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बिलासपुर / शौर्यपथ / तैश में आपराधिक कृत्य हो जाना और ठंडे दिमाग से षडय़ंत्र पूवर्क आपराधिक मामले को अंजाम देने के बीच बहुत अंतर है। एक षडय़ंत्र कैसे किसी मध्यमवर्गीय परिवार की जिंदगी भुचाल ले आता है और पुरा परिवार गहरे संकट में फस जाता है। इसका उदाहरण 19 अक्टुबर 2019 के दिन निराला नगर निवासी भुपेन्द्र शर्मा द्वारा की गई आत्महत्या है। मृतक जो की विद्युत मंडल का सेवा निवृत्त कर्मचारी था। असामाजिक तत्वों के चक्कर में पड़ कर अपनी बड़ी धन राशि 30 लाख रुपये से अधिक गवा बैठा था और उस पर इस बात के लिए दबाव था कि वह निराला नगर के जिस मकान में रहता है उसका भी मुख्तियार नामा उन्हीं लोगो के पक्ष में लिख दे जिन्होंने उससे छल पूवर्क 30 लाख रुपये ले लिया है। मृतक ने जिन लोगो का नाम अपने सोसाईट नोट में लिखा उन्में शैलेन्द्र सिंह, नवीन तिवारी, जयपाल पंजवानी, प्रमोद यादव और अवधेश शामिल है। असल में भुपेन्द्र शर्मा ने अपनी जान देने के पूर्व दो सोसाईट नोट लिखे थे।
मृतक का बेटा सौम्यदीप युके्रन में डॉक्टरी की पढ़ाई करता था। किन्तु पढ़ाई अधुरी छोड़ कर वापस आ गया था और गलत संगत में फस गया था। उसी के साथ अवधेश नाम का एक और व्यक्ति था सोम्यदीप की बरबादी में अवधेश का बड़ा हाथ था। एक तरफ बेटा जेल जा रहा था और दुसरी तरफ ब्याज के रुपये देनदारी के मसले में शहर के आदतन गुंडे भुपेन्द्र को अपने षडय़ंत्र में फसा चुके थे। सोम्यदीप दिपावली के वक्त घर आया और सरकंडा थाने की पुलिस ने उसे पकड़ लिया। अवधेश साहू ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराया था कि सोम्यदीप ने उसकी मां के नाम की संपत्ती फर्जी पॉवर ऑफ अर्टनी से बेच दी। ऐसी शिकायते शहर में कई होती है। किन्तु कुछ मामलों में भ्रष्ट पुलिस जांच किए बिना ही किसी को हिरासत में लेकर जेल भेज देते है। 10 दिन की जेल उसी दौरान पिता द्वारा आत्महत्या बहनों का गृहस्थ जीवन लगभग बरबाद। किन्तु व्यवस्था के सामने समाज के कथित नेता चुप रहे। सौम्यदीप ने जेल से बाहर निकलने के बाद प्रदेश के डीजीपी को शिकायत की थी। डीजीपी ने शिकायत पर जांच की जिम्मेदारी कोतवाली सीएसपी निमेश बरैया को दी। सरकंडा थाना भी उन्ही के अंतर्गत आता है। जांच में उन्होंने पाया की सौम्यदीप को जो पावर ऑफ अर्टनी मिली है उसमें हेमो देवी और सकलदेव साहू को कोई आपत्ती नही है। रजीस्ट्री के समय भी पंजीयक के कार्यालय में दोनो उपस्थित थे रजीस्ट्री 7 अगस्त 2015 को हुई थी। सकलदेव ने गवाही में हस्ताक्षर भी किया। जांच में ऐसा पाया गया की जांच अधिकारी सब इंसपेक्टर राम आश्रय यादव ने एक लंबी रकम 90 हजार लेकर बिना दस्तावेजों के जांचे सौम्यदीप को अंदर करवा दिया। इस प्रकरण में कबूतर बाजी भी जुड़ी है, और उसमें बिलासपुर के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर का नाम भी सामने आता है किन्तु उस ओर जांच नही हुई। प्रभाव शाली लोग इसी तरह बचते है। युके्रन में डॉक्टरी पढ़ाने के लिए भुपेंद्र शर्मा ने कुछ पैसा बिजली ठेकेदारों से लिया था।
बिजली विभाग में कर्मचारियों और ठेकेदारों के पास आसान रुपयों की भरमार है। यही कारण है कि ब्याज का काम बिजली विभाग से जड़ चुका है। कुल मिलाकर बढ़ते दबाव ने भुपेन्द्र शर्मा को आत्महत्या के बाध्य किया और उस मामले में भी बहुत गहनता से जांच नही हुई। बिलासपुर में जांच एजेंसिया गैर व्यवसायिक तरीके से काम करने की आदि है। इसलिए भुपेन्द्र शर्मा जैसे प्रकरण होते रहते है, और इन पर कोई नोटिस भी नही लेता। शैलेन्द्र सिंह, नवीन तिवारी, पंजवानी, प्रमोद यादव जैसे चहरे जेल जाना अपने ट्रेक रिर्काड में अर्वाड पाना मानते है। जब तक समाज ऐसे लोगो को हेय दृष्टि से नही देखेगा भुपेन्द्र शर्मा जैसे संस्काराी लोग आत्महत्या करते रहेंगे।
बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर जिले के 17 राजस्व न्यायालयों में काम ढप्प और जनरल पेशी से डेट आगे बढा दी जाती है। किन्तु यह आधा सच है ऐसा देखा जा रहा है कि ऐसे प्रकरण जो व्हीआईपी दर्जा रखते हैं न केवल सूने जा रहे हैं बल्कि सामान्य गति के मुकाबले उन्हें तेजी से निपटाया जा रहा है. और इस तरीके से असल में जिसके पक्ष में व्हीआईपी का फोन नहीं आया है उसे निपटाने की तैयारी चल रही है .
कुछ प्रकरणों पर तहसीलदार घर बैठे आदेश कर देते हैं एक तरफ बिलासपुर एसडीएम कुछ मामलों पर रोज सुनवाई पर आतुर हैं तो दूसरी ओर अपीलीय न्यायालय में ताला लटक रहा है ऐसे में जिस पक्ष के विरुद्ध आदेश होगा वह अपील करने कहां जाएगा और यही व्हीआईपी संस्कृति है सब जानते हैं कि आमतौर पर शासन अपने आदेश निर्देश जानबूझकर शुक्रवार को देते हैं जिससे शनिवार इतवार को अपीलीय न्यायालय से राहत ना मिले और व्हीआईपी संस्कृति का काम पूरा हो जाए कुछ इसी तरह का काम बिलासपुर एसडीएम कार्यालय में चल रहा है यह रोचक होगा कि वीआईपी प्रकरणों की लिस्ट पर नजर रखी जाए तब पता चलेगा कि इस प्रकरण का किस जनप्रतिनिधि ने दबाव बनाया.....( अजित कुमार की कलम से )
बिलासपुर / शौर्यपथ / एक तरफ राज्य शासन ने जिले के निजी अस्पताल कोविड-19 का इलाज किस दर पर करेंगे कि घोषणा की है। इस गाइड लाइन के जारी होने के बाद निजी चिकित्सकों ने दावा किया कि हम तो इससे कम दर पर इलाज कर रहे है, दूसरी तरफ निजी अस्पतालों से जो खबर छन के आ रही है वह यह कहती है कि अस्पताल में कोविड-19 का इलाज नही मरीज से लूट हो रही है। राज्य सरकार की सूची के अनुसार सुपर स्पेसिलटी सुविधा के आधार पर जिले के अस्पतालों को तीन श्रेणी में रखा गया है, और उसी के आधार पर प्रति मरीज प्रति दिन की दर तय की गई है। इलाज की यह व्यवस्था 6200 से लेकर 17 हजार प्रति दिन तक है। राज्य सरकार ने अस्पतालों को एनएबीएच (राष्ट्रीय प्रत्यायन अस्पतालों का बोर्ड) से मान्यता प्राप्त और गैर मान्यता प्राप्त के बीच में बांटा है, किन्तु जिले के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों को तो छोड़ दे शहर के भीतर भी कोई भी निजी अस्पताल अपने सूचना पटल पर अपने बारे में सूचनाएं नही देता।
अस्पतालों की नजर से देखे तो जिला स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल चलाने की अनुमति भी नही वह भी स्वयं को सुपर स्पेसिलटी बोलता है, गली-गली मल्टी स्पेसिलटी अस्पताल खुल गए है। शहर के भीतर एक अस्पताल में तो चौपाटी खुल गई है, और अस्पताल बन्द हो चुका है किंतु प्रोटेक्शन एक्ट के लाभ पाने के लिए अस्पताल को चलता दिखाया जाता है।
कोविड-19 ने सिटी स्कैन कर दिया मजा। कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव है या नही यह जानने के लिए तीन टेस्ट ही पर्याप्त है किंतु चिकित्सको ने सिटी स्कैन का रास्ता भी खोल दिया। जिसकी प्रचलित दर 6-7 हजार के बीच है। सिम्स में विधायक शैलेश पांडेय ने 10 लाख रुपये दिया। एसईसीएल से भी लंबी फंडिंग हुई, किन्तु मेडिकल कॉलेज में आज तारीख तक सिटी स्कैन शुरू नही हुआ,और अब लंग्स में कोरोना का प्रभाव देखने सिटी स्कैन की पर्ची काटने का नया खेल शुरू हो गया है। कुल मिलाकर आम जनता या तो कोविड से मरे या बच जाए तो आर्थिक बर्बादी से ।
बिलासपुर / शौर्यपथ / सेवा सहकारी समितियों के बड़े घोटालों में एक नाम सेवा सहकारी समिति मल्हार का भी है। वर्ष 2013 में इस समिति में 4 करोड़ 76 लाख रुपये का घपला पाया गया था। मात्र एक आरोपी जेल गया और शेष 13 आरोपी फरार हो गए किन्तु पंजीयक सहकारी समिति की जांच हुई, जांच में पांच आरोपियों के खिलाफ प्रकरण चल रहा है जिसमे से मुख्य आरोपी जो जेल यात्रा कर चुका है लगातार अनुपस्तिथि है। साथ ही समिति का कम्प्यूटर ऑपरेटर भी उपस्थित नही होता है। शेष तीन आरोपी जांच कार्य मे अपना जवाब प्रस्तुत करते है, पूरा मामला मल्हार क्षेत्र के एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की शह पर हुआ था, जिसे इस चुनाव में जनता ने नकार दिया। सहकारी समितियों की जांच तथा पंजीयक की जांच के तरीके अलग-अलग है और दोनों जांच को एक दूसरे से कोई लेना देना नही है, इस बात का लाभ आरोपियों को मिल जाता है। (फोटो धान की बोरी)
बिलासपुर / शौर्यपथ / एक तरफ जिला प्रशासन सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बीपीएल को दो माह का राशन एक साथ दे रहा है और दूसरी ओर सरकार की योजना को बिलासपुर खाद्य नियंत्रक कार्यालय स्वयं ही पलीता लगा रहा है। विभागीय लोगों पर ग्रामीणों का भरोसा उठ गया है इसी का परिणाम है कि खाड़ा में चोरी का माल महिला स्व सहायता समूह ने पकड़ा और पुलिस के हवाले किया। पूरे मामले खाद्य नियंत्रक कार्यालय कही नजर नहीं आया। चावल तस्करी का पूरा मामला इन दिनों जिले में सुनियोजित तस्करी की तर्ज पर चल रहा है। यहां भी जिस चावल का घपला होना था वह 3 सितंबर को लाया जा चुका था। ग्रामीणों की माने तो चावल तस्करी में जिस ट्रेक्टर का उपयोग हो रहा है वह कांग्रेसी नेता रोशन जायसवाल का है। किंतु ट्रेक्टर पर जो नम्बर दर्ज है उसका मालिक एक आदिवासी है। कुल मिलाकर पीडीएस के क्षेत्र में तस्करों का बड़ा गिरोह काम कर रहा है जिसकी जड़े राइस मिल से होते हुए रेडी टू इट तक पहुचती है। इस प्रकरण में भी खाद्य निरीक्षक पति पत्नी दीवान एक विधानसभा में नियुक्त है और रात में तहसीलदार के बुलाने पर भी नही आये। पुलिस ने कुछ लोंगो को हिरासत में लेकर कोर्ट प्रस्तुत किया। खाद्य नियंत्रक ने बताया कि मामला अभी मेरे तक नही आया है।
बिलासपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य की कुल वर्ग किमी क्षेत्र पर में से बड़े क्षेत्र में कोयले को भंडार है, पानी है और जंगल है, इसलिए छत्तीसगढ़ में पिछले चार दशकों से कोयला खनन की गतिविधियां सतत जारी है। साथ ही विधुत उत्पादन कंपनियों ने भी अपनी इकाइयां स्थापित की। इनमें अब तक केंद्र एवं राज्य सरकार की मुख्य थी। किन्तु अब बदले हुए नियम के कारण कोल सेक्टर का पूर्णतः निजीकरण हो जाएगा। एसे में छत्तीसगढ़ के जंगल और किसान दोनों सीधे प्रभावित होंगे। किन्तु उदासीन जनप्रतिनिधित्व और जागरूकता की कमी के कारण छत्तीसगढ़ में प्रकृतिक संसाधनों की लूट खसोट को रोकना कठिन होगा और बड़ी शक्तिशाली निजी कंपनियों के सामने जनता लूटने के लिए मजबूर होगी। इस सब के बावजूद राज्य के भीतर राजनैतिक दल अथवा श्रमिक संगठन में से कोई भी आज आवाज उठाने तैयार नही है। भारत मे कुल सेक्टर ने निजीकरण भी देखा राष्ट्रीकरण भी देखा और फिर से निजीकरण को भी देखेगा। 2013 में यूपीए जिसका नेतृत्व कांग्रेस के पास था ने पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 पारित हुआ । यह एक ऐसा कानून है जो किसान के पक्ष में है और पंचायत को मजबूत करता है। इसके अतिरिक्त देश में भूमि अधिग्रहण के 13 और कानून है जो सड़क, नहर, रेल, टावर, टावर लाइन लगाने के लिए उपयोग में लाये जाते है। इन सबके के साथ 1957 के कानून कोल बियरिंग एरिया अधिग्रहण एयर विकास अधिनियम पर चर्चा जरूरी है जो कि छत्तीसगढ़ में कोई नही करता। विकास अधोसंरचना निर्माण जरूरी है, पर सहभागिता और पारदर्शिता के साथ। साथ मे मानवतावाद जिसमे मानववाद के साथ जिसमे पशुपक्षी जल चर भी जुड़े। तभी सच्चे अर्थों में जल, जंगल और जमीन का सही उपयोग होगा। 2013 का कानून 1957 के कानून को समाप्त नही करता अब सवाल यह है कि 1957 का कानून केंद्र सरकार की कंपनी के हित में भूमि अधिग्रहण के लिए था अब इसी कानून से निजी कंपनियों के लिए जमीन का अधिग्रहण होगा। जानकारी यह कहती है कि छत्तीसगढ़ में 40 कोल ब्लॉक के लिए 60000 हेक्टर अथवा एक लाख 50 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण होगा, और छत्तीसगढ़ के 150 आदिवासी बाहुल्य गांव सीधे प्रभावित होंगे। इतनी बड़ी विप्पलवपारी योजना के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ का गठन का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
बिलासपुर / शौर्यपथ / स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन ने कोविड मरीजों को परेशान कर दिया है, और एक मरीज अपने ही घर पर रह कर डॉक्टर से कंस्लटेंसीय का 10 हजार रुपये 10 दिन में चुकता है। विभाग के दिशा निर्देश के मुताबिक डॉक्टर की योग्यता एमडी मेडिसिन आईसीयू होना चाहिए। इस खेल को इस तरह समझे कि यदि व्यक्ति का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया जाता है और वह होम आइसोलेशन का विकल्प चुनता है तो उसे निगेटिव रिपोर्ट आने तक जिस डॉक्टर के निर्देशन में होम आइसोलेट होना है उसकी पैकेज फीस 10 हजार रुपये है। बिलासपुर में कोरोना पॉजिटिव की संख्या रोज़ बढ़ रही है और अस्पतालों में बिस्तर खाली नही है। तब होम आइसोलेशन के अलावा कोई विकल्प नही है। प्रभावित व्यक्ति कही से 10 हजार की फीस डॉक्टर को देगा बदले में उसे इलाज क्या मिलेगा यह किसी को नही पता। ठीक होने के पूर्व एक बार टेस्ट कराएगा, टेस्ट का खर्चा 5 हजार रुपये है। जिसका सीधा अर्थ है की एक परिवार के ऊपर 15 हजार का अतिरिक्त बोझ है, सरकारी अस्पतालों में अब जगह नही है। यदि मरीज निजी अस्पताल में भर्ती होता है तो 30 से 40 हजार रुपये एडवांस जमा होने पर भी कोई गारेंटी नहीं है। ऐसे में एक सामान्य परिवार के लिए कोरोना पॉजिटिव प्रकरण उसकी आर्थिक व्यवस्था को चौपट करने वाली बीमारी है। पिछले 5 माह में बीमा कंपनियों ने कोविड-19 की मनचाही पॉलिसी बेची है किंतु कोई भी बीमा पॉलिसी होम आइसोलेशन में खर्च हुई रकम का भुगतान नही करती। ऐसे में बीमा पॉलिसी धारक स्वयं को ठगा हुआ पाते है। एक तरफ कोविड ने आर्थिक व्यवस्था को ज़ीरो पर ला दिया है तो दूसरी ओर कोविड-19 की बीमारी समाज के एक वर्ग विशेष के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया बन कर आई है। अब स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी होम आइसोलेशन का टेग भी घर पर लगा कर नही जाते।
बिलासपुर / शौर्यपथ / उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर कलेक्टर बिलासपुर द्वारा दिनांक 19 अगस्त एवं 20 अगस्त को जिले के टॉप 20 यूरिया विक्रेताओं के जांच प्रतिवेदन एवं उर्वरक निरीक्षक वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी विकासखंड तखतपुर ढ्ढस्नरूस् ढ्ढष्ठ- 330296 के अनुशंसा के आधार पर मेसर्स सेवा सहकारी समिति, कुवां वि.खं. तखतपुर जिला बिलासपुर (छ.ग.) को उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लंघन एवं अनियमितता बरतने का प्रथम दृष्टिया दोषी पाये जाये के फलस्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कारण बताओ नोटिस का जवाब समाधानकारक नहीं पाये जाने के कारण तथा उर्वरक आदेश 1985 का खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लघन एवं अनियमितता पाये जाने के दोषी होने के फलस्वरूप एतद् द्वारा उर्वरक आदेश 1985 के खण्ड 26 एवं 26ए में प्रदत उर्वरक अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करते हुए खण्ड 31 के तहत मेसर्स सेवा सहकारी समिति कुवां विकासखंड तखतपुर का उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र क्रमांक 2628/682 वैधता दिनांक 25 मार्च 2021 तक निलंबन किया जाता है। निलंबन अवधि में उर्वरक व्यवसाय पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगाा।
इसी प्रकार उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर कलेक्टर बिलासपुर द्वारा दिनांक 19 अगस्त एवं 20 अगस्त को जिले के टॉप 20 यूरिया विक्रेताओं के जांच प्रतिवेदन एवं उर्वरक निरीक्षक विकासखंड बिल्हा के अनुशंसा के आधार पर मेसर्स बीज उत्पादक सहकारी समिति, हरदी विकासखंड बिल्हा ढ्ढस्नरूस् ढ्ढष्ठ- 1108379 जिला बिलासपुर (छ.ग.) को उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लंघन एवं अनियमितता बरतने का प्रथम दृष्टिया दोषी पाये जाये के फलस्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कारण बताओ नोटिस का जवाब समाधानकारक नहीं पाये जाने के कारण तथा उर्वरक आदेश 1985 का खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लघन एवं अनियमितता पाये जाने के दोषी होने के फलस्वरूप एतद् द्वारा उर्वरक आदेश 1985 के खण्ड 26 एवं 26 ए में प्रदत उर्वरक अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करते हुए खण्ड 31 के तहत मेसर्स बीज उत्पादक सहकारी समिति हरदी विकासखंड बिल्हा का उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र क्रमांक 2938/938 वैधता दिनांक 10 मई 2021 तक निलंबन किया जाता है। निलंबन अवधि में उर्वरक व्यवसाय पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगाा।
इसी प्रकार उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर कलेक्टर बिलासपुर द्वारा दिनांक 19 अगस्त एवं 20 अगस्त को जिले के टॉप 20 यूरिया विक्रेताओं के जांच प्रतिवेदन एवं उर्वरक निरीक्षक वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी तखतपुर के अनुशंसा के आधार पर मेसर्स अंसारी खाद भंडार मेन रोड तखतपुर, वि.खं. तखतपुर ढ्ढस्नरूस् ढ्ढष्ठ- 324483 जिला बिलासपुर (छ.ग.) को उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लंघन एवं अनियमितता बरतने का प्रथम दृष्टिया दोषी पाये जाये के फलस्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कारण बताओ नोटिस का जवाब समाधानकारक नहीं पाये जाने के कारण तथा उर्वरक आदेश 1985 का खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लघन एवं अनियमितता पाये जाने के दोषी होने के फलस्वरूप एतद् द्वारा उर्वरक आदेश 1985 के खण्ड 26 एवं 26ए में प्रदत उर्वरक अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करते हुए खण्ड 31 के तहत मेसर्स अंसारी खाद भंडार मेनरोड तखतपुर विकासखंड तखतपुर का उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र क्रमांक 718/53 वैधता दिनांक 9 अप्रैल 2025 तक निलंबन किया जाता है। निलंबन अवधि में उर्वरक व्यवसाय पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगाा।
बिलासपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के गृह, जेल, लोक निर्माण विभाग तथा सहकारिता मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये अस्पतालों में बेड एवं वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाने तथा होम आइसोलेशन की अच्छी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
मंत्री साहू ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पतालों में मरीजों की दवाईयों के अलावा भोजन, नाश्ता की अच्छी व्यवस्था रखी जाये। इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिये। उन्होंने प्रतिदिन कोरोना जांच के लिये ज्यादा से ज्यादा सैम्पल लेने का निर्देश दिया। उन्होंने सिम्स के अलावा अपोलो तथा अन्य प्राइवेट अस्पताल के संचालकों की बैठक लेकर उन्हें कोरोना मरीजों के इलाज के लिये बेहतर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये जायें ताकि मरीजों को रायपुर रेफर न करना पड़े।
प्रभारी मंत्री ने अस्पतालों में उपलब्ध वेंटिलेटर, बेड व अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि जिला अस्पताल में 40 तथा निजी अस्पतालों में 30 वेंटिलेटर अभी उपलब्ध हैं। अन्य प्राइवेट अस्पतालों से बात चल रही है जिससे वेंटिलेटर की संख्या बढ़कर 96 हो जायेगी। श्री साहू ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को कोविड अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने कहा ताकि वहां की व्यवस्था निरंतर अच्छी हो सके।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
