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रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके को आज यहां राजभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने आयोग का बीसवां वार्षिक प्रतिवेदन (वर्ष 2020-21) प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने लोक सेवा आयोग की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी ली। इस अवसर पर आयोग के सदस्य सुकृत लाल साव, डॉ. मोतीलाल बाचकर, डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा, डॉ. सरिता उइके, सचिव जीवन किशोर ध्रुव एवं परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल संजय जायसवाल के साथ प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य सचिव अमिताभ जैन के साथ मंत्रालय महानदी भवन में बैठक कर हाईकोर्ट एवं जिला न्यायालयों की विभिन्न कार्यालयीन व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की। इस अवसर पर प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी रामकुमार तिवारी, सचिव वित्त अलरमेल मंगई डी. एवं सचिव लोक निर्माण सिद्धार्थ कोमल परदेशी मौजूद थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
दिव्यांग युवाओं ने कायम की आत्मनिर्भरता की मिसाल
शारीरिक अक्षमताओं की कमजोर बेड़ियां तोड़कर जशपुरनगर के दिव्यांग युवाओं की टीम अपने हौसलों से सफलता की नई कहानियां लिख रही हैं। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान रखने वाला जशपुरनगर इस सफलता का साक्षी है। यहां के दिव्यांग युवाओं ने अपनी शारीरिक कमियों पर जीत पाई है और दूसरों का जीवन भी आत्मनिर्भर करने में लगे हैं। जशपुर नगर में स्थित निर्माण केंद्र में इन दिनों दिव्यांग युवाओं की टीम एल.ई.डी. बल्ब, इमरजेंसी लाइट, साउंड बॉक्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। इसके साथ ही ये युवा भविष्य में नए उत्पाद बनाकर उन्हें बाजार में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाकर अब तक इन युवाओं ने लगभग एक लाख 40 हजार रुपए की बिक्री की है।
दिव्यांग युवाओं ने कायम की आत्मनिर्भरता की मिसाल
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद के नवाचार का विस्तार करने के लिए इनके द्वारा गौठान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को भी एल.ई.डी.बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि ये महिलाएं स्वयं प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य समूह की महिलाओं को भी एल.ई.डी.बल्ब बनाने का प्रशिक्षण प्रदान कर सकें। दिव्यांग युवाओं को कौशल नवाचार में पूर्ण प्रशिक्षित कर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की राज्य सरकार की पहल यह साकार रूप लेती दिखाई पड़ती है, जहां दिव्यांग युवाओं के जीवन को नई दिशा मिल रही है।
नवाचार समृद्ध छत्तीसगढ़ गढ़ने की दिशा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जिला प्रशासन के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के दिव्यांग युवाओं को चिन्हित कर उन्हें मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत एल.ई.डी.बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त कर अब हुनरमंद युवा स्वयं भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और दूसरों को भी आर्थिक स्वालंबन की दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रहे हैं।
जशपुर नगर के निर्माण केंद्र में दिव्यांग युवाओं द्वारा निर्मित एल.ई.डी. बल्ब, इमरजेंसी लाइट, साउंड बॉक्स, टी.बल्ब जैसे अन्य उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और बाजारों में आसानी से उपलब्ध करवाने की कोशिश जिला प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही है।
रायपुर /शौर्यपथ/
12वां वायरोलॉजी लैब
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज दुर्ग में कोरोना सैंपलों की आरटीपीसीआर जांच के लिए वायरोलॉजी लैब का ऑनलाइन शुभारंभ किया। इस नए लैब को मिलाकर अब प्रदेश के 12 शासकीय लैबों में आरटीपीसीआर जांच की सुविधा हो गई है। इससे रोजाना आरटीपीसीआर जांच की संख्या बढ़ने के साथ ही लोगों को रिपोर्ट भी जल्दी मिलने लगेगी। दुर्ग वायरोलॉजी लैब के वर्चुअल लोकार्पण कार्यक्रम में दुर्ग शहर के विधायक अरूण वोरा, स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. मनिन्दर कौर द्विवेदी, स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक नीरज बंसोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, दुर्ग के कलेक्टर सर्वेश्वर भूरे, वायरोलॉजी लैब के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश जैन, एम्स रायपुर तथा रायपुर मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञ भी ऑनलाइन शामिल हुए।
स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने दुर्ग में नवनिर्मित वायरोलॉजी लैब का उद्घाटन करते हुए कहा कि कोरोना के वास्तविक मामलों की पुष्टि करने में आरटीपीसीआर जांच काफी अहम है। यह सबसे सटीक और भरोसेमंद जांच है। प्रदेश के सभी पुराने व नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के बाद अब दुर्ग में भी आरटीपीसीआर जांच की सुविधा शुरू होने से ज्यादा सैंपलों की जांच इस पद्धति से की जा सकेगी। इस नई सुविधा से कोरोना संक्रमितों की पहचान और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराने में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि बलौदाबाजार, जशपुर, दंतेवाड़ा और जांजगीर में भी वायरोलॉजी लैब की स्थापना का काम प्रगति पर है। इन जिलों में भी जल्दी आरटीपीसीआर जांच की सुविधा शुरू होगी। विधायक अरूण वोरा ने दुर्ग में वायरोलॉजी लैब की स्थापना के लिए स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव के प्रति आभार व्यक्त किया।
रायपुर /शौर्यपथ/
जशपुर जिले के इन महिलाओं को अब आत्मनिर्भर की राह में आगे बढ़ने का द्वार मिल गया है। पाठ इलाका होने और मौसम के अनुरूप आलू की खेती करने की सलाह मिलने के पश्चात महिलाओं द्वारा इस खेती का अपनाने का ही परिणाम है कि जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं के खाली हाथों को रोजगार के साथ आमदनी भी होने लगी है। आलू की खेती से एक सीजन में हुई 1 लाख 40 हजार रुपए की आमदनी से महिलाओं को भी लगने लगा है कि आने वाले दिनों में आलू की खेती उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
बगीचा विकासखंड के सुलेसा गौठान की जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि प्रशासन के माध्यम से उन्हें आलू की खेती के लिए वैज्ञानिक सलाह के साथ वित्तीय एवं अन्य सहायता मिली। इसके बाद समूह की महिलाओं ने आलू की खेती करने का फैसला लिया। गौठान की चार एकड़ बाड़ी में लगभग 10 क्विंटल बरसाती आलू की खेती की गई। महिलाओं ने बताया कि मण्डी में थोक विक्रेताओं के पास आलू का विक्रय करने से उन्हें तुरंत पैसा भी मिल जाता है। समूह को इस खेती से सीजन अनुसार 1 लाख 40 हजार रुपए का लाभ प्राप्त हुआ। समूह की महिलाओं ने यह भी बताया कि बिहान योजना से 15 हजार रुपए और सूक्ष्म ऋण योजना से 60 हजार रुपए प्राप्त कर एक से अधिक गतिविधियांओं को बढ़ाने में मदद मिली।
अजीविका गतिविधियों के रूप में एक से अधिक व्यवसाय के चयन से ही आज हमारा समूह आर्थिक रूप से मजबूत होने लगा है और 20 से 30 हजार रुपए का आर्थिक लाभ प्रतिमाह अर्जित कर रहा है। समूह द्वारा रेडी टू ईट निर्माण और उससे हुई आमदनी की बचत राशि को अन्य गतिविधियां संचालित करने में लगाया गया। सदस्यों के बीच आपसी लेन-देन व समय पर ऋण वापसी होने के कारण भी बचत राशि में इजाफा हुआ। अलग-अलग व्यवसाय का अपना कर आत्मनिर्भर की राह में आगे बढ़ रही जशपुर अंचल की महिलाओं को उम्मीद है कि आलू की खेती से उन्हें आने वाले समय में बड़ी आमदनी हासिल होगी।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में एल.डब्ल्यू.ई. प्रभावित बस्तर संभाग से विस्थापित अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के पुनर्वास के संबंध में तथा अन्य विषयों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा, अपर मुख्य सचिव गृह सुब्रत साहू, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद, प्रमुख सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ, सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग डी.डी.सिंह, सचिव वित्त अलरमेल मंगई डी., सचिव तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार रीता शांडिल्य सहित पुलिस विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश में 5 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए बालवाड़ी खोले जाने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव व राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के संचालक राजेश सिंह राणा ने आज बालवाड़ी के संबंध में 5 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में उपस्थित मास्टर ट्रेनर्स से कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा अनुरूप स्कूल से पहले बच्चों को शैक्षणिक व मानसिक रूप से तैयार कर उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि चयनित शिक्षक इस प्रकार कार्य करें जो बच्चों से जुड़ कर उनके मानसिक स्तर को पहचान सके। शिक्षा गुणवत्ता के लिए आवश्यक के है कि शिक्षा का आधार मजबूत हो। एससीईआरटी में आयोजित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 100 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स उपस्थित थे।
राजेश सिंह राणा ने कहा कि बालवाड़ियों के लिए खेल एवं गतिविधि आधारित पाठ्यक्रम एससीईआरटी द्वारा डिजाइन किया गया है, जिसे बच्चों को खेल-खेल में सिखाया जा सके। इस कार्य में नई दिल्ली के शिक्षा मॉडल में कार्य कर रहे अनुभवी शिक्षाविदों की सहायता ली जा रही है। राणा ने कहा कि यह कार्य पूरी संवेदनशीलता के साथ करना है। बच्चों को गतिविधियों में इंवॉल्व करते हुए उन्हें आगे बढ़ने और स्कूल में पढ़ने हेतु प्रेरित करना है। उन्होंने आगे कहा कि स्कूल में जाने से पहले यदि हम 1 साल तक ग्रूम करते हैं जिससे शिक्षा का आधार मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का नाम मुख्यमंत्री की मंशा अनुसार बालवाड़ी भी रखा गया है। सभी प्रशिक्षकों से अपेक्षा की इस कार्य को मार्च के अंत तक स्कूलों में पहुंचा दें ताकि अप्रैल माह से प्रदेश के 6500 प्राथमिक स्कूलों में सफलतापूर्वक प्रारंभ की जा सके।
उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी 2022 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में छोटे बच्चों के लिए प्रदेश के 6500 प्रीस्कूल मॉडल बालवाड़ी प्रारंभ करने की घोषणा की थी। प्रशिक्षण में एससीईआरटी के अतिरिक्त संचालक डॉ. योगेश शिवहरे, प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ जया भारती चंद्राकर, सहायक संचालक प्रशांत पांडे, रिसोर्स पर्सन सुनील मिश्रा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में आवाहन ट्रस्ट न्यू दिल्ली की सायंतनी गडम, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन तथा सीएलआर के विषय विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आज गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से रावाभांठा स्थित सुदर्शन आश्रम में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने समसामयिक, धार्मिक, सांस्कृतिक तथा नक्सल विषयों पर चर्चा की। जगद्गुरू शंकराचार्य ने छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक महत्व के स्थानों को सुरक्षित व संरक्षित किये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए। साथ ही नागरिकों को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए एवं वे बेहतर परिवेश के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। राज्यपाल उइके ने जगद्गुरू शंकराचार्य को छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व नैसर्गिक स्थलों की महत्ता से अवगत कराया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल एवं कुलाधिपति अनुसुईया उइके ने डॉ. गिरीश चंदेल, विभागाध्यक्ष, डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट मॉलिक्यूलर बॉयोलॉजी एवं बॉयोटेक्नोलॉजी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। यह नियुक्ति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1987 (क्रमांक 20 सन् 1987) की धारा 14 की उपधारा (1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। इस संबंध में आज आदेश जारी किया गया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. गिरीश चंदेल, देश के प्रख्यात पौध प्रजनक और जैव प्रौद्योगिकी के वैज्ञानिक हैं। छत्तीसगढ़ के सिमगा, हथबंद के ग्राम-कुकरा चुन्दा के मूल निवासी एवं किसान परिवार में जन्मे डॉ. चंदेल को कृषि शिक्षा अनुसंधान और विस्तार प्रबंधन का 30 वर्षों का अनुभव है, जिसमें 07 वर्षों का अनुभव विशेष रूप से सूखे और पोषण अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक स्टेट ऑफ आर्ट बुनियादी सुविधाओं के निर्माण और पोषण प्रबंधन पर रहा है। डॉ. चंदेल को अमेरिका की प्रतिष्ठित बोरलॉग फेलोशिप मिली। उन्हें अंतरराष्ट्रीय राइस राइस रिसर्च इंस्टिट्यूट फिलीपींस की भी डॉक्टोरेट फेलोशिप मिली।
डॉ. चंदेल ने अनेक अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सेमिनारों में भाग लिया और उनके 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर प्रकाशित किए गए। उन्होंने 15 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं का संचालन किया जिसकी लागत लगभग ₹20 करोड़ है।
डॉ. चंदेल ने धान की बायोफोर्टीफाइड प्रजातियों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. चंदेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान एवं विकास कार्यों का वृहद अनुभव है। उन्होंने इंटरनेशनल जेनेटिक इंजीनियरिंग एवं बॉयोटेक्नोलॉजी सेंटर में पी एच.डी. फेलो तथा इंटरनेशनल राईस रिसर्च इंस्टीट्यूट में विजिटिंग वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया है।
/शौर्यपथ/
किताबों से जानिए क्यों उत्साह जरूरी है, अति-उत्साह नुकसानदायक है, कैसे कंफर्ट ज़ोन को त्याग परिवर्तन स्वीकार करे
उत्साह जरूरी है, अति-उत्साह नुकसानदायक
जीवन में कई बार हम अति-उत्साहित हो जाते हैं, जो अच्छा नहीं है। जल्दबाजी में काम बिगड़ने की संभावना रहती है। बहुत सोच-समझकर, धैर्य रखते हुए काम करने से आपको चीजों को बारीकी से समझने में आसानी होती है। आप खुद महसूस करते हैं आपको क्या करना है, क्या नहीं। तो...अपने उत्साह को बनाए रखें, पर इतना नहीं कि यह अति-उत्साह में परिवर्तित हो जाए। (हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपल)
कंफर्ट ज़ोन को त्याग परिवर्तन स्वीकार करें
सफलता की राह में आपका सबसे बड़ा दुश्मन है आपका कंफर्ट ज़ोन और परिवर्तन का प्रतिरोध करने की आदत। विकास, प्रगति और उन्नति के लिए परिवर्तन बहुत जरूरी है। जीवन लंबे समय तक एक जैसा नहीं चल सकता। जब लक्ष्य स्पष्ट होते हैं और उनके साथ कर्म की विस्तृत योजना भी होती है, तो परिवर्तन आपके जीवन को और बेहतर ही बनाएगा। (लीडिंग चेंज)
भावनाएं, विचार आपके मन में ही जन्म लेते हैं
गुस्सा करते हुए आपको चार अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है। पहले आप सोचते हैं कि व्यक्ति ने आपके बारे में क्या कहा। फिर तय करते हैं उसकी बात पर आपको गुस्सा होना है। फिर प्रतिक्रिया तय करते हैं। विचार, भावनाएं, क्रिया और प्रतिक्रिया आपके मन में ही जन्म लेती हैं। खुद को पहचानें, किसी को भी अपनी आंतरिक शांति में खलल डालने की अनुमति ना दें। (बिहेवियर मैनेजमेंट)
हमेशा सफल होने के बारे में ही सोचें
जब आपके सामने कोई कठिन परिस्थिति आए तो सोचें- मैं जीत जाऊंगा। अपनी चिंतन प्रक्रिया पर इस विचार को हावी होने दें कि मैं सफल होकर दिखाऊंगा। सफलता के बारे में सोचने से दिमाग ऐसी योजना बनाता है जिससे आपको सफलता मिलती है। असफलता के बारे में सोचने से इसका ठीक उल्टा होता है। (फेलिंग फॉर्वर्ड)
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
