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March 15, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

खाना खजाना / शौर्यपथ /लॉकडाउन के बाद अनलॉक होते शहरों में चाय पोहे और जलेबी जैसे नाश्‍ते की दुकानें खोलने के भी निर्णय लि‍ए जा…
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सेहत / शौर्यपथ / हममे से अधिकतर लोग खाना खाने के बाद सौंफ खाना पसंद करते है। वैसे भी सौंफ माउथ फ्रेशनर का भी काम…
सेहत / शौर्यपथ /सुबह उठते ही कुछ ऐसे काम है जिन्हें यदि आपने कर लिया तो आपका दिन अच्छा व्यतित होना सुनिश्चित हो जाता है।…
सेहत / शौर्यपथ /अगर आपकी मम्‍मी या सासू मां मधुमेह से ग्रस्‍त हैं और हर बार की तरह इस बार भी करवा चौथ का व्रत…
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भिलाई / शौर्यपथ / कब्ज़ा एक ऐसा शब्द जो आदमी की हैसियत देख कर प्रशासन की कार्यवाही निर्भर कर्ता है . अगर कब्जाधारी इंसान म्वार्ग हो तो निगम या तो…

रायपुर/ शौर्यपथ / 

 

  मुख्यमंत्री  बघेल ने प्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद् और छत्तीसगढ़ राज्य-गीत के रचयिता डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया है। 4 नवम्बर को डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की जयंती है। मुख्यमंत्री ने डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को याद करते हुए कहा है कि डॉ. वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कवि, चिंतक, उपन्यासकार, नाटककार, सम्पादक और मंच संचालक जैसी कई भूमिकाओं में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। अंग्रेजी में भी उन्होंने अपनी रचनाएं लिखीं। अपनी ओजपूर्ण वाणी और अकाट्य तर्कों से वे किसी को भी पलभर में प्रभावित करने की क्षमता रखते थे। युवा उत्सव के समारोह में उन्होंने अपने विचारों से तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को भी गहराई तक प्रभावित किया था। ’अरपा-पइरी के धार, महानदी हे अपार......’ के रूप में उन्होंने अमर रचना दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ महतारी का वैभव एक बारगी साकार हो उठा है। यह गीत डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की पहचान और छत्तीसगढ़ का मान बन गया है। उनकी कलम से निकला यह गीत राज्य गीत के रूप में आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक छत्तीसगढ़वासियों की आत्मा का गान बन चुका है। छत्तीसगढ़ की ऐसी वंदना उनका सच्चा सपूत ही कर सकता है।

    मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि डॉ.नरेंद्र देव वर्मा ने जो भी लिखा, वह लोगों की अंतरआत्मा में उतर गया। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ के जनजीवन तथा संस्कृति का सजीव चित्रण मिलता है। उनके हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश‘ जब छत्तीसगढ़ी में अनुवाद के बाद ‘‘सोनहा बिहान‘‘ के रूप में लोगों के बीच रंगमंच के माध्यम से पहुंचा, तब इसने आम लोगों में सुनहरी सुबह के साकार होने की आशा जगा दी। सही अर्थों में वे छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे। उन्होंने ‘‘छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य का उद्विकास‘‘ विषय पर शोध किया और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह ‘अपूर्वा’, हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश’ जैसे कई ग्रंथों की रचना की। उनका लिखा ‘मोला गुरु बनई लेते छत्तीसगढ़ी प्रहसन’ अत्यंत लोकप्रिय हुआ। डॉ. वर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा-अस्मिता को बनाए रखने और यहां की संस्कृति को विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए उनका यह अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा।

रायपुर / शौर्यपथ /राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज शाम रायपुर के बूढ़ा तालाब-स्वामी विवेकानंद सरोवर का भ्रमण किया। उन्होंने बूढ़ा तालाब में नौका विहार भी किया। इस अवसर पर परिसर में रंगबिरंगी रोशनी की गई और आतिशबाजी भी की गई। राज्यपाल ने कहा कि ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब रायपुर ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव है। इस अल्प अवधि में सौंदर्यीकरण करने के पश्चात एक सुंदर स्वरूप में शहरवासियों के लिए प्रस्तुत किया गया। इसके लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, महापौर श्री एजाज ढेबर तथा नगर निगम आयुक्त श्री सौरभ कुमार बधाई के पात्र हैं। रायपुर शहर के अंदर शहरवासियों के लिए पर्यटन तथा सहपरिवार समय व्यतीत करने के लिए एक सुंदर जगह है। अभी तक छत्तीसगढ़वासी छत्तीसगढ़ से बाहर दूसरे राज्यों में पर्यटन के लिए जाते थे। मगर अब शासन के प्रयासों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में ही कई सुंदर पर्यटन स्थल विकसित हो रहे हैं। इससे हमारे प्रदेश के ही नहीं दूसरे प्रदेश के लोग भी पर्यटन के लिए आएंगे और निश्चित ही प्रदेश की राजधानी रायपुर देश में प्रथम स्थान पर सबसे खुबसूरत शहर के रूप में जाना जाएगा। राज्यपाल ने महापौर एवं जिला प्रशासन को ऐतिहासिक बूढ़ेश्वर मंदिर को विकसित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर वरिष्ठ विधायक  सत्यनारायण शर्मा, विधायक  कुलदीप जुनेजा, सभापति  प्रमोद दुबे, रायपुर नगर निगम के पार्षदगण तथा कलेक्टर  एस. भारतीदासन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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