
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत, दूरस्थ क्षेत्रों में वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था और त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियां दूर करने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने जिला अस्पतालों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सकों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा खराब चिकित्सा उपकरणों की समयबद्ध मरम्मत के निर्देश दिए। उन्होंने सुरक्षित संस्थागत प्रसव, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
डायलिसिस और चिकित्सा शिक्षा का होगा विस्तार
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं तथा 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हुए हैं। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या 7 हो गई है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां मरीजों को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। अस्पतालों में मृत्यु होने पर परिजनों को शव वाहन की सुविधा भी समय पर उपलब्ध कराई जाए।
त्योहारों में मिलावट पर होगी सख्ती
मुख्यमंत्री ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर मिठाई, दुग्ध उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी एवं अमानक खाद्य पदार्थों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए और नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।
बैठक में आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सिकल सेल और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और सेवाओं में संवेदनशीलता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव श्री विकास शील सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
लोरमी जनदर्शन में 520 से अधिक लोगों ने रखीं मांगें और समस्याएं, हितग्राही को तत्काल मिला श्रवण यंत्र
रायपुर, । उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोरमी रेस्ट हाउस में आयोजित जनदर्शन में 520 से अधिक आवेदकों की समस्याएं और मांगें सुनीं। उन्होंने संबंधित विभागों को प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई करने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता है।
जनदर्शन में ग्राम तुलसाघाट निवासी श्री लाल दास खाण्डेकर को उनकी मांग पर तत्काल श्रवण यंत्र प्रदान किया गया। वहीं, ग्राम लाखासार निवासी श्री हितेश साहू को आय प्रमाण पत्र दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जनदर्शन जैसे कार्यक्रमों से नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है तथा समस्याओं के निराकरण की दिशा में प्रभावी पहल की जा सकती है।
श्री साव ने क्षेत्र में विकास एवं निर्माण कार्यों को गति देने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने धान खरीदी का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को धान बेचने के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
इस अवसर पर मुंगेली जिला पंचायत के सीईओ श्री गोकुल रावटे, वनमंडलाधिकारी श्री तन्यम कौशिक, लोरमी एसडीएम श्रीमती रेखा चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन को लेकर गठित राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय समिति ने पुराने सर्किट हाउस में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों के साथ परामर्श बैठक की। समिति के सदस्यों ने विवाह-तलाक, उत्तराधिकार, विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर प्रतिनिधियों के सुझाव सुने। इस दौरान पीपीटी के माध्यम से संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।
बैठक में रानी दुर्गावती जागृति महिला मंडल की प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय को समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का अनुरोध किया।
दूसरे सत्र में मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, गोंडवाना और सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीयन, संपत्ति, वसीयत और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों पर अपने विचार रखे।
समिति में भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और श्रीमती ज्योतिरानी सिंह शामिल हैं। समिति सदस्यों ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि प्राप्त विचारों और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण कर समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में विचार किया जाएगा।
खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
रायपुर, / छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं जैसे पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश की इस सांस्कृतिक थाती को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया।
राज्यपाल श्री डेका ने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास व संस्कृति को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कला के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण बहुत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी बल दिया।
सांसद श्री संतोष पांडे ने राजपरिवार के योगदान को बताया अनुकरणीय
सांसद श्री संतोष पांडे ने कहा कि राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री की स्मृति में दिया गया दान अद्वितीय और अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जमीन दान करना भी कठिन है, लेकिन राजपरिवार की दूरदर्शी सोच ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने शिक्षा, कला-कौशल, परिश्रम और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने दिया। इस गरिमापूर्ण आयोजन में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दुर्ग, / प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत दुर्ग जिले में विभिन्न कारणों से अपात्र पाए गए 170 हितग्राहियों की सूची पर दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है। दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 23 अक्टूबर 2026 को शाम 5.30 बजे तक निर्धारित की गई है।
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार स्थायी प्रतीक्षा सूची, आवास प्लस सूची तथा मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण की सूची में शामिल ऐसे हितग्राहियों, जो विभिन्न कारणों से अपात्र हैं और जिन्हें योजना के नियमानुसार लाभान्वित किया जाना संभव नहीं है, उनके नाम संबंधित ग्रामसभा एवं जिला स्तरीय अपीलीय समिति के अनुमोदन के बाद विलोपित किए जाने हैं।
दुर्ग जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 की आवास प्लस सूची के 31 तथा मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण की सूची के 139, इस प्रकार कुल 170 अपात्र हितग्राहियों की सूची का प्रकाशन दावा-आपत्ति के लिए किया जा रहा है। संबंधित ग्रामसभाओं एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जिला स्तरीय अपीलीय समिति से अनुमोदन प्राप्त किया गया है। प्रकाशित सूची का अवलोकन संबंधित ग्राम पंचायत भवन, दुर्ग जिले की आधिकारिक वेबसाइट एचटीटीपीएसः//डीयूआरजीडाटसीजीडाटजीओभीडाटइन तथा जिला पंचायत दुर्ग की वेबसाइट जेडपीडीयूआरजीडाटकाम पर किया जा सकता है। हितग्राही अथवा संबंधित व्यक्ति अपना दावा-आपत्ति जिला पंचायत दुर्ग के प्रथम तल स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण शाखा या जिला पंचायत की आवक-जावक शाखा में प्रस्तुत कर सकते हैं। दावा-आपत्ति साधारण डाक, पंजीकृत डाक अथवा स्वयं उपस्थित होकर जमा की जा सकती है। निर्धारित समय के बाद प्राप्त किसी भी प्रकार के दावा-आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।
- दो लाख के ऋण से डेली नीड्स दुकान को आगे बढ़ाने की दिशा में बढ़ाए कदम
दुर्ग, / शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंदों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री सक्षम योजना से लाभान्वित दुर्ग निवासी श्रीमती कमलेश्वरी यादव भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। श्रीमती कमलेश्वरी यादव डेली नीड्स की दुकान का संचालन करती हैं। अपने व्यवसाय को और बेहतर बनाने तथा दुकान का विस्तार करने के उद्देश्य से उन्होंने मुख्यमंत्री सक्षम योजना के तहत ’दो लाख का ऋण’ प्राप्त किया है। इस आर्थिक सहायता से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और स्वरोजगार को नई मजबूती देने का अवसर मिला है। कमलेश्वरी यादव का प्रयास है कि उनकी दुकान का व्यवसाय और बेहतर हो तथा वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकें। शासन की इस पहल से उन्हें अपने सपनों को साकार करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। इस सहयोग के लिए श्रीमती कमलेश्वरी यादव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है। मुख्यमंत्री सक्षम योजना उनके लिए स्वरोजगार को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी है।
दुर्ग / न्यायालय से किसी आदेश या निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करना पक्षकारों और अधिवक्ताओं के लिए न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में दुर्ग न्यायालय में ई-टिकट जनरेशन एवं ई-प्रमाणित प्रतिलिपि (ई-सर्टिफाइड कॉपी) विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर की ई-कमेटी के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को नई तकनीकी प्रक्रिया से परिचित कराना नहीं, बल्कि न्यायालयीन सेवाओं को इस तरह विकसित करना था कि तकनीक का लाभ अंततः आम नागरिक, पक्षकार और अधिवक्ता तक पहुँचे।
कागजी प्रक्रिया से डिजिटल सुविधा की ओर
कार्यशाला में ई-टिकट तैयार करने की प्रक्रिया, ऑनलाइन सत्यापन तथा प्रमाणित प्रतिलिपि से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। उच्च न्यायालय के तकनीकी विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी देते हुए यह समझाया कि डिजिटल प्रणाली का प्रभावी उपयोग न्यायालयीन कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने और प्रतिलिपि संबंधी सेवाओं को सुगम करने में किस प्रकार सहायक हो सकता है। प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि कर्मचारियों को केवल प्रक्रिया की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनके व्यावहारिक प्रश्नों और कार्य के दौरान सामने आने वाली तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
एक सभागार से कई न्यायालयों तक पहुँचा प्रशिक्षण
जिला न्यायालय दुर्ग परिसर स्थित सभागार से जिला न्यायालय एवं कुटुम्ब न्यायालय दुर्ग के प्रतिलिपि अनुभाग के कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ सहित कुल 15 प्रतिभागियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहीं, पाटन, भिलाई-3 एवं धमधा स्थित बाह्य तालुका न्यायालयों के संबंधित कर्मचारी भी अपने-अपने न्यायालय परिसरों से ऑनलाइन जुड़े। इस व्यवस्था ने प्रशिक्षण को एक स्थान तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग न्यायालयों के कर्मचारियों को एक साझा डिजिटल मंच पर जोड़ने का अवसर दिया। इससे तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान और प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिली।
तकनीक का वास्तविक उद्देश्य नागरिक को सुविधा
प्रशिक्षण के दौरान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (कम्प्यूटरीकरण) / सी.पी.सी. की उपस्थिति में तकनीकी विशेषज्ञों ने कर्मचारियों की व्यावहारिक शंकाओं का समाधान किया। इससे प्रतिभागियों को ई-टिकट जनरेशन और ई-प्रमाणित प्रतिलिपि से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्टता से समझने का अवसर मिला। डिजिटल न्याय व्यवस्था की सफलता केवल नई तकनीक अपनाने में नहीं, बल्कि उसके माध्यम से नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाने में निहित है। इस दृष्टि से ऐसे प्रशिक्षण न्यायालयीन कर्मचारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ प्रतिलिपि संबंधी सेवाओं को अधिक सहज और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
घास भूमि पर कब्जे के बावजूद जारी निर्माण की शिकायत, शासकीय नाले का रास्ता बदलने से फसलों को नुकसान का आरोप
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में नागरिकों की समस्याएं सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन, सड़क निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार और आर्थिक सहायता सहित विभिन्न विषयों पर 84 आवेदन प्राप्त हुए।
हटाने के आदेश के बाद भी निर्माण जारी
पाटन तहसील के ग्राम बोदल में शासकीय घास भूमि पर अतिक्रमण कर मकान निर्माण किए जाने की शिकायत सामने आई। शिकायतकर्ता के अनुसार, अतिक्रमण के कारण आम रास्ते की चौड़ाई पहले के लगभग 20 फीट से घटकर करीब 3.4 मीटर रह गई है। दोनों पक्षों के दस्तावेजों और पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी होने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया और निर्माण दोबारा शुरू कर दिया गया। कलेक्टर ने तहसीलदार पाटन को त्वरित कार्रवाई कर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए।
मोबाइल टावर लगाने पर मोहल्लेवासियों की आपत्ति
भिलाई के वार्ड क्रमांक 25 स्थित हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के निवासियों ने छत पर पहले से मोबाइल टावर लगे होने के बावजूद दोबारा टावर लगाने के कार्य पर आपत्ति जताई। उन्होंने बिना अनुमति निर्माण किए जाने और विद्युतचुंबकीय विकिरण के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। कलेक्टर ने ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
नाले का रास्ता बदलने से खेतों में जलभराव
ग्राम पंचायत मेड़ेसरा, तहसील अहिवारा के ग्रामीण ने शासकीय नाले का प्राकृतिक मार्ग बदलकर संकरा करने और शेष भूमि पर खेती किए जाने की शिकायत की। उनका कहना है कि इससे बारिश और बाढ़ का पानी खेतों में भर रहा है, जिससे फसलों को नुकसान और खेतों की मेड़ों का कटाव हो रहा है। कलेक्टर ने तहसीलदार अहिवारा को मौके पर जांच एवं नाप कराकर अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
जनदर्शन में कलेक्टर ने अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।
माँ दुर्गा की आराधना के साथ नागरिकों को साइबर फ्रॉड से बचाव और बच्चों की शिक्षा के अधिकारों के प्रति किया जागरूक
दुर्ग / शौर्यपथ / नवरात्र केवल आस्था, उपासना और शक्ति की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना, सुरक्षा और जागरूकता का संदेश प्रसारित करने का भी अवसर है। इसी भावना को जनसेवा से जोड़ते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा नवरात्र के अवसर पर आयोजित दुर्गा पूजा पंडालों में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किए गए। इस अनूठी पहल के माध्यम से धार्मिक उत्सव में शामिल नागरिकों तक कानून, डिजिटल सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ पहुँचाई गई।
यह पहल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में संचालित की गई। इसका उद्देश्य आमजन को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता के प्रति जागरूक करना तथा ऐसे सार्वजनिक आयोजनों को जनहितकारी संदेशों के प्रसार का माध्यम बनाना रहा।
आस्था के साथ जागरूकता का संगम
नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में नागरिक, महिलाएँ, युवा और परिवार एकत्रित होते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने इस जनसहभागिता को विधिक जागरूकता से जोड़ते हुए लोगों के बीच पहुँचकर सरल भाषा में उपयोगी कानूनी जानकारियाँ साझा की। इन शिविरों की विशेषता यह रही कि विधिक साक्षरता को न्यायालय परिसर तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिकों के दैनिक जीवन और सामाजिक सहभागिता के बीच पहुँचाने का प्रयास किया गया। भक्ति के वातावरण में आयोजित इन जागरूकता गतिविधियों ने धार्मिक आयोजन को सामाजिक उत्तरदायित्व और नागरिक चेतना से जोड़ने का संदेश दिया।
साइबर फ्रॉड से बचावः डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा
शिविरों में नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों के प्रति सचेत किया गया। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी साझा करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने तथा डिजिटल माध्यमों से होने वाली अन्य धोखाधड़ी से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। लोगों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें, संदिग्ध संदेशों और लिंक से सावधान रहें तथा साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल संबंधित बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से सहायता लेने की दिशा में कदम उठाएँ। इस जागरूकता का उद्देश्य नागरिकों को केवल साइबर अपराध के प्रति सचेत करना ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया में अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना भी था।
शिक्षा का अधिकार और नाल्सा की नवीन शिक्षा योजना, 2026
कार्यक्रम में बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों से संबंधित विषयों को भी प्रमुखता दी गई। नागरिकों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की शिक्षा योजना, 2026 के संबंध में जानकारी देते हुए शिक्षा के अधिकार, बच्चों के हितों की सुरक्षा तथा जरूरतमंद पात्र व्यक्तियों तक विधिक सहायता पहुँचाने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला भी है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े अधिकारों और उपलब्ध सहायता के प्रति जागरूकता बढ़ाना सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
न्याय को नागरिकों के करीब लाने की पहल
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की यह पहल इस विचार को रेखांकित करती है कि विधिक जागरूकता के लिए नागरिकों को केवल संस्थागत केंद्रों तक आने की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है; जनसामान्य जहाँ एकत्रित होता है, वहाँ तक भी कानून और अधिकारों की जानकारी पहुँचाई जा सकती है। नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित इन शिविरों ने भक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और विधिक जागरूकता को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया। माँ दुर्गा की आराधना के बीच नागरिकों को साइबर सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा के अधिकारों के प्रति जागरूक करने की यह पहल जनहित में कानून को सरल, सुलभ और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।
‘Certificate of Excellence’ से सम्मानित हुआ जिला, कृषि विकास, फसल विविधीकरण और किसानों की आजीविका बढ़ाने के प्रयासों को मिली पहचान
रायपुर । प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जिले को ‘Certificate of Excellence’ प्रदान किया गया। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दंतेवाड़ा जिले के प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों को बधाई दी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दंतेवाड़ा को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में प्रशासनिक टीम, कृषि विभाग और मेहनतकश किसानों ने कृषि विकास, फसल विविधीकरण और आजीविका संवर्धन के लिए समर्पित प्रयास किए हैं। यह सम्मान उन्हीं प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को सशक्त बनाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के नेतृत्व में कृषि विकास को गति
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में जिले में कृषि विकास और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय सम्मान को कृषि क्षेत्र में सुधार, किसानों की प्रगति और योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों की उपलब्धि माना जा रहा है।
पिछड़े कृषि जिलों की स्थिति सुधारना है योजना का लक्ष्य
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और किसानों को बेहतर कृषि संसाधन उपलब्ध कराना है। योजना के तहत देश के 100 ऐसे कृषि जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां कृषि उत्पादकता, फसल सघनता और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से ऋण उपलब्धता में सुधार की आवश्यकता है।
इसके अंतर्गत खेतों तक सिंचाई सुविधाएं पहुंचाने, पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर भंडारण क्षमता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा किसानों को आसान और किफायती कृषि ऋण उपलब्ध कराने जैसे प्रयास शामिल हैं।
जनजातीय अंचल में किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
जनजातीय बहुल दंतेवाड़ा जिले के लिए यह सम्मान विशेष महत्व रखता है। कृषि क्षेत्र में बेहतर अवसरों के सृजन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण आजीविका मजबूत करने तथा किसानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
यह राष्ट्रीय सम्मान कृषि विभाग के अधिकारियों, मैदानी अमले, किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना है। साथ ही, जिले में कृषि को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा भी है।
हाईकोर्ट के आदेश पर विज्ञापन में संशोधन, कई विषयों में दिव्यांगता की पात्र श्रेणियों का हुआ विस्तार; आवेदन की तारीख अलग से होगी घोषित
रायपुर, 12 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2026 में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षक भर्ती के विस्तृत विज्ञापन में संशोधन करते हुए शुद्धि पत्र जारी किया है। इसके तहत विभिन्न विषयों के शिक्षक पदों के लिए पात्र दिव्यांगता की श्रेणियों का विस्तार किया गया है। इससे संशोधन के दायरे में आने वाले पात्र अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन का नया अवसर मिलेगा।
हाईकोर्ट के आदेश पर बदले भर्ती के प्रावधान
यह संशोधन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका क्रमांक WPS No. 6783 of 2026 (मीनाक्षी मंगलेकर एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य) में 9 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में किया गया है। इससे पहले स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय शालाओं में ई-संवर्ग और टी-संवर्ग के शिक्षक पदों के लिए 7 अगस्त 2026 को विस्तृत विज्ञापन जारी किया गया था।
इन विषयों में बढ़ी दिव्यांगता की पात्र श्रेणियां
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, समाज कल्याण विभाग की 11 सितंबर 2026 की संशोधित अधिसूचना के आधार पर हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और सामाजिक विज्ञान विषयों के शिक्षक पदों के लिए पूर्ण दृष्टिबाधिता (Blind) और सेरेब्रल पाल्सी को उपयुक्त दिव्यांगता श्रेणियों में शामिल किया गया है।
इसी तरह गणित विषय के लिए सेरेब्रल पाल्सी और कुष्ठ रोग से उपचारित दिव्यांगता तथा कृषि विषय के लिए सेरेब्रल पाल्सी को पात्र श्रेणियों में शामिल किया गया है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों का वितरण दृष्टिबाधिता (VI), श्रवण बाधिता (HI), अस्थिबाधिता (OI) और बहुदिव्यांगता (MD) की चार प्रमुख श्रेणियों के अनुसार किया गया है।
ई और टी संवर्ग में कुल 1654 पद
संशोधित विज्ञापन के अनुसार दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ई-संवर्ग में 868 और टी-संवर्ग में 786, कुल 1654 पदों का विषयवार विवरण इस प्रकार है:
विषय ई-संवर्ग टी-संवर्ग
हिंदी 109 141
संस्कृत 150 150
अंग्रेजी 319 185
गणित 135 115
सामाजिक विज्ञान 150 100
कृषि 5 95
कुल 868 786
आवेदन की तारीख का इंतजार
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, संशोधन के दायरे में आने वाले नए दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा अलग से घोषित की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें। 7 अगस्त 2026 को जारी मूल विज्ञापन की अन्य सभी शर्तें यथावत रहेंगी।
संशोधित विज्ञापन से संबंधित विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग और व्यापमं की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सूचनाओं से प्राप्त की जा सकती है।
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण राज्य सरकार का संकल्प है। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से छत्तीसगढ़ मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय रविवार को राजधानी रायपुर के देवपुरी में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में निर्मित 125 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल का शुभारंभ करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अस्पताल का उद्घाटन कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली तथा अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकीय टीम को शुभकामनाएं दीं।
गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाना मरीजों और उनके परिजनों के लिए आर्थिक बोझ के साथ कई व्यावहारिक कठिनाइयां भी पैदा करता है। सरकार का प्रयास है कि विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं प्रदेश में ही उपलब्ध हों, जिससे दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम हो और छत्तीसगढ़ के साथ आसपास के राज्यों के मरीजों को भी लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि आधुनिक अस्पतालों के विस्तार से गुणवत्तापूर्ण उपचार के साथ चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
नवा रायपुर में 200 एकड़ की मेडिसिटी
मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है। इससे सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, मेडिकल टूरिज्म और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े, बल्कि दूसरे राज्यों के मरीज भी यहां उपचार के लिए आएं।
आयुष्मान भारत से गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। राज्य में जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। दूरस्थ वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों में भी चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति के उपचार में बाधा नहीं बनना चाहिए।
केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य सुखी और समृद्ध जीवन का आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही हैं। प्रथमेश हॉस्पिटल जैसी आधुनिक संस्थाओं से प्रदेशवासियों को बेहतर उपचार की सुविधा मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने के साथ निजी क्षेत्र में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सेवा, संवेदनशीलता और गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक मोतीलाल साहू, प्रथमेश हॉस्पिटल ग्रुप के डॉ. राजीव साहू, डॉ. सारिका साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, चिकित्सक और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
स्वच्छता, जल संरक्षण, गाजर घास उन्मूलन और पॉलिथीन मुक्त अभियान से जुड़े प्रयास; करीब 400 करंज पौधों को वृक्ष बनाने में निभाई अहम भूमिका
दल्ली राजहरा/बालोद। पर्यावरण संरक्षण को जीवन का उद्देश्य बनाकर पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू पिछले 23-24 वर्षों से निरंतर जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं। स्वच्छता, जल संरक्षण, गाजर घास उन्मूलन, पॉलिथीन मुक्त अभियान और वृक्षारोपण जैसे कार्यों के माध्यम से वे लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके अभियान में सामाजिक संगठनों, युवाओं और बच्चों की भी भागीदारी रही है।
प्रदीप साहू द्वारा स्वच्छता अभियान, जल बचाओ, गाजर घास उन्मूलन, पॉलिथीन नष्ट करो, पर्यावरण संरक्षण तथा बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ जैसे सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। उनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करने के साथ पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।
साइकिल यात्राओं से देशभर में पहुंचाया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पर्यावरण जागरूकता को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रदीप साहू और उनकी टीम ने कई लंबी साइकिल यात्राएं की हैं। इन यात्राओं में संपूर्ण बालोद जिला और छत्तीसगढ़ के अलावा रायपुर से दिल्ली, दुर्ग से नेपाल की राजधानी काठमांडू, काठमांडू से रायपुर तथा रायपुर से कन्याकुमारी, कन्याकुमारी से अमृतसर और बाघा बॉर्डर तक की यात्राएं शामिल हैं।
इन अभियानों के दौरान लोगों को स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के प्रति जागरूक किया गया। प्रदीप साहू का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल मंचों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांवों, शहरों, स्कूलों, कॉलेजों और आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।
400 करंज पौधों को संरक्षित कर बनाया हरित धरोहर
प्रदीप साहू और उनकी टीम ने पर्यावरण संरक्षण के तहत लगभग 400 करंज पौधों का रोपण किया और उनकी देखभाल पर भी ध्यान दिया। आज इनमें से अनेक पौधे बड़े होकर वृक्ष बन चुके हैं। यह पहल बताती है कि पौधारोपण के साथ नियमित देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है।
प्रदीप साहू का कहना है कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भी जागरूकता
प्रदीप साहू धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजनों में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। वे लोगों से पानी बचाने, स्वच्छता बनाए रखने, पौधे लगाने और प्लास्टिक-पॉलिथीन का अनावश्यक उपयोग रोकने की अपील करते हैं। उनका प्रयास है कि सामाजिक और धार्मिक आयोजन भी पर्यावरण के अनुकूल बनें।
बच्चों और युवाओं को कर रहे प्रेरित
दो दशक से अधिक समय से जारी इन अभियानों से बच्चों और युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है। प्रदीप साहू का मानना है कि बचपन से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जाए, तो आने वाली पीढ़ियां पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभा सकती हैं।
जनभागीदारी से ही सुरक्षित होगा भविष्य
प्रदीप साहू ने कहा कि बढ़ता प्रदूषण, जल संकट, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग, पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन गंभीर चुनौतियां हैं। इनका समाधान केवल सरकार या किसी एक संस्था के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने लोगों से एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने, पानी बचाने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की।
प्रदीप साहू और उनकी टीम ने पर्यावरण संरक्षण अभियान को भविष्य में भी निरंतर जारी रखने और इसका दायरा बढ़ाने का संकल्प लिया है। उनका संदेश स्पष्ट है कि प्रकृति की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है और आज किए गए प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, साफ पानी तथा हरित वातावरण दे सकते हैं।
“प्रकृति बचेगी, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। आइए, पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।”
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
