उनकी फिल्मों का लंबा लाइनअप है. हाल ही में उनकी फिल्म झुंड का ट्रेलर रिलीज हुआ है जिसमें वह फुटबॉल कोच की भूमिका निभा रहे हैं. इस बीच अमिताभ बच्चन ने एक फोटो अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर शेयर की है, इस फोटो में बिग बी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. उन्होंने एक किक से कांच की दीवार तोड़ दी है.
अमिताभ बच्चन ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा है, '53 साल और 80 की उम्र के बाद भी जो चीन नहीं बदली है, वो है एक्शन.' इस तरह उन्होंने अपना एक्शन अंदाज दिखाया है. वैसे भी उन्हें बॉलीवुड का एंग्री यंगमैन कहा जाता रहा है. अमिताभ बच्चन की इस पोस्ट पर फैन्स लगातार कमेंट कर रहे हैं. एक फैन ने लिखा है, 'बिल्कुल अमिताभ जी, इसलिए तो लाइन वहीं से शुरू होती है जहां आप खड़े हो जाएं और फिर रिश्ते में आप सबके बाप हैं. नाम है शहंशाह, ईश्वर सदा आपका साथ दे.' एक फैन ने लिखा है कि इसका कैप्शन होना चाहिए बुढ्डा होगा तेरा बाप.
अमिताभ बच्चन इस फिल्म के अलावा बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है. वे 'ब्रह्मास्त्र' और 'झुंड' के अलावा बिग बी 'रन-वे 34' 'गुडबाय' आंखे 2' और 'द इंटर्न' में भी अहम भूमिका में नजर आएंगे. आखिरी बार बिग बी को रिया चक्रवर्ती की फिल्म चेहरे में देखा गया था.
मनोरंजन /शौर्यपथ/
अपने शानदार अभिनय और ग्लैमरस स्टाइल के लिए पहचानी जाने वाली एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना को नेशनल क्रश का टैग हासिल है. फिल्म पुष्पाः द राइज की जबरदस्त सफलता के बाद उनकी फैन फॉलोइंग कई गुना बढ़ गई है. सोशल मीडिया पर फैंस उनकी लेटेस्ट तस्वीरों का इंतजार करते हैं. इस खूबसूरत एक्ट्रेस की एक ताजा तस्वीर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा रखा है. थाई हाई स्लिट, ब्लैक स्ट्रैपलेस गाउन में एक्ट्रेस का लेटेस्ट लुक सच में ग्लैमर की नई परिभाषा लिख रहा है.
इस ब्लैक स्ट्रैपलेस गाउन में रश्मिका की तस्वीर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है. इस लुक में बालों को सिल्की स्ट्रेट रखते हुए और हाई हील्स पहन एक्ट्रेस सभी के दिलों पर छा गई हैं.
इंडियन आउटफिट्स में रश्मिका मंदाना और भी खूबसूरत दिखती हैं. हाल ही में ब्लू कलर के लहंगे के साथ उन्होंने डीप नैक ब्लाउज पहन इंटरनेट का पारा हाई कर दिया था. मनीष मल्होत्रा के डिजाइन किए इस लहंगे के साथ एक्ट्रेस ने गोल्डन झुमके पहने और इस लुक को कंप्लीट किया.
साड़ी हमारे एथनिक वियर क्लोसेट की बैकबोन है और रश्मिका भी इससे अनजान नहीं हैं. ऑफ वाइट कलर की इस साड़ी में एक्ट्रेस का लुक सिंपल लेकिन एलिगेंट नजर आ रहा है. लाइट जूलरी और मिनिमल मेकअप के साथ उन्होंने इस लुक को पूरा किया.
इस झिलमिलाते ग्रीन लहंगे में एक बार फिर रश्मिका मंदाना ने ये साबित कर दिया कि ट्रेडिशनल अटायर में भी ग्लैमरस लुक पाया जा सकता है. मैचिंग इयररिंग्स और सॉफ्ट कर्ल्स के साथ उनका ये लुक बेहद सिजलिंग लग रहा है.
रायपुर /शौर्यपथ/
समाज कल्याण मंत्री ने नोडल अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सह कार्यशाला का किया शुभारंभ
समाज कल्याण मंत्री अनिला भेंड़िया ने आज रायपुर के माना कैम्प में भारत माता वाहिनी योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान के लिए आयोजित नोडल अधिकारियों की प्रशिक्षण सह-कार्यशाला का शुभारंभ किया।
समाज कल्याण मंत्री भेंड़िया ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यसन शरीर के साथ परिवार और अगली पीढ़ी को भी नुकसान पहुंचाता है। लोगों को नशे से दूर रखने के लिए उनकी पारिवारिक स्थिति और मनः स्थिति को सुधारने के लिए काम करना होगा। राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों को नशे से दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी जिलों में तैयार की जा रही भारत वाहिनी और नोडल अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से काम करना होगा। जिससे निश्चित ही आने वाले दिनों में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
उल्लेखनीय है कि नशापान करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान (भारत माता वाहिनी योजना) के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत और आश्रित गांव में 8 सदस्यीय समूह भारत माता वाहिनी के रूप में तैयार किया जा रहा है। प्रथम चरण में हर जनपद पंचायत की 10 पंचायतों में 10 वाहिनी के मान से 1400 से अधिक भारत माता वाहिनी तैयार की जा रही है। इनके माध्यम से गांव-गांव में नशे की सामाजिक बुराई के विरूद्ध सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास किया जाएगा। हर जिले में नशा पीड़ितों के लिए 15 बिस्तरों का नशामुक्ति केन्द्र संचालित करने की योजना है।
भेंड़िया ने कहा कि नशापान व्यक्तिगत नहीं सामाजिक समस्या है। ज्यादा नशा करने से कई प्रकार की बीमारियां होती है। नशे में मानसिक नियंत्रण न होने से आपराधिक प्रवृत्तियां भी बढ़ती है। इस समस्या से राज्य और देश को बचाने के लिए सभी को सामूहिक रूप से प्रयत्न करना है, इसकी शुरूआत गांवों और पंचायतों से करना होगा।
समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञों ने अभियान की सफलता के लिए विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों को मार्गदर्शन देने के साथ योजना के संबंध में विस्तार से बताया। विभागीय उप सचिव राजेश तिवारी ने बताया कि नशा मुक्त समाज बनाने के लिए इसके कारणों की जड़ को समस्या का समाधान करना होगा। इसके लिए डाटा कलेक्शन, एनालिसिस और उसके आधार पर एक्शन प्लान तैयार करना होगा। पंचायती राज संस्थाओं और भारत माता वाहिनी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, अवैध शराब रोकना और सामाजिक गतिशीलता को बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई नशे के विरूद्ध है, न कि नशापान करने वाले के विरूद्ध। प्रशिक्षण में भारत माता वाहिनी योजना हेतु विभिन्न विभागों और जिलों के नियुक्त नोडल अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव व एससीईआरटी के डायरेक्टर राजेश सिंह राणा ने कहा कि शिक्षक यदि संवेदनशीलता के साथ कार्य करेंगे तभी मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा कार्यक्रम सफल होगा। किसी भी कार्यक्रम की सफलता उस संस्था के प्रमुख की भूमिका पर निर्भर होती है। विद्यालय का रखरखाव प्रबंधन के तौर तरीके वहां के प्रमुख की भूमिका पर निर्भर होते है। राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा कार्यक्रम हमारी संवेदनशीलता से ही सफल हो सकता है मुझे विश्वास है कि यहां से जाने के बाद सभी सहायक बीईओ और शिक्षक इसे परिणाममूलक बनाएंगे। स्कूलों में आपदा प्रबंधन के तहत संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बिना समय गवाएं तत्काल प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और बचाव के उपाय की जानकारी होना जरूरी है।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के अतिरिक्त संचालक डॉ. योगेश शिवहरे ने बीएड कॉलेज रायपुर में शाला सुरक्षा एवं व्यक्तिगत सुरक्षा विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर कहा कि यह प्रशिक्षण तभी सफल हो जब हम अपने संभावित ऐसी दुर्घटनाएं जिन पर हमारा ध्यान नहीं जाता उन्हें रोकने में कम से कम एक प्रयास घर और स्कूल पहुंचने के तत्काल बाद करेंगे। प्रशिक्षण में आपदा प्रबंधन एवं व्यक्तिगत सुरक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं को मॉकड्रील के माध्यम से बताया गया। प्रशिक्षण में राज्य के सभी जिलो से 163 प्रतिभागी शामिल हुए।
प्रशिक्षण में संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बिना समय गवाएं तत्काल प्राथमिक उपचार किए जाने के तरीके बताए गए। गैस सिलेण्डर फटने, आग लगने पर, बाल शोषण, शारीरिक शोषण इत्यादि के संबंध में जानकारी दी। सतत विकास लक्ष्य के बिन्दुओं के बारे में भी बताया गया प्रतिभागियों को योग प्रशिक्षण भी दिया गया। यूनिसेफ की ओर से सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण मॉडयूल पेनड्राइव में उपलब्ध कराया गया।
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के असिस्टेंट डायरेक्टर प्रशांत कुमार पांडे ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन एससीआरटी के डॉ. विद्यावती चंद्राकर ने और आभार प्रदर्शन सहायक प्राध्यापक ए.के. सारस्वत ने किया। इस अवसर पर प्रशिक्षण प्रभारी सुनील मिश्रा, यूनिसेफ और अर्पण संस्था के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। एससीईआरटी तथा समग्र शिक्षा द्वारा आयोजित इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण में यूनिसेफ और अर्पण संस्था ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
उल्लेखनीय है राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के दौरान स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार के संयुक्त सचिव मनीष गर्ग, संचालक लोक शिक्षण सुनील जैन, यूनिसेफ के राज्य प्रमुख जाब जकारिया ने भी प्रतिभागियों से चर्चा की। प्रशिक्षण में अर्पण फाउंडेशन की सोनाली माहेश्वरी, वंदना चौहान, आसिफ झा, विशाल वासवानी, डॉ श्रवण कुमार सिंह, डॉ श्याम कुमार ने प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों में सतीश उपाध्याय, असगर खान, वीमित्रा दृतलहरें ने अपने विचार साझा किए।
रायपुर /शौर्यपथ/
गौठानों का किया मुआयना
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जिलों का दौरा कर हितग्राहियों से रू-ब-रू हो रहे हैं। इसी सिलसिले में आज अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू एवं कृषि सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने दुर्ग जिले में धमधा एवं पाटन क्षेत्र के गौठानों में पहुंचकर वहां की व्यवस्था और महिला समूहों द्वारा संचालित आयमूलक गतिविधियों का मुआयना किया। उन्होंने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से चर्चा कर उनके स्वावलंबन के कामों की जानकारी ली। उन्होंने पाटन विकासखंड के अरसनारा, नारधा, कुम्हारी गौठानों में विविध आजीविका मूलक गतिविधियों को मुआयना किया और इसको विस्तारित करने के साथ ही लाभप्रद बनाने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
अपर मुख्य सचिव साहू एवं कृषि सचिव डॉ. भारतीदासन से बातचीत के दौरान अरसनारा गौठान के स्व-सहायता समूह महिलाओं ने बताया कि यहां दो समूह काम करते हैं। सब्जी उत्पादन बाड़ी के जरिए दो लाख 45 हजार रुपए का लाभ अर्जित कर चुके हैं। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने ब्रोकली जैसे नये दौर की फसल भी लगाई है। अपर मुख्य सचिव ने अरसनारा गौठान की सम्पूर्ण भूमि के उपयोग की सराहना की। महिला समूहों द्वारा यहां सीजन के मुताबिक सब्जी उगाई जा रही है। इससे समूह को लगातार आय हो रही है। उन्होंने लिमतरा में बाड़ी भी देखी। यहां 21 एकड़ जमीन को सामुदायिक बाड़ी के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों ने दो एकड़ जमीन में टमाटर की फसल का निरीक्षण किया। महिलाओं ने बताया कि हर दिन टमाटर बेच रहे हैं। टमाटर का बंपर उत्पादन हुआ है। समूह की महिलाओं ने बताया कि केवल टमाटर से उन्हें एक लाख रुपए का लाभ जुलाई से अब तक हो चुका है। अधिकारियों ने बताया कि यहां 5 एकड़ स्प्रिंकलर को और विस्तार दिया जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव ने समूह की महिलाओं से कहा कि शासन आपको अधोसंरचनाएं और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। आपके पास आगे बढ़ने की असीमित संभावना है। समूह की महिलाओं ने कहा कि पहली बार में थोड़ा से हिस्से में प्रयोग के तौर पर खेती की थी। हमें इसमें सफलता मिली और अब इसका विस्तार करेंगे। निरीक्षण के मौके पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसएसपी बद्रीनारायण मीणा और जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन भी मौजूद थे।
सी-मार्ट में करें डिस्प्ले- अरसनारा में भगवती स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि गौठान में मसाले बनाये जा रहे हैं। अपर मुख्य सचिव ने मसालों का दाम पूछा। महिलाओं ने बताया कि दुकान में इसे आसानी से 250 रुपए में खरीद लेते हैं। उन्होंने महिलाओं को बाजार रेट पता करने की सलाह दी और कहा कि बाजार पर जितनी ज्यादा आपकी नजर रहेगी, आप उतना ही तरक्की करेंगे। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पाद का शहरी मार्केट में काफी डिमांड है। उन्होंने महिला समूहों के जैविक उत्पाद को सी-मार्ट में डिस्प्ले करने की बात कही।
कुम्हारी में देखी केले की बाड़ी- अपर मुख्य सचिव एवं कृषि सचिव ने अपने भ्रमण के दौरान कुम्हारी गौठान में विकसित केले की बाड़ी का अवलोकन किया। कुम्हारी गौठान में बहुत सी आजीविकामूलक गतिविधि चलाई जा रही हैं। इनमें केले और आम की बाड़ी विकसित की गई है। यहां की वृहद केला बाड़ी से चिप्स बनाकर बाजार में बेचे जाएंगे।
जलजीवन मिशन का काम भी देखा- अपर मुख्य सचिव साहू ने ग्राम तर्रा, खेरधी में जलजीवन मिशन का काम भी देखा। उन्होंने कहा कि तय समयसीमा में तथा गुणवत्तापूर्ण ढंग से जिले के सभी कामों को पूरा करें। पाइपलाइन लगाये जाने के साथ ही कनेक्शन भी प्रदान करें ताकि लोगों को नल के माध्यम से शुद्ध जल उपलब्ध हो सके। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अलग-अलग गौठानों में अलग तरह की आजीविकामूलक गतिविधियों संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल स्वावलंबन ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, स्व-सहायता समूहों की आय में तेजी से वृद्धि हो, ऐसा माडल बनायें जिससे लगातार लोग रुचि के साथ काम करेंगे और नये लोग भी जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि एक समूह को एक ही काम में लगाया जाए तो ज्यादा बेहतर नतीजे मिलेंगे। वर्मी कंपोस्ट का तेजी से उत्पादन और मार्केटिंग जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह दोनों काम तेजी से होंगे तो गोधन न्याय योजना से जुड़े लोगों को अधिक से अधिक लाभ होगा।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आज गरियाबंद जिले के राजिम में त्रिवेणी संगम तट पर लगने वाले प्रसिद्ध माघी-पुन्नी मेला के संत समागम समारोह का साधु-संतों की उपस्थिति में शुभारंभ किया स्थापत्य एवं मूर्ति कला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं। पवित्र त्रिवेणी संगम तट पर आयोजित महानदी आरती में शामिल हुई राज्यपाल उइके
राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आज गरियाबंद जिले के राजिम में त्रिवेणी संगम तट पर लगने वाले प्रसिद्ध माघी-पुन्नी मेला के संत समागम समारोह का साधु-संतों की उपस्थिति में शुभारंभ किया। राज्यपाल उइके ने भगवान राजीवलोचन की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पवित्र नगरी राजिम में आकर अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। राजिम पुन्नी मेले में आए साधु-संतों, श्रद्धालुजनों का मैं हार्दिक अभिनंदन करती हूं। यहॉं न सिर्फ सोंढूर, पैरी एवं महानदी का संगम है बल्कि धर्म अध्यात्म एवं आस्था का भी संगम है। साधु संतो का समागम छत्तीसगढ़ के साथ ही देशभर का आयोजन बन गया है। किसी भी मेले का सामुदायिक और सामाजिक महत्व होता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत हमेशा से ही साधु-संतों की भूमि रही है। संतों का जीवन सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहता है। संतों के दिखाए मार्ग पर चलने से ज्ञान की प्राप्ति के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं। उन्होंने राजिम के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां के मंदिरों में भारतीय स्थापत्य एवं मूर्ति कला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं।
राज्यपाल उइके ने कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेले का विशेष सांस्कृतिक महत्व है, जहां लोक संस्कृति व आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। ऐसे आयोजनों से निश्चित ही जनमानस को उनकी पुरातन धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी मिलती है। हमें स्थानीय कला, संस्कृति और धार्मिक आयोजनों के लिए अपने प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र में उभर कर सामने आ सके। राज्यपाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना वायरस बचने के लिए अभी भी सावधानी बरतें और मास्क का उपयोग करें। जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाया है, वे वैक्सीन जरूर लगाएं। संबोधन के अंत में राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि ऐसे पवित्र नदियों को स्वच्छ और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में अपनी सहभागिता निभानी होगी। इस अवसर पर राज्यपाल सुश्री उइके ने साधु-संतों को स्मृति चिन्ह भेंट की।
धर्मस्व एवं गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि हम मेला को लगातार अच्छा बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हमने श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा है। मंत्री ने राजिम मेला के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पवित्र त्रिवेणी संगम तट पर आयोजित महानदी आरती में शामिल हुई राज्यपाल उइके
राज्यपाल उइके ने भगवान राजीवलोचन की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की
राज्यपाल उइके राजिम में महानदी, पैरी व सोंढूर के संगम तट पर आयोजित प्रख्यात महानदी आरती में शामिल हुईं। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक लगने वाले राजिम माघी-पुन्नी मेले में महानदी आरती का आयोजन किया जाता है।
राज्यपाल ने विभागीय स्टाल एवं सरस मेला का किया अवलोकन
राज्यपाल उइके ने आज राजिम माघी-पुन्नी मेले के सरस मेला में लगाए विभिन्न स्टॉलों तथा महिला समूह द्वारा उत्पादित सामग्री का अवलोकन किया। राज्यपाल उइके ने स्टॉलों में पहुंचकर समूह की महिलाओं से बड़ी आत्मीयता के साथ चर्चा की तथा उनके परिश्रम को सराहा। उन्होंने महिलाओं से उनके द्वारा तैयार सामग्रियों की जानकारी लेते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों और कलाकृतियों का संरक्षण-संवर्धन करने में उनका योगदान अतुलनीय है। इस अवसर पर राज्यपाल उइके ने सरस मेला स्टॉल के सँगवारी सेल्फी जोन में फोटो ली।
समारोह में राजिम विधायक अमितेश शुक्ल, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राम सुंदर दास, महंत गोवर्धन शरण जी महाराज, उमेश आनंद जी महाराज, देवदास जी महाराज संत विचार साहेब, सिद्धेश्वरानंद जी महाराज मंच पर विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुंगेली /शौर्यपथ/
जिले के विकासखण्ड लोरमी के ग्राम झझपुरीकला के गौठान में कार्यरत् गायत्री महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं के लिए कड़कनाथ मुर्गी का पालन आय का जरिया बना है। समूह की महिलाएं कड़कनाथ मुर्गी से प्राप्त अण्डे का विक्रय कर लगभग 900 रूपये प्रतिदिन आमदनी प्राप्त कर रही हैं। गायत्री महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि समूह में लगभग 10 महिलाएं कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ग्राम झझपुरीकला में गौठान स्वीकृति उपरांत सामुदायिक मुर्गी शेड का निर्माण किया गया एवं मुर्गी पालन हेतु ग्राम गौठान समिति द्वारा उनकी समूह का चयन किया गया तथा मुर्गी पालन का कार्य दिया गया। इसके साथ ही जिला प्रशासन द्वारा मनरेगा से शेड एवं डीएमएफ मद से कुक्कुट आहार तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं प्रदाय की गई। पशु धन विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षण उपरांत बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना अंतर्गत 450 कड़कनाथ के चूजे व चूजे के लिए पॉच माह का आहार प्रदाय किया गया। समूह की महिलाओं ने बताया कि लगभग 05 माह होने के उपरांत अतिरिक्त नर मुर्गों का विक्रय किया गया। समूह के पास वर्तमान में 150 मुर्गियां एवं 20 मुर्गे उपलब्ध हैं। सभी 150 मुर्गियां अंडे प्रदाय योग्य हो गई हैं और प्रतिदिन समूह को 55 से 60 अंडे प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कड़कनाथ के अंडों की अत्यधिक मांग होने से 15 रूपए प्रति नग की दर से अंडों का विक्रय समूह के सदस्यों द्वारा किया जा रहा है, जिससे वर्तमान में समूह को लगभग 900 रूपए प्रतिदिन की आमदनी प्राप्त हो रही है। समूह की महिलाओं ने बताया कि वर्तमान में स्वयं के व्यय से 200 अतिरिक्त चूजे खरीदकर व्यवसाय बढ़ाने का कार्य भी प्रारंभ किया गया है। कड़कनाथ मुर्गी के अण्डा के विक्रय से लगभग 900 रूपये प्रतिदिन आमदनी होने से समूह की महिलाएं काफी खुश है। समूह की महिलाओं ने जिला प्रशासन क प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
