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June 08, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

जिले में 24 हजार टन से अधिक उर्वरक का भंडारण, सहकारी समितियों के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर वितरण

रायपुर, । जिला रायगढ़ में मानसून की दस्तक से पहले जिले के किसान आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं। खेतों की जुताई, बुआई की तैयारी और कृषि आदानों की व्यवस्था के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़ी गतिविधियां तेज हो गई हैं। किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उनकी मांग के अनुरूप खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं पात्र किसानों को नगद ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया भी निरंतर जारी है। कलेक्टर द्वारा इसकी लगातार समीक्षा भी की जा रही है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में खाद की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है तथा किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए जिले में उर्वरकों के भंडारण और वितरण की व्यवस्था सुनियोजित ढंग से संचालित की जा रही है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर से लेकर विकासखंड स्तर तक लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिले में अब तक विभिन्न प्रकार के उर्वरकों का 24 हजार 138 टन से अधिक भंडारण किया जा चुका है। इनमें सहकारी संस्थाओं में 15 हजार 789 टन तथा निजी क्षेत्र में 8 हजार 348 टन उर्वरक उपलब्ध है। कृषि विभाग के अनुसार सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उर्वरकों की पहुंच और वितरण व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 48 प्रतिशत तथा गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 52 प्रतिशत खाद का भंडारण किया जा चुका है। वहीं इस वर्ष उपलब्ध कराए गए भंडारण के विरुद्ध लगभग 46 प्रतिशत उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप खाद की आपूर्ति एवं भंडारण की प्रक्रिया चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से संचालित की जा रही है।
कृषि विभाग द्वारा जिले में गठित निगरानी दलों, उर्वरक निरीक्षकों तथा मैदानी अमले के माध्यम से सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। किसानों को उनके कृषि रकबे एवं आवश्यकता के अनुरूप नियमानुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित कराया जा रहा है। साथ ही उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
विभाग द्वारा किसानों को डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में एनपीके, एसएसपी तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा हरी खाद उत्पादन को बढ़ावा देने तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में दीवार लेखन, प्रचार-प्रसार एवं कृषि विस्तार गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
कृषि विभाग ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए खाद वितरण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। मानसून के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ने की स्थिति में भी पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। विभाग का लक्ष्य किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराकर खरीफ फसलों की बेहतर उत्पादन व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

25 हजार मीट्रिक टन से अधिक रासायनिक उर्वरक उपलब्ध, प्रशासन की कड़ी निगरानी में वितरण व्यवस्था

रायपुर // मुंगेली जिले में खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही जिले के किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार जिले में रासायनिक उर्वरकों के भंडारण, वितरण और निगरानी की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को खेती-किसानी के कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। जिले में वर्तमान में सहकारी, निजी एवं डबल लॉक केंद्रों सहित कुल 25 हजार मीट्रिक टन से अधिक रासायनिक उर्वरक उपलब्ध है। सहकारी क्षेत्र में अब तक 14 हजार 217 मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जिसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी एवं म्यूरेट ऑफ पोटॉश शामिल हैं। वहीं निजी क्षेत्र में 10 हजार 727 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। इसके अतिरिक्त डबल लॉक केंद्रों में 04 हजार 208 मीट्रिक टन तथा निजी थोक विक्रेताओं के पास 01 हजार 213 मीट्रिक टन उर्वरक सुरक्षित रूप से उपलब्ध है।
किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 05 हजार 668 मीट्रिक टन तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से 06 हजार 829 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। इसके साथ ही जिले की 66 सहकारी समितियों में 12 हजार 412 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से धान एवं अरहर के बीज शामिल हैं। निजी क्षेत्र के 200 से अधिक केंद्रों में भी लगभग 01 हजार 50 क्विंटल बीज उपलब्ध है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि जिले में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा लगातार नई खेप भी पहुंच रही है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक प्रचार पर ध्यान न दें और आवश्यकता अनुसार ही खाद का क्रय करें। प्रशासन किसानों को निर्बाध रूप से खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ।

  रायपुर / ख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि समाधान शिविरों का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का संवेदनशील और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासनिक अमला सकारात्मक सोच और सार्थक प्रयासों के साथ कार्य करे, ताकि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचे और सुशासन की भावना जमीन पर दिखाई दे।

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मंगलवार शाम कांकेर जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर और बस्तर जिलों में संचालित योजनाओं एवं विकास कार्यों की जिलावार समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, जवाबदेह और परिणामोन्मुख कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री आवास, धान उठाव और कृषि तैयारियों पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवासों का निर्माण शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए ताकि हितग्राहियों को पक्के आवास का लाभ मिल सके। उन्होंने खरीदी केन्द्रों से धान उठाव की प्रक्रिया तेज करने तथा स्थानीय स्तर पर धान मिलिंग को बढ़ावा देने के लिए युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खरीफ सीजन को देखते हुए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने किसानों को नैनो यूरिया और वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि और एग्रीस्टैक पोर्टल में पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री साय ने मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तैयारी के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, सिकल सेल स्क्रीनिंग तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट तैयार करने का कार्य देने, कुपोषण मुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या बढ़ाने तथा सभी पात्र महिलाओं तक महतारी वंदन योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता को लेकर निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। साथ ही डायल 112 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम जनमन, बिहान योजना, तेंदूपत्ता खरीदी, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन, अटल डिजिटल सेवा केन्द्र, ई-ऑफिस क्रियान्वयन, डीएमएफ कार्यों, शिक्षा गुणवत्ता, सड़क अवसंरचना और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विभागवार समीक्षा की तथा जिलों में प्रगति की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पखांजूर क्षेत्र में मत्स्यपालन की संभावनाओं को देखते हुए जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में डीएमएफ मद से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और कुपोषण उन्मूलन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

बैठक में विधायक अंतागढ़ श्री विक्रम उसेंडी, कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, बस्तर संभाग आयुक्त श्री डोमन सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई उड़ान, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा होगी सुदृढ़

रायपुर, / सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत ग्राम चेरपाल में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकासखंड कुआकोंडा एवं कटेकल्याण के 8 संकुल स्तरीय संगठनों को आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (AGEY) के तहत टाटा मैजिक सवारी वाहनों की चाबी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर अधिकारियों ने जानकारी दी कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ दूरस्थ अंचलों में परिवहन सुविधाओं को मजबूत बनाना है। योजना के तहत प्रदाय किए गए प्रत्येक टाटा मैजिक वाहन के लिए लगभग 5 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। इन वाहनों के संचालन से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय का स्रोत प्राप्त होगा तथा ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

41 हजार से अधिक परिवारों की आजीविका सशक्त करने में जुटा बिहान मिशन

कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले के 41 हजार 110 परिवारों को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार एवं आयवर्धन गतिविधियों से जोड़ा गया है। समूह की महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, लघु उद्यम, वनोपज प्रसंस्करण तथा विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

गांव और शहर के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी, महिलाओं को मिलेगा स्थायी आय का स्रोत

मुख्यमंत्री द्वारा प्रदाय किए गए इन वाहनों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुलभ, सुरक्षित एवं किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इससे दूरस्थ गांवों का बाजारों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक केंद्रों तथा जिला मुख्यालय से बेहतर संपर्क स्थापित होगा। साथ ही महिलाओं को वाहन संचालन एवं प्रबंधन के माध्यम से नियमित आय प्राप्त होगी, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनकर उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना से उन्हें न केवल रोजगार का अवसर मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा का एक नया माध्यम भी प्राप्त होगा। यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

   नई दिल्ली / केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने के नेतृत्व वाले नेपाली प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। गृह मंत्री कार्यालय ने X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा, आज नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष श्री रवि लामिछाने के नेतृत्व वाले नेपाली प्रतिनिधिमंडल के साथ एक बैठक की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने चुनावों में RSP की जीत पर श्री लामिछाने को बधाई दी और नई सरकार की सफलता के लिए भारत की ओर से शुभकामनाएं व्यक्त कीं। दोनों पक्षों ने भारत और नेपाल के बीच विशेष संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के लिए मिलकर काम करने का अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त किया।

“भारत “विकसित भारत 2047” के विजन और एक सुदृढ़ जैव-अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है”

‘अगली पीढ़ी के बायो-इन्पुट्स– जैव-आधारित कीटनाशक, शक्ति वर्धक एवं उर्वरक' की थीम पर आधारित बायोपीएसएफ 2026 नई दिल्ली में संपन्न

  नई दिल्ली / भारत अपनी मजबूत वैज्ञानिक आधारशिला, समृद्ध जैव विविधता और तेजी से विकसित हो रहे स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के कारण, जैव अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि-लागत क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरने की अपार क्षमता क्षमता रखता है।

यह बात रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग(डीसीपीसी) के सचिव, श्री तेजवीर सिंह ने आज नई दिल्ली में दो दिवसीय संगोष्ठी-सह-कार्यशाला, 'बायोपीएसएफ 2026' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा।

“अगली पीढ़ी के बायो-इन्पुट्स– जैव-आधारित कीटनाशक, शक्ति वर्धक एवं उर्वरक” की थीम पर आधारित 'बायोपीएसएफ 2026' कार्यक्रम का आयोजन कीटनाशक सूत्रीकरण प्रौद्योगिकी संस्थान (आईपीएफटी), गुरुग्राम द्वारा किया गया था, जो रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के डीसीपीसी (रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।

श्री सिंह ने कहा कि सतत कृषि के लिए बढ़ता नीतिगत समर्थन और जैव-अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाली लक्षित पहलों सहित अनेक सकारात्मक कारक भारत को जैव-अर्थव्यवस्था तथा जैव-आधारित कृषि-इनपुट क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनने के मार्ग पर अग्रसर करेंगे।

डीसीपीसी के सचिव ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रभावी साझेदारी तथा उभरते युवा नवोन्मेषकों के तकनीकी योगदान भविष्य के सतत कृषि समाधानों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

जैव-कीटनाशकों के व्यावहारिक पहलुओं और सफलता पर प्रकाश डालते हुए, श्री तेजवीर सिंह ने इस बात पर ज़ोर देकर कहा कि जैव-कीटनाशकों की वास्तविक सफलता ऐसी मज़बूत फ़ॉर्मूलेशन प्रौद्योगिकियों के विकास पर भी निर्भर करती है, जो उत्पाद की स्थिरता, खेतों में उसकी प्रभावशीलता, उपयोग में आसानी और किसानों के बीच उसकी समग्र स्वीकार्यता को बढ़ा सकें।

इसके अलावा, डीसीपीसी के सचिव ने कहा कि जैसे-जैसे भारत “विकसित भारत 2047” और एक सशक्त जैव-अर्थव्यवस्था के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने, अनुप्रयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा जैव-आधारित रसायनों, फसल संरक्षण प्रौद्योगिकियों और सतत कृषि-इनपुट्स के क्षेत्र में स्टार्टअप-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।

यह दो दिवसीय कार्यक्रम आईपीएफटी के 36वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नियामकों, शिक्षाविदों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया तथा जैव-आधारित कृषि-इनपुट्स के क्षेत्र में हालिया विकास और सतत कृषि में उनकी भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

  नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि जब नागरिक एकता और पारस्परिक सहयोग के सूत्र में बंधे होते हैं, तब राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प के बल पर देश निरंतर प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा:
"जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥"

जिस प्रकार लकड़ी के टुकड़े अलग-अलग रहने पर अपनी पूरी ऊर्जा प्रदर्शित नहीं कर पाते, लेकिन एक साथ आने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न करते हैं, उसी प्रकार किसी राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि और शक्ति उसके नागरिकों की एकता, पारस्परिक सहयोग तथा सामूहिक संकल्प पर निर्भर करता है।

राजनीति का बदलता स्वरूप और बढ़ती जनअपेक्षाएं

लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि केवल कानून बनाने या सरकारी योजनाओं की घोषणा करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और विश्वास के केंद्र भी होते हैं। समय के साथ राजनीति का स्वरूप बदला है और अब जनता केवल चुनावी वादों या मंचीय भाषणों से संतुष्ट नहीं होती। आम नागरिक ऐसे जनप्रतिनिधियों को पसंद कर रहा है जो उसकी दैनिक जरूरतों, सामाजिक समस्याओं और जीवन की वास्तविक चुनौतियों को समझते हुए सीधे समाधान प्रस्तुत करें।

छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में आज राजनीति का मूल्यांकन विकास कार्यों के साथ-साथ जनसरोकारों के आधार पर भी होने लगा है। जनता अब यह देख रही है कि उसका प्रतिनिधि केवल सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है या फिर उससे आगे बढ़कर समाज की आवश्यकताओं को समझते हुए नवाचार और जनहित के नए मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है।

जब जनप्रतिनिधित्व बन जाए जनसेवा का माध्यम

दुर्ग जिले के वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में विधायक रिकेश सेन द्वारा किए जा रहे विभिन्न सामाजिक प्रयासों की चर्चा लगातार बढ़ रही है। सीमित संसाधनों में आम नागरिकों की मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कम लागत या प्रतीकात्मक शुल्क पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

चाहे गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह सीजन में मेहंदी की व्यवस्था हो, कम लागत में चश्मा उपलब्ध कराना हो, सामाजिक आयोजनों के लिए पेयजल सहायता हो, दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग और तीन पहिया साइकिल की व्यवस्था हो अथवा विभिन्न वर्गों के लिए सहयोगात्मक योजनाएं—इन पहलों ने राजनीति में जनसहभागिता के एक नए मॉडल की चर्चा शुरू की है।

इन प्रयासों का प्रभाव केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह संदेश भी गया है कि जनप्रतिनिधि यदि इच्छाशक्ति रखे तो सामाजिक सहयोग और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से कई सकारात्मक पहलें संभव हैं।

जनता की अपेक्षाएं अब और बढ़ चुकी हैं

यही कारण है कि एक क्षेत्र में दिखाई देने वाले सकारात्मक प्रयास अन्य क्षेत्रों के लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बनते हैं। स्वाभाविक रूप से नागरिक अपने क्षेत्र के विधायक, सांसद, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी ऐसी ही सक्रियता और नवाचार की अपेक्षा करने लगते हैं।

दुर्ग जिले में भी विभिन्न राजनीतिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। नागरिक यह चाहते हैं कि विकास कार्यों के साथ-साथ ऐसे जनहितकारी प्रयास भी दिखाई दें जो सीधे आम व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करें। सड़क, भवन और अधोसंरचना विकास आवश्यक हैं, लेकिन आम परिवार के दैनिक जीवन में राहत पहुंचाने वाली पहलें लोगों के मन में स्थायी स्थान बनाती हैं।

पद बड़ा नहीं, प्रभाव बड़ा होना चाहिए

राजनीति में पद और अधिकार महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन जनता अंततः उस कार्य को याद रखती है जिसका सीधा लाभ उसे मिला हो। इतिहास गवाह है कि अनेक जनप्रतिनिधि अपने पद के कारण नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण और जनहितकारी कार्यों के कारण लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बने रहते हैं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ स्थानीय आवश्यकताओं को समझें, समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करें और ऐसे नवाचारों को बढ़ावा दें जो आम नागरिक के जीवन को सरल और सम्मानजनक बना सकें।

लोकतंत्र की असली शक्ति जनता की उम्मीदों में है

वर्तमान दौर की राजनीति में जनता केवल प्रतिनिधित्व नहीं चाहती, बल्कि सहभागिता और संवेदनशीलता भी चाहती है। नागरिक ऐसे जनप्रतिनिधियों की तलाश में हैं जो उनके सुख-दुख में सहभागी बनें, समस्याओं को सुनें और समाधान के लिए निरंतर प्रयास करें।

दुर्ग से लेकर प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों तक एक संदेश स्पष्ट दिखाई दे रहा है—जनता अब उन नेताओं को अधिक महत्व दे रही है जो सत्ता के केंद्र में नहीं, बल्कि समाज के बीच दिखाई देते हैं। राजनीति का भविष्य भी संभवतः उसी दिशा में आगे बढ़ेगा जहां जनप्रतिनिधि अपने पद की शक्ति से अधिक अपनी जनसेवा की पहचान से जाने जाएंगे।

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