October 24, 2026
Hindi Hindi▼

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    Uncategorised

    Uncategorised (35846)

    अन्य ख़बर

    अन्य ख़बर (5877)

    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत, दूरस्थ क्षेत्रों में वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था और त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश

    रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियां दूर करने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने जिला अस्पतालों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सकों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा खराब चिकित्सा उपकरणों की समयबद्ध मरम्मत के निर्देश दिए। उन्होंने सुरक्षित संस्थागत प्रसव, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

    डायलिसिस और चिकित्सा शिक्षा का होगा विस्तार

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं तथा 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हुए हैं। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या 7 हो गई है।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां मरीजों को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। अस्पतालों में मृत्यु होने पर परिजनों को शव वाहन की सुविधा भी समय पर उपलब्ध कराई जाए।

    त्योहारों में मिलावट पर होगी सख्ती

    मुख्यमंत्री ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर मिठाई, दुग्ध उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी एवं अमानक खाद्य पदार्थों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए और नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।

    बैठक में आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सिकल सेल और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और सेवाओं में संवेदनशीलता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव श्री विकास शील सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    लोरमी जनदर्शन में 520 से अधिक लोगों ने रखीं मांगें और समस्याएं, हितग्राही को तत्काल मिला श्रवण यंत्र

    रायपुर, । उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोरमी रेस्ट हाउस में आयोजित जनदर्शन में 520 से अधिक आवेदकों की समस्याएं और मांगें सुनीं। उन्होंने संबंधित विभागों को प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई करने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता है।

    जनदर्शन में ग्राम तुलसाघाट निवासी श्री लाल दास खाण्डेकर को उनकी मांग पर तत्काल श्रवण यंत्र प्रदान किया गया। वहीं, ग्राम लाखासार निवासी श्री हितेश साहू को आय प्रमाण पत्र दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जनदर्शन जैसे कार्यक्रमों से नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है तथा समस्याओं के निराकरण की दिशा में प्रभावी पहल की जा सकती है।

    श्री साव ने क्षेत्र में विकास एवं निर्माण कार्यों को गति देने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने धान खरीदी का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को धान बेचने के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

    इस अवसर पर मुंगेली जिला पंचायत के सीईओ श्री गोकुल रावटे, वनमंडलाधिकारी श्री तन्यम कौशिक, लोरमी एसडीएम श्रीमती रेखा चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन को लेकर गठित राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय समिति ने पुराने सर्किट हाउस में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों के साथ परामर्श बैठक की। समिति के सदस्यों ने विवाह-तलाक, उत्तराधिकार, विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर प्रतिनिधियों के सुझाव सुने। इस दौरान पीपीटी के माध्यम से संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।

    बैठक में रानी दुर्गावती जागृति महिला मंडल की प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय को समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का अनुरोध किया।

    दूसरे सत्र में मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, गोंडवाना और सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीयन, संपत्ति, वसीयत और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों पर अपने विचार रखे।

    समिति में भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और श्रीमती ज्योतिरानी सिंह शामिल हैं। समिति सदस्यों ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि प्राप्त विचारों और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण कर समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में विचार किया जाएगा।

    खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं जैसे पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश की इस सांस्कृतिक थाती को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया।

    राज्यपाल श्री डेका ने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास व संस्कृति को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कला के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण बहुत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी बल दिया।

    सांसद श्री संतोष पांडे ने राजपरिवार के योगदान को बताया अनुकरणीय

    सांसद श्री संतोष पांडे ने कहा कि राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री की स्मृति में दिया गया दान अद्वितीय और अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जमीन दान करना भी कठिन है, लेकिन राजपरिवार की दूरदर्शी सोच ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने शिक्षा, कला-कौशल, परिश्रम और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया।

    कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने दिया। इस गरिमापूर्ण आयोजन में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

    दुर्ग, / प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत दुर्ग जिले में विभिन्न कारणों से अपात्र पाए गए 170 हितग्राहियों की सूची पर दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है। दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 23 अक्टूबर 2026 को शाम 5.30 बजे तक निर्धारित की गई है।
    जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार स्थायी प्रतीक्षा सूची, आवास प्लस सूची तथा मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण की सूची में शामिल ऐसे हितग्राहियों, जो विभिन्न कारणों से अपात्र हैं और जिन्हें योजना के नियमानुसार लाभान्वित किया जाना संभव नहीं है, उनके नाम संबंधित ग्रामसभा एवं जिला स्तरीय अपीलीय समिति के अनुमोदन के बाद विलोपित किए जाने हैं।
    दुर्ग जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 की आवास प्लस सूची के 31 तथा मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण की सूची के 139, इस प्रकार कुल 170 अपात्र हितग्राहियों की सूची का प्रकाशन दावा-आपत्ति के लिए किया जा रहा है। संबंधित ग्रामसभाओं एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जिला स्तरीय अपीलीय समिति से अनुमोदन प्राप्त किया गया है। प्रकाशित सूची का अवलोकन संबंधित ग्राम पंचायत भवन, दुर्ग जिले की आधिकारिक वेबसाइट एचटीटीपीएसः//डीयूआरजीडाटसीजीडाटजीओभीडाटइन तथा जिला पंचायत दुर्ग की वेबसाइट जेडपीडीयूआरजीडाटकाम पर किया जा सकता है। हितग्राही अथवा संबंधित व्यक्ति अपना दावा-आपत्ति जिला पंचायत दुर्ग के प्रथम तल स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण शाखा या जिला पंचायत की आवक-जावक शाखा में प्रस्तुत कर सकते हैं। दावा-आपत्ति साधारण डाक, पंजीकृत डाक अथवा स्वयं उपस्थित होकर जमा की जा सकती है। निर्धारित समय के बाद प्राप्त किसी भी प्रकार के दावा-आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।

    - दो लाख के ऋण से डेली नीड्स दुकान को आगे बढ़ाने की दिशा में बढ़ाए कदम

    दुर्ग, / शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंदों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री सक्षम योजना से लाभान्वित दुर्ग निवासी श्रीमती कमलेश्वरी यादव भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। श्रीमती कमलेश्वरी यादव डेली नीड्स की दुकान का संचालन करती हैं। अपने व्यवसाय को और बेहतर बनाने तथा दुकान का विस्तार करने के उद्देश्य से उन्होंने मुख्यमंत्री सक्षम योजना के तहत ’दो लाख का ऋण’ प्राप्त किया है। इस आर्थिक सहायता से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और स्वरोजगार को नई मजबूती देने का अवसर मिला है। कमलेश्वरी यादव का प्रयास है कि उनकी दुकान का व्यवसाय और बेहतर हो तथा वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकें। शासन की इस पहल से उन्हें अपने सपनों को साकार करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। इस सहयोग के लिए श्रीमती कमलेश्वरी यादव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है। मुख्यमंत्री सक्षम योजना उनके लिए स्वरोजगार को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी है।


    दुर्ग / न्यायालय से किसी आदेश या निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करना पक्षकारों और अधिवक्ताओं के लिए न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में दुर्ग न्यायालय में ई-टिकट जनरेशन एवं ई-प्रमाणित प्रतिलिपि (ई-सर्टिफाइड कॉपी) विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
    माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर की ई-कमेटी के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को नई तकनीकी प्रक्रिया से परिचित कराना नहीं, बल्कि न्यायालयीन सेवाओं को इस तरह विकसित करना था कि तकनीक का लाभ अंततः आम नागरिक, पक्षकार और अधिवक्ता तक पहुँचे।

    कागजी प्रक्रिया से डिजिटल सुविधा की ओर

    कार्यशाला में ई-टिकट तैयार करने की प्रक्रिया, ऑनलाइन सत्यापन तथा प्रमाणित प्रतिलिपि से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। उच्च न्यायालय के तकनीकी विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी देते हुए यह समझाया कि डिजिटल प्रणाली का प्रभावी उपयोग न्यायालयीन कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने और प्रतिलिपि संबंधी सेवाओं को सुगम करने में किस प्रकार सहायक हो सकता है। प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि कर्मचारियों को केवल प्रक्रिया की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनके व्यावहारिक प्रश्नों और कार्य के दौरान सामने आने वाली तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

    एक सभागार से कई न्यायालयों तक पहुँचा प्रशिक्षण

    जिला न्यायालय दुर्ग परिसर स्थित सभागार से जिला न्यायालय एवं कुटुम्ब न्यायालय दुर्ग के प्रतिलिपि अनुभाग के कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ सहित कुल 15 प्रतिभागियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहीं, पाटन, भिलाई-3 एवं धमधा स्थित बाह्य तालुका न्यायालयों के संबंधित कर्मचारी भी अपने-अपने न्यायालय परिसरों से ऑनलाइन जुड़े। इस व्यवस्था ने प्रशिक्षण को एक स्थान तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग न्यायालयों के कर्मचारियों को एक साझा डिजिटल मंच पर जोड़ने का अवसर दिया। इससे तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान और प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिली।

    तकनीक का वास्तविक उद्देश्य नागरिक को सुविधा

    प्रशिक्षण के दौरान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (कम्प्यूटरीकरण) / सी.पी.सी. की उपस्थिति में तकनीकी विशेषज्ञों ने कर्मचारियों की व्यावहारिक शंकाओं का समाधान किया। इससे प्रतिभागियों को ई-टिकट जनरेशन और ई-प्रमाणित प्रतिलिपि से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्टता से समझने का अवसर मिला। डिजिटल न्याय व्यवस्था की सफलता केवल नई तकनीक अपनाने में नहीं, बल्कि उसके माध्यम से नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाने में निहित है। इस दृष्टि से ऐसे प्रशिक्षण न्यायालयीन कर्मचारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ प्रतिलिपि संबंधी सेवाओं को अधिक सहज और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

    घास भूमि पर कब्जे के बावजूद जारी निर्माण की शिकायत, शासकीय नाले का रास्ता बदलने से फसलों को नुकसान का आरोप

      दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में नागरिकों की समस्याएं सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन, सड़क निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार और आर्थिक सहायता सहित विभिन्न विषयों पर 84 आवेदन प्राप्त हुए।

    हटाने के आदेश के बाद भी निर्माण जारी

    पाटन तहसील के ग्राम बोदल में शासकीय घास भूमि पर अतिक्रमण कर मकान निर्माण किए जाने की शिकायत सामने आई। शिकायतकर्ता के अनुसार, अतिक्रमण के कारण आम रास्ते की चौड़ाई पहले के लगभग 20 फीट से घटकर करीब 3.4 मीटर रह गई है। दोनों पक्षों के दस्तावेजों और पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी होने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया और निर्माण दोबारा शुरू कर दिया गया। कलेक्टर ने तहसीलदार पाटन को त्वरित कार्रवाई कर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए।

    मोबाइल टावर लगाने पर मोहल्लेवासियों की आपत्ति

    भिलाई के वार्ड क्रमांक 25 स्थित हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के निवासियों ने छत पर पहले से मोबाइल टावर लगे होने के बावजूद दोबारा टावर लगाने के कार्य पर आपत्ति जताई। उन्होंने बिना अनुमति निर्माण किए जाने और विद्युतचुंबकीय विकिरण के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। कलेक्टर ने ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

    नाले का रास्ता बदलने से खेतों में जलभराव

    ग्राम पंचायत मेड़ेसरा, तहसील अहिवारा के ग्रामीण ने शासकीय नाले का प्राकृतिक मार्ग बदलकर संकरा करने और शेष भूमि पर खेती किए जाने की शिकायत की। उनका कहना है कि इससे बारिश और बाढ़ का पानी खेतों में भर रहा है, जिससे फसलों को नुकसान और खेतों की मेड़ों का कटाव हो रहा है। कलेक्टर ने तहसीलदार अहिवारा को मौके पर जांच एवं नाप कराकर अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    जनदर्शन में कलेक्टर ने अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

    माँ दुर्गा की आराधना के साथ नागरिकों को साइबर फ्रॉड से बचाव और बच्चों की शिक्षा के अधिकारों के प्रति किया जागरूक

      दुर्ग / शौर्यपथ / नवरात्र केवल आस्था, उपासना और शक्ति की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना, सुरक्षा और जागरूकता का संदेश प्रसारित करने का भी अवसर है। इसी भावना को जनसेवा से जोड़ते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा नवरात्र के अवसर पर आयोजित दुर्गा पूजा पंडालों में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किए गए। इस अनूठी पहल के माध्यम से धार्मिक उत्सव में शामिल नागरिकों तक कानून, डिजिटल सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ पहुँचाई गई।
    यह पहल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में संचालित की गई। इसका उद्देश्य आमजन को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता के प्रति जागरूक करना तथा ऐसे सार्वजनिक आयोजनों को जनहितकारी संदेशों के प्रसार का माध्यम बनाना रहा।
    आस्था के साथ जागरूकता का संगम
    नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में नागरिक, महिलाएँ, युवा और परिवार एकत्रित होते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने इस जनसहभागिता को विधिक जागरूकता से जोड़ते हुए लोगों के बीच पहुँचकर सरल भाषा में उपयोगी कानूनी जानकारियाँ साझा की। इन शिविरों की विशेषता यह रही कि विधिक साक्षरता को न्यायालय परिसर तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिकों के दैनिक जीवन और सामाजिक सहभागिता के बीच पहुँचाने का प्रयास किया गया। भक्ति के वातावरण में आयोजित इन जागरूकता गतिविधियों ने धार्मिक आयोजन को सामाजिक उत्तरदायित्व और नागरिक चेतना से जोड़ने का संदेश दिया।

    साइबर फ्रॉड से बचावः डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा

    शिविरों में नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों के प्रति सचेत किया गया। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी साझा करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने तथा डिजिटल माध्यमों से होने वाली अन्य धोखाधड़ी से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। लोगों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें, संदिग्ध संदेशों और लिंक से सावधान रहें तथा साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल संबंधित बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से सहायता लेने की दिशा में कदम उठाएँ। इस जागरूकता का उद्देश्य नागरिकों को केवल साइबर अपराध के प्रति सचेत करना ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया में अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना भी था।

    शिक्षा का अधिकार और नाल्सा की नवीन शिक्षा योजना, 2026

    कार्यक्रम में बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों से संबंधित विषयों को भी प्रमुखता दी गई। नागरिकों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की शिक्षा योजना, 2026 के संबंध में जानकारी देते हुए शिक्षा के अधिकार, बच्चों के हितों की सुरक्षा तथा जरूरतमंद पात्र व्यक्तियों तक विधिक सहायता पहुँचाने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला भी है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े अधिकारों और उपलब्ध सहायता के प्रति जागरूकता बढ़ाना सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    न्याय को नागरिकों के करीब लाने की पहल

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की यह पहल इस विचार को रेखांकित करती है कि विधिक जागरूकता के लिए नागरिकों को केवल संस्थागत केंद्रों तक आने की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है; जनसामान्य जहाँ एकत्रित होता है, वहाँ तक भी कानून और अधिकारों की जानकारी पहुँचाई जा सकती है। नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित इन शिविरों ने भक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और विधिक जागरूकता को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया। माँ दुर्गा की आराधना के बीच नागरिकों को साइबर सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा के अधिकारों के प्रति जागरूक करने की यह पहल जनहित में कानून को सरल, सुलभ और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

    बीएसपी में चोरी असंभव बताने वाले ट्रक-ट्रेलर एसोसिएशन के महासचिव के बयान से उठे नए सवाल • विधायक रिकेश सेन का दावा—पांडे कबाड़ी के गोदाम में माल ठिकाने लगाने की…
    Page 7 of 2561

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision