October 24, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    मोबाइल लोकेशन ने खोला लापता महिला का सुराग, सरकंडा पुलिस ने सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंपा

    लोकेशन-बिलासपुर | रिपोर्टर-दिव्यांग सोनी

    बिलासपुर। बच्चे को ट्यूशन छोड़ने घर से निकली 32 वर्षीय महिला आठ दिन बाद पंजाब के अमृतसर में मिली। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित मोपका की शिवम वाटिका कॉलोनी से लापता श्रीमती हिमांशु कुर्रे की तलाश में जुटी सरकंडा पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उनका पता लगाया। पुलिस टीम अमृतसर पहुंची और महिला को सकुशल बरामद कर बिलासपुर लाई। बयान दर्ज करने के बाद उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। महिला के बयान में पति से विवाद के बाद ट्रेन से अमृतसर पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि, विवाद की परिस्थितियों और घर से निकलने के बाद के घटनाक्रम को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    बच्चे को ट्यूशन छोड़ने निकलीं, फिर नहीं लौटीं

    जानकारी के अनुसार, श्रीमती हिमांशु कुर्रे, पति हरीश कुर्रे, निवासी शिवम वाटिका कॉलोनी, मोपका, 2 अक्टूबर 2026 की शाम करीब पांच बजे अपने बच्चे को ट्यूशन छोड़ने के लिए घर से निकली थीं। इसके बाद वह वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उनका मोबाइल फोन भी बंद मिलने से परिवार की चिंता बढ़ गई। अंततः परिजनों ने सरकंडा थाना पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू की।

    मोबाइल लोकेशन से मिला पंजाब का सुराग

    महिला की तलाश के दौरान पुलिस को मोबाइल लोकेशन के जरिए उनके अमृतसर में होने का पता चला। इस अहम सुराग के आधार पर सरकंडा थाने से पुलिस की एक टीम पंजाब भेजी गई। टीम ने लोकेशन के आधार पर महिला को ट्रेस किया और उन्हें सकुशल बरामद कर लिया। इसके बाद पुलिस उन्हें बिलासपुर लेकर लौटी।

    पति से विवाद के बाद ट्रेन से पहुंचीं अमृतसर

    पुलिस के अनुसार, बिलासपुर लाने के बाद महिला का बयान दर्ज किया गया। इसमें पति से विवाद होने के बाद घर से निकलने और ट्रेन से अमृतसर पहुंचने की बात सामने आई। हालांकि, विवाद किस बात को लेकर हुआ था और महिला ने अमृतसर जाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। आठ दिनों से उनकी तलाश में परेशान परिवार ने महिला के सकुशल मिलने पर राहत की सांस ली।

    रेलवे में कार्यरत हैं पति, पिता पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त

    बताया गया है कि महिला के पति हरीश कुर्रे रेलवे में कार्यरत हैं, जबकि उनके पिता पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। महिला के अचानक लापता होने के बाद परिजन लगातार उनकी तलाश को लेकर चिंतित थे। मोबाइल लोकेशन के आधार पर अमृतसर तक पहुंची पुलिस की कार्रवाई के बाद महिला के सकुशल मिलने से परिवार को राहत मिली है।

    थाना प्रभारी ने की पुष्टि

    सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार आर्य ने महिला की अमृतसर से सकुशल बरामदगी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर पुलिस टीम ने महिला को खोज निकाला। बिलासपुर लाने के बाद उनका बयान दर्ज किया गया और उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। फिलहाल महिला की तलाश पूरी हो गई है। उनके घर छोड़ने और अमृतसर पहुंचने की परिस्थितियों से जुड़े तथ्यों के लिए पुलिस में दर्ज बयान ही उपलब्ध जानकारी का आधार है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई

    गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का मिलेगा बेहतर प्रतिफल- सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप

    गन्ना बोनस की गणना का आधार ₹355 से बढ़ाकर ₹425 प्रति क्विंटल किया गया

    रायपुर, /छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों को नवरात्रि से पहले बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गन्ना बोनस की गणना का आधार ₹355 से बढ़ाकर ₹425 प्रति क्विंटल कर दिया है। इस निर्णय से पेराई सत्र 2025–26 में प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों को गन्ना आपूर्ति करने वाले 31,022 किसानों को लगभग ₹51.09 करोड़ की बोनस राशि प्राप्त होगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर प्रदेश के गन्ना किसानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बोनस की बढ़ी हुई राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने और आगामी फसल की बेहतर तैयारी में मदद मिलेगी। यह निर्णय प्रदेश में गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ सहकारी शक्कर कारखानों से जुड़े किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा।

    पेराई सत्र 2025–26 के लिए बोनस गणना में एफआरपी ₹329.05 प्रति क्विंटल का आधार लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार ₹425 में से एफआरपी घटाने पर किसानों को ₹95.95 प्रति क्विंटल की दर से बोनस मिलेगा।

    इस निर्णय के तहत भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा के 14,961 किसानों को लगभग ₹24.55 करोड़ तथा सरदार पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया के 8,049 किसानों को लगभग ₹11.68 करोड़ की बोनस राशि मिलेगी। इसी प्रकार महामाया सहकारी शक्कर कारखाना, केरता के 7,250 किसानों को लगभग ₹11.35 करोड़ और दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, बालोद के 762 किसानों को लगभग ₹3.52 करोड़ का बोनस प्राप्त होगा।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम में कहा—महिलाएं योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, विकास की नेतृत्वकर्ता बनें; महतारी वंदन की 32 किस्तों में ₹20,700 करोड़ से अधिक की सहायता, बस्तर में 421 बंद स्कूल फिर शुरू

    रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माताएं, बहनें और बेटियां प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। महिला सशक्तिकरण विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना है।

    मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर में हिंदी खबर द्वारा आयोजित शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व में भागीदारी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

    महतारी वंदन से 68 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल

    मुख्यमंत्री ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। अब तक 32 किस्तों में ₹20,700 करोड़ से अधिक की राशि सीधे खातों में अंतरित की जा चुकी है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है। पात्र महिलाओं को योजना का लाभ दिलाने के लिए तकनीकी और दस्तावेज संबंधी त्रुटियों का समाधान भी किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्थायी आजीविका और उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों के तहत 7.82 लाख के लक्ष्य के मुकाबले प्रदेश की 14 लाख ग्रामीण महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। बिहान योजना के माध्यम से 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़े हैं। इन समूहों को कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मशरूम उत्पादन, हस्तशिल्प, लघु वनोपज और वस्त्र निर्माण जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

    महिला समूहों की गतिविधियों के लिए प्रदेश में 481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 39.73 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए गए हैं। रानी दुर्गावती योजना के लिए ₹15 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके तहत पात्र बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1.50 लाख की सहायता का प्रावधान है।

    बस्तर में बेटियों की शिक्षा को नई दिशा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल हिंसा के कारण लंबे समय तक बंद रहे 421 स्कूल दोबारा शुरू किए गए हैं। बस्तर में स्कूलों का फिर से खुलना शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं, ताकि आदिवासी अंचलों की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से दूर न जाना पड़े।

    महिला और बाल स्वास्थ्य पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 2.49 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को 6.21 लाख वय-वंदना कार्ड दिए गए हैं। गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण तथा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

    तकनीक, उद्योग और खेलों में बेटियों के लिए नए अवसर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चिकित्सा, शिक्षा, खाद्य प्रसंस्करण और आधुनिक उद्योगों से जोड़ना जरूरी है। महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व में बराबर भागीदारी से ही सशक्त समाज का निर्माण होगा।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां खेलों में भी प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी पद पर पदोन्नति के साथ ₹30 लाख की सम्मान राशि, जबकि कोरबा की संजू देवी रावत को ₹50 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। किरण पिस्दा का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन भी प्रदेश के लिए गौरव की बात है। बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों से ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्र की बेटियों को प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में खेल उत्कर्ष मिशन के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

    मां के संघर्ष से सीखी सेवा और संवेदनशीलता

    मुख्यमंत्री ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि साधारण किसान परिवार में जन्म लेने और बचपन में पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने अपनी माता को कठिन परिस्थितियों में परिवार संभालते और बच्चों को संस्कार देते देखा। उन्होंने कहा कि मां के संघर्ष, सेवाभाव और समर्पण ने उन्हें जनसेवा तथा जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा दी।

    नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया है। सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवाओं और बेटियों से बड़े सपने देखने, शिक्षा एवं कौशल विकास पर ध्यान देने और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, बेटियां शिक्षित और सक्षम तथा मातृशक्ति विकास की नेतृत्वकर्ता बनेगी, तभी विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।

    कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, हिंदी खबर की ब्यूरो हेड निशा द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।

    89.53 लाख रुपये की लागत से सिकरिमा-विदुरपुर सड़क का मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण
    2.5 किलोमीटर लंबी सड़क के डामरीकरण से ग्रामीणों को मिली राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच होगी आसान
    ओडिशा सीमा से लगे गांवों में आवागमन होगा सुगम, ग्रामीण विकास और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी गति

    रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ एवं सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को मजबूत करने और आवागमन की सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सिकरिमा से विदुरपुर तक 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क का मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य 89 लाख 53 हजार रुपये की लागत से पूर्ण कर लिया गया है। सड़क के डामरीकरण से क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिली है। विशेष रूप से बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियां दूर होने के साथ अब ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा।

    सिकरिमा से विदुरपुर मार्ग की स्थिति खराब होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। विशेषकर बारिश के मौसम में सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती थी। इसका असर विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों और स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों पर पड़ता था। अब सड़क का मरम्मत एवं डामरीकरण कार्य पूर्ण होने से ग्रामीणों को सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

    ओडिशा सीमा से लगे गांवों में सड़क संपर्क हुआ मजबूत

    जशपुर जिले का सिकरिमा-विदुरपुर मार्ग ओडिशा राज्य की सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। सड़क के जीर्णोद्धार से सीमावर्ती गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क बेहतर होगा। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।

    बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने तथा ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए आवागमन करने में भी सहूलियत होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    बरसात में आवागमन की परेशानी से मिलेगी राहत

    सिकरिमा से विदुरपुर तक सड़क का डामरीकरण कार्य पूर्ण होने से ग्रामीणों को विशेष रूप से बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। पहले सड़क की खराब स्थिति के कारण दोपहिया और अन्य वाहनों के आवागमन में कठिनाई होती थी। अब सड़क की स्थिति बेहतर होने से विद्यार्थियों को विद्यालय आने-जाने, मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने तथा ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन करने में सुविधा होगी।

    लंबे समय से प्रतीक्षित सड़क का कार्य पूर्ण होने पर ग्रामीणों में खुशी

    सिकरिमा से विदुरपुर तक सड़क का मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में प्रसन्नता है। लंबे समय से बेहतर सड़क सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों को अब आवागमन में सहूलियत मिलेगी। सड़क के बेहतर होने से गांवों के बीच संपर्क मजबूत हुआ है और दैनिक जरूरतों के लिए आवाजाही आसान होगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ, ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सिकरिमा-विदुरपुर मार्ग का जीर्णोद्धार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीणों के दैनिक जीवन में सुविधा बढ़ने के साथ सीमावर्ती क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

    सरगुजा की बेटी आंचल राजवाड़े को मिला योजना का लाभ, एलआईसी के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त
    18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर निर्धारित राशि से उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मिलेगी मदद
    बेटी के भविष्य की चिंता हुई कम, आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलने से मां मानती राजवाड़े के चेहरे पर आई खुशी

    रायपुर / हर मां का सपना होता है कि उसकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे, अपने पैरों पर खड़ी हो और जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे। लेकिन आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए बेटियों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों को लेकर चिंता बनी रहती है। छत्तीसगढ़ शासन की नोनी सुरक्षा योजना ऐसे परिवारों को बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी श्रीमती मानती राजवाड़े की बेटी आंचल राजवाड़े को भी इस योजना का लाभ मिला है। आंचल के नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है, जिससे परिवार को बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है।

    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत आंचल की यह कहानी बताती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नोनी सुरक्षा योजना से मिलने वाला लाभ परिवारों को बेटियों की उच्च शिक्षा और आगे की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहारा उपलब्ध कराने की दिशा में उपयोगी साबित हो रहा है।

    बेटी की अच्छी शिक्षा का सपना, नोनी सुरक्षा योजना से मिला भरोसा

    मानती राजवाड़े बताती हैं कि वे अपनी बेटी आंचल को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहती हैं, ताकि वह पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बन सके और अपने सपनों को पूरा कर सके। हर माता-पिता की तरह वे भी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए प्रयासरत हैं।

    बेटी की पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों को लेकर उनके मन में चिंता रहती थी। ऐसे में नोनी सुरक्षा योजना का लाभ मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

    योजना के अंतर्गत आंचल के नाम पर एलआईसी के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है। इससे परिवार को विश्वास मिला है कि बेटी के बड़े होने पर उसकी शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध होगा।

    मानती का कहना है कि बेटी के भविष्य के लिए अभी से आर्थिक सहायता की व्यवस्था होना उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण है।

    18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर मिलेगी निर्धारित राशि, उच्च शिक्षा में होगी सहायक

    नोनी सुरक्षा योजना के अंतर्गत आंचल राजवाड़े को भविष्य में आर्थिक सहायता का लाभ मिलेगा। योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर मिलने वाली राशि का उपयोग उसकी आगे की शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।

    मानती राजवाड़े बताती हैं कि वे चाहती हैं कि उनकी बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपने जीवन में आगे बढ़े। योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग वे आंचल की पढ़ाई और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में करना चाहती हैं।

    उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च परिवारों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बेटी के नाम पर आर्थिक सहायता का प्रावधान होने से भविष्य की तैयारियों में मदद मिलेगी।

    बेटी के सुरक्षित भविष्य से मां को मिला सुकून

    मानती राजवाड़े के लिए नोनी सुरक्षा योजना से मिला लाभ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बेटी के उज्ज्वल भविष्य के प्रति एक भरोसा है।

    वे बताती हैं कि आंचल के नाम पर एक लाख रुपये का बॉन्ड मिलने से उन्हें खुशी हुई है। अब उन्हें विश्वास है कि बेटी के बड़े होने पर उसकी पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए यह राशि सहायक बनेगी।

    उनका सपना है कि आंचल अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़ी हो और परिवार का नाम रोशन करे। नोनी सुरक्षा योजना ने उनके इस सपने को आर्थिक संबल प्रदान किया है।

    बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मिल रहा बढ़ावा

    नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान कर अभिभावकों को उनकी शिक्षा और आगे की जरूरतों के प्रति आश्वस्त करने में सहायक बन रही है।

    इस योजना के माध्यम से पात्र बालिकाओं के लिए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है, ताकि निर्धारित आयु पूर्ण होने पर उन्हें योजना के प्रावधानों के अनुसार सहायता प्राप्त हो सके।

    आंचल राजवाड़े को मिला लाभ इस बात का उदाहरण है कि शासन की योजनाएं बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के साथ परिवारों को उनकी शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित कर रही हैं।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    नोनी सुरक्षा योजना का लाभ मिलने पर मानती राजवाड़े ने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि उनकी बेटी आंचल को योजना का लाभ मिला है। बेटी के नाम पर एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त होने से भविष्य में उसकी पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

    मानती ने बताया कि योजना से बेटी के भविष्य को लेकर उन्हें आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है। वे चाहती हैं कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बने।

    आज मिला आर्थिक सुरक्षा का भरोसा, कल संवरेंगे आंचल के सपने

    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत मानती राजवाड़े और उनकी बेटी आंचल की कहानी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शासन की योजनाओं से मिल रहे सहयोग का उदाहरण है।

    अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कृष्णापुर की आंचल राजवाड़े के नाम पर नोनी सुरक्षा योजना के तहत एलआईसी के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है। इससे परिवार को बेटी की उच्च शिक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहायता मिलने का भरोसा मिला है।

    आंचल की कहानी दर्शाती है कि बेटियों के भविष्य के लिए आज किया गया आर्थिक प्रावधान आने वाले समय में उनकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह को आसान बना सकता है। नोनी सुरक्षा योजना से मिला यह संबल मानती राजवाड़े के लिए अपनी बेटी के सपनों को साकार होते देखने की नई उम्मीद बन गया है।

    हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से खरीद रहीं धागा और सिलाई सामग्री, घर बैठे स्वरोजगार को मिली मजबूती
    पति की मजदूरी और अपनी सिलाई से संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारियां, तीन बच्चों के पालन-पोषण में मिल रही मदद
    महतारी वंदन की राशि बनी आत्मनिर्भरता का आधार, छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता हो रही कम

    रायपुर / सिलाई का हुनर तो पहले से था, लेकिन काम को लगातार जारी रखने के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में आर्थिक परेशानियां आती थीं। अब महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने सरगुजा जिले की श्रीमती सरिता तिग्गा के इस हुनर को आजीविका का मजबूत सहारा बना दिया है। वे योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं और घर बैठे सिलाई का काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे रही हैं। पति की मजदूरी से होने वाली आय के साथ उनकी मेहनत से अर्जित अतिरिक्त आमदनी तीन बच्चों के पालन-पोषण और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।

    अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्रा कला निवासी सरिता तिग्गा की यह कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली छोटी आर्थिक सहायता भी महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को उन्होंने अपने हुनर और स्वरोजगार से जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    पति करते हैं मजदूरी, सरिता ने सिलाई को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया

    सरिता तिग्गा बताती हैं कि उनके पति श्री सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनकी परवरिश, पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की जिम्मेदारी दोनों मिलकर निभाते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    ऐसी परिस्थितियों में सरिता ने अपने सिलाई के हुनर को परिवार की आजीविका से जोड़ने का निर्णय लिया। वे घर पर ही सिलाई का काम करती हैं, जिससे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने का अवसर मिलता है।

    उनका कहना है कि पति की मजदूरी से घर का खर्च चलता है, जबकि सिलाई से मिलने वाली आय परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करती है। इस तरह वे अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की सहभागी बन रही हैं।

    महतारी वंदन के एक हजार रुपये से खरीदती हैं धागा और सिलाई सामग्री

    सरिता के लिए महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि विशेष महत्व रखती है। वे इस राशि का उपयोग सिलाई के लिए धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं।

    सरिता बताती हैं कि सिलाई का काम नियमित रूप से जारी रखने के लिए समय-समय पर सामग्री की आवश्यकता होती है। पहले सीमित पारिवारिक आय के बीच इन जरूरतों के लिए पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल होता था। अब योजना से मिलने वाली राशि के कारण सिलाई सामग्री खरीदने में सुविधा हो रही है।

    इस सहायता से वे अपने काम को लगातार जारी रख पा रही हैं। सिलाई से प्राप्त आमदनी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है।

    सरिता का अनुभव दर्शाता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग छोटे स्वरोजगार को बनाए रखने और आगे बढ़ाने में भी किया जा सकता है।

    घर की जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार, तीन बच्चों की परवरिश में मिल रहा सहयोग

    तीन बच्चों की देखभाल और घरेलू कामकाज के बीच सरिता घर पर ही सिलाई करती हैं। इससे उन्हें परिवार के साथ रहते हुए अपनी मेहनत से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

    उनका कहना है कि घर से सिलाई का काम करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आमदनी में भी योगदान दे पाती हैं।

    पति की मजदूरी और स्वयं के सिलाई कार्य से प्राप्त आय के सहारे परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि उनके इस प्रयास को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    छोटी आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास, हुनर बना आजीविका का सहारा

    सरिता तिग्गा के लिए सिलाई केवल घरेलू काम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें अपने हुनर का उपयोग कर आय अर्जित करने में सहयोग दिया है।

    वे बताती हैं कि हर महीने सहायता राशि मिलने से सिलाई सामग्री की व्यवस्था करना आसान हुआ है। इससे उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए परिवार की सीमित आय पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।

    सरिता का प्रयास यह भी दर्शाता है कि महिलाओं के पास उपलब्ध कौशल को आर्थिक सहयोग मिलने पर वह परिवार की आजीविका का उपयोगी साधन बन सकता है।

    “महतारी वंदन की राशि से सिलाई का सामान खरीदती हूं, परिवार को भी मिल रही मदद”

    सरिता तिग्गा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं। इस राशि से वे सिलाई के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदती हैं।

    उनका कहना है कि इससे सिलाई का काम जारी रखने में सुविधा होती है और वे घर पर काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं।

    सरिता के अनुसार, योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में भी सहयोग मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    महतारी वंदन योजना से मिल रहे लाभ पर खुशी व्यक्त करते हुए सरिता तिग्गा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है। इस सहायता से वे अपने सिलाई कार्य के लिए आवश्यक सामग्री खरीद पा रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।

    महतारी वंदन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम, सरिता की कहानी बनी प्रेरणा

    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सरिता तिग्गा की कहानी महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का उदाहरण है। सीमित आय वाले परिवार में तीन बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने सिलाई के हुनर को अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया है।

    महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक सहायता राशि का उपयोग वे सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं। इससे उनका काम जारी रखने में मदद मिल रही है और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग मिल रहा है।

    एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन
    मां के संघर्ष और मेहनत से बेटियों के सपनों को मिली उड़ान, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी कर रही इंजीनियरिंग की पढ़ाई
    छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना बनी सहारा, स्वरोजगार से परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

    रायपुर / पति के निधन के बाद चार बेटियों की परवरिश, घर की जिम्मेदारी और उनके बेहतर भविष्य की चिंता। आर्थिक कठिनाइयों के बीच एक मां के सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी। यह प्रेरक कहानी सरगुजा जिले की श्रीमती इंदु लता गुप्ता की है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण की सहायता से डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है और दो अन्य बेटियां भी अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखे हुए हैं।

    इंदु लता की सफलता केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, साहस और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। सक्षम योजना से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आजीविका का साधन बनने के साथ बेटियों की उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहारा साबित हुआ है।

    पति के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, बेटियों की पढ़ाई जारी रखना था सबसे बड़ा संकल्प

    इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार बेटियों की परवरिश और घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। नियमित आय का कोई साधन नहीं होने के कारण परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    इन परिस्थितियों में उन्हें सबसे अधिक चिंता बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य की होती थी। वे चाहती थीं कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई अधूरी न रह जाए। इसके लिए उन्होंने स्वयं कुछ काम शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आजीविका चलाने के साथ बेटियों की शिक्षा का खर्च भी उठा सकें।

    इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने की जानकारी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई।

    एक लाख रुपये के ऋण से खरीदीं दो भैंसें, डेयरी व्यवसाय से बदली आर्थिक स्थिति

    इंदु लता गुप्ता ने सक्षम योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि में अपनी बचत के पैसे मिलाकर उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की।

    शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाया और मेहनत के साथ डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया।

    वर्तमान में उनकी दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आय परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की पढ़ाई में सहायक बन रही है।

    इंदु लता बताती हैं कि पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब डेयरी व्यवसाय से आय का साधन उपलब्ध होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। इससे उन्हें बेटियों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं का खर्च उठाने में मदद मिल रही है।

    मां की मेहनत लाई रंग, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी इंजीनियरिंग की कर रही पढ़ाई

    इंदु लता गुप्ता के जीवन की सबसे बड़ी खुशी उनकी बेटियों की शिक्षा है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी।

    डेयरी व्यवसाय से आर्थिक संबल मिलने के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।

    एक समय बेटियों की पढ़ाई का खर्च जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। आज उन्हीं बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करते देखकर इंदु लता को अपनी मेहनत सफल होती दिखाई देती है।

    वे बताती हैं कि बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाना उनका सबसे बड़ा सपना है। वे चाहती हैं कि उनकी चारों बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें और अपने जीवन में आगे बढ़ें।

    इंदु लता का संघर्ष यह दर्शाता है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और स्वरोजगार के अवसर मिलने पर महिलाएं अपने परिवार के भविष्य को नई दिशा दे सकती हैं।

    सक्षम योजना ने दिया आर्थिक संबल, आत्मविश्वास के साथ संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारी

    इंदु लता गुप्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का माध्यम बनी है। योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया।

    कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने से व्यवसाय शुरू करने में सुविधा हुई। दूध उत्पादन से प्राप्त आय के कारण अब वे परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ बेटियों की शिक्षा में भी आर्थिक योगदान दे पा रही हैं।

    उनका कहना है कि पहले परिवार के भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब स्वयं का व्यवसाय होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अपनी मेहनत से परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।

    बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना ही इंदु लता के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य

    इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद जीवन में कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने बेटियों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।

    उनका मानना है कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना उनके बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इसी सोच के साथ उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और उससे मिलने वाली आय का उपयोग परिवार की जरूरतों तथा बेटियों की पढ़ाई में किया।

    आज एक बेटी का मेडिकल कॉलेज और दूसरी का इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। शेष दो बेटियों की शिक्षा को भी वे इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ा रही हैं।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    इंदु लता गुप्ता ने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले आर्थिक सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया। डेयरी व्यवसाय से प्राप्त आय के कारण वे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी उठा पा रही हैं।

    इंदु लता का कहना है कि ऐसी योजनाएं जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार का भविष्य बेहतर बनाने में मदद करती हैं।

    एक मां का संघर्ष, चार बेटियों के सपनों को मिला संबल

    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत इंदु लता गुप्ता की कहानी महिला आत्मनिर्भरता और बेटियों की शिक्षा का प्रेरक उदाहरण है। पति के निधन के बाद चार बेटियों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।

    छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उनके लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करने की राह खोली। दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध उत्पादन के माध्यम से उन्होंने परिवार की आजीविका को मजबूत बनाया।

    आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में और दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां भी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।

    इंदु लता की सफलता बताती है कि स्वरोजगार के लिए मिला आर्थिक सहयोग केवल एक महिला को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को संवारने का माध्यम भी बन सकता है। एक मां की मेहनत, संघर्ष और बेटियों को शिक्षित बनाने के संकल्प ने इस कहानी को विशेष बना दिया है।

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की पहल और सीएससीएस के सहयोग से खिलाड़ियों को प्रेरित करने आयोजित हुआ कार्यक्रम

    रायपुर / भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी हरलीन देओल ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की रायपुर आवासीय हॉकी अकादमी के खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सभी खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद किया और अपने खेल जीवन के अनुभव साझा किए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ी से मिलकर अकादमी के बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ की पहल पर हरलीन देओल हॉकी अकादमी आई थीं। राज्य के युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने वाली खिलाड़ी के अनुभवों से परिचित कराने तथा उन्हें अपने खेल जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करने हरलीन अकादमी पहुंची थीं।

    खिलाड़ियों को दिया सफलता का मंत्र

    हरलीन देओल ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अकादमी में उपलब्ध खेल सुविधाओं, प्रशिक्षण और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने बच्चों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन के साथ नियमित अभ्यास करने और भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए खेलने का सपना देखने के लिए प्रोत्साहित किया।

    उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, "आप मेहनत कीजिए, अपने लक्ष्य के लिए पूरी लगन से प्रयास कीजिए। भगवान भी आपकी मदद करेंगे। अपने ऊपर विश्वास रखिए और देश के लिए खेलने का सपना जरूर देखिए।"

    अपने खेल जीवन के अनुभव साझा करते हुए हरलीन देओल ने बताया कि सफलता प्राप्त करने के लिए प्रतिभा के साथ कड़ी मेहनत, धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने खिलाड़ियों को अपनी कमियों को पहचानने, उनमें सुधार करने और हर दिन पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

    मेंटर के रूप में हरलीन देओल के अनुभवों से मिली सीख

    एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से सीधे संवाद करने का अवसर युवा खिलाड़ियों के लिए विशेष महत्व रखता है। हरलीन देओल के अनुभवों से खिलाड़ियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, दबाव की परिस्थितियों में आत्मविश्वास बनाए रखने, असफलताओं से सीखने और निरंतर अपने प्रदर्शन में सुधार करने की प्रेरणा मिली।

    क्रिकेट और हॉकी अलग-अलग खेल हैं, लेकिन दोनों में सफलता के लिए अनुशासन, फिटनेस, मानसिक मजबूती, टीम भावना और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता महत्वपूर्ण है। हरलीन देओल के अनुभव ने हॉकी खिलाड़ियों को इन गुणों को अपने खेल में विकसित करने की प्रेरणा दी।

    अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से संवाद के माध्यम से खिलाड़ियों को यह समझने का अवसर मिला कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर मेहनत, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन भी आवश्यक हैं।

    दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों को भी मिला प्रोत्साहन

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग की आवासीय हॉकी अकादमी में प्रदेश के दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आए प्रतिभाशाली बच्चे भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ये खिलाड़ी अपने घर-परिवार से दूर रहकर अपनी प्रतिभा को निखारने और भविष्य में देश के लिए खेलने का सपना साकार करने की दिशा में प्रयासरत हैं।

    अकादमी में उपलब्ध प्रशिक्षण, खेल सुविधाओं और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से इन खिलाड़ियों को अपनी खेल क्षमता विकसित करने का अवसर मिल रहा है। ऐसे में हरलीन देओल जैसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से मुलाकात उनके लिए काफी प्रेरक है।

    हरलीन देओल के अनुभवों ने इन बच्चों को यह संदेश दिया कि भौगोलिक दूरी या शुरुआती संसाधनों की सीमाएं उनके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ वे भी बड़े लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने और उनमें देश के लिए खेलने की आकांक्षा को मजबूत करने में सहायक होते हैं।

    खिलाड़ियों के साथ बिताए यादगार पल

    मुलाकात और बातचीत के दौरान हरलीन देओल ने प्रत्येक खिलाड़ी के साथ व्यक्तिगत रूप से फोटो खिंचवाया और उनके साथ समय बिताया। खिलाड़ियों ने उनके साथ बातचीत की और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर प्राप्त किया। उनके साथ बिताए गए ये पल अकादमी के बच्चों के लिए यादगार बन गए।

    खेल अधिकारी और प्रशिक्षक भी रहे मौजूद

    इस अवसर पर खेल अधिकारी श्री शिवराज साहू, हॉकी प्रशिक्षक श्रीमती रश्मि तिर्की, सॉफ्टबॉल प्रशिक्षक श्री टी.एन. रेड्डी सहित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास करने, अकादमी में उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाने तथा अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रदेश और देश का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

    खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में पहल

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के प्रयासों तथा छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    आवासीय खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं के साथ-साथ सफल खिलाड़ियों के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलना उनके समग्र विकास में काफी सहायक है। ऐसे संवादात्मक कार्यक्रम युवा खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ाने, बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ तथा भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    पीडब्ल्यूडी सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने सड़कों, पुलों और भवनों का किया निरीक्षण, अधिकारियों और ठेकेदारों को समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश
    निर्माण कार्यों की होगी कड़ी मॉनिटरिंग, फील्ड पर प्रगति जांचने होंगे औचक निरीक्षण

    रायपुर / बरसात के बाद सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की पूरी तैयारी है। लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। काम की प्रगति अब केवल दफ्तरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेंगे। कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ औचक निरीक्षण से भी गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखी जाएगी। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने गरियाबंद जिले का दौरा कर सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

    सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने फिंगेश्वर विकासखंड में कोपरा-पोखरा मार्ग के 26.20 किलोमीटर लंबे मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस परियोजना में पुल-पुलियों के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। उन्होंने राजिम में नवीन मेला स्थल चौबेबांधा से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण की प्रगति भी देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली और निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    सड़क परियोजनाओं के साथ सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद में निर्माणाधीन शासकीय भवनों का भी जायजा लिया। उन्होंने व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे दो डी-टाइप आवासगृहों, जिला परिवहन कार्यालय भवन तथा 40 जीएडी आवासगृहों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    सचिव श्री बंसल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में भी पहुंचे। उन्होंने कसाबाय-पतोरा दादर मार्ग के आरडी 135 में चचंगी नाला पर निर्मित पुल एवं पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कसाबाय-सातधार मार्ग में हलफली नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।

    मैदानी निरीक्षण के बाद सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए काम में आ रही समस्याओं और बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों को गति देने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बरसात के बाद निर्माण कार्यों में तेजी लाने विभागीय अमले को सक्रियता से काम करना होगा। कार्यों की सतत निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों के मैदानी निरीक्षण से निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

    सचिव श्री बंसल ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय कार्यालय और कार्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय में स्वच्छता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री व्ही. के. भतपहरी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंतागण उपस्थित थे।

    ₹8.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 20.65 लाख ग्रामीण आवास और 26.57 लाख किसानों को सम्मान निधि का लाभ; पूर्व अग्निवीरों के लिए 36 आरक्षक पदों पर भर्ती मंजूर, आदिम जाति विकास विभाग अब कहलाएगा जनजातीय कार्य विभाग

    रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय की भावना से जुड़ी ऐतिहासिक कर्मयात्रा बताया। मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिए गए प्रमुख राष्ट्रीय निर्णयों का अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ राष्ट्रसेवा की कामना की। साथ ही केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ को मिले सहयोग के लिए आभार जताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान शुरू हुए तकनीक आधारित प्रशासन और सुशासन के प्रयोगों से देश के अन्य राज्यों को भी प्रेरणा मिली। छत्तीसगढ़ में पीएम गतिशक्ति के तहत लगभग 20 हजार गांवों में से 14 हजार गांवों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा हुआ है। राज्य में 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 और सिंगल विंडो व्यवस्था से औद्योगिक अनुमतियां सरल हुई हैं। सरकार के अनुसार, प्रदेश को ₹8.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।

    गरीब कल्याण और किसानों को आर्थिक संबल

    प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख आवास पूर्ण होने की जानकारी दी गई। स्वच्छ भारत मिशन में 36 लाख घरेलू शौचालय बने हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 39.73 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन मिले हैं। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 51.17 लाख हितग्राहियों को लगभग ₹11,877 करोड़ का निःशुल्क उपचार मिलने की जानकारी दी गई।

    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना से प्रदेश के 73 लाख परिवारों यानी करीब 1.99 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ 26.57 लाख किसानों तक पहुंचा है। सरकार के अनुसार, धान उपार्जन 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन हुआ है। किसानों को समर्थन मूल्य के माध्यम से ₹33,431 करोड़ और बोनस के रूप में ₹10,292 करोड़ का भुगतान किया गया है।

    महिलाओं, युवाओं और जनजातीय समाज पर जोर

    महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 68 लाख महिलाओं को प्रतिमाह ₹1,000 की सहायता दी जा रही है। ‘लखपति दीदी’ पहल में 14 लाख महिलाओं की उपलब्धि का उल्लेख किया गया। बिहान योजना से 32.39 लाख ग्रामीण परिवार स्व-सहायता समूहों से जुड़े हैं। खेलो इंडिया के तहत आठ जिलों के लिए ₹48 करोड़ की सहायता और 33 मिनी सेंटर स्वीकृत हुए हैं।

    जनजातीय क्षेत्रों में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 6,000 से अधिक गांवों में विकास कार्य किए जा रहे हैं। पीएम जनमन योजना से विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार से अधिक परिवारों तक आवास, सड़क और पेयजल सुविधाएं पहुंचाने की जानकारी दी गई। प्रदेश के 26 जिलों में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं।

    बस्तर में शांति और अधोसंरचना विकास का दावा

    मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए 31 मार्च 2026 को नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति की उपलब्धि का उल्लेख किया। नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र से ₹2,080 करोड़ की विशेष सहायता और नक्सल पीड़ित परिवारों तथा आत्मसमर्पित कैडरों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत होने की जानकारी दी गई।

    सरकार के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में 267 सड़कें और आठ पुल पूरे किए गए हैं। हिंसा के कारण वर्षों से बंद 421 स्कूल फिर से खोले गए हैं। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना से दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।

    सड़क, रेल, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी को गति

    राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए ₹35,766 करोड़ स्वीकृत होने और ₹18,215 करोड़ की 37 परियोजनाओं पर काम जारी रहने की जानकारी दी गई। रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे, बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव मार्ग और रायपुर-दुर्ग बायपास प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं। रेल क्षेत्र में करीब ₹54 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1.16 लाख से अधिक घरों में सौर संयंत्र स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया गया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में ₹3,46,806 करोड़ मिले, जबकि 2004 से 2014 के दशक में यह राशि ₹47,100 करोड़ थी। जिला खनिज न्यास के माध्यम से ₹17,887 करोड़ मिलने और 81 हजार से अधिक विकास कार्य किए जाने की जानकारी भी दी गई।

    राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख

    मंत्रिपरिषद ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, वन रैंक वन पेंशन और नए आपराधिक कानूनों जैसे निर्णयों का उल्लेख किया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम तथा छत्तीसगढ़ में धार्मिक और जनजातीय पर्यटन स्थलों के विकास को सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से जोड़ा गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ का रोडमैप तैयार किया है। सरकार का संकल्प विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदारी करना है।

    कैबिनेट के दो अहम फैसले

    पूर्व अग्निवीरों के लिए 36 आरक्षक पदों पर भर्ती: मंत्रिपरिषद ने गृह विभाग में उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध पूर्व अग्निवीरों के लिए 36 आरक्षक पदों पर भर्ती की अनुमति दी। इन पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए पहले ही 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान किया जा चुका है।

    विभाग का नाम बदलेगा: मंत्रिपरिषद ने शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।

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