October 24, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    करदाताओं के पैसे से हुई खरीदी का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग, परिषद के प्रस्ताव से लेकर उच्च अधिकारियों की मंजूरी तक की जांच जरूरी

    कोरबा/बांकी मोंगरा। बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में विभिन्न सामग्रियों की खरीदी को लेकर अब प्रक्रिया और नियमों के पालन से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका द्वारा अलग-अलग मदों में की गई खरीदी से पहले क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया? क्या संबंधित खरीदी के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त की गई थी? क्या नगर पालिका परिषद में विधिवत प्रस्ताव पारित किए गए थे? और जिन मामलों में उच्च अधिकारियों की अनुमति आवश्यक थी, क्या वहां नियमानुसार अनुमोदन लिया गया?

    ये ऐसे महत्वपूर्ण सवाल हैं, जिनका जवाब संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आ सकता है। नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की जिम्मेदारी है कि निकाय में होने वाले वित्तीय लेन-देन और खरीदी की प्रक्रिया लागू नियमों, स्वीकृत बजट तथा निर्धारित वित्तीय अधिकारों के अनुरूप संचालित हो।

    खरीदी से पहले नियमों का पालन हुआ या नहीं?

    नगर पालिका परिषद द्वारा कार्यालयीन उपयोग, नागरिक सुविधाओं, विकास कार्यों और अन्य आवश्यकताओं के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्रियों की खरीदी की जाती है। लेकिन सार्वजनिक धन से होने वाली खरीदी केवल आवश्यकता के आधार पर ही नहीं, बल्कि निर्धारित वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार भी होनी चाहिए।

    ऐसे में यह जांच का विषय है कि बांकी मोंगरा नगर पालिका में अब तक हुई खरीदी के दौरान संबंधित नियमों का पालन किया गया या नहीं। क्या खरीदी की आवश्यकता दर्ज की गई थी? क्या सक्षम अधिकारी से स्वीकृति प्राप्त की गई? क्या निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कोटेशन, निविदा अथवा अन्य लागू खरीद प्रक्रिया अपनाई गई? क्या सामग्री की आपूर्ति, गुणवत्ता और भुगतान से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं?

    इन सवालों का जवाब खरीदी से संबंधित फाइलों, स्वीकृति आदेशों, बिलों, भुगतान अभिलेखों और स्टॉक रजिस्टर की जांच से मिल सकता है।

    क्या परिषद से प्रस्ताव पारित कराया गया?

    नगर पालिका में होने वाले प्रत्येक खर्च के लिए परिषद का प्रस्ताव अनिवार्य है या नहीं, यह खरीदी की प्रकृति, लागू नियमों और संबंधित वित्तीय अधिकारों पर निर्भर करता है। इसलिए सभी खरीदी के मामलों में एक ही नियम लागू मानना उचित नहीं होगा।

    हालांकि, जिन मामलों में परिषद की स्वीकृति या प्रस्ताव आवश्यक है, वहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्ताव विधिवत पारित हुआ था या नहीं। यदि किसी खरीदी के लिए परिषद की मंजूरी आवश्यक थी, तो संबंधित प्रस्ताव की प्रति, बैठक की कार्यवाही और स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए।

    सवाल यह भी है कि नगर पालिका में हुई खरीदी का विवरण परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था या नहीं तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों को खर्च की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी या नहीं।

    प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की क्या है भूमिका?

    किसी कार्य या खरीदी को आगे बढ़ाने से पहले उसकी आवश्यकता, लागत, बजट में उपलब्ध राशि और सक्षम प्राधिकारी के अधिकारों की जांच महत्वपूर्ण होती है।

    प्रशासनिक स्वीकृति के माध्यम से प्रस्तावित कार्य या खरीदी की आवश्यकता को मंजूरी दी जाती है, जबकि वित्तीय स्वीकृति का संबंध निर्धारित लागत और धनराशि खर्च करने की अनुमति से होता है। हालांकि, इन स्वीकृतियों का स्वरूप और आवश्यकता संबंधित खरीदी तथा लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    बांकी मोंगरा नगर पालिका में हुई खरीदी के संबंध में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित मामलों में आवश्यक स्वीकृतियां किस अधिकारी ने दीं, स्वीकृति की तारीख क्या थी, राशि किस मद से खर्च की गई और भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

    यदि किसी मामले में आवश्यक स्वीकृति के बिना खर्च किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार उसकी जांच और जवाबदेही तय करने का प्रश्न उठ सकता है।

    क्या टैक्स और राजस्व की राशि से खरीदी की जा सकती है?

    नगर पालिका को संपत्ति कर, अन्य करों, शुल्कों, अनुदानों और विभिन्न राजस्व स्रोतों से धन प्राप्त होता है। इस राशि का उपयोग निकाय के वैध दायित्वों, नागरिक सुविधाओं और स्वीकृत विकास कार्यों सहित अन्य अनुमत उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

    लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राजस्व की राशि किसी भी वस्तु की खरीदी में मनमाने ढंग से खर्च की जा सकती है। खर्च का उद्देश्य, बजट प्रावधान, संबंधित मद में राशि की उपलब्धता, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और खरीदी के लिए लागू नियमों का पालन आवश्यक है।

    इसलिए मुख्य सवाल यह है कि बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद ने अब तक जो भी खरीदी की है, वह किस मद से की गई? क्या उस मद में पर्याप्त बजट उपलब्ध था? क्या राशि स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप खर्च की गई? और क्या प्रत्येक भुगतान के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं?

    इन बिंदुओं की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित प्रावधानों के अनुसार हुआ है या नहीं।

    उच्च अधिकारियों से अनुमोदन लिया गया या नहीं?

    कुछ मामलों में राशि, खरीदी की प्रकृति अथवा लागू नियमों के आधार पर उच्च अधिकारी या अन्य सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी आवश्यक हो सकती है। ऐसे मामलों में यह जांच जरूरी है कि संबंधित अधिकारी से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुमोदन प्राप्त किया गया था या नहीं।

    इसके लिए नगर पालिका की खरीदी फाइलों, स्वीकृति आदेशों, निविदा संबंधी दस्तावेजों, कार्यादेशों और भुगतान अभिलेखों का परीक्षण किया जाना चाहिए।

    यदि किसी खरीदी में उच्च अधिकारी की मंजूरी आवश्यक थी, तो उसका आदेश रिकॉर्ड में उपलब्ध होना चाहिए। वहीं, यदि संबंधित अधिकारी को अपने अधिकारों के तहत मंजूरी देने का अधिकार था, तो उस स्थिति में अनावश्यक रूप से उच्च स्तरीय अनुमोदन न होने को अपने आप अनियमितता नहीं माना जा सकता।

    जांच में किन दस्तावेजों को खंगालना जरूरी?

    बांकी मोंगरा नगर पालिका में खरीदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच के लिए निम्नलिखित अभिलेख महत्वपूर्ण हो सकते हैं:

    1. खरीदी से संबंधित प्रस्ताव एवं आवश्यकता का विवरण।
    2. लागू नियमों के अनुसार प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति।
    3. परिषद की बैठक की कार्यवाही और संबंधित प्रस्तावों की प्रतियां, जहां आवश्यक हों।
    4. कोटेशन, निविदा, तुलनात्मक पत्रक और चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज।
    5. सामग्री आपूर्ति के बिल, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान की जानकारी।
    6. बजट प्रावधान तथा जिस मद से राशि खर्च की गई, उसका विवरण।
    7. संबंधित अधिकारियों के स्वीकृति आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट।
    8. उच्च अधिकारियों से प्राप्त अनुमोदन, जहां ऐसा अनुमोदन अनिवार्य हो।

    इन दस्तावेजों की जांच से खरीदी की वास्तविक प्रक्रिया और वित्तीय जवाबदेही का आकलन किया जा सकता है।

    पारदर्शिता के लिए सामने आना चाहिए पूरा हिसाब

    नगर पालिका में खर्च होने वाली राशि अंततः सार्वजनिक धन का हिस्सा होती है। इसलिए नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। हालांकि, किसी विशेष खरीदी में अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

    अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद की विभिन्न खरीदी से संबंधित अभिलेखों की जांच कौन करेगा? क्या संबंधित अधिकारी खरीदी प्रक्रिया और स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट करेंगे? क्या जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक परीक्षण कराया जाएगा?

    फिलहाल, खरीदी में अनियमितता की पुष्टि करने वाले दस्तावेज सामने आए बिना किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन सार्वजनिक धन से हुई खरीदी के नियमों, स्वीकृतियों और भुगतान की पारदर्शी जांच की मांग जरूर महत्वपूर्ण है। संबंधित नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

     

    1. राजपत्र और अधिनियम में इसका क्या प्रावधान है?

    नगर पालिका निधि (Municipal Fund) का उपयोगः छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 86 और 87 के तहत, नगर पालिका द्वारा वसूले गए सभी टैक्स (संपत्ति कर, जल कर, उपभोक्ता शुल्क आदि) "नगर पालिका निधि" में जमा होते हैं। अधिनियम के अनुसार, इस निधि का उपयोग शहर की सार्वजनिक स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (कचरा उठाने हेतु ट्रैक्टर-ट्रॉली) और जल प्रदाय (वॉटर टैंकर) जैसे आवश्यक नागरिक कर्तव्यों के लिए वाहन व उपकरण खरीदने में किया जा सकता है।

    भण्डार क्रय नियम (Store Purchase Rules) की अनिवार्यताः टैक्स के पैसे से यह खरीदी करने के लिए परिषद को "छत्तीसगढ़ शासन भण्डार क्रय नियम, 2002 (यथा संशोधित 11 जुलाई 2024)" का कड़ाई से पालन करना होता है. इस राजपत्रित नियम के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली या टैंकर की कीमत लाखों में होती है, इसलिए परिषद सीधे नगद या बिना निविदा के इसे नहीं खरीद सकती। इसके लिए GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल या ई-प्रोक्योरमेंट के माध्यम से खुली निविदा (Open Tender)

    2. खरीदी के लिए राजपत्र के मुख्य नियम एवं प्रक्रिया

    टैक्स के पैसों से ट्रैक्टर-ट्रॉली या टैंकर खरीदने के लिए नगर पालिका परिषद को इन राजपत्रित चरणों से गुजरना होता है:

    1. PIC एवं परिषद की स्वीकृतिः सबसे पहले 'प्रेसिडेंट-इन-

    काउंसिल' (PIC) और नगर पालिका परिषद की सामान्य सभा में इस वाहन की आवश्यकता और टैक्स बजट से इसके भुगतान का प्रस्ताव पारित होना चाहिए।

    2. प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतिः परिषद द्वारा प्रस्ताव पारित

    होने के बाद, सक्षम प्राधिकारी (जैसे नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक या संचालक) से इसकी प्रशासनिक (Administrative Approval) और वित्तीय स्वीकृति ली जाती है।

    3. GeM पोर्टल या ई-टेंडर: स्वीकृत भण्डार क्रय नियमों के

    अनुसार, ₹2.5 लाख से अधिक की किसी भी वाहन खरीदी के लिए Government e-Marketplace (GeM) के जरिए ही पारदर्शी पारचेज ऑर्डर जारी करना होता है।

    हेतु वार्ड पार्षद के द्वारा प्रस्तुत आवेदन के संबंध में विचार।

    06. जेम पोर्टल के माध्यम से निकाय के कर्मचारियों तथा स्वच्छता दीदीयों हेतु 208 नग रैनकोट कय प्राप्त न्युनतम दर 236004.00 रू. फर्म निखिल ट्रेडिंग की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    09. जेम पोर्टल के माध्यम से निकाय के कर्मचारियों तथा स्वच्छता दीदीयों हेतु 208 नग जूता कय प्राप्त न्युनतम दर 180000.00 रू. फर्म अंजानेया सेल्स, रायपुर की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    10. जेम पोर्टल के माध्यम से 01 नग फिकल स्लज वैक्यूम एम्पीटियर मशीन कय हेतु प्राप्त न्युनतम दर 499999.00 रू. फर्म अंजानेया सेल्स, रायपुर की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    11. जेम पोर्टल के माध्यम से 01 नग फोर कटिंग मशीन कय हेतु प्राप्त न्युनतम दर 149980.00 रू. फर्म अंजानेया सेल्स, रायपुर की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    12. जेम पोर्टल के माध्यम से 34 नग आयरन बेंच कय हेतु प्राप्त न्युनतम दर 411600.00 रू. फर्म निखिल ट्रेडिंग की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    13. जेम पोर्टल के माध्यम से 01 नग हॉपर टीप्पर वाहन कय जलशाखा हेतु प्राप्त न्युनतम दर 1295000.00 रू. फर्म एम. के. इंटरप्राईजेस की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    14. जेम पोर्टल के माध्यम से 10 नग मैनुअल रिक्शा कय स्वच्छता शाखा हेतु प्राप्त न्युनतम दर 523000.00 रू. फर्म एम. के. इंटरप्राईजेस की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    15. जेम पोर्टल के माध्यम से 10 नग मैनुअल रिक्शा कय स्वच्छता शाखा हेतु प्राप्त न्युनतम दर 288000.00 रु. फर्म श्री सालासार इंटरप्राईजेस की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।

    16. विधायक निधि से वार्ड क्र 20 न.पा.प. बांकीमोंगरा में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिये छोटे भवन एवं चौपाल (चबुतरा निर्माण) कार्य, लागत राशि 8.54 लाख हेतु प्राप्त न्युनतम दर की स्वीकृति विचार एवं निर्णय।

    10 दिन से ब्रेन डेड जैसी हालत में बच्चा; परिजनों ने लगाया अमानवीय व्यवहार का आरोप, जांच के लिए बनी टीम दुर्ग। जिला अस्पताल के मदर-चाइल्ड यूनिट में प्रसव के…
    इंदिरा मार्केट में दो घंटे का निरीक्षण और सख्त चेतावनी; शहर के दूसरे कथित अतिक्रमणों पर कार्रवाई का इंतजार—बाजार अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भाजपा पार्षद भी उठा चुके हैं सवाल…

    परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग की समयसीमा पर लिखित आश्वासन की मांग; चेकपोस्ट के मुख्य गेट पर शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे बेरोजगार युवा

    दंतेवाड़ा। एनएमडीसी की L1-L2 श्रेणी की भर्ती प्रक्रिया में देरी से नाराज बेरोजगार युवाओं ने अब आंदोलन का ऐलान किया है। दंतेवाड़ा युवा बेरोजगार संघ के नेतृत्व में अभ्यर्थी 12 अक्टूबर 2026 से एनएमडीसी चेकपोस्ट के मुख्य गेट के सामने अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। युवाओं की मांग है कि प्रबंधन भर्ती की परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा लिखित रूप में बताए।
    दो साल से इंतजार, अब आंदोलन की तैयारी
    एनएमडीसी बचेली के हॉकी ग्राउंड में आयोजित बैठक में L1-L2 भर्ती के अभ्यर्थियों, बेरोजगार युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने भर्ती में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे करीब दो वर्षों से भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग को लेकर स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। युवाओं ने आरोप लगाया कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस पहल नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा।
    मौखिक नहीं, लिखित आश्वासन चाहिए
    बैठक के दौरान एनएमडीसी के उप महाप्रबंधक सौरभ कुमार को हॉकी ग्राउंड बुलाकर युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने भर्ती से जुड़े मुद्दे उठाए। अभ्यर्थियों ने मांग की कि धरना शुरू होने से पहले प्रबंधन लिखित में बताए कि L1-L2 भर्ती की परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग कब तक पूरी होगी। युवाओं का कहना है कि अब केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उन्हें भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर स्पष्ट जवाब चाहिए।
    जनप्रतिनिधियों और आदिवासी समाज से सहयोग की अपील
    आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, पक्ष-विपक्ष के नेताओं और सर्व आदिवासी समाज से सहयोग की अपील की जा रही है। युवाओं का कहना है कि पहले अलग-अलग संगठनों के बैनर तले एनएमडीसी के खिलाफ प्रदर्शन और घेराव किए जाते रहे हैं, लेकिन अब दंतेवाड़ा युवा बेरोजगार संघ के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है।
    कई बैठकें और आंदोलन के बाद भी नहीं निकला समाधान
    अभ्यर्थियों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों में भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग को लेकर कई बैठकें और आंदोलन हो चुके हैं। एनएमडीसी बचेली के कार्यपालक निदेशक (ईडी), जिला प्रशासन और एनएमडीसी मुख्यालय के अधिकारियों से भी चर्चा की गई। युवाओं का दावा है कि इन चर्चाओं के दौरान प्रक्रिया जल्द शुरू करने के आश्वासन मिले, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
    अब प्रबंधन के फैसले पर टिकी निगाहें
    युवाओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांग लंबित भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और स्थानीय बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की है। उन्होंने आंदोलन शांतिपूर्ण रखने की बात कही है। अब सवाल यह है कि क्या एनएमडीसी प्रबंधन 12 अक्टूबर से प्रस्तावित धरने से पहले भर्ती की समयसीमा पर लिखित आश्वासन देगा या युवाओं को अपनी मांगों के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करना पड़ेगा।
    प्रकाशन से पहले ध्यान दें: खबर में धरना शुरू करने की तारीख 12 अक्टूबर 2026 दी गई है। यदि यह खबर उसी दिन या उसके बाद प्रकाशित हो रही है, तो पुष्टि कर लें कि धरना शुरू हो चुका है या अभी प्रस्तावित है। इसके अनुसार शीर्षक और खबर के काल में बदलाव जरूरी होगा।

    मृणेन्द्र चौबे

    अंबागढ़ चौकी/शौर्यपथ /नगर के वार्ड क्रमांक-4 स्थित गणेश टेकरी पहाड़ी पर एक पेड़ के नीचे नरकंकाल मिलने से इलाके में हलचल मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से मिले कपड़ों, मोबाइल और चप्पलों के आधार पर मृतक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस को पहाड़ी पर पेड़ के नीचे नरकंकाल मिला। पास ही सड़े-गले कपड़े, जींस, टी-शर्ट, स्पोर्ट्स चप्पलों की एक जोड़ी और एक एंड्रॉयड मोबाइल बरामद हुआ। पेड़ पर भगवा रंग का गमछा भी लटका मिला। लंबे समय तक खुले में पड़े रहने के कारण मोबाइल खराब हो चुका है। पुलिस उसमें लगे सिम की मदद से उपलब्ध जानकारी जुटाने और पहचान तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    0 आत्महत्या या अन्य वजह, जांच के बाद होगा खुलासा

    घटनास्थल की परिस्थितियों को लेकर नगर में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग पुराने समय में फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की आशंका जता रहे हैं, जबकि अन्य किसी दूसरी घटना की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने फिलहाल किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया है। मौत की वास्तविक वजह जांच और मेडिकल परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    थाना प्रभारी अश्वनी राठौर के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर विवेचना की जा रही है। नरकंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज भेजने का निर्देश दिया।

    0 शिक्षण संस्थानों के नजदीक है पहाड़ी क्षेत्र

    गणेश टेकरी के आसपास का इलाका नगर के शैक्षणिक संस्थानों और शासकीय महाविद्यालय के नजदीक है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र में युवाओं की आवाजाही बनी रहती है। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की मांग भी उठ रही है।

    फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान नरकंकाल की पहचान, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच और मौत के कारणों का पता लगाने पर है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

    मांगलिक भवन के संचालन, 111 खाली भूखंडों के अंतरण और जलभराव के समाधान पर चर्चा; वार्डों में विकास कार्यों के स्थल परिवर्तन को भी मिली सहमति भिलाईनगर। नगर निगम भिलाई…

    मांगलिक भवन के संचालन, 111 खाली भूखंडों के अंतरण और जलभराव के समाधान पर चर्चा; वार्डों में विकास कार्यों के स्थल परिवर्तन को भी मिली सहमति

    भिलाईनगर। नगर निगम भिलाई की महापौर परिषद की बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव, जलभराव की समस्या और सड़क-नाली निर्माण सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर प्रस्तावों को सहमति दी गई। बैठक महापौर नीरज पाल की अध्यक्षता तथा निगम आयुक्त सुरुचि सिंह की उपस्थिति में हुई। इसमें मांगलिक भवन के संचालन, रिक्त आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंडों के अंतरण और विभिन्न वार्डों में विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल रहे।

    मांगलिक भवन के संचालन और संपत्ति मूल्य निर्धारण को मंजूरी

    संतोषी पारा स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सर्व समाज मांगलिक भवन को संचालन एवं संधारण के लिए 10 माह की अवधि पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भवन एवं भूमि के कर योग्य संपत्ति मूल्य निर्धारण पर भी सहमति बनी। निगम ने स्पष्ट किया कि प्रचलित दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव पर जोर

    शहर की स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए एसएलआरएम केंद्रों में कचरे का पृथक्करण और गीले कचरे से खाद तैयार करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। स्ट्रीट लाइटों के वार्षिक संचालन एवं रखरखाव तथा निगम के 52½ वार्डों में सफाई कार्य के लिए प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से सफाई कामगार उपलब्ध कराने के विषय पर भी चर्चा हुई।

    111 रिक्त भूखंडों के अंतरण के लिए निविदा का प्रस्ताव

    निगम के सातवें चरण में रिक्त 111 आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंडों के अंतरण के लिए निविदा आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इसके अलावा जलभराव, प्रदूषित जल और जल संरक्षण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आईआईटी भिलाई के साथ अनुबंध कर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराने और शासन को भेजने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

    मैदान और छठ घाट मार्ग के नामकरण पर सहमति

    बैठक में वार्ड-28 प्रेम नगर के चैता मैदान का नाम बदलकर स्वर्गीय भगवान राय स्मृति चैता मैदान रखने तथा 18 नंबर रोड से मुक्तिधाम तालाब तक के मार्ग का नाम स्वर्गीय विजय प्रकाश यादव छठ घाट मार्ग करने पर सहमति दी गई।

    वार्ड-38 सोनिया गांधी नगर में परशुराम चौक के पास प्रस्तावित डोमशेड का निर्माण स्थल बदलकर वार्ड-25 स्थित लाल पानी टंकी परिसर में करने का निर्णय लिया गया। वार्ड-44 में अधोसंरचना मद से स्वीकृत छह विकास कार्यों के स्थल परिवर्तन पर भी सहमति बनी।

    कैलाश नगर और घासीदास नगर में सड़क-नाली निर्माण

    मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत वार्ड-21 कैलाश नगर में विद्युत पोल क्रमांक 21/340 से 21/347 तक तथा वार्ड-23 घासीदास नगर के अटल आवास मार्ग पर डामरीकरण और नाली निर्माण के प्रस्तावों को सहमति दी गई।

    बैठक में महापौर परिषद के सदस्य लक्ष्मीपति राजू, सीजू एन्थोनी, संदीप निरंकारी, केशव चौबे, चंद्रशेखर गंवई, नेहा साहू और मालती ठाकुर सहित निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।

    मां दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर शहर की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना

    दुर्ग। नगर निगम परिसर स्थित मां दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हुआ। महापौर अलका बाघमार ने जनप्रतिनिधियों तथा निगम अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति में अखंड ज्योति कलश प्रज्वलित कर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान माता रानी के जयकारों से निगम परिसर भक्तिमय हो उठा।

    नवरात्र के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर को रंगोली और फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया।

    शक्ति और साधना का पर्व है नवरात्र : महापौर

    महापौर अलका बाघमार ने कहा कि नवरात्र शक्ति और साधना का पर्व है। यह पर्व सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने मां दुर्गा से दुर्ग शहर की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

    लोक कर्म प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने भी नगरवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की।
    कार्यक्रम में एमआईसी सदस्य, पार्षद, नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक आयोजन के साथ निगम परिसर में नवरात्र का उत्सवी माहौल देखने को मिला।

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी में चार नगर निगमों और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच एग्रीमेंट; हर बस में होंगे 6 कैमरे, मोबाइल एप से मिलेगी रूट की जानकारी

    बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में शहरी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव की मौजूदगी में रविवार को चारों नगर निगमों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। विभाग नवंबर 2026 से बिलासपुर और भिलाई में शुरुआती तौर पर 20-20 ई-बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

    रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में 50-50 बसें

    योजना के प्रथम चरण में रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 और कोरबा में 40 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य है। इससे चारों शहरों में सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ेंगे। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नागरिकों को मिलेगा आधुनिक परिवहन का विकल्प : अरुण साव

    नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा स्वच्छ, हरित और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ यातायात, वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, दर्शनीय स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक सुविधाजनक आवागमन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन व्यवस्था को लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाना आवश्यक है।

    हर बस में छह कैमरे, मोबाइल एप से मिलेगी रूट की जानकारी

    यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक ई-बस में छह कैमरे लगाने का प्रावधान किया गया है। मोबाइल एप के माध्यम से बसों के रूट की जानकारी उपलब्ध कराने की भी योजना है। यात्रियों के लिए मोबाइल स्कैनर से भुगतान और ऑनलाइन टिकट की सुविधा का भी उल्लेख किया गया है।

    ई-बस सेवा के संचालन के लिए चार्जिंग स्टेशन, डिपो और रखरखाव केंद्र जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।

    समय-सीमा में पूरी हों तैयारियां : सोनमणि बोरा

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने योजना के उद्देश्यों और संचालन संबंधी तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहरों में बढ़ती आबादी और परिवहन की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण जरूरी है। इसके लिए चार्जिंग व्यवस्था, डिपो, बस स्टॉप और रखरखाव केंद्रों का विकास, विभागों के बीच समन्वय और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करना महत्वपूर्ण है।

    कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज गांधी उपस्थित थे।

    महापौरों और निगम आयुक्तों ने भी लिया हिस्सा

    कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में रायपुर की महापौर मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी, कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर अलका बाघमार और बीरगांव के महापौर नंदलाल देवांगन शामिल हुए।

    इसके अलावा रायपुर नगर निगम के आयुक्त संबित मिश्रा, बिलासपुर के आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, कोरबा के आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, भिलाई की आयुक्त सुरुचि सिंह, दुर्ग की आयुक्त लीना कोसम, रिसाली की आयुक्त मोनिका वर्मा और भिलाई-चरोदा के आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत भी मौजूद रहे।

    बसों के रंग और कट-आउट का विमोचन

    कार्यक्रम के दौरान कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ चारों शहरों में संचालित होने वाली ई-बसों के रंग और कट-आउट का विमोचन किया गया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता सुनील सिंह और सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील अग्रहरि सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
    नवंबर में बिलासपुर और भिलाई से प्रस्तावित शुरुआत के साथ अब इन शहरों में ई-बस सेवा के संचालन और जरूरी आधारभूत सुविधाओं को समय पर तैयार करना महत्वपूर्ण होगा। योजना का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के साथ नागरिकों को सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।

    ‘नमो सेवा गाथा’ लाइट एंड साउंड शो में स्थानीय कलाकारों ने दिखाई राष्ट्रसेवा और विकास की झलक, छत्तीसगढ़ के सुशासन पर भी केंद्रित रही प्रस्तुति

    भिलाई। सिविक सेंटर स्थित कला मंदिर सभागार में सेवा संकल्प अभियान एवं ‘नमो सेवा गाथा’ के अंतर्गत आयोजित लाइट एंड साउंड शो में स्थानीय कलाकारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा काल और राष्ट्र के विकास के प्रति उनके समर्पण का प्रभावशाली मंचन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन और जनहित में किए जा रहे कार्यों को भी नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से दर्शाया गया।

    इस आयोजन में शामिल हुए कन्हैया सोनी ने स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि नाटकों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा यात्रा को बेहद सुंदर, प्रभावशाली और जीवंत ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन जनसेवा, राष्ट्रसेवा और विकास के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

    जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी

    कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद विजय बघेल, विधायक ललित चंद्राकर, भिलाई जिले के प्रभारी एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती, विधायक रिकेश सेन, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, दुर्ग जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक और भिलाई जिला भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन सहित भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    इसके अलावा स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों तथा जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति के माध्यम से जनसेवा, राष्ट्र के प्रति समर्पण और विकास के संदेश को प्रभावी ढंग से सामने लाने का प्रयास किया गया।

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