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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
शिकायत दर्ज होते ही सक्रिय हुआ प्रशासन, समयबद्ध कार्रवाई से परिवार को मिला योजनाओं का लाभ
दुर्ग/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रदेश के नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान का भरोसेमंद माध्यम बनकर सामने आ रही है। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम ओरी निवासी अभिषेक चतुर्वेदी और उनके परिवार की कहानी इस व्यवस्था की प्रभावशीलता का प्रेरक उदाहरण है।
अभिषेक चतुर्वेदी अपनी पत्नी श्रीमती शीतल चतुर्वेदी के नाम से राशन कार्ड बनवाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। संबंधित विभाग में आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद विभिन्न कारणों से राशन कार्ड जारी नहीं हो पा रहा था। इसके कारण परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले खाद्यान्न सहित अन्य शासकीय योजनाओं और सुविधाओं से वंचित था।
जब लगातार प्रयासों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तब अभिषेक चतुर्वेदी ने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले को प्राथमिकता से लेते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और कुछ ही दिनों में आवेदन स्वीकृत कर श्रीमती शीतल चतुर्वेदी के नाम से राशन कार्ड जारी कर दिया।
राशन कार्ड मिलने के बाद चतुर्वेदी परिवार ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतनी शीघ्र समाधान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हुई और बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हो गया।
अभिषेक चतुर्वेदी और उनकी पत्नी शीतल चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा दुर्ग जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों के लिए वास्तव में उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जो लोगों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित कर रही है।
यह उदाहरण दर्शाता है कि शासन की शिकायत निवारण प्रणाली यदि संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ कार्य करे, तो आम नागरिकों को न केवल राहत मिलती है बल्कि शासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत होता है।
कोतवाली हत्याकांड में लाइन अटैच की कार्रवाई का फिर हो रहा उल्लेख, विभागीय जांच के बीच अगले प्रशासनिक निर्णय पर निगाहें
दुर्ग, शौर्यपथ। कुंदरापारा में हुए चर्चित गैंगवार और लेखराम कोठारी हत्याकांड के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली प्रशासनिक समीक्षा के दायरे में आ गई है। नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) हर्षित मेहर(आईपीएस) ने पद्मनाभपुर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया को कर्तव्य निर्वहन में कथित लापरवाही के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में घटना से पहले और बाद की पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सीएसपी कार्यालय से जारी नोटिस के अनुसार, हत्या की सूचना समय पर वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई गई। साथ ही, थाना प्रभारी के तत्काल घटनास्थल पर नहीं पहुंचने के कारण घटनास्थल का निरीक्षण और शव को मर्च्युरी भेजने जैसी प्रारंभिक कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं करनी पड़ी। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि गैंगवार के बाद अस्पताल ले जाए गए आरोपियों में से एक आरोपी लक्ष्मी चेलक पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था, जिसे बाद में एसीसीयू टीम ने गिरफ्तार किया।
विभागीय नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे हुई प्रारंभिक हिंसक झड़प को माना गया है। उल्लेख किया गया है कि दोनों पक्ष थाना पहुंचे थे, लेकिन तत्काल गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज करने के बजाय केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। विभाग का मानना है कि यदि उस समय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाती और वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर जानकारी दी जाती, तो बाद में हुई गंभीर घटना की संभावना कम हो सकती थी। यह विभागीय जांच का विषय है।
इसी घटनाक्रम के बीच वर्ष 2025 के संतोष आचार्य हत्याकांड का मामला भी पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। उस समय सिटी कोतवाली थाना प्रभारी तापेश्वर सिंह नेताम को प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर रक्षित केंद्र भेज दिया गया था। हालांकि, उसी मामले में कोतवाली पुलिस ने देर रात हुई घटना के चंद घंटो में ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था ।वही गिरफ्तारी के तीन से चार घंटो के भीतर ही कोतवाली प्रभारी के लाइन अटैच के आदेश तब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था . यहाँ यह बताना अत्यंत आवश्यक है कि गत नवरात्री में देर रात तक चली चुनरी यात्रा भी निर्विवाद रूप से सराहनीय चर्चा का विषय रही जिसके बाद तात्कालिक कोतवाली प्रभारी सहित नगर पुलिस अधीक्षक एवं जिले के कप्तान की आम जनता ने खुले मन से प्रशंसा की थी .
पुलिस विभाग के जानकारों का कहना है कि अलग-अलग मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई संबंधित परिस्थितियों, उपलब्ध तथ्यों और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाती है। ऐसे में वर्तमान मामले में भी अंतिम निर्णय विभागीय जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल पद्मनाभपुर थाना प्रभारी से कारण बताओ नोटिस का जवाब मांगा गया है। इसके बाद जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इस कारण पुलिस महकमे और शहरवासियों की निगाहें अब दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।
नोट: समाचार लिखे जाने तक वर्तमान में पद्मनाभपुर थाना प्रभारी के विरुद्ध केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनके विरुद्ध किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का निर्णय अभी विभागीय जांच पूर्ण होने के बाद ही लिया जाएगा।
रायपुर/दुर्ग, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में दुर्ग जिले के अंजोरा स्थित दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में तकनीकी उपकरणों की खरीदी का मामला जोरदार ढंग से उठा। प्रश्नकाल के दौरान दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता, उपकरणों के मूल्य निर्धारण तथा क्रय समिति की कार्यप्रणाली पर सरकार से जवाब मांगा।
विधायक ललित चंद्राकर ने सदन में कहा कि विश्वविद्यालय की परियोजना सूची में क्रमांक 1 से 6 तक विभिन्न तकनीकी उपकरणों की कीमत समान दर्शाई गई है, जो प्रथम दृष्टया संदेह उत्पन्न करती है। उन्होंने सरकार से प्रत्येक उपकरण का वास्तविक क्रय मूल्य, उसकी वारंटी अवधि, तकनीकी विनिर्देश तथा संपूर्ण खरीद प्रक्रिया का विस्तृत विवरण सदन के पटल पर रखने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में दिए गए उत्तर से उन्हें संतोष नहीं मिला था, इसलिए इस बार पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता स्पष्ट हो सके।
इस पर पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम ने जवाब देते हुए बताया कि वर्ष 2024 से 25 जून 2026 के बीच विश्वविद्यालय द्वारा कुल 9 तकनीकी उपकरणों की खरीदी की गई है। सभी खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल तथा राज्य शासन के निर्धारित वित्तीय एवं खरीद नियमों के अनुरूप की गई। उन्होंने कहा कि उपकरणों के चयन और खरीदी के लिए गठित क्रय समिति में तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया था तथा पूरी प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न हुई।
हालांकि, विधायक ललित चंद्राकर ने उपकरणों के मूल्य निर्धारण और समान कीमत दर्शाए जाने के बिंदु पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की मांग दोहराई।
गौरतलब है कि दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ का प्रमुख पशु चिकित्सा, डेयरी विज्ञान एवं पशुपालन शिक्षा संस्थान है। विधानसभा में मामला उठने के बाद विश्वविद्यालय में तकनीकी उपकरणों की खरीदी और उससे जुड़ी प्रक्रियाएं एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं।
*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना*
*वन विभाग की अभिनव पहल से निःशुल्क पौधों का होगा वितरण, पर्यावरण संरक्षण का दिया जाएगा संदेश*
रायपुर / आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए 'ट्री एटीएम' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि 'ट्री एटीएम' लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
*'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहल*
उल्लेखनीय है कि 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को 'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।
*छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पहल से पर्यटन उद्योग को मिलेगा नया आयाम, भ्रमण के दौरान सरगुजा की पर्यटन संभावनाओं पर हुई सार्थक चर्चा*
रायपुर। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा सरगुजा संभाग के पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में आयोजित फेम ट्रिप से एक दिन पूर्व अम्बिकापुर में विशेष होटल भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमंत्रित टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स को सरगुजा में उपलब्ध उत्कृष्ट आवासीय सुविधाओं, आतिथ्य परंपरा तथा पर्यटन के अनुकूल अधोसंरचना से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में अधिक से अधिक पर्यटकों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित कर सकें।
कार्यक्रम के अंतर्गत देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स का होटल पर्पल आर्किड, अम्बिकापुर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तिलक लगाकर एवं स्वागत पेय के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया गया। स्वागत के पश्चात अतिथियों को होटल की आधुनिक आवासीय व्यवस्था, स्वादिष्ट भोजन की सुविधाएं, बैंक्वेट हॉल तथा अन्य अतिथि सेवाओं का विस्तृत निरीक्षण कराया गया। होटल प्रबंधन ने अपने आतिथ्य और सेवाओं के माध्यम से सरगुजा की मेहमाननवाजी की समृद्ध परंपरा से सभी को परिचित कराया।
दोपहर के भोजन के उपरांत सभी अतिथियों को अम्बिकापुर के प्रतिष्ठित होटल माखन विहार ले जाया गया, जहां होटल प्रबंधन ने उन्हें उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं, आवासीय व्यवस्थाओं तथा अन्य सेवाओं का अवलोकन कराया। भ्रमण के दौरान अतिथियों ने होटल की गुणवत्ता, स्वच्छता और पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की।
होटल भ्रमण के बाद होटल संचालक द्वारा निशुल्क उच्च स्तरीय हाई-टी का आयोजन किया गया। इस दौरान सरगुजा संभाग के प्रमुख पर्यटन स्थलों, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों, जनजातीय संस्कृति तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स ने क्षेत्र में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाओं पर अपने सुझाव भी साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में सभी टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स ने अम्बिकापुर के होटलों में उपलब्ध उत्कृष्ट सुविधाओं और आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि सरगुजा संभाग प्रकृति, संस्कृति और विरासत का अनूठा संगम है तथा यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के परिचयात्मक भ्रमण से सरगुजा राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा तथा वे भविष्य में अधिक से अधिक देशी-विदेशी पर्यटकों को इस क्षेत्र की यात्रा के लिए प्रेरित करेंगे।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की यह पहल सरगुजा संभाग को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे कार्यक्रम पर्यटन उद्योग, स्थानीय होटल व्यवसाय, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
*छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पहल से पर्यटन उद्योग को मिलेगा नया आयाम, भ्रमण के दौरान सरगुजा की पर्यटन संभावनाओं पर हुई सार्थक चर्चा*
रायपुर। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा सरगुजा संभाग के पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में आयोजित फेम ट्रिप से एक दिन पूर्व अम्बिकापुर में विशेष होटल भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमंत्रित टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स को सरगुजा में उपलब्ध उत्कृष्ट आवासीय सुविधाओं, आतिथ्य परंपरा तथा पर्यटन के अनुकूल अधोसंरचना से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में अधिक से अधिक पर्यटकों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित कर सकें।
कार्यक्रम के अंतर्गत देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स का होटल पर्पल आर्किड, अम्बिकापुर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तिलक लगाकर एवं स्वागत पेय के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया गया। स्वागत के पश्चात अतिथियों को होटल की आधुनिक आवासीय व्यवस्था, स्वादिष्ट भोजन की सुविधाएं, बैंक्वेट हॉल तथा अन्य अतिथि सेवाओं का विस्तृत निरीक्षण कराया गया। होटल प्रबंधन ने अपने आतिथ्य और सेवाओं के माध्यम से सरगुजा की मेहमाननवाजी की समृद्ध परंपरा से सभी को परिचित कराया।
दोपहर के भोजन के उपरांत सभी अतिथियों को अम्बिकापुर के प्रतिष्ठित होटल माखन विहार ले जाया गया, जहां होटल प्रबंधन ने उन्हें उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं, आवासीय व्यवस्थाओं तथा अन्य सेवाओं का अवलोकन कराया। भ्रमण के दौरान अतिथियों ने होटल की गुणवत्ता, स्वच्छता और पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की।
होटल भ्रमण के बाद होटल संचालक द्वारा निशुल्क उच्च स्तरीय हाई-टी का आयोजन किया गया। इस दौरान सरगुजा संभाग के प्रमुख पर्यटन स्थलों, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों, जनजातीय संस्कृति तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स ने क्षेत्र में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाओं पर अपने सुझाव भी साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में सभी टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स ने अम्बिकापुर के होटलों में उपलब्ध उत्कृष्ट सुविधाओं और आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि सरगुजा संभाग प्रकृति, संस्कृति और विरासत का अनूठा संगम है तथा यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के परिचयात्मक भ्रमण से सरगुजा राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा तथा वे भविष्य में अधिक से अधिक देशी-विदेशी पर्यटकों को इस क्षेत्र की यात्रा के लिए प्रेरित करेंगे।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की यह पहल सरगुजा संभाग को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे कार्यक्रम पर्यटन उद्योग, स्थानीय होटल व्यवसाय, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रायपुर । शौर्यपथ। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग दिवस (12 अगस्त) के अवसर पर इंडिया स्पेस लैब द्वारा "रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट" विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े हितधारकों को भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) तकनीकों की उपयोगिता से अवगत कराना और आपदा प्रबंधन में इनके प्रभावी उपयोग की जानकारी देना है।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS), अर्थ ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी, जियो-एआई (GeoAI), ड्रोन मैपिंग, मशीन लर्निंग आधारित अनुप्रयोगों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े वास्तविक केस स्टडी पर विस्तृत जानकारी देंगे।
इस कार्यशाला के लिए ऑनलाइन पंजीयन की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र (E-Certificate) प्रदान किया जाएगा।
आयोजकों ने छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों, राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, शासकीय विभागों, स्वायत्त संस्थाओं तथा शोध एवं प्रशिक्षण संस्थानों से इस कार्यशाला की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रसारित करने का अनुरोध किया है। साथ ही विभागीय वेबसाइटों, सूचना पट्टों, समाचार पत्रिकाओं एवं अन्य संचार माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की गई है।
आयोजकों के अनुसार, यह पहल विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अधिकारियों में वैज्ञानिक सोच, जियोस्पेशियल शिक्षा, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इच्छुक प्रतिभागी 30 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन पंजीयन कर कार्यशाला में भाग ले सकते हैं। पंजीयन लिंक: https://isl.ac.in/workshop/
सुबह की हिंसक झड़प पर नहीं हुई कड़ी कार्रवाई, शाम तक गैंगवार में गई लेखराम कोठारी की जान; पद्मनाभपुर टीआई प्रमोद रूसिया को कारण बताओ नोटिस
दुर्ग | शौर्यपथ
दुर्ग के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में 12 जुलाई को हुए खूनी गैंगवार और लेखराम कोठारी की हत्या मामले में पुलिस विभाग के भीतर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत हो गई है। नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) हर्षित मेहर IPS ने मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया को कड़े शब्दों में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि समय रहते थाना प्रभारी ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन किया होता, तो संभवतः यह विवाद गैंगवार और हत्या तक नहीं पहुंचता।
सुबह 4 बजे मिला था विवाद का संकेत, लेकिन टीआई ने नहीं दिखाई गंभीरता
नोटिस के अनुसार, 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दोनों पक्ष घायल अवस्था में पद्मनाभपुर थाने पहुंचे थे। यह गंभीर अपराध का मामला था, जिसमें तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन थाना प्रभारी ने केवल घायलों का मुलाहजा कराकर सामान्य प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तक ही मामला सीमित रखा। इस ढिलाई से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और देर रात खूनी गैंगवार में बदल गया, जिसमें लेखराम कोठारी की हत्या हो गई।
हत्या की सूचना भी वरिष्ठ अधिकारी से छिपाई
सीएसपी द्वारा जारी नोटिस में यह भी उल्लेख है कि हत्या जैसी गंभीर घटना होने के बाद भी थाना प्रभारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी CSP हर्षित मेहर IPS को तत्काल सूचना नहीं दी। कंट्रोल रूम और डायल-112 के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद स्वयं CSP को घटनास्थल पहुंचना पड़ा।
CSP ने संभाली कमान, खुद कराया शव मर्चुरी शिफ्ट
नोटिस में कहा गया है कि घटनास्थल का निरीक्षण कर मृतक के शव को मर्चुरी भेजने और मौके को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की थी। लेकिन यह जिम्मेदारी भी उन्होंने नहीं निभाई। अंततः स्वयं CSP हर्षित मेहर IPS ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली, शव को मर्चुरी भिजवाया और घटनास्थल की निगरानी सुनिश्चित कराई।
पुलिस की ढिलाई से अस्पताल से फरार हुआ आरोपी
गैंगवार के बाद दोनों पक्षों के घायलों को अस्पताल भेजा गया था। इसी दौरान हत्या का आरोपी लक्ष्मी चेलक अस्पताल से फरार हो गया। नोटिस में इसे भी थाना प्रभारी की गंभीर लापरवाही बताया गया है। बाद में क्राइम ब्रांच/एसीसीयू टीम की सक्रियता से आरोपी को दोबारा गिरफ्तार किया गया। यदि आरोपी फरार रहते हुए कोई और वारदात कर देता, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती—यह सवाल भी नोटिस में उठाया गया है।
चार गंभीर लापरवाहियां, जवाब मांगा
सीएसपी हर्षित मेहर IPS द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में थाना प्रभारी की चार प्रमुख चूकें दर्ज की गई हैं—
हत्या की सूचना वरिष्ठ अधिकारी को समय पर नहीं देना।
घटनास्थल का निरीक्षण एवं शव को मर्चुरी भेजने जैसी जिम्मेदारी नहीं निभाना।
आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी में विफल रहना, जिससे एक आरोपी अस्पताल से फरार हो गया।
सुबह हुई हिंसक झड़प के बाद समय रहते एफआईआर और प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं करना तथा वरिष्ठ अधिकारियों को सही रिपोर्टिंग नहीं करना।
सख्त पुलिसिंग का संदेश
इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत मिला है कि CSP हर्षित मेहर IPS कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने तथ्यों के आधार पर थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई पुलिस महकमे में जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अब विभागीय कार्रवाई पर नजर
पद्मनाभपुर गैंगवार और लेखराम कोठारी हत्याकांड में जारी इस कारण बताओ नोटिस के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि थाना प्रभारी के जवाब के आधार पर पुलिस विभाग क्या विभागीय कार्रवाई करता है। यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि समय पर प्रभावी पुलिस कार्रवाई नहीं होने के संभावित परिणामों का भी गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडी
ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुँचेगी एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की शिक्षा
एक वर्ष में 5,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण: विज्ञान और नवाचार को मिलेगी नई उड़ान
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी। उन्होंने पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।
मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।
एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा
उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, विधायक श्री सुशांत शुक्ला, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना से मिला गुणवत्तायुक्त बीज, कृषि विभाग के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों ने प्रगतिशील किसान भानुप्रताप को बनाया नवाचार का प्रतीक
रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में खेती को आधुनिक, लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर प्रेरणादायी परिणाम देने लगे हैं। किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की राज्य सरकार की पहल ने एक बार फिर नई मिसाल कायम की है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम दरमोहली के प्रगतिशील किसान एवं लोक कलाकार श्री भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला ने अपनी रचनात्मक सोच और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से पारंपरिक कृषि उपकरण को कम लागत वाली सीड ड्रिल में बदलकर खेती में नवाचार का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ-ऑयल) योजना के अंतर्गत कृषि विभाग से प्राप्त 80 किलोग्राम गुणवत्तायुक्त मूंगफली बीज का उपयोग करते हुए उन्होंने लगभग दो एकड़ क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से बुवाई शुरू की है। स्वयं विकसित की गई सीड ड्रिल की मदद से कम समय में समान दूरी पर बीज की बुवाई संभव हुई, जिससे श्रम लागत घटी, बीज की बचत हुई और बेहतर अंकुरण की संभावना भी बढ़ गई।
मुख्यमंत्री की सोच—किसान बने आत्मनिर्भर, खेती बने लाभ का माध्यम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की स्पष्ट मंशा है कि प्रदेश का किसान केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार का नेतृत्वकर्ता बने। इसी सोच के अनुरूप कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और स्थानीय स्तर पर विकसित नवाचारों को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। सरकार का लक्ष्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
स्थानीय नवाचार बना पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा
उप संचालक कृषि सत्यजीत कंवर ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विकसित ऐसे नवाचार खेती को अधिक किफायती, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ ऐसे उपयोगी स्थानीय प्रयोगों को अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है, ताकि सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ रहा है और किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
सरकारी योजना और किसान की प्रतिभा का सफल संगम
जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित योजनाएं अब किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला का यह नवाचार इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब सरकार की दूरदर्शी नीतियां, विभागीय सहयोग और किसान की रचनात्मक सोच एक साथ मिलती हैं, तो खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और समृद्धि का आधार बन जाती है।
यह मॉडल आज न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के "समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़" के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है।
कलेक्टर विजय दयाराम के. के सख्त निर्देश पर खनिज विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई, शिकायत मिलते ही उड़नदस्ता सक्रिय; अवैध परिवहन करने वालों पर दर्ज हुए प्रकरण
रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज कराने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का प्रभावी मंच भी बन रही है। इसका ताजा उदाहरण गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में देखने को मिला, जहां सीएम हेल्पलाइन (1076) में दर्ज एक शिकायत पर जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। नवपदस्थ कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देश पर जिला खनिज विभाग के विशेष अभियान में अवैध रूप से रेत और गिट्टी का परिवहन कर रहे छह ट्रैक्टर जब्त किए गए।
शिकायत प्राप्त होते ही कलेक्टर ने जिला खनिज विभाग को तत्काल जांच कर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देश मिलते ही जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान कोलबिर्रा और रुमगा क्षेत्र से रेत से भरे तीन ट्रैक्टर, खंता और पिपरिया क्षेत्र से रेत से भरे दो ट्रैक्टर तथा सधवानी क्षेत्र से गिट्टी से भरा एक ट्रैक्टर बिना वैध दस्तावेजों के खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया। सभी वाहनों को मौके पर जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
कानूनी शिकंजा, जुर्माना जमा होने के बाद ही मिलेगी रिहाई
खनिज विभाग ने सभी वाहन स्वामियों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अर्थदंड एवं समझौता राशि जमा किए बिना किसी भी जब्त वाहन को मुक्त नहीं किया जाएगा।
हर शिकायत पर होगी समयबद्ध कार्रवाई : कलेक्टर
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध नियमित अभियान चलाने तथा प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ शासन के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
जनभागीदारी से अवैध खनन पर लगेगी लगाम
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध रेत, गिट्टी अथवा अन्य खनिजों के उत्खनन या परिवहन की जानकारी मिले तो इसकी सूचना सीएम हेल्पलाइन 1076 या संबंधित विभाग को दें। प्रशासन का कहना है कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
इस कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी आदित्य मानकर, खनि निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक सतीश साहू की सक्रिय भूमिका रही। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले में अवैध खनिज कारोबार के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
धमतरी / शौर्यपथ / जिले की नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय (भा.पु.से.) ने सोमवार को विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। निवर्तमान पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार (भा.पु.से.) ने विभागीय प्रक्रिया के तहत उन्हें कार्यभार सौंपते हुए जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जनसुरक्षा, संवेदनशील प्रकरणों और चल रहे विशेष अभियानों की विस्तृत जानकारी दी।
पदभार ग्रहण के बाद पुलिस कार्यालय में आयोजित परिचय कार्यक्रम में जिले के राजपत्रित अधिकारी, एसडीओपी, डीएसपी सहित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने नई एसपी का स्वागत किया। इस दौरान सभी अधिकारियों ने उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा जनोन्मुखी पुलिसिंग को नई गति देने का भरोसा दिलाया।
नई पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आमजन की सुरक्षा, अपराधों पर त्वरित नियंत्रण, पीड़ितों को समयबद्ध न्याय और पुलिस-जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना धमतरी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को अनुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा भाव के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
कार्यालय की शाखाओं का किया निरीक्षण
पदभार संभालने के तुरंत बाद एसपी भावना पांडेय ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने शाखा प्रभारियों से लंबित प्रकरणों, अभिलेखों, कार्यालयीन व्यवस्था और कार्यप्रणाली की जानकारी ली। साथ ही लंबित मामलों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण, अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण और समयबद्ध कार्य निष्पादन के निर्देश दिए।
जनसुनवाई और संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर
एसपी ने कहा कि आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने तथा नागरिकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, ईमानदारी और उत्तरदायित्व ही धमतरी पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है, जिसके बल पर जिले में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पांडेय, नगर पुलिस अधीक्षक अभिषेक कुमार चतुर्वेदी, एसडीओपी कुरूद रागिनी मिश्रा, डीएसपी मोनिका मरावी, मीना साहू, रक्षित निरीक्षक दीपक शर्मा सहित पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जगदलपुर / शौर्यपथ / बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में जोर-शोर से उठाया गया। प्रश्न लगाने वाले विधायक लता उसेंडी ने विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय UGC मानकों से काफी पीछे है। जहां 223 शिक्षकों की जरूरत है, वहां केवल 29 शिक्षक ही कार्यरत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी कमी कब तक दूर की जाएगी और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान कौन भरेगा।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि विश्वविद्यालय में सैकड़ों शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है। विधायक ने पूछा कि जब वित्त विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है, तो नियुक्तियां अब तक क्यों नहीं की गईं।
सबसे अहम सवाल उन विषयों में भर्ती को लेकर उठाया गया, जिनमें फिलहाल एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है। विधायक ने इसे संसाधनों का दुरुपयोग बताते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इसके साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में खाली पड़ी सीटों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि हजारों सीटें खाली होना इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है।
बस्तर जैसे आदिवासी और पिछड़े क्षेत्र का जिक्र करते हुए विधायक लता उसेंडी ने कहा कि यहां उच्च शिक्षा की ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों के इसे लागू करना संभव नहीं है।
निष्कर्ष:विधानसभा में उठे इन सवालों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, खासकर बस्तर क्षेत्र में, गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अब निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
